ट्रम्प ने जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में UFC फाइट कराई:अब तक का सबसे महंगा शो, ₹567 करोड़ खर्च; जीत के बाद विजेता राष्ट्रपति से मिला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप यानी UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर (567 करोड़ रुपए) खर्च किए। ये अब तक का सबसे महंगा UFC आयोजन माना जा रहा है। इस फाइट कार्ड में कुल 7 मुकाबले हुए। मेन फाइट लाइटवेट चैंपियन रहे इलिया टोपुरिया और जस्टिन गेथजे के बीच हुई। 4 राउंड तक चले मुकाबले में अमेरिकी फाइटर गेथजे ने अपने स्पेनिश विरोधी टोपुरिया को हराकर उलटफेर किया। गेथजे को लाइटवेट टाइटल बेल्ट मिली, जबकि टोपुरिया को अपने करियर की पहली हार मिली। मुकाबले देखने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, उनके कई सीनियर अफसर, खास मेहमान और हजारों सैन्यकर्मी मौजूद थे। पहले मुकाबले में बो निकल ने पहले ही राउंड में काइल डाउकस को नॉकआउट कर दिया। उन्होंने एक जोरदार लेफ्ट हुक और राइट पंच से प्रतिद्वंद्वी को गिराया, जिसके बाद रेफरी ने मुकाबला रोक दिया। जीत के तुरंत बाद बो निकल रिंग से बाहर आए और सीधे राष्ट्रपति ट्रम्प के पास पहुंचे। दोनों ने हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत की। UFC फाइट से जुड़ी 10 तस्वीरें…
ट्रम्प ने कहा- यह धरती का सबसे बड़ा शो राष्ट्रपति ट्रम्प और कई अधिकारियों ने आयोजन की तारीफ की। ट्रम्प ने इसे ‘धरती का सबसे बड़ा शो’ बताया और ‘क्लॉ’ की तुलना पेरिस के एफिल टॉवर से की। वहीं विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने UFC को अमेरिका की सॉफ्ट डिप्लोमैटिक पावर बताया। इस इवेंट में कुल 14 फाइटर ने हिस्सा लिया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस आयोजन का सबसे बड़ा फायदा UFC ब्रांड को मिल सकता है। एक समय ऐसा था, जब इस खेल को प्रायोजकों और कई आयोजकों ने स्वीकार नहीं किया था। एक अमेरिकी सीनेटर ने इसे कभी ‘मानव मुर्गा लड़ाई’ तक कहा था। 33 साल पहले शुरू हुआ था UFC का सफर अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप (UFC) आज दुनिया की सबसे बड़ी मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) लीग है। इसकी शुरुआत 1993 में अमेरिका में हुई थी। उस दौर में बॉक्सिंग, कराटे, कुश्ती और ब्राजीलियन जिउ-जित्सु जैसी अलग-अलग फाइटिंग शैलियों के समर्थक अपनी-अपनी तकनीक को सबसे प्रभावी बताते थे। इस पर काफी बहस होती थी कि असली मुकाबले में कौन-सा मार्शल आर्ट सबसे ज्यादा कारगर साबित होगा। इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए UFC का पहला टूर्नामेंट आयोजित किया गया। इसमें ब्राजीलियन जिउ-जित्सु विशेषज्ञ रॉयस ग्रेसी चैंपियन बने। ग्रेसी शारीरिक रूप से कई प्रतिद्वंद्वियों से छोटे और हल्के थे, लेकिन उन्होंने अपनी तकनीक के दम पर बड़े और ताकतवर फाइटर्स को हराकर सबको चौंका दिया। समय के साथ खेल का स्वरूप भी बदल गया। अब फाइटर्स सिर्फ एक शैली पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि बॉक्सिंग, रेसलिंग, जूडो, कराटे, ताइक्वांडो, जिउ-जित्सु और किक बॉक्सिंग जैसी कई तकनीकों को मिलाकर मुकाबला करते हैं। यही वजह है कि इसे आज ‘मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स’ कहा जाता है। अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे हो रहे अमेरिका इस साल अपनी आजादी के 250 साल पूरे करने जा रहा है। अमेरिका जुलाई 1776 में ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ था। आजादी के जश्न की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पूरे देश में एक साल से ज्यादा समय तक चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। UFC इवेंट भी इसी जश्न का हिस्सा है, जिसे ट्रम्प प्रशासन प्रमुख आकर्षण के तौर पर पेश कर रहा है। अमेरिका की स्थापना का आधार माने जाने वाले ‘डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस’ पर 4 जुलाई 1776 को हस्ताक्षर हुए थे। इसी की 250वीं सालगिरह के मौके पर देशभर में परेड, प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बड़े सार्वजनिक समारोह आयोजित किए जाएंगे। व्हाइट हाउस ने ‘टास्क फोर्स 250’ बनाई है, जो संघीय सरकार, राज्यों, निजी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर आयोजन कर रही है। ——————————– UFC से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में फाइटिंग कराएंगे:मुकाबले के लिए स्टेज तैयार हो रहा, 1 लाख लोग फ्री में मुकाबला देखेंगे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 14 जून को 80 साल के हो जाएंगे। इस मौके पर व्हाइट हाउस में अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप (UFC) के मुकाबले करााए जाएंगे। UFC दुनिया की सबसे बड़ी मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) संस्था है। इसमें अलग-अलग फाइटिंग खेलों के खिलाड़ी एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबला करते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Iran US Deal: ‘डील पूरी, होर्मुज से निकलने की जहाज कर लें तैयारी’, अमेरिका-ईरान जंग पर लगा विराम; डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान

US-Iran Deal: अमेरिका और ईरान के बीच करीब 4 महीनों से चल रहा युद्ध अब खत्म होने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऐतिहासिक समझौते का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ डील पूरी हो गई है।डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, ‘इस्लामिक

Read More

पीएम मोदी को स्लोवाकिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान:‘द ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस’ से नवाजे गए; दोनों देशों के बीच 11 समझौते हुए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्लोवाकिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)’ से नवाजा गया है। राजधानी ब्रातिस्लावा में उन्हें सम्मानित किया गया। पीएम मोदी यहां दो दिन के दौरे पर आए थे। सम्मान मिलने पर पीएम मोदी ने X पोस्ट में लिखा – वह इसके लिए स्लोवाकिया की सरकार और वहां के लोगों के आभारी हैं। यह सम्मान भारत के 140 करोड़ लोगों का है और इसे भारत-स्लोवाकिया की मजबूत एवं स्थायी दोस्ती को समर्पित करते हैं। इससे पहले मोदी और स्लोवाकियन पीएम रॉबर्ट फिको के बीच बातचीत के बाद द्विपक्षीय डिफेंस और ट्रेड डील हुई। ब्रातिस्लावा के महल में स्लोवाकिया के पीएम रॉबर्ट फिको से मुलाकात के बाद मोदी ने फिको को भारत आने का न्योता भी दिया। भारत और स्लोवाकिया ने द्विपक्षीय संबंधों को ‘व्यापक साझेदारी’ (कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप) के स्तर तक अपग्रेड करने का फैसला किया। दोनों देशों के बीच प्रवासन, डिजिटल प्रौद्योगिकी, रक्षा, शिक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 11 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। ब्रातिस्लावा में मोदी के स्वागत की 7 तस्वीरें… जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी के बयान की 5 बातें स्लोवाकिया में 9 हजार से ज्यादा भारतीय स्लोवाकिया में 9,200 से ज्यादा भारतीय रहते हैं। स्लोवाकिया में भारतीय आईटी सेवाओं, डेवलपमेंट सेंटर्स और तकनीकी क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। स्लोवाकिया के शेंगेन (यूरोपी देशों का समूह जहां एस वीजा से एंट्री मिलती है) देश होने की वजह से भारतीयों को एक ही वीजा पर 26 देश घूमने की सुविधा मिलती है। 2025 में भारत-स्लोवाकिया के बीच ₹17 हजार करोड़ का व्यापार मोदी-मैक्रों की द्विपक्षीय बैठक, 13 बड़े समझौते हुए रविवार को फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रविवार को द्विपक्षीय बैठक की। इसमें प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी शामिल रहे। इस दौरान दोनों देशों के बीच 13 बड़े समझौते हुए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में रक्षा, व्यापार, टेक्नोलॉजी, स्पेस और शिक्षा पर बात हुई। दोनों देशों ने अगले 5 वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने के लिए एक हाई-लेवल सिस्टम और इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग की शुरुआत की है। इससे पहले दोनों नेताओं ने ‘भारत इनोवेट्स 2026’ प्रोग्राम का उद्घाटन किया, जिसमें भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप्स और वेंचर कैपिटल फंड्स ने हिस्सा लिया। प्रोग्राम के बाद राष्ट्रपति मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी को नीस के पास स्थित विला केरीलोस घुमाने ले गए। यह फ्रांस की प्रसिद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। मैक्रों ने यहां पीएम के साथ सेल्फी ली और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। इनोवेशन प्रोग्राम में PM बोले- दोनों देशों का विजन एक, 5 बड़ी बातें मैक्रों बोले- दुनिया भारत के साथ इनोवेशन करना चाहती है, 5 बड़ी बातें फ्रांस से 114 राफेल विमानों की डील पर चर्चा भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमान को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई बैठक में राफेल के मुद्दे पर खास चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का पूरा ध्यान ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने पर है। भारत चाहता है कि डिफेंस प्रोजेक्ट्स में डिजाइनिंग से लेकर विमान बनाने तक का सारा काम दोनों देश मिलकर करें। इनमें सबसे अहम वायु सेना के लिए 114 रफाल की डील है। करीब सवा 3 लाख कराेड़ रुपए के इस सौदे में भारत विमानों के साझा विकास और उत्पादन के अलावा टेक्नोलॉजी का पूरा ट्रांसफर चाहता है। जरूरतों के हिसाब से इन विमानों पर मिसाइलें और अन्य हथियार लगाने के लिए सोर्स कोड को लेकर भी भारत अपना रुख स्पष्ट करेगा। मोदी कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) ने अभी तक इस डील पर मुहर नहीं लगाई है। भारत और फ्रांस बना सकते हैं एआई का ओपन सोर्स मॉडल अभी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दो बड़े मॉडल हैं। पहला- अमेरिकी, जो पूरी तरह से निजी कॉर्पोरेट्स के मुनाफे पर टिका है और दूसरा चीनी, जो सरकारी नियंत्रण पर आधारित है। लेकिन, भारत और फ्रांस दुनिया को तीसरा यानी ओपन सोर्स मॉडल देने की तैयारी में हैं। मोदी ने कहा कि एक दशक पहले तक भारत को दुनिया एक ‘टेक्नोलॉजी अडॉप्टर’ मानती थी, लेकिन आज भारत ‘टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर’ (समाधान देने वाला) बन चुका है। वहीं, राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत को बताते हुए कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाला यह देश हर साल 10 लाख से ज्यादा इंजीनियर तैयार करता है, जो पूरे यूरोप और अमेरिका को मिलाकर बराबर हैं। PM का फ्रांस दौरा, 5 तस्वीरें… G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं? G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं। इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बन गया। 1998 में रूस को शामिल कर इसका नाम G8 कर दिया गया, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। इसके बाद यह फिर से G7 कहलाने लगा। भारत G7 में गेस्ट नेशन, पीएम 7वीं बार शामिल होंगे भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के रूप में बुलाया जाता है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री को समिट का न्यौता मिलता है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 से 2013 के बीच पांच बार G7 (पहले G8) समिट में हिस्सा लिया था। PM मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित G7 समिट में आमंत्रित किया गया था। 2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन उसने तब समिट रद्द कर दी। इसके बाद 2021 में ब्रिटेन की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन में PM मोदी वर्चुअली शामिल हुए। इसके अलावा मोदी 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान, 2024 में इटली और 2025 में कनाडा में आयोजित G7 समिट में शामिल हुए। भारत के टॉप-2 हथियार सप्लायर्स में शामिल फ्रांस साल 2025 में फ्रेंच अखबार ला मोंड की खबर के मुताबिक फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है, जब अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था। पोखरण में परमाणु टेस्ट के बाद अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन फ्रांस ने भारत का समर्थन किया। फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत को फ्रांस से मिराज 2000 फाइटर जेट, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी मिल चुकी है। फ्रांस ने इंटरनेशनल फोरम पर हमेशा भारत को सपोर्ट किया सितंबर 2023 में हुई G20 समिट के दौरान PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन दिसंबर में उन्होंने भारत आने से इनकार कर दिया। ऐसे वक्त में भारत ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का न्योता भेजा। उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने भारत का हमेशा समर्थन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र में भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग की थी। इसके अलावा फ्रांस, न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में भी भारत को सदस्य बनाने का पक्षधर है। G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है? एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं। इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान और होर्मुज रूट की स्थिति, मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियां), वैश्विक आर्थिक सहयोग और असंतुलन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा G7 के सदस्य देशों के लीडर्स और ऑफिसर्स साल में कई बैठकें करते हैं, जिनमें कई समझौते होते हैं और दुनिया की बड़ी घटनाओं पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते हैं। शुरुआत में G7 का एजेंडा आर्थिक चुनौतियों और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हल निकालना था। बाद में राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। वैश्विक मुद्दों पर G7 के फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उदाहरण के लिए G7 ने 2002 में मलेरिया और एड्स से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड बनाया। 1998 में वित्तीय संकट के दौरान इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को आर्थिक मदद की। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन की मदद करने का फैसला किया। G20 से कैसे अलग है G7 G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और इसके सदस्य देश कोई अंतरराष्ट्रीय कानून पारित नहीं कर सकते। G20 में सबसे बड़ा मुद्दा वर्ल्ड इकोनॉमी होता है, जबकि G7 के लिए राजनीतिक मुद्दे भी अहम होते हैं। 1999 में बने G20 में G7 के देशों के अलावा BRICS के देश भी शामिल हैं। इन देशों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्किये और यूरोपीय संघ शामिल हैं। राजन कुमार के मुताबिक G20 में नई और बढ़ती हुई इकोनॉमी वाले देशों को भी शामिल किया गया है। भले ही G7 और G20 का एजेंडा एक जैसा हो, लेकिन इस समय G20 ज्यादा प्रभावी गुट है। 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी G7 को बहुत आउटडेटेड ग्रुप कहा था। ……………………

ट्रम्प बोले- ईरान से समझौता साइन हो चुका:शुक्रवार तक हॉर्मुज पूरी तरह खुल जाएगा; दोबारा हमला करना पड़ा, इसका दुख है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ समझौता पूरी तरह साइन हो चुका है। G7 समिट के लिए फ्रांस पहुंचे ट्रम्प ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत में कहा कि हॉर्मुज स्ट्रेट आंशिक रूप से खुल चुका है और शुक्रवार तक पूरी तरह खोल दिया जाएगा। ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी रही, लेकिन बीच में अमेरिका को दो रात सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने कहा, “हमारी ईरान के साथ बहुत अच्छी बन रही थी। मुझे दुख हुआ कि हमें दो रात के लिए वापस जाकर हमला करना पड़ा।” उधर, रॉयटर्स के मुताबिक एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रम्प, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ समझौते पर डिजिटिल साइन कर चुके हैं। अधिकारी ने कहा कि समझौते का पूरा ब्योरा अगले 24-48 घंटे में जारी किया जाएगा, जबकि सप्ताह के अंत में तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी। ईरान ने दस्तखत करने से पहले 3 शर्तें रखीं ईरान-अमेरिका के बीच हुए समझौते का पूरा दस्तावेज अभी जारी नहीं किया गया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद शुरू होने वाली 60 दिन की अमेरिका-ईरान की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका पहले अपने तीन वादे पूरे करता है या नहीं। गरीबाबादी के मुताबिक अमेरिका को तीन कदम उठाने होंगे- 1. नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना, 2. युद्ध और सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकना, 3. ईरान के फ्रीज्ड फंड जारी करना। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

UFC फाइट, 60 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च और G7 समिट की बदली तारीख, व्हाइट हाउस में ऐसे मनाया जा रहा Donald Trump का 80वां जन्मदिन

Trump’s 80th birthday: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 14 जून 2026 को 80 साल के हो गए। उनके जन्मदिन का जश्न बेहद अनोखे और भव्य अंदाज में मनाया जा रहा है। व्हाइट हाउस के साउथ लॉन पर UFC (अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप) की मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स इवेंट आयोजित होंगे। जो पहले कभी सोचा भी

Read More

वर्ल्ड अपडेट्स:ब्राजील में दो हेलिकॉप्टर हवा में टकराए, 6 की मौत; पार्किंग में गिरने से 20 गाड़ियां जलीं

ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में रविवार सुबह दो हेलिकॉप्टर हवा में टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गए। दोनों हेलिकॉप्टर शहर के पश्चिमी इलाके में स्थित एक इलेक्ट्रिक वाहन डीलरशिप की पार्किंग में जा गिरे। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई। दमकल विभाग के मुताबिक, टक्कर के बाद हेलिकॉप्टरों में आग लग गई, जो देखते ही देखते पार्किंग में खड़ी गाड़ियों तक फैल गई। आग की चपेट में आने से कम से कम 20 वाहन जलकर खाक हो गए। स्थानीय मीडिया के अनुसार, एक हेलिकॉप्टर जमीन पर गिरते ही फट गया, जिसके बाद आसपास खड़ी इलेक्ट्रिक गाड़ियों में भी आग लग गई। हादसे के बाद इलाके में कई धमाकों की आवाजें सुनाई दीं और आसमान में काले धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। सूचना मिलते ही दमकल और बचाव दल मौके पर पहुंचे। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के इलाके को भी खाली कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि हादसे में मारे गए सभी लोग दोनों हेलिकॉप्टरों के क्रू मेंबर थे। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हवा में दोनों हेलिकॉप्टरों की टक्कर कैसे हुई। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… पाकिस्तान में पुलिस फायरिंग में 9 साल की ऑस्ट्रेलियाई बच्ची की मौत पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पुलिस फायरिंग में 9 साल की ऑस्ट्रेलियाई-पाकिस्तानी बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ने परिवार की कार को लुटेरों का वाहन समझकर उस पर गोलियां बरसा दीं। घटना में बच्ची के पिता और भाई गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह घटना 10 जून को चकवाल जिले में हुई। पुलिस के अनुसार, अदील अहमद अपनी पत्नी, 9 वर्षीय बेटी हानिया और 10 वर्षीय बेटे आफान के साथ कार से रिश्तेदार के घर जा रहे थे। रास्ते में बाइक सवार बदमाशों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके बाद अदील ने पुलिस हेल्पलाइन पर कॉल किया। सूचना मिलने पर क्राइम कंट्रोल डिपार्टमेंट (CCD) की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उसने परिवार की कार को ही संदिग्ध मान लिया और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों से छलनी हुई कार में बैठी हानिया की मौके पर मौत हो गई, जबकि उसके पिता और भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। मां सुरक्षित हैं। पुलिस ने मामले में फायरिंग करने वाले एक CCD अधिकारी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। लंदन में 26 साल के भारतीय युवक की चाकू मारकर हत्या; 7 लोगों को हिरासत में लिया गया ब्रिटेन की राजधानी लंदन में 26 साल के भारतीय मूल के युवक गुरभेज सिंह की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने मौके से 20 से 30 साल की उम्र के 7 लोगों को हत्या के शक में हिरासत में लिया था। जांच के बाद 6 लोगों को छोड़ दिया गया, जबकि एक व्यक्ति को जमानत पर रिहा किया गया है। उससे आगे भी पूछताछ की जाएगी। पुलिस के मुताबिक, गुरभेज सिंह पर करीब रात 12:30 बजे हमला हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस और एम्बुलेंस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनकी जान नहीं बच सकी। घटना में एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ था। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के बाद अब वह खतरे से बाहत है। पुलिस ने बताया कि गुरभेज सिंह के परिवार को सहायता दी जा रही है और हमले की पूरी वजह जानने के लिए जांच जारी है। बंजी जंप से पहले रस्सी बांधना भूले कर्मचारी, 130 फीट नीचे गिरकर 21 साल की युवती की मौत ब्राजील में बंजी जंप के दौरान एक दर्दनाक हादसे में 21 साल की मारिया एडुआर्डा रोड्रिग्स डी फ्रेटास की मौत हो गई। आरोप है कि कर्मचारियों ने सुरक्षा रस्सी लगाए बिना ही उसे पुल से कूदने के लिए छोड़ दिया। मारिया करीब 130 फीट नीचे खाई में गिर गई। मौके पर पहुंची राहत टीम ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में 6 लोगों को हिरासत में लिया है। यह हादसा साओ पाउलो राज्य के स्केलेटन ब्रिज पर हुआ। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहा है कि मारिया को पुल के किनारे ले जाया गया और फिर नीचे छोड़ दिया गया। तभी लोगों को पता चला कि सुरक्षा रस्सी उससे जुड़ी ही नहीं थी। रेयर अर्थ की तलाश में ग्रीनलैंड पहुंचेगा जापान का दल जापान इस गर्मी में ग्रीनलैंड में रेयर अर्थ खनिजों के संभावित खनन का मूल्यांकन करने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की तैयारी कर रहा है। निक्केई की रिपोर्ट के मुताबिक, दल में सरकारी अधिकारी, ट्रेडिंग कंपनियों के प्रतिनिधि और ऊर्जा-सुरक्षा एजेंसी के सदस्य शामिल होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, यह दल ग्रीनलैंड के स्थानीय सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक कर खनन संभावनाओं का आकलन करेगा। ग्रीनलैंड लंबे समय से अपने संभावित रेयर अर्थ भंडारों के कारण वैश्विक शक्तियों की रुचि का केंद्र रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा उपकरणों, सेमीकंडक्टर और रक्षा क्षेत्र में इन खनिजों की बढ़ती जरूरत के चलते दुनिया भर में इनके नए स्रोत तलाशे जा रहे हैं। ग्रीनलैंड की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और संभावित खनिज संपदा इसे वैश्विक शक्तियों के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।

ट्रम्प बोले- ईरान से डील पूरी:दुनिया के जहाजों, तेल बहने दो; पाकिस्तान PM ने कहा- 19 जून को स्विट्जरलैंड में साइनिंग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में दावा किया है कि ईरान के साथ उनकी डील पूरी हो गई है। ट्रम्प ने लिखा कि हॉर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी शुल्क के खोलने की पूरी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तुरंत हटाने की अनुमति देने की भी बात कही। अपनी पोस्ट में ट्रम्प ने लिखा- दुनिया के जहाजों, अपने इंजन शुरू करो। तेल को बहने दो। हालांकि पोस्ट में यह नहीं बताया गया कि ईरान के साथ हुई डील में क्या-क्या शामिल है। यह भी साफ नहीं किया गया कि यह व्यवस्था कब से लागू होगी। वहीं, ईरान ने डील को पूरी तरह खारिज नहीं किया है, लेकिन कहा है कि पहले अमेरिका भरोसा दिखाए, फिर आगे की बातचीत होगी। डील के मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पोस्ट में लिखा- अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे। डील को लेकर ईरान की तीन मांगे डील पर ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर खामेन घरीबाबादी ने कहा- हम 60 दिन की बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले अमेरिका को अपने वादे पूरे करने होंगे। ईरान की तीन मुख्य मांगें शहबाज बोले- अमेरिका और ईरान का कूटनीतिक रास्ता अपनाने के लिए धन्यवाद शहबाज शरीफ ने कहा कि लंबी और गहन बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों देशों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और हमेशा के लिए रोकने पर सहमति जताई है। शरीफ ने बताया कि इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे। शरीफ ने अमेरिका और ईरान का कूटनीतिक रास्ता अपनाने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कतर के नेतृत्व की भूमिका की सराहना की और सऊदी अरब व तुर्किये के नेतृत्व को भी समझौते तक पहुंचने में अहम योगदान के लिए धन्यवाद दिया। शरीफ कहा कि अब मध्यस्थ इस सप्ताह कई बैठकों का आयोजन करेंगे, जिनमें समझौते को लागू करने की तैयारी और तकनीकी स्तर की बातचीत का आधार तैयार किया जाएगा। ट्रम्प ने पहले कहा था- ईरान से पीस डील कुछ घंटों के लिए टली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि लेबनान पर इजराइली हमले से ईरान के साथ पीस डील की साइनिंग कुछ घंटों के लिए टल गई। एक्सिओस से बातचीत में ट्रम्प ने कहा- इजराइली हमले ने मामला हिला दिया। इससे साइनिंग कुछ घंटे लेट हो गई। अभी तक समझौता हो जाना चाहिए था, लेकिन अब यह कुछ घंटे बाद होगा। ट्रम्प के मुताबिक, जब उनके सलाहकारों ने उन्हें बेरूत पर हमले की जानकारी दी तो वह हैरान रह गए। उन्होंने कहा, “यह बहुत बुरा था। हम डील पर हस्ताक्षर करने से सिर्फ एक घंटे दूर थे।” रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने इस मुद्दे पर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रति भी नाराजगी जताई। हालांकि ट्रम्प ने भरोसा जताया कि समझौता अब भी पटरी पर है। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित डील ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेगी, उसके परमाणु कार्यक्रम पर सख्त निगरानी सुनिश्चित करेगी और अचानक निरीक्षण की अनुमति देगी। ईरान सभी कारोबारी जहाजों के लिए होर्मुज तुरंत खोल देगा। इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शुरू करेगा। अमेरिका कुछ समय के लिए ईरान के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में भी छूट देगा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

फ्रांस के नीस में मोदी-मैक्रों ने द्विपक्षीय बैठक की:साथ में सेल्फी ली; भारत-फ्रांस के बीच FTA, डिफेंस और AI से जुड़े 13 बड़े समझौते हुए

फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रविवार को द्विपक्षीय बैठक की। इसमें प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी शामिल रहे। इस दौरान दोनों देशों के बीच 13 बड़े समझौते हुए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में रक्षा, व्यापार, टेक्नोलॉजी, स्पेस और शिक्षा पर बात हुई। दोनों देशों ने अगले 5 वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने के लिए एक हाई-लेवल सिस्टम और इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग की शुरुआत की है। इससे पहले दोनों नेताओं ने ‘भारत इनोवेट्स 2026’ प्रोग्राम का उद्घाटन किया, जिसमें भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप्स और वेंचर कैपिटल फंड्स ने हिस्सा लिया। प्रोग्राम के बाद राष्ट्रपति मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी को नीस के पास स्थित विला केरीलोस घुमाने ले गए। यह फ्रांस की प्रसिद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। मैक्रों ने यहां पीएम के साथ सेल्फी ली और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। पीएम मोदी 13 जून से फ्रांस-स्लोवाकिया के 6 दिन के दौरे पर हैं। वे 17 जून को फ्रांस के एवियान में G7 समिट में शामिल होंगे। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से मिलेंगे। दोनों नेताओं के बीच ट्रेड डील पर बातचीत होगी। इनोवेशन प्रोग्राम में PM बोले- दोनों देशों का विजन एक, 5 बड़ी बातें मैक्रों बोले- दुनिया भारत के साथ इनोवेशन करना चाहती है, 5 बड़ी बातें फ्रांस से 114 राफेल विमानों की डील पर चर्चा भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमान को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई बैठक में राफेल के मुद्दे पर खास चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का पूरा ध्यान ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने पर है। भारत चाहता है कि डिफेंस प्रोजेक्ट्स में डिजाइनिंग से लेकर विमान बनाने तक का सारा काम दोनों देश मिलकर करें। इनमें सबसे अहम वायु सेना के लिए 114 रफाल की डील है। करीब सवा 3 लाख कराेड़ रुपए के इस सौदे में भारत विमानों के साझा विकास और उत्पादन के अलावा टेक्नोलॉजी का पूरा ट्रांसफर चाहता है। जरूरतों के हिसाब से इन विमानों पर मिसाइलें और अन्य हथियार लगाने के लिए सोर्स कोड को लेकर भी भारत अपना रुख स्पष्ट करेगा। मोदी कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) ने अभी तक इस डील पर मुहर नहीं लगाई है। भारत और फ्रांस बना सकते हैं एआई का ओपन सोर्स मॉडल अभी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दो बड़े मॉडल हैं। पहला- अमेरिकी, जो पूरी तरह से निजी कॉर्पोरेट्स के मुनाफे पर टिका है और दूसरा चीनी, जो सरकारी नियंत्रण पर आधारित है। लेकिन, भारत और फ्रांस दुनिया को तीसरा यानी ओपन सोर्स मॉडल देने की तैयारी में हैं। मोदी ने कहा कि एक दशक पहले तक भारत को दुनिया एक ‘टेक्नोलॉजी अडॉप्टर’ मानती थी, लेकिन आज भारत ‘टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर’ (समाधान देने वाला) बन चुका है। वहीं, राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत को बताते हुए कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाला यह देश हर साल 10 लाख से ज्यादा इंजीनियर तैयार करता है, जो पूरे यूरोप और अमेरिका को मिलाकर बराबर हैं। PM का फ्रांस दौरा, 5 तस्वीरें… 13 जून से 18 जून: फ्रांस-स्लोकाबिया दौरे पर मोदी, ट्रम्प से मिलेंगे होर्मुज रक्षा गठबंधन में भारत के शामिल होने पर निर्णय संभव प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। ब्रिटेन की अगुवाई में अप्रैल में हुई पेरिस वार्ता में भारत शामिल हुआ था। होर्मुज खोलने को लेकर भारत किसी एक देश की पहल पर होने वाली सुरक्षा व्यवस्था के बजाए संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुकूल बहुपक्षीय सुरक्षा व्यवस्था के हक में है। ऐसे में भारत फ्रांस और ब्रिटेन की पहल के साथ कदम मिलाते हुए होर्मुज रक्षा गठबंधन में शामिल होने पर सहमति दे सकता है। G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं? G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं। इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बन गया। 1998 में रूस को शामिल कर इसका नाम G8 कर दिया गया, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। इसके बाद यह फिर से G7 कहलाने लगा। भारत G7 में गेस्ट नेशन, पीएम 7वीं बार शामिल होंगे भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के रूप में बुलाया जाता है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री को समिट का न्यौता मिलता है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 से 2013 के बीच पांच बार G7 (पहले G8) समिट में हिस्सा लिया था। PM मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित G7 समिट में आमंत्रित किया गया था। 2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन उसने तब समिट रद्द कर दी। इसके बाद 2021 में ब्रिटेन की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन में PM मोदी वर्चुअली शामिल हुए। इसके अलावा मोदी 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान, 2024 में इटली और 2025 में कनाडा में आयोजित G7 समिट में शामिल हुए। भारत के टॉप-2 हथियार सप्लायर्स में शामिल फ्रांस साल 2025 में फ्रेंच अखबार ला मोंड की खबर के मुताबिक फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है, जब अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था। पोखरण में परमाणु टेस्ट के बाद अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन फ्रांस ने भारत का समर्थन किया। फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत को फ्रांस से मिराज 2000 फाइटर जेट, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी मिल चुकी है। फ्रांस ने इंटरनेशनल फोरम पर हमेशा भारत को सपोर्ट किया सितंबर 2023 में हुई G20 समिट के दौरान PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन दिसंबर में उन्होंने भारत आने से इनकार कर दिया। ऐसे वक्त में भारत ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का न्योता भेजा। उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने भारत का हमेशा समर्थन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र में भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग की थी। इसके अलावा फ्रांस, न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में भी भारत को सदस्य बनाने का पक्षधर है। G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है? एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं। इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान और होर्मुज रूट की स्थिति, मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियां), वैश्विक आर्थिक सहयोग और असंतुलन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा G7 के सदस्य देशों के लीडर्स और ऑफिसर्स साल में कई बैठकें करते हैं, जिनमें कई समझौते होते हैं और दुनिया की बड़ी घटनाओं पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते हैं। शुरुआत में G7 का एजेंडा आर्थिक चुनौतियों और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हल निकालना था। बाद में राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। वैश्विक मुद्दों पर G7 के फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उदाहरण के लिए G7 ने 2002 में मलेरिया और एड्स से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड बनाया। 1998 में वित्तीय संकट के दौरान इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को आर्थिक मदद की। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन की मदद करने का फैसला किया। G20 से कैसे अलग है G7 G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और इसके सदस्य देश कोई अंतरराष्ट्रीय कानून पारित नहीं कर सकते। G20 में सबसे बड़ा मुद्दा वर्ल्ड इकोनॉमी होता है, जबकि G7 के लिए राजनीतिक मुद्दे भी अहम होते हैं। 1999 में बने G20 में G7 के देशों के अलावा BRICS के देश भी शामिल हैं। इन देशों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्किये और यूरोपीय संघ शामिल हैं। राजन कुमार के मुताबिक G20 में नई और बढ़ती हुई इकोनॉमी वाले देशों को भी शामिल किया गया है। भले ही G7 और G20 का एजेंडा एक जैसा हो, लेकिन इस समय G20 ज्यादा प्रभावी गुट है। 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी G7 को बहुत आउटडेटेड ग्रुप कहा था।

US-Iran Deal: रविवार को होगी अमेरिका और ईरान के बीच ‘महाडील’ साइन? ट्रंप का बड़ा दावा, कहा- सबके लिए खुल जाएगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

Donald Trump on Iran: अमेरिका और ईरान जंग को लेकर रविवार (14 जून) का दिन अहम हो सकता है। ट्रंप का दावा है कि कल ईरान के साथ डील साइन होने वाली है। उन्होंने कहा कि समझौते पर साइन होते ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सबके लिए खोल दिया जाएगा। साथ ही ट्रंप ने यह भी बताया कि ईरान के साथ होने

Read More

Iran US War: अमेरिका-ईरान के बीच खत्म होगा युद्ध? ट्रंप और ईरानी विदेश मंत्री के सोशल मीडिया मूव ने बढ़ाई हलचल

Iran US War End: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले तीन महीने से अधिक समय से चल रहे युद्ध में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के ताजा बयान के अनुसार, इस संघर्ष को खत्म करने के लिए दोनों देश लगभग समझौते के करीब हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि फाइनल होने तक इ

Read More