FATF के उपाध्यक्ष बने भारत सरकार के सचिव विवेक अग्रवाल:1994 बैच के IAS हैं; FATF दुनियाभर में मनी लॉन्ड्रिंग-आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था

भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता मिली है। भारत सरकार के सचिव विवेक अग्रवाल को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) का उपाध्यक्ष चुना गया है। FATF दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग पर नजर रखने वाली सबसे अहम संस्थाओं में से एक है। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। मंत्रालय का कहना है कि यह नियुक्ति आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति और वैश्विक स्तर पर आतंकियों की फंडिंग रोकने के प्रयासों को और मजबूती देगी। 1994 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी विवेक अग्रवाल फिलहाल संस्कृति मंत्रालय में सचिव हैं। उन्हें प्रशासनिक सेवा में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। इससे पहले वह वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग में अतिरिक्त सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वैश्विक वित्तीय सुरक्षा में बढ़ेगी भारत की भूमिका विदेश मंत्रालय के अनुसार, विवेक अग्रवाल का चुनाव इस बात का संकेत है कि वैश्विक वित्तीय सुरक्षा और अवैध धन के खिलाफ कार्रवाई में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। FATF दुनिया के देशों के लिए ऐसे नियम और मानक तय करती है, जिनका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग पर रोक लगाना है। FATF में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं अग्रवाल विवेक अग्रवाल पहले FATF में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर चुके हैं। वह फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) के निदेशक भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने आर्थिक अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय खुफिया से जुड़े मामलों पर काम किया। भारत की बढ़ती विश्वसनीयता का संकेत संस्कृति मंत्रालय ने कहा कि FATF में यह जिम्मेदारी मिलना दुनिया के 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों के बीच भारत की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है। मंत्रालय के अनुसार, डिजिटल पेमेंट, वर्चुअल एसेट्स और नए वित्तीय जोखिमों से जुड़े वैश्विक नियम बनाने में भी भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। FATF ने पहलगाम हमले की निंदा की थी जून 2025 में FATF ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की थी और सभी देशों से आतंक की फंडिंग रोकने की अपील की थी। इसके बाद, भारत ने FATF को पाकिस्तान को दोबारा ‘ग्रे लिस्ट’ में डालने का औपचारिक अनुरोध दिया था। भारत का आरोप है कि पाकिस्तान से हो रही फंडिंग के कारण ही सीमा पार से आतंकी गतिविधियां चल रही हैं। …………… यह खबर भी पढ़ें… ISI से जुड़े आतंकी मॉड्यूल के पांच और आरोपी अरेस्ट: पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने का टार्गेट दिया गया था, दो दिन में अब तक 12 गिरफ्तार दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 17 जून को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े आतंकी मॉड्यूल के पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले मंगलवार को इस मॉड्यूल के 7 अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस तरह दो दिनो में मॉड्यूल के 12 सदस्य गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि एक फरार है। पूरी खबर पढ़ें…

गौतम गंभीर की आलोचना की श्रीसंथ ने, कहा विराट रोहित खेलें वनडे विश्वकप (Video)

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एक प्रसिद्ध डिजिटल मीडिया संस्थान को दिए गए इंटरव्यू में श्रीसंथ ने कहा है कि गौतम गंभीर भारतीय टीम के लिए सही कोच साबित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि ड्रेसिंग रूम में गौतम गंभीर बुत बनकर बैठे रहते हैं। इससे अच्छा गुजरात टाइटंस के कोच आशीष नेहरा को कोच बना देते।

इसके अलावा एक सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि विराट कोहली और रोहित शर्मा के भविष्य का फैसला उनको खुद लेना चाहिए। दरअसल पत्रकार ने सवाल किया था कि क्या इन दोनों दिग्गज बल्लेबाजों को संन्यास ले लेना चाहिए तो उन्होंने कहा कि दोनों के कितने रन है।

गौतम गंभीर के खुद 10 से 12 हजार रन है वहीं विराट कोहली के कुल अंतरराष्ट्रीय रन 30 हजार से ज्यादा है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि ऐसे में जब कोच के कुल रन ही दोनों खिलाड़ियों से कम हैं तो वह इन दोनों को कैसे बोल सकते हैं संन्यास पर सोचने का।

श्रीसंथ को एक बार गंभीर ने कहा था फिक्सर, साथ खेले विश्वकप

3 साल पहले गौतम गंभीर ने श्रीसंथ को लीजेंड्स लीग क्रिकेट के मैच के दौरान ‘Fixer’ कहा था। इंडियन कैपिटल्स और गुजरात जायंट्स के बीच एलिमिनेटर मैच के दौरान श्रीसंथ और उनके पूर्व साथी गंभीर के बीच तीखी बहस हो गयी थी। इसके बाद विश्व कप विजेता खिलाड़ियों को अलग करने के लिए अंपायर को हस्तक्षेप करना पड़ा था।

श्रीसंथ ने वर्ष 2005 और 2011 के बीच सभी प्रारूपों में भारत के लिए 90 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और उनमें से 49 खेलों में गंभीर एकादश में उनके टीम-साथी थे। वे 2007 टी-20 विश्वकप और 2011 एकदिवसीय विश्वकप में भारत की खिताब जीतने वाली टीमों का हिस्सा थे।गौतम गंभीर ने जहां टी-20 विश्वकप फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ एक निर्णायक पारी खेली थी तो श्रीसंथ ने अंत में मिस्बाह का कैच लेकर जीत की मुहर लगाई थी। जब साल 2011 आया तो गौतम गंभीर श्रीसंथ से काफी आगे निकल चुके थे। श्रीसंथ सिर्फ पहले और आखिरी मैच में अंतिम एकादश में शामिल हुए थे और गौतम गंभीर ने 97 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को एकदिवसीय विश्वकप के करीब लाए थे।

फीक्सिंग में फंसे थे श्रीसंथ

श्रीसंत पर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2013 में स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण में उनकी कथित लिप्तता के कारण बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट बोर्ड) की अनुशासनात्मक समिति ने आजीवन प्रतिबंध लगाया था।लेकिन उच्चतम न्यायालय ने 2019 में इस प्रतिबंध को घटाकर सात साल का कर दिया था।

श्रेयंका पाटिल को पाक के खिलाफ पेट के नीचे लगी थी गेंद, आज हुई विश्वकप से बाहर (Video)

indian t20 women world cup team

भारत की ऑफ स्पिनर श्रेयांका पाटिल टखने की चोट के कारण महिला टी20 विश्व कप से बाहर हो गई हैं और उनकी जगह लेग स्पिनर प्रेमा रावत को टीम में शामिल किया गया है, जिन्होंने अभी तक एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है।

23 वर्षीय पाटिल बुधवार को नीदरलैंड के खिलाफ भारत की 95 रन की जीत के दौरान चोटिल हो गई थी। यह घटना पावरप्ले के आखिरी ओवर में हुई जब पाटिल को गेंद को रोकने की कोशिश में चोट लग गई। इससे उनके टखने में मोच आ गई।इससे पहले पाकिस्तान के खिलाफ भी जेमिमा की एक गेंद उनके पेट के नीचे लगी थी और वह रनअप के इलाके पर लेट गई थी। इस घटना के बाद कुछ देर तक मैच रोका गया था। लेकिन श्रेयंका ने पाक के खिलाफ अपने ओवरों का कोटा पूरा किया था।

आईसीसी की मीडिया विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 की प्रतियोगिता तकनीकी समिति ने भारतीय टीम में श्रेयांका पाटिल के स्थान पर प्रेमा रावत को शामिल करने की मंजूरी दे दी है।’24 वर्षीय रावत को पहली बार सीनियर राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है। वह महिला प्रीमियर लीग के दो सत्र में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए छह मैच खेल चुकी हैं।

रावत उस भारत ए टीम का हिस्सा थी जिसे इंग्लैंड के खिलाफ शनिवार को नॉर्थम्प्टन में पहले टी20 मैच के साथ शुरू होने वाली छह मैचों की श्रृंखला खेलनी है।उन्होंने राइजिंग स्टार्स महिला एशिया कप में भी शानदार प्रदर्शन किया था, जहां उन्होंने 4.27 की इकॉनमी रेट से आठ विकेट लिए थे और भारत ए ने खिताब जीता था।

श्रेयंका पाटिल को पाक के खिलाफ पेट के नीचे लगी थी गेंद, आज हुई विश्वकप से बाहर (Video)

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भारत की ऑफ स्पिनर श्रेयांका पाटिल टखने की चोट के कारण महिला टी20 विश्व कप से बाहर हो गई हैं और उनकी जगह लेग स्पिनर प्रेमा रावत को टीम में शामिल किया गया है, जिन्होंने अभी तक एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है।

23 वर्षीय पाटिल बुधवार को नीदरलैंड के खिलाफ भारत की 95 रन की जीत के दौरान चोटिल हो गई थी। यह घटना पावरप्ले के आखिरी ओवर में हुई जब पाटिल को गेंद को रोकने की कोशिश में चोट लग गई। इससे उनके टखने में मोच आ गई।इससे पहले पाकिस्तान के खिलाफ भी जेमिमा की एक गेंद उनके पेट के नीचे लगी थी और वह रनअप के इलाके पर लेट गई थी। इस घटना के बाद कुछ देर तक मैच रोका गया था। लेकिन श्रेयंका ने पाक के खिलाफ अपने ओवरों का कोटा पूरा किया था।

आईसीसी की मीडिया विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 की प्रतियोगिता तकनीकी समिति ने भारतीय टीम में श्रेयांका पाटिल के स्थान पर प्रेमा रावत को शामिल करने की मंजूरी दे दी है।’24 वर्षीय रावत को पहली बार सीनियर राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है। वह महिला प्रीमियर लीग के दो सत्र में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए छह मैच खेल चुकी हैं।

रावत उस भारत ए टीम का हिस्सा थी जिसे इंग्लैंड के खिलाफ शनिवार को नॉर्थम्प्टन में पहले टी20 मैच के साथ शुरू होने वाली छह मैचों की श्रृंखला खेलनी है।उन्होंने राइजिंग स्टार्स महिला एशिया कप में भी शानदार प्रदर्शन किया था, जहां उन्होंने 4.27 की इकॉनमी रेट से आठ विकेट लिए थे और भारत ए ने खिताब जीता था।

Kala Hiran: ‘काला हिरन’ के निर्माता का बड़ा खुलासा, सलमान खान के फैन ने दी जान से मारने की धमकी, बोला- ‘3 दिन में कर देगा मर्डर’

Kala Hiran: ‘काला हिरण’ फ़िल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी ने 18 जून को आरोप लगाया था कि फ़िल्म रिलीज़ होने से पहले उन्हें पाकिस्तान से धमकियां मिल रही हैं। अब उन्होंने दावा किया है कि पुलिस को पहली धमकी की जानकारी देने के कुछ ही घंटों बाद, 24 घंटे के अंदर उन्हें जान से मारने की दूसरी धमकी मिली है।

जोधपुर पुलिस को दी गई एक नई शिकायत के बारे में प्रोड्यूसर ने X पर जानकारी दी। उन्होंने शिकायत पत्र की एक तस्वीर शेयर की और दावा किया कि एक अनजान कॉलर ने उन्हें तीन दिन के अंदर जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने कैप्शन में लिखा: “24 घंटे में दूसरी बार मुझे जान से मारने की धमकी मिली है। जैसे ही पहला मामला दर्ज हुआ, दूसरी धमकी आ गई। मैं @Igp_Jodhpur @CP_Jodhpur @RajPoliceHelp @PoliceRajasthan @RajPoliceHelp @RajGovOfficial @HMOIndia से गुज़ारिश करता हूं कि वे तुरंत मामला दर्ज करें और धमकी देने वाले व्यक्ति को गिरफ़्तार करवाएं।”

पत्र में लिखा है- “मुझे आज पाकिस्तानी आतंकवादी शहजाद ब्रह्मादग बुगती द्वार भी धमकी दी गई थी, जिसकी सूचना मैंने आपके थाने में दर्ज कराई है। “एक बार पुन- मुझे मेरे मोबाइल नंबर 9811999801 पर रात 11:06 बजे पर 9735279983 से धमकी भरा कॉल आया है। धमकी देने वाले की आवाज को सुरक्षित (रिकॉर्ड) कर लिया गया है।

धमकी देने वाला बता रहा है कि वाह फिल्म अभिनेता सलमान खान का फैन है और वाह मुझे अगले तीन दिन के अंदर हत्या कर देगा। मेरे मोबाइल नंबर 9811999801 पर रात 11:06 बजे 9735279983 नंबर से धमकी भरा फोन आया। फोन करने वाले की आवाज सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड कर ली गई है। फोन करने वाले ने खुद को फिल्म अभिनेता सलमान खान का प्रशंसक बताया और अगले तीन दिनों के भीतर मेरी हत्या करने की धमकी दी।

उन्होंने कहा कि ज्ञाताव्य है कि प्रकरण संख्या 32 उम्मीद विरासत में रुका हुआ हूं तथा आज भी तीन घंटे के अंतराल में मुझे याह हत्या की दूसरी धमकी मिली है। उन्होंने पुलिस से इन धमकियों को जारी करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करने और उनकी शिकायत पर मामला दर्ज करने का अनुरोध किया।

कृपया धमकी देने वाले को गिरफ्तार करना तथा मेरा मुकदमा दर्ज करने का कष्ट करना। मुझे आशा है कि यह धमकी देने वाला आतंकवादी भी हो सकता है और आतंकवादी शहजाद ब्रह्मदाग बुगती का गुर्गा भी हो सकता है। चुनकी मुझे मात्र तीन दिन का समय दिया गया है, इसलिए प्रार्थना है कि मुक़दमा दर्ज करते हुए शीघरा इसकी गिरफ़्तारी करने का कष्ट करें।

18 जून को, जानी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा नोट लिखा, जिसमें उन्होंने बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान का समर्थन करने वाले एक “पाकिस्तानी आतंकवादी” द्वारा दी गई धमकी का विवरण साझा किया। उन्होंने लिखा, “मुझे देर रात शहजाद भट्टी, जो खुद को पाकिस्तानी आतंकवादी घोषित कर चुका है, के फोन और संदेश आ रहे हैं, जिसमें सलमान खान का समर्थन करते हुए ड्रोन और ग्रेनेड हमले में मेरी जान से मारने की धमकी दी जा रही है। मैंने गृह मंत्रालय, राजस्थान पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों को सूचित कर दिया है।”

उन्होंने कहा, “सलमान खान दो मोर्चों पर लड़ रहे हैं; एक तरफ, दिल्ली हाई कोर्ट में उनके खिलाफ ‘काला हिरण’ मामले की सुनवाई हो रही है, और दूसरी तरफ, उन्होंने अपनी टूलकिट के ज़रिए हज़ारों धमकियां दिलवाई हैं।”

“काला हिरण” फ़िल्म बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान से जुड़े काले हिरण के शिकार के मामले पर आधारित है। यह फ़िल्म असल ज़िंदगी की घटनाओं से प्रेरित है, इसलिए प्रोड्यूसर ने आरोप लगाया है कि सुपरस्टार की ओर से फ़िल्म रिलीज़ न करने का भारी दबाव डाला जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा, “जब मैं ‘डी कंपनी’ के नाम से मिली धमकी से नहीं डरा, तो अब उन्होंने घोषित आतंकवादी शहज़ाद भट्टी से मुझे कॉल और मैसेज करवाया है… आपके स्टारडम और ‘बीइंग ह्यूमन’ (इंसानियत) के झूठे नारे पर शर्म आती है। लेकिन मैं डरता नहीं हूँ। अगर मेरी हत्या भी हो जाती है, तो मेरी मौत के बाद मेरी टीम ‘काला हिरण’ रिलीज़ करेगी ताकि दुनिया बिश्नोई समुदाय के संघर्ष की गाथा और बलिदान का इतिहास देख सके।”

ट्रंप के प्रिय मुनीर है या मोदी?

उस समय के अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिगर ने लिखा है कि भारतीय प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने प्रेसिडेन्ट निक्सन को ऐसे डपटा जैसे एक प्रोफेसर अपने किसी कमजोर स्टूडेंट की झाड़ लगाता है।… अभी फ्रांस में सबने देखा उसी देश के प्रधानमंत्री ट्रंप को एक्सीलेंसी बोल रहे थे। मतलब महामहिम। अपने समकक्ष नहीं। बहुत उंचे दर्जें पर समझकर। जिनसे बात नहीं होती है। केवल निवेदन होता है। 6 बार बोला।

शिमला समझौता, जो भारत की विजय का नाद था उसकी भाजपा ने (उस समय जनसंघ था) कितनी आलोचना की थी? वही आज इस्लामाबाद और उसके समझौते की दुनिया में वाहवाही है। विश्व नेताओं उसकी बधाई दे रहे हैं। उसी सिलसिले में प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्रंप के सामने कि आपका हम अभिनंदन करते हैं। क्या इसकी जरूरत थी?और इससे भारत का क्या मैसेज बना है?

12 वर्षों से पाकिस्तान, ट्रंप और विदेशी नीति को ले कर मोदी सरकार ने भक्तों और गोदी मीडिया से एक अलग ही शेखी फैलाई हुई थी। पाकिस्तान मवाली देश और भारत विश्व नेता, विश्व गुरू। भक्त और मीडिया क्योंकि किसी के भी प्रति जवाबदेह नहीं हैं तो चाहे जो प्रचार हुआ। इस सबसे दुनिया में भारत की इमज कैसी बनती है इसकी उन्हें कोई चिंता नहीं है। इसी सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी के आगे ट्रंप ने कहा कि मैं आपके मीडिया को पंसद करता हूं। अच्छे अच्छे सवाल करता है। हमारा तो फंसाने वाले सवाल करता है। मतलब भारत का मीडिया  अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी गोदी मीडिया के रूप में प्रचारित हो गया!

बहराहल अमेरिका और ईरान के एमओयू का इस्लामाबाद समझौता हो गया है। इसमें नई दिल्ली कहीं नहीं है। भारत बधाई देने वालों की कतार में है। कांग्रेस छोड़ दीजिए। राजनीति भी। लेकिन विदेश सेवा के उन वरिष्ठ अधिकारियों की उस तड़प और दर्द का आप क्या करेंगे जिन्होंने अपना पूरा करियर भारत को विश्व मंच पर स्थापित करने में बिताया। और पाकिस्तान जो इस काबिल कभी था ही नहीं और उसे भारत से ऊपर तो क्या बराबर भी कभी नहीं आने दिया।

पाकिस्तान की वह स्थिति अभी भी नहीं है। मगर हमने अपनी स्थिति जरूर खो दी है। लेकिन गोदी मीडिया इसी बात को लेकर खुशी मना रहा है कि ट्रंप ने कहा कि अगर मोदी रहेंगे और भारत पर हमला हुआ तो वे भारत के साथ खड़े रहेंगे। साथ ही यह भी कहा कि अगर कोई दूसरा होगा तो वे नहीं कह सकते। वाह! अन्तरराष्ट्रीय संबंध ऐसे चलते हैं? जिस अमेरिका-ईरान समझौते की बात हो रही है क्या वह ट्रंप और मसूद पेजेश्कियान, जिन्होंने ईरान की तरफ से साइन किए के बीच का समझौता है? कल को जब ट्रंप प्रेसिडेन्ट नहीं रहेंगे तो ईरान कह सकता है कि समझौता खत्म!

संयुक्त राष्ट्र किन -न के हस्ताक्षरों से बना था? सब खत्म हो गए। संगठन बना हुआ है। पर वहा की बहस बेमानी है। यह भी बहस बेमतलब कि वह कितना काम कर पा रहा है या नहीं? सवाल यह है जैसा ट्रंप ने कहकर मोदी भक्तों को बहला दिया कि अगर वे सत्ता में रहेंगे और मोदी रहेंगे तो यह होगा। नहीं तो नहीं!

सवाल है ट्रंप के न रहने से अमेरिका खत्म हो जाएगा? भारत के बारे में तो ट्रंप ऐसा नहीं कह सकते क्योंकि अमेरिका को बहुत कड़वा अनुभव है भारत के बारे में गलत बोलने का। राष्ट्रपति निक्सन ने बोला था। बहुत ही गंदा। क्या? वह हम यहां नहीं लिख रहे। मगर हां यह जरूर बता रहे हैं कि उसका जवाब तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने कैसा दिया था। जो ट्रंप सहित वहां बनने वाले सभी राष्ट्रपतियों को आज भी याद है। सुनी सुनाई नहीं। किताबों में लिखा है। उस समय के अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसंगर ने लिखा है कि भारतीय प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने प्रेसिडेन्ट निक्सन को ऐसे डपटा जैसे एक

प्रोफेसर अपने किसी कमजोर स्टूडेंट की झाड़ लगाता है। उससे पहले अमेरिका के अधिकारियों ने भारत के अमेरिका स्थित राजदूत से पूछा था कि प्रेसिडेन्ट निक्सन अपने समकक्षों को मिस्टर लगा कर बोलते हैं क्या आपके प्राइममिनिस्टर को भी बोल सकते हैं? सवाल इन्दिरा जी तक आया। उन्होंने हंस कर कहा बोल सकते हैं। यह था इन्दिरा गांधी का आत्मविश्वास। और एक अभी फ्रांस में सबने देखा उसी देश के प्रधानमंत्री ट्रंप को एक्सीलेंसी बोल रहे थे। मतलब महामहिम। अपने समकक्ष नहीं। बहुत उंचे दर्जें पर समझकर। जिनसे बात नहीं होती है। केवल निवेदन होता है। 6 बार बोला।

ऐसी भारत की आज स्थिति हो गई है। गोदी मीडिया भक्तों को तो कुछ नहीं मालूम। मगर भाजपा में कुछ पढ़े लिखे नेता हैं। उन्हें मालूम होगा कि यह सारे अन्तरराष्ट्रीय समझौते इन्टरनेशनल स्टेडी में, सिविल सर्विस की परीक्षाओं  मे पढ़ाए जाते हैं। हमारे नेतृत्व की कमजोरी से पाकिस्तान ने वह दर्जा हासिल कर लिया कि जो अब सब जगह इस्लामाबाद समझौता भी पढ़ाया जाएगा। कूटनीति के कौशल, पाठ में हर जगह चर्चा में रहेगा।

पहले इस इस्लामाबाद का नाम आतंकवाद फैलाने के लिए आता था। 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस्लामाबाद को अन्तरराष्ट्रीय जगत से अलग थलग कर दिया था। और आज उसी अमेरिका जो हमें कमजोर समझकर अपनी शान बताने के लिए कह रहा है कि हमला हुआ तो मैं तुम्हारे साथ खड़ा होऊंगा। मगर असल में ट्रंप की मेहरबानी से पाकिस्तान एक नई हैसियत में आज खड़ा है।  विश्व ताकत बन कर खड़ा हो गया है। वहां के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ

इस्लामाबाद से इसकी घोषणा कर रहे हैं।

वह कहते हैं ना –

और क्या देखने को बाकी है

आप से दिल लगाकर देख लिया!

मोदी से आपने दिल लगाया। और मोदी ने ट्रंप से। फैज की इस गजल का अगला शेर है –

वो मेरे हो के भी मेरे न हुए

उन को अपना बना कर देख लिया!

माई डियर फ्रेंड से हिज एक्सीलेंसी तक।

वे एक हाईपोथेटिकल ( काल्पनिक) सवाल के जवाब में कहते हैं कि अगर भारत पर हमला हुआ तो। यह बिल्कुल ऐसा ही जैसे कोई खुद को दबंग समझने वाला कमजोर पर रौब झाड़े कि ऐ अगर कोई तुमसे बात करे तो हमें बताना… हम उसका ऐसा कर देंगे वैसा कर देंगे। और डरा हुआ कमजोर कहे जी साहब आपका ही सहारा है।

और दूसरी तरफ सोचिए जरा। किसी आत्मविश्वास वाले ठीक आदमी से कोई कहे कि अगर कोई तुम पर हमला करे तो हम हैं। तो वह छूटते ही कहेगा किसकी मजाल है?

अभी पहलगाम में जब हमारे निर्दोष नागरिकों को पाकिस्तानी आतंकवादी हमले में मार दिया गया था तो ट्रंप आए थे मोदी के साथ? उसके बाद आपरेशन सिंदूर में? उसमें तो जब हमारी सेनाएं हमेशा के लिए एक फैसला करने की स्थिति में थीं तब ट्रंप ने आदेश के स्वर में स्टाप इट स्टाप इट कहकर उन्हें रोक दिया था।

वह सीजफायर जिसके लिए सौ बार ट्रंप ने बोला कि मैंने करवाया हमने तत्काल माना। और पाकिस्तान उसके बाद चौबीस घंटे तक हमले करता रहा।

मैं आपके साथ आ जाऊंगा! उस वक्त कहां थे? भारत को विश्व राजधानियों में नेताओं को भेजना पड़ा। कांग्रेस के और दूसरे विपक्षी दलों के लेकर! अमेरिका भी। क्यों? क्योंकि कोई आपके साथ नहीं था। जो देश परपंरागत रूप से भारत के साथ रहते आए थे उन्हें भी आपने अपनी व्यक्तिगत छवि बनाने वाली नीतियों से दूर कर दिया।

अन्तरराष्ट्रीय संबंधों में व्यक्ति का महत्व नहीं होता है। और अगर पंडित जवाहर लाल नेहरू जैसा प्रतिष्ठित कोई व्यक्ति हो या इन्दिरा गांधी जैसी साहसी याद कर लें पहला परामाणु परीक्षण उन्होंने ही किया था तो या मनमोहन सिंह जैसा विद्वान तो फिर भी उसका कोई असर होता है मगर यह कहकर कि मेरी छाती 56 इंच की है। लाल आंखे हो जाती हैं। एक अकेला सब पर भारी हूं। गोदी मीडिया और भक्त तो मुरीद हो जाते हैं मगर अन्तरराष्ट्रीय जगत में इन चुटकुलों का कोई असर नहीं होता है।

अमेरिका-ईरान समझौता अच्छा है। शांति के हर प्रयास का स्वागत है। मगर हमने अपना जो अन्तरराष्ट्रीय स्थान गंवाया है और जो कभी इसके बिल्कुल योग्य नहीं था क्योंकि उसने अपनी जनता की भलाई के बदले धर्म, बड़े जमींदारों, पूंजीपतियों और अमेरिका के पिछलग्गू की भूमिका निभाई गई है उस राह से वैश्विक मंच पर आगे बहुत मुश्किल है।

जिस हकीकत को देश और दुनिया समझ रही है मगर मोदी और ट्रंप नहीं समझ रहे है। मोदी को ट्रंप प्रिय हैं हालांकि अब वे दोस्त से बॉस हो गए हैं। मतलब महामहिम! इससे कुछ भी नहीं सधना है।दुनिया ने जान लिया है की ट्रंप के प्रिय पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर है। वही मुनीर, जिन्हें पहलगाम आतंकवादी हमले का मास्टर माइंड बताया जाता है।

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

Mojtaba Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने एक खास पोस्ट के जरिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह समझौता ईरान की इच्छा से नहीं, बल्कि अमेरिका की मजबूरी की वजह से हुआ है। खामेनेई ने अपने पोस्ट में लिखा, “जैसा कि आपको बताया गया है, ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।”

उन्होंने कहा कि हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस समझौते तक पहुंचने के लिए ईमानदारी से काम किया था, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने ही इसके लिए सबसे ज्यादा जोर डाला था। खामेनेई के मुताबिक, “अमेरिकी राष्ट्रपति ने ही मजबूरी में आकर इसे अंजाम देने के लिए हर तरह के दबाव और साधनों का इस्तेमाल किया।”

बता दें कि समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा वर्साय पैलेस में आयोजित डिनर के दौरान किए गए। यह कार्यक्रम G7 शिखर सम्मेलन के समापन के बाद हुआ था। मैक्रों ने X पर इस घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि यह समझौता “स्थायी शांति का रास्ता बनाता है और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की अनुमति देता है।”

औपचारिक हस्ताक्षर समारोह पहले शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित होने वाला था। हालांकि, तेहरान ने पुष्टि की है कि जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार होगी।

अमेरिका-ईरान समझौते में क्या कहा गया है?

इस दस्तावेज का औपचारिक नाम “संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के इस्लामी गणराज्य के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन” है। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने की बात कही गई है।

इसकी शर्तों के तहत, अमेरिका ने 30 दिनों के भीतर ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का वादा किया है। उम्मीद है कि इस दौरान जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आएगी। अमेरिका अंतिम समझौता होने के 30 दिनों के भीतर ईरान के आस-पास से अपनी सेना हटाने पर भी सहमत हो गया है।

वहीं, ईरान ने भी कमर्शियल जहाजों को 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने पर सहमति जताई है।

बता दें कि संधि पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद, दोनों पक्षों के पास व्यापक अंतिम समझौते की शर्तों पर बातचीत करने के लिए 60 दिन का समय है।

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वर्ल्ड अपडेट्स:चीन ने पाकिस्तान के साथ 8 पनडुब्बी सौदा किया था , 11 साल बाद मिली पहली पनडुब्बी

पाकिस्तान ने चीन में निर्मित अपनी नई हैंगोर क्लास पनडुब्बी को शामिल किया है। 1971 के युद्ध और बांग्लादेश के बनने के बाद से यह पहली बार है जब पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में अपनी नौसैनिक उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास कर रहा है। चीन के साथ पनडुब्बी सौदे पर हस्ताक्षर करने के एक दशक से ज्यादा समय बाद पाकिस्तान को पहली पनडुब्बी मिली है। यह सौदा पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा अधिग्रहण माना जाता है। अप्रैल 2015 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान पाकिस्तान और चीन के बीच 8 हैंगोर-क्लास पनडुब्बियों की खरीद का समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार, इनमें से 4 पनडुब्बियां चीन में बननी थीं और 2022-23 तक पाकिस्तान को सौंप दी जानी थीं। बाकी 4 पनडुब्बियों को कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (KSEW) में 2028 तक असेंबल किया जाना था। हालांकि, 2026 तक पाकिस्तान नौसेना में सिर्फ एक पनडुब्बी ही शामिल हो पाई है। चीन में बनने वाली बाकी तीन पनडुब्बियां- पीएनएस गाजी (PNS Ghazi), पीएनएस शुशुक (PNS Shushuk) और पीएनएस मंग्रो (PNS Mangro) लॉन्च हो चुकी हैं और फिलहाल समुद्री परीक्षण (सी ट्रायल) से गुजर रही हैं। यानी चीन में बनी पहली चार पनडुब्बियों को तय समय सीमा तक पाकिस्तान को सौंपने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि सभी 8 पनडुब्बियां 2028 से 2030 के बीच पाकिस्तान को मिलेंगी। पनडुब्बी निर्माण के लिए कराची शिपयार्ड में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। इसके तहत नया शिप लिफ्ट और ट्रांसफर सिस्टम भी लगाया गया है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि किसी नई पनडुब्बी श्रेणी का निर्माण बेहद जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया होती है। पाकिस्तान इससे पहले अगोस्ता 90बी (Agosta 90B) श्रेणी की पनडुब्बी PNS Hamza का निर्माण कर चुका है, जिसे 2008 में नौसेना में शामिल किया गया था। लेकिन हैंगोर-क्लास परियोजना आकार, लागत और तकनीक तीनों मामलों में उससे कहीं बड़ी है। हैंगोर-क्लास पनडुब्बी कार्यक्रम की अनुमानित लागत 4 से 5 अरब डॉलर (करीब 34 से 43 हजार करोड़ रुपए) है। यही वजह है कि इसे पाकिस्तान के इतिहास का सबसे महंगा नौसैनिक कार्यक्रम माना जाता है।

Cotton Production: USDA ने जारी की रिपोर्ट, 2026-27 के ग्लोबल उत्पादन अनुमान पर है कायम

यूएसडीए (USDA) ने अपनी जून की वर्ल्ड एग्रीकल्चर सप्लाई एंड डिमांड एस्टीमेट (WASDE) रिपोर्ट में वर्ष 2026-27 के लिए वैश्विक कपास उत्पादन लगभग 116 मिलियन गांठ अनुमानित है। इसके मुकाबले खपत में बढ़ोतरी (लगभग 121.7 मिलियन गांठ) होने के आसार हैं, जो इसे 6 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा सकती है। मांग में वृद्धि और कम शुरुआती स्टॉक के कारण वैश्विक अंतिम स्टॉक में गिरावट का अनुमान लगाया गया है।

USDA को चीन में मांग बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि कॉटन की मांग बांग्लादेश, पाकिस्तान में गिरी। साउथ कोरिया में कॉटन की मांग गिरी। कॉटन की ग्लोबल खपत मई में 121.69 मिलियन बेल्स (अनुमान) रहा जबकि जून में 121.76 मिलियन बेल्स (अनुमान) रहा।

कॉटन के ओपनिंग स्टॉक पर USDA ने कहा कि मई 2026-27 में 77.27 मिलियन बेल्स (अनुमान) रखा है। जबकि जून के लिए 76.63मिलियन बेल्स (अनुमान) रखा है। जबकि कॉटन के क्लोजिंग स्टॉक पर USDA ने जून के लिए 71.13 मिलियन बेल्स (अनुमान) रखा है।

भारत में कॉटन उत्पादन अनुमान

USDA ने मई का उत्पादन अनुमान कायम रखा है। 2026-27 में 24 मिलियन बेल्स उत्पादन संभव है। 2026-27 में 26 मिलियन बेल्स की खपत संभव है। 1.50 मिलियन बेल्स के एक्सपोर्ट की भी उम्मीद है। 2026-27 में 2.50 मिलियन इंपोर्ट की संभावना है।

15 जुलाई से UK FTA लागू

भारत-UK के बीच FTA 15 जुलाई से लागू होगा । भारत के 99% सामान पर UK में कोई टैक्स नहीं लगेगा । टेक्सटाइल, गारमेंट, केमिकल और बेस मेटल पर जीरो ड्यूटी होगी। अभी टेक्सटाइल, गारमेंट पर करीब 12% ड्यूटी लगती है। केमिकल पर 8% और बेस मेटल पर 10% ड्यूटी है। प्रोसेस फूड पर इंपोर्ट ड्यूटी 70% से घटकर जीरो होगी। मरीन प्रोडक्ट पर UK में इपोर्ट डूयटी 20% से घटकर जीरो होगी। UK के 91% एक्सपोर्ट पर भारत में ड्यूटी में रियायत मिलेगी। UK की व्हीस्की पर भारत में इंपोर्ट ड्यूटी 150% से घटकर 40% पर रहा। UK कार पर भारत में इंपोर्ट ड्यूटी 100% से घटकर 10% तक आएगी। कई चरणों में UK कार पर इंपोर्ट ड्यूटी में कमी आएगी।

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Rakesh Bedi: सुपरडुपर हिट फिल्म ‘धुरंधर’ की स्क्रिप्ट PMO से आई थी? राकेश बेदी ने ऐसी अफवाहों पर किया मजेदार रिएक्ट

Rakesh Bedi: जबरदस्त एक्शन और खूनखराबे के बावजूद, रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ ने दर्शकों का दि जीत लिया। इनमें से कई पल ऑनलाइन वायरल भी हुए। अब एक्टर राकेश बेदी ने बताया है कि कॉमेडी का आइडिया उन्हीं का था। उन्होंने यह भी कहा कि डायरेक्टर आदित्य धर शुरू में इस स्पाई थ्रिलर में कॉमेडी शामिल करने को लेकर हिचकिचा रहे थे। एक्टर ने उन लंबे समय से चल रहे दावों पर भी बात की जिनमें कहा जाता रहा है कि ‘धुरंधर’ की स्क्रिप्ट प्रधानमंत्री कार्यालय से आई थी।

बुधवार को राकेश ने नई दिल्ली में ‘अमृत रत्न 2026’ समिट में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने ब्लॉकबस्टर ‘धुरंधर’ फ़्रैंचाइज़ी में अपनी भूमिका के बारे में बात की। बातचीत के दौरान, एक्टर ने बताया कि आदित्य शुरू में इस स्पाई थ्रिलर में कॉमेडी वाले पल शामिल करने को लेकर हिचकिचा रहे थे।

इस अनुभवी एक्टर को ‘धुरंधर’ फ़्रैंचाइज़ी में अपनी परफ़ॉर्मेंस से नई लोकप्रियता मिली है। एक्टर ने एक भारतीय एजेंट, जमील जमाली का किरदार निभाया, जो पाकिस्तान के पॉलिटिकल सिस्टम में घुसपैठ करने के बाद वहां राजनेता बन जाता है। यह बात कि वह असल में एक भारतीय एजेंट था, फ़िल्म के क्लाइमेक्स तक छिपी रखी गई, जिससे यह कहानी के सबसे बड़े सरप्राइज़ में से एक बन गया। राकेश मानते हैं कि उन्हें शुरू से ही इस किरदार के अंजाम और ट्विस्ट के बारे में पता था।

पीछे मुड़कर देखते हुए राकेश ने कहा, “जब मैंने स्क्रिप्ट दो-तीन बार पढ़ी, तो मुझे एहसास हुआ कि यह बहुत तनावपूर्ण फ़िल्म है – न सिर्फ़ तनावपूर्ण, बल्कि बहुत गंभीर भी। फिर मुझे लगा कि एक एक्टर के तौर पर – क्योंकि मेरा झुकाव स्वाभाविक रूप से कॉमेडी की तरफ़ है और मेरा दिमाग़ मज़ाक-मस्ती की ओर ज़्यादा जाता है – मैं कुछ ऐसे पल देख पा रहा था जहां हम थोड़ा कॉमिक रिलीफ (हल्का-फुल्का मज़ाक) डाल सकते थे। इसलिए मैंने आदित्य से कहा, ‘मुझे कुछ ऐसी जगहें दिख रही हैं जहां हम थोड़ा ह्यूमर जोड़ सकते हैं। क्या मैं कोशिश करूं?’ उन्होंने जवाब दिया, ‘राकेश जी, अभी कुछ कहना मुश्किल है। देखते हैं कि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं और इस पर काम करते हैं, चीज़ें कैसे आगे बढ़ती हैं।’ शुरू में तो वे थोड़े हिचकिचा रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे हम आगे बढ़े, उन्हें भी मज़ा आने लगा और मुझे भी मज़ा आने लगा।”

बातचीत के दौरान, राकेश से पूछा गया कि उन्होंने फिल्म में कॉमेडी जोड़ने के लिए कहां से सुझाव दिए, जिसके बाद उन्होंने अपना डॉयलॉग सुनाया, “तुम्हारे अंडकोष बहुत सफेद हैं”, जो धुरंधर फिल्म के एक सीन में बत्तखों के संदर्भ में बोला गया था।

इसके बाद, राकेश ने उन दावों का खंडन किया कि धुरंधर की पटकथा प्रधानमंत्री कार्यालय से आई थी। अभिनेता ने कहा, “अब ये लाइन कोई नहीं लिख सकता। जब ये फिल्म हिट हुई तो कुछ लोगों ने कहा धुरंधर की स्क्रिप्ट जो है वो पीएमओ से लिख कर आती है। मैंने कहा बताओ पीएमओ में कौन सा ऐसा आदमी है जो ये लाइन लिख सकता है। ऐसा सोच भी नहीं सकता कोई।” फिल्म हिट हो गई, कुछ लोगों ने दावा किया कि धुरंधर की स्क्रिप्ट सीधे प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) से आई थी। मैंने कहा, ‘मुझे बताओ, पीएमओ में कौन इस तरह की पंक्ति लिख सकता है?’

हालांकि इन फ़िल्मों की कहानी कहने के शानदार अंदाज़ की तारीफ़ हुई, लेकिन कई लोगों ने शिकायत की कि इनमें पिछली सरकारों की उपलब्धियों को कम करके दिखाया गया और BJP सरकार को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।

‘धुरंधर’ 5 दिसंबर, 2025 को और ‘धुरंधर 2’ इस साल 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी। इन दोनों फ़िल्मों में रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन, राकेश बेदी, गौरव गेरा और दानिश पंडोर ने काम किया है। पहली फ़िल्म ने दुनिया भर में ₹1307 करोड़ कमाए, जबकि इसके सीक्वल ने ₹1790 करोड़ से ज़्यादा की कमाई की है।

ये फ़िल्में जसकीरत सिंह रंगी (उर्फ़ हमज़ा अली मज़ारी) की कहानी बताती हैं, जिन्हें पाकिस्तान के लियारी में एक आतंकी गुट को खत्म करने के लिए भेजा जाता है। इस काम को पूरा करने के लिए वे बलोच गैंग में घुसपैठ करते हैं, लियारी के एक नेता की बेटी से शादी करते हैं और वहाँ के समाज का हिस्सा बन जाते हैं। अब ये दोनों फ़िल्में दुनिया भर में स्ट्रीम हो रही हैं।