Delhi Protest: दिल्ली में पुलिसकर्मियों पर 3 महिला पत्रकारों का यौन उत्पीड़न का आरोप, क्राइम जांच ने शुरू की जांच

Delhi Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है जिसके बाद मामले की निष्पक्ष जांच के लिए शिकायतों को क्राइम ब्रांच ट्रांसफर कर दिया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ नयी दिल्ली जिला पुलिस को ये शिकायतें मिली थीं। उन्होंने बताया कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नई दिल्ली जिला पुलिस ने शिकायतों को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।

अधिकारी के अनुसार, ये आरोप तीनों महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए हैं। उन्होंने बताया कि अपराध शाखा आरोपों की गहन जांच करेगी और शिकायतकर्ता महिला पत्रकारों तथा संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज करेगी। दिल्ली पुलिस ने रविवार (4 अक्टूबर) को X पर एक पोस्ट में कहा, “03-10-26 को नई दिल्ली इलाके में विरोध-प्रदर्शन के दौरान, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की स्थिति में, तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। नई दिल्ली ज़िले को उनकी शिकायतें मिली हैं और निष्पक्ष जांच के लिए इन्हें क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है।”

राहुल गांधी का हमला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं के साथ बदसलूकी किए जाने के आरोपों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शनिवार को जवाब मांगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने X पर एक पोस्ट में कहा कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है, इसलिए अमित शाह को इस मामले में जवाब देना चाहिए। गांधी ने कहा, “जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ इतनी मांग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए। ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वह भी नहीं किया।”

उन्होंने कहा कि शनिवार को ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। गांधी ने कहा, “महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं। कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए।” उन्होंने कहा, “और यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अधिकारी महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं।”

कांग्रेस नेता ने कहा, “पूरी दिल्ली की महिलाएं, छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर घबराहट में हैं, सत्याग्रह कर रही हैं-मगर जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफाजत की जिम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही है।” उन्होंने कहा, “और एक महिला की शिकायत दर्ज करने से जो सरकार डरती है- वह आखिर किसकी हिफाजत कर रही है?” राहुल गांधी ने आगे कहा, “दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। अमित शाह जी, कहां हैं आप? जवाब आपको ही देना है।”

आइसा ने भी लगाए आरोप

वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं। आइसा ने एक बयान में कहा, “पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और वकीलों के साथ धक्का-मुक्की की। कई महिलाओं ने पुरुष पुलिसकर्मियों पर उन्हें अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया है।” संगठन ने कहा, “महिलाओं को न्याय दिलाने का दावा करने वाला पुलिस बल भीड़ को कंट्रोल करने के बुनियादी नियमों का पालन नहीं कर सका। पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ खुलेआम दुर्व्यवहार किया और (वे) बेहद गैर-पेशेवर तरीके से पेश आए।”

200 लोगों को हिरासत में लिया गया

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर शनिवार को हुए प्रदर्शन के सिलसिले में लगभग 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। वहीं, दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शन को लेकर आदेश न मानने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने तथा उनपर हमला करने से संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं। नई दिल्ली जिले में पाबंदी आदेश लागू होने के बावजूद, छात्र संगठनों और नागरिक संगठन के सदस्यों समेत प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने की कोशिश की।

हिरासत में लिए गए लोगों में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण शामिल थे। आइसा ने बताया कि वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, नित्या रामकृष्णन और पल्लव सिसोदिया भी प्रदर्शन में शामिल हुए। पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शन के संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 223(ए), 221, 132 और 3(5) लगाई हैं।

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दिल्ली में 2 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन होगा या नहीं? जानिए कल का क्या होने वाला है

2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने वाले इस प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस ने फिलहाल अनुमति नहीं दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आयोजकों की ओर से प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है, लेकिन जंतर-मंतर पर सभा करने की मंजूरी अभी नहीं मिली है।

यह प्रदर्शन सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों की ओर से बुलाया गया है। प्रदर्शन में चुनाव आयोग के कामकाज और वोटर लिस्ट में होने वाले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सवाल उठाए जाएंगे।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि जंतर-मंतर पर प्रस्तावित इस प्रदर्शन के लिए अभी तक अनुमति नहीं दी गई है।

बता दें कि यह प्रदर्शन गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को आयोजित किया जाना है। इस दौरान प्रदर्शन के आयोजकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर इलाके की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेड्स भी लगा दिए हैं।

बता दें कि आम आदमी पार्टी (AAP) दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सोमवार को लोगों से जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की सार्वजनिक अपील की थी। इसके अलावा, कुछ अन्य विपक्षी समूह भी इस प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं या अलग से प्रदर्शन कर सकते हैं।

इस बीच, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 2 अक्टूबर को शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में समानांतर “जेल भरो आंदोलन” की घोषणा की है।

दिपके ने पहले कहा था कि मुंबई पुलिस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के 2 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। इसके बाद, उन्होंने गांधी जयंती के दिन ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान किया।

शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की इजाजत क्यों नहीं मिली?

हालांकि, मुंबई पुलिस ने साफ किया कि बॉम्बे हाई कोर्ट के 2013 के आदेश को देखते हुए, उन्हें शिवाजी पार्क में सभा के लिए “इजाजत देने का अधिकार नहीं है” और यह इलाका एक “साइलेंस जोन” है। पुलिस ने कहा कि आवेदन करने वाले अजिंक्य शिंदे को सलाह दी गई थी कि वे मुंबई में कोई दूसरी जगह देखें और इजाजत के लिए आवेदन करें, जिस पर उचित रूप से विचार किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, CJP ने मूल रूप से योजना बनाई थी कि अगर ज्ञानेश कुमार CEC के पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 2 अक्टूबर को मुंबई से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

ANI के मुताबिक, 25 सितंबर को दिपके ने कहा था, “अगर ज्ञानेश कुमार कल तक इस्तीफा नहीं देते हैं, तो CJP 2 अक्टूबर को मुंबई से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा और इसे भारत भर के शहरों तक ले जाएगा। आइए, इस गांधी जयंती पर लोकतंत्र को बचाने का संकल्प लें।”

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Delhi Gang-rape: दिल्ली में कालकाजी मंदिर के पास नाबालिग के साथ गैंगरेप, आरोपियों ने खुद को बताया पुलिसकर्मी, आसिफ अरेस्ट

Delhi Gang-rape: देश की राजधानी दिल्ली में पिछले महीने चलती बस में एक छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद अब एक और नाबालिग बच्ची के साथ कथित गैंगरेप की शर्मनाक घटना सामने आई है। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली पुलिस ने कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से कथित दुष्कर्म करने के एक आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। यह आरोपी उन तीन लोगों में शामिल था जिन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताकर सोमवार 21 सितंबर शाम आस्था कुंज पार्क में लड़की से कथित रूप से गैंगरेप किया था।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की पहचान आसिफ के रूप में हुई है। उसने अमर कॉलोनी में डीएम ऑफिस रोड के पास पुलिस टीम द्वारा उसे रोके जाने पर कथित तौर पर तीन गोलियां चलाईं। पुलिस ने बताया कि गोलीबारी के दौरान एक गोली हेड कांस्टेबल राजेश की ‘बुलेट-प्रूफ जैकेट’ पर लगी जिसके बाद हेड कांस्टेबल ने आत्मरक्षा में दो गोलियां चलाई। इनमें से एक आरोपी आसिफ की दाहिनी टांग में लगी।

पुलिसकर्मी बता वारदात को दिया अंजाम

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घायल आरोपी को बाद में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। लड़की के बयान के अनुसार, वह और उसका 17 वर्षीय पुरुष मित्र कालकाजी मंदिर गए थे। बाद में गेट नंबर 7 से आस्था कुंज पार्क में दाखिल हुए थे। पुलिस ने बताया कि तीन व्यक्ति उनके पास आए। उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया। फिर लड़की को उसके दोस्त से अलग करने के बाद एक सुनसान इलाके में ले गए।

शिकायत के अनुसार, आसिफ ने लड़की को पिस्तौल और चाकू दिखाकर कथित तौर पर धमकाया और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। उसके साथ मौजूद दो अन्य व्यक्तियों ने भी उससे कथित तौर पर गैंगरेप किया, जिसके बाद तीनों व्यक्तियों ने लड़की और उसके दोस्त को धमकी दी।

8:45 बजे पुलिस को मिली जानकारी

पुलिस ने बताया कि कथित दुष्कर्म के संबंध में रात करीब 8:45 बजे पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) को सूचित किया गया। इसके बाद अमर कॉलोनी थाने के प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मी आस्था कुंज पार्क पहुंचे, जहां किशोरी अपने दोस्त के साथ मिली। लड़की की एम्स में जांच कराई गई। जबकि अपराध और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर प्रासंगिक साक्ष्य जुटाए। अमर कॉलोनी थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई।

पुलिस का बयान

दिल्ली पुलिस ने कहा, “रात करीब 8:45 बजे DD नंबर 93A के जरिए कालकाजी मंदिर के पास तीन लोगों द्वारा एक 17 साल की नाबालिग लड़की के कथित रेप के बारे में PCR कॉल मिली। जानकारी मिलने पर अमर कॉलोनी थाने के SHO और उनकी टीम आस्था कुंज पार्क पहुंची, जहां पीड़िता अपने पुरुष दोस्त के साथ मिली।”

पीड़िता के बयान के अनुसार, “वह और उसका दोस्त दर्शन के लिए कालकाजी मंदिर गए थे। उसके बाद गेट नंबर 7 से आस्था कुंज पार्क में दाखिल हुए। तीन लोगों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मी बनकर उसे उसके दोस्त से अलग किया और एक सुनसान इलाके में ले गए। आरोपियों में से एक (जिसकी पहचान आसिफ के तौर पर हुई है) ने कथित तौर पर बंदूक और चाकू दिखाकर उसे धमकाया और उसका यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद, दो अन्य आरोपियों ने भी कथित तौर पर उसका यौन उत्पीड़न किया। आरोपियों ने बाद में पीड़िता और उसके दोस्त को धमकाया।”

ऐसे हुई गिरफ्तारी

आरोपियों का पता लगाने के लिए कई टीम का गठन किया गया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को अमर कॉलोनी में डीएम ऑफिस रोड के पास आसिफ की आवाजाही के बारे में विशिष्ट सूचना मिली जिसके बाद जाल बिछाया गया। जब आरोपी को पुलिस द्वारा रोका गया, तो उसने कथित तौर पर पुलिस पार्टी पर गोली चलाई।

आरोपी ने की फायरिंग

पुलिस ने बताया कि जब पुलिस टीम ने उसे रोका, तो सरेंडर करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद आसिफ ने कथित तौर पर गोलीबारी शुरू कर दी। उसने तीन गोलियां चलाई। उसने बताया कि एक गोली हेड कांस्टेबल राजेश की ‘बुलेट-प्रूफ जैकेट’ पर लगी, जिसके बाद पुलिसकर्मी ने आत्मरक्षा में दो गोलियां चलाई। मुठभेड़ स्थल पर अपराध जांच और FSL (फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला) के दलों को बुलाया गया और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस अन्य दो आरोपियों का पता लगाने के लिए प्रयास जारी रखे हुए है।

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अफेयर को लेकर पत्नी से हुआ झगड़ा, गुस्से में पति ने शेविंग ब्लेड से किया हमला, आरोपी गिरफ्तार

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के सुंदर नगरी इलाके से पति-पत्नी के बीच विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि पति-पत्नी के बीच किसी दूसरी महिला से संबंध को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान आरोपी ने कथित तौर पर अपनी पत्नी पर शेविंग ब्लेड से हमला कर दिया। घटना में महिला के चेहरे और गले पर चोटें आई हैं। मंगलवार को पुलिस ने महिला के पति को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने 35 साल के माजिद हुसैन के खिलाफ हत्या की कोशिश के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, हमले में इस्तेमाल किया गया शेविंग ब्लेड भी आरोपी के पास से बरामद कर लिया गया है।

क्यों हुआ था विवाद

इंडिया टुडे के मुताबिक, महिला ने पुलिस को बताया कि उसके पति के किसी दूसरी महिला से संबंध थे और इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। महिला ने ये भी आरोप लगाया कि पति पहले भी उसके साथ झगड़ा और मारपीट करता था। बताया जा रहा कि घटना से करीब 15 दिन पहले पति के साथ लगातार हो रहे झगड़ों से परेशान होकर महिला अपने तीन बच्चों को लेकर लोनी स्थित मायके चली गई थी। घटना से दो दिन पहले माजिद हुसैन और उसके पिता ने उसे समझाकर वापस घर बुला लिया। महिला के घर लौटने के बाद कुछ ही समय में पति-पत्नी के बीच फिर विवाद शुरू हो गया। इसके बाद दोनों के बीच हुई बहस ने गंभीर रूप ले लिया।

शेविंग ब्लेड से किया हमला

13 सितंबर की रात करीब 11 बजे पति-पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि माजिद हुसैन ने कथित तौर पर अपनी पत्नी पर शेविंग ब्लेड से हमला कर दिया। इस घटना में महिला के चेहरे और गले पर चोटें आईं। रात करीब 11:40 बजे पुलिस को घटना की सूचना मिली। पुलिस के पहुंचने से पहले ही महिला को इलाज के लिए राजीव गांधी अस्पताल ले जाया गया था, जहां उसका इलाज किया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस में दर्ज की शिकायत

पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर घायल महिला का बयान दर्ज किया और 14 सितंबर को इस मामले में एफआईआर दर्ज की। इसके बाद फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल की जांच कर जरूरी सबूत जुटाए। पुलिस ने माजिद हुसैन को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की, जिसमें उसके कथित तौर पर हमले में शामिल होने की बात सामने आई। रिपोट्स के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

10 सितंबर को किया था चेक-इन…अंदर से बंद था कमरा, दिल्ली के होटल में पायलट की संदिग्ध हालत में मौत

दिल्ली के वसंत कुंज इलाके से हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। वसंत कुंज इलाके के एक होटल में एयर इंडिया के एक पायलट की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक एयरलाइन में कैप्टन के तौर पर काम कर रहे थे। पुलिस और एयरलाइन अधिकारियों के मुताबिक, पायलट लेओवर के दौरान एक होटल में ठहरे हुए थे। होटल के कमरे में उन्हें बेहोशी की हालत में पाया गया, जिसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने फिलहाल मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है।

होटल में पाए गए बेहोश

एयरलाइन अधिकारियों के मुताबिक, मुंबई के रहने वाले पायलट बोइंग 787 की कन्वर्जन ट्रेनिंग के सिलसिले में दिल्ली पहुंचे थे और 10 सितंबर को वसंत कुंज के एक होटल में ठहरे थे। अगले दिन शाम को वह अपने कमरे में बेहोशी की हालत में मिले। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, मृतक पायलट इससे पहले एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ काम कर चुके थे और कुछ महीने पहले ही एयर इंडिया में शामिल हुए थे। वह दिल्ली में ट्रेनिंग के लिए आए हुए थे और शनिवार सुबह उन्हें एक फ्लाइट की कमान संभालनी थी।

भाई ने किया कॉन्टैक्ट

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 11 सितंबर को वसंत कुंज नॉर्थ थाने में एक होटल में ठहरे व्यक्ति की तबीयत खराब होने के बारे में एक PCR कॉल आई थी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो पायलट कमरे के अंदर बेहोशी की हालत में मिले। बताया गया कि उनके भाई ने कई बार फोन किया, लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने होटल मैनेजर से संपर्क किया। मैनेजर ने मास्टर चाबी की मदद से कमरे का दरवाजा खोला, जहां पायलट बेहोश मिले। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस कर रही मामले की जांच

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने क्राइम टीम को होटल भेजा और मामले से जुड़े सबूत जुटाए। पायलट का पोस्टमॉर्टम 12 सितंबर को सफदरजंग अस्पताल में कराया गया। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने नहीं आई है। लेकिन, मौत की सही वजह पोस्टमॉर्टम की अंतिम मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है।

एयर इंडिया ने पायलट के निधन पर गहरा दुख जताया है। एयरलाइन ने कहा कि वह इस मुश्किल समय में पायलट के परिवार के लगातार संपर्क में है और उन्हें हर संभव मदद और सहयोग प्रदान कर रही है।

मैंने सिर फोड़ दिया था…’, दावा करने वाला ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, CJP प्रोटेस्टर के पिता पर हमला करने का है आरोप

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को खुद को ‘इन्फ्लुएंसर’ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया है। उस पर जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने का आरोप है। भारद्वाज की गिरफ्तारी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से उसे हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। बता दें कि यह कार्रवाई नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP), इंडियन यूथ कांग्रेस और लोकसभा सांसद चंद्र शेखर व राजेश रंजन के विरोध प्रदर्शन के बाद की गई थी।

इसके बाद भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया।

पीड़ित और उनकी बेटी के वकील ऋषभ रंजन ने CNN-News18 को बताया: “उनकी सुनवाई बहुत हैरान करने वाली थी। हम इंतजार कर रहे थे, लेकिन उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। हमें बस यह जानकारी मिली कि स्वतंत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पेशल जज के सामने उनके घर पर पेश किया गया। हमें बताया गया कि एक दिन की पुलिस कस्टडी दी गई है, लेकिन इस समय हमारे पास और कोई जानकारी नहीं है।”

उन्होंने कहा, “हमें यह भी नहीं पता कि कौन सी धाराएं जोड़ी गई हैं।”

इससे पहले, सूत्रों ने CNN-News18 को बताया था कि दिल्ली पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण’ (POCSO) एक्ट के तहत एक नई FIR दर्ज की है, साथ ही भारद्वाज के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति’ (SC/ST) एक्ट की धाराएं भी जोड़ी हैं।

क्या है पूरा मामला?

21 साल के ‘इन्फ्लुएंसर’ और अन्य लोगों पर संजय आजाद नाम के व्यक्ति पर हमला करने का आरोप है, जो 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में अपनी नाबालिग बेटी के साथ गए थे।

हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान, भारद्वाज ने दावा किया कि उसने “पीड़ित का सिर फोड़ दिया था” और कहा कि उसे कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन हासिल है, जिनमें बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान शामिल हैं।

उसने कहा “मैंने निशु के पिता का सिर फोड़ दिया। क्या आप जानते हैं कि इस अपराध पर कौन सी धारा लागू होती है? धारा 307। उन्हें 60 टांके लगे। उस व्यक्ति को गंभीर हालत में एम्बुलेंस से ले जाया जा रहा था।”

भारद्वाज ने दावा किया कि इस घटना के बावजूद, उसे जेल नहीं हुई और वो आजादी से घूमता रहा।

भारद्वाज ने कहा, “उसकी बेटी पुलिस स्टेशन के बाहर खड़ी होकर कह रही थी कि अगर उसके पिता को न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी। लेकिन मुझे जेल तक नहीं हुई। दुनिया को यह पता होना चाहिए। मैं पूरी रात बाहर घूमता रहा।”

उसने आगे कहा, “मुझ पर हनुमान जी की कृपा है। दूसरी बात, कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई हैं। कहा जाता है कि कपिल मिश्रा के फोन करने पर मुझे छोड़ा गया। चिराग पासवान मेरे बड़े भाई हैं। आप कितने नेताओं को जानते हैं? क्या आप मोदी जी को जानते हैं? मोदी जी भी मेरे बड़े भाई हैं। मुझे सबका समर्थन हासिल है।”

विपक्ष की नाराजगी, पासवान ने बनाई दूरी

उसके बयानों पर CJP, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

इसके बाद, चिराग पासवान ने खुद को उस तथाकथित ‘इन्फ्लुएंसर’ से अलग कर लिया और जोर देकर कहा कि जो लोग खुलेआम कानून का मजाक उड़ाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि अगर भारद्वाज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता की नजर में यह एक गलत मिसाल कायम करेगा।

उन्होंने भारद्वाज पर अपने नाम का “गलत इस्तेमाल” करने का भी आरोप भी लगाया। “मामले की गंभीरता को देखते हुए और चूंकि उस व्यक्ति ने मेरे नाम के साथ-साथ कई अन्य राजनेताओं के नामों का भी गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए मैंने उसके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच करने का आग्रह भी किया है… संजय जी (निशु के पिता) आज जिस स्थिति में हैं, उसे देखते हुए मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से उनके और उनके परिवार के साथ खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उन्हें न्याय दिलाना एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसे मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से स्वीकार करते हैं… हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सच सामने आए और जो व्यक्ति खुलेआम कानून का मजाक उड़ा रहा है, उसके खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की जाए…”

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मैंने सिर फोड़ दिया था…’, दावा करने वाला ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, CJP प्रोटेस्टर के पिता पर हमला करने का है आरोप

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को खुद को ‘इन्फ्लुएंसर’ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया है। उस पर जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने का आरोप है। भारद्वाज की गिरफ्तारी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से उसे हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। बता दें कि यह कार्रवाई नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP), इंडियन यूथ कांग्रेस और लोकसभा सांसद चंद्र शेखर व राजेश रंजन के विरोध प्रदर्शन के बाद की गई थी।

इसके बाद भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया।

पीड़ित और उनकी बेटी के वकील ऋषभ रंजन ने CNN-News18 को बताया: “उनकी सुनवाई बहुत हैरान करने वाली थी। हम इंतजार कर रहे थे, लेकिन उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। हमें बस यह जानकारी मिली कि स्वतंत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पेशल जज के सामने उनके घर पर पेश किया गया। हमें बताया गया कि एक दिन की पुलिस कस्टडी दी गई है, लेकिन इस समय हमारे पास और कोई जानकारी नहीं है।”

उन्होंने कहा, “हमें यह भी नहीं पता कि कौन सी धाराएं जोड़ी गई हैं।”

इससे पहले, सूत्रों ने CNN-News18 को बताया था कि दिल्ली पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण’ (POCSO) एक्ट के तहत एक नई FIR दर्ज की है, साथ ही भारद्वाज के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति’ (SC/ST) एक्ट की धाराएं भी जोड़ी हैं।

क्या है पूरा मामला?

21 साल के ‘इन्फ्लुएंसर’ और अन्य लोगों पर संजय आजाद नाम के व्यक्ति पर हमला करने का आरोप है, जो 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में अपनी नाबालिग बेटी के साथ गए थे।

हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान, भारद्वाज ने दावा किया कि उसने “पीड़ित का सिर फोड़ दिया था” और कहा कि उसे कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन हासिल है, जिनमें बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान शामिल हैं।

उसने कहा “मैंने निशु के पिता का सिर फोड़ दिया। क्या आप जानते हैं कि इस अपराध पर कौन सी धारा लागू होती है? धारा 307। उन्हें 60 टांके लगे। उस व्यक्ति को गंभीर हालत में एम्बुलेंस से ले जाया जा रहा था।”

भारद्वाज ने दावा किया कि इस घटना के बावजूद, उसे जेल नहीं हुई और वो आजादी से घूमता रहा।

भारद्वाज ने कहा, “उसकी बेटी पुलिस स्टेशन के बाहर खड़ी होकर कह रही थी कि अगर उसके पिता को न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी। लेकिन मुझे जेल तक नहीं हुई। दुनिया को यह पता होना चाहिए। मैं पूरी रात बाहर घूमता रहा।”

उसने आगे कहा, “मुझ पर हनुमान जी की कृपा है। दूसरी बात, कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई हैं। कहा जाता है कि कपिल मिश्रा के फोन करने पर मुझे छोड़ा गया। चिराग पासवान मेरे बड़े भाई हैं। आप कितने नेताओं को जानते हैं? क्या आप मोदी जी को जानते हैं? मोदी जी भी मेरे बड़े भाई हैं। मुझे सबका समर्थन हासिल है।”

विपक्ष की नाराजगी, पासवान ने बनाई दूरी

उसके बयानों पर CJP, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

इसके बाद, चिराग पासवान ने खुद को उस तथाकथित ‘इन्फ्लुएंसर’ से अलग कर लिया और जोर देकर कहा कि जो लोग खुलेआम कानून का मजाक उड़ाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि अगर भारद्वाज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता की नजर में यह एक गलत मिसाल कायम करेगा।

उन्होंने भारद्वाज पर अपने नाम का “गलत इस्तेमाल” करने का भी आरोप भी लगाया। “मामले की गंभीरता को देखते हुए और चूंकि उस व्यक्ति ने मेरे नाम के साथ-साथ कई अन्य राजनेताओं के नामों का भी गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए मैंने उसके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच करने का आग्रह भी किया है… संजय जी (निशु के पिता) आज जिस स्थिति में हैं, उसे देखते हुए मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से उनके और उनके परिवार के साथ खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उन्हें न्याय दिलाना एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसे मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से स्वीकार करते हैं… हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सच सामने आए और जो व्यक्ति खुलेआम कानून का मजाक उड़ा रहा है, उसके खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की जाए…”

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जंतर-मंतर मारपीट मामला : स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया, CJP ने दिया था 72 घंटे का अल्टीमेटम, पढ़िए क्या था पूरा मामला

जंतर-मंतर मारपीट मामला : स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया, CJP ने दिया था 72 घंटे का अल्टीमेटम, पढ़िए क्या था पूरा मामला

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया गया है। स्वतंत्र की गिरफ्तारी के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन कर किया था। शुक्रवार को CJP के प्रतिनिधिमंडल ने संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचकर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका भी शामिल थे। 

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क्या था पूरा मामला

खुद को 'हिन्दुत्व एक्टिविस्ट' बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने CJP के प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की थी। वायरल वीडियो क्लिप में भारद्वाज कथित तौर पर यह कहते नजर आए कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार की 'खोपड़ी फोड़ दी थी' और कथित घटना की गंभीरता के बावजूद जेल जाने से बच गए। CJP ने उस प्रदर्शन का आयोजन किया था, जिसके दौरान कथित मारपीट की घटना हुई थी। संगठन लगातार स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। CJP का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की।

दिल्ली पुलिस ने खोपड़ी में फ्रैक्चर के दावे को नकारा

विवाद उस समय और बढ़ गया जब गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने कहा कि 38 वर्षीय संजय कुमार को झड़प के दौरान सिर में साधारण चोट लगी थी। पुलिस ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि संजय कुमार की खोपड़ी में फ्रैक्चर हुआ है।  पुलिस के मुताबिक स्वतंत्र भारद्वाज और एक अन्य आरोपी सूरज कुमार को घटनास्थल पर हिरासत में लिया गया था। दोनों से पूछताछ की गई और उन्हें नोटिस भी जारी किए गए। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि मामले में जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

 

 

कौन हैं स्वतंत्र भारद्वाज?

स्वतंत्र भारद्वाज एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उन पर जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला उस समय फिर चर्चा में आ गया जब भारद्वाज से जुड़े एक पॉडकास्ट की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई।

 

हालांकि, स्वतंत्र भारद्वाज ने संजय पर हमला करने के आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी थी। भारद्वाज के मुताबिक, उन्हें करीब 10-15 लोगों ने घेर लिया था और उन्हें डर था कि उनके साथ मारपीट या उनकी हत्या तक की जा सकती है। उन्होंने वायरल पॉडकास्ट क्लिप को भी कथित तौर पर गलत तरीके से पेश किए जाने का दावा किया और कहा कि उनकी राजनीतिक संबद्धता को लेकर लोगों ने उस क्लिप को मजाक या व्यंग्य के तौर पर बनाया था।

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निशु आजाद ने क्या आरोप लगाए?

निशु आजाद ने भारद्वाज के दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि आरोपी और उसके समर्थकों ने उन्हें परेशान किया और दुष्कर्म की धमकियां भी दीं। निशु के अनुसार, इन धमकियों को लेकर उन्होंने अलग से FIR भी दर्ज कराई है। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान संजय के साथ गंभीर मारपीट हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आरोपी अब तक बाहर क्यों है और पुलिस से मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर संजय की खोपड़ी में फ्रैक्चर होने की बात को लेकर गलत सूचना फैलाई गई थी। पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग थाने में मामला दर्ज किया जा चुका है और आरोपी से पूछताछ भी की गई है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी को अभी कुछ नोटिस दिए जाने बाकी हैं।  जांच पूरी होने के बाद सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल करने समेत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मामले को मिला राजनीतिक रंग

निशु आजाद के मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कुछ नेताओं ने निशु के प्रति समर्थन जताया है। इसके बाद जंतर-मंतर की घटना और स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है।

Delhi Gangrape: ग्रेटर नोएडा से कश्मीरी गेट तक 16 वर्षीय छात्रा से गैंगरेप, स्लीपर बस के अंदर 47 KM तक हैवानियत, दिल्ली पुलिस ने क्या बताया?

Delhi Gangrape: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में एक स्लीपर बस के अंदर 11वीं क्लास की 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया। पीड़िता की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना चार अगस्त की रात की है जब ग्रेटर नोएडा में अपने रिश्तेदार से मिलने जा रही लड़की भारी बारिश के दौरान गलती से परी चौक पर उतर गई। उसने कथित तौर पर खाली स्लीपर बस को रूकने का इशारा किया। फिर ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने उसे बस में बैठा लिया। पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने कथित तौर पर उसके साथ गैंगरेप किया। फिर आरोपियों ने उसे कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया।

आरोपियों ने पीड़िता को घटना के बारे में किसी को बताने पर परिणाम भुगतने की धमकी दी। बस को फोरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, बस परी चौक से नोएडा सेक्टर 63 तक गई। फिर नोएडा सेक्टर 63 से दिल्ली के बस कश्मीरी गेट की तरफ गई। लड़की को रिंग रोड पर उतारा गया। फिर बस को तिमारपुर बस डिपो में पार्क किया गया।

दिल्ली पुलिस ने क्या बताया?

दिल्ली पुलिस ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, “राजधानी में एक स्लीपर बस में 16 साल की स्कूली छात्रा के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। पुलिस ने गैंगरेप के आरोपी ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ़्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि यह घटना 4 अगस्त की रात को हुई थी। पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल की गई स्लीपर बस को जब्त कर लिया है और उसकी फोरेंसिक जांच की जा रही है।” पुलिस ने बताया कि पीड़िता उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की रहने वाली है। वह 11वीं क्लास की छात्रा है।

47 किलोमीटर तक दरिंदगी!

पुलिस ने बताया कि 4 तारीख को ही दोनों आरोपियों कुलदीप (39) और संदीप (26) को गिरफ्तार कर लिया गया। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि परी चौक और नोएडा सेक्टर 63 के बीच उसके साथ गैंगरेप किया गया। पुलिस ने बताया कि बस के CCTV कैमरे बंद थे। ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट के 47 किलोमीटर की दूरी के दौरान दोनों आरोपियों ने छात्रा के साथ जबरन हैवानियत की। पुलिस का दावा है कि स्लीपर बस में पर्दे लगे थे, इसलिए इस सफर के दौरान अंदर का किसी को दिखाई नहीं दिया।

गलती से परी चौक उतर गई थी पीड़िता

पुलिस के मुताबिक, भारी बारिश और अंधेरे के बीच पीड़िता गलती से परी चौक पर उतर गई। फिर उसके मदद के लिए इशारा करने पर उस इलाके से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस रुकी। इस दौरान पूछने पर ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने कथित तौर पर उससे कहा कि बस नोएडा सेक्टर 63 जा रही है। दोनों दरिंदों ने उसे बस में प्यार से चढ़ने को कहा। पुलिस ने बताया कि बस चलने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर ने कथित तौर पर उस लड़की के साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दीं।

गैंगरेप के बाद जान से मारने की धमकी दी

लड़की का आरोप है कि इसके बाद ड्राइवर और कंडक्टर दोनों ने उसका जबरन गैंगरेप किया। विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद बस परी चौक से कश्मीरी गेट तक लगभग 47 किलोमीटर तक दौड़ती रही। आरोपियों ने कथित तौर पर देर रात कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास रिंग रोड पर लड़की को छोड़कर भाग गए। डरी हुई छात्रा ने कश्मीरी गेट पुलिस से संपर्क किया और घटना की पूरी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने तिमारपुर के बस पार्किंग एरिया से कुलदीप और संदीप को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही स्लीपर बस को जब्त कर लिया।

बस को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच करने वालों ने बताया कि बस पहले खराब हो गई थी। उसे मरम्मत के लिए सूरजपुर के एक वर्कशॉप में ले जाया गया था। मरम्मत पूरी होने के बाद, ड्राइवर और कंडक्टर खाली बस को तिमारपुर ले जा रहे थे, तभी परी चौक पर उन्हें पीड़िता दिखी। पुलिस ने बताया कि स्लीपर बस की बर्थ के चारों ओर पर्दे लगे थे, जिससे कथित तौर पर आरोपियों को यात्रा के दौरान अंदर हो रही गतिविधियों को छिपाने में मदद मिली। परी चौक और कश्मीरी गेट के बीच बस ने लगभग 47 किलोमीटर का सफर तय किया, जिसके बाद कथित तौर पर किशोर को छोड़ दिया गया। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है।

बस से आरोपियों के सफर का रूट

47 किलोमीटर की सड़क यात्रा के दौरान जिस रूट पर गैंगरेप हुआ, उसे इस तरह समझा जा सकता है:-

– ग्रेटर नोएडा के परी चौक से नोएडा सेक्टर 63 तक।

– फिर सेक्टर 63 से NH-24 तक गए।

– इसके बाद NH-24 से आउटर रिंग रोड गए।

– फिर लड़की को कश्मीरी गेट रिंग रोड पर उतार दिया।

– इसके बाद बस को आरोपियों ने तिमारपुर पार्किंग में पार्क किया

– यह बस ‘विश्वनाथ ट्रैवल्स’ की है।

दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा, प्रदर्शनकारी को गोली लगने का दावा गलत, मेडिकल रिपोर्ट में नहीं मिले सबूत

नई दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लगने के दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे थे। अब दिल्ली पुलिस ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि मेडिकल जांच में गोली लगने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया कि घायल प्रदर्शनकारी की MLC (Medico-Legal Case) रिपोर्ट में दाहिने कान के आगे (Right Tragus) हिस्से में चोट दर्ज की गई है। डॉक्टरों के अनुसार यह चोट ब्लंट इंजरी (किसी ठोस वस्तु से लगी चोट) है और यह सामान्य श्रेणी की चोट है।

 

पुलिस ने कहा कि MLC में चोट की प्रकृति ब्लंट बताई गई है। डॉक्टर की राय के अनुसार यह साधारण चोट है और गोली लगने का कोई सबूत नहीं मिला है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।

 

दिल्ली पुलिस ने X से मांगी आपत्तिजनक पोस्ट हटाने की मांग

 

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन के दौरान संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने वाली कथित आपत्तिजनक, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक सामग्री को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को पत्र लिखा था।

 

पुलिस ने X से ऐसी पोस्ट और वीडियो तुरंत हटाने की मांग की है। साथ ही संबंधित यूजर्स की पूरी जानकारी मांगी गई है, जिसमें:

 

यूजर का नाम

पता

संपर्क विवरण

ईमेल आईडी

लॉगिन और लॉगआउट रिकॉर्ड (समय और तारीख सहित)

 

शामिल हैं।

 

दिल्ली पुलिस ने प्लेटफॉर्म से संबंधित कंटेंट का डेटा सुरक्षित रखने को भी कहा है ताकि आगे की जांच में इसका इस्तेमाल किया जा सके। पुलिस ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 63(4) के तहत प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की भी मांग की है।

 

पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के निर्देश

दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियों वाली पोस्ट और वीडियो हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिए हैं। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन और 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा वाले पोस्ट सामने आए थे।

 

दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम लगातार ऐसे कंटेंट की निगरानी कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस जारी कर उसे हटाने के निर्देश दिए जाते हैं। पुलिस के मुताबिक, नोटिस के बाद प्रधानमंत्री के खिलाफ कई आपत्तिजनक टिप्पणियों और वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जा चुका है।