इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में Jio ने रखा ‘नेशन-फर्स्ट AI स्टैक’ का खाका

Jio AI Stack

– 'जियो AI स्टैक' को 'सॉवरेन' AI इकोसिस्टम के रूप में किया प्रस्तुत

– ग्रीन डेटा सेंटर से भारतीय भाषाओं तक पूरी AI वैल्यू चेन पर फोकस

– स्वदेशी और सॉवरेन AI इकोसिस्टम पर जोर

Jio AI Stack : इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियो ने अपने 'नेशन-फर्स्ट AI स्टैक' की रूपरेखा पेश की। कंपनी तकनीकी रूप से इसे 'जियो AI स्टैक' नाम देती है और दावा करती है कि इसे भारत की जरूरतों और बड़े पैमाने की मांग को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। जियो इंटेलिजेंस के तहत विकसित किया जा रहा यह स्टैक केवल डेटा सेंटर तक सीमित नहीं है, बल्कि एक फुल-स्टैक AI इकोसिस्टम के रूप में तैयार किया जा रहा है। 

 

'जियो AI स्टैक' में गीगावॉट स्तर के ग्रीन डेटा सेंटर, उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग व्यवस्था, प्लेटफॉर्म और फ्रेमवर्क, भारतीय भाषाओं पर आधारित डेटा फाउंडेशन, बहुभाषी इंटेलिजेंस लेयर और विभिन्न क्षेत्रों के लिए एप्लिकेशन शामिल हैं। देश में मल्टी-गीगावॉट AI डेटा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं, जो 100 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी से संचालित होंगे, ताकि राष्ट्रीय स्तर की टिकाऊ AI क्षमता तैयार की जा सके।

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'जियो AI स्टैक'  को एक 'सॉवरेन' AI इकोसिस्टम के रूप में प्रस्तुत किया गया है यानी ऐसा ढांचा जो देश में विकसित हो और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित हो। कंपनी का कहना है कि इसके जरिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, छोटे व्यवसायों और रोजमर्रा की सेवाओं में AI आधारित समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

 

कंपनी के मुताबिक जियो AI स्टैक का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को हर भारतीय, साथ ही एंटरप्राइज और सरकारी संगठनों के लिए सुलभ और किफायती बनाना है। इसके तहत भारतीय भाषाओं को समझने और स्थानीय चुनौतियों का समाधान करने वाली AI क्षमताओं पर विशेष जोर दिया गया है।

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स्थानीय संदर्भ में विकसित इंटेलिजेंस के लिए व्यापक भारतीय भाषाओं के डेटा सेट तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही सुरक्षित, बहुभाषी वॉयस AI और एजेंटिक प्लेटफॉर्म पर काम किया जा रहा है, जिससे उपयोगकर्ता अपनी भाषा में सहज AI इंटरैक्शन कर सकें।

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विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में AI की दौड़ अब केवल तकनीकी क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा संप्रभुता, ऊर्जा दक्षता, भाषाई विविधता और बड़े पैमाने पर पहुंच जैसे पहलुओं से भी जुड़ गई है। ऐसे में जियो AI स्टैक जैसे मॉडल देश के दीर्घकालिक डिजिटल और आर्थिक विकास में किस हद तक योगदान देते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
Edited By : Chetan Gour

Google Pixel 10a का धमाका, आज होगा लॉन्च, जानें भारत में संभावित कीमत और ‘सबसे दमदार’ फीचर्स

google pixel 10 a

टेक दिग्गज गूगल आज (18 फरवरी, बुधवार) अपनी फ्लैगशिप Pixel 10 सीरीज का सबसे किफायती स्मार्टफोन Google Pixel 10a लॉन्च करने जा रहा है। कंपनी इस फोन को अब तक के सबसे टिकाऊ (Durable) ए-सीरीज फोन के रूप में प्रमोट कर रही है। मजबूत बॉडी के साथ-साथ इस बार फोन में एडवांस AI फीचर्स और बेहतरीन कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है।

 

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने हाल ही में कंपनी की चौथी तिमाही (Q4) की अर्निंग कॉल के दौरान पुष्टि की थी कि पिक्सल 10 सीरीज की सफलता के बाद अब इसमें Pixel 10a को भी जोड़ा जा रहा है।

 

आज रात 9 बजे से प्री-ऑर्डर शुरू, इतनी हो सकती है कीमत

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart के अनुसार, भारत में Pixel 10a की प्री-बुकिंग आज रात 9 बजे से शुरू हो जाएगी। ग्राहक इसे फ्लिपकार्ट और गूगल स्टोर से बुक कर सकेंगे। कीमत का अनुमान: पिछले साल Pixel 9a को ₹49,999 (8GB/256GB) की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था। माना जा रहा है कि Pixel 10a की कीमत भी इसी के आसपास होगी। प्री-ऑर्डर करने वालों को एक्सचेंज बोनस, 24 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI और गूगल स्टोर क्रेडिट जैसे आकर्षक ऑफर्स मिल सकते हैं।

 

AI फीचर्स: 'जेमिनी' से होगा लैस

इस साल गूगल अपने किफायती फोन में भी प्रीमियम AI फीचर्स दे रहा है। कंपनी ने कन्फर्म किया है कि Pixel 10a में Gemini इन-बिल्ट AI असिस्टेंट के रूप में मौजूद रहेगा।

 

प्रमुख AI फीचर्स- 

Gemini Nano और Gemini Live
Pixel Screenshots और Magic Cue

Circle to Search और Live Translate

कॉल असिस्ट और बेहतर नॉइज कैंसलेशन

 

iPhone यूजर्स के लिए भी खास

Pixel 10a में आईफोन यूजर्स के साथ बेहतर कनेक्टिविटी के लिए RCS मैसेजिंग की सुविधा मिलेगी। साथ ही, यह फोन Apple AirPods, Apple TV और FaceTime के साथ भी आसानी से कंपैटिबल होगा, जिससे डेटा ट्रांसफर और वीडियो चैटिंग आसान हो जाएगी। Edited by : Sudhir Sharma

Fact Check: इंडिया AI समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी का ‘चीनी रोबोट’ विवाद; क्या है पूरी सच्चाई?

AI Summit Controversy : Chinese Robot Dog

भारत मंडपम में आयोजित हो रहे 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में तकनीकी उपलब्धियों से ज्यादा विवादों की चर्चा हो रही है। इस समय सबसे बड़ा विवाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित एक 'रोबोट डॉग' को लेकर खड़ा हुआ है, जिसके बाद यूनिवर्सिटी को प्रदर्शनी से बाहर जाने का निर्देश दिया गया है। समिट में सबसे बड़ी फजीहत गलगोटिया यूनिवर्सिटी के कारण हुई। यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक 'रोबोट डॉग' प्रदर्शित किया गया था, जिसे प्रतिनिधियों ने खुद का बनाया हुआ (In-house development) बताया।

 

फैक्ट-चेक: सोशल मीडिया पर विशेषज्ञों ने तुरंत पकड़ लिया कि यह रोबोट वास्तव में चीनी कंपनी Unitree Robotics का Go2 मॉडल है।

 

कार्रवाई: भारत सरकार के अधिकारियों ने इस “धोखाधड़ी” और “चीनी उत्पाद को भारतीय बताने” को गंभीरता से लेते हुए गलगोटिया यूनिवर्सिटी को तुरंत अपना स्टॉल हटाने और एक्सपो एरिया खाली करने का आदेश दिया।

 

यूनिवर्सिटी ने बाद में सफाई दी कि यह “गलतफहमी” थी और वे केवल छात्रों को इस पर प्रोग्रामिंग सिखा रहे थे, लेकिन तब तक यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका था।

राहुल गांधी का 'X' पर हमला: “डेटा बिक्री के लिए है”

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सरकार की आलोचना करते हुए लिखा कि भारत की प्रतिभा और डेटा का लाभ उठाने के बजाय, सरकार ने इस इवेंट को केवल दिखावे का जरिया बना दिया है।

 

राहुल गांधी का बयान: “भारत की प्रतिभा और डेटा का उपयोग करने के बजाय, एआई शिखर सम्मेलन एक अव्यवस्थित पीआर तमाशा बन गया है – भारतीय डेटा बिक्री के लिए उपलब्ध है और चीनी उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।”

 

उन्होंने आरोप लगाया कि समिट में भारतीय नवाचार के नाम पर विदेशी और विशेषकर चीनी तकनीक को बढ़ावा देकर देश की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाया गया है।

क्या है गलगोटिया यूनिवर्सिटी का 'रोबोट डॉग' विवाद?

समिट के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक चार पैरों वाला रोबोट (Quadruped Robot) प्रदर्शित किया गया था।

 

दावा: यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने मीडिया कैमरों के सामने दावा किया कि 'Orion' नाम का यह रोबोट यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' द्वारा विकसित किया गया है। उन्होंने इसे निगरानी और कैंपस सुरक्षा के लिए स्वदेशी नवाचार के रूप में पेश किया।

 

हकीकत: सोशल मीडिया पर तकनीकी विशेषज्ञों और 'X' (ट्विटर) के कम्युनिटी नोट्स ने तुरंत पहचान की कि यह रोबोट दरअसल चीनी कंपनी Unitree Robotics का मॉडल 'Unitree Go2' है, जिसे कोई भी ऑनलाइन खरीद सकता है।

सरकार की कार्रवाई: स्टॉल खाली करने के आदेश

सूत्रों के अनुसार, चीनी उत्पाद को भारतीय नवाचार के रूप में पेश करने से “राष्ट्रीय शर्मिंदगी” की स्थिति पैदा हुई। इसके बाद अधिकारियों ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी को समिट एक्सपो से अपना स्टॉल तुरंत हटाने और परिसर खाली करने का आदेश दिया।

यूनिवर्सिटी की सफाई: 'हमने निर्माण का दावा नहीं किया'

विवाद बढ़ने पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्टीकरण दिया: “हमने कभी यह नहीं कहा कि हमने इस रोबोट का निर्माण किया है। यह यूनिट्री (Unitree) से खरीदा गया है और हमारे छात्र इस पर एआई प्रोग्रामिंग सीखने के लिए प्रयोग कर रहे हैं। यह हमारे लिए एक 'चलता-फिरता क्लासरूम' है।”

 

हालांकि, इंटरनेट पर वायरल वीडियो में यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि इसे स्पष्ट रूप से “डेवलप” (विकसित) किया हुआ बता रहे हैं, जिससे उनकी सफाई पर सवाल उठ रहे हैं।

क्या Epstein row के बीच AI Impact Summit में शामिल होंगे Bill Gates, क्यों बना हुआ है सस्पेंस

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स के ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ AI (Impact Summit) में शामिल होने को लेकर मंगलवार को उस समय असमंजस की स्थिति पैदा हो गई, जब सरकारी सूत्रों ने उनके सम्मेलन में भाग नहीं लेने की जानकारी दी। हालांकि, गेट्स फाउंडेशन का कहना है कि वह इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। 16 फरवरी से दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हुई समिट 20 फरवरी तक चलेगी। समिट के साथ-साथ 'इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026' का भी आयोजन किया गया है। यहां दुनियाभर की कंपनियों ने अपने लेटेस्ट AI सॉल्यूशंस दुनिया के सामने पेश किए हैं।

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क्या समिट से कट गया बिल गेट्स का पत्ता?

Impact.IndiaAI.Gov.In वेबसाइट पर 'विजनरीज ऑन द ग्लोबल स्टेज' (Visionaries on the Global Stage) सेक्शन के तहत 16 से 20 फरवरी, 2026 तक दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में शामिल होने वाले मुख्य वक्ताओं की सूची दी गई है। 

 

हालांकि, मंगलवार 15 फरवरी को बिल गेट्स का नाम सर्च करने पर 'No speakers found matching your criteria' (आपके मानदंडों के अनुसार कोई वक्ता नहीं मिला) का मैसेज दिखाई दिया जबकि इससे पहले उनका प्रोफाइल वहां मौजूद था।

गेट्स का नाम वेबसाइट से गायब होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। एनडीटीवी एक खबर के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि सरकार ने एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के मद्देनजर माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक को दिए गए निमंत्रण की 'समीक्षा'  (Review) की है। फिलहाल इस बात पर सस्पेंस बना हुआ है कि वह समिट का हिस्सा होंगे या नहीं।

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एपस्टीन फाइल्स और इंटरनेट पर भारी विरोध

अमेरिकी न्याय विभाग की 'एपस्टीन लाइब्रेरी' में प्रकाशित वर्षों पुराने ईमेल्स में बिल गेट्स के बार-बार संदर्भ आने पर इंटरनेट पर उनकी भारी आलोचना हो रही है। विशेष रूप से 30 जनवरी को डीओजे (DOJ) के अपडेट के बाद यह आक्रोश और बढ़ गया, जिसमें पहले से मौजूद दस्तावेजों के अलावा 30 लाख से अधिक नए पन्ने सार्वजनिक किए गए थे। Edited by : Sudhir Sharma

जियो आरोग्य AI से मिनटों में हेल्थ स्क्रीनिंग, AI क्लिनिक मॉडल पेश

Jio Aarogya AI introduces clinic model for primary healthcare sector

– AI करेगा शुरुआती जांच, जरूरत पड़ने पर सीधे डॉक्टर से जोड़ेगा

– 'वॉयस AI डॉक्टर' करेगा प्रमुख भारतीय भाषाओं में संवाद 

– प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स को AI-इनेबल्ड बनाने का दावा

Jio Arogya AI Enabled : इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियो पैवेलियन पर प्रदर्शित 'जियो आरोग्य AI' ने प्राइमरी हेल्थकेयर के क्षेत्र में AI आधारित क्लिनिक मॉडल पेश किया है। यह AI पावर्ड सिस्टम कुछ ही मिनटों में मरीज के अहम हेल्थ पैरामीटर्स की स्क्रीनिंग कर उनका एनालिसिस करता है, संभावित रिस्क की पहचान करता है और जरूरत के मुताबिक स्पेशलिस्ट रेफरल की सलाह देता है। कंपनी का दावा है कि इसका मकसद देश के प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स को AI-इनेबल्ड क्लिनिक में बदलना है, ताकि दूरदराज़ इलाकों में भी फास्ट और अफोर्डेबल हेल्थकेयर उपलब्ध हो सके।

 

इस सिस्टम में मरीज एक AI-एनेबल्ड डायग्नोस्टिक डिवाइस यानी स्मार्ट मिरर के सामने खड़ा होता है, जो आंखों, त्वचा और अन्य विज़ुअल संकेतों के आधार पर जरूरी रीडिंग लेता है। AI इन आंकड़ों का विश्लेषण कर प्रारंभिक हेल्थ असेसमेंट तैयार करता है। मरीज अपनी समस्या बोलकर ‘वॉयस AI डॉक्टर’ को बता सकता है। जरूरत पड़ने पर वॉयस AI डॉक्टर मरीज से अतिरिक्त सवाल भी पूछता है। इसकी खासियत यह है कि यह कई प्रमुख भारतीय भाषाओं में संवाद कर सकता है।

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‘जियो आरोग्य AI’ मरीजों को अलग-अलग कैटेगरी में वर्गीकृत कर सकता है और जिन मामलों में तुरंत डॉक्टर की जरूरत हो, उन्हें प्राथमिकता से रेफर करता है। इससे डॉक्टरों का रूटीन वर्कलोड कम होने और गंभीर मामलों पर ज्यादा ध्यान देने में मदद मिल सकती है। कंपनी के अनुसार, AI सिस्टम केवल प्रारंभिक असेसमेंट तैयार करता है और दवा या अन्य मेडिकल सहायता डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं दी जाती।

 

कंपनी का कहना है कि यह मॉडल मौजूदा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जहां कनेक्टिविटी उपलब्ध है, वहां AI क्लिनिक स्थापित किए जा सकते हैं। पोर्टेबल एक्स-रे और पोर्टेबल ईसीजी जैसे डिवाइस भी इससे जोड़े जा सकते हैं। साथ ही मरीज जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन कंसल्टेशन और दवाओं की डिजिटल ऑर्डरिंग जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकता है।

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देश में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार का फायदा उठाते हुए यदि जियो आरोग्य AI जैसे मॉडल बड़े पैमाने पर लागू होते हैं, तो यह शुरुआती जांच और विशेषज्ञ सलाह के बीच की दूरी कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
Edited By : Chetan Gour

India AI Impact Summit : PM मोदी ने किया Jio Pavilion का दौरा, आकाश अंबानी ने दिखाया AI इकोसिस्टम

India AI Impact Summit PM Narendra Modi Jio Pavilion visit

इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जियो के AI पवेलियन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जियो द्वारा विकसित विभिन्न AI आधारित मॉडलों और समाधानों की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने जियो इंटेलिजेंस, जियो संस्कृति AI, जियो आरोग्य AI, जियो शिक्षा और जियो AI होम जैसे मॉडलों को देखा। इन मॉडलों का उद्देश्य क्रमशः एंटरप्राइज इंटेलिजेंस, भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक सामग्री, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा समाधान और स्मार्ट होम आधारित AI सुविधाओं को सुलभ बनाना है।

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इस मौके पर रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के चेयरमैन आकाश अंबानी ने कंपनी द्वारा विकसित किए जा रहे AI इकोसिस्टम और उसके विभिन्न आयामों की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। 

 

जियो लंबे समय से “AI for All” की अवधारणा पर जोर देता रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पहले भी कह चुके हैं कि तकनीक का वास्तविक लाभ तब मिलता है, जब वह बड़े पैमाने पर आम लोगों तक पहुंचे। इसी सोच के तहत जियो “AI for All” के विज़न पर काम कर रही है। 

 

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में देश-विदेश की कई टेक कंपनियां और नीति विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के जियो पवेलियन के दौरा ने AI क्षेत्र में निजी क्षेत्र की पहलों पर ध्यान खींचा है।  Edited by : Sudhir Sharma

AI Impact Summit 2026 : 19-20 फरवरी को भारत में होगा मेगा इवेंट, 65 से ज्यादा देश होंगे शामिल, 600 से ज्यादा स्टार्टअप्स का जमावड़ा

भारत 19-20 फरवरी 2026 को राजधानी के भारत मंडपम में वैश्विक स्तर का इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट 2026 आयोजित करने जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। समिट करीब 65 देश शामिल होंगे।  यह पहली बार है जब यह अंतरराष्ट्रीय मंच किसी विकासशील देश में आयोजित किया जा रहा है।

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600 से ज्‍यादा स्‍टार्टअप्‍स की मौजूदगी रहेगी। इस समिट की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस AI एक्शन समिट के दौरान की थी। भारत ने खुद को AI विस्तार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना शुरू कर दिया है। Alphabet की Google, Microsoft और Amazon ने मिलकर 2030 तक भारत में AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 68 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया है। 

 

शिखर सम्मेलन को संबोधित करने वाले प्रमुख वक्ताओं में Alphabet के CEO सुंदर पिचाई, OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन, Anthropic के CEO डारियो अमोदेई, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और Google DeepMind के CEO डेमिस हसाबिस शामिल हैं। इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट 2026 को भारत की AI कूटनीति और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह ‘ग्लोबल साउथ’ में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक AI शिखर सम्मेलन होगा।

 

प्रधानमंत्री इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इसे वर्ष का प्रमुख वैश्विक AI मंच माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक सहयोग के जरिए समावेशी, प्रभावशाली और कार्रवाई-उन्मुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देना है।

 

वैश्विक सहयोग की नई दिशा

यूके AI सेफ्टी समिट, AI सियोल समिट, फ्रांस AI एक्शन समिट और ग्लोबल AI समिट ऑन अफ्रीका जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों की निरंतरता में यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इसका लक्ष्य केवल राजनीतिक घोषणाओं तक सीमित न रहकर, ठोस परिणाम और वास्तविक प्रगति सुनिश्चित करना है। यह समिट वैश्विक AI सहयोग के लिए नई प्राथमिकताओं, ठोस पहल और बहुपक्षीय ढांचे को मजबूत करेगा।

 

मानवता और सतत विकास पर फोकस

समिट का उद्देश्य AI की परिवर्तनकारी शक्ति को मानवता की सेवा, समावेशी विकास, सामाजिक उन्नति और पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोग करना है। साथ ही, यह ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक AI गवर्नेंस में मजबूत करने का प्रयास करेगा, ताकि तकनीकी प्रगति कुछ देशों तक सीमित न रह जाए।

 

तीन ‘सूत्र’ होंगे आधार

इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट तीन मूल स्तंभों या ‘सूत्रों’ पर आधारित होगा—

People (लोग), Planet (पृथ्वी) और Progress (प्रगति)।

ये तीनों सूत्र यह तय करेंगे कि बहुपक्षीय सहयोग के जरिए AI का उपयोग सामूहिक लाभ के लिए कैसे किया जाए।

 

सात ‘चक्र’ में होगी चर्चा

 

इन तीन सूत्रों के आधार पर चर्चा सात प्रमुख क्षेत्रों (चक्रों) में संगठित की जाएगी- 

  • मानव पूंजी (Human Capital)
  • सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन
  • सुरक्षित और भरोसेमंद AI
  • लचीलापन, नवाचार और दक्षता
  • विज्ञान
  • AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण
  • आर्थिक विकास और सामाजिक हित के लिए AI
  • प्री-समिट कार्यक्रम भी शुरू

 

समिट से पहले MeitY कई प्रमुख पहलें आयोजित कर रहा है, जिनका मकसद समावेशी विकास और नवाचार के लिए AI के उपयोग को बढ़ावा देना है।

 

इनमें शामिल हैं:

 

AI for ALL: विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी AI समाधान खोजने की वैश्विक चुनौती।

AI by HER: महिला नेतृत्व वाले AI समाधानों को बढ़ावा देने की पहल।

YUVAi: 13-21 वर्ष के युवाओं के लिए वैश्विक नवाचार प्रतियोगिता।

 

आवेदन और पंजीकरण खुले

इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक संगठन और प्रतिभागी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।  आयोजकों को ऐसे सत्र डिजाइन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जो People, Planet और Progress की थीम के अनुरूप हों और वैश्विक AI संवाद को ठोस दिशा दें।

 Edited by : Sudhir Sharma

Airtel लाया नया AI कवच, फोन पर OTP शेयर करते ही बजेगा ‘अलर्ट’

ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच Airtel ने अपने करोड़ों ग्राहकों के लिए एक जादुई समाधान पेश किया है। कंपनी ने एक ऐसा AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) फ्रॉड अलर्ट सिस्टम लॉन्च किया है, जो ठगों के जाल में फंसने से पहले ही आपको सावधान कर देगा। कंपनी ने बयान में कहा कि हमारा मकसद ग्राहकों को एक सुरक्षित डिजिटल अनुभव देना है, ताकि वे बिना किसी डर के तकनीक का इस्तेमाल कर सकें। 

 

कैसे काम करेगा यह 'डिजिटल बॉडीगार्ड'?

अक्सर ठग KYC या बैंक अपडेट के नाम पर आपको कॉल करते हैं और बातों में उलझाकर OTP मांग लेते हैं। अब एयरटेल का नया सिस्टम:

 

लाइव चेतावनी: अगर आप कॉल पर हैं और उसी दौरान आपके पास बैंक का OTP आता है, तो सिस्टम तुरंत आपको अलर्ट भेजेगा।

 

जोखिम की पहचान: यह आपको साफ बताएगा कि कॉल के दौरान OTP साझा करना आपके लिए भारी पड़ सकता है।

 

समय की बचत: इससे यूजर को संभलने का मौका मिल जाएगा और वह ठगी का शिकार होने से बच जाएगा।

 

अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा पहल

Airtel पिछले 2 सालों से डिजिटल सुरक्षा पर काम कर रहा है। कंपनी ने ठगी रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं:

 

खतरनाक लिंक्स पर रोक: संदिग्ध और फर्जी लिंक्स को नेटवर्क लेवल पर ही ब्लॉक करना।

 

स्पैम कॉल की पहचान: फर्जी कॉल्स को 'Spam' के रूप में मार्क करना।

 

नेटवर्क फिल्टर: धोखाधड़ी वाली कॉल्स को ग्राहकों तक पहुँचने से पहले ही रोकना।

 

कब और किसे मिलेगा यह फीचर?

शुरुआत: यह खास फीचर फिलहाल हरियाणा के ग्राहकों के लिए शुरू कर दिया गया है।

 

देशभर में रोलआउट: अच्छी खबर यह है कि अगले दो हफ्तों के भीतर यह पूरे भारत में Airtel ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगा। Edited by : Sudhir Sharma

 

Artificial Intelligence Rules : 20 फरवरी से AI नियम सख्त: बिना लेबल AI कंटेंट नहीं चलेगा, डीपफेक तुरंत हटाने का आदेश

केंद्र सरकार ने मंगलवार को डीपफेक सहित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार और बनावटी कंटेंट के मैनेजमेंट को लेकर ऑनलाइन मंचों के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। इसके तहत एक्स और इंस्टाग्राम जैसे मंचों को किसी सक्षम अधिकारी या अदालतों द्वारा निर्देशित की गई ऐसी किसी भी सामग्री को 3  घंटे के अंदर हटाना होगा। सरकार ने एआई जनरेटेड डीपफेक सामग्री को लेकर आईटी नियमों को सख्त कर दिया है। इसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अब अदालती आदेश पर 3 घंटे के भीतर आपत्तिजनक कंटेंट हटाना होगा। 

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इन नए संशोधनों में एआई से बनाए गए कंटेंट की अनिवार्य लेबलिंग और यूजर्स की शिकायतों के त्वरित निवारण का भी प्रावधान किया गया है। नियमों के मुताबिक एआई सामग्री की अनिवार्य रूप से लेबलिंग जरूरी है। बनावटी सामग्री बनाने या साझा करने की सुविधा देने वाले मंच को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी सामग्री पर स्पष्ट रूप से और प्रमुखता से लेबल लगाया जाए। जहां तकनीकी रूप से संभव हो, वहां इसे स्थायी मेटाडेटा या पहचानकर्ताओं के साथ जोड़ा जाना चाहिए। 

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अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि मध्यवर्ती (इंटरमीडियरीज) एक बार एआई लेबल या मेटाडेटा लगाए जाने के बाद उन्हें हटाने या छिपाने की अनुमति नहीं दे सकते। आईटी नियमों के तहत गैरकानूनी कार्यों के निर्धारण के लिए एआई-जनित सामग्री को अन्य सूचनाओं के समान माना जाएगा। सोशल मीडिया मंच को सरकारी या अदालती आदेशों पर अब 36 घंटे के बजाय तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी। इसके अलावा यूजर्स  की शिकायतों के निवारण की समय-सीमा भी कम कर दी गई है।  Edited by: Sudhir Sharma

AI बदलेगा देश की तकदीर, मुकेश अंबानी बोले- भारत अगले दो-तीन दशकों में बनेगा 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश डी अंबानी ने कहा कि भारत अगले 20-30 वर्षों में 25 से 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता रखता है और यह दौर देश की युवा पीढ़ी के लिए निवेश का एक बहुत बड़ा अवसर होगा। मुंबई में आयोजित जियो-ब्लैकरॉक कार्यक्रम 'इन्वेस्टिंग फॉर ए न्यू एरा' में ब्लैकरॉक के सीईओ लैरी फिंक के साथ फायरसाइड चैट के दौरान अंबानी ने भारत की विकास यात्रा का स्पष्ट खाका पेश किया।

जियोब्लैकरॉक इवेंट में मुकेश अंबानी ने कहा कि भारत पारंपरिक रूप से बचत का देश रहा है, लेकिन अब समय है कि देश के आगे बढ़ने का फायदा निवेश करके उठाया जाए। बचत को निवेश में बदला जाए। सेविंग्स का पैसा यदि कैपिटल मार्केट्स में निवेश हो, तो इससे न केवल परिवारों की संपत्ति बढ़ेगी बल्कि देश की आर्थिक वृद्धि को भी गति मिलेगी। लैरी फिंक ने भी इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि लॉन्ग-टर्म इक्विटी निवेश भारत जैसे तेजी से बढ़ते देश में संपत्ति सृजन का सबसे प्रभावी जरिया बन सकता है।

 

अंबानी ने कहा कि भारत के विकास की जड़ें मजबूत नीतियों, राजनीतिक स्थिरता, बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और डिजिटल क्रांति से जुड़ी हैं। 5G, डिजिटल इंडिया और कैपिटल मार्केट्स के विस्तार से भारत दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक केंद्र बन गया है।

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर जोर देते हुए अंबानी ने कहा कि AI शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में शानदार बदलाव ला सकता है। उनके अनुसार एआई के जरिए उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, बेहतर हेल्थकेयर और प्रभावी सार्वजनिक सेवाएं 1.4 अरब लोगों तक सुलभ और किफायती रूप में पहुंचाई जा सकती हैं।

 

कार्यक्रम में ब्लैकरॉक के सीईओ लैरी फिंक ने भारत को 'एरा ऑफ इंडिया' बताया, जिस पर अंबानी ने कहा कि जो लोग भारत की दीर्घकालिक ग्रोथ पर भरोसा करेंगे, वही आने वाले दशकों में सबसे अधिक लाभ पाएंगे। Edited by : Sudhir Sharma