मिडिल ईस्ट से बड़ी खबर, ईरान ने फिर बंद किया हॉर्मुज, आखिर क्यों लिया ये फैसला?

Iran closed the Strait of Hormuz due to a ceasefire violation

Iran closes the Strait of Hormuz again : मिडिल ईस्ट से बड़ी खबर सामने आई है। खबरों के अनुसार, ईरान ने सीजफायर उल्लंघन के चलते एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद कर दिया है। ईरान की शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान का कहना है कि अमेरिका के भरोसा तोड़ने और लेबनान में इसराइल के युद्धविराम का उल्लंघन करने के कारण होर्मुज को बंद किया गया है। ईरानी सेना का दावा है कि दक्षिणी लेबनान में इसराइल ने हमला किया है, जो कि युद्धविराम का लगातार उल्लंघन है। गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के बीच समझौते के बाद दोनों देशों ने होर्मुज को खोलने का निर्णय लिया था। अब ईरान के इस फैसले ने एक बार फिर दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है।

 

मिडिल ईस्ट से बड़ी खबर सामने आई है। खबरों के अनुसार, ईरान ने सीजफायर उल्लंघन के चलते एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद कर दिया है। ईरान की शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान का कहना है कि अमेरिका के भरोसा तोड़ने और लेबनान में इसराइल के युद्धविराम का उल्लंघन करने के कारण होर्मुज को बंद किया गया है।

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ईरानी सेना ने किया यह दावा

ईरानी सेना का दावा है कि दक्षिणी लेबनान में इसराइल ने हमला किया है, जो कि युद्धविराम का लगातार उल्लंघन है। गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के बीच समझौते के बाद दोनों देशों ने होर्मुज को खोलने का निर्णय लिया था। अब ईरान के इस फैसले ने एक बार फिर दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है।

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ईरान ने दी यह चेतावनी 

ईरान की जॉइंट मिलिट्री कमांड ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर आक्रामकता जारी रहती है तो आगे के कदम उठाने की योजना बनाई गई है। ईरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने संकेत दिया कि जब तक ईरान को यह महसूस नहीं होता कि अमेरिका समझौते का पालन कर रहा है, तब तक शायद ही कुछ हो पाएगा।

 

लेबनान पर इसराइली हमलों में 16 लोगों की मौत 

बाघेई ने कहा, अंतिम समझौते के लिए बातचीत तभी शुरू होगी, जब लेबनान में लड़ाई खत्म करने सहित मुख्य वादों को पूरा किया जाएगा। शनिवार को दक्षिणी लेबनान पर हुए इसराइली हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 2 बच्चे भी शामिल थे।

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ईरानी सेना के दावे पर क्‍या बोले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस?

वहीं दूसरी ओर ईरानी सेना के दावे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान भी सामने आया है। वेंस का कहना है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ईरान होर्मुज को बंद कर रहा है। उपराष्ट्रपति वेंस का कहना है कि ईरान पर बातचीत के लिए आने वाले दिनों में उनके स्विट्जरलैंड जाने की उम्मीद है।

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नेतन्याहू बोले- लेबनान से पीछे नहीं हटेगी ईरानी सेना

इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने साफ किया है कि ईरान की सेना लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच 111 दिनों की जंग के बाद युद्ध समाप्त करने को लेकर 14 बिंदुओं का समझौता हुआ है। इसे इस्लामाबाद समझौते का नाम दिया गया है। इस समझौते में इसराइल शामिल नहीं है। ऐसे में ईरान की तरफ से होर्मुज को एक बार फिर बंद किए जाने का फैसला क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकता है।
Edited By : Chetan Gour

फिर बंद होगा होर्मुज? ईरान की बड़ी चेतावनी, अमेरिका-इजरायल पर लगाया सीजफायर तोड़ने का आरोप!

ईरान ने एक बार फिर दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यावसायिक जहाजों के लिए बंद करने का ऐलान किया है। ईरानी सेना के शीर्ष कमान का कहना है कि अमेरिका ने शांति समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है, जबकि इजरायल लगातार लेबनान में हमले जारी रखे हुए है।

ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल मुख्यालय ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका ने संघर्षविराम समझौते की पहली शर्त का खुला उल्लंघन किया है और इजरायल दक्षिणी लेबनान में लगातार हमले कर रहा है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए बंद किया जा रहा है।

“यह सिर्फ पहला कदम है”

ईरान ने चेतावनी दी है कि यह शांति समझौते के उल्लंघन के जवाब में उठाया गया पहला कदम है। अगर “आक्रामक कार्रवाई” जारी रही तो आगे और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है।

लेबनान से सेना हटाने की मांग

ईरान लंबे समय से मांग कर रहा है कि इजरायल अपनी सेना लेबनान से वापस बुलाए। लेकिन इजरायल ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया है और हिजबुल्लाह के ठिकानों पर कार्रवाई जारी रखी है।

हालांकि शुक्रवार को इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्षविराम की घोषणा हुई थी, लेकिन इसके बाद भी हिंसा थमती नजर नहीं आ रही है।

शनिवार को दक्षिणी लेबनान के सैदा (सिडोन) के पास एक गांव पर इजरायली हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई। वहीं, लेबनान की सिविल डिफेंस एजेंसी के मुताबिक, नबातियेह जिले में हुए हमलों में 16 लोगों की जान गई।

हिजबुल्लाह सांसद हसन फदलाल्लाह ने कहा कि संगठन को इजरायली हमलों का जवाब देने का पूरा अधिकार है।

स्विट्जरलैंड जा सकते हैं जेडी वेंस

इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि वह जल्द ही ईरान के साथ वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड जा सकते हैं।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते के तहत घोषित संघर्षविराम अभी भी कायम है और उन्हें ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वास्तव में बंद कर दिया गया है।

शांति वार्ता पर संकट

अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली नई वार्ता शुक्रवार को टाल दी गई थी। इन बातचीतों का उद्देश्य 60 दिनों के भीतर लंबित मुद्दों, खासकर ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम, पर स्थायी समाधान तलाशना था।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विककोफ वार्ता को फिर से शुरू कराने के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। वहीं, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के भी वहां पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

ट्रंप ने फिर जताई नाराजगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार खुद को क्षेत्रीय युद्ध रोकने वाले नेता के रूप में पेश कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि अमेरिकी समर्थन के बिना इजरायल की स्थिति बेहद कमजोर हो सकती थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप इजरायल की लगातार सैन्य कार्रवाई से नाराज हैं और उन्होंने इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के दौरान उनके रवैये पर असंतोष भी जताया था।

अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य वास्तव में बंद होता है और क्या अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता दोबारा पटरी पर लौट पाती है।

‘फिर से दोस्ती करना चाहती हैं मेलोनी…’, ट्रंप ने इटली PM को दिया अब ये जवाब

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर फिर एक बड़ा दावा किया। ट्रंप ने कहा कि जी-7 समिट के दौरान मेलोनी ने कई बार उनके साथ तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताई थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि इटली में मेलोनी की लोकप्रियता पहले के मुकाबले कम हो रही है। उनके मुताबिक, इसकी एक वजह ईरान को परमाणु हथियार बनाने या हासिल करने से रोकने में इटली की कथित असफलता हो सकती है।

अपने पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि मेलोनी ने उस समय अमेरिका का साथ नहीं दिया, जब ईरान को परमाणु हथियारों तक पहुंचने से रोकने की बात हो रही थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा इटली से प्यार करता है और उसकी सुरक्षा के लिए खड़ा रहता है। ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि नाटो ने भी इटली की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर इटली की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ट्रंप ने मेलोनी पर साधा निशाना

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के साथ तनाव के दौरान इटली ने अमेरिका को अपने एयरबेस और रनवे का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी। हालांकि, इटली सरकार का कहना था कि अमेरिका ने इसके लिए तय प्रक्रिया के तहत पहले से मंजूरी नहीं ली थी। ट्रंप ने कहा, “मेलोनी ने हमें इटली के रनवे और लैंडिंग स्ट्रिप का इस्तेमाल नहीं करने दिया। इससे हमारे कामकाज और जरूरी व्यवस्थाओं में काफी परेशानी हुई। यह तब हुआ जब अमेरिका इटली और नाटो के दूसरे सहयोगी देशों की सुरक्षा पर हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है।”

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि जॉर्जिया मेलोनी अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए उनके साथ अच्छे संबंध बनाने की कोशिश कर रही थीं। उनके अनुसार, मेलोनी जनता के बीच अपनी छवि मजबूत करने के लिए अमेरिका और उनके साथ नजदीकियां दिखाना चाहती थीं। हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर इटली सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ट्रंप और मेलोनी के बीच बयानबाजी तेज

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अब जब अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया है, तो इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए फिर से दोस्ती करना चाहती हैं। ट्रंप ने लिखा, “अब वह अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए फिर से दोस्त बनना चाहती हैं। नहीं, धन्यवाद!” वहीं, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शेयर किए गए एक वीडियो में ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया। ट्रंप ने दावा किया था कि जी-7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनसे तस्वीर खिंचवाने की गुजारिश की थी।

मेलोनी ने कहा कि ट्रंप की यह बात पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत है। उन्होंने ट्रंप की टिप्पणियों पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि अमेरिका का राष्ट्रपति अपने ही एक सहयोगी देश के बारे में इस तरह की बातें क्यों कर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि ट्रंप के लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और ऐसी बातें दोनों देशों के रिश्तों के लिए ठीक नहीं हैं।

संयुक्त राष्ट्र में इजराइली राजदूत ने UN अफसर को फटकारा:यौन हिंसा से जुड़ी रिपोर्ट में इजराइल का नाम आने से नाराज थे

संयुक्त राष्ट्र (UN) में शुक्रवार को एक बैठक के दौरान इजराइल के राजदूत डैनी डैनन और UN महासचिव की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन के बीच तीखी बहस हो गई। यह बैठक जंग के दौरान होने वाली यौन हिंसा को खत्म करने के अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौके पर न्यूयॉर्क में आयोजित की गई थी। बैठक में इजराइल के राजदूत ने UN की अधिकारी पैटन के इस्तीफे की मांग कर दी। डैनन ने आरोप लगाया कि पैटन की रिपोर्ट की वजह से इजराइल का नाम पहली बार यौन हिंसा से जुड़े आरोपों के मामले में संयुक्त राष्ट्र की ब्लैकलिस्ट में आया। उनका कहना था कि रिपोर्ट निष्पक्ष नहीं थी और इसमें इजराइल के खिलाफ पक्षपात दिखाया गया। डैनन ने पैटन पर आरोप लगाते हुए कहा, “आप संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के इजराइल-विरोधी रवैये के दबाव में आ गईं।” उनका दावा था कि गुटेरेस लगातार इजराइल की आलोचना करते रहे हैं और पैटन की रिपोर्ट भी उसी सोच से प्रभावित थी। बहस में कूदीं UN अधिकारी विवाद बढ़ने के बाद UN की अधिकारी वेनेसा फ्रेजर ने हस्तक्षेप किया। फ्रेजर ने डैनन से कहा कि वह व्यक्तिगत हमले करने से बचें। उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्ट सबूतों पर आधारित है। इस पर डैनन और नाराज हो गए। उन्होंने फ्रेजियर से कहा कि वे चुप रहें। डैनन ने कहा, हम संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश हैं और आप संयुक्त राष्ट्र की कर्मचारी हैं। अब आप चुप रहेंगी। आप और आपकी यह शर्मनाक रिपोर्ट दोनों ही चुप रहेंगी… इजराइल और हमास भी लिस्ट में शामिल दरअसल, संयुक्त राष्ट्र हर साल उन देशों, सेनाओं और सशस्त्र समूहों की सूची जारी करता है जिन पर संघर्ष के दौरान यौन हिंसा के गंभीर आरोप होते हैं। इस बार पहली बार इजराइल को इस लिस्ट में शामिल किया गया। इसके साथ ही हमास और दूसरे फिलिस्तीनी सशस्त्र समूहों को भी लिस्ट में रखा गया। 29 मई को जारी इस रिपोर्ट में के मुताबिक- वेनेसा फ्रेजर बोली- रिपोर्ट सत्यापित सबूतों पर आधारित है फ्रेजर बच्चों और सशस्त्र संघर्ष मामलों की प्रतिनिधि हैं। वह बच्चों और सशस्त्र संघर्ष से जुड़े मामलों पर काम करती हैं। उन्होंने इस हफ्ते एक अलग रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में फिलिस्तीनी बच्चों के खिलाफ कथित उल्लंघनों का जिक्र है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि कुछ इजराइली सेटलर समूहों को भी ब्लैकलिस्ट में जोड़ा जा सकता है। इजराइल पहले से ही इस रिपोर्ट की लिस्ट ऑफ शेम में शामिल है। पिछले महीने प्रमिला पैटन की रिपोर्ट जारी होने पर इजराइल के राजदूत डैनी डैनन ने इसे एक नया निचला स्तर बताया था। वहीं, इजराइल के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की थी कि वह संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ सभी संबंध समाप्त कर देगा। गुटेरेस का 10 साल का कार्यकाल इस साल के अंत में खत्म हो रहा है। —————————— ये खबर भी पढ़ें… ईरान जंग में दुनिया से 115 करोड़ बैरल तेल गायब:ऑयल रिजर्व 36 साल में सबसे कम; ट्रम्प बोले- 4 हफ्ते में भंडार खत्म हो जाते ईरान-अमेरिका समझौते के बाद इस हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया है। हालांकि, दुनिया अभी भी तेल संकट से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है। एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के करीब चार महीनों में वैश्विक बाजार से 115 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई गायब हो चुकी है। इसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है। पूरी खबर पढ़ें

बिना हिजाब गाना गाने पर ईरान की सिंगर को 74 कोड़ों की सजा!

ईरान की गायिका परस्तू अहमदी (Parastoo Ahmadi) को कथित तौर पर बिना हिजाब ऑनलाइन कॉन्सर्ट करने के मामले में 74 कोड़ों की सजा सुनाई गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सजा उनके साथ काम करने वाले आठ अन्य लोगों पर भी लागू की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीम किए गए एक ऑनलाइन कॉन्सर्ट को लेकर यह कार्रवाई की गई। इस कॉन्सर्ट में परस्तू अहमदी बिना हिजाब नजर आई थीं, जिसके बाद ईरानी अधिकारियों ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था।

बताया जा रहा है कि ईरान के कोम प्रांत की एक अदालत ने गायिका और उनकी टीम को 74 कोड़े मारने की सजा सुनाने के साथ-साथ दो साल तक देश छोड़ने पर रोक और दो साल तक किसी भी आर्टि एक्टिविटी में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध भी लगाया है।

क्या था आरोप?

अदालत में कलाकारों पर “अश्लील और अनैतिक कंटेंट” बनाने और साझा करने का आरोप लगाया गया। अधिकारियों का कहना था कि इस कंटेंट ने सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन किया है।

हालांकि, अभी तक ईरान की न्यायपालिका की ओर से इस फैसले को आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह जानकारी अदालत के कथित दस्तावेजों और मानवाधिकार संगठनों द्वारा सामने लाई गई है।

मानवाधिकार संगठनों ने जताई नाराजगी

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस सजा की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सिर्फ गाना गाने और बिना हिजाब दिखाई देने के लिए किसी कलाकार को कोड़ों की सजा देना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि ईरानी शासन महिलाओं की आवाज को भी खतरे के रूप में देखता है। वहीं कई मानवाधिकार विशेषज्ञों का दावा है कि ईरानी कानून में महिलाओं के गाने गाने या संगीत बनाने को अपराध नहीं माना गया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

विवाद दिसंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब परस्तू अहमदी ने देशभक्ति गीत “Az Khoone Javanane Vatan” का ऑनलाइन प्रदर्शन किया था। इस दौरान वह बिना हिजाब के नजर आईं और चार पुरुष संगीतकारों के साथ मंच साझा कर रही थीं।

काले रंग की स्लीवलेस ड्रेस में किए गए इस प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया और यूट्यूब पर तेजी से वायरल हो गया था। वीडियो को लाखों लोगों ने देखा।

कॉन्सर्ट के कुछ समय बाद अहमदी और उनके कुछ साथी कलाकारों को हिरासत में लिया गया था। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन वीडियो प्रकाशित करने के आरोप में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही।

क्यों चर्चा में है मामला?

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब ईरान में महिलाओं के अधिकार, हिजाब नियमों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर लगातार बहस चल रही है। आलोचकों का कहना है कि सरकार सांस्कृतिक और कलात्मक विरोध को दबाने के लिए सख्त कदम उठा रही है, जबकि समर्थक इसे देश के सामाजिक और धार्मिक नियमों को लागू करने की कार्रवाई बताते हैं।

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LPG Price Today: घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के ताजा रेट जारी, आपके शहर में कितनी है कीमत?

LPG Price Today: एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की खबर है। आज घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। 7 जून को आखिरी बार घरेलू सिलेंडर में 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इससे पहले मार्च में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए थे। वहीं, कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में पहले ही 42 रुपये से 53.50 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। सबसे खास बात यह है कि युद्ध शुरू होने के बाद घरेलू सिलेंडर की कीमतों में सिर्फ दो बार इजाफा हुआ है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर लगातार महंगा होता गया है।

आज घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम (रुपये में)

शहरघरेलू एलपीजी सिलेंडर (14.2 किग्रा)कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (19 किग्रा)
नई दिल्ली942.003,113.50
कोलकाता968.003,255.50
मुंबई941.503,067.50
चेन्नई957.503,283.00
गुरुग्राम950.503,130.00
नोएडा939.503,113.50
बेंगलुरु944.503,198.00
भुवनेश्वर968.003,290.00
चंडीगढ़951.503,136.00
हैदराबाद994.003,367.00
जयपुर945.503,141.00
लखनऊ979.503,236.00
पटना1,031.503,400.00
तिरुवनंतपुरम951.003,152.00

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से राहत

अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के चलते अब होर्मुज से जहाजों का आवागमन आसान हो जाएगा। हालांकि, ये इतनी जल्दी नहीं होगा लेकिन आने वाले समय में स्थिति एक बार फिर से सामान्य हो सकती है। मौजूदा समय में भारत को एक घरेलू LPG सिलेंडर पर 1600 रुपये का खर्च पड़ रहा है। लेकिन देश में इसे 1000 रुपये के करीब बेचा जा रहा है। यानी सीधा-सीधा लगभग 600 रुपये का नुकसान कंपनियों को हो रहा है। वहीं, सप्लाई के सामान्य होने के बाद कीमतों में गिरावट हो सकती है।

आपको बता दें कि भारत अपनी LPG की जरूरत का लगभग 90 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करता रहा है। लेकिन पश्चिमी देशों में युद्ध शुरू होने के बाद भारत की सप्लाई पर असर पड़ा है। जिस वजह से देश में LPG सिलेंडर की किल्लत महसूस होने लगी। वहीं, सरकार ने इस समस्या से बचने के लिए घरेलू स्तर पर प्रोडक्शन को शुरू किया। मौजूदा समय में 25 दिन में शहरों में और 45 दिन में गावों में LPG सिलेंडर की बुकिंग की जा सकती है।

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Petrol Diesel Price Today: कहां सबसे महंगा और सबसे सस्ता मिल रहा पेट्रोल-डीजल? जानिए आज के ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today: देशभर में शनिवार, 20 जून को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लगातार दूसरे दिन ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं, जिससे वाहन चालकों को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद वैश्विक स्तर पर तेल सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई है, जिसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर साफ नजर आ रहा है। गौरतलब है कि मई महीने में तेल कंपनियों ने चार बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे।

आज पेट्रोल और डीजल की कीमतें (रुपये प्रति लीटर)

शहरपेट्रोल (₹/लीटर)डीजल (₹/लीटर)
नई दिल्ली102.1295.20
मुंबई111.1897.83
कोलकाता113.4799.82
चेन्नई107.7799.55
गुरुग्राम102.7795.44
नोएडा102.1295.56
बेंगलुरु110.9398.80
भुवनेश्वर109.92100.92
चंडीगढ़98.1086.09
हैदराबाद115.69103.82
जयपुर112.6697.78
लखनऊ102.0595.55
पटना113.3599.36
तिरुवनंतपुरम115.49104.40

एक नोटिफिकेशन के अनुसार, सरकार ने अपनी हालिया पखवाड़ा समीक्षा में डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है, जबकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाला टैक्स पहले जैसा ही रखा है। 16 जून से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए, डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि ATF के एक्सपोर्ट पर टैक्स 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 1.5 रुपये प्रति लीटर पर ही बनी हुई है।

सबसे महंगा पेट्रोल और डीजल कहां?

देश में सबसे महंगा पेट्रोल हैदराबाद में बिक रहा है, जहां इसकी कीमत 115.69 रुपये प्रति लीटर है। इसके बाद तिरुवनंतपुरम का नंबर आता है, जहां पेट्रोल 115.49 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।

वहीं, डीजल की सबसे ज्यादा कीमत तिरुवनंतपुरम में है, जहां एक लीटर डीजल 104.40 रुपये में बिक रहा है। इसके बाद हैदराबाद में डीजल की कीमत 103.82 रुपये प्रति लीटर है।

कहां सबसे सस्ता पेट्रोल और डीजल?

दूसरी ओर, चंडीगढ़ में पेट्रोल सबसे सस्ता है, जहां इसकी कीमत 98.10 रुपये प्रति लीटर है। इसके अलावा लखनऊ में पेट्रोल 102.05 रुपये प्रति लीटर और नई दिल्ली में 102.12 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है, जो कई बड़े शहरों की तुलना में कम है।

अगर सबसे सस्ते डीजल की बात करें, तो चंडीगढ़ सबसे आगे है, जहां एक लीटर डीजल की कीमत 86.09 रुपये है।

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ट्रंप का सर्टिफिकेट, अब बाजार बनना तय

सोचें, डोनाल्ड ट्रंप पर। अमेरिका का कैसा मजाक बना डाला है। चाहे जो कर रहे हैं मगर लोकतंत्र के तकाजे में कोई कुछ भी नहीं कर सकता। ईरान ने अमेरिका को हैसियत दिखा दी है। मेरा मानना है कि साठ दिनों  बाद ईरान ही खाड़ी का मालिक होगा। दुनिया का संकट बना रहेगा। बावजूद इसके ट्रंप के झूठ, झांसे हॉट केक की तरह हैं। इसलिए भारत में भी उनका यह कहा अमृत वाक्य है कि नरेंद्र मोदी एक “टफ नेगोशिएटर” हैं। मोदी देखने में देवदूत जैसे लगते हैं और वे राजनीति में “किलर” हैं।

सवाल है क्यों ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह ‘चरित्र प्रमाणपत्र’ दिया? इसलिए क्योंकि दुनिया जानती है कि ज्योंहि प्रमाणपत्र मिलेगा त्योंहि मोदी और उनका मीडिया हिंदू भक्तों के बीच ट्रंपजी के कहे का घर-घर पहुंचा देगा। देखों हमारे भगवान को अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी देवदूत जैसा कहा!

ध्यान रहे, ट्रंप अपने आपको धूर्त, मास्टर सौदेबाज कहते हैं। उन्हे हर किसी को बेवकूफ बनाना आता है। वे प्रोपर्टी डीलर हैं। मिट्टी को भी सोने के भाव बेच सकते हैं। अमेरिका को जैसा अभी चूना लगा रहे हैं, वैसा एक भी राष्ट्रपति अमेरिकी इतिहास में नहीं हुआ है। ऐसे व्यापारी, सौदेबाज की पहली कला यह होती है कि सौदा करने से पहले सामने वाले को उसकी कीमत से थोड़ा ज्यादा महान महसूस करा दिया जाए।

ट्रंप ने आज ही लिखा है कि वे अपने आपको हिटलर, स्टालिन, माओं, सिकंदर आदि से बड़ा शक्तिमान मानते हैं। उन्हे भी इतिहास ऐसे ही याद करेगा। ट्रंप और नरेंद्र मोदी में फर्क यह है कि ट्रंप का लक्ष्य पृथ्वी के इतिहास का नंबर एक युगपुरुष होना है वही नरेंद्र मोदी को कलियुगी भारत का सबसे बड़ा देवता कहलाना है। एक की महानता का लेवल पृथ्वी का आधुनिक इतिहास है। वही दूसरे का कलियुगी हिंदुओं का नंबर एक भगवान बनना है। बारह साल, बारह युग! भारत में कभी चंद्रशेखर नाम के एक प्रधानमंत्री हुआ करते थे। उनके चेलों ने चालीस दिन बनाम चालीस साल के ऐसे नारे बनाए थे कि देश भर के चिरकूट उनका  कीर्तन करते थे।

भटक गया हूं। असल मुद्दा है कि जल्द भारत का बाजार अमेरिकी का कैप्टिव बाजार होगा। ट्रंप अमेरिका से भारत को पशुओं की खुराक भिजवाएँगे तो सोयाबीन, मक्का से लेकर वे सामान भी आएंगे, जिससे भारत के विदेश व्यापार की कंगाली में आटा और गीला होगा। अब अमेरिका का बनवाया समझौता आसानी से लापतागंज में बिकेगा। 140 करोड़ ग्राहकों के बाजार में अमेरिका की उपस्थिति इसलिए बड़ी होनी है क्योंकि अमेरिका यह भी वचन ले रहा है कि इतने वर्षों में इतना अमेरिकी सामान भारत को खरीदना ही है। सोचें, एक के बाद एक मुक्त व्यापार समझौतों की बाढ़ में फंसता बाजार। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ओमान, न्यूजीलैंड, अमेरिका से व्यापार (खरीद) के सौदे ही सौदे तो वही चीन बिना सौदे के पहले से ही सबसे बड़ा विक्रेता।

पता है व्यापारिक घाटे में सबसे बड़ा घाटे वाला कौन सा देश है? भारत। यों नंबर एक पर अमेरिका है। मगर वह इसलिए है क्योंकि अमेरिकी इतने अमीर है कि उन्हे काले हाथ करके सामान बनाना पसंद नहीं। अमेरिकियों की कमाई के असल जरिए दूसरे हैं। वह डॉलर छापता है। दुनिया को पूंजी, तकनीक देता है। अब वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भी मालिक है जिससे उसे डालर मिलेगा तो भारत की आईटी, सेवा क्षेत्र की डालर कमाई भी लापता होनीं है।

ट्रंप के मजाक की गंभीर व्याख्या

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के एवियन शहर में जी 7 बैठक से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ज्यादातर बातें मजाक में कहीं। अमेरिका मीडिया ने इसे इसी रूप में लिया। जब ट्रंप ने कहा कि भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका उसके बचाव में आएगा। तो उन्होंने साथ ही नरेंद्र मोदी की ओर से इशारा करके कहा कि मोदी अगर सत्ता में रहे तो अमेरिका बचाने आएगा। अगर कोई दूसरा रहा तो फिर सोचना होगा।

यह मोदी की अबकी बार ट्रंप सरकार वाली कूटनीति का जवाब था। जैसे मोदी ने अमेरिका के लोगों से ट्रंप को चुनने को कहा था वैसे ही ट्रंप ने भारत के लोगों से मोदी को चुनने को कह दिया। हालांकि जब मोदी नारा लगा कर आए थे तब अमेरिका के लोगों ने ट्रंप को हरवा दिया था।

बहरहाल, अमेरिका मीडिया में जो रिपोर्ट छपी या जो वीडिया आए है उसमें रिपोर्टर्स कह रहे थे कि ट्रंप ने मजाक किया। फॉक्स न्यूज की वीडियो में कहा गया, ‘प्रेसिडेंट ट्रंप क्रैक्स ए जोक अबाउट अमेरिकाज कमिटमेंट टू डिफेंड इंडिया ऐज लॉन्ग ऐज प्राइम मिनिस्टर मोदी इज स्टिल लीडिंग द कंट्री…’। लेकिन भारत में मीडिया ने इसे बहुत गंभीरता से लिया। ब्रह्मा चैलानी ने ट्विट करके यह फॉक्स न्यूज का वीडियो साझा किया और कहा कि इस मजाक को भारतीय मीडिया ने भारत की रक्षा करने के अमेरिका के पवित्र संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया।

भारतीय मीडिया को लेकर ट्रंप का मजाक और भी ऐतिहासिक था। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक भारतीय पत्रकार ने अपने सवाल की शुरुआत यह कहते हुए की, ‘राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ समझौता करके आप एक इतिहास बनाने जा रहे हैं..’। इस पर ट्रंप ने मोदी की ओर देख कर कहा कि यह रिपोर्टर मुझे बहुत अच्छा लगा। उन्होंने मोदी से कहा कि आपके वाले रिपोर्टर्स हमारे से बहुत अच्छे हैं!

ईरान बोला- समझौता टूटा तो अमेरिका जिम्मेदार होगा:लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म कराए वॉशिंगटन; हिजबुल्लाह बोला- इजराइल का कब्जा मंजूर नहीं

ईरान ने कहा है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म कराने की जिम्मेदारी अमेरिका की है। अगर समझौते का उल्लंघन होता है, तो इसके लिए वॉशिंगटन को जिम्मेदार माना जाएगा। यह बयान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत में दिया। इधर, इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू होने की खबरों के कुछ घंटे बाद हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने कहा कि संगठन इजराइली कब्जे को कभी स्वीकार नहीं करेगा। बेरूत में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह कब्जे वाली जमीन को मुक्त कराने के अपने लक्ष्य पर कायम है। संगठन लेबनान के संविधान के दायरे में काम करता है और विदेशी दबदबे को खारिज करता है। कासिम ने कहा, अगर दुश्मन हमारे खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल करता है, तो हम भी हथियारों से जवाब देंगे। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान-अमेरिका वार्ता टली: अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली पहली औपचारिक वार्ता टाल दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान में लगातार इजराइली हमलों को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद बने हुए हैं। 2. लेबनान में इजराइली हमलों में 47 लोगों की मौत: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में शुक्रवार देर रात से हुए इजराइली हवाई हमलों में 47 लोग मारे गए और 97 घायल हुए। 2 मार्च से अब तक मरने वालों की संख्या 3,980 पहुंच गई है। 3. होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बढ़ी: अमेरिका-ईरान समझौते के बाद 18 जून को 25 कारोबारी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। यह अप्रैल के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा संख्या है। हालांकि, 500 से ज्यादा जहाज और 11 हजार नाविक अब भी खाड़ी में फंसे हुए हैं। 4. ट्रम्प बोले- ईरान को एक पैसा भी नहीं मिलेगा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका मजबूरी में बातचीत की मेज पर नहीं आया, बल्कि ईरान खुद आया है। उन्होंने कहा कि अगले 60 दिनों तक ईरान को अमेरिका से एक पैसा भी नहीं मिलेगा। 5. पाकिस्तानी PM ने सऊदी क्राउन प्रिंस से की बात: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने साऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति और अगले दौर की बातचीत को कूटनीति और संवाद के जरिए आगे बढ़ाने पर जोर दिया। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…