मोदी ने ट्रम्प से कहा- भारतीय नाविकों की सुरक्षा महत्वपूर्ण:ट्रम्प बोले-जब तक मैं राष्ट्रपति, व्हाइट हाउस में भारत का दोस्त मौजूद रहेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा- जब तक मैं प्रेसिडेंट हूं, व्हाइट हाउस में मोदी का हमेशा अच्छा दोस्त मौजूद रहेगा। अगर भारत या मोदी पर हमला होता है और मोदी लीडर होंगे तो हम उनकी मदद करेंगे। उन्होंने मोदी की तारीफ करते हुए कहा- जब तक मोदी लीडर हैं, इंडिया हर फील्ड में बड़ा रोल निभाएगा। मोदी शांत और जबरदस्त नेता हैं, लेकिन मैं मोदी की तरह नहीं हूं। वहीं ट्रम्प के साथ द्विपक्षीय बैठक में मोदी ने कहा कि समुद्र में भारतीयों की सुरक्षा जरूरी है। उम्मीद है कि ईरान के साथ डील में भारतीयों की सुरक्षा पक्की की जाएगी। पीएम ने कहा कि होर्मुज खुला रहना जरूरी है। मैं वेस्ट एशिया में शांति की कोशिशों में ट्रम्प की लीडरशिप की तारीफ करता हूं। ट्रम्प के नेतृत्व में शांति की उम्मीद दिख रही है। फ्रांस के एवियन में दो दिवसीय 52वें G7 समिट का आयोजन हुआ। आज समिट का दूसरा दिन था। मोदी और ट्रम्प भी समिट में शामिल हुए थे। मोदी-ट्रम्प मुलाकात की 4 तस्वीरें… मोदी ने दोनों दिन भारतीय की मौत का मुद्दा उठाया पीएम मोदी ने G7 समिट में दोनों दिन होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने समिट के पहले दिन मंगलवार को आउटरीच सेशन में कहा था कि इस अहम समुद्री मार्ग में कई भारतीयों ने जान गंवाई है और वैश्विक व्यापार को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है। मोदी के G7 दौरे से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

ट्रम्प ने G-7 में जेलेंस्की को नजरअंदाज किया, VIDEO:सभी नेताओं से मिले, यूक्रेनी प्रेसिडेंट को देखकर मुड़ गए; व्हाइट हाउस में तकरार हुई थी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमीर जेलेंस्की को नजरअंदाज कर दिया। वायरल वीडियो में ट्रम्प अन्य नेताओं से मुलाकात और हाथ मिलाते नजर आते हैं, लेकिन जेलेंस्की से न तो उन्होंने हाथ मिलाया और न ही कोई खास बातचीत की। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब दोनों नेताओं के बीच व्हाइट हाउस में हुई तीखी बहस और तकरार को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी है। दरअसल, ट्रम्प और जेलेंस्की के संबंध पहले भी तनावपूर्ण रहे हैं। इसी साल व्हाइट हाउस में हुई एक बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई थी, जिसकी काफी चर्चा हुई थी। फ्रांस के शहर एवियन में G-7 शिखर सम्मेलन 2026 आयोजित हो रहा है। 15 से 17 जून तक होने वाली इस समिट में दुनिया के 7 देशों के नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति, व्यापार, जलवायु परिवर्तन और सप्लाई चैन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। G-7 समिट के टॉप 8 मोमेंट्स… मोदी की मैक्रों, मेलोनी और ट्रम्प से मुलाकात ———————————- ये खबर भी पढ़ें… पीएम मोदी 16 महीने बाद ट्रम्प से मिले, फ्रांस में G7 समिट में साथ बैठे, 5 मिनट बात की पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच फ्रांस के एवियन शहर में G-7 समिट के दौरान मुलाकात हुई। दोनों के बीच करीब 5 मिनट तक बात चली। मीटिंग में दोनों एक-साथ बैठे नजर आए। यह मुलाकात 16 महीनों के बाद हुई है। पूरी खबर पढ़ें…

नेपाल ने चीन के सामने कालापानी-लिपुलेख का मुद्दा उठाया:कहा- भारत के साथ समझौता किस आधार पर; चीन बोला- ये आप दोनों का मामला

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख विवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के इस्तेमाल को लेकर हुए समझौते पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यह व्यवस्था किस आधार पर बनाई गई और इसकी प्रकृति क्या है। इसके जवाब में वांग यी ने कहा कि यह मूल रूप से भारत और नेपाल के बीच का मामला है और इसका समाधान बातचीत से ही निकलेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दे संबंधित देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता के जरिए सुलझाए जाने चाहिए। नेपाल ने दोहराया कि कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं। काठमांडू पहले भी नई दिल्ली और बीजिंग को विरोध नोट भेजकर कह चुका है कि उसकी सहमति के बिना इस इलाके से जुड़ा कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। 2020 में हुआ था भारत-चीन समझौता भारत और चीन ने 2020 में लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा पार व्यापार को फिर से शुरू करने पर सहमति बनाई थी। दोनों देशों ने इस मार्ग को तीर्थयात्रा और व्यापार के लिए इस्तेमाल करने की व्यवस्था पर सहमति जताई थी। नेपाल ने उस समय इसका विरोध किया था। काठमांडू का कहना था कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं, इसलिए उससे बिना राय लिए इस मार्ग को लेकर कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद नेपाल ने भारत और चीन दोनों को राजनयिक विरोध नोट भेजा था। इसके बावजूद भारत और चीन कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमावर्ती व्यापार के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल करते रहे हैं। खनाल ने भारत दौरे पर नहीं उठाया था मुद्दा दिलचस्प बात यह है कि शिशिर खनाल ने हाल की भारत यात्रा के दौरान यह मुद्दा नहीं उठाया था। उस समय उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में भी कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख का जिक्र नहीं था। ऐसे में कूटनीतिक हलकों में इस बात पर चर्चा है कि नेपाल ने नई दिल्ली के मुकाबले बीजिंग में ज्यादा सख्त रुख दिखाया। विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल दोनों पड़ोसियों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए सीमा विवाद को जिंदा रखना चाहता है, लेकिन खुलकर टकराव से भी बचना चाहता है। भारत-चीन में लिपुलेख दर्रा से व्यापार शुरू भारत-चीन सीमा पर स्थित लिपुलेख दर्रे से व्यापार दोबारा शुरू होने जा रहा है। गलवान घाटी में 2020 में हुए संघर्ष के बाद यह मार्ग बंद हो गया था। करीब छह साल बाद अब इस रास्ते से व्यापार बहाल करने की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से करीब 300 व्यापारियों के नाम विदेश मंत्रालय को भेजे गए हैं। इन्हें पासपोर्ट और वीजा के बजाय ट्रेड पास के जरिए तिब्बत के तकलाकोट बाजार तक जाने की अनुमति दी जाएगी। इस बार सीमा तक सड़क पहुंचने से व्यापारियों को बड़ा फायदा मिलेगा। पहले सामान घोड़े-खच्चरों के जरिए ले जाया जाता था, लेकिन अब वाहन सीधे सीमा तक पहुंच सकेंगे। इससे व्यापार की लागत और समय दोनों कम होंगे। लिपुलेख दर्रा भारत और तिब्बत के बीच सदियों पुराने व्यापार का हिस्सा रहा है। तिब्बती व्यापारी नमक, ऊन और बोरेक्स लेकर भारत आते थे, जबकि भारतीय व्यापारी कपड़ा, अनाज और मसाले तिब्बत ले जाते थे। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह मार्ग बंद हो गया था। 1991 में दोनों देशों के बीच समझौते के बाद इसे फिर खोला गया था। हालांकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद व्यापारिक गतिविधियां बंद हो गई हुई थीं। दो नदियों से तय हुई भारत-नेपाल की सीमा भारत, नेपाल और चीन सीमा से लगे इस इलाके में हिमालय की नदियों से मिलकर बनी एक घाटी है, जो नेपाल और भारत में बहने वाली काली या महाकाली नदी का उद्गम स्थल है। इस इलाके को कालापानी भी कहते हैं। यहीं पर लिपुलेख दर्रा भी है। यहां से उत्तर-पश्चिम की तरफ कुछ दूरी पर एक और दर्रा है, जिसे लिंपियाधुरा कहते हैं। अंग्रेजों और नेपाल के गोरखा राजा के बीच 1816 में हुए सुगौली समझौते में काली नदी के जरिए भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। समझौते के तहत काली नदी के पश्चिमी क्षेत्र को भारत का इलाका माना गया, जबकि नदी के पूर्व में पड़ने वाला इलाका नेपाल का हो गया। काली नदी के उद्गम स्थल, यानी ये सबसे पहले कहां से निकलती है, इसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहा है। भारत पूर्वी धारा को काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम धारा मानता है और इसी आधार पर दोनों देश कालापानी के इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। —————————– ये खबर भी पढ़ें…. नेपाल बोला- भारतीय यात्री लिपुलेख से मानसरोवर न जाएं:ये हमारा इलाका; भारत बोला- नेपाल के दावे का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं नेपाल सरकार ने पिछले महीने भारतीय तीर्थयात्रियों से लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

‘युद्ध बहुत लंबा हो गया, मैं खुश नहीं, हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल से बेहतर सीरिया…’, ट्रंप ने फिर निकाली भड़ास, क्या करेंगे नेतन्याहू?

फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई की खुलकर आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष बहुत लंबे समय से चल रहा है और इसमें बहुत से आम नागरिकों की जान जा रही है।ट्रंप ने सुझाव दिया क

Read More

अमेरिका में मिलने वाले प्रति घंटा वेतन में गिरावट जारी:मध्यम वर्ग की आय धीमी गति से बढ़ रही, एआई से भी बढ़ी समस्या

अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस समय एक विरोधाभास से गुजर रही है, जहां एक ओर अरबपतियों की संपत्ति नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है, वहीं आम वर्कर्स बढ़ती महंगाई और भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। पिछले सप्ताह इसकी झलक दो घटनाओं में दिखाई दी। बुधवार को लेबर ब्यूरो ने बताया कि ऊर्जा कीमतों(बिजली, पेट्रोल, गैस, डीजल) में बढ़ोतरी ने औसत अमेरिकी कर्मचारी की पिछले डेढ़ साल की वास्तविक वेतन वृद्धि लगभग खत्म कर दी। वहीं शुक्रवार को स्पेसएक्स के आईपीओ के बाद इलॉन मस्क दुनिया के पहले खरबपति बन गए। अर्थशास्त्रियों गैब्रियल जकमैन और इमैनुएलसाएज के अनुसार, 19वीं सदी के उत्तरार्ध के तथाकथित “गिल्डेड एज’ में सबसे अमीर अमेरिकियों की संपत्ति देश के वार्षिक आर्थिक उत्पादन के लगभग 3% के बराबर थी। आज अमेरिका के शीर्ष 0.00001% यानी लगभग 20 लोगों की संपत्ति राष्ट्रीय उत्पादन (अमेरिकी कंपनियों द्वारा अमेरिका और अन्य देशों में सालाना किया जाने वाला उत्पादन ) के 12% तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी इतिहास में शीर्ष स्तर पर संपत्ति का इतना बड़ा केंद्रीकरण पहले कभी नहीं देखा गया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर स्टीफेनी स्टेंटचेवा केअनुसार, शेयर बाजार में लगातार उछाल ने लोगों में यह भावना पैदा की है कि आर्थिक व्यवस्था कुछ चुनिंदा लोगों के लिए अधिक काम कर रही है। हालांकि आधे से अधिक अमेरिकी परिवार प्रत्यक्ष रूप से या रिटायरमेंट फंड के माध्यम से शेयर बाजार में निवेश रखते हैं और उन्हें भी लाभ मिला है, लेकिन फेडरल रिजर्व के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दशक में मध्यम वर्ग की संपत्ति अमीरों की तुलना में कहीं धीमी गति से बढ़ी है। ईरान से जुड़े तनाव और ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण मई में अमेरिका की मुद्रास्फीति तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। महंगाई को समायोजित करने के बाद प्रति घंटे मिलने वाला वास्तविक वेतन लगातार तीन महीनों से घट रहा है। नतीजतन, ट्रम्प के मौजूदा कार्यकाल के शुरुआती दौर में हुई वेतनवृद्धि का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया है। अमेरिकी परिवार पहले ही कोविड-19 महामारी,चार दशक की सबसे ऊंची महंगाई, ऊंची ब्याज दरों, टैरिफ और मंदी की आशंकाओं का सामना कर चुके हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) एक नई चिंता बनकर उभरा है। कई तकनीकी कंपनियों के प्रमुख चेतावनी दे चुके हैं कि एआई आने वाले वर्षों में अनेक श्रेणियों की नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। कोलंबिया बिजनेस स्कूल के अर्थशास्त्री ग्लेन हबार्ड का कहना है कि जब तकनीकी कंपनियां स्वयं यह संदेश देती हैं कि उनकी तकनीक लोगों की नौकरियां खत्म कर सकती है, तो उसके खिलाफ प्रतिक्रिया स्वाभाविक है। इसी वजह से अमेरिका में आर्थिक असमानता, सुपररिच वर्ग के बढ़ते प्रभाव और आम लोगों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर बहस पहले से अधिक तेज हो गई है। महंगाई बढ़ने के साथ कमाई घटी – अमेरिका में महामारी के बाद महंगाई चार दशक में सबसे अधिक हो गई । – राष्ट्रीय आय में वर्कर्स के हिस्से में लगातार गिरावट। – अमीरों की तुलना में मध्यमवर्ग की संपत्ति में बढ़ोतरी की गति धीमी। – लंबे समय तक महंगाई रहने से कंज्यूमर खर्च से बचते हैं। – प्रति घंटा वेतनों में तीन माह से गिरावट जारी। एआई कंपनियों के कई बड़े आईपीओ आएंगे टेक कंपनियों को अभी हाल में शेयर मार्केट की तेजी से फायदा हुआ है। स्पेसएक्स के बाद एआई कंपनियों के बड़े-बड़े आईपीओ की श्रृंखला आ सकती है। महंगाई और आय में गिरावट की चिंता के बीच एआई में उछाल से लोगों का अमीरों की संपत्ति में बढ़ोतरी से असहज होना असामान्य नहीं है। कम आय वालों को करना पड़ रहा संघर्ष अर्थशास्त्रियों के अनुसार महंगाई के दौर से कंज्यूमर का आर्थिक व्यवहार लंबे समय तक प्रभावित रहता है। यह उनके बजट पर बोझ के साथ अनुचित भी है, क्योंकि अमीर लोग तो महंगाई का सामना अपेक्षाकृत आसानी से कर लेते हैं जबकि कम आय वाले परिवारों को संघर्ष करना पड़ता है। कई अमेरिकी राज्यों में डेटा सेंटरों का विरोध सर्वेक्षणों के अनुसार कई वर्कर्स करिअर पर एआई टेक्नोलॉजी के पड़ने वाले प्रभाव के बारे में चिंतित हैं। अमेरिका के कई राज्यों में वोटर अपने इलाके में डेटा सेंटरों के निर्माण पर विरोध जता चुके हैं। वे अपने बिजली के बिल, पानी सप्लाई और हवा की क्वालिटी पर इसके असर की बात कह रहे हैं।

अमेरिका-ईरान युद्ध में शांति दूत बन रहे पाकिस्तान पर भड़के अमेरिकी एक्सपर्ट, कहा- वो भरोसे लायक नहीं, ओसामा बिना लादेन को होस्ट करके…

USA Iran Peace deal: अमेरिका के एक प्रमुख विशेषज्ञ माइकल रुबिन ने कहा है कि ईरान समस्या को सुलझाने के लिए पाकिस्तान पर निर्भर रहना, द्वितीय विश्व युद्ध के समय नाजी जर्मनी की समस्या सुलझाने के लिए फासिस्ट इटली पर भरोसा करने जैसा है।माइकल रुबिन, मिडिल ईस्ट फोरम के पॉलिसी एनालिसिस ड

Read More

दुनिया के 16 नेताओं से छोटे हैं ट्रम्प:91% नेताओं से ज्यादा उम्रदराज, उनसे 10 साल ज्यादा सऊदी किंग की उम्र

डोनाल्ड ट्रम्प इस हफ्ते 14 जून को 80 साल के हो गए। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए 80 साल की उम्र देखने वाले वे अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नवंबर 2022 में अपना 80वां जन्मदिन मनाया था। ट्रम्प दुनिया के सबसे उम्रदराज नेताओं में जरूर शामिल हो गए हैं, लेकिन वे दुनिया के सबसे बुजुर्ग शासक नहीं हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के 186 देशों के नेताओं में 16 नेता ऐसे हैं जो ट्रम्प से भी ज्यादा उम्र के हैं। रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प दुनिया के लगभग 91% राष्ट्रीय नेताओं से बड़े हैं। वहीं दुनिया के राष्ट्रीय नेताओं की औसत उम्र 63 साल है। दुनिया के सबसे उम्रदराज मौजूदा राष्ट्रीय नेता कैमरून के राष्ट्रपति पॉल बिया हैं। उनकी उम्र 93 साल है और वे 1982 से सत्ता में बने हुए हैं। उनके बाद सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद आते है, जिनकी उम्र 90 साल है और वे 2015 से देश के शासक हैं। अफ्रीकी देशों के नेताओं की सबसे ज्यादा उम्र रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दुनिया के सबसे ज्यादा उम्र वाले नेताओं में बड़ी संख्या अफ्रीकी देशों की है। इनमें युगांडा, इक्वेटोरियल गिनी, मलावी, आइवरी कोस्ट, जिम्बाब्वे और रिपब्लिक ऑफ कांगो के नेता शामिल हैं। युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी की उम्र अब 82 साल है और वे करीब 40 साल से सत्ता में बने हुए हैं। वहीं इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति तेओदोरो ओबियांग न्गुएमा म्बासोगो भी दुनिया के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। वे 1979 से देश पर शासन कर रहे हैं। 10 सबसे उम्रदराज नेताओं में 7 गैर-स्वतंत्र देशों के प्रमुख दुनिया के दस सबसे उम्रदराज नेताओं में से 7 ऐसे देशों का नेतृत्व कर रहे हैं जिन्हें फ्रीडम हाउस ने नॉट फ्री यानी स्वतंत्र नहीं की श्रेणी में रखा है। दूसरे शब्दों में कहें तो इन देशों में लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकार सीमित माने जाते हैं। ट्रम्प से ज्यादा उम्र वाले 16 नेताओं में से लगभग आधे ऐसे देशों का नेतृत्व कर रहे हैं जिन्हें इसी श्रेणी में रखा गया है। इस वजह से फिर से यह सवाल उठने लगा है कि क्या लंबे समय तक सत्ता में बने रहना लोकतांत्रिक जवाबदेही को प्रभावित करता है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में UFC फाइट कराई:अब तक का सबसे महंगा शो, ₹567 करोड़ खर्च; जीत के बाद विजेता राष्ट्रपति से मिला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप यानी UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर (567 करोड़ रुपए) खर्च किए। ये अब तक का सबसे महंगा UFC आयोजन माना जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें

पाकिस्तान में पुलिस फायरिंग में ऑस्ट्रेलियाई बच्ची की मौत:लुटेरों ने घूमने आए परिवार से गहने लूटे; पुलिस ने डकैत समझकर गोली मारी

पाकिस्तान में 9 साल की ऑस्ट्रेलियाई बच्ची हानिया अहमद की पुलिस की गोलीबारी में मौत हो गई। हानिया अपने परिवार के साथ पाकिस्तान घूमने आई थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर के केवडेल इलाके का यह परिवार पंजाब के चकवाल शहर में अपने रिश्तेदारों से मिलने आया था। बुधवार रात वे किराये की कार से सफर कर रहे थे, तभी कुछ बदमाशों ने उनके गहने लूट लिए। बताया गया है कि मोटरसाइकिल पर सवार दो लुटेरे वारदात के बाद भाग रहे थे। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी की नजर उन पर पड़ गई। लुटेरे मौके से फरार हो गए और परिवार की किराये की कार भी वहां से आगे बढ़ गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने गलती से परिवार की कार को लुटेरों की गाड़ी समझ लिया और उस पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोलियां लगने से 9 साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसके पिता और बड़े भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। बच्ची की मां सुरक्षित है। पुलिस बोली- लुटेरों ने पहले गोली चलाई, पिता ने नकारा पंजाब पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध लुटेरों ने एक पुलिस अधिकारी पर गोली चलाई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। हालांकि हानिया के पिता ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि पुलिस ने ही सबसे पहले गोली चलाई थी। इस घटना पर बयान देते हुए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि सबसे पहले परिवार और फिर बाकी लोगों को भी सच्चाई पता चल सके। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि वह मृत बच्ची के परिवार और घायल ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को हर संभव कांसुलर सहायता उपलब्ध करा रहा है। मंत्रालय ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की। रिपोर्ट के मुताबिक, यह परिवार हाल ही में मक्का की धार्मिक यात्रा (हज/उमरा) पूरी करके पाकिस्तान पहुंचा था। पंजाब पुलिस ने अधिकारी को निलंबित किया पुलिस ने गोली चलाने वाले अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। घटना की जांच के लिए एक संयुक्त जांच टीम (जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम) भी बनाई गई है। पुलिस का कहना है कि लूटपाट में शामिल दो संदिग्ध लोगों को बाद में एक अलग मुठभेड़ में मार गिराया गया। इस घटना के बाद पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों में लोगों में नाराजगी है। परिवार ऑस्ट्रेलिया में रहता था। पाकिस्तान के सीनियर पुलिस अधिकारियों ने इसे गलत पहचान की वजह से हुई एक दुखद घटना बताया है और कहा है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के जरिए परिवार को न्याय दिलाया जाएगा। इस मामले ने पाकिस्तान में पुलिस के कामकाज पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान बल प्रयोग और आम लोगों की मौत होने पर जवाबदेही तय करने के तरीकों पर चर्चा तेज हो गई है। मानवाधिकार संगठनों ने लंबे समय से पुलिस फायरिंग, हिरासत में दुर्व्यवहार और कथित फर्जी मुठभेड़ों को लेकर चिंता जताई है। वहीं अधिकारी भी मानते रहे हैं कि पुलिस की ट्रेनिंग और लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए सुधारों की जरूरत है। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह पीड़ित परिवार की हर संभव मदद कर रहा है। मंत्रालय ने बताया कि वह मृत ऑस्ट्रेलियाई बच्ची के परिवार और इस घटना में घायल हुए दो ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को काउंसुलर सहायता उपलब्ध करा रहा है। ———————– ये खबर भी पढ़ें PoK में अब तक 46 प्रदर्शनकारियों की मौत:1100 गिरफ्तार; शरणार्थी सीटें खत्म करने के लिए आंदोलन, पाकिस्तानी सेना का विरोध पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK ) में बीते 4 दिनों से चल रहे आंदोलन में अब तक 46 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, चार दिनों में 1100 से ज्यादा लोगों की भी गिरफ्तारी हुई है। पूरी खबर पढ़ें

‘ईरान परमाणु हथियार कभी नहीं बनाएगा’, MoU पर साइन करने के साथ ट्रंप ने किया बड़ा ऐलान, जानें तेहरान को पैसे देने की बात पर क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान कर दिया है कि ईरान अब कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। ईरान के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर साइन करने के साथ ही ट्रंप ने बताया कि दोनों देशों के बीच परमाणु हथियार को लेकर आपसी सहमति बन गई है। इसके साथ ही अमेरिका राष्ट्रपति ने

Read More

वर्ल्ड अपडेट्स:रूस का बॅाम्बर विमान क्रैश, चारों पायलट सुरक्षित, इंजन फेल होने की आशंका

रूस का Tu-22M3 बॉम्बर विमान सोमवार को साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में ट्रेनिंग उड़ान के दौरान क्रैश हो गया। रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, विमान जमीन की ओर तेजी से गिरा, जिससे घटनास्थल पर धुएं का बड़ा गुबार उठ गया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि विमान में सवार चारों क्रू मेंबर समय रहते इजेक्ट (पैराशूट के जरिए बाहर निकल) हो गए और उनकी जान को कोई खतरा नहीं है। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे में जमीन पर भी किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर इगोर कोबजेव ने बताया कि विमान कामेंका गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ। शुरुआती जांच में इंजन फेल होना हादसे की वजह माना जा रहा है। Tu-22, जिसे NATO ने Backfire कोडनेम दिया है, सोवियत काल का एक सुपरसोनिक बॉम्बर विमान है। रूस इसका इस्तेमाल सीरिया और यूक्रेन में सैन्य अभियानों के दौरान कर चुका है। Tu-22M3 इसका आधुनिक संस्करण है, जो Kh-22 क्रूज मिसाइलों और हवा से लॉन्च होने वाली हाइपरसोनिक किंझाल मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… ब्रिटेन में 16 साल की उम्र से पहले बच्चे नहीं चला सकेंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव से 10 में से 9 अभिभावक खुश ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी। बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है। ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है। अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ। 25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं। इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में 6.7 तीव्रता का भूकंप, जानमाल के नुकसान की जानकारी नहीं इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप के पास मंगलवार को 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र पालू शहर से लगभग 42 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित था। भूकंप की गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई। फिलहाल जान-माल के नुकसान या सुनामी की कोई अलर्ट नहीं । नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस के बेटे को रेप केस में 4 साल की जेल
नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेटे-मैरिट के बेटे मारियस बोर्ग होइबी (29) को ओस्लो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने रेप, घरेलू हिंसा और अन्य अपराधों में दोषी ठहराते हुए 4 साल की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब मेटे-मैरिट भी दिवंगत अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से अपने पुराने संबंधों को लेकर विवादों में हैं। अदालत ने होइबी को दो रेप मामलों में दोषी ठहराया, जबकि दो अन्य रेप आरोपों से बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2018 से 2024 के बीच उन्होंने कई महिलाओं का यौन शोषण किया, जिनमें कुछ महिलाएं सो रही थीं या प्रतिरोध करने की स्थिति में नहीं थीं। होइबी, क्राउन प्रिंसेस मेटे-मैरिट और क्राउन प्रिंस हाकोन के साथ शाही माहौल में बड़े हुए हैं। हालांकि, उनके पास कोई शाही उपाधि नहीं है और वे राजपरिवार की ओर से कोई आधिकारिक भूमिका नहीं निभाते। अदालत ने उन्हें अपनी पूर्व प्रेमिका के साथ दुर्व्यवहार, दूसरी साथी पर हमला, ड्रग्स से जुड़े अपराध और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामलों में भी दोषी पाया। होइबी ने रेप के आरोपों से इनकार किया था, लेकिन कोकीन के इस्तेमाल और मारपीट की बात स्वीकार की थी। भारत दौरे के बाद चीन पहुंचे नेपाल के विदेश मंत्री
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत दौरे के कुछ दिनों बाद चीन पहुंचकर शीर्ष चीनी राजनयिक वांग यी से मुलाकात की। मार्च में सत्ता में आई नई सरकार के गठन के बाद यह उनका पहला चीन दौरा है। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, वांग यी ने कहा कि चीन हमेशा नेपाल को अपनी पड़ोसी कूटनीति में प्राथमिकता देता है और उसकी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के प्रयासों का समर्थन करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल भारत और चीन के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में नई दिल्ली दौरे के दौरान खनाल ने कहा था कि नई सरकार अतीत के राजनीतिक बोझ से मुक्त है और भारत के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए तैयार है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, चीन नेपाल को लगभग 31 करोड़ डॉलर का कर्ज दे चुका है। वहीं चीनी कंपनियों ने ऊर्जा और रियल एस्टेट क्षेत्रों में 1.12 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। विश्लेषकों का कहना है कि नेपाल के हालिया राजनीतिक बदलावों ने चीन के लिए नई चुनौती पैदा की है। ऐसे में बीजिंग नेपाल के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखने और क्षेत्र में अपना प्रभाव कायम रखने की कोशिश कर रहा है। इजराइली मंत्री बेन-गवीर पर EU में नहीं बनी सहमति: प्रतिबंध प्रस्ताव अटका
यूरोपीय संघ (EU) इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर सहमति बनाने में विफल रहा। EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने सोमवार को कहा कि कई सदस्य देशों ने आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, लेकिन सर्वसम्मति नहीं बनने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। बेन-गवीर हाल ही में गाजा की ओर जा रहे ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला के कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर विवादों में रहे हैं। फ्लोटिला को इजराइली सैनिकों ने रोककर कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। बाद में एक वीडियो सामने आया, जिसमें बेन-गवीर कथित तौर पर हाथ बंधे हुए और जमीन पर बैठे कार्यकर्ताओं का मजाक उड़ाते दिखाई दिए। इस घटना के बाद कई यूरोपीय देशों में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी। हालांकि EU स्तर पर प्रतिबंध लगाने के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जर्मनी, ऑस्ट्रिया और चेक गणराज्य उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। यूरोपीय संघ इजराइल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और पिछले वर्ष इजराइल के कुल वस्तु व्यापार में उसकी हिस्सेदारी 30% से अधिक रही थी। थाईलैंड ने परमाणु अप्रसार का दोहराया समर्थन
थाईलैंड ने वियना में आयोजित व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि संगठन (CTBTO) के 66वें सत्र में परमाणु हथियारों के परीक्षण और परमाणु तकनीक के सैन्य इस्तेमाल का विरोध दोहराया। देश ने परमाणु अप्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण उपयोग का समर्थन किया। थाईलैंड के ऑफिस ऑफ एटम्स फॉर पीस (OAP) ने कहा कि देश CTBTO की वैश्विक निगरानी और सत्यापन प्रणाली का सक्रिय समर्थक है। OAP के अनुसार, CTBTO नेटवर्क से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग भूकंप निगरानी, सुनामी चेतावनी, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पर्यावरण निगरानी और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे कई क्षेत्रों में किया जाता है। सत्र में थाईलैंड ने परमाणु अप्रसार के समर्थन को दोहराते हुए कहा कि परमाणु तकनीक का इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। देश ने चिकित्सा, ऊर्जा और उद्योग जैसे क्षेत्रों में इसके सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। पोलैंड में रूसी कलाकार और पुतिन आलोचक की हत्या: पार्किंग में मारीं 5 गोलियां
पोलैंड में रूसी कलाकार और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मुखर आलोचक सेम्योन स्क्रेपेत्स्की की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बियाला पोडलास्का शहर में सोमवार सुबह हुई इस वारदात के बाद पुलिस और अभियोजन एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। मामले में दो बेलारूसी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है। ल्यूबलिन जिला अभियोजन कार्यालय के अनुसार, स्क्रेपेत्स्की का वास्तविक नाम रॉबर्ट कुजोवकोव था। 44 वर्षीय कलाकार पर एक अज्ञात हमलावर ने पार्किंग क्षेत्र में हमला किया। आरोपी ने पहले दो गोलियां चलाईं और पीड़ित के गिरने के बाद उसके पास जाकर तीन और गोलियां दाग दीं। कलाकार को सिर, सीने और पीठ में गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटनास्थल बेलारूस के वाणिज्य दूतावास से करीब 600 मीटर की दूरी पर स्थित है। जांचकर्ताओं को वहां से पांच खोखे और 9 मिमी की एक गोली बरामद हुई है। स्क्रेपेत्स्की अपने राजनीतिक व्यंग्यचित्रों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको और चेचन नेता रमजान कादिरोव पर कई आलोचनात्मक चित्र बनाए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वे सार्वजनिक रूप से रूस की वर्तमान नीतियों की आलोचना भी करते थे। स्थानीय मीडिया के अनुसार, स्क्रेपेत्स्की 2021 में पोलैंड आकर बस गए थे। अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमॉर्टम बुधवार को किया जाएगा और हत्या के पीछे की वजहों की जांच जारी है। चीन में 6.3 तीव्रता का भूकंप: 1 की मौत, 4 घायल; कोयला खदानों से सभी मजदूरों को निकाला गया
चीन के उत्तर-पश्चिमी प्रांत चिंगहाई में मंगलवार शाम 6.3 तीव्रता का भूकंप आया। सरकारी मीडिया के मुताबिक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हुए हैं। भूकंप के बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच गए हैं। चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के मुताबिक, भूकंप स्थानीय समयानुसार शाम 5:06 बजे हाइक्सी प्रीफेक्चर के ऊंचाई वाले इलाके में आया। इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। सरकारी मीडिया ने बताया कि भूकंप के केंद्र के पास मौजूद कोयला खदानों से सभी कर्मचारियों को एहतियात के तौर पर बाहर निकाल लिया गया है। अधिकारी अभी जनहानि और संपत्ति के नुकसान का आकलन कर रहे हैं। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, राहत और बचाव दल फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। साथ ही भूकंप के बाद संभावित द्वितीयक आपदाओं के खतरे का भी आकलन किया जा रहा है। चीन के भूकंप प्रशासन ने इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्मट एक्टिव कर दिया है। मुख्य झटके के बाद कई आफ्टरशॉक भी महसूस किए गए, जिनमें एक की तीव्रता 4.9 मापी गई।