
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत लगभग सपाट रहने के बाद बाजार ने तेजी पकड़ी और एक घंटे के भीतर सेंसेक्स 1,000 अंकों से ज्यादा उछल गया। कारोबार बंद होने तक बीएसई सेंसेक्स 1,533 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी में 375 अंकों की तेजी दर्ज की गई। हालांकि, एशियाई बाजारों में दबाव बना रहा और दक्षिण कोरिया का प्रमुख शेयर सूचकांक KOSPI 7.57 फीसदी तक टूट गया।
सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सीमित उतार-चढ़ाव के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 330 अंक ऊपर था, जबकि निफ्टी में 41 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। इसके बाद बाजार में खरीदारी बढ़ी और सेंसेक्स ने एक घंटे के भीतर 1,000 अंकों का स्तर पार कर लिया।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,533 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं, निफ्टी ने 375 अंकों की छलांग लगाई। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों का ध्यान एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार की मजबूती पर गया।
एशियाई बाजारों में भारी गिरावट, KOSPI 7.57% टूटा
जहां भारतीय बाजार में तेजी देखने को मिली, वहीं एशियाई शेयर बाजारों में दबाव बना रहा। दक्षिण कोरिया का प्रमुख सूचकांक KOSPI 7.57 फीसदी गिरकर बंद हुआ। यह सूचकांक की लगातार सातवें कारोबारी सत्र में गिरावट थी।
VT Markets के प्रिंसिपल एनालिस्ट डैनियल मंडे के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ाया है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों की फंडिंग और कर्ज को लेकर चिंताओं ने टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली को बढ़ावा दिया।
अमेरिका में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता
अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका को फिर से बढ़ा दिया। हालांकि, फेड अधिकारियों की सतर्क टिप्पणियों के बाद बाजार में इन आशंकाओं में कुछ कमी आई।
निवेशकों की चिंता केवल ब्याज दरों तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे निवेश को कर्ज के जरिए वित्तपोषित करने की क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी कारण अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों CoreWeave और Oracle के शेयरों में दबाव देखने को मिला।
इसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान जैसे बाजारों में सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी कंपनियों का बड़ा प्रभाव है। ऐसे में AI सेक्टर में बिकवाली का असर इन बाजारों पर अधिक पड़ सकता है।
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में नरमी से मिली राहत
रातभर के कारोबार में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में कुछ नरमी देखने को मिली। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में संकेत दिया गया कि चीन के पास अमेरिकी सरकारी कर्ज की मात्रा आधिकारिक आंकड़ों में दिखाई गई मात्रा से अधिक हो सकती है। इसके साथ ही निवेशकों ने अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया।
तेजी से गिरावट के बाद बाजार में कुछ सुधार या तकनीकी उछाल आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, AI कंपनियों की फंडिंग और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता दूर होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निवेशकों के लिए आगे किन बातों पर नजर रखना जरूरी?
वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में आने वाले दिनों में कई अहम कारक महत्वपूर्ण रहेंगे।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक: 28 अक्टूबर को होने वाली बैठक पर निवेशकों की नजर रहेगी।
महंगाई के आंकड़े : अमेरिका में महंगाई के नए आंकड़े ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।
कच्चे तेल की कीमतें : तेल की कीमतों में तेजी वैश्विक महंगाई और बाजार की धारणा पर असर डाल सकती है।
मध्य पूर्व में तनाव : भू-राजनीतिक घटनाक्रम से बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है।
AI कंपनियों की फंडिंग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बढ़ते खर्च को कंपनियां किस तरह वित्तपोषित करती हैं, यह टेक्नोलॉजी शेयरों के लिए अहम होगा।


