50 साल बाद स्कूल लौटे तो चेहरे पर वही बचपन वाली मुस्कान! ‘1976 बैच’ के दोस्तों का VIDEO वायरल

कुछ दोस्तियां उम्र की मोहताज नहीं होतीं। वक्त गुजरता है, जिंदगी अपने-अपने रास्ते ले जाती है, लेकिन बचपन के दोस्तों के साथ जुड़ी यादें दिल में हमेशा ताजा रहती हैं। ऐसी ही एक भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जब 1976 बैच के कुछ दोस्त करीब 50 साल बाद अपने पुराने स्कूल लौटे। खास बात यह रही कि उन्होंने सिर्फ स्कूल जाकर पुरानी यादें ताजा नहीं कीं, बल्कि पूरे अंदाज को बचपन जैसा बना दिया। दोस्तों ने पुराने जमाने की स्कूल यूनिफॉर्म जैसी पोशाक पहनी, कंधों पर बैग टांगे और बच्चों वाली पानी की बोतलें गले में लटका लीं।

स्कूल के गेट से गुजरते हुए वे किसी पुराने फोटो की तरह नजर आए। अंदर पहुंचते ही हंसी-मजाक, पुराने खेल और शरारतें फिर लौट आईं। यह मुलाकात उनके लिए सिर्फ एक reunion नहीं, बल्कि पांच दशक पुरानी दोस्ती और भूली-बिसरी यादों को फिर से जीने का मौका बन गई।

यूनिफॉर्म पहनी, बैग टांगा और गले में लटकाई पानी की बोतल

पुराने दोस्तों ने अपने स्कूल के दिनों की यूनिफॉर्म जैसी पोशाक पहनी। कंधों पर बैग टांगे और बच्चों की तरह रंग-बिरंगी पानी की बोतलें गले में लटका लीं। स्कूल के गेट से इस अंदाज में गुजरते इन दोस्तों को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे पांच दशक पीछे का कोई दृश्य अचानक सामने आ गया हो। फर्क बस इतना था कि तब ये बच्चे थे और अब जिंदगी के कई पड़ाव पार कर चुके थे।

स्कूल के अंदर पहुंचते ही लौट आया बचपन

जैसे ही दोस्त स्कूल परिसर में पहुंचे, माहौल पूरी तरह बदल गया। पुराने गलियारों और मैदानों के बीच उनकी हंसी-मजाक फिर उसी दौर में लौटती नजर आई। उन्होंने पुराने किस्से याद किए, शरारतों को दोहराया और उन खेलों को भी फिर से खेला, जो कभी स्कूल की छुट्टी का सबसे बड़ा आकर्षण हुआ करते थे।

50 साल बाद फिर खेला पिट्ठू

दोस्तों ने बचपन के पसंदीदा खेलों में से एक पिट्ठू भी खेला। मैदान में पत्थरों को जमाकर खेले जाने वाले इस खेल ने उन्हें कुछ देर के लिए फिर स्कूली बच्चा बना दिया। इतना ही नहीं, दोस्तों ने स्कूल के दिनों की मशहूर ‘ट्रेन’ वाली मस्ती भी दोहराई। सभी एक साथ चलते नजर आए और फिर ठहाकों में खो गए।

‘हर चेहरे पर मुस्कान, दिल में अनगिनत यादें’

इस खास दिन को याद करते हुए राकेश नगर ने बताया कि वे अक्सर सोचते थे कि बचपन के उन बेफिक्र दिनों में दोबारा लौटना कैसा लगेगा। उन्होंने कहा कि उसी स्कूल में जाकर उन्होंने पुराने खेल खेले, शरारतों को याद किया और बचपन की यादों को फिर से जिया। उनके मुताबिक, यह सिर्फ दोस्तों की मुलाकात नहीं थी, बल्कि 50 साल की दोस्ती का जश्न था। उन्होंने इस वीडियो को साझा करते हुए अपने बचपन के दोस्तों और 1976 बैच का जिक्र किया।

वीडियो देखकर लोगों को याद आए अपने पुराने दोस्त

यह वीडियो सोशल मीडिया यूजर्स के दिल को भी छू गया। कई लोगों ने इसे देखकर अपने स्कूल के दोस्तों और उन रिश्तों को याद किया, जो समय और जिंदगी की भागदौड़ में कहीं पीछे छूट गए। किसी ने लिखा कि वीडियो देखकर दिल खुश हो गया, तो किसी ने इसे ‘गोल्डन मेमोरी’ बताया। एक यूजर ने कहा कि स्कूल के दिनों की दोस्ती हमेशा दिल में रहती है।

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गाय को पैर मारने वाले बुजुर्ग मुस्लिम पर भड़की भीड़, नाक रगड़कर माफी मंगवाई; VIDEO वायरल

एमपी के गुना जिले के जामनेर कस्बे में गाय को पैर से हटाने की घटना के बाद विवाद खड़ा हो गया। लोगों ने गाय को पैर मारने वाले बुजुर्ग मुस्लिम से गाय के सामने जमीन पर झुककर नाक रगड़वाई और माफी मंगवाई।

VIDEO: प्रयागराज में मां गंगा ने कराया ‘लेटे हनुमान जी’ को महास्नान! गर्भगृह तक पहुंचा नदी का पानी; वीडियो वायरल

Prayagraj Floods: पड़ोसी देश नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर अब गंगा नदी के जलस्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। धर्मनगरी प्रयागराज में बीते कुछ दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते उत्तर प्रदेश और बिहार के कई गंगा किनारे बसे शहरों में नदी का पानी अपने सामान्य प्रवाह क्षेत्र से बाहर फैलने लगा है। इसी बीच प्रयागराज में एक बेहद भावुक और आस्था से जुड़ा दृश्य सामने आया है, जहां मां गंगा का पानी प्रसिद्ध ‘लेटे हुए हनुमान’ यानी बड़े हनुमान जी मंदिर तक पहुंच गया।

संगम स्थित लेटे हनुमान मंदिर में मां गंगा का पानी गर्भगृह तक पहुंच गया। पानी मंदिर की सीढ़ियों से होते हुए अंदर तक पहुंचा और वहां विराजमान भगवान हनुमान की प्रतिमा को स्पर्श करने लगा। इस दौरान ऐसा दृश्य बना मानो मां गंगा स्वयं संगम तट पर विराजमान बड़े हनुमान जी का अभिषेक करने पहुंची हों। मंदिर में पानी सीढ़ियों से नीचे की ओर बहता दिखाई दिया। गर्भगृह में स्थापित लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा तक पहुंच गया, जिसे देखकर सबलोग भावुक हो गए।

पूजा-पाठ के बीच मंदिर में पहुंचा गंगा का पानी

गंगा का पानी मंदिर परिसर में एंट्री करने के बावजूद पुजारी और स्थानीय श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना जारी रखी। पुजारी ने धार्मिक अनुष्ठान और प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास ‘बड़े हनुमान जी महाराज’ और ‘मां गंगा’ के जयकारे गूंजते रहे। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोग श्रद्धा के साथ पूजा करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में गंगा का पानी मंदिर की सीढ़ियों से बहता हुआ दिखाई देता है। जबकि आगे बढ़कर भगवान हनुमान की प्रतिमा तक पहुंचता नजर आता है।

मंदिर के सोशल मीडिया पेज पर भी शेयर हुई तस्वीरें

इस घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो श्री बड़े हनुमान जी मंदिर (संगम प्रयाग), प्रयागराज के फेसबुक पेज पर भी शेयर किए गए हैं। पोस्ट में इस दिन को प्रयागराज और हनुमान भक्तों के लिए बेहद शुभ और सौभाग्यशाली बताया गया। पोस्ट में धार्मिक भावनाओं के अनुरूप कहा गया कि प्रयागराज के पवित्र संगम पर, जहां संगम तट पर श्री बड़े हनुमान जी महाराज विराजमान हैं, वहां ‘पतित पावनी मां गंगा’ ने स्वयं भगवान हनुमान का भव्य जलाभिषेक किया।

लगातार बढ़ रहा है गंगा का जलस्तर

दरअसल, नेपाल में बाढ़ की स्थिति और हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि देखी जा रही है। उत्तर प्रदेश में वाराणसी और प्रयागराज सहित गंगा किनारे के इलाकों में नदी का पानी फैलने लगा है। वहीं, बिहार के बक्सर, पटना और मुंगेर जैसे जिलों में भी गंगा का बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

प्रयागराज में गंगा और यमुना का संगम धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संगम क्षेत्र में स्थित बड़े हनुमान जी मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता है। यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा लेटी हुई मुद्रा में है। गंगा का पानी मंदिर तक पहुंचने और प्रतिमा को स्पर्श करने के इस दृश्य को श्रद्धालु आस्था और धार्मिक दृष्टि से बेहद विशेष क्षण मान रहे हैं।

हर साल दिख जाता है ये मनमोहक दृश्य

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों के बाद यह दृश्य तेजी से चर्चा में है। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने गंगा और बड़े हनुमान जी दोनों की श्रद्धा के साथ पूजा की और जयकारे लगाए। हिंदू धर्म में आस्था है कि जब हनुमान जी ने लंका दहन किया था तो उसके बाद उनका शरीर भी आग की चपेट में आकर जलनशील हो गया था। फिर बजरंगबली संगम के तट पर आकर लेट गए थे।

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बताया जाता है कि इस दौरान मां गंगा ने अपना रूप बढ़ाकर अपने जल से हनुमान जी को स्पर्श किया था। पुजारियों का कहना है कि आज भी प्रयागराज में वैसे ही मां गंगा हर साल ‘लेटे हुए हनुमान’ जी को प्रणाम करने जरूर आती है।