रिजीम चेंज के विरोध में PM मोदी को मिला मोहन भागवत का साथ, संघ प्रमुख ने आंदोलन की राजनीति पर सुनाई खरी-खरी

रिजीम चेंज के विरोध में PM मोदी को मिला मोहन भागवत का साथ, संघ प्रमुख ने आंदोलन की राजनीति पर सुनाई खरी-खरी

देश में कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच अब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विरोध प्रदर्शनों को लेकर बड़ा हमला बोला है।

विजयादशमी पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्थापना दिवस पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि कुछ ताक़तें अलग-अलग देशों में रिजीम चेंज की कोशिश कर रही हैं और भारत को भी ऐसी कोशिशों से सावधान रहने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि यह सोचना ग़लत है कि सत्ता बदलने से परिस्थितियां बदल जाएंगी। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है और आगे भी ऐसा नहीं होगा।

पश्चिम से भारत को तोड़ने की कोशिश-इसके साथ ही मोहन भागवत ने अपने संबोधन में फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया में कुछ ताक़तें अपने हितों के लिए दूसरे देशों में रिजीम चेंज की कोशिश करती हैं, लेकिन भारत को तोड़ने की कोशिश सफल नहीं होगी। संघ प्रमुख ने कहा कि भारत सहित सारे विश्व में जो-जो भद्रता, मांगल्य, सांस्कृतिक व मानवीय संस्कार है, वह सारा नष्ट-भ्रष्ट उद्धवस्त करने की आसुरी प्रतिज्ञा लेकर पश्चिम से एक आंधी चली है।

यह पहला मौका है जब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश में हो रहे विरोध प्रदर्शन पर सीधा हमला बोला है। मोहन भागवत ने अपने संबोधन में भारत मे लगातार सत्ता परिर्वतन की कोशिशों को लेकर आगाह किया है। मोहन भागवत ने कहा कि ऐसी ताकतों का भारत मुख्य निशाना है, क्योंकि भारत प्रगति कर रहा है। इन ताक़तों को पता है कि पिछले कुछ दशकों में निर्णायक नीतियों के साथ भारत जिस तरह आगे बढ़ा है, उसे वे बाधित नहीं कर सकते, इसलिए वे भारत और संघ को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

आंदोलन बने राजनीति का साधन- मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वभर के तथाकथित प्रगत देश भी उस से त्रस्त, असहाय हैं। उन्होंने कहा कि समाज व देश को चलाने की जिम्मेदारी हमारी भी है, क्योंकि यह देश व समाज मेरा अपना है, यह अपनेपन की प्रेरणा रहती है। आंदोलनों के पीछे भी यही प्रेरणा होनी चाहिए। परन्तु जब ऐसी स्थिति न होकर आंदोलन राजनीति का साधन बन जाता है, किसी व्यक्ति, समूह या विचार के प्रति विरोधी शत्रुभाव लेकर चलता है। तब इसका लाभ भारत को दबाना चाहने वाली शक्तियां लेती हैं।

उन्होंने कहा कि अपने इतने बड़े समाज में समस्याएँ तो हैं। व्यवस्था की कमियाँ भी ढेर सारी होंगी। उनके चलते आंदोलनों का होना भी स्वाभाविक ही है। परन्तु आंदोलन समाधान देने के लिए होने चाहिए। आंदोलन करने वाला समाज का कोई समूह हो, शांति व सुव्यवस्था कायम रखने के लिए कार्यवाही करने वाला शासन-प्रशासन या राजनीतिक नेतागण हो,  हमारी करनी के कारण किसी प्रकार की अनबन, द्वेष, त्वेष, मलाल या विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए।

मोदी को मिला भागवत का साथ- संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भले ही अपने संबोधन में आंदोलनों को लेकर किसी का नाम नहीं लिया हो लेकिन उनका सीधा हमला मोदी विरोधियों पर था। राहुल गांधी से लेकर प्रशांत भूषण तक वह सभी नेता जो लगातार देश में  रिजीम चेंज और सत्ता परिवर्तन की बात कह रहे है, उनको संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इशारों ही इशारों में जमकर खरी खोटी सुनाने के साथ यह भी साफ कर दिया है कि वह अपनी कोशिशों में सफल नहीं होंगे।  

दरअसल संघ प्रमुख का सीधा निशाना दिल्ली में पिछले दिनों राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष के धरना प्रदर्शन और मार्च पर था। पिछले दिनों राहुल गांधी जब SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सड़क पर उतरे थे तो उन्होंने सीधे संघ प्रमुख मोहन भागवत पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था मोदी-शाह और भागवत ने वोट चोरी से देश के चुनाव का अपहरण किया और ज्ञानेश कुमार ने उनकी मदद की है, इनमें से सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी, कोई नहीं बचेगा, सभी ने जो किया है वह देशद्रोह है। इसके साथ ही राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, CEC ज्ञानेश कुमार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने देश के लोकतंत्र को खत्म कर दिया।

राहुल गांधी अक्सर अपने भाषणों में आरएसएस के साथ संघ प्रमुख मोहन भागवत का व्यक्तिगत तौर पर हमला बोलते आ है लेकिन संघ प्रमुख ने अब तक अपने बयान या किसी भाषण में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया। हलांकि विजयादशमी पर उन्होंने जिस तरह रिजीम चेंज की कोशिशों और आंदोलनों को लेकर मुखर होकर बोला है, वह बताता है कि अब भाजपा के साथ संघ भी खुलकर मोदी सरकार के समर्थन में आकर खड़ा हो गया है और आने वाले समय में संघ अपने स्तर पर विपक्ष की रिजीम चेंज और सत्ता परिवर्तन की मुहिम का जवाब देगा।

वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत के भाषण को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा कि नागपुर में शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव के दौरान परम पूज्य सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत जी का प्रेरणादायक संबोधन। उन्होंने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता की ज़रूरत और समाज के चरित्र को मजबूत करने समेत कई मुद्दों पर विस्तार से बात की। उन्होंने  सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता पर ख़ास ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ये भावनाएं हर आरएसएस स्वयंसेवक के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।