LTCG टैक्स घटाने से लौटेंगे विदेशी निवेशक? Morgan Stanley का ऐसा है मानना

LTCG Tax Cut: मॉर्गन स्टेनले इंडिया के एमडी रिधम देसाई (Ridham Desai) ने इस धारणा पर सवाल उठाया है कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में कटौती से भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी अपने आप बढ़ जाएगी। राइजिंग भारत समिट-वेस्ट एडिशन में उन्होंने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा टैक्स नीति निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती है, लेकिन यह भारतीय बाजार से मिलने वाले बेहतर रिटर्न की जगह नहीं ले सकती।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार वित्त वर्ष 2027-28 के बजट से पहले इक्विटी एलटीसीजी टैक्स में बदलाव पर विचार कर रही है। इसमें टैक्स की मौजूदा 12.5% दर को घटाने का विकल्प भी है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच कुछ लोगों ने सरकार से STT (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) में राहत की मांग भी की है।

टैक्स कटौती से ज्यादा जरूरी निवेश पर मिलने वाला रिटर्न

मॉर्गन स्टेनले इंडिया के एमडी का कहना है कि वैश्विक निवेशकों के लिए असली सवाल सिर्फ टैक्स की दर नहीं, बल्कि भारतीय शेयरों से मिलने वाला संभावित रिटर्न है। उनका कहना है कि निवेशक पैसे लगाने से पहले भारत में निवेश करने से दूसरे बाजारों और एसेट क्लास की तुलना में कितना फायदा मिल सकता है और वे वहीं निवेश करेंगे, जहां बेहतर रिटर्न मिले। इसका मतलब है कि एलटीसीजी टैक्स में कटौती से भारत में निवेश की लागत कुछ कम हो तो सकती है, लेकिन इससे अपने आप कंपनियों की कमाई या शेयरों का रिटर्न नहीं बढ़ता। उनका कहना है कि विदेशी निवेशक निवेश का फैसला लेते समय कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ, शेयरों के वैल्यूएशन, रुपये की चाल और दूसरे देशों में निवेश के मौकों की तुलना करते हैं।

भारत के लिए विदेशी पूंजी क्यों है जरूरी

मॉर्गन स्टैनले इंडिया के एमडी ने इस बात का भी जिक्र किया कि भारत के लिए विदेशी पूंजी क्यों जरूरी है। रिधम का कहना है कि भारत की कुल बचत दर लगभग 28-30% है, जबकि निवेश दर करीब 31.5% है यानी देश में जितना निवेश हो रहा है, उसकी तुलना में घरेलू बचत कम है और रिधम के मुताबिक इस फर्क को विदेशी पूंजी से भरना पड़ता है और इसी वजह से भारत के लिए विदेशी पूंजी काफी अहम है।

रिधम का कहना है कि विदेशी पूंजी का सबसे बेहतर रूप FDI यानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है क्योंकि इससे सिर्फ पैसा ही नहीं आता, बल्कि तकनीक भी आती है और निवेश भी लॉन्ग टर्म के लिए होता है। रिधम ने आगे कहा कि अगर भारत एफडीआई को लुभा पाता है तो FPIs यानी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की अस्थिर पूंजी, चाहे वह शेयर बाजार में हो या डेट मार्केट में, पर निर्भरता कम हो सकती है।

भारत को लेकर विदेशी निवेशकों की धारणा कमजोर

रिधम का कहना है कि भारत को लेकर FPI की धारणा निगेटिव दिख रही है और हाल के समय में यह शायद कभी इतनी खराब नहीं रही, जितनी आज है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि ब्राजील, तुर्किये, इंडोनेशिया, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में भी अब पहले जैसी एकतरफा तेजी की संभावनाएं नहीं दिख रही हैं, जिनमें से कुछ मार्केट में मंदी का दबाव है। इसके बावजूद रिधम का कहना है कि अपने डाईवर्सिफाइड ग्रोथ प्रोफाइल के चलते भारतीय बाजार निवेशकों को आकर्षित कर रही है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।