ईरान-अमेरिका समझौते के बाद इस हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया है। हालांकि दुनिया अभी भी तेल संकट से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है। एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के करीब चार महीनों में वैश्विक बाजार से 115 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई गायब हो चुकी है। इसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई लगभग बंद रही। इस वजह से दुनिया के स्ट्रेटजिक और कॉमर्शियल ऑयल रिजर्व तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकल चुका है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के निचले स्तर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर जंग खत्म नहीं करते तो हमारे रिजर्व करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते। सीजफायर के बाद तेल सस्ता हुआ अमेरिका-ईरान समझौते की खबर से तेल बाजार ने राहत की सांस ली। युद्ध के दौरान 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब 80 डॉलर से नीचे आ गया है। लेकिन कीमतों में यह गिरावट पूरी कहानी नहीं बताती। रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी तेल की सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं होगी। पहले समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी। इसके बाद खाली टैंकरों की वापसी, तेल उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को पटरी पर लाने में वक्त लगेगा। तेल उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी व्यवस्था को सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। तब तक दुनिया को मौजूदा तेल भंडार के सहारे ही काम चलाना होगा। RBC कैपिटल मार्केट्स की हेलिमा क्रॉफ्ट ने कहा कि बाजार जरूरत से ज्यादा उत्साहित है। उनके मुताबिक, संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल की सप्लाई को सामान्य स्तर पर लाने में अभी बड़ी चुनौतियां बाकी हैं। कई एक्सपर्ट्स को अभी भी राहत की उम्मीद इंफ्रास्ट्रक्चर केपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि नकदी संकट से जूझ रहे OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी ने कहा कि जंग शुरू होने से पहले दुनिया के पास तेल का अच्छा-खासा स्टॉक था। इसी वजह से इतनी बड़ी सप्लाई रुकने के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं हिला। उन्होंने कहा कि अमेरिका में डीजल और पेट्रोल का भंडार जरूर कम हुआ है, लेकिन हालात अभी काबू में हैं। संकट के दौरान रिफाइनरियों को तेल खरीदने के लिए कई जगह फोन करने पड़ रहे थे, लेकिन आने वाले हफ्तों में तस्वीर बदल सकती है। तब तेल बेचने वाले खुद खरीदारों के पास पहुंचेंगे। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। अगर दुनिया रोजाना मांग से 50 लाख बैरल ज्यादा तेल भी पैदा करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में करीब एक साल लग जाएगा।
अमेरिका की टॉप इंटेलिजेंस डायरेक्टर, तुलसी गबार्ड ने सीक्रेट फाइलों का एक बड़ा कलेक्शन अभी-अभी पब्लिक किया है। ये नए डीक्लासिफाइड रिकॉर्ड एक डरावनी कहानी बताते हैं कि कैसे दुनिया को गुमराह किया गया। डॉक्यूमेंट्स में दावा किया गया है कि डॉ. एंथनी फौसी ने पर्दे के पीछे से यह छिपाने
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के रिज पर आज (शुक्रवार) सुबह एक विदेशी टूरिस्ट द्वारा कथित तौर पर अशोभनीय हरकतें और गाली-गलोज करने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिमला पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विदेशी नागरिक को हिरासत में लिया। जानकारी के अनुसार, रिज पर सुबह के समय बड़ी संख्या में टूरिस्ट और लोकल लोग मौजूद थे। इस दौरान एक विदेशी नागरिक ने वहां लोगों के सामने अभद्र व्यवहार किया और अश्लील इशारे किए। बताया जा रहा है कि टूरिस्ट ने गाली-गलोच भी की। विदेशी पर्यटक की हरकतों को देखकर मौके पर लोग एकत्रित हो गए और किसी व्यक्ति ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया। टूरिस्ट से भरे रिज पर हंगामा रिज, शिमला का प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां दिनभर हजारों की संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचते हैं। ऐसे सार्वजनिक स्थान पर विदेशी पर्यटक द्वारा किए गए इस तरह के व्यवहार को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। पुलिस ने वायरल वीडियो पर लिया संज्ञान सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में विदेशी नागरिक रिज पर लोगों के प्रति अभद्र व्यवहार करता और अशोभनीय इशारे करता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद शिमला पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और संबंधित व्यक्ति की पहचान कर कार्रवाई शुरू की। सार्वजनिक स्थल पर उपद्रव मचाने का आरोप शिमला पुलिस के अनुसार, आरोपी विदेशी नागरिक को हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम की धारा 114 के तहत सार्वजनिक उपद्रव और अशोभनीय व्यवहार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सभी नागरिकों और पर्यटकों से अपील की है कि सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादित और जिम्मेदार व्यवहार करें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांति व्यवस्था भंग करने या सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित गतिविधियां करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ईरान की मशहूर सिंगर परस्तू अहमदी और उनके साथ काम करने वाले 8 लोगों को ऑनलाइन कॉन्सर्ट के लिए 74-74 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है। उन पर 2 साल तक देश छोड़ने और 2 साल तक किसी भी आर्टिस्टिक एक्टिविटीज पर रोक लगाई गई है। यह सजा ईरान के कोम प्रांत की अदालत ने यूट्यूब पर पब्लिश किए गए एक कॉन्सर्ट के मामले में सुनाई है। अदालत ने आर्टिस्ट पर अश्लील कंटेट पब्लिश करने और सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह मामला दिसंबर 2024 का है। उस समय 29 साल की परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब पहने यूट्यूब पर एक लाइव कॉन्सर्ट किया था। इस दौरान उन्होंने ईरान का लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘अज खूने जवानाने वतन’ (मातृभूमि के युवाओं के खून से) गाया था। कॉन्सर्ट का वीडियो कुछ ही समय में वायरल हो गया। यूट्यूब पर इसे लाखों लोगों ने देखा। वीडियो जारी होने के बाद ईरानी अधिकारियों ने परस्तू अहमदी और कई संगीतकारों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन वीडियो प्रकाशित करने के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। गाने 4 पुरुषों के साथ स्लीवेस ड्रेस में दिखी परस्तू अहमदी ने 27 मिनट का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह बिना हिजाब और स्लीव ड्रेस पहनकर चार पुरुष संगीतकारों के साथ गाना गाती नजर आ रही थीं। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने इसे काल्पनिक कॉन्सर्ट बताया था। परस्तू के इस प्रोग्राम का वीडियो यूट्यूब पर लाखों बार देखा गया। कई लोगों ने इसे महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी का प्रतीक बताया, जबकि ईरानी अधिकारियों ने इसे कानून के खिलाफ माना। ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक जगहों पर हिजाब पहनना अनिवार्य है। अधिकारियों ने बिना हिजाब पहनकर गाने को नियमों का उल्लंघन माना। पब्लिक में अकेले गाना नहीं गा सकती महिलाएं ईरान के कानून के मुताबिक महिलाएं सार्वजनिक रूप से अकेले गाना नहीं गा सकतीं और न ही बिना हिजाब लोगों के सामने आ सकती हैं। परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब और खुले कंधों के साथ परफॉर्म कर इन लंबे समय से लागू प्रतिबंधों को खुली चुनौती दी। वीडियो वायरल होने के बाद परस्तू अहमदी और उनके साथ मौजूद कुछ सिंगर्स को हिरासत में लिया गया था। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। परस्तू 2022 में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पहली बार चर्चा में आई थीं। तब उन पर हिजाब विरोधी प्रदर्शन के समर्थन में गाने का आरोप लगा था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था और उनके घर की तलाशी भी ली गई थी। मानवाधिकार संगठनों ने नाराजगी जताई अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की एडवोकेसी डायरेक्टर बहार घंदेहरी ने इस सजा की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सिर्फ गाना गाने और बिना हिजाब सार्वजनिक रूप से नजर आने पर 74 कोड़ों की सजा देना दिखाता है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति अब भी नहीं बदली है। घंदेहरी ने कहा कि ईरानी सरकार दुनिया के सामने खुद को उदार और सुधारवादी दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन कलाकारों के खिलाफ ऐसे कदम उसकी असली तस्वीर सामने लाते हैं। उनके मुताबिक, सरकार जो दिखाती है और जमीन पर जो होता है, दोनों में बड़ा फर्क है। मानवाधिकार वकील मोइन खजाएली ने भी फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी कानून में महिलाओं के गाना गाने, संगीत कार्यक्रम करने या संगीत से जुड़ा कंटेंट बनाने को अपराध नहीं माना गया है। ऐसे में इन कामों को अश्लीलता फैलाने जैसा अपराध बताकर सजा देना कानूनी तौर पर भी कमजोर दलील है। खजाएली का कहना है कि कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं या आम लोगों को कोड़े मारने जैसी सजा सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का मामला भी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई मानवाधिकार संगठन कोड़ों की सजा को न्यायिक दंड नहीं, बल्कि यातना और अमानवीय व्यवहार मानते हैं। ईरान में हिजाब को लेकर लंबे समय से विवाद 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान में महिलाओं के लिए हिजाब पहनना कानूनी रूप से जरूरी है। कानून के मुताबिक महिलाओं को पुरुषों की मौजूदगी में सिर ढकना होता है। हालांकि कई महिलाएं इन नियमों का विरोध करती रही हैं। यह मुद्दा 2022 में पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था, जब 22 वर्षीय महसा अमिनी को तेहरान में हिजाब सही तरीके से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। गिरफ्तारी के तीन दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। ईरानी सरकार ने कहा था कि उनकी मौत पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई। लेकिन मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की जांच टीम ने इस दावे पर सवाल उठाए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया था कि अमीनी की मौत ईरानी अधिकारियों की पिटाई के कारण हुई। महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे ईरान में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरीं और हिजाब कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई। हालांकि सरकार ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया। ईरान में पहले भी महिलाओं को सजा मिली
ईरान की मशहूर सिंगर परस्तू अहमदी और उनके साथ काम करने वाले 8 लोगों को ऑनलाइन कॉन्सर्ट के लिए 74-74 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है। उन पर 2 साल तक देश छोड़ने और 2 साल तक किसी भी आर्टिस्टिक एक्टिविटीज पर रोक लगाई गई है। यह सजा ईरान के कोम प्रांत की अदालत ने यूट्यूब पर पब्लिश किए गए एक कॉन्सर्ट के मामले में सुनाई है। अदालत ने आर्टिस्ट पर अश्लील कंटेट पब्लिश करने और सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह मामला दिसंबर 2024 का है। उस समय 29 साल की परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब पहने यूट्यूब पर एक लाइव कॉन्सर्ट किया था। इस दौरान उन्होंने ईरान का लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘अज खूने जवानाने वतन’ (मातृभूमि के युवाओं के खून से) गाया था। इस दौरान वह बिना हिजाब और स्लीवलेस ड्रेस में थीं। कॉन्सर्ट का वीडियो कुछ ही समय में वायरल हो गया। यूट्यूब पर इसे लाखों लोगों ने देखा। वीडियो जारी होने के बाद ईरानी अधिकारियों ने परस्तू अहमदी और कई संगीतकारों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन वीडियो प्रकाशित करने के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। गाने में 4 पुरुषों के साथ स्लीवेस ड्रेस में दिखीं परस्तू अहमदी ने 27 मिनट का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह बिना हिजाब और स्लीव ड्रेस पहनकर चार पुरुष संगीतकारों के साथ गाना गाती नजर आ रही थीं। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने इसे काल्पनिक कॉन्सर्ट बताया था। परस्तू के इस प्रोग्राम का वीडियो यूट्यूब पर लाखों बार देखा गया। कई लोगों ने इसे महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी का प्रतीक बताया, जबकि ईरानी अधिकारियों ने इसे कानून के खिलाफ माना। ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक जगहों पर हिजाब पहनना अनिवार्य है। अधिकारियों ने बिना हिजाब पहनकर गाने को नियमों का उल्लंघन माना। पब्लिक में अकेले गाना नहीं गा सकती ईरानी महिलाएं ईरान में महिलाओं पर कई सामाजिक प्रतिबंध हैं। कानून के अनुसार वे सार्वजनिक जगह पर अकेले गाना नहीं गा सकतीं और बिना हिजाब लोगों के सामने नहीं आ सकतीं। गायिका परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब और स्लीवलेस ड्रेस में परफॉर्म कर इन नियमों का खुलकर विरोध किया। परस्तू पहली बार 2022 में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान चर्चा में आई थीं। उन पर इन प्रदर्शनों के समर्थन में गाना गाने का आरोप लगा था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उनसे पूछताछ की और उनके घर की तलाशी भी ली थी। मानवाधिकार संगठनों ने नाराजगी जताई अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की एडवोकेसी डायरेक्टर बहार घंदेहरी ने इस सजा की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सिर्फ गाना गाने और बिना हिजाब सार्वजनिक रूप से नजर आने पर 74 कोड़ों की सजा देना दिखाता है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति अब भी नहीं बदली है। मानवाधिकार वकील मोइन खजाएली ने भी फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी कानून में महिलाओं के गाना गाने, संगीत कार्यक्रम करने या संगीत से जुड़ा कंटेंट बनाने को अपराध नहीं माना गया है। ऐसे में इन कामों को अश्लीलता फैलाने जैसा अपराध बताकर सजा देना कानूनी तौर पर भी कमजोर दलील है। ईरान में हिजाब को लेकर लंबे समय से विवाद 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान में महिलाओं के लिए हिजाब पहनना कानूनी रूप से जरूरी है। कानून के मुताबिक महिलाओं को पुरुषों की मौजूदगी में सिर ढकना होता है। हालांकि कई महिलाएं इन नियमों का विरोध करती रही हैं। यह मुद्दा 2022 में पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था, जब 22 साल की महसा अमिनी को तेहरान में हिजाब सही तरीके से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। गिरफ्तारी के तीन दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। ईरानी सरकार ने कहा था कि उनकी मौत पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई। लेकिन मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की जांच टीम ने इस दावे पर सवाल उठाए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया था कि अमीनी की मौत ईरानी अधिकारियों की पिटाई के कारण हुई। महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे ईरान में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरीं और हिजाब कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई। हालांकि सरकार ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया। ईरान में पहले भी महिलाओं को सजा मिली ————————————— ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ईरान पीस डील का सबसे बड़ा चेहरा बने जेडी वेंस:जंग रुकी तो अगले राष्ट्रपति बनने के सबसे बड़े दावेदार, फेल हुई तो करियर तबाह अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार रात ऐतिहासिक और विवादित पीस डील हुई। इसके बाद से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इसका सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक वेंस लगातार फ्रंट फुट पर आकर इस फैसले का बचाव कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें
अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार रात ऐतिहासिक और विवादित पीस डील हुई। इसके बाद से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इसका सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक वेंस लगातार फ्रंटफुट पर आकर इस फैसले का बचाव कर रहे हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग से लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू तक, वेंस इस डील को डिफेंड करने की पूरी कमान संभाले हुए हैं। जब इस समझौते को लेकर इजराइल और अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के अंदर से ही तीखी आलोचना शुरू हुई, तो वेंस ने बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि क्या राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन्हें अमेरिका-ईरान समझौते के लिए ‘बलि का बकरा’ बना दिया है। इस पर वेंस ने कहा कि उन्हें लगता है कि ट्रम्प मजाक कर रहे थे। दरअसल, एक दिन पहले ट्रम्प ने कहा था कि अगर यह समझौता विफल हो जाता है तो वह इसका दोष वेंस पर डाल सकते हैं। हाल के महीनों में वह कई बार ऐसा बयान दे चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर ईरान के साथ हुआ समझौता कामयाब होता है तो वे 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के सबसे बड़े दावेदार हो सकते हैं। ईरान के साथ बातचीत का जिम्मा वेंस के कंधे पर व्हाइट हाउस के मुताबिक, जेडी वेंस राष्ट्रपति ट्रम्प की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सबसे भरोसेमंद सदस्य बनकर उभरे हैं। ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर के साथ मिलकर वेंस ने इस डील की बैक-चैनल बातचीत की अगुवाई की है। स्विट्जरलैंड में होने वाली आगामी 60 दिनों की औपचारिक तकनीकी वार्ताओं की देखरेख का जिम्मा भी वेंस के कंधों पर है। चूंकि ट्रम्प ने इस पूरी बातचीत की प्रक्रिया में वेंस को प्रमुख भूमिका दी है, इसलिए इस समझौते की सफलता या विफलता का सबसे बड़ा राजनीतिक असर भी उन्हीं पर पड़ सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह शांति समझौता सफल रहता है और मिडिल ईस्ट में युद्ध रुक जाता है, तो साल 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जेडी वेंस खुद को एक कुशल डिप्लोमैट और युद्ध खत्म कराने वाले ‘ग्लोबल लीडर’ के रूप में पेश कर सकेंगे। वेंस की किताब की अमेरिकी मीडिया खूब चर्चा हो रही 16 जून को वेंस की किताब ‘कम्यूनियन: फाइंडिंग माई वे बैक टू फेथ’ रिलीज हुई है। राजनीतिक गलियारों और अमेरिकी मीडिया में इस किताब की टाइमिंग और इसके कंटेंट को सीधे तौर पर साल 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनकी संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिकी राजनीति के इतिहासकार इस किताब की तुलना 1975 में जिमी कार्टर की लिखी गई किताब ‘व्हाई नॉट द बेस्ट’ से कर रहे हैं। कार्टर ने राष्ट्रपति चुनाव जीतने से ठीक पहले अपनी आस्था और धर्म पर किताब लिखी थी, जिसने अमेरिकी जनता, विशेषकर धार्मिक झुकाव वाले वोटर्स के बीच उन्हें एक ‘भरोसेमंद चेहरा’ बना दिया था। जेडी वेंस भी इसी रास्ते पर चल रहे हैं। अपनी राजनीतिक उपलब्धियों के बजाय अपनी आस्था और धर्म (ईसाई धर्म और कैथोलिक बनने का सफर) पर किताब लिखकर वे खुद को 2028 के चुनाव से पहले देश के सामने एक बेहद गंभीर, ईमानदार और पारिवारिक व्यक्ति के रूप में पेश कर रहे हैं। वेंस 2019 में नास्तिकता छोड़कर कैथोलिक ईसाई बने थे। इस किताब के जरिए वे रिपब्लिकन पार्टी (GOP) के पारंपरिक और धार्मिक आधार को मजबूत कर रहे हैं। 2028 के प्राइमरी चुनावों (पार्टी के भीतर उम्मीदवार चुनने की रेस) में यह धार्मिक कार्ड उन्हें अन्य रिपब्लिकन दावेदारों (जैसे मार्को रुबियो) के मुकाबले मजबूत बढ़त दिला सकता है। मार्को रुबियो 2028 के राष्ट्रपति पद के दावेदार माने जाते हैं विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जिन्हें 2028 के रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद की दौड़ का संभावित दावेदार माना जाता है। अमेरिका ने जनवरी में किसी बड़े सैन्य खर्च या अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में डाले वेनेजुएला के तानाशाह निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने में कामयाबी हासिल की थी। उनकी निगरानी में ही इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था ऐसे में इस पूरे मामले का क्रेडिट मार्को रूबियो को मिला। इस घटना ने उन्हें रिपब्लिकन वोटर्स के बीच एक ‘एक्शन-ओरिएंटेड’ लीडर बना दिया। मार्को रुबियो की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) यह है कि वे पार्टी के भीतर दो विरोधी विचारधाराओं (पारंपरिक रिपब्लिकन वोटर्स और ट्रम्प की अमेरिका फर्स्ट समर्थक वोटर्स) को एक साथ जोड़ सकते हैं। ज्यादातर सर्वे में वेंस को बढ़त, रूबियो कड़ी टक्कर दे रहे दुनिया के सबसे बड़े प्रेडिक्शन मार्केट पॉलिमार्केट के मुताबिक रूबियो सर्वे में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। साल 2026 की शुरुआत में रुबियो सिंगल डिजिट पर थे। जून 2026 की ताजा ट्रेडिंग के मुताबिक, रिपब्लिकन उम्मीदवार बनने की रेस में मार्को रुबियो के शेयर बढ़कर 30% के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए हैं। हालांकि इस प्लेटफॉर्म पर वेंस अभी भी 33% के साथ मामूली बढ़त बनाए हुए हैं। वही, प्रेडिक्शन मार्केट कालशी के मुताबिक मार्को रुबियो 18% की संभावना के साथ पहले स्थान पर आ गए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 17% के साथ दूसरे और डेमोक्रेट गेविन न्यूसम 16% के साथ तीसरे स्थान पर खिसक चुके हैं। एक तीसरी सर्वे एजेंसी एमरसन कॉलेज पोल के मुताबिक मई 2026 में वेंस और रूबियो दोनों ही 35% के साथ बराबरी पर थे। जबकि फरवरी में यह आंकड़ा वेंस (52%) और रूबियो (20%) था। वेंस को बड़े राजनीतिक नुकसान की आशंका कुछ रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि ईरान से जुड़े इस समझौते की जिम्मेदारी वेंस के लिए एक ऐसा काम बन गई है, जिसमें मेहनत तो ज्यादा है लेकिन राजनीतिक फायदा कम। नाम न बताने की शर्त पर एक सूत्र ने बीबीसी से कहा, जेडी वेंस पर जिम्मेदारी डाल देना ट्रम्प की पुरानी आदत रही है। वहीं, दूसरे सूत्र ने कहा, अगर कोई विवाद खड़ा हो जाए तो जेडी वेंस को आगे कर देना ट्रम्प के लिए कोई नई बात नहीं है। अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ईरान के साथ हुआ यह ऐतिहासिक समझौता जेडी वेंस के राजनीतिक करियर के लिए एक दोधारी तलवार बन चुका है। अखबार के मुताबिक वेंस इस समय भले ही व्हाइट हाउस के सबसे शक्तिशाली संकटमोचक दिख रहे हों, लेकिन वे वास्तव में एक राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस चुके हैं। 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की रेस में खुद को बनाए रखने के लिए वेंस को हर हाल में अगले 60 दिनों (स्विट्जरलैंड वार्ता) में इस ईरान डील को बिना किसी विवाद के सफल बनाना ही होगा, वरना उनका ‘प्रेसिडेंशियल ड्रीम’ यहीं दफन हो सकता है। —————————— वेंस से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के बाद कौन संभालेगा अमेरिका:पहले उपराष्ट्रपति वेंस आगे थे, वेनेजुएला पर हमले के बाद विदेश मंत्री रूबियो का रुतबा बढ़ा अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अगवा कर अमेरिका लेकर आ गए। यह मिलिट्री एक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी से हुआ। अमेरिकी मीडिया हाउस पॉलिटिको के मुताबिक ट्रम्प ने वेनेजुएला की जिम्मेदारी पूरी तरह मार्को रूबियो को सौंप दी है। इस पूरे ऑपरेशन में रूबियो की अहम भूमिका के बाद उनकी अगले अमेरिकी राष्ट्रपति बनने की संभावना तेजी से बढ़ी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Mojtaba Khamenei on US-Iran Deal: अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रही जंग को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने MoU पर औपचारिक रूप से साइन किए। अब इस डील पर ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की पहली प्रतिक्रिया सामने
पाकिस्तान ने चीन में निर्मित अपनी नई हैंगोर क्लास पनडुब्बी को शामिल किया है। 1971 के युद्ध और बांग्लादेश के बनने के बाद से यह पहली बार है जब पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में अपनी नौसैनिक उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास कर रहा है। चीन के साथ पनडुब्बी सौदे पर हस्ताक्षर करने के एक दशक से ज्यादा समय बाद पाकिस्तान को पहली पनडुब्बी मिली है। यह सौदा पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा अधिग्रहण माना जाता है। अप्रैल 2015 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान पाकिस्तान और चीन के बीच 8 हैंगोर-क्लास पनडुब्बियों की खरीद का समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार, इनमें से 4 पनडुब्बियां चीन में बननी थीं और 2022-23 तक पाकिस्तान को सौंप दी जानी थीं। बाकी 4 पनडुब्बियों को कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (KSEW) में 2028 तक असेंबल किया जाना था। हालांकि, 2026 तक पाकिस्तान नौसेना में सिर्फ एक पनडुब्बी ही शामिल हो पाई है। चीन में बनने वाली बाकी तीन पनडुब्बियां- पीएनएस गाजी (PNS Ghazi), पीएनएस शुशुक (PNS Shushuk) और पीएनएस मंग्रो (PNS Mangro) लॉन्च हो चुकी हैं और फिलहाल समुद्री परीक्षण (सी ट्रायल) से गुजर रही हैं। यानी चीन में बनी पहली चार पनडुब्बियों को तय समय सीमा तक पाकिस्तान को सौंपने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि सभी 8 पनडुब्बियां 2028 से 2030 के बीच पाकिस्तान को मिलेंगी। पनडुब्बी निर्माण के लिए कराची शिपयार्ड में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। इसके तहत नया शिप लिफ्ट और ट्रांसफर सिस्टम भी लगाया गया है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि किसी नई पनडुब्बी श्रेणी का निर्माण बेहद जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया होती है। पाकिस्तान इससे पहले अगोस्ता 90बी (Agosta 90B) श्रेणी की पनडुब्बी PNS Hamza का निर्माण कर चुका है, जिसे 2008 में नौसेना में शामिल किया गया था। लेकिन हैंगोर-क्लास परियोजना आकार, लागत और तकनीक तीनों मामलों में उससे कहीं बड़ी है। हैंगोर-क्लास पनडुब्बी कार्यक्रम की अनुमानित लागत 4 से 5 अरब डॉलर (करीब 34 से 43 हजार करोड़ रुपए) है। यही वजह है कि इसे पाकिस्तान के इतिहास का सबसे महंगा नौसैनिक कार्यक्रम माना जाता है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ हुए समझौते की आलोचना कर रहे इजराइली नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस डील का विरोध कर रहे हैं, उन्हें जमीनी हकीकत को समझना चाहिए। पत्रकारों से बातचीत में वेंस ने कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार का हिस्सा होते, तो दुनिया में अपने सबसे बड़े और ताकतवर सहयोगी अमेरिका पर इस तरह सवाल नहीं उठाते। वेंस ने कहा, “इस समय पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रम्प ही ऐसे नेता हैं जो इजराइल के प्रति सबसे ज्यादा सहानुभूति रखते हैं।” उन्होंने इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर और वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच की आलोचना करते हुए कहा कि सिर्फ सैन्य कार्रवाई से हर समस्या का समाधान नहीं निकाला जा सकता। वेंस ने सवाल उठाया, “आपके पास दूसरा विकल्प क्या है? इजराइल सिर्फ 90 लाख आबादी वाला देश है। हर समस्या का हल लोगों को मारकर नहीं निकाला जा सकता।” पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान-अमेरिका पीस डील लागू: अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। 2. अमेरिका-ईरान प्रतिनिधि आज स्विट्जरलैंड में मिलेंगे: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक वार्ता शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में होगी। 3. इजराइल बोला- लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे: इजराइली सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में अपनी तैनाती का नया नक्शा जारी किया है और साफ किया है कि फिलहाल वहां से सैनिक नहीं हटाए जाएंगे। 4. होर्मुज से जहाजों की आवाजाही तेज: पीस डील पर साइन होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही तेज हो गई है। सऊदी अरब के झंडे वाले तीन बड़े तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं। 5. लेबनान में इजराइली हमलों में 3 लोगों की मौत: पीस डील लागू होने के बाद भी इजराइल ने साउथ लेबनान में हमला किया जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। 2 मार्च से अब तक इन हमलों में 3,900 लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिका-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिकी उपराष्ट्रति जेडी वेंस ने इजराइल की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हुई डील की आलोचना करने वालों को हकीकत समझना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर वे नेतन्याहू सरकार में होते तो दुनिया में अपने सबसे ताकतवर सहयोगी अमेरिका पर सवाल नहीं उठाते। वेंस ने कहा- इस समय पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रम्प ही ऐसे राष्ट्र प्रमुख हैं जो इजराइल के लिए सहानुभूति रखते हैं। उन्होंने ट्रम्प की आलोचना करने वाले इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर और वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच की आलोचना की। उन्होंने नाम लेकर उनसे पूछा कि आपके पास ऑप्शन क्या है? इजराइल सिर्फ 90 लाख की आबादी वाला देश है। हर समस्या का हल लोगों को मार कर नहीं किया जा सकता। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान-अमेरिका पीस डील लागू: अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। 2. अमेरिका-ईरान प्रतिनिधि आज स्विट्जरलैंड में मिलेंगे: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक वार्ता शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में होगी। 3. इजराइल बोला- लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे: इजराइली सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में अपनी तैनाती का नया नक्शा जारी किया है और साफ किया है कि फिलहाल वहां से सैनिक नहीं हटाए जाएंगे। 4. होर्मुज से जहाजों की आवाजाही तेज: पीस डील पर साइन होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही तेज हो गई है। सऊदी अरब के झंडे वाले तीन बड़े तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं। 5. लेबनान में इजराइली हमलों में 3 लोगों की मौत: पीस डील लागू होने के बाद भी इजराइल ने साउथ लेबनान में हमला किया जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। 2 मार्च से अब तक इन हमलों में 3,900 लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिका-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

