₹7 महीने की फीस वाले स्कूल से Paris Fashion Week तक | Rahul Mishra Success Story

₹7 महीने की फीस वाले स्कूल से पढ़ाई करने वाले राहुल मिश्रा ने Paris Haute Couture Week में भारतीय शिल्पकला को दुनिया के सबसे बड़े फैशन रैंप तक पहुंचाया। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव से निकले राहुल मिश्रा ने भारतीय कारीगरों की कला को वैश्विक पहचान दिलाई।
और साबित किया सपनों की कीमत पैसों से नहीं हौसलों से तय होती है।

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₹65 की नौकरी से ₹20000 करोड़ की कंपनी तक, गणित में फेल स्टूडेंट ने ऐसे खड़ा किया आइसक्रीस साम्राज्य

RG Chandramogan Success Story: आरजी चंद्रमोगन के पास न तो कॉलेज की डिग्री थी और न ही कोई बड़ी विरासत। लेकिन उनके पास एक चीज थी, कुछ बड़ा करने का जज्बा। 65 रुपये महीने की नौकरी से शुरुआत करने वाले इस शख्स ने बाद में आइसक्रीम बेचनी शुरू की।

उसी कारोबार को आगे बढ़ाकर Hatsun Agro Products जैसी कंपनी खड़ी कर दी। आज यह भारत की सबसे बड़ी निजी डेयरी कंपनियों में शामिल है, जिसकी बाजार में वैल्यू करीब 20,000 करोड़ रुपये है।

एक असफल बिजनेस ने बदली सोच

चंद्रमोगन तमिलनाडु के साधारण परिवार में पैदा हुए। बचपन में देखा कि गांव का सबसे सम्मानित व्यक्ति एक कारोबारी था। तभी से उन्होंने भी बिजनेस करने का सपना देख लिया।

साल 1956 में उनके पिता चेन्नई आ गए और सेंट्रल स्टेशन के पास एक किराना दुकान खोली। लेकिन 1968 तक कारोबार पूरी तरह ठप हो गया। परिवार को खाली हाथ गांव लौटना पड़ा। यहीं से चंद्रमोगन ने पहली बार समझा कि बिजनेस में सफलता जितनी बड़ी होती है, जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है।

गणित में फेल हुए, कॉलेज छोड़ना पड़ा

पढ़ाई भी उनके लिए आसान नहीं रही। उन्होंने पलायमकोट्टई के सेंट जेवियर्स कॉलेज में प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स में दाखिला लिया, लेकिन गणित में फेल हो गए। इसके बाद पढ़ाई छूट गई।

बेटे के भविष्य की चिंता में उनके पिता ने विलुप्पुरम के एक लकड़ी गोदाम में उनकी नौकरी लगवा दी। वहां उन्हें सिर्फ 65 रुपये महीने की तनख्वाह मिलती थी। करीब एक साल तक उन्होंने वहां ऑर्डर संभाले, सामान उठाया और मेहनत की। लेकिन उन्हें एहसास हो गया कि पूरी जिंदगी 65 रुपये की नौकरी करके नहीं बिताई जा सकती।

पिता ने बेच दी पुश्तैनी जमीन

एक साल बाद चंद्रमोगन चेन्नई लौट आए। इस बार उन्होंने तय कर लिया था कि अब नौकरी नहीं, अपना कारोबार करेंगे।

उनके पिता ने भी बड़ा फैसला लिया। उन्होंने 13,000 रुपये जुटाने के लिए परिवार की पुश्तैनी जमीन बेच दी। यही रकम चंद्रमोगन के पहले बिजनेस की पूंजी बनी।

250 वर्गफुट से शुरू किया कारोबार

साल 1970 में उन्होंने चेन्नई के रायापुरम इलाके में 250 वर्गफुट की छोटी-सी जगह किराए पर ली। एक साधारण आइस बनाने वाली मशीन खरीदी और चार कर्मचारियों के साथ काम शुरू कर दिया। फैक्ट्री में रोज करीब 10,000 आइसक्रीम बन सकती थीं। उन्होंने अपने ब्रांड का नाम ‘Arun’ रखा।

शुरुआत में मुनाफा बहुत कम था। कई बार चंद्रमोगन खुद ठेले पर आइसक्रीम बेचने निकल जाते थे। उस समय उनका मकसद सिर्फ कारोबार को जिंदा रखना था।

आइसक्रीम से डेयरी बिजनेस तक

करीब 10 साल तक उन्होंने सिर्फ आइसक्रीम का कारोबार किया। लेकिन इसी दौरान उन्हें एक बड़ी बात समझ आई। उन्होंने देखा कि आइसक्रीम का कारोबार मौसम पर निर्भर है, जबकि दूध हर घर की रोजमर्रा की जरूरत है। उस समय भारत का डेयरी बाजार काफी बिखरा हुआ था। चंद्रमोगन को इसमें बड़ा मौका नजर आया।

1980 के दशक में उन्होंने दूध प्रोसेसिंग का काम शुरू किया। धीरे-धीरे कंपनी ने दूध, दही, घी और मक्खन जैसे उत्पाद भी बेचने शुरू कर दिए। अब Arun सिर्फ आइसक्रीम का नहीं, बल्कि डेयरी उत्पादों का बड़ा ब्रांड बन चुका था।

उन्होंने जल्दबाजी में विस्तार नहीं किया। पहले किसानों का मजबूत नेटवर्क बनाया, सप्लाई चेन तैयार की और रिटेल नेटवर्क खड़ा किया। यही रणनीति आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

आज 20,000 करोड़ की कंपनी

आज Hatsun Agro Products शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी है। जुलाई 2026 तक इसका मार्केट कैप 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है। Forbes के मुताबिक, आरजी चंद्रमोगन की नेटवर्थ करीब 1.6 अरब डॉलर है। उन्हें 2018 में भारतीय डेयरी उद्योग में योगदान के लिए Indian Dairy Association का प्रतिष्ठित Patronage Award भी दिया गया।

चंद्रमोगन की कहानी सिर्फ एक सफल कारोबारी बनने की नहीं है। यह उस इंसान की कहानी है, जो गणित में फेल हुआ लेकिन कारोबार के इम्तिहान में अव्वल नंबरों से पास होकर दिखा दिया।

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