Yoga Day Essay: योग अपनाएं, स्वस्थ जीवन पाएं: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष निबंध

A visual providing information on adopting yoga as a lifestyle for good health

Yoga Day Essay in Hindi: योग भारत की अमूल्य धरोहर है, जिसे आज पूरी दुनिया ने अपनाया है। इसी महत्व को देखते हुए हर वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। यह दिन लोगों को योग के प्रति जागरूक करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

1. प्रस्तावना

2. योग का अर्थ और उद्गम

3. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का इतिहास

4. वर्ष 2026 की थीम और महत्व

5. स्वास्थ्य के लिए योग के लाभ

6. उपसंहार

यहां पढ़ें विश्व योग दिवस के अवसर पर आधुनिक जीवनशैली और योग की प्रासंगिकता दर्शाता बेहतरीन हिन्दी निबंध…

 

1. प्रस्तावना

'योग कर्मसु कौशलम्' अर्थात् कर्मों में कुशलता ही योग है। आज की 21वीं सदी तकनीक और भौतिक सुख-साधनों की सदी है। लेकिन इस चकाचौंध के बीच इंसान ने जिस चीज को सबसे पहले खोया है, वह है उसका स्वास्थ्य और मानसिक शांति। तनाव, डिप्रेशन, अनिद्रा और भागदौड़ भरी जीवनशैली ने मानव शरीर को बीमारियों का घर बना दिया है।

ऐसे में, भटके हुए इंसान को सही राह दिखाने और संपूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करने का सबसे सशक्त माध्यम 'योग' है। योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीने की एक संपूर्ण कला है जो हमें 'स्वस्थ जीवन' की ओर ले जाती है।

 

2. योग का अर्थ और उद्गम

'योग' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत की 'युज' धातु से हुई है, जिसका अर्थ होता है- जोड़ना या मिलना। व्यक्तिगत चेतना (आत्मा) का सार्वभौमिक चेतना (परमात्मा) से मिलन ही योग है। भारत की पावन भूमि पर हजारों वर्ष पहले महर्षि पतंजलि ने योग को व्यवस्थित रूप दिया और 'योगसूत्र' की रचना की।

उन्होंने अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि) के माध्यम से मनुष्य को तन, मन और आत्मा से शुद्ध करने का मार्ग बताया।

 

3. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का इतिहास

भारत की इस प्राचीन और अमूल्य धरोहर को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाने का श्रेय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। उन्होंने 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में 21 जून को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे रिकॉर्ड 177 देशों ने स्वीकार किया।

 

21 जून ही क्यों? 21 जून को उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे 'ग्रीष्म संक्रांति' कहते हैं। भारतीय संस्कृति में यह समय आध्यात्मिक सिद्धियों और सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए विशेष माना जाता है। तब से हर साल दुनिया भर में इस दिन को एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

 

4. वर्ष 2026 की थीम और महत्व

इस वर्ष 21 जून 2026 को हम सभी 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहे हैं। आयुष मंत्रालय द्वारा इस वर्ष की थीम 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' (Yoga for Healthy Ageing) निर्धारित की गई है।

 

यह थीम आज के समय में बेहद प्रासंगिक है। जैसे-जैसे चिकित्सा विज्ञान के कारण इंसानी उम्र बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह चुनौती भी आ रही है कि हम बुढ़ापे को लाचारी के बजाय सक्रियता और आनंद के साथ कैसे जिएं। योग के नियमित अभ्यास से ढलती उम्र में भी जोड़ों की मजबूती, बेहतर मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और आत्मनिर्भरता बनी रहती है। यह थीम संदेश देती है कि योग हर उम्र के व्यक्ति के लिए अमृत समान है।

 

5. स्वास्थ्य के लिए योग के लाभ

'योग अपनाएं, स्वस्थ जीवन पाएं' यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक सत्य है। योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

 

शारीरिक फिटनेस और लचीलापन: ताड़ासन, भुजंगासन और सूर्य नमस्कार जैसे आसनों से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है।

 

मानसिक शांति और तनाव मुक्ति: प्राणायाम- जैसे अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और ध्यान/ Meditation के जरिए मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन दूर होते हैं।

 

रोग प्रतिरोधक क्षमता/ Immunity में वृद्धि: योग शरीर के विषैले तत्वों यानी Toxins को बाहर निकालता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और बीमारियां दूर रहती हैं। यह ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी क्रॉनिक बीमारियों को नियंत्रित करने में रामबाण है।

 

6. उपसंहार

योग किसी एक धर्म या संप्रदाय का न होकर यह पूरी मानवता के कल्याण का विज्ञान है। यह हमें सिखाता है कि दवाइयों पर निर्भर रहने से बेहतर है कि हम अपनी जीवनशैली को सुधारें।

 

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की सार्थकता तभी है जब हम योग को केवल 21 जून के एक दिन के उत्सव तक सीमित न रखकर, इसे अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। आइए, इस योग दिवस पर हम स्वयं से यह संकल्प लें कि हम प्रतिदिन कम से कम 20-30 मिनट योग को देंगे। क्योंकि जब हर नागरिक स्वस्थ होगा, तभी एक समृद्ध और सशक्त समाज का निर्माण होगा।

 

'करें योग, रहें निरोग।'

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

belly fat yoga: योगा डे 2026: तोंद कम करने के 5 परफेक्ट योगासन, कोई भी 1 करें

A photo of yoga poses providing information on reducing belly fat and a protruding abdomen. The image shows five types of yoga

 

Yoga Day 2026: व्यस्त जीवनशैली के कारण अक्सर लोग जिम जाने का समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में बढ़ता हुआ पेट या तोंद न सिर्फ हमारी पर्सनैलिटी को प्रभावित करती है, बल्कि यह कई बीमारियों का कारण भी बन सकती है। अत: इसके लिये योग एक बेहद प्रभावी और परमानेंट समाधान है। योग कोई एक दिन की चीज नहीं, बल्कि जीवनशैली है। अगर आप सच में तोंद कम करना चाहते हैं, तो किसी भी 1 योगासन को रोज अपनाएं। धीरे-धीरे आपका शरीर हल्का, फिट और एनर्जेटिक महसूस करेगा।ALSO READ: June 21 Yoga Day: विश्व योग दिवस क्या है? जानें वर्ष 2026 की थीम

 

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के इस मौके पर, यहां पेट की चर्बी/ बैली फैट (Belly Fat) को तेजी से पिघलाने वाले 5 सबसे बेहतरीन योगासन दिए जा रहे हैं। आपको ये सारे आसन करने की जरूरत नहीं है, अपने शरीर की क्षमता के अनुसार कोई भी 1 आसन चुन लें और उसे रोजाना नियम से करें।

 

1. नौकासन- कोर को मजबूत बनाने के लिए

2. भुजंगासन- पेट स्ट्रेच करने के लिए

3. पादहस्तासन- चर्बी को निचोड़ने के लिए

4. धनुरासन- पूरे शरीर का फैट बर्न करने के लिए

फलकासन/प्लैंक पोज़/कुंभकासन- आधुनिक और सबसे असरदार

 

तोंद कम करने वाले 5 परफेक्ट योगासन

 

1. नौकासन- कोर को मजबूत बनाने के लिए

यह आसन पेट की चर्बी पर सीधे काम करता है। इसमें शरीर का आकार एक नाव/ बोट की तरह हो जाता है।

 

कैसे करें: पीठ के बल सीधे लेट जाएं। सांस भरते हुए अपने सिर, कंधों, छाती और पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं। आपके हाथ आपके पैरों की सीध में होने चाहिए। शरीर का पूरा वजन आपके नितंबों (hip bones) पर होगा। इस स्थिति में 20-30 सेकंड रुकें।

 

फायदा: यह पेट की मांसपेशियों को कसता है और एब्स (abs) को टोन करता है।

 

2. भुजंगासन- पेट स्ट्रेच करने के लिए

यह आसन पेट के निचले हिस्से की चर्बी को कम करने और रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने के लिए बेहतरीन है।

 

कैसे करें: पेट के बल उल्टे लेट जाएं। अपनी हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें। सांस लेते हुए शरीर के अगले हिस्से को अर्थात् नाभि तक ऊपर उठाएं और आसमान की तरफ देखें। कुछ देर इसी मुद्रा में रहें और सांस छोड़ते हुए नीचे आएं।

 

फायदा: इससे पेट की मांसपेशियों में अच्छा खिंचाव आता है, जिससे वहा जमा फैट बर्न होता है और पाचन क्रिया सुधरती है।

 

3. पादहस्तासन- चर्बी को निचोड़ने के लिए

यह खड़े होकर आगे की तरफ झुकने वाला आसन है, जो पेट को अंदर दबाने में मदद करता है।

 

कैसे करें: सीधे खड़े हो जाएं। सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं। अब सांस छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकें और अपनी हथेलियों को पैरों के पास जमीन पर टिकाने की कोशिश करें। अपना सिर घुटनों से छुआने का प्रयास करें।

 

फायदा: यह पेट के अंगों को मसाज देता है और तोंद को बहुत तेजी से अंदर करता है।

 

4. धनुरासन- पूरे शरीर का फैट बर्न करने के लिए

इसमें शरीर का आकार खिंचे हुए धनुष जैसा बनता है। यह पेट के हिस्से को पूरी तरह से स्ट्रेच और टोन करता है।

 

कैसे करें: पेट के बल लेट जाएं। घुटनों को मोड़कर अपने पैरों को नितंबों के पास लाएं और हाथों से अपने टखनों (ankles) को पकड़ें। अब सांस लेते हुए अपनी छाती और जांघों को जमीन से ऊपर उठाएं। पूरा वजन पेट पर आ जाएगा।

 

फायदा: यह पेट की चर्बी घटाने के साथ-साथ कब्ज की समस्या को भी जड़ से खत्म करता है।

 

5. फलकासन/प्लैंक पोज़/कुंभकासन- आधुनिक और सबसे असरदार

यदि आप पारंपरिक योग से अलग कुछ आसान और बहुत प्रभावी चाहते हैं, तो प्लैंक सबसे बेस्ट है।

 

कैसे करें: पेट के बल लेटकर अपने हाथों की कोहनियों और पैरों के पंजों पर पूरे शरीर का वजन उठाएं। ध्यान रहे कि आपका शरीर सिर से लेकर पैर तक एक सीधी रेखा (Flat) में होना चाहिए। पेट को अंदर की तरफ खींच कर रखें और 30 से 60 सेकंड तक रुकें।

 

फायदा: यह बहुत कम समय में पेट की चर्बी को मेश (melt) कर देता है और पूरे कोर को रॉक-सॉलिड बनाता है।

 

जरूरी नियम: इन 5 आसनों में से जो भी 1 आसन आपको आसान और कम्फर्टेबल लगे, उसे चुन लें। शुरुआत में इसे कम समय के लिए करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। ध्यान रखें कि योग हमेशा सुबह खाली पेट ही करें। अच्छे रिजल्ट के लिए योग के साथ-साथ मीठा और जंक फूड कम कर दें।

 

इस योगा डे पर आप महंगे जिम की जगह घर पर ही ये 5 पावरफुल योगासन करके अपनी तोंद (belly fat) कम कर सकते हैं। इनमें से कोई भी 1 योगासन नियमित रूप से करें तो भी अच्छा असर दिख सकता है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: योगा डे 2026: ध्यान क्या है, सुदर्शन क्रिया, सक्रिय ध्यान या भावातीत ध्यान?

belly fat yoga: योगा डे 2026: तोंद कम करने के 5 परफेक्ट योगासन, कोई भी 1 करें

A photo of yoga poses providing information on reducing belly fat and a protruding abdomen. The image shows five types of yoga

 

Yoga Day 2026: व्यस्त जीवनशैली के कारण अक्सर लोग जिम जाने का समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में बढ़ता हुआ पेट या तोंद न सिर्फ हमारी पर्सनैलिटी को प्रभावित करती है, बल्कि यह कई बीमारियों का कारण भी बन सकती है। अत: इसके लिये योग एक बेहद प्रभावी और परमानेंट समाधान है। योग कोई एक दिन की चीज नहीं, बल्कि जीवनशैली है। अगर आप सच में तोंद कम करना चाहते हैं, तो किसी भी 1 योगासन को रोज अपनाएं। धीरे-धीरे आपका शरीर हल्का, फिट और एनर्जेटिक महसूस करेगा।ALSO READ: June 21 Yoga Day: विश्व योग दिवस क्या है? जानें वर्ष 2026 की थीम

 

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के इस मौके पर, यहां पेट की चर्बी/ बैली फैट (Belly Fat) को तेजी से पिघलाने वाले 5 सबसे बेहतरीन योगासन दिए जा रहे हैं। आपको ये सारे आसन करने की जरूरत नहीं है, अपने शरीर की क्षमता के अनुसार कोई भी 1 आसन चुन लें और उसे रोजाना नियम से करें।

 

1. नौकासन- कोर को मजबूत बनाने के लिए

2. भुजंगासन- पेट स्ट्रेच करने के लिए

3. पादहस्तासन- चर्बी को निचोड़ने के लिए

4. धनुरासन- पूरे शरीर का फैट बर्न करने के लिए

फलकासन/प्लैंक पोज़/कुंभकासन- आधुनिक और सबसे असरदार

 

तोंद कम करने वाले 5 परफेक्ट योगासन

 

1. नौकासन- कोर को मजबूत बनाने के लिए

यह आसन पेट की चर्बी पर सीधे काम करता है। इसमें शरीर का आकार एक नाव/ बोट की तरह हो जाता है।

 

कैसे करें: पीठ के बल सीधे लेट जाएं। सांस भरते हुए अपने सिर, कंधों, छाती और पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं। आपके हाथ आपके पैरों की सीध में होने चाहिए। शरीर का पूरा वजन आपके नितंबों (hip bones) पर होगा। इस स्थिति में 20-30 सेकंड रुकें।

 

फायदा: यह पेट की मांसपेशियों को कसता है और एब्स (abs) को टोन करता है।

 

2. भुजंगासन- पेट स्ट्रेच करने के लिए

यह आसन पेट के निचले हिस्से की चर्बी को कम करने और रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने के लिए बेहतरीन है।

 

कैसे करें: पेट के बल उल्टे लेट जाएं। अपनी हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें। सांस लेते हुए शरीर के अगले हिस्से को अर्थात् नाभि तक ऊपर उठाएं और आसमान की तरफ देखें। कुछ देर इसी मुद्रा में रहें और सांस छोड़ते हुए नीचे आएं।

 

फायदा: इससे पेट की मांसपेशियों में अच्छा खिंचाव आता है, जिससे वहा जमा फैट बर्न होता है और पाचन क्रिया सुधरती है।

 

3. पादहस्तासन- चर्बी को निचोड़ने के लिए

यह खड़े होकर आगे की तरफ झुकने वाला आसन है, जो पेट को अंदर दबाने में मदद करता है।

 

कैसे करें: सीधे खड़े हो जाएं। सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं। अब सांस छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकें और अपनी हथेलियों को पैरों के पास जमीन पर टिकाने की कोशिश करें। अपना सिर घुटनों से छुआने का प्रयास करें।

 

फायदा: यह पेट के अंगों को मसाज देता है और तोंद को बहुत तेजी से अंदर करता है।

 

4. धनुरासन- पूरे शरीर का फैट बर्न करने के लिए

इसमें शरीर का आकार खिंचे हुए धनुष जैसा बनता है। यह पेट के हिस्से को पूरी तरह से स्ट्रेच और टोन करता है।

 

कैसे करें: पेट के बल लेट जाएं। घुटनों को मोड़कर अपने पैरों को नितंबों के पास लाएं और हाथों से अपने टखनों (ankles) को पकड़ें। अब सांस लेते हुए अपनी छाती और जांघों को जमीन से ऊपर उठाएं। पूरा वजन पेट पर आ जाएगा।

 

फायदा: यह पेट की चर्बी घटाने के साथ-साथ कब्ज की समस्या को भी जड़ से खत्म करता है।

 

5. फलकासन/प्लैंक पोज़/कुंभकासन- आधुनिक और सबसे असरदार

यदि आप पारंपरिक योग से अलग कुछ आसान और बहुत प्रभावी चाहते हैं, तो प्लैंक सबसे बेस्ट है।

 

कैसे करें: पेट के बल लेटकर अपने हाथों की कोहनियों और पैरों के पंजों पर पूरे शरीर का वजन उठाएं। ध्यान रहे कि आपका शरीर सिर से लेकर पैर तक एक सीधी रेखा (Flat) में होना चाहिए। पेट को अंदर की तरफ खींच कर रखें और 30 से 60 सेकंड तक रुकें।

 

फायदा: यह बहुत कम समय में पेट की चर्बी को मेश (melt) कर देता है और पूरे कोर को रॉक-सॉलिड बनाता है।

 

जरूरी नियम: इन 5 आसनों में से जो भी 1 आसन आपको आसान और कम्फर्टेबल लगे, उसे चुन लें। शुरुआत में इसे कम समय के लिए करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। ध्यान रखें कि योग हमेशा सुबह खाली पेट ही करें। अच्छे रिजल्ट के लिए योग के साथ-साथ मीठा और जंक फूड कम कर दें।

 

इस योगा डे पर आप महंगे जिम की जगह घर पर ही ये 5 पावरफुल योगासन करके अपनी तोंद (belly fat) कम कर सकते हैं। इनमें से कोई भी 1 योगासन नियमित रूप से करें तो भी अच्छा असर दिख सकता है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: योगा डे 2026: ध्यान क्या है, सुदर्शन क्रिया, सक्रिय ध्यान या भावातीत ध्यान?

International Yoga Day 2026: रोज सिर्फ 5 मिनट करें यह प्राणायाम, शरीर और मन को मिलेंगे 5 बड़े फायदे

Picture shows a girl doing pranayama with green grass and the sun in the background

प्रतिवर्ष 21 जून को विश्‍व योग दिवस मनाया जाता है। यदि आप योगासान करना जानते हैं तो यह प्राणायम की तैयारी के बेहतर है। यदि आप नहीं भी जानते हैं तो भी आप प्राणायाम करके भरपूर लाभ उठा सकते हैं। बस जरूरी यह है कि आप इसे सही तरीके और नियम के साथ करें। चलिए जानते हैं प्राणायम के 5 फायदे और विधि।

 

जानें कैसे करें अनुलोम-विलोम प्राणायाम:

  • यदि आप नए हैं तो आपको अनुलोम विलोम प्राणायाम करना चाहिए, जिसे 'नाड़ी शोधन प्राणायाम' भी कहा जाता है।
  • किसी शांत जगह पर पद्मासन, सुखासन या आरामदायक मुद्रा में बैठें।
  • दाएं हाथ के अंगूठे से दाहिने नथुने को बंद करें।
  • बाएं नथुने से धीरे-धीरे और गहराई से सांस लें।
  • बाएं नथुने को अनामिका यानी रिंग फिंगर से बंद करें और अंगूठे को हटाकर दाहिने नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
  • अब दाहिने नथुने से सांस लें।
  • दाहिने नथुने को अंगूठे से बंद करें और अनामिका हटाकर बाएं नथुने से सांस छोड़ें।
  • यह एक चक्र पूरा हुआ। इसी तरह 5 मिनट तक अभ्यास करें। शुरुआत 5 मिनट से करें, धीरे-धीरे 15-15 मिनट तक बढ़ाएं।

 

अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने के 5 प्रमुख फायदे:

1. मन और मस्तिष्क:

अनुलोम विलोम पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे तनाव वाले हार्मोन कम होते और मन शांत होता है। मस्तिष्क के बाएं और दाएं गोलार्द्धों जो कि तर्क और रचनात्मकता से जुड़े होते हैं के बीच संतुलन स्थापित करता है, जिससे एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।

 

2. फेफड़ों और श्‍वसन प्रणाली:

यह फेफड़ों की क्षमता यानी लंग की कैपेसिटी को बढ़ाता है, जिससे अधिक ऑक्सीजन अंदर आती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है। यह श्वसन प्रणाली को मजबूत करके अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, साइनस और एलर्जी जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं से मुक्ति दिलाता है। यह श्वास मार्ग को साफ करता है और सूजन को कम करता है।

 

3. ब्लड प्रेशर:

नियमित अभ्यास उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर को कम करने और नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है, क्योंकि यह तंत्रिका तंत्र को शांत करता है। 

 

4. डिटॉक्सिफाई:

इस प्राणायाम से शरीर में ऑक्सीजन के बेहतर प्रवाह और तंत्रिका तंत्र के संतुलन से पाचन क्रिया में भी सुधार होता है। गहरी और नियंत्रित श्वास शरीर से विषाक्त पदार्थों को अधिक कुशलता से बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे शरीर आंतरिक रूप से शुद्ध होता है। यह शुद्धि हमें निरोगी बनाकर हमारी आयु को बढ़ाने वाली सिद्ध होती है। 

 

5. प्रतिरक्षा प्रणाली:

बेहतर ऑक्सीजन प्रवाह, तनाव में कमी और शरीर का आंतरिक संतुलन प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करता है, जिससे शरीर बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है।

 

विशेष: यदि आप अनुलोम विलोम में पारंगत हो जाएं तब आप भस्त्रिका और कपालभाती प्राणायम की ओर बढ़ें। इसे भी आप 5 मिनट से 

Eye Health Yoga: योगा डे 2026: आंखों को सेहतमंद बनाए रखने के लिए 5 नुस्खे

Yoga is a boon for eye health; the image shows simple ways to improve eye health

Vision Improvement Yoga: 21 जून को हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। आजकल हमारा अधिकांश समय कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन के सामने बीतता है, जिससे आंखों में सूखापन, थकान, धुंधलापन और सिरदर्द जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।ALSO READ: योगा डे 2026: ध्यान क्या है, सुदर्शन क्रिया, सक्रिय ध्यान या भावातीत ध्यान?

 

योग केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि हमारी आंखों को भी नई ऊर्जा और रोशनी दे सकता है। योग दिवस 2026 के इस मौके पर, यहां 5 आसान और असरदार आई योग और नुस्खे दिए जा रहे हैं जिन्हें आप रोज़ाना अपने रूटीन में शामिल कर सकते हैं।

 

आंखों को स्वस्थ रखने के 5 आसान योग और नुस्खे

 

1. पामिंग (हथेलियों को रगड़ना)

यह आंखों को तुरंत आराम देने वाली सबसे बेहतरीन क्रिया है। कंप्यूटर पर काम करते समय हर एक-दो घंटे में इसे कर सकते हैं।

 

कैसे करें: शांत बैठ जाएं। अपनी दोनों हथेलियों को आपस में तब तक रगड़ें जब तक कि वे गर्म न हो जाएं। अब आंखें बंद करें और अपनी गर्म हथेलियों को कटोरी के आकार में आंखों पर रख लें, ध्यान रहे आंखों पर सीधा दबाव न डालें।

 

फायदा: हथेलियों की गर्मी आंखों की नसों को शांत करती है और तनाव दूर करती है।

 

2. ब्लिंकिंग (पलकें झपकाना)

जब हम स्क्रीन को लगातार देखते हैं, तो पलकें झपकाना भूल जाते हैं, जिससे आंखें ड्राई हो जाती हैं।

 

कैसे करें: आराम से बैठें और अपनी आंखें खोलें। अब बहुत तेजी से 10 से 15 बार पलकें झपकाएं। इसके बाद 20 सेकंड के लिए आंखें बंद करके आराम दें। इस प्रक्रिया को 3-4 बार दोहराएं।

 

यह क्रिया आंखों में प्राकृतिक नमी (आंसू) बनाए रखती है और सूखेपन से बचाती है।

 

3. आई रोटेशन (आंखों को घुमाना)

यह आंखों की मांसपेशियों (muscles) की फ्लेक्सिबिलिटी और ताकत को बढ़ाता है।

 

कैसे करें: बिना सिर हिलाए अपनी पुतलियों को पहले धीरे-धीरे ऊपर की ओर देखें, फिर पूरी तरह दाईं ओर, फिर नीचे और फिर बाईं ओर देखें। यानी आंखों से एक बड़ा गोला (सर्किल) बनाएं। इसे 5 बार क्लॉकवाइज यानी घड़ी की सुई की दिशा में और 5 बार एंटी-क्लॉकवाइज करें। इससे आंखों की मांसपेशियों का व्यायाम होता है और दृष्टि बेहतर होती है।

 

4. त्राटक क्रिया (मोमबत्ती को एकटक देखना)

यह योग का एक बेहद शक्तिशाली हिस्सा है जो आंखों की रोशनी और एकाग्रता दोनों को बढ़ाता है।

 

कैसे करें: एक अंधेरे कमरे में अपनी आंखों के समानांतर पर एक मोमबत्ती जलाकर रखें। मोमबत्ती की लौ पर बिना पलक झपकाए तब तक ध्यान केंद्रित करें जब तक कि आंखों से आंसू न आ जाएं। इसके बाद आंखें बंद कर लें। यह आंखों को डिटॉक्स करता है, फोकस बढ़ाता है और चश्मे का नंबर कम करने में मददगार है।

 

5. 20-20-20 का नियम

यह एक ऐसा नुस्खा है जिसे आज के डिजिटल युग में हर किसी को अपनाना चाहिए।

 

नियम क्या है: स्क्रीन पर काम करते समय हर 20 मिनट के बाद, कम से कम 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को कम से कम 20 सेकंड के लिए देखें। इससे आंखों को लगातार एक ही दूरी पर फोकस करने से होने वाली थकान से राहत मिलती है।

 

विशेष टिप: इन योग क्रियाओं के साथ-साथ सुबह उठकर मुँह में साफ पानी भरें और बंद आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारें। साथ ही, अपनी डाइट में विटामिन-A से भरपूर चीजें जैसे गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियां और पपीता शामिल करें।

 

योगा डे 2026 हमें यह सिखाता है कि स्वस्थ आंखें केवल दवाइयों से नहीं, बल्कि योग, संतुलित जीवनशैली और प्राकृतिक आदतों से भी संभव हैं। रोज कुछ मिनट आंखों के लिए निकालना भविष्य में बड़ी समस्याओं से बचा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: जानिए इस बार की थीम, उद्देश्य और खास कार्यक्रम

June 21 Yoga Day: विश्व योग दिवस क्या है? जानें वर्ष 2026 की थीम

A photo highlighting the importance of yoga on World Yoga Day and inspiring a healthy lifestyle

International Day of Yoga 2026: विश्व योग दिवस, जिसे दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस- International Day of Yoga कहा जाता है, यह हर साल 21 जून को मनाया जाने वाला एक वैश्विक उत्सव है। यह दिन पूरी दुनिया को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए 'योग' को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देता है। यह भारत की एक ऐसी ऐतिहासिक पहल है, जिसे आज दुनिया के लगभग सभी देश एक साथ मिलकर मनाते हैं।ALSO READ: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: जानिए इस बार की थीम, उद्देश्य और खास कार्यक्रम

 

यह दिन योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए समर्पित है। योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है, जिसने आज पूरी दुनिया में स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली का एक प्रभावी माध्यम के रूप में पहचान बनाई है। योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने की एक समग्र जीवन पद्धति है।

 

  • विश्व योग दिवस की मुख्य बातें
  • किसने की शुरुआत? 
  • 21 जून को ही क्यों मनाया जाता है?
  • विश्व योग दिवस का उद्देश्य
  • इस वर्ष (2026) की थीम क्या है?

 

विश्व योग दिवस की मुख्य बातें

शुरुआत कब हुई? पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था।

 

किसने की शुरुआत? 

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में इसका प्रस्ताव रखा था, जिसे रिकॉर्ड 177 देशों ने अपना समर्थन दिया और इसे मंजूरी मिली।

 

उद्देश्य क्या है? इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को योग के फायदों (जैसे तनाव से मुक्ति, लचीला शरीर और शांत मन) के प्रति जागरूक करना है।

 

21 जून को ही क्यों मनाया जाता है?

21 जून की तारीख चुनने के पीछे एक बेहद दिलचस्प वैज्ञानिक और सांस्कृतिक कारण है:

 

21 जून का दिन उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे 'ग्रीष्म संक्रांति' (Summer Solstice) कहते हैं। इसके बाद सूर्य दक्षिणायन होने लगता है। भारतीय संस्कृति और योग विज्ञान में सूर्य के दक्षिणायन के समय को आध्यात्मिक सिद्धियों, सकारात्मक ऊर्जा और ध्यान के लिए बेहद पवित्र माना गया है।

 

विश्व योग दिवस का उद्देश्य

* विश्वभर में स्वास्थ्य, शांति और सद्भाव को बढ़ावा देना।

* योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

* स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना।

* तनाव और मानसिक समस्याओं को कम करने के लिए योग अपनाने का संदेश देना।

* भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाना।ALSO READ: Inspirational Yoga Poem: स्वास्थ्य लाभ पर बेहतरीन हिन्दी कविता: योग जीवन का अमृत

 

इस वर्ष (2026) की थीम क्या है?

हर साल योग दिवस को एक विशेष विषय यानी Theme के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' (Yoga for Healthy Ageing) रखी गई है, जो उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर को सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने पर जोर देती है।

 

सीधे शब्दों में कहें तो, विश्व योग दिवस पूरी दुनिया को बिना किसी भेदभाव के एक सूत्र में पिरोने और 'करें योग, रहें निरोग' के मंत्र को सच करने का एक वैश्विक माध्यम है।

 

विश्व योग दिवस केवल एक विशेष दिन नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने का संदेश है। योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक सशक्त बन सकता है। इसलिए योग दिवस हमें निरोग जीवन और आत्मिक शांति की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

 

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योगा डे 2026: ध्यान क्या है, सुदर्शन क्रिया, सक्रिय ध्यान या भावातीत ध्यान?

Yoga Day 2026  What is meditation

योगा डे 2026 के मौके पर आइए ध्यान की दुनिया के कुछ अनसुने, तीखे और बेहद जरूरी पहलुओं पर बात करते हैं। वर्तमान में ध्यान के नाम पर बहुत कुछ बेचा जा रहा है जबकि ध्यान आपका स्वभाव है बस इसे समझने की जरूरत है। जैसे आप गहरी नींद में हो यह बात आप तभी समझ में आती है जबकि आप जाग जाते हो। जागना भी एक प्रकार की नींद है, यदि यह जान लिया तो ध्यान घटित होने लगेगा। यह किसी बाहरी उपक्रम से संभव नहीं। 

 

इंस्टेंट ध्यान पैकेज: 'वेलनेस' के नाम पर बाजारवाद: ध्यान या लक्ज़री स्पा?

आजकल प्राणायाम और कसरत को मिलाकर जो 'इंस्टेंट ध्यान पैकेज' परोसा जा रहा है, उस पर विचार करना जरूरी है। यम, नियम और प्राणायाम के अनुशासन के बिना क्या सीधा ध्यान फलित हो सकता है?.. हां हो सकता है लेकिन उसके लिए आपको यह समझना होगा कि यह किसी क्रिया से नहीं होगा।

 

क्या आपको ऐसा नहीं लगता है कि बाजारवाद के चलते आजकल 'ध्यान' को इस तरह का लुक और फॉर्मेट दिया जा रहा है कि जिसमें प्राणायाम भी हो और कसरत भी? मतलब संपूर्ण पैकेज जिसका अध्यात्म या ध्यान से कोई लेना-देना नहीं। बस, कुछ देर या दिन के लिए आदमी को हल्का कर देने की तकनीक भर क्योंकि आदमी बहुत परेशान और तनाव में है तो क्यों न इसका लाभ उठाया जाए। लोगों से मोटी रकम लेकर ध्यान कराए जाने का प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है। क्या सचमुच ही लोगों को इससे फायदा होता है या कि यह महज सोना बाथ, मसाज आदि से प्राप्त आराम जैसा या कि महज थकान मिटाने वाला है?

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ध्यान कराने वाले लोग लगातार ध्यान करते हैं तो फिर अब तक तो उन्हें ज्ञान को उपलब्ध हो जाना चाहिए था? उन्हें तो संसार से हट जाना चाहिए था, क्योंकि हमने तो सुना और शास्त्रों में पढ़ा भी है कि लगातार ध्यान करते रहने से व्यक्ति की मनोदशा शांतचित्त और मौन हो जाती है और वह समाधि में लीन होने लगता है। कहते हैं कि ऐसा व्यक्ति फिर समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के बजाय अकेले में आनंद लेते हुए मुमुक्षु बन जाता है, लेकिन हम तो देख रहे हैं कि ये ध्यान कराने और करने वाले लोग ध्‍यान की मार्केटिंग भी कर रहे हैं और लोगों से न्यूज चैनल पर आने वाली बहस जैसी बहस भी कर रहे हैं।

 

अष्टांग योग का नियम: क्या हम सीधे आखिरी सीढ़ी पर कूद रहे हैं?

भारतीय दर्शन और योग शास्त्र के अनुसार, 'ध्यान' कोई तुरंत सीखी जाने वाली शॉर्टकट क्रिया नहीं है; यह योग का आठवां और अंतिम पायदान है। ऋषि पतंजलि के मुताबिक ध्यान तक पहुंचने का एक व्यवस्थित क्रम है:– यम- नियम- आसन- प्राणायाम- प्रत्याहार- धारणा- ध्यान- समाधि।

 

योग में ध्यान आठवीं स्टेप है। इससे पहले यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार और धारणा है। योग और भारतीय दर्शन अनुसार ध्यान के पूर्व यम, नियम, प्राणायाम का पालन किया जाना चाहिए तभी ध्यान का फल मिलता है। योग में ध्यान का सीधा-सीधा अर्थ है कि यह कोई क्रिया नहीं है। ध्यान और प्राणायाम को मिलाकर आजकल जिस तरह का ध्यान किया-कराया जाता है वह कितना उचित है इस पर विचार किया जाना जरूरी है।

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सक्रिय ध्यान (Dynamic Meditation): फ्रस्ट्रेशन निकालना या नई आदत?

आजकल ओशो की ध्यान विधि 'सक्रिय ध्यान योग' ज्यादा प्रचलित है। इसी के साथ ही 'सुदर्शन क्रिया' और 'भावातीत ध्यान' भी प्रचलित हो चले हैं। इसी तरह वर्तमान में गौतम बुद्ध द्वारा प्रणीत 'विपश्यना' ध्यान के नए रूप का प्रचलन भी बढ़ा है। सवाल यह उठता है कि ध्यान की परंपरागत विधि को छोड़कर इसका जो वर्तमान स्वरूप है वह सही है या कहीं ऐसा तो नहीं है कि ये क्रियाएं ध्यान विरुद्ध हैं?

 

सक्रिय ध्यान में व्यक्ति के शरीर को थका दिया जाता है और फिर आंखे बंद करके बैठा दिया जाता है। इसमें से अधिकतर लोग नींद में चले जाते हैं और कुछ यह सोचते रहते हैं कि अब क्या होगा, और चंद ही है जो मन की शांति महसूस करके आसपास की आवाजें सुनकर जागरूक बने रहते हैं। महज धकान और तनाव मिटाने वाला ध्यान। क्या यह स्थाई शांति या दिमाग को बेहतर बनाने वाला ध्‍यान है? 

 

सक्रिय ध्यान करने में पहली क्रिया है 'रेचक' अर्थात अपने भीतर के पागलपन को निकालना, जिसमें कि ध्यान करने वाले लोग चीखते हैं, चिल्लाते हैं, रोते हैं, हंसते हैं और न जाने क्या-क्या करते हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि सभी को पागलपन का दौरा पड़ गया है।

 

ठीक है, मान भी लेते हैं कि हमारे भीतर बहुत से फ्रस्ट्रेशन है उसे निकाल देने में ही भलाई है, लेकिन हम इतने भी पागल नहीं है कि बार-बार फ्रस्ट्रेड हों और बार-बार उसे निकालने जाएं। क्या यह एक नई प्रकार की आदत नहीं बन जाएगी? जो लोग ध्यान कराते हैं वे क्या बार-बार रेचक करते हैं? यह तो हद दर्जे का पागलपन ही होगा कि पागलपन निकालने के लिए बार-बार पागल बन जाओ। हमने तो सुना और पढ़ा है कि मौन रहने से ही सभी तरह के पागलपन समाप्त हो जाते हैं।…ओशो से पूछा जाना चाहिए कि क्या आप रेचक या सक्रिय ध्यान करते हुए ज्ञान को उपलब्ध हुए? यह वैसी ही बात है कि गांधीजी ने कभी टोपी नहीं पहनी, लेकिन।

 

सुदर्शन क्रिया और आर्ट ऑफ लिविंग: प्राणायाम का 'कॉर्पोरेट री-ब्रांडिंग'?

अब बात करते हैं सुदर्शन क्रिया की। सुदर्शन क्रिया श्रीश्री रविशंकरजी का एक बेहतरीन प्रॉडक्ट है, जो उसे वे नेटवर्किंग के थ्रू बेचते हैं। यह महज योग के प्राणायाम की एक विधि है जिसे वे नए तरीके से कराते हैं। इसमें हमारी श्वासों को लयबद्ध करना सिखाया जाता है। सुदर्शन क्रिया के नियमित अभ्यास से जीवन में शांति, स्थिरता और रस का अनुभव होता है। लेकिन सर, वह तो प्राणायाम से भी हो सकता है तो फिर आप इसे अलग नाम क्यों दे रहे हैं?

आर्ट ऑफ लिविंग- हां, इसी नाम से लोगों को जीवन जीने की कला सिखाई जाती है। इस कला और क्रिया के लिए बाकायदा डेमो होता है। फिर कोर्स को ज्वॉइन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाता है। किताब, सीडी और कैसेट बेचने के लिए मार्केटिंग की जाती है। 

 

भावातीत ध्यान: नींद में सुला देने वाला ध्यान? 

महर्षि महेश योगी जी के द्वार विकसित किए गए ध्यान की विधि का नाम है भावातीत ध्यान। भावातीत ध्यान को लेकर पहले लोग इस तरह से जुनूनी हो चले थे कि वे समझते थे कि हमने बहुत बड़ी विद्या प्राप्त कर ली। ऐसी भी अफवाहें थी कि इस ध्यान के माध्यम से लोग हवा में उपर उठ जाते थे। ऐसा दावा किया जाता है कि ध्यान की यह शैली कई विकारों को पूर्णता: दूर करने में कारगर है। इनकी संस्थाओं में गुरु या शिक्षक एक विशिष्ट 'ध्वनि' या 'मंत्र' देते हैं, जिसका कोई अर्थ नहीं होता। जैसे ही आपको अहसास हो कि आप विचारों में खो गए हैं, बहुत ही प्यार से और बिना किसी दबाव के वापस अपने 'मंत्र' के मानसिक उच्चारण पर लौट आएं।  इसमें ओशो के 'सक्रिय ध्यान' की तरह चीखना-चिल्लाना (रेचक) या कोई शारीरिक कसरत नहीं होती। भावातीत ध्यान में मन को पूरी तरह स्वतंत्र छोड़ दिया जाता है। यह मन को ज़बरदस्ती शांत करने के बजाय, उसे प्राकृतिक रूप से गहरे मौन में उतरने देता है। यह किसी सम्मोहन क्रिया की तरह है। आपको नींद भी आ सकती है।

 

फिर ध्यान क्या है?

यह समझाना या समझना थोड़ा कठिन है। सारी क्रियाएं आपको अतीत और भविष्य से बाहर निकालकर वर्तमान में लाने के लिए है। वर्तमान में जीना ही ध्यान है। एकाग्रता ध्यान नहीं है। ध्यान का मूल अर्थ है जागरूकता, अवेयरनेस, होश, साक्ष‍ी भाव और दृष्टा भाव। ध्यान का अर्थ एकाग्रता नहीं होता। एकाग्रता टॉर्च की स्पॉट लाइट की तरह होती है जो किसी एक जगह को ही फोकस करती है, लेकिन ध्यान उस बल्ब की तरह है जो चारों दिशाओं में प्रकाश फैलाता है। 

 

क्रिया नहीं है ध्यान। बहुत से लोग क्रियाओं को ध्यान समझने की भूल करते हैं, जबकि क्रियाएं ध्यान को जगाने की विधियां हैं। विधि और ध्यान में फर्क है। क्रिया तो साधन है साध्य नहीं। क्रिया तो ओजार है। क्रिया तो झाड़ू की तरह है। आंख बंद करके बैठ जाना भी ध्यान नहीं है। किसी मूर्ति का स्मरण करना भी ध्यान नहीं है। माला जपना भी ध्यान नहीं है। ध्यान है क्रियाओं से मुक्ति। विचारों से मुक्ति। कल्पनाओं से मुक्ति।

 

ध्यान में इंद्रियां मन के साथ, मन बुद्धि के साथ और बुद्धि अपने स्वरूप आत्मा में लीन होने लगती है। जिन्हें साक्षी या दृष्टा भाव समझ में नहीं आता उन्हें शुरू में ध्यान का अभ्यास आंख बंद करने करना चाहिए। फिर अभ्यास बढ़ जाने पर आंखें बंद हों या खुली, साधक अपने स्वरूप के साथ ही जुड़ा रहता है और अंतत: वह साक्षी भाव में स्थिति होकर किसी काम को करते हुए भी ध्यान की अवस्था में रह सकता है।

UP School Summer Holidays Extended: यूपी के स्कूलों में छात्रों की मौज, गर्मी को देखते हुए ग्रीष्मावकाश बढ़ा और अब 25 जून से खुलेंगे स्कूल

UP School Summer Holidays Extended: उत्तर प्रदेश सरकार के एक फैसले से राज्य के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की मौज हो गई है। प्रदेश सरकार ने राज्य में जारी मौजूदा हीटवेव के हालात को देखते हुए बेसिक एजुकेशन काउंसिल और मान्यता प्राप्त संस्थानों के स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां 24 जून तक बढ़ा दी हैं। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लिया गया है, जिसमें सरकार ने राज्य भर में बढ़ते तापमान के बीच बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अच्छी शिक्षा को मुख्य प्राथमिकता बताया है।

प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के अतिरिक्त मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इस संबंध में एक आधिकारिक निर्देश जारी किया है। इस ऑर्डर के मुताबिक, अब हर साल 20 मई से 24 जून तक गर्मी की छुट्टियां रहेंगी और छात्रों की नियमित कक्षाएं 25 जून से शुरू होंगी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि गर्मी की छुट्टियों के बाद मंगलवार को स्कूल खुले थे, लेकिन नए ऑर्डर के साथ इसे बढ़ा दिया गया है और अब यह 25 जून को फिर से खुलेंगे।

22, 23 और 24 जून टीचर स्कूलों में उपस्थित रहेंगे 

बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ.राकेश कुमार ने बताया कि शिक्षक व शिक्षणोत्तर कर्मचारी विद्यालयों में उपस्थित रहेंगे। 25 जून से शिक्षण कार्य सुचारु रूप से संचालित होगा। शैक्षणिक गतिविधियों की तैयारियों के लिए 22, 23 और 24 जून को सभी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को स्कूलों में उपस्थित रहना होगा। इस दौरान लेसन प्लान तैयार करने, मिड-डे मील की व्यवस्था, पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता, विद्यालय परिसर, रसोई और शौचालयों की साफ-सफाई, पेयजल की व्यवस्था तथा स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब को क्रियाशील रखने जैसे कार्य पूरे किए जाएंगे।

21 जून को स्कूलों में होगा सामूहिक योगाभ्यास 

आदेश में यह भी कहा गया है कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर विद्यालयों में सामूहिक योगाभ्यास आयोजित किया जाएगा।

220 कार्य दिवसों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा

अधिकारियों ने बताया कि सरकारी आदेश में राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट के प्रावधानों का पालन करने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत हर शैक्षिक सत्र के दौरान कम से कम 220 कामकाजी दिनों और नियमित शिक्षण गतिविधियों को सुनिश्चित किया जाएगा। इस संबंध में सभी जिला मजिस्ट्रेट (DMs) को कोई भी लोकल छुट्टी घोषित करने से पहले इन कानूनी जरूरतों को ध्यान में रखने की सलाह दी गई है। सरकार ने स्कूलों को बिना रुकावट बिजली, पीने का पानी और दूसरी बेसिक सुविधाएं देने का भी निर्देश दिया है।

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: जानिए इस बार की थीम, उद्देश्य और खास कार्यक्रम

12th International yoga Day theme

21 जून 2026 को भारत सहित पूरे विश्व में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY 2026) बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। आयुष मंत्रालय द्वारा इस बार के योग दिवस को लेकर थीम और विशेष कार्यक्रमों की घोषणा कर दी गई है। चलिए जानते हैं इस बार के योगा डे की खास बातें।

 

1. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम

  • इस वर्ष (2026) के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की आधिकारिक थीम है:
  • “स्वस्थ और सक्रिय वृद्धावस्था के लिए योग” (Yoga for Healthy Ageing)
  • थीम का महत्व: केंद्रीय आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह थीम आधुनिक युग की एक बड़ी चुनौती को संबोधित करती है। इसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती उम्र के साथ लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से जागरूक, आत्मनिर्भर और सक्रिय जीवन जीने के लिए योग को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
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2. मुख्य कार्यक्रम (Main Event)

कोलकाता में मुख्य आयोजन: इस साल राष्ट्रीय स्तर का मुख्य कार्यक्रम कोलकाता के ऐतिहासिक 'रेड रोड' (Red Road) पर आयोजित किया जाएगा।

पीएम मोदी करेंगे नेतृत्व: इस भव्य आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मौजूद रहेंगे और देश-विदेश के लाखों लोगों के साथ योग सत्र का नेतृत्व करेंगे।

International yoga Day theme

3. इस बार के विशेष कार्यक्रम और आकर्षण

100 ऐतिहासिक धरोहरों पर योग: देश की सांस्कृतिक विरासत को योग से जोड़ने के लिए भारत के 100 प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक स्थलों (Iconic Heritage Sites) पर विशेष योग सत्र आयोजित किए जाएंगे।

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गंगा तट योग यात्रा (Gangotri to Gangasagar): 13 जून से 20 जून तक 'गंगोत्री से गंगासागर' तक एक विशेष योग यात्रा का आयोजन किया गया है। यह यात्रा गंगा नदी के किनारे प्रमुख स्थानों से गुजरते हुए लोगों में पर्यावरण जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दे रही है।
 

कोलकाता में विशेष प्रस्तुतियां: मुख्य आयोजन से पहले, 19 जून को शारीरिक और मानसिक तंदुरुस्ती को बढ़ावा देने के लिए “दौड़ से ध्यान” (Daud se Dhyan) और 20 जून को देशभक्ति व योग के संगम को दर्शाने वाला “वंदे योगम” (Vande Yogam) कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
 

वैश्विक स्तर पर आयोजन: इस बार विदेशों में भी योग दिवस को लेकर अभूतपूर्व उत्साह है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के समन्वय से दुनिया भर के 210 से अधिक देशों में, लगभग 2,500 स्थानों पर योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
 

नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: इस योग दिवस की तैयारियों (काउंटडाउन) के तहत 14 जून को आयोजित एक राष्ट्रव्यापी लाइव योग सत्र में 4 लाख से अधिक लोगों ने एक साथ भाग लिया, जिसने एक नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया है।
 

डिजिटल पहल: आम जनता की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने 'योग संगम पोर्टल' (Yoga Sangam Portal) को फिर से लॉन्च किया है, जहाँ लोग ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, साथ ही MyGov प्लेटफॉर्म पर फोटोग्राफी, क्विज़ और रील्स मेकिंग जैसी कई प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं।

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