अमेरिका ने ईरान पर एयरस्ट्राइक की:सीरिक, केश्म और बंदर अब्बास को निशाना बनाया; होर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद कार्रवाई

अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के दक्षिणी हिस्से में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। अमेरिका का आरोप है कि इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ था। ईरानी मीडिया के मुताबिक, सीरिक, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हमलों के बाद कई इलाकों में आग लग गई, हालांकि नुकसान और हताहतों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, एयरस्ट्राइक में ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी रडार, मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन ठिकानों और कुछ बंदरगाह सुविधाओं को निशाना बनाया गया। CENTCOM ने कहा कि ईरान ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को निशाना बनाया, इसलिए यह जवाबी कार्रवाई की गई। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

चीन हो या पाकिस्तान… अब दुश्मन का गेम ओवर! भारत बना रहा ‘100 किमी की चक्रव्यूह’ दीवार

भारत सरकार ने हाल ही में लगभग ₹52,000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है। पहली नजर में यह सामान्य सैन्य खरीद लग सकती है। लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि इस बार भारत का ध्यान महंगे लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की बजाय उन हथियारों पर है, जो किसी भी युद्ध के शुरुआती घंटों में सबसे अधिक काम आएंगे। जब डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने मिलिट्री खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी, तो पहली नजर में यह लिस्ट खरीद का एक और आम दौर लगी। लेकिन बारीकी से देखने पर एक साफ पैटर्न दिखता है।

भारत की ₹52,000 करोड़ की यह रक्षा खरीद केवल नए हथियार खरीदने की योजना नहीं है। बल्कि भविष्य के युद्धों की बदलती रणनीति के अनुसार सेना को तैयार करने का बड़ा कदम है। अब लक्ष्य केवल शक्तिशाली हथियार रखना नहीं। बल्कि ऐसी आधुनिक और नेटवर्क आधारित सेना बनाना है जो ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक हमलों और कई मोर्चों पर एक साथ होने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से मिला बड़ा सबक

कुछ महीने पहले हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट जैसे कई हवाई खतरों का सामना भारत की एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक किया। इस अभियान ने भारतीय सेना को यह एहसास कराया कि भविष्य के युद्ध केवल लड़ाकू विमानों या लंबी दूरी की मिसाइलों से नहीं जीते जाएंगे। बल्कि ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और स्मार्ट हथियार निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

अब छोटे लेकिन स्मार्ट हथियारों पर फोकस

भारत अब ऐसे हथियार खरीद रहा है जो सीमा पर तैनात सैनिकों को तुरंत जवाब देने की क्षमता देंगे। इनमें शामिल हैं-

एंटी-ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम

शोल्डर-फायर्ड एंटी-टैंक मिसाइलें

शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम

कामिकाज़े ड्रोन

हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (HAPS)

इनका उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन, टैंक, हेलीकॉप्टर और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को तुरंत रोकना है।

पाकिस्तान और चीन…दो अलग-अलग चुनौतियां

भारत को पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और उत्तरी सीमा पर चीन जैसी दो अलग-अलग सैन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पाकिस्तान की ओर से ड्रोन, टैंक, तोपखाने और घुसपैठ का खतरा रहता है। चीन के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में निगरानी, लंबी दूरी की रॉकेट सिस्टम और आधुनिक ड्रोन बड़ी चुनौती हैं। इसी वजह से भारत तीनों सेनाओं थल, वायु और नौसेना को एक साथ मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

ड्रोन बन गए हैं सबसे बड़ा खतरा

आज के युद्ध में छोटे और सस्ते ड्रोन भी बड़े सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एक ड्रोन को गिराने के लिए करोड़ों रुपये की मिसाइल चलाना आर्थिक रूप से सही नहीं माना जाता। इसलिए दुनिया भर की सेनाएं अब इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम अपना रही हैं, जो ड्रोन के संचार और नेविगेशन को जाम करके उन्हें निष्क्रिय कर देते हैं। भारत भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

‘सुदर्शन चक्र’ बनेगा भारत की सुरक्षा ढाल

सरकार एक राष्ट्रीय एयर डिफेंस सिस्टम ‘सुदर्शन चक्र’ विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से पूरे देश की सुरक्षा करना है। इसमें लंबी दूरी की S-400, मध्यम दूरी की MR-SAM, छोटी दूरी की मिसाइलें और एंटी-ड्रोन सिस्टम मिलकर कई स्तरों वाली सुरक्षा प्रदान करेंगे।

आकाश तरंग सिस्टम क्या है?

आकाश तरंग एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मिसाइल चलाकर ड्रोन को नष्ट नहीं करता, बल्कि उसकी रेडियो और जीपीएस सिग्नल को जाम कर देता है। इससे ड्रोन अपना नियंत्रण खो देता है, वापस लौट जाता है या दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। भविष्य के युद्धों में यह भारत की पहली सुरक्षा पंक्ति माना जा रहा है।

MR-SAM की ताकत

मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MR-SAM) लगभग 70 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलों को निशाना बना सकती है। यह भारत की बहु-स्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

इन सबको मिलाकर देखें तो खरीद की यह लिस्ट यह भी दिखाती है कि आधुनिक युद्ध के बारे में भारत की समझ कैसे बदल रही है। मिलिट्री प्लानर्स का मानना ​​है कि भविष्य के युद्ध का फैसला सिर्फ सैकड़ों किलोमीटर दूर उड़ने वाले फाइटर जेट या महाद्वीपों के बीच मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से नहीं होगा। इसका फैसला सैकड़ों सस्ते ड्रोन, सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलों, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, बिना पायलट वाले विमानों और टैक्टिकल लेवल पर स्मार्ट हथियार लिए सैनिकों से भी होगा।

कम दूरी के हथियार क्यों जरूरी हैं?

एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट और पनडुब्बी जैसे बड़े प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बने हुए हैं। हालांकि, कई मिलिट्री एनालिस्ट का तर्क है कि भविष्य की टैक्टिकल लड़ाइयों का नतीजा तय करने वाले हथियार छोटे, सस्ते और आसानी से तैनात किए जा सकने वाले होंगे। आधुनिक एंटी-टैंक मिसाइल से लैस एक सैनिक करोड़ों रुपये की बख्तरबंद गाड़ी को नष्ट कर सकता है।

सस्ते ड्रोन का एक झुंड एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम को महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल करने पर मजबूर कर सकता है। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण बिना एक भी गोली चलाए ड्रोन को बेकार कर सकते हैं। पोर्टेबल एयर डिफेंस मिसाइलें दुश्मन के विमानों को युद्ध के मैदान में आजादी से काम करने से रोक सकती हैं। इससे पता चलता है कि DAC की कई मंजूरियां सैकड़ों किलोमीटर के बजाय कुछ 10 किलोमीटर के दायरे में काम करने वाले सिस्टम पर क्यों केंद्रित हैं।

सिर्फ रणनीतिक क्षमताओं में निवेश करने के बजाय भारत उस चीज को भी मजबूत कर रहा है जिसे मिलिट्री प्लानर अक्सर ‘टैक्टिकल एज’ (युद्ध के मैदान में बढ़त) कहते हैं। भारत की मिलिट्री प्लानिंग अनोखी है क्योंकि उसे दो बिल्कुल अलग तरह के ऑपरेशनल माहौल के लिए तैयारी करनी होती है। पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान एक तेजी से बदलने वाला युद्ध का मैदान बनाता है, जिसमें बख्तरबंद गाड़ियां, तोपखाने, ड्रोन और सीमा पार से घुसपैठ जैसी चीजें शामिल हैं।

वहीं, उत्तरी सीमा पर चीन की चुनौती ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध, एडवांस्ड सर्विलांस क्षमताएं, लंबी दूरी की रॉकेट आर्टिलरी और तेजी से बेहतर हो रहे बिना पायलट वाले सिस्टम से जुड़ी है। हालांकि इलाके बहुत अलग हैं, लेकिन दोनों मोर्चों पर एक जरूरत समान है। लगातार निगरानी, ​​तेजी से टारगेट का पता लगाना और हवाई खतरों से कई स्तरों पर सुरक्षा। यही वजह है कि DAC की मंजूरी में एक साथ कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

चीन-तुर्की की मदद से विनाशक तैयारियों में जुटा पाकिस्तान! ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली उसकी चाल, मिले ये सबूत

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपनी सैन्य ताकत और मॉडर्न वारफेयर का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पाकिस्तान का हाल बेहाल कर दिया था। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई अहम एयर बेस, एयर डिफेंस सिस्टम और रणनीतिक संसाधनों को निशाना बनाकर पाक सेना ऐसा हाल किया था कि पूरी दुनिया के सामने उसकी पोल खुल गई थी। भारत के मिली करारी शिकस्त के बाद पाकिस्तान ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं। अब वह अपनी कमजोरियों को दूर करने के लिए चीन और तुर्की जैसे देशों की मदद से सेना के मॉर्डनाइजेशन पर काम कर रहा है। स्टील्थ लड़ाकू विमान, लंबी दूरी की मिसाइलें, आधुनिक ड्रोन, लेज़र हथियार और नए एयर डिफेंस सिस्टम को शामिल करने की तैयारी की जा रही है।

सेना को तेजी से मजबूत कर रहा है पाकिस्तान

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अपनी सेना को तेजी से मजबूत करने में जुट गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, ड्रोन और आधुनिक हथियारों पर बड़ा निवेश कर रहा है। इसके लिए उसे चीन और तुर्की का सबसे ज्यादा सहयोग मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान तुर्की से 1,000 से अधिक आधुनिक ड्रोन (यूएवी) खरीदने की तैयारी कर रहा है। साथ ही ड्रोन और टारगेट पर हमला करने वाले लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

चीन से मिलेगा स्टील्थ फाइटर प्लेन 

पाकिस्तानी सेना अपनी 5 आर्टिलरी रेजिमेंट (तोपखाना) को मिसाइल रेजिमेंट में बदलने की योजना पर काम कर रही है। इसके अलावा देश का एयर डिफेंस नेटवर्क भी लगातार मजबूत किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान को 2026 के आखिर तक चीन से 40 जे-35 स्टील्थ फाइटर प्लेन मिलने की उम्मीद है। वहीं, चीनी तकनीक की मदद से हाई-एनर्जी लेज़र हथियार भी विकसित किए जा रहे हैं।

अटैक हेलीकॉप्टर को कर रहा अपग्रेड

इसके अलावा पाकिस्तानी सेना के 29 कोबरा अटैक हेलीकॉप्टरों को अपग्रेड किया जाएगा और 30 से ज्यादा जेड-10 अटैक हेलीकॉप्टर शामिल करने की भी योजना है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन पाकिस्तान को 200 से अधिक एसएच-15 तोपें भी उपलब्ध करा चुका है। कुल मिलाकर पाकिस्तान अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण की दिशा में काम कर रहा है।

आकाश शर्मा की रिपोर्ट