Silver Rate Today: 30 जून को चांदी की कीमतों में आई गिरावट, चेक करें अपने शहर का रेट

Silver Rate Today: अगर आप भी चांदी के गहने खरदीने या निवेश करने का प्लान कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। दरअसल, आज यानी 30 जून को बुलियन मार्केट में चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। जिसके बाद दिल्ली के सर्राफा बाजार में 1 किलो चांदी की कीमत 2,19,412 हो गई। वहीं, कल सुबह चांदी का भाव 2.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर खुला था लेकिन शाम में बुलियन मार्केट में 2.19 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।

चेक करें अपने शहर का रेट

शहरचांदी का भाव (₹ प्रति किग्रा)10 ग्राम का भाव (₹)100 ग्राम का भाव (₹)कल की गिरावट
दिल्ली2,19,4142,19421,940887 रुपये/किग्रा
लखनऊ2,21,167894 रुपये/किग्रा
मुंबई2,19,631जानकारी नहीं
हैदराबाद2,19,850जानकारी नहीं
पटना2,19,412887 रुपये/किग्रा
जयपुर2,19,412जानकारी नहीं

पिछले 5 महीने से 1.90 लाख रुपये सस्ती हुई चांदी

साल की शुरुआत में MCX पर चांदी का भाव 4,10,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया था। वहीं, इस समय चांदी का भाव 2,19,400 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। अगर शुरु से अब तक यानी बीते पांच महीने में चांदी के दाम की तुलना करें तो इसका रेटॉ अपने पीक से 1.90 लाख रुपये कम हो गया है। फिलहाल, चांदी में अभी भी लगातार गिरावट जारी है।

चांदी की बढ़ी सेल

पिछले कुछ हफ्तों में सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट का असर अब सर्राफा बाजार में साफ दिखने लगा है। ज्वैलर्स का कहना है कि दाम घटने से ग्राहकों की खरीदारी में बढ़ोतरी हुई है और बाजार में रौनक लौटती नजर आ रही है।

इसके साथ ही कई लोग कीमतों में और गिरावट की आशंका को देखते हुए घर में रखा सोना भी बेच रहे हैं। व्यापारियों का मानना है कि अगर आने वाले त्योहारों के सीजन में भी कीमतें इसी तरह नरम रहती हैं, तो इसका सीधा फायदा बिक्री में देखने को मिल सकता है।

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Gold Price Outlook: अगले 6 महीने में 36% बढ़ेगा सोने का भाव! UBS ने गिरावट के बाद भी जताया भरोसा

Gold Price Outlook: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। हालांकि वैश्विक ब्रोकरेज UBS का मानना है कि यह कमजोरी अस्थायी है। कंपनी का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी गोल्ड का प्राइस 4046 डॉलर के करीब है। यानी UBS के मुताबिक, मौजूदा स्तर से सोने में करीब 36% की तेजी देखने को मिल सकती है।

UBS का कहना है कि मजबूत निवेश मांग, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और आगे चलकर डॉलर में संभावित कमजोरी सोने को सहारा दे सकती है।

जनवरी के रिकॉर्ड हाई से 28% नीचे

UBS की रिपोर्ट के मुताबिक, जून की शुरुआत तक सोना जनवरी में बने अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 28% नीचे आ चुका था। ब्रोकरेज का कहना है कि हाल के महीनों में ऊंची ऊर्जा कीमतों, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंकाओं ने सोने पर दबाव डाला है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतें बढ़ीं, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और अमेरिकी रियल यील्ड में भी तेजी आई। इन दोनों वजहों ने सोने की चमक कुछ समय के लिए फीकी कर दी।

मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों का असर

UBS का कहना है कि जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने जैसे ऐसे निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं, जिन पर कोई ब्याज नहीं मिलता। वहीं डॉलर मजबूत होने से दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा पड़ता है, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ता है।

पिछले कुछ समय से बाजार में यही स्थिति देखने को मिली है। इसी वजह से सोना दबाव में रहा और इसकी कीमतों में गिरावट आई।

फिर भी सोने पर भरोसा क्यों?

UBS का कहना है कि सोने की तेजी के पीछे मौजूद बड़े कारण अब भी बरकरार हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल की पहली तिमाही में सोने की मांग मजबूत रही। इसके अलावा दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं।

ब्रोकरेज का मानना है कि बढ़ता वैश्विक कर्ज, अमेरिका का लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा और केंद्रीय बैंकों की रिजर्व डायवर्सिफिकेशन रणनीति आने वाले वर्षों में सोने को सहारा देती रहेगी।

भारत में कितना बढ़ेगा भाव

UBS का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी सोना करीब 4,046 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। यानी यहां से लगभग 36% की तेजी की संभावना जताई गई है।

भारत में सोने का भाव फिलहाल करीब ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी ही तेजी आती है, तो घरेलू कीमतें ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच सकती हैं। हालांकि रुपये-डॉलर की चाल, आयात शुल्क और घरेलू मांग भी कीमतों को प्रभावित करेंगे।

आगे क्या रहेगा नजरिया?

UBS को उम्मीद है कि साल के आगे चलकर अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आ सकती है। अगर ऐसा होता है तो सोने की कीमतों को नया सहारा मिल सकता है। इसके अलावा राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक जोखिम भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर खींच सकते हैं।

ब्रोकरेज का कहना है कि हालिया गिरावट लंबी अवधि की तस्वीर को नहीं बदलती। यह सिर्फ थोड़े वक्त के दबाव का असर है। UBS अब भी निवेशकों को पोर्टफोलियो में सोने को जोखिम कम करने वाले निवेश के रूप में रखने की सलाह देता है।

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