अमेरिकी सदन ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास किया

अमेरिका में प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ) ने रूस और ईरान के ऊर्जा क्षेत्र , अधिकारियों और टैंकरों के “शैडो फ्लीट” (गुप्त बेड़े) को निशाना बनाने वाला एक बड़ा प्रतिबंध बिल पास किया है। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं, जिसमें भारत भी शामिल है।

‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026’ को 16 सितंबर को हाउस में 262-159 वोटों से पास किया गया और अब इसे ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। सीनेट पहले ही 86-11 वोटों से इस कानून को मंज़ूरी दे चुकी है।

यह कानून खुद भारतीय सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं लगाता है। इसके बजाय, यह राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों या मॉस्को को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।

हाउस में हुए वोट में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सदस्य ने बिल का समर्थन किया, जबकि सात रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट ने इसके खिलाफ वोट दिया।

यह उपाय ईरान पर प्रतिबंधों को भी बढ़ाता है और रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में शामिल जहाजों को भी निशाना बनाता है। इसका पास होना यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में कांग्रेस का एक अहम कदम है।

डेमोक्रेटिक विरोध मुख्य रूप से ट्रंप को दिए गए बढ़े हुए टैरिफ अधिकारों पर केंद्रित था, जबकि कई डेमोक्रेट रूस के खिलाफ कड़े उपायों का समर्थन भी करते थे।

सदन के अल्पसंख्यक नेता हकीम जेफ़रीज़ ने अपने ‘ना ‘ वाले वोट के बारे में बताते हुए कहा, “अमेरिका में ज़िंदगी बहुत महंगी है। आखिर यह कांग्रेस या ‘पीपल्स हाउस’ (हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स) इस राष्ट्रपति को दुनिया पर और टैरिफ लगाने की ऐसी बेरोकटोक ताकत क्यों देगा, जिसका अमेरिकी लोगों पर बुरा आर्थिक असर पड़ेगा?” “मैं ऐसा नहीं कर सकता।”

सदन में विदेश मामलों की कमेटी के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया, क्योंकि इसमें ट्रंप को टैरिफ लगाने की ताकत दी गई थी।

श्री मीक्स ने हाउस में कहा, “मैं आपको झूठी उम्मीद नहीं देना चाहता। मैं आपको सच्ची उम्मीद देना चाहता हूँ।”

इस कानून की वकालत दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने की थी, जिन्होंने रूस के खिलाफ़ कड़े कदम उठाने के लिए डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर दोनों पार्टियों का समर्थन जुटाया था। ग्राहम का जुलाई में 71 साल की उम्र में अचानक निधन हो गया था।

टैरिफ़ से जुड़ी ताकतों के दायरे और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत में ज़्यादा लचीलापन रखने की ट्रंप की पसंद को लेकर चिंताओं के कारण यह बिल महीनों तक अटका रहा। ग्राहम ने अपनी मौत से कुछ समय पहले, जुलाई में व्हाइट हाउस के साथ एक अहम कामयाबी की घोषणा की थी।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने हाउस में मतदान से पहले इस कानून का स्वागत करते हुए कहा कि युद्ध जारी रहने के कारण और कड़े प्रतिबंधों की ज़रूरत है। “यह ज़रूरी है कि युद्ध के जवाब में लगाए जाने वाले प्रतिबंध कड़े हों।”

उन्होंने आगे कहा, “यह दबाव कम करने का समय नहीं है। अब ऐसा सब कुछ करने का समय है जिससे यह पक्का हो सके कि मज़बूती के ज़रिए कूटनीति सफल हो।”

इस कानून के समर्थकों का कहना है कि इससे रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और यूक्रेन के लिए अमेरिका का समर्थन मज़बूत होगा, खासकर ऐसे समय में जब कीव को अपने बुनियादी ढांचे पर लगातार हमलों और हवाई रक्षा प्रणाली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कानून को आगे बढ़ाने का समर्थन करने वाले डेमोक्रेटिक सांसदों में से एक, डैन गोल्डमैन ने कहा कि कांग्रेस को मॉस्को पर दबाव बनाए रखना चाहिए।

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“लोकतांत्रिक यूक्रेन की एक तानाशाही रूस के ख़िलाफ़ युद्ध में जीत पक्का करने के लिए हर संभव कोशिश की जानी चाहिए।”

बिल के लिए अपना समर्थन बताते हुए श्री गोल्डमैन ने रूस के प्रति ट्रंप के रवैये की भी आलोचना की। श्री गोल्डमैन ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप के पहले महाभियोग में मुख्य वकील के तौर पर, मैं व्लादिमीर पुतिन के प्रति उनके बेतुके और समझ से परे लगाव से अच्छी तरह वाकिफ़ हूँ, और मुझे अच्छी तरह पता है कि राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लागू करने के लिए लगभग कुछ नहीं किया।” “फिर भी, यह उस बिल का विरोध करने की वजह नहीं हो सकती जो उनसे ठीक यही काम करने की मांग करता है।”

यूक्रेन रूस के अंदरूनी इलाकों में मौजूद ठिकानों, जिनमें देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था से जुडी बुनियादी सुविधायें भी शामिल हैं, पर हमला करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा रहा है। इस लड़ाई की वजह से रूस की तेल से होने वाली कमाई पर भी दबाव बना हुआ है, जिसे कम करने के लिए वॉशिंगटन ने प्रतिबंध लगाए हैं।

यूक्रेन के समर्थन में काम करने वाले लॉबिंग ग्रुप ‘राज़ोम फॉर यूक्रेन’ के एडवोकेसी डायरेक्टर डैनियल बाल्सन ने कहा, “यह बिल एक साफ़ संदेश देता है: जब तक पुतिन यूक्रेन को तकलीफ़ पहुँचाते रहेंगे, कांग्रेस पुतिन पर कार्रवाई करती रहेगी।”

श्री बाल्सन ने कहा कि इस बिल में शामिल उपाय पुतिन पर वहाँ चोट करेंगे जहाँ उन्हें “सबसे ज़्यादा तकलीफ़ होगी।” बाल्सन ने आगे कहा, “ये उपाय उनकी युद्ध मशीन की जड़ पर प्रहार करेंगे, उनकी अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करेंगे और उन लोगों को निशाना बनाएँगे जो रूसी ऊर्जा आयात करके क्रेमलिन को फ़ंडिंग देते रहते हैं।

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भारत पर 100% टैरिफ बिल पर अमेरिकी संसद में वोटिंग:रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर ट्रम्प लगा सकेंगे भारी शुल्क; सीनेट से पास हो चुका

अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में आज उस बिल पर अंतिम वोटिंग होगी, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक एक्सट्रा टैरिफ लग सकता है। इसका असर भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ सकता है। हालांकि, इस वोटिंग का मतलब भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लगना नहीं है। बिल कानून बना तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ऐसा टैरिफ लगाने की कानूनी शक्ति मिल जाएगी। मंगलवार को हाउस ने 214-211 वोट से बिल को अंतिम वोटिंग के लिए आगे बढ़ाया था। इससे पहले अमेरिकी सीनेट अगस्त में इसे 86-11 वोट से पास कर चुकी है। यह बिल कानून बना तो भारत पर असर पहली स्थिति: भारत रूस से तेल खरीदता रहे अमेरिका के 100% टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ सकता है। इससे भारतीय सामान अमेरिका में दोगुना महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ता विकल्प ढूंढेंगे जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, चीन। नतीजतन भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद, केमिकल्स आदि के ऑर्डर घट जाएंगे। दूसरी स्थिति: भारत रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदे तो रूस से आने वाले तेल पर प्रतिबंध या टैरिफ का दबाव बढ़ता है, तो भारत को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा। यह महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। रूस के रक्षा क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगेगा बिल का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। अगर अमेरिकी संसद का निचला सदन इसे मंजूरी दे देता है, तो बिल व्हाइट हाउस जाएगा। यहां राष्ट्रपति ट्रम्प के साइन करते ही यह कानून बन जाएगा। इस बिल में रूस के तेल और रक्षा से जुड़े कारोबार पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। साथ ही रूस के उन टैंकरों पर भी कार्रवाई हो सकती है जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचते हुए दूसरे देशों तक रूसी तेल पहुंचाते हैं। इन टैंकरों के नेटवर्क को रूस का ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। अमेरिका पहले भी रूस पर ऐसे प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर चुका है। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और दुनिया में तेल की कमी का डर बढ़ गया। इसके बाद अमेरिकी सरकार को रूस के तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए लगी पाबंदियों में छूट देनी पड़ी थी। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा अगर यह कानून बन जाता है तो 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिल जाएगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका से पैसा निकालने लगे दुनिया के बड़े निवेशक: 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बढ़ी चिंता, सोना खरीद रहे, चीन में निवेश बढ़ा रहे अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है। इसके साथ ब्याज दरें, टैरिफ और दूसरे देशों पर लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंध भी बढ़ रहे हैं। इससे दुनिया के कुछ निवेशक अब सोच रहे हैं कि अपना पैसा अमेरिका के अलावा कहां लगाया जाए। पूरी खबर पढ़ें…

Stock in Focus: डिफेंस कंपनी की HALE ड्रोन के लिए Pratt & Whitney से पार्टनरशिप, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: दिग्गज मेटल फोर्जिंग और डिफेंस कंपनी Bharat Forge ने एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में एक अहम सहयोग किया है। कंपनी अब RTX की Pratt & Whitney Canada के साथ मिलकर काम करेगी। दोनों कंपनियां DRDO के HALE UAV प्रोग्राम में टर्बोप्रॉप इंजन के इस्तेमाल की संभावना तलाशेंगी।

Bharat Forge ने मंगलवार यानी 15 सितंबर को इसकी जानकारी दी। इस प्रोग्राम का मकसद भारत के अगली पीढ़ी के HALE UAV को तैयार करना है। इसके लिए इंजन और ड्रोन के बीच तालमेल की जांच की जाएगी।

इंजन की क्षमता और फिटिंग की होगी जांच

इस सहयोग में सबसे पहले यह देखा जाएगा कि Pratt & Whitney Canada का एडवांस्ड टर्बोप्रॉप इंजन HALE UAV के लिए कितना सही है। इंजन की क्षमता और प्रदर्शन की भी जांच होगी। इसके साथ ही ड्रोन में इंजन लगाने के लिए क्या बदलाव करने होंगे, यह भी देखा जाएगा।

Pratt & Whitney Canada इंजन की परफॉर्मेंस और इंस्टॉलेशन रिक्वायरमेंट्स का आकलन करेगी। वहीं, Bharat Forge इंजन को UAV के एयरफ्रेम के साथ जोड़ने का काम संभालेगी।

Bharat Forge की जिम्मेदारी क्या होगी?

Bharat Forge के हिस्से में इंजन की इंस्टॉलेशन डिजाइन और सिस्टम इंटरफेस से जुड़े काम आएंगे। इसके लिए कंपनी अपनी इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस सिस्टम की क्षमता का इस्तेमाल करेगी।

कंपनी के मुताबिक, यह सहयोग भारत में स्वदेशी ड्रोन और दूसरे अनमैन्ड एरियल सिस्टम डेवलप करने की कोशिशों को आगे बढ़ाएगा। यह सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के मुताबिक है।

Bharat Forge ने क्या कहा?

Bharat Forge के वाइस चेयरमैन और ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी ने कहा, ‘Pratt & Whitney की प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी और Bharat Forge की इंजीनियरिंग व सिस्टम इंटीग्रेशन क्षमता को साथ लाकर एक बेहतर HALE प्लेटफॉर्म तैयार करने में मदद मिलेगी। इससे भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता और रक्षा तैयारियों को मजबूती मिल सकती है।’

Pratt & Whitney ने क्या कहा?

Pratt & Whitney के वाइस प्रेसिडेंट और इंडिया कंट्री हेड आशीष सराफ ने कहा ने कहा कि Pratt & Whitney Canada के टर्बोप्रॉप इंजन कठिन परिस्थितियों में अपनी विश्वसनीयता साबित कर चुके हैं। उनके मुताबिक, भारत के HALE प्रोग्राम के लिए ऐसी ही क्षमता की जरूरत है।

क्या काम आते हैं HALE UAV?

HALE UAV ऐसे ड्रोन होते हैं जो काफी ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ सकते हैं। इनका इस्तेमाल निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जाता है। इनके जरिए जमीन और समुद्री इलाकों पर सर्विलांस और इंटेलिजेंस जैसे काम किए जा सकते हैं। रक्षा क्षेत्र में ऐसे ड्रोन लंबे समय तक किसी इलाके पर नजर रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

मंगलवार को Bharat Forge का शेयर BSE पर ₹1,874 पर बंद हुआ। शेयर में ₹66 यानी 3.40% की गिरावट रही।

Stock in Focus: BHEL ने वंदे भारत ट्रेन के लिए रेल कंपनी से मिलाया हाथ, 35 साल तक मेंटेनेंस का रहेगा काम

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पुतिन के आने से पहले रूसी सैन्य विमान भारत पहुंचे:रूसी राष्ट्रपति की गाड़ियों समेत सैन्य अधिकारी आए, नोएडा एयरपोर्ट पर लैंडिंग

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से पहले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रूस के 3 सैन्य विमान उतरे हैं। इनमें रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान IL-76 भी शामिल है। विमानों से रूसी सैन्य अधिकारी भारत पहुंचे हैं। इसी के साथ राष्ट्रपति पुतिन के काफिले की गाड़ियां भी भारत लाई गई हैं। तीनों विमान मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे नोएडा एयरपोर्ट के रनवे पर उतरे थे। बुधवार को भी तीनों विमान एयरपोर्ट पर खड़े रहे। एयरपोर्ट की सुरक्षा टीम के साथ रूसी टीम भी विमानों और सुरक्षा इंतजामों पर नजर रख रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहली बार किसी विदेशी विमान ने लैंडिंग की है। इससे पहले विदेशी सैन्य और वीवीआईपी विमानों के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया जाता रहा है। तैयारियों का जायजा लेने पहुंची टीम किसी बड़े विदेशी नेता के दौरे से पहले उसकी एडवांस टीम एयरपोर्ट, सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी मूवमेंट से जुड़ी तैयारियों का जायजा लेती है। इसी वजह से रूसी टीम भारत आई है। पुतिन का विमान भी नोएडा एयरपोर्ट पर ही उतरेगा या नहीं, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों में इसकी संभावना जताई गई है। IL-76 क्या है? IL-76 रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, सैन्य सामान और दूसरे भारी उपकरणों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए किया जाता है। इस तरह के विमान किसी बड़े सैन्य या वीवीआईपी दौरे से पहले जरूरी सामान और अधिकारियों को पहुंचाने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। नोएडा एयरपोर्ट पर पहुंची रूसी टीम भी पुतिन के दौरे से पहले सुरक्षा और दूसरी व्यवस्थाओं की तैयारी कर रही है। पुतिन की मोदी से अहम बैठक पुतिन शुक्रवार को भारत पहुंचेंगे। BRICS समिट से पहले उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। दोनों नेताओं की बातचीत में रक्षा, Su-57 फाइटर जेट, S-400, रूसी तेल, परमाणु ऊर्जा और रुपये-रूबल में कारोबार जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। रक्षा क्षेत्र में सबसे ज्यादा नजर रूस के Su-57 5th जेनरेशन फाइटर के प्रस्ताव पर है। रूस भारत को यह विमान बेचने के साथ भारत में इसके उत्पादन और तकनीकी सहयोग का प्रस्ताव दे रहा है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… रूस से पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 ले सकता है भारत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। इस दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग से जुड़े दो बड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

भारत में बनाओ, दुनिया भर में बेचो! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी कंपनियों को दिया बड़ा ऑफर, GIFT City का भी जिक्र, समझिए पूरी तैयारी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्लोबल निवेशकों और कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग बेस के साथ-साथ टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेंटर स्टैबलिश करने का ओपन ऑफर दिया है। अमेरिका की छह दिन की यात्रा पर गईं वित्त मंत्री ने शिकागो में टॉप इन्वेस्टर्स और बिजनेस लीडर के साथ एक हाई लेवल बिजनेस राउंडटेबल में यह बात कही। उन्होंने ग्लोबल पार्टनर्स से अपील की कि वे भारत की विशाल प्रतिभा और अवसरों का फायदा उठाते हुए देश में कोडेवलपमेंट और कोप्रोडक्शन करें। इससे सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रोडक्ट्स और कैपेसिटी को डेवलप करें।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक शिकागो में भारत के महावाणिज्य दूतावास द्वारा यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम के सहयोग से आयोजित इस बैठक में वित्त मंत्री ने भारत की व्यापक आर्थिक वृद्धि, देश में चल रहे रिफॉर्म्स की स्पीड और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट को लेकर डिटेल में बात की है।

भारत को सिर्फ एक बाजार नहीं, ग्लोबल प्लेटफॉर्म समझें

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत में निवेश का अवसर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह अपने विशाल पैमाने, विकास दर, इंजीनियरिंग प्रतिभा, आधुनिक बुनियादी ढांचे और पिछले एक दशक में हुए सुधारों से काफी व्यापक इंपैक्ट रखता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से आग्रह किया कि वे भारत को सिर्फ एक कंज्यूमर मार्केट के रूप में न देखें बल्कि इसे दुनिया के लिए मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने एक मजबूत प्लेटफॉर्म के रूप में देखें।

इस बैठक का मैं एजेंडा भारत में निर्माण करें — भारत के लिए और दुनिया के लिए (Manufacture in India — for India and for the world) था। इसमें एआई, डिजिटल, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंफ्रास्ट्रक्चर, फूड प्रोसेसिंग, डिफेंस और हाई एंड टेक्नोलॉजी में अवसरों पर चर्चा हुई।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और AI में नए मौके

वित्त मंत्री ने बताया कि भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे यूपीआई, डिजिलॉकर, ओएनडीसी और इंडिया स्टैक ने आबादी के स्तर पर कई बड़े और सफल प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं। उन्होंने कहा कि अब अगला बड़ा अवसर एआई, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे हाई वैल्लूर बिजनेस तैयार करने में है। भारत में बनाए गए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स तेजी से ग्लोबल इनोवेशन के सेंटर बनते जा रहे हैं।

गिफ्ट सिटी तेजी से बन रहा इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर

पीटीआई के मुताबिक वित्त मंत्री ने गुजरात की गिफ्ट सिटी (GIFT City) का खास जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर के रूप में तेजी से उभर रहा है। जून 2026 तक गिफ्ट सिटी में 1250 से अधिक रजिस्टर्ड संस्थाएं काम कर रही हैं। सीतारमण ने बताया कि गिफ्ट सिटी बैंकिंग, फंड मैनेजमेंट, रीइंश्योरेंस, एयरक्राफ्ट एंड शिप लीजिंग, सस्टेनेबल फाइनेंस और दूसरी क्रॉस बॉर्डर फाइनेंशियल सर्विसेज में काफी संभावनाएं देता है। उन्होंने ग्लोबल इंस्टीट्यूशन से आग्रह किया वो भी इसे भारत के फाइनेंशियल इकोसिस्टम में एंट्री के गेटवे के रूप में इस्तेमाल करें।

ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत न सिर्फ एक बड़े बाजार के रूप में स्केल देता है, बल्कि एक लॉन्गटर्म इनवेस्टमेंट और ऑपरेशनल प्लेटफ़ॉर्म भी ऑफर करता है। उत्पादन-जुड़े प्रोत्साहन (PLI) जैसी टारगेटेड नीतिगत पॉलिसी स्कीम के जरिए अब भारत का ध्यान सिर्फ पार्ट्स को असेंबल करने तक सीमित नहीं है बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और हाई एंड टेक्नोलॉजी तैयार करने पर भी है। क

इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, एग्रीकल्चर और डिफेंस सेक्टर पर जोर

वित्त मंत्री ने कहा कि देश में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स, रेलवे का मॉडर्नाइजेशन, इलेक्ट्रिफिकेशन और हाई-स्पीड रेल सहित इंफ्रास्ट्रक्चर का काफी तेजी विस्तार हो रहा है। ये सब मिलकर लॉन्गटर्म इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टमेंट के मौके बना रहे हैं। नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) इनमें हिस्सेदारी लेने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स को एक कमर्शियल प्लेटफॉर्म दे रहा है।

भारत का एग्रीकल्चर बेस, बढ़ती इनकम और बदलता कंजंशन पैटर्न फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमेशन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और कोल्ड चेन क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रही हैं। रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘iDEX’ जैसी पहलों के माध्यम से भारत ड्रोन, ऑटोनोमस सिस्टम और हाई एंड टेक्नोलॉजी में तेजी से कैपेसिटी बिल्डिंग कर रहा है।

आपको बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान नॉर्थ कैरोलिना के एशविले में जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगी। इसके बाद न्यूयॉर्क का दौरा भी करेंगी।

कंधे पर रखकर दागो और दुश्मन खत्म! भारत आ रही है दुनिया की सबसे खतरनाक एंटी-टैंक मिसाइल Javelin, जानिए इसमें क्या है खास

भारत अपनी मिलिट्री ताकत और डिफेंस कैपिसिटी को और अधिक मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। भारत जल्द ही अमेरिका में बनी हुई दुनिया की सबसे खतरनाक और मॉडर्न एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम जैवेलिन (Javelin) को खरीदने की योजना बना रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे ने शुक्रवार को इस बहुप्रतीक्षित सौदे की पुष्टि करते हुए कहा कि यह योजना भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। यह सौदा न सिर्फ भारतीय सेना की इंफेंट्री की मारक क्षमता को बढ़ाएगा बल्कि दोनों देशों के बीच डिफेंस इंडस्ट्रियल को-प्रोडक्शन के नए दरवाजे भी खोलेगा।

$4.57 करोड़ का सौदा: पैकेज में 100 मिसाइल राउंड और 25 लॉन्च यूनिट्स शामिल

हमारी सहयोगी वेबसाइट सीएनबीसी टीवी 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और भारत के बीच इस महत्वाकांक्षी रक्षा सौदे की प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने नवंबर 2025 में विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत भारत को जैवेलिन मिसाइल प्रणाली और उससे जुड़े उपकरणों की संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी थी। इस प्रस्तावित रक्षा सौदे का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 4.57 करोड़ डॉलर है।

इस सौदे में शामिल पैकेज के तहत भारत को 100 एफजीएम-148 जैवेलिन मिसाइल राउंड, एक फ्लाई-टू-बाय मिसाइल और 25 जैवेलिन लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट्स या ब्लॉक 1 कमांड लॉन्च यूनिट्स मिलेंगी। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे के मुताबिक इस शुरुआती खरीद के बाद भविष्य में भारत और अमेरिका दोनों देशों में इस घातक मिसाइल प्रणाली के को-प्रोडक्शन की संभावनाओं पर भी काम कर सकते हैं। इससे भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण को भी बल मिलेगा।

क्या है दागो और भूल जाओ तकनीक? जानिए जैवेलिन मिसाइल की खासियतें

जैवेलिन दुनिया की सबसे भरोसेमंद और घातक मध्यम दूरी की, कंधे से रखकर दागी जाने वाली एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली है। इसे मुख्य रूप से पैदल सेना, स्काउट्स और कॉम्बैट इंजीनियर्स के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फायर एंड फॉरगेट यानी दागो और भूल जाओ तकनीक पर काम करती है। इसका मतलब है कि एक बार जब सैनिक मिसाइल को अपने लक्ष्य पर लॉक करके दाग देता है तो मिसाइल खुद-ब-खुद अपने टारगेट को ढूंढकर उसे तबाह कर देती है और सैनिक को तुरंत अपनी लोकेशन बदलने का समय मिल जाता है।

यह मिसाइल दुश्मन के भारी बख्तरबंद टैंकों और बंकरों को आसानी से नेस्तनाबूद करने में सक्षम है। कंधे से दागे जाने के अलावा इस आधुनिक सिस्टम को जरूरत के मुताबिक सैन्य वाहनों, विमानों और पानी के जहाजों और नौकाओं पर भी तैनात और माउंट किया जा सकता है।

किन कंपनियों ने बनाया है यह सिस्टम और भारत के लिए क्यों है अहम

जैवेलिन मिसाइल सिस्टम को जैवेलिन जॉइंट वेंचर ने बनाया है। ये अमेरिका की दो प्रमुख रक्षा क्षेत्र की दिग्गजों आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन के बीच एक साझेदारी है। अमेरिका सेना और दुनिया के कई और दूसरे देश लंबे समय से इस मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत और अमेरिका जिस तरह से अपने रक्षा-औद्योगिक सहयोग का विस्तार कर रहे हैं, उस दिशा में यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। सीमावर्ती इलाकों और दुर्गम पहाड़ियों पर पैदल सेना को बख्तरबंद खतरों से निपटने के लिए एक त्वरित और अचूक हथियार की जरूरत रहती है। ऐसे में जैवेलिन का भारतीय सेना में शामिल होना न सिर्फ सेना की जमीनी मारक क्षमता में काफी इजाफा करेगा बल्कि भारत-अमेरिका रक्षा रणनीतिक संबंधों को भी एक नया आयाम देगा।

हथियार बनाने में भारत की लंबी छलांग! प्रोडक्शन ₹1.80 लाख करोड़ और एक्सपोर्ट ₹39,000 करोड़ के पार

India Defence Sector Growth: भारत का रक्षा क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक छलांग लगा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जानकारी दी कि पिछले एक दशक में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 4 गुना बढ़कर लगभग ₹1.80 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, भारत से रक्षा उपकरणों का निर्यात बढ़कर ₹39,000 करोड़ के करीब हो गया है।

रक्षा मंत्री मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित 57 साल पुरानी व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में T-सीरीज के मेन बैटल टैंक्स के ओवरहॉलिंग के लिए बनने वाले ₹472 करोड़ के नए प्लांट का शिलान्यास करने पहुंचे थे।

2014 से 2026: रक्षा उत्पादन और निर्यात के आंकड़े

राजनाथ सिंह ने 2014 के मुकाबले रक्षा क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति का ब्योरा पेश किया। साल 2014 में देश का हथियारों और गोला-बारूद का उत्पादन महज ₹46,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1.80 लाख करोड़ हो गया है। 2014 में भारत का रक्षा निर्यात सिर्फ ₹1,000 करोड़ का था, जो अब ₹39,000 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2028-29 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात का लक्ष्य तय किया है।

जबलपुर VFJ में ₹472 करोड़ का प्रोजेक्ट

जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में बनने वाला नया प्रोजेक्ट भारत के रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा। यह नया प्लांट सालाना 80 T-72 और T-90 टैंकों का ओवरहॉल यानी मरम्मत व अपग्रेडेशन करने में सक्षम होगा। भारतीय सेना को हर साल करीब 230 T-सीरीज टैंकों के ओवरहॉल की जरूरत होती है।

अब तक चेन्नई के आवडी स्थित हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) में सालाना लगभग 150 टैंकों की ओवरहॉलिंग होती थी। जबलपुर का नया प्लांट शुरू होने के बाद सेना की यह कमी पूरी तरह से दूर हो जाएगी।

‘अब केवल हथियार बना ही नहीं रहे, मेंटेन भी कर रहे हैं’

रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में दुनिया का भारत को देखने का नजरिया बदल चुका है और इसके पीछे ‘आत्मनिर्भर भारत’ का विजन है। भारत अब न सिर्फ अपनी धरती पर आधुनिक हथियार बना रहा है, बल्कि उनका रखरखाव, ओवरहॉलिंग और अपग्रेडेशन करने की पूरी क्षमता हासिल कर चुका है।

इस प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और यह भारतीय सेना के टैंकों को युद्ध के लिए हमेशा तैयार रखने में ‘वरदान’ साबित होगा।

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर का ऐतिहासिक सफर

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर(VFJ) की स्थापना 1969 में हुई थी, जो वर्तमान में आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) के तहत काम करती है। शुरुआत में इस फैक्ट्री में जर्मनी की MAN कंपनी के सहयोग से ‘शक्तिमान 3-टन’ ट्रक और जापान की निसान के सहयोग से ‘निसान 1T’ व ‘जोन्गा’ गाड़ियां बनाई जाती थीं। यह फैक्ट्री 330 एकड़ में फैली है और इसका संलग्न एस्टेट 600 एकड़ का है।

बिहार से गुजरात के लिए एक और ट्रेन, 26 अगस्त से दौड़ेगी नई अमृत भारत एक्सप्रेस, जानिए इसका रूट, स्टॉपेज और टाइमिंग

Ahmedabad-Bhagalpur Amrit Bharat Express: भारतीय रेलवे भागलपुर और अहमदाबाद के बीच एक नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन शुरू करने जा रहा है। इससे बिहार और गुजरात के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। ईस्टर्न रेलवे के मुताबिक, नई ट्रेन से यात्रियों की बढ़ती मांग पूरी होगी और देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा।

ईस्टर्न रेलवे ने कहा, “भागलपुर को ‘भारत की सिल्क सिटी’ के नाम से जाना जाता है और यह बिहार का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। नई ट्रेन से भागलपुर की गुजरात के बड़े औद्योगिक और आर्थिक केंद्र अहमदाबाद से रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी।”

बता दें कि भारतीय रेलवे ने मौजूदा 09447/09448 अहमदाबाद-पटना-अहमदाबाद क्लोन स्पेशल ट्रेन को अब नियमित ट्रेन के तौर पर चलाने का फैसला किया है। इसे 19423/19424 अहमदाबाद-भागलपुर-अहमदाबाद साप्ताहिक अमृत भारत एक्सप्रेस के रूप में चलाया जाएगा।

कल से शुरू होगी बिहार और अहमदाबाद के बीच ट्रेन

इसका परिचालन अहमदाबाद से 26 अगस्त, 2026 से प्रत्येक बुधवार को तथा भागलपुर से 28 अगस्त, 2026 से प्रत्येक शुक्रवार को किया जायेगा।

इस गाड़ी में LSLRD के 2, पेट्रीकार का 1, जनरल सेकेंड क्लास के 11 तथा स्लीपर क्लास के 08 कोचों सहित कुल 22 कोच लगाये जायेंगे।

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस: दूरी और सफर का समय

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस पूरी यात्रा लगभग 36 घंटे 10 मिनट में तय करेगी। इसमें जनरल अनरिजर्व्ड और स्लीपर क्लास के डिब्बे होंगे। ट्रेन 110 से 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस: रूट, कितनी बार चलेगी और कहां रुकेगी?

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस हफ्ते में एक दिन चलेगी। रास्ते में यह कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी। इनमें आनंद, छायापुरी, गोधरा, दाहोद, रतलाम, भवानी मंडी, रामगंज मंडी, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, हिंडौन सिटी, बयाना, ईदगाह आगरा, टूंडला, गोविंदपुरी, सुबेदारगंज, पं. दीन दयाल उपाध्याय, बक्सर, आरा, दानापुर, पटना, बख्तियारपुर, मोकामा, किऊल, अभयपुर, जमालपुर और सुल्तानगंज शामिल हैं।

गाड़ी नंबर 19423 अहमदाबाद-भागलपुर अमृत भारत एक्सप्रेस का शेड्यूल

ट्रेन नंबर 19423 अहमदाबाद-भागलपुर वीकली अमृत भारत एक्सप्रेस 26 अगस्त, 2026 से हर बुधवार शाम 6:30 बजे अहमदाबाद से रवाना होगी और यह गुरूवार को 21.13 बजे डीडीयू, 22.30 बजे बक्सर, 23.15 बजे आरा, 23.50 बजे दानापुर, शुक्रवार को 00.43 बजे पटना स्टेशन, 01.25 बजे बख्तियारपुर, 02.08 बजे मोकामा, 03.30 बजे किउल, 04.01 बजे अभयपुर, 04.30 बजे जमालपुर, 05.13 बजे सुलतानगंज रूकते हुए 06.40 बजे भागलपुर पहुंचेगी।

गाड़ी नंबर 19424 भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस का शेड्यूल

वापसी की दिशा में, ट्रेन नंबर 19424 भागलपुर-अहमदाबाद वीकली अमृत भारत एक्सप्रेस 28 अगस्त, 2026 से हर शुक्रवार शाम 4:45 बजे भागलपुर से रवाना होगी और यह 17.03 बजे सुलतानगंज, 17.48 बजे 18.13 बजे अभयपुर, 19.15 बजे किउल, 19.56 बजे मोकामा, 20.30 बजे बख्तियारपुर, 21.58 बजे पटना स्टेशन 22.21 बजे दानापुर, 22.53 बजे आरा, 23.41 बजे बक्सर, शनिवार को 02.53 बजे डीडीयू सहित अन्य स्टेशनों पर रूकते हुए रविवार को 05.25 बजे अहमदाबाद पहुंचेगी।

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दुश्मन के बंकर, एयर डिफेंस सिस्टम के लिए काल है भारत का पहला स्वदेशी ‘दिव्यास्त्र Mk3’ ड्रोन! लखनऊ की कंपनी ने रचा इतिहास

Divyastra Mk3: भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। 11 अगस्त 2026 को देश में बने Divyastra Mk3 ने पहली बार उड़ान भरी। यह एक बिना पायलट वाला जेट-पावर्ड ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ है। जिसे लंबे समय तक हवा में रहकर निगरानी और तय लक्ष्य पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है।

इस एयरक्राफ्ट ने उत्तर प्रदेश में एक तय टेस्टिंग एयरस्ट्रिप से उड़ान भरी और इसे भारत में बने जेट इंजन से पावर मिली। लखनऊ की डिफेंस स्टार्टअप कंपनी ‘Kawa UAV Pvt. Ltd.’ (HoverIt) द्वारा विकसित इस प्लेटफॉर्म को कॉन्सेप्ट से उड़ान तक पहुंचने में आठ महीने से भी कम समय लगा।

बता दें कि ‘Divyastra Mk3’ को टर्बोजेट इंजन से पावर मिलती है, जिसे पूरी तरह से भारतीय प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी कंपनी ‘DG प्रोपल्शन’ ने बनाया है। कंपनी के अनुसार, ट्रायल के दौरान इंजन ने सभी तय ऑपरेशनल पैरामीटर्स (कामकाज के मानकों) को पूरा किया है।

यह पहली उड़ान भारत के रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह पहली बार है जब देश में डिजाइन, विकसित और तैयार किया गया जेट इंजन से चलने वाला लोइटरिंग म्यूनिशन पूरी तरह स्वदेशी पावरप्लांट के साथ आसमान में उड़ा है।

जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2026 की शुरुआत में हुई थी और महज कुछ महीनों में अगस्त में इसकी पहली उड़ान सफलतापूर्वक पूरी हुई। खास बात यह है कि इसे तैयार करने में न तो विदेश से आयात किए गए जेट इंजन का इस्तेमाल किया गया और न ही जरूरी तकनीक के लिए विदेशी सिस्टम पर निर्भरता रही।

कंपनी ने दी जानकारी

HoverIt ने X पर एक पोस्ट में इस प्लेटफॉर्म को “भारत का पहला स्वदेशी जेट इंजन से चलने वाला लोइटरिंग म्यूनिशन” बताया, जो सफलतापूर्वक उड़ान भर सकता है। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि इसमें भारतीय एयरफ्रेम, भारतीय जेट इंजन, स्वदेशी तकनीक और भारतीय फायरपावर का इस्तेमाल किया गया है।

कंपनी ने कहा, “इसमें कोई इम्पोर्टेड जेट इंजन नहीं। कोई विदेशी क्रिटिकल सब-सिस्टम नहीं। भारत में बना। भारत में उड़ाया गया।”

(HoverIt) के को-फाउंडर्स ने कहा, “यह सिर्फ एक टेस्ट फ्लाइट नहीं है – यह इरादे का इजहार है। भारत ने बड़े पैमाने पर और तेजी से यह साबित कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं के भीतर ही जेट-पावर्ड प्रिसिजन स्ट्राइक सिस्टम की कल्पना, इंजीनियरिंग और उड़ान को अंजाम दे सकता है। ‘Divyastra Mk3’ ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जीता-जागता उदाहरण है।”

यह उपलब्धि ऐसे समय में मिली है जब भारत प्रिसिजन स्ट्राइक और ऑटोनॉमस एयर सिस्टम में अपनी घरेलू क्षमताओं को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इससे स्वदेशी एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म और प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करने में भारतीय प्राइवेट-सेक्टर की डिफेंस कंपनियों की बढ़ती भूमिका भी उजागर होती है।

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हाथों में कटोरा लेकर आजादी मना रहा 80 साल का पाकिस्तान! कंगाली के ये निशान बयान कर रहे उसके असली हालात

पाकिस्तान को बने करीब 80 साल हो चुके हैं, लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था आज भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के कर्ज पर निर्भर है। पिछले कई दशकों में पाकिस्तान को कई बार कर्ज और आर्थिक सुधारों के लिए मदद मिली है। इसके बावजूद देश बार-बार भुगतान संकट में फंसता रहा है और उसे अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए आईएमएफ का सहारा लेना पड़ता है। फिलहाल पाकिस्तान करीब 7 अरब डॉलर के IMF प्रोग्राम के तहत है। वहीं, देश पर सरकारी कर्ज उसकी अर्थव्यवस्था के कुल आकार यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 70 फीसदी है।

सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज और उसका ब्याज चुकाने में खर्च हो जाता है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने रक्षा पर अपना खर्च बढ़ाया है, जबकि विकास से जुड़े कामों पर खर्च काफी सीमित है। आईएमएफ के हालिया कार्यक्रम से पाकिस्तान को 2023 के लगभग डिफॉल्ट की स्थिति के बाद अपनी विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को कुछ हद तक स्थिर करने में मदद मिली है। हालांकि, देश की कई पुरानी आर्थिक समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। इन्हीं समस्याओं के कारण पाकिस्तान को बार-बार आईएमएफ से कर्ज लेना पड़ता है।

पाकिस्तान में टैक्स से होने वाली कमाई कम है, निर्यात का दायरा सीमित है और कर्ज चुकाने में सरकार का बड़ा पैसा चला जाता है। इसके अलावा, ऊर्जा क्षेत्र की हालत भी खराब है और देश अपनी जरूरतों के लिए लगातार विदेशी कर्ज और आर्थिक मदद पर निर्भर रहता है। ऐसे में पाकिस्तान जब अपनी आजादी की 80वीं सालगिरह मना रहा है, तो बड़ा सवाल यह है कि उसे बार-बार आईएमएफ के पास क्यों जाना पड़ता है। साथ ही, कई वर्षों से चल रहे आर्थिक सुधार कार्यक्रम आखिर इस कर्ज के चक्र को खत्म करने में सफल क्यों नहीं हो पाए हैं।

पाकिस्तान 25 बार आईएमएफ के पास जा चुका है

आईएमएफ के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान 1950 में इस संस्था का सदस्य बना था। इसके बाद से वह 25 बार आईएमएफ के साथ अलग-अलग समझौते कर चुका है। इन समझौतों में कई तरह के कर्ज कार्यक्रम शामिल हैं। हालांकि, इनमें से हर कार्यक्रम को आर्थिक संकट से बाहर निकालने वाला बेलआउट पैकेज नहीं कहा जा सकता। फिर भी, बार-बार आईएमएफ की मदद लेने से पता चलता है कि पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक और विदेशी मुद्रा की कमी से जूझता रहा है।

पाकिस्तान का मौजूदा ‘विस्तारित कोष सुविधा’ कार्यक्रम करीब 7 अरब डॉलर का है। इसे सितंबर 2024 में 37 महीने के लिए मंजूरी दी गई थी। इससे पहले 2023 में पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की ‘स्टैंडबाय व्यवस्था’ मिली थी। उस समय देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से कम हो रहा था और पाकिस्तान के कर्ज न चुका पाने यानी डिफॉल्ट का खतरा बढ़ गया था।

आईएमएफ ने मई 2026 में पाकिस्तान के मौजूदा आर्थिक कार्यक्रम की समीक्षा पूरी की। इसके बाद करीब 1.1 अरब डॉलर की एक और कर्ज की किस्त जारी करने को मंजूरी दी गई। आईएमएफ के मुताबिक, अलग ‘लचीलापन और स्थिरता सुविधा’ के तहत मिलने वाली रकम को जोड़ने पर दोनों कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को अब तक करीब 4.8 अरब डॉलर जारी किए जा चुके थे।

इसी आर्थिक स्थिति के बीच पाकिस्तान अपनी आजादी के 80वें साल में प्रवेश कर रहा है। आईएमएफ के नए कार्यक्रमों से देश को कुछ समय के लिए आर्थिक स्थिरता जरूर मिली है, लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बार-बार संकट में डालने वाली बुनियादी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।

पाकिस्तान के हालात हैं बेहद खराब

पाकिस्तान की सबसे बड़ी आर्थिक समस्याओं में से एक लगातार विदेशी मुद्रा की कमी रही है। जब देश का आयात खर्च, पुराने कर्ज की किस्तें और दूसरी विदेशी देनदारियां उसकी निर्यात से होने वाली कमाई और विदेश से आने वाली रकम से ज्यादा हो जाती हैं, तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को भुगतान संकट से बचने के लिए दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक मदद लेनी पड़ती है। पाकिस्तान के आर्थिक इतिहास में यह स्थिति बार-बार देखने को मिली है। हर कुछ साल बाद देश के सामने विदेशी मुद्रा का संकट खड़ा होता है और उसे आईएमएफ से मदद लेनी पड़ती है।

2023 में पाकिस्तान डिफॉल्ट के करीब पहुंच गया था। इसके बाद सितंबर 2024 में आईएमएफ ने उसके लिए एक नया आर्थिक कार्यक्रम मंजूर किया। करीब 7 अरब डॉलर के इस कार्यक्रम का मकसद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिर करना, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना, टैक्स से होने वाली कमाई बढ़ाना, सरकारी कंपनियों में सुधार करना और ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति बेहतर करना था। इसके साथ ही, लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए बेहतर माहौल तैयार करने पर भी जोर दिया गया।

आजादी के 80 साल बाद भी पाकिस्तान का आईएमएफ के एक बड़े कार्यक्रम पर निर्भर रहना बताता है कि देश की कई पुरानी आर्थिक कमजोरियां अब तक दूर नहीं हो पाई हैं।

कछुए की चाल से बढ़ रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान की आर्थिक रिकवरी अभी भी बहुत धीमी है। आईएमएफ के जुलाई 2026 के अनुमान के मुताबिक, 2026 में पाकिस्तान की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 3.6 फीसदी रहने की उम्मीद है। वहीं, खुदरा महंगाई करीब 7.2 फीसदी रह सकती है। 2025 में पाकिस्तान की कुल अर्थव्यवस्था का आकार करीब 407.8 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया था। आईएमएफ ने मई 2026 की समीक्षा में कहा था कि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर में सुधार हुआ है। महंगाई भी नियंत्रण में रही और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने की दिशा में उम्मीद से बेहतर काम हुआ। हालांकि, आईएमएफ ने यह भी चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सामने आगे भी अनिश्चितता बनी हुई है और जोखिम कम नहीं हुए हैं।

पाकिस्तान का रक्षा खर्च भी बढ़ा

पाकिस्तान की आर्थिक परेशानियों का एक संबंध देश में सेना की बढ़ती राजनीतिक ताकत से भी जोड़ा जा रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को पाकिस्तान की विदेश नीति पर सबसे ज्यादा प्रभाव रखने वाली शख्सियतों में से एक बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उनका प्रभाव अब सिर्फ सैन्य मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में भी उनकी भूमिका बढ़ गई है।

2025 में फील्ड मार्शल बनने के बाद आसिम मुनीर की स्थिति और मजबूत हुई है। इसी बीच, आईएमएफ के आर्थिक कार्यक्रम के तहत वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की जरूरत के बावजूद पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पाकिस्तान सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए 3 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 18 फीसदी ज्यादा है। दूसरी ओर, सरकार ने विकास से जुड़े कामों के लिए सिर्फ 1 लाख करोड़ रुपये का संघीय बजट रखा है। इससे साफ है कि आर्थिक दबाव के बावजूद पाकिस्तान में रक्षा खर्च को विकास खर्च की तुलना में ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।