LIVE: नीट पुनर्परीक्षा से पहले एनटीए की चूक

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Latest News Today Live Updates in Hindi : नीट पुनर्परीक्षा से पहले एनटीए की चूक, नागपुर के छात्र को आबू धाबी में दिया परीक्षा केंद्र। छात्र की शिकायत पर एनटीए हेल्पलाइन ने संशोधित एडमिट कार्ड जारी करने का आश्वासन दिया है। पल पल की जानकारी…

-इजराइल और लेबनान सीजफायर के लिए राजी।

-डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड रवाना।

अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी मामले में SIT जांच का आज छठा दिन है। बताया जा रहा है कि आज SIT मुख्‍यमंत्री को रिपोर्ट सौंप सकती है।

-21 जून को होने वाली नीट पुनर्परीक्षा से 1 दिन पहले देश भर के सभी 5000 से ज्यादा केंद्रों पर मॉकड्रील जारी।

-नीट पुनर्परीक्षा से पहले एनटीए की चूक, नागपुर के छात्र को आबू धाबी में दिया परीक्षा केंद्र। परीक्षा प्रबंधन और केंद्र आवंटन प्रक्रिया को लेकर खड़े हुए सवाल।

इजराइल हिजबुल्ला में सीजफायर, अमेरिका, कतर और ईरान ने कैसे दोनों को मनाया?

trump and netanyahu

अमेरिका ईरान शांति समझौते के बाद तल्ख तेवर दिखाने वाला इजराइल आखिरकार हिजबुल्ला से सीजफायर के लिए राजी हो गया। बताया जा रहा है कि अमेरिका और कतर इजराइल को समझाकर युद्ध विराम के लिए राजी किया तो ईरान ने हिजबुल्ला को मनाया। अब लेबनान और ईरान के अधिकारी युद्ध विराम पर चर्चा के लिए 23 से 25 जून के बीच अमेरिका में मुलाकात करेंगे। 

 

अमेरिका ईरान शांति समझौते की एक प्रमुख शर्त लेबनान में शांति भी थी। डील होती ही इजराइल ने लेबनान पर हमले तेज कर दिए। बताया जा रहा है कि इजराइल द्वारा लेबनान पर किए जा रहे हमलों से ईरान काफी नाराज था। इजराइल अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्‍ट्रपति जेडी वेंस की बात भी नहीं सुन रहा था। इस पर ईरान ने स्विट्जरलैंड में होने वाली शांति वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया।

 

इजराइल से क्या बोले ट्रंप?

इजराइल और हिजबुल्ला के बीच युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही समय बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- उन्होंने लेबनान में सक्रिय इस विद्रोही समूह के साथ संघर्ष रोकने के 

 

लिए इजराइल से सहमति बनाने का आग्रह किया था। ट्रंप ने इजराइली अधिकारियों से कहा कि आपको कभी कभी शांत होकर अपने दिमाग का भी इस्तेमाल करना चाहिए।

 

कतर और ईरान ने भी बढ़ा दबाव

अमेरिका के साथ ही कतर ने भी इजराइल पर युद्ध विराम के लिए दबाव बढ़ाया वहीं ईरान ने इस मामले में हिजबु्ल्ला को समझाकर किसी तरह सीजफायर के लिए राजी किया। बहरहाल दोनों देश युद्ध रोकने पर राजी हो गए और दुनिया ने राहत की सांस ली।

 

हालांकि कहा जा रहा है कि इजरायल दक्षिणी लेबनान में बने 'सिक्योरिटी जोन' में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा। अगर लेबनान की ओर से हमला हुआ तो इजराइल भी जवाब देने में देर नहीं करेगा।

 

गौरतलब है कि इजराइल के लेबनान पर हुए हमले के बाद दोनों देशों की बीच जंग भीषण हो गई थी। लेबनान के हमले में 4 इजराइली सैनिकों की मौत हो गई थी। इसके बाद इजराइली सेना ने लेबनान में करीब 150 स्थानों पर हमला किया था।

edited by : Nrapendra Gupta 

NEET Re-Exam कल: टेलीग्राम बंद, गाड़ियों में GPS और पैरामिलिट्री का पहरा; परीक्षा से पहले जान लें नए नियम

NEET UG RE EXAM 2026

NEET UG Re-Exam 2026: 21 जून को होने वाली NEET परीक्षा के लिए सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA)ने खास इंतजाम किए हैं। इस परीक्षा में 22.79 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे। परीक्षा से एक दिन पहले आज देशभर के करीब 5000 परीक्षा केंद्रों पर मॉक ड्रील हो रही। परीक्षा में किसी भी तरह की धांधली या गड़बड़ी को रोकने के लिए इस बार सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए। टेलीग्राम बंद कर दिया गया है। गाड़ियों में GPS के साथ ही पैरामिलिट्री का पहरा भी है। ALSO READ: टेलीग्राम पर बैन जारी रहेगा, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराया

 

NTA ने सभी एग्जाम सेंटर्स को पहले ही अपने हैंडओवर में ले लिया। नीट परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए शनिवार सुबह 9 बजे से मॉक ड्रील शुरू हो गई। यह रात तक चलेगी। इसमें करीब 2.5 लाख सुरक्षाकर्मी शामिल रहेंगे।

 

परीक्षा के लिए थ्री लेयर सिक्योरिटी

परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों का सीधा एक्सेस NTA के पास रहेगा। इस बार नीट परीक्षा को लेकर तीन लेयर सिक्योरिटी  इंतजाम किए गए हैं। प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं को लाने-ले जाने और सुरक्षित रखने की पूरी जिम्मेदारी पैरामिलिट्री फोर्स को सौंपी गई है। पेपर ले जाने वाली गाड़ियों को जीपीएस ट्रेकिंग होगी। अफवाहों और पेपर लीक के दावों को रोकने के लिए एक हाईलेवल मॉनिटरिंग सेंटर बनाया गया है। सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। टेलीग्राम को 22 जून तक अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही देश की तमाम जांच एजेंसियां, जिला प्रशासन और केंद्र व राज्य सरकारों के बड़े अधिकारी भी इस पूरी परीक्षा पर सीधा कंट्रोल रखेंगे। ALSO READ: NEET को लेकर सोशल मीडिया पर पैनी नजर, सीएम ने की समीक्षा, प्रदेश के 283 सेंटरों पर होगी परीक्षा

 

पेन-एंड-पेपर मोड में परीक्षा

NTA के अनुसार, एग्जाम दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक पेन-एंड-पेपर मोड में होगी। PwD और PwBD श्रेणी के पात्र अभ्यर्थियों को अतिरिक्त समय देते हुए शाम 6:20 बजे तक एग्जाम लिखने की अनुमति होगी। परीक्षार्थियों से 11 से 1:30 बजे के बीच परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने को कहा गया है। वहां परीक्षा से पहले आधार बेस्ड बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन जरूरी होगा।

 

डाउनलोड करना होगा नया एडमिट कार्ड

3 मई को जारी एडमिट कार्ड अब मान्य नहीं होंगे, क्योंकि कई छात्रों को उनकी पसंद के शहरों में नए एग्जाम सेंटर दिए गए हैं। NTA ने छात्रों को SMS, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए मैसेज भेजे गए हैं। ALSO READ: इंदौर में तीसरी मंजिल से गिरी NEET छात्रा, अस्पताल में मौत, हादसा या नीट पेपर लीक से है कनेक्‍शन?

 

क्या है परीक्षार्थियों के लिए गाइडलाइंस?

अभ्यर्थी पारदर्शी पानी की बोतल साथ ला सकेंगे। डायबिटिक अभ्यर्थियों को शुगर टैबलेट और केला, सेब या संतरा जैसे फल लाने की अनुमति होगी। वहीं, धार्मिक या पारंपरिक पोशाक पहनने वाले तथा फुल स्लीव या ऊनी कपड़े पहनने वाले अभ्यर्थियों को जांच प्रक्रिया के लिए और पहले पहुंचने की सलाह दी गई है। सभी परीक्षा केंद्रों पर बिजली बैकअप, पर्याप्त रोशनी, पंखे, दीवार घड़ियां, पीने का पानी, शौचालय और मेडिकल सहायता की व्यवस्था की गई है।

घर से निकलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

 

  • NTA द्वारा जारी फ्रेश एडमिट कार्ड डाउनलोड कर साथ में रख लें। इस पर पासपोर्ट साइज फोटो पहले से चिपका होना चाहिए।
  • अटेंडेंस शीट पर चिपकाने के लिए एक एक्स्ट्रा पासपोर्ट साइज फोटो। बायोमेट्रिक टेस्ट के लिए आधार कार्ड।
  • आधी आस्तीन के टी-शर्ट या शर्ट और सिंपल ट्राउजर पहनें। कपड़ों में बड़े बटन, भारी कढ़ाई, चेन या बहुत सारे पॉकेट्स नहीं होने चाहिए।
  • परीक्षा केंद्र पर जूते और बूट्स पहनना पूरी तरह बैन है। केवल साधारण चप्पल या कम हील वाली खुली सैंडल ही पहन कर जाएं।
  • एक्जाम सेंटर पर मोबाइल, स्मार्टवॉच, ब्लूटूथ, ईयरफोन, कैलकुलेटर ले जाने की इजाजत नहीं है।
  • पेन, पेंसिल, स्केल, ज्योमेट्री बॉक्स, इरेज़र या रफ कागज परीक्षा केंद्रों पर एनटीए ही देगा।

क्यों हो रही है रीएक्जाम

3 मई 2026 को NEET-UG परीक्षा देशभर में आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद कई राज्यों से प्रश्नपत्र लीक होने और कुछ अभ्यर्थियों को पहले से पेपर मिलने के आरोप सामने आए। जांच में गड़बड़ियों के संकेत मिलने पर NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी। इसके बाद 21 जून को परीक्षा कराने का फैसला किया।

edited by : Nrapendra Gupta

ट्रंप ने कहा- मेलोनी ने फोटो के लिए की थी मिन्नत, इटली की पीएम ने दिया ऐसा जवाब कि छिड़ गई नई बहस

trump meloni photo row

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि G7 सम्मेलन में मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने की गुज़ारिश की थी। मेलोनी ने इसे मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि न वह और न ही इटली कभी किसी के आगे झुकता है।

क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप और जॉर्जिया मेलोनी के बीच विवाद तब शुरू हुआ, जब ट्रंप ने इटली के टीवी चैनल La7 से बात करते हुए दावा किया कि मेलोनी फ्रांस में G7 बैठक के दौरान उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बहुत उत्सुक थीं। उन्होंने मुझसे तस्वीर लेने की गुज़ारिश की थी। वह मेरे साथ तस्वीर चाहती थीं। मैं तस्वीर नहीं खिंचवाता, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया।

 

मेलोनी ने इस तरह दिया जवाब

इटली की पीएम मेलोनी ने ट्रंप की इन सभी बातों को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया और अमेरिकी राष्ट्रपति के फोटो वाले दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा- डोनाल्ड ट्रंप के बयान पूरी तरह मनगढ़ंत हैं। सच कहूं तो मुझे हैरानी हुई है। मुझे नहीं मालूम कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं? वैसे भी यह पहली बार नहीं है।

 

उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ इतना कह सकती हूं कि यह निराशाजनक है कि वह पश्चिम और अमेरिका के दुश्मनों के प्रति दृढ़ता से पेश नहीं आते। उनके नेताओं के साथ वह कहीं ज्यादा नरमी बरतते हैं। एक बात उन्हें याद रखनी चाहिए। न मैं और न ही इटली कभी किसी से गुजारिश करता है।

विदेश मंत्री का अमेरिकी दौरा रद्द

इटली के विदेश मंत्री, एंटोनियो तायानी ने इस सप्ताहांत अपनी अमेरिका की यात्रा रद्द कर दी है। उन्होंने ट्रंप पर प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बारे में 'अपमानजनक' टिप्पणियां करने का आरोप लगाया। उन्होंने इन टिप्पणियों को 'गंभीर और अपमानजनक' बताया।

 

बहरहाल ट्रंप के दावेे  और मेलोनी के पलटवार पर दुनियाभर में नई बहस को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया पर भी मेलोनी के जवाब की चर्चा जोरों पर है।

edited by : Nrapendra Gupta

1 जुलाई से ट्रेन में बेटिकट सफर पड़ेगा भारी, 500 रुपये जुर्माना; दूसरे के टिकट पर यात्रा करने वालों पर भी सख्ती

Railway New Rules 2026

1 जुलाई से ट्रेन में बिना टिकट सफर करना खासा महंगा पड़ा सकता है। ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करते हुए पकड़े जाने पर अब पहले की तुलना में दोगुना जुर्माना देना होगा। दूसरे व्यक्ति के टिकट पर यात्रा करना भी महंगा पड़ेगा। नशे में हंगामा करने और अनुशासनहीनता करने वाले यात्रियों पर भी सख्त कार्रवाई होगी। ALSO READ: EPFO खाताधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी, जल्द UPI और ATM से निकाल सकेंगे PF का पैसा

 

रेलवे की ओर से की गई नई व्यवस्था में न्यूनतम जुर्माना बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया गया है। अभी बेटिकट यात्रा करने पर यात्री से पूरा किराया वसूला जाता है और कम से कम 250 रुपए जुर्माना लगाया जाता है। जुर्माना नहीं भरने पर 3 माह की जेल की सजा भी हो सकती है। इससे पहले 2013 में रेलवे ने जुर्माने की न्यूनतम राशि को 50 रुपए से बढ़ाकर 250 रुपए किया था।

 

नए नियमों के तहत, दूसरे के टिकट पर यात्रा करने वालों का टिकट जब्त कर लिया जाएगा। यात्री को टिकट का पूरा किराया और कम से कम 500 रुपए अतिरिक्त चार्ज देना होगा। ट्रेन या रेलवे स्टेशन पर बगैर अनुमति सामान बेचने पर भी 2000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। 

 

सभी रेलवे झोनों को आदेश जारी कर नए नियमों की जानकारी दे दी गई है। नए आदेश में भीख मांगने जैसी गतिविधियों पर भी रोक को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। बार-बार नियम तोड़ने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया है। ALSO READ: E20 पेट्रोल से इंजन खराब हुआ तो क्या इंश्योरेंस क्लेम मिलेगा? सरकार ने बताई सचाई, क्या बोलीं बीमा कंपनियां

 

रेल मंत्रालय के अनुसार, इन बदलावों का मकसद बिना टिकट यात्रा, टिकटों के दुरुपयोग और रेलवे परिसरों में होने वाली अनियमितताओं को कम करना है। इससे यात्रियों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा सुविधा मिल सकेगी। ALSO READ: मध्यप्रदेश के युवाओं को मिल रहा 50 लाख तक का लोन, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

edited by : Nrapendra Gupta

क्या सीजेपी की देखादेखी युवाओं के मुद्दे उठा रही है कांग्रेस

Gen Z  and Rahul Gandhi

आदर्श शर्मा

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक पिटीशन लॉन्च की है, जिसमें वे छात्र-छात्राओं से पूछ रहे हैं कि वे भारत की शिक्षा प्रणाली को 10 में से कितने नंबर देंगे। इसमें यह भी पूछा गया कि शिक्षा प्रणाली किस मामले में उनके लिए बेकार साबित हुई है। इसके विकल्पों में बढ़ती फीस, परीक्षा का दबाव, पेपर लीक, बेकार पाठ्यक्रम और शिक्षा के कमजोर बुनियादी ढांचे जैसे विकल्प दिए गए हैं। ALSO READ: 'कॉकरोच जनता पार्टी': सोशल मीडिया पर धमाल के बाद जमीनी हकीकत

 

यह पिटीशन कांग्रेस के नए ‘छात्रों की गूंज' अभियान का हिस्सा है। कांग्रेस इसे एक “देशव्यापी छात्र आंदोलन” बता रही है, जिसकी मांग “भारत की शोषणकारी शिक्षा प्रणाली को समाप्त करना” है। राजस्थान के कोटा में रैली के साथ इस अभियान की शुरुआत हुई और अगले महीने 10, 11 और 14 जुलाई को इसके तहत इलाहाबाद, पटना और दिल्ली में रैलियों का आयोजन होगा।

 

कांग्रेस का यह नया अभियान दिखाता है कि भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी युवाओं के मुद्दों को कितनी गंभीरता से ले रही है। इस अभियान की घोषणा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए पहले प्रदर्शन के करीब 12 दिनों बाद की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के एक बयान के विरोध में बनी सीजेपी भी युवाओं के मुद्दों पर ही विरोध-प्रदर्शन कर रही है।

 

क्या सीजेपी के नक्शे-कदम पर चल रही है कांग्रेस

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार नीरजा चौधरी का मानना है कि यह कहना गलत होगा कि कांग्रेस, कॉकरोच जनता पार्टी को कॉपी कर रही है। उन्होंने डीडब्ल्यू हिंदी से बातचीत में कहा कि सीजेपी युवाओं के मुद्दों को केंद्र में ले आयी है और अब कांग्रेस उन्हें आगे बढ़ा रही है। वे कहती हैं कि कांग्रेस के पास संगठन है, इसलिए वे हर जगह जाकर रैलियां कर सकते हैं लेकिन सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के लिए ऐसा करना मुश्किल होगा क्योंकि अभी जमीन पर उनका संगठन नहीं है। हालांकि, वे सीजेपी को श्रेय देती हैं कि उसने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही युवाओं की चिंताओं से रूबरू करवाया है।

 

राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक त्रिभुवन की भी यही राय है कि कांग्रेस, सीजेपी की देखादेखी युवाओं के मुद्दों को नहीं उठा रही है। उन्होंने डीडब्ल्यू हिंदी से बातचीत में कहा कि कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ शुरुआत से ही नीट परीक्षा का मुद्दा उठा रहे हैं और उनके प्रदर्शनों में खूब भीड़ भी जुट रही है। वे कहते हैं कि विनोद जाखड़ खुद युवा हैं और युवाओं के मुद्दों को समझ भी रहे हैं। उनके मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी के बनने से पहले से ही एनएसयूआई के बैनर तले कांग्रेस के प्रदर्शन जारी थे, लेकिन अब कांग्रेस ने इस मामले में अपनी आक्रामकता बढ़ाई है। ALSO READ: भविष्य की सैन्य ताकत के लिए भारत का स्वदेशी ड्रोन पर जोर

 

क्या सीजेपी को खतरे के रूप में देख रही है कांग्रेस

वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन का मानना है कि कॉकरोच जनता पार्टी के उदय से कांग्रेस को चिंता जरूर हुई है। वे कहते हैं कि कांग्रेस ने युवाओं के मुद्दों पर आक्रामकता इसलिए दिखाई क्योंकि उन्हें लगा कि कहीं उनके वोट या लोग टूटकर उधर न चले जाएं। उनके मुताबिक, कांग्रेस को लगा कि कहीं ऐसा न हो कि वे इस मामले में कुछ न करें और उनके समर्थक सीजेपी के पाले में चले जाएं, इसलिए उन्होंने भी देशव्यापी अभियान की योजना बनाई।

 

हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी खुद को कांग्रेस के प्रतिस्पर्धी के रूप में नहीं देखती है। सीजेपी के प्रवक्ता विजेता दहिया ने डीडब्ल्यू से कहा कि युवाओं के मुद्दों पर कांग्रेस के अभियान को कॉकरोच जनता पार्टी का पूरा समर्थन है। उन्होंने कहा कि यह हर इंसान का लोकतांत्रिक अधिकार है कि देश अच्छे से चले और इसके लिए अगर कांग्रेस अलग से प्रदर्शन कर रही है तो यह बहुत अच्छी बात है।

 

राजनीतिक टिप्पणीकार नीरजा चौधरी सीजेपी को कांग्रेस के लिए खतरे के रूप में नहीं देखती हैं। वे कहती हैं, “सीजेपी एक ऑनलाइन मूवमेंट की तरह है और वे अब एक पार्टी के तौर पर ऑफलाइन होने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन पार्टी बनाना बहुत आसान चीज नहीं होती है।” वे इस मामले में कांग्रेस की तारीफ करते हुए कहती हैं कि कांग्रेस ने इस बार यह अच्छी चीज की है कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी का पल्ला नहीं पकड़ा है।

 

क्या कांग्रेस को इन प्रदर्शनों से फायदा होगा

कोटा में हुई राहुल गांधी की रैली को भारत के पारंपरिक मीडिया खासकर न्यूज चैनलों पर तो बहुत ज्यादा कवरेज नहीं मिली, लेकिन सोशल मीडिया पर इस आयोजन से जुड़ी कई पोस्ट पर खूब प्रतिक्रियाएं आयीं। कांग्रेस ने जुलाई में इलाहाबाद, पटना और दिल्ली में भी ऐसी रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई है तो ऐसे में सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या कांग्रेस को बड़े स्तर पर युवाओं के मुद्दे उठाने का राजनीतिक फायदा मिलेगा।

 

नीरजा चौधरी कहती हैं कि इस समय यह कहना मुश्किल है कि फायदा मिलेगा या नहीं मिलेगा लेकिन यह इस पर निर्भर करेगा कि कांग्रेस का संगठन कितना मजबूत है, वह कितने उत्साह से सामने आता है और कौन लोग उसका नेतृत्व करते हैं। वे कहती हैं कि यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि कांग्रेस क्या संदेश देती है और युवाओं के सामने क्या विजन पेश करती है।

 

इस सवाल पर त्रिभुवन कहते हैं कि अगर जनता का कोई भी वर्ग सरकार से नाराज होता है, तो विपक्ष को इसका फायदा मिलता ही है। लेकिन वे यह चेतावनी भी देते हैं कि इस तरह के अभियानों का पूरा फायदा उठाने के लिए कांग्रेस को पहले अपनी अंदरूनी गुटबाजी से निपटना होगा। इसके लिए वे राजस्थान का उदाहरण देते हैं, जहां करीब 10 साल गुजरने के बाद भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट का झगड़ा पूरी तरह सुलझा नहीं है।

लापतागंज में लापता मानसून!

बारिश

जून आधा बीत गया है लेकिन मानसून लापता है। बावजूद इसके सोशल मीडिया बता दे रहा है कि सावन आया! निश्चित ही भीषण गर्मी के बीच अचानक तेज आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश हुई। पर वह एक के बाद एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभों की बारिश है, जबकि मानसून आंध्र प्रदेश के आसपास अटका हुआ है। और पूरी संभावना है कि जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर का चौमासा (आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन) गर्मी, उमस से ऐसा रूलाने वाला होगा कि हर कोई भारत में जलवायु की बरबादी में वैसे ही रोएगा जैसे प्रदूषण से सर्दियों में दिल्ली अधमरी होती है।

यों अधमरी, बरबादी जैसे शब्द बहुत भारी है लेकिन यदि कोई अमेरिकी या रेगिस्तानी अरब-अफ्रीकी देशों के लोग भी भारत की गर्मी-उमस, प्रदूषित सर्दियों में आकर घूमने के हिमाकत करें तो वह अधमरी दशा से सांस लेते हुए होंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री जून में  ही दिल्ली आए थे। उन्होने कहा वे खुद  बहुत गर्मी वाले मायामी से है लेकिन दिल्ली की तीखी गर्मी तो असहनीय है। दुनिया के मौसम, जलवायु वैज्ञानिकों की दो टूक भविष्यवाणी है कि जलवायु परिवर्तनों से सर्वाधिक दक्षिण एसिया प्रभावित होगा। सोचें,  बावजूद इस सबके हालिया खबर है कि अडानी धड़ाधड़ कोयले की खदाने ले रहे हैं और मोदीजी के साथ धधकता भारत बना देने की धुन में हैं।

बहरहाल, बात फैल गई। असल मुद्दा 2026 के चौमासे में किसान को दस तरह के संकट झेलने है। आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन में वह बारिस के लिए तरसेगा। महीनों से वैश्विक जलवायु मॉडल एल नीनो के असर की चेतावनी दे रहे है। कोई आश्चर्य नहीं जो मध्य भारत और उत्तर भारत में सूखी हवाओं ने मानसूनी धाराओं को रोक दिया है। यदि मौसम एजेंसियों के अनुमान सही निकले तो अगस्त और सितंबर में भारी समस्या होगी।

पर सब कुछ जानते हुए भी सरकार और सोशल मीडिया ने किसानों को सावन का अंधा बना रखा है। सब ठीक है, सामान्य है, समय से पहले ही मानसून चल पड़ा आदि-आदि। किसान क्योंकि सोशल मीडिया को देखता, पढ़ता है। तो वह भी जून में सावन की हवा के मुगालते में है। मेरा इस सप्ताह प्रत्यक्ष अनुभव था, जो दिल्ली से अलवर की और जाते देखा कि बाजारे की बुवाई हो रही है! जबकि दिल्ली और एनसीआर में मानसून यों भी 27-29 जून के बीच पहुंचता है। उत्तरी राजस्थान में एक से पांच जुलाई के बीच बारिस होती है। बावजूद इसके पश्चिमी विक्षोभ की बारिस में ही बाजरे की बुवाई!

कुल मिलाकर मुद्दा यह कि जलवायु के हर तरह गडबडा जाने के बावजूद सरकारी स्तर पर कुछ भी जोखिम प्रबंधन नहीं। मतलब एल नीनो यदि मानसून को भटकाएगा तो किसानों को क्या करना चाहिए, ऐसी कोई सलाह नहीं। सावधानी बरतने की नसीहत नहीं। बारिस धोखा दे सकती है सो फला-फला वैकल्पिक फसल योजनाएँ हैं। सूखा-सहिष्णु बीजों की फला व्यवस्था हैं।

ट्रंप का सर्टिफिकेट, अब बाजार बनना तय

सोचें, डोनाल्ड ट्रंप पर। अमेरिका का कैसा मजाक बना डाला है। चाहे जो कर रहे हैं मगर लोकतंत्र के तकाजे में कोई कुछ भी नहीं कर सकता। ईरान ने अमेरिका को हैसियत दिखा दी है। मेरा मानना है कि साठ दिनों  बाद ईरान ही खाड़ी का मालिक होगा। दुनिया का संकट बना रहेगा। बावजूद इसके ट्रंप के झूठ, झांसे हॉट केक की तरह हैं। इसलिए भारत में भी उनका यह कहा अमृत वाक्य है कि नरेंद्र मोदी एक “टफ नेगोशिएटर” हैं। मोदी देखने में देवदूत जैसे लगते हैं और वे राजनीति में “किलर” हैं।

सवाल है क्यों ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह ‘चरित्र प्रमाणपत्र’ दिया? इसलिए क्योंकि दुनिया जानती है कि ज्योंहि प्रमाणपत्र मिलेगा त्योंहि मोदी और उनका मीडिया हिंदू भक्तों के बीच ट्रंपजी के कहे का घर-घर पहुंचा देगा। देखों हमारे भगवान को अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी देवदूत जैसा कहा!

ध्यान रहे, ट्रंप अपने आपको धूर्त, मास्टर सौदेबाज कहते हैं। उन्हे हर किसी को बेवकूफ बनाना आता है। वे प्रोपर्टी डीलर हैं। मिट्टी को भी सोने के भाव बेच सकते हैं। अमेरिका को जैसा अभी चूना लगा रहे हैं, वैसा एक भी राष्ट्रपति अमेरिकी इतिहास में नहीं हुआ है। ऐसे व्यापारी, सौदेबाज की पहली कला यह होती है कि सौदा करने से पहले सामने वाले को उसकी कीमत से थोड़ा ज्यादा महान महसूस करा दिया जाए।

ट्रंप ने आज ही लिखा है कि वे अपने आपको हिटलर, स्टालिन, माओं, सिकंदर आदि से बड़ा शक्तिमान मानते हैं। उन्हे भी इतिहास ऐसे ही याद करेगा। ट्रंप और नरेंद्र मोदी में फर्क यह है कि ट्रंप का लक्ष्य पृथ्वी के इतिहास का नंबर एक युगपुरुष होना है वही नरेंद्र मोदी को कलियुगी भारत का सबसे बड़ा देवता कहलाना है। एक की महानता का लेवल पृथ्वी का आधुनिक इतिहास है। वही दूसरे का कलियुगी हिंदुओं का नंबर एक भगवान बनना है। बारह साल, बारह युग! भारत में कभी चंद्रशेखर नाम के एक प्रधानमंत्री हुआ करते थे। उनके चेलों ने चालीस दिन बनाम चालीस साल के ऐसे नारे बनाए थे कि देश भर के चिरकूट उनका  कीर्तन करते थे।

भटक गया हूं। असल मुद्दा है कि जल्द भारत का बाजार अमेरिकी का कैप्टिव बाजार होगा। ट्रंप अमेरिका से भारत को पशुओं की खुराक भिजवाएँगे तो सोयाबीन, मक्का से लेकर वे सामान भी आएंगे, जिससे भारत के विदेश व्यापार की कंगाली में आटा और गीला होगा। अब अमेरिका का बनवाया समझौता आसानी से लापतागंज में बिकेगा। 140 करोड़ ग्राहकों के बाजार में अमेरिका की उपस्थिति इसलिए बड़ी होनी है क्योंकि अमेरिका यह भी वचन ले रहा है कि इतने वर्षों में इतना अमेरिकी सामान भारत को खरीदना ही है। सोचें, एक के बाद एक मुक्त व्यापार समझौतों की बाढ़ में फंसता बाजार। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ओमान, न्यूजीलैंड, अमेरिका से व्यापार (खरीद) के सौदे ही सौदे तो वही चीन बिना सौदे के पहले से ही सबसे बड़ा विक्रेता।

पता है व्यापारिक घाटे में सबसे बड़ा घाटे वाला कौन सा देश है? भारत। यों नंबर एक पर अमेरिका है। मगर वह इसलिए है क्योंकि अमेरिकी इतने अमीर है कि उन्हे काले हाथ करके सामान बनाना पसंद नहीं। अमेरिकियों की कमाई के असल जरिए दूसरे हैं। वह डॉलर छापता है। दुनिया को पूंजी, तकनीक देता है। अब वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भी मालिक है जिससे उसे डालर मिलेगा तो भारत की आईटी, सेवा क्षेत्र की डालर कमाई भी लापता होनीं है।

ट्रंप के मजाक की गंभीर व्याख्या

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के एवियन शहर में जी 7 बैठक से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ज्यादातर बातें मजाक में कहीं। अमेरिका मीडिया ने इसे इसी रूप में लिया। जब ट्रंप ने कहा कि भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका उसके बचाव में आएगा। तो उन्होंने साथ ही नरेंद्र मोदी की ओर से इशारा करके कहा कि मोदी अगर सत्ता में रहे तो अमेरिका बचाने आएगा। अगर कोई दूसरा रहा तो फिर सोचना होगा।

यह मोदी की अबकी बार ट्रंप सरकार वाली कूटनीति का जवाब था। जैसे मोदी ने अमेरिका के लोगों से ट्रंप को चुनने को कहा था वैसे ही ट्रंप ने भारत के लोगों से मोदी को चुनने को कह दिया। हालांकि जब मोदी नारा लगा कर आए थे तब अमेरिका के लोगों ने ट्रंप को हरवा दिया था।

बहरहाल, अमेरिका मीडिया में जो रिपोर्ट छपी या जो वीडिया आए है उसमें रिपोर्टर्स कह रहे थे कि ट्रंप ने मजाक किया। फॉक्स न्यूज की वीडियो में कहा गया, ‘प्रेसिडेंट ट्रंप क्रैक्स ए जोक अबाउट अमेरिकाज कमिटमेंट टू डिफेंड इंडिया ऐज लॉन्ग ऐज प्राइम मिनिस्टर मोदी इज स्टिल लीडिंग द कंट्री…’। लेकिन भारत में मीडिया ने इसे बहुत गंभीरता से लिया। ब्रह्मा चैलानी ने ट्विट करके यह फॉक्स न्यूज का वीडियो साझा किया और कहा कि इस मजाक को भारतीय मीडिया ने भारत की रक्षा करने के अमेरिका के पवित्र संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया।

भारतीय मीडिया को लेकर ट्रंप का मजाक और भी ऐतिहासिक था। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक भारतीय पत्रकार ने अपने सवाल की शुरुआत यह कहते हुए की, ‘राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ समझौता करके आप एक इतिहास बनाने जा रहे हैं..’। इस पर ट्रंप ने मोदी की ओर देख कर कहा कि यह रिपोर्टर मुझे बहुत अच्छा लगा। उन्होंने मोदी से कहा कि आपके वाले रिपोर्टर्स हमारे से बहुत अच्छे हैं!

डीजल, खाद, बीज भी लापता

मानसून लापता है। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव वाला क्षेत्र नहीं बन रहा है। जो बन रहा है वह इतना मजबूत नहीं है कि मानसून को पुश करक आगे बढ़ा सके। सो, इस साल दक्षिण पश्चिम मानसून दूसरी बार अटक गया है। पहले केरल के तट पर पहुंचने पहले कई दिन तक अटका रहा और फिर तेजी से आगे बढ़ने के बाद दोबारा अटक गया। 14 जून को सेटेलाइट की तस्वीरों में मानसून के बादल दिख रहे थे लेकिन 15 जून को लापता हो गए। प्री मानसून बारिश कई जगह हुई है लेकिन बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित ज्यादातर पूर्वी राज्यों में मानसून की निर्धारित तिथि निकल गई है और बारिश नहीं हुई। अभी पूरे हफ्ते यही स्थिति रहनी है। 25 जून के म्यांमार की ओर से बंगाल की खाड़ी में एक कमजोर गतिविधि की संभावना है। इससे पहले गुजरात में 79 फीसदी, महाराष्ट्र में 78 फीसदी और झारखंड में 70 फीसदी कम बारिश होने की खबर है। जानकारों का मानना है कि इस साल सामान्य से 50 फीसदी कम बारिश हो सकती है।

सो, बारिश नहीं है तो पानी नहीं है और खरीफ की खेती के लिए तैयार किसान चिंता में है। बारिश नहीं हुई है तो नदियां और नहरें भी सूखी हैं और पूर्वी भारत भी भूमिगत जल स्तर नीचे जाने के उस संकट से घिरा है, जो अब तक पश्चिम में दिखाई देता था। भूमिगत जल स्तर नीचे चला गया है और बोरिंग या पम्पिंग सेट के जरिए पानी निकालना निरंतर मुश्किल होता जा रहा है। अगर किसान के पास बोरवेल है या पम्पिंग सेट है तो उसे चलाने के लिए बिजली या डीजल की जरुरत है। पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में तो बोरवेल है लेकिन उनके उलट बिहार, झारखंड आदि राज्यों में किसान पम्पिंग सेट का इस्तेमाल किया जाता है और उसके लिए डीजल चाहिए, जो बाजार से

लापता है। सरकार कह नहीं रही है लेकिन ऐसे उपाय कर रही है, जिससे लोगों को डीजल मिलने में मुश्किल हो।

सरकार ने अनिवार्य कर दिया है कि गैलन या कंटेनर में पेट्रोल पंप से डीजल नहीं ले सकते हैं। सवाल है कि क्या किसान अपना पम्पिंग सेट लेकर पेट्रोल पंप पर जाएं और डीजल खरीदें? छोटे किसानों के लिए यह संभव ही नहीं है। इसलिए वे बड़े किसानों या गांव के साहूकारों पर निर्भर हैं और ज्यादा कीमत देकर डीजल खरीद रहे हैं। अगर कोई किसान अपना पम्पिंग सेट लेकर पेट्रोल पंप पर जा रहा है तो वहां से 20 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं मिल रही है। सरकार ने आदेश जारी करके सामान्य पेट्रोल पंप पर दो सौ लीटर से ज्यादा डीजल नहीं देने का नियम बनाया है लेकिन बिहार जैसे राज्यों में आम लोगों के लिए इसे घटा कर 20 लीटर कर दिया गया है। सोचें, कीमत एक सौ रुपए लीटर तक पहुंची है और उपलब्धता कम हो गई है। किसान सारे दिन इस जुगाड़ में घूम रहे हैं कि कैसे डीजल मिले ताकि खेत में पानी पहुंचे और धान के बीज गिराए जाएं या जिनका बिचड़ा तैयार है वे रोपनी कर सकें।

किसान का संकट इतने पर समाप्त नहीं हो रहा है। उसकी स्थिति तो मुंशी प्रेमचंद के किसान से भी बदतर दिख रही है। उसे आसमान से बारिश का इंतजार है या पेट्रोल पंप से डीजल मिलने का इंतजार है और साथ ही खाद व बीज की उपलब्धता का भी इंतजार है। सरकार कह रही है कि उसके स्टॉक में खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। कहा गया है कि दो करोड़ मिट्रिक टन खाद है। लेकिन किसानों को 15 किलो की जगह पांच किलो खाद मिल रही है। बिहार, उत्तर  प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे कृषि वाले राज्यों से तस्वीरें आ रही हैं कि किसान खाद और बीज के सेंटर के बाहर रात गुजार रहे हैं ताकि सुबह उनको खाद मिल सके। यूरिया और डीएपी दोनों जरूरी उर्वरक बाजार से लापता हैं। यूरिया की सामान्य कीमत 266 रुपए बोरी और डीएपी की 1,350 रुपए बोरी है। लेकिन यूरिया पांच सौ रुपए और डीएपी दो से ढाई हजार रुपए बोरी के दाम पर बिक रहा है। सरकार कालाबाजारी करने वालों को चेतावनी दे रही है और स्टॉक नहीं करने की सलाह दे रही है लेकिन संकट यह है कि रेलवे के रैक भी समय पर नहीं पहुंच रहे हैं ताकि बाजार में आसानी से खाद उपलब्ध हो। सरकार ने 17 लाख टन यूरिया आयात किया है लेकिन वह यूरिया भी बाजार में आने से पहले ही लापता हो जा रहा है। इस बार तो कहा जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जंग की वजह से समस्या हुई है लेकिन खेती के समय डीजल, खाद और पानी की समस्या चिरंतन है। किसान को इससे कभी मुक्ति नहीं मिलती है। ऊपर से प्रेमचंद के किसान की तरह आज भी भारत का किसान साहूकारों के ऊंचे ब्याज वाले कर्ज के तले दबा है। उससे भी मुक्ति नहीं मिल रही है।