2014 के शेयर बायबैक मामले में फिर खुला वेदांता का पेनल्टी केस, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने Vedanta Limited के खिलाफ 2014 के शेयर बायबैक से जुड़े SEBI के फ्रॉड केस को फिर से खोल दिया है। कोर्ट ने कहा कि बायबैक के लिए जमा एस्क्रो फंड रिलीज होने से SEBI की कार्रवाई पर रोक नहीं लगती।

जस्टिस JB पार्दीवाला और KV विश्वनाथन की बेंच ने SEBI की अपील पर यह फैसला दिया। कोर्ट ने अक्टूबर 2023 के Securities Appellate Tribunal (SAT) के फैसले को आंशिक रूप से बदल दिया। SAT ने Vedanta और तीन अन्य लोगों पर लगाए गए जुर्माने हटा दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने मामला वापस SAT को भेज दिया है। अब ट्रिब्यूनल नए सिरे से तय करेगा कि कंपनी का बर्ताव फ्रॉड की श्रेणी में आता था या नहीं।

एस्क्रो फंड रिलीज होने से केस खत्म नहीं

मामले में बड़ा सवाल यही था। क्या एस्क्रो रकम रिलीज होने के बाद SEBI फ्रॉड के आरोपों पर अलग केस चला सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हां। कोर्ट ने कहा कि एस्क्रो रकम जब्त होनी चाहिए थी या नहीं और कंपनी ने फ्रॉड या मार्केट मैनिपुलेशन किया था या नहीं, ये दोनों अलग मुद्दे हैं।

2014 के बायबैक का है मामला

यह मामला जनवरी 2014 में Cairn India के घोषित शेयर बायबैक से जुड़ा है। इस कंपनी का 2017 में वेदांता में मर्जर हो गया। हालांकि, वेदांता का Cairn India में 2011 से ही कंट्रोलिंग स्टेक था। Cairn India ने 17.09 करोड़ शेयरों को अधिकतम ₹335 प्रति शेयर के भाव पर खरीदने का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए ₹5,725 करोड़ तक खर्च करने की योजना थी।

हालांकि, कंपनी ने करीब 3.67 करोड़ शेयर ही खरीदे। इसके लिए करीब ₹1,225 करोड़ खर्च हुए। यानी तय रकम के आधे से भी कम का इस्तेमाल हुआ।

SEBI की क्या दलील थी

सेबी के Adjudicating Officer ने कहा था कि बाजार की स्थिति अनुकूल होने के बावजूद कंपनी ने पर्याप्त खरीद ऑर्डर नहीं लगाए। इससे निवेशकों के बीच यह गलत धारणा बन सकती थी कि कंपनी बायबैक पूरा करने के लिए गंभीर है।

इस मामले में Vedanta पर ₹5.25 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। तीन अन्य लोगों पर ₹15-15 लाख का जुर्माना लगा था। 2023 में SAT ने ये जुर्माने हटा दिए थे।

ट्रेडिंग डेटा में भी अंतर मिला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में कुछ अहम तथ्य अभी साफ नहीं हैं। कोर्ट ने SEBI की जांच रिपोर्ट और NSE के आंकड़ों में अंतर का भी जिक्र किया। 17 फरवरी 2014 के लिए SEBI की रिपोर्ट में ₹335 या उससे कम भाव पर 1.31 करोड़ से ज्यादा शेयर उपलब्ध बताए गए थे। वहीं NSE के आंकड़ों में यह संख्या 30 लाख से कुछ ज्यादा थी।

कोर्ट ने SEBI की दो जांच रिपोर्टों में भी विरोधाभास पाया। एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कीमत और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। बाद की रिपोर्ट में इन्हीं तथ्यों के आधार पर फ्रॉड का आरोप लगाया गया।

अब SAT मामले की दोबारा जांच करेगा। वह गवाहों को बुला सकता है। जरूरी दस्तावेज भी मांग सकता है। इसके बाद ट्रेडिंग रिकॉर्ड और दूसरे सबूतों के आधार पर फ्रॉड के आरोपों पर नया फैसला होगा।

Nifty 23500 के नीचे फिसला, क्या शेयर बाजार में आने वाली है बड़ी गिरावट?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Varanium Cloud और प्रमोटर साबले पर SEBI का बड़ा एक्शन, ₹33 करोड़ का जुर्माना; 7 साल के लिए बाजार से बाहर

SEBI ने मंगलवार को SME कंपनी Varanium Cloud, उसके प्रमोटर हर्षवर्धन हनमंत साबले (Harshawardhan Hanmant Sabale) और सात अन्य लोगों पर कुल ₹33.08 करोड़ का जुर्माना लगाया है। मामला कंपनी के वित्तीय आंकड़ों को गलत तरीके से पेश करने और IPO से जुटाए गए पैसे के डायवर्जन से जुड़ा है।

SEBI ने Varanium Cloud और साबले को 7 साल के लिए सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया है। साबले को किसी भी लिस्टेड कंपनी या SEBI-रजिस्टर्ड इंटरमीडियरी में डायरेक्टर के तौर पर जुड़े रहने से भी 7 साल के लिए रोक दिया गया है।

₹62.51 करोड़ वापस लाने का आदेश

SEBI ने Varanium Cloud को ₹62.51 करोड़ वापस लाने का आदेश दिया है। रेगुलेटर के मुताबिक, यह रकम कंपनी से डायवर्ट की गई थी। इसके साथ संबंधित तारीखों से 12% सालाना ब्याज भी देना होगा।

वहीं साबले को ₹128.77 करोड़ के अवैध लाभ को वापस करने का निर्देश दिया गया है। इस रकम पर भी शेयरों की बिक्री की तारीख से जमा होने तक 12% सालाना ब्याज देना होगा।

IPO और राइट्स इश्यू का पैसा डायवर्ट

SEBI के 155 पेज के आदेश में कहा गया है कि Varanium Cloud, साबले, विनायक वसंत जाधव, मुकुंदन राघवन और फहीम शेख ने कंपनी के प्रॉस्पेक्टस में गलत जानकारी देने में भूमिका निभाई।

रेगुलेटर ने यह भी पाया कि कंपनी ने लेटर ऑफ ऑफर में चल रहे मुकदमों की जानकारी नहीं दी। इसके अलावा पब्लिक इश्यू से जुटाए गए पैसों में से ₹18.98 करोड़ और राइट्स इश्यू से जुटाए गए ₹43.53 करोड़ को दूसरी जगह डायवर्ट किया गया। यानी दोनों इश्यू से कुल ₹62.51 करोड़ की रकम डायवर्ट की गई।

साबले ने शेयरों से कमाया ₹128.77 करोड़

SEBI के मुताबिक साबले का कंपनी के IPO और राइट्स इश्यू से मिले पैसों की आवाजाही पर पूरा कंट्रोल था। उन्होंने फंड ट्रांसफर को मंजूरी दी थी। रेगुलेटर के अनुसार, डायवर्ट की गई ₹62.51 करोड़ की रकम में से ₹32.73 करोड़ साबले से जुड़े ट्रांसफर में गए।

SEBI ने यह भी पाया कि साबले ने Varanium Cloud के शेयरों में ट्रेडिंग की। इससे करीब ₹128.77 करोड़ का अवैध लाभ कमाया।

दो अन्य लोगों पर भी कार्रवाई

SEBI के मुताबिक Athos Capital Advisors और BM Traders के प्रोपराइटर राज जगतानी को भी Varanium Cloud और साबले से रकम मिली। रेगुलेटर ने कहा कि इन दोनों ने भी इस मामले में महत्वपूर्ण लाभ कमाया।

SEBI के होलटाइम मेंबर अमरजीत सिंह ने अपने आदेश में कहा कि साबले ने IPO और राइट्स इश्यू से मिले पैसों की आवाजाही पर पूरा नियंत्रण रखा और फंड ट्रांसफर को मंजूरी दी।

*पीटीआई से इनपुट के साथ

Stocks to Watch: 26 अगस्त को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।