जसपाल राणा के बाद उनकी मां श्यामा देवी का निधन, खेल जगत में शोक

भारतीय निशानेबाज़ी जगत में लगातार दो बड़ी दुखद घटनाओं ने सभी को झकझोर दिया है। दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा के निधन के कुछ ही दिनों बाद उनकी माता श्यामा देवी राणा (78) का भी दिल्ली के आर्मी अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थीं और उनकी हालत गंभीर (critical condition) बताई जा रही थी।

 

परिवार के अनुसार, बेटे के अचानक निधन के बाद श्यामा देवी पूरी तरह टूट गई थीं। 12 जून को जसपाल राणा के निधन के बाद से ही उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार 16 जून को उन्होंने अंतिम सांस ली।

 

जसपाल राणा का निधन दिल्ली के मैक्स अस्पताल में कार्डियक जटिलताओं के कारण हुआ था। वे हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप से लौटे थे, जहां वे भारतीय पिस्टल टीम के हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में काम कर रहे थे। भारत की टीम ने उनके मार्गदर्शन में शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 मेडल (2 गोल्ड और 2 सिल्वर) जीते थे।

 

खिलाड़ी के रूप में जसपाल राणा भारत के सबसे सफल निशानेबाज़ों में गिने जाते हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में 1994 से 2006 के बीच 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल थे। इसके अलावा उन्होंने एशियन गेम्स में भी भारत के लिए 8 पदक जीते और देश के सबसे सफल शूटरों में अपनी पहचान बनाई।

 

कोच के रूप में भी उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को निखारा, जिनमें ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर भी शामिल हैं।

 

उनके निधन के बाद पूरे देश के खेल जगत में शोक की लहर फैल गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई खेल हस्तियों और नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

 

राणा परिवार, जिसमें उनकी पत्नी रीना राणा, बेटी देवांधी, बेटा युवराज और अन्य सदस्य शामिल हैं, पहले ही इस बड़ी क्षति से उबर नहीं पाया था कि अब माता के निधन ने दुख को और गहरा कर दिया है। पूरे शूटिंग समुदाय में शोक का माहौल है।

कॉमनवेल्थ गेम्स में जसपाल राणा ने अपने करियर का सबसे शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1994, 1998, 2002 और 2006 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कुल 15 पदक अपने नाम किए, जिनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल रहे।

 

एशियन गेम्स में भी उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा। 1994, 1998 और 2006 संस्करणों में उन्होंने भारत के लिए कुल 8 पदक जीते। अपनी इन उपलब्धियों के दम पर वह भारत के सबसे सफल और सम्मानित निशानेबाज़ों में शामिल हुए।

लियोनेल मेस्सी की फिटनेस पर सवाल, गत विजेता अर्जेंटीना कल उतरेगी मैदान पर

अर्जेंटीना 17 जून को अल्जीरिया के खिलाफ अपने वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत करेगा। मौजूदा चैंपियन शानदार जीत के साथ अपने खिताब का बचाव शुरू करना चाहेंगे। 2022 में ट्रॉफी जीतने के बाद, लियोनेल मेसी और उनकी टीम एक बार फिर खिताब की प्रबल दावेदारों में शामिल होगी। वहीं, अल्जीरिया भी अच्छे नतीजों के बाद आत्मविश्वास के साथ टूर्नामेंट में उतर रहा है।

अनुभवी और युवा अटैकिंग टैलेंट वाली अपनी प्रतिभाशाली टीम के साथ, वे मौजूदा चैंपियन को चुनौती देने और शुरुआत में ही अपनी छाप छोड़ने की कोशिश करेंगे। इस बीच अर्जेंटीना के डिफेंडर निकोलस ओटामेंडी ने चेतावनी दी है कि मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन अल्जीरिया के खिलाफ अपने खिताब के बचाव की शुरुआत करते समय कतर 2022 के बुरे सपने को दोहराने का जोखिम नहीं उठा सकती, क्योंकि “हर कोई हमें हराना चाहेगा।”

सोमवार को मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, 38 वर्षीय सेंटर-बैक – जो अपना चौथा वर्ल्ड कप खेल रहे हैं – ने कहा कि चार साल पहले अर्जेंटीना की शुरुआती चौंकाने वाली हार की याद अभी भी एक बड़ा सबक है।
ओटामेंडी ने कहा, “मुझे लगता है कि मैं हर दिन और अपने साथियों के साथ समय का आनंद लेता हूं, और यह एक ऐसा टूर्नामेंट है जिसका मैं बहुत आनंद लेता हूं।अपने चौथे वर्ल्ड कप में होना, सच कहूं तो यहां होने और अपने देश का प्रतिनिधित्व करने से बेहतर कुछ नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं यहां होने और मुकाबला करने, खिताब का बचाव करने के मौके के लिए बहुत खुश हूं, और हम अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगे। हम इसके लिए तैयारी कर रहे हैं।” ओटामेंडी ने कहा कि वर्ल्ड और कॉन्टिनेंटल चैंपियन के तौर पर टूर्नामेंट में आने वाली अर्जेंटीना ने अमेरिका में इकट्ठा होने से काफी पहले ही अपनी तैयारी शुरू कर दी थी, साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मैच शुरू होने के बाद पसंदीदा टीम माने जाने का कोई खास मतलब नहीं रह जाता।

उन्होंने कहा, “हम ब्यूनस आयर्स से ही तैयारी कर रहे हैं, और नए खिलाड़ियों के साथ यहां आकर हम अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहे हैं क्योंकि हम जानते हैं कि हम चैंपियन हैं। हर कोई हमें हराना चाहेगा।इसलिए हमें ऐसी तैयारी करनी होगी जो अलग न हो। हमें अपना सब कुछ देना होगा और मुझे लगता है कि माहौल अच्छा है।”

इस अनुभवी खिलाड़ी ने पिछले वर्ल्ड कप की शुरुआत में सऊदी अरब से अर्जेंटीना की 2-1 से हुई हार का भी जिक्र किया, जिसने उनकी लगातार 36 मैचों की अजेय लय को तोड़ दिया था। ओटामेंडी ने कहा, “जहां तक प्रतिद्वंद्वी की बात है, हमारे सामने कतर में हुई शुरुआत का उदाहरण है। हम जानते हैं कि कोई भी टीम आपके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। हमें अपना खेल खेलना है, हमारे पास अच्छे खिलाड़ी हैं।” अर्जेंटीना मंगलवार को कैनसस सिटी स्टेडियम में अल्जीरिया का सामना करेगा, जिसके बाद वह डलास में ग्रुप जे में ऑस्ट्रिया और जॉर्डन से खेलेगा।

Visa के कारण मां नहीं थीं साथ, रो पड़ा 40 साल का गोलकीपर, 90 मिनट में 50 हजार से 50 लाख पहुंचे Followers

Vozinha Cape Verde : FIFA World Cup 2026 में बड़े उलटफेर और रोमांचक मुकाबले तो देखने को मिल रहे हैं, लेकिन केप वर्डे (Cape Verde) के गोलकीपर वोजिन्हा (Vozinha) की कहानी ने दुनियाभर के फुटबॉल फैंस का दिल छू लिया है। Spain जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ 0-0 का ऐतिहासिक ड्रॉ कराने वाले 40 वर्षीय गोलकीपर रातोंरात इंटरनेट सेंसेशन बन गए। मैच शुरू होने से पहले जिन्हें मुश्किल से कुछ हजार लोग जानते थे, वही खिलाड़ी कुछ घंटों के अंदर दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया।

 

 स्पेन के 27 हमले, लेकिन नहीं टूटी वोजिन्हा की दीवार

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अटलांटा में खेले गए मुकाबले में स्पेन ने लगातार आक्रमण किए। बॉल पजेशन से लेकर गोल पर शॉट्स तक लगभग हर आंकड़े में स्पेन आगे था। स्टार खिलाड़ियों से भरी टीम बार-बार गोल करने के करीब पहुंची, लेकिन हर बार सामने वोजिन्हा खड़े थे। उन्होंने पूरे मैच में 7 शानदार सेव किए और स्पेन को गोल करने का एक भी मौका नहीं दिया। युवा स्टार Lamine Yamal के मैदान पर आने के बाद भी केप वर्डे का गोलपोस्ट सुरक्षित रहा। आखिरकार मुकाबला 0-0 पर समाप्त हुआ और यह नतीजा वर्ल्ड कप इतिहास की सबसे बड़ी Underdog कहानियों में शामिल हो गया।

 मैच के बाद छलक पड़े आंसू, मां स्टेडियम तक नहीं पहुंच सकीं

 

जैसे ही अंतिम सीटी बजी, वोजिन्हा भावुक हो गए। मैदान पर ही उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े और साथी खिलाड़ियों ने उन्हें गले लगा लिया। दरअसल, यह सिर्फ एक शानदार प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक ऐसा सपना था जिसका इंतजार उन्होंने करीब चार दशक तक किया था।

मैच के बाद बातचीत में वोजिन्हा ने बताया कि वह चाहते थे कि उनकी मां इस ऐतिहासिक पल की गवाह बनें, लेकिन VISA और आर्थिक कारणों की वजह से वह अमेरिका नहीं पहुंच सकीं। टिकट बुक थे, तैयारी भी पूरी थी, लेकिन समय पर वीज़ा नहीं मिल पाया। यही बात उन्हें सबसे ज्यादा भावुक कर रही थी।

 

दादी-दादा ने पाला, वहीं से मिला 'वोजिन्हा' नाम

 

बहुत कम लोग जानते हैं कि वोजिन्हा उनका असली नाम नहीं है। उनका पूरा नाम जोसिमार जोसे एवोरा डायस (Josimar José Évora Dias) है। बचपन में उनके पिता सेना में थे और मां काम में व्यस्त रहती थीं, इसलिए उनकी परवरिश मुख्य रूप से दादा-दादी ने की।

 

'वोजिन्हा' पुर्तगाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है “छोटी दादी” या “दादी मां”। बचपन में साथी बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे कि हारने या रोने के बाद वह अपने दादा-दादी के पास शिकायत करने चले जाते हैं। इसी वजह से उन्हें 'वोजिन्हा' कहकर बुलाया जाने लगा। शुरुआत में उन्हें यह नाम पसंद नहीं था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे अपनी पहचान बना लिया। आज यही नाम दुनिया भर में उनकी पहचान बन चुका है।

 

25 साल की उम्र में बने प्रोफेशनल, 40 में मिला वर्ल्ड कप का मंच

 

जहां अधिकांश फुटबॉल खिलाड़ी किशोरावस्था में ही प्रोफेशनल फुटबॉल खेलने लगते हैं, वहीं वोजिन्हा ने 25 साल की उम्र में अपना प्रोफेशनल करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने अंगोला, मोल्दोवा, साइप्रस, स्लोवाकिया और पुर्तगाल के क्लबों में खेलते हुए अपना सफर जारी रखा। 2012 में राष्ट्रीय टीम से जुड़े और कई बार रिटायरमेंट का भी विचार आया, लेकिन वर्ल्ड कप खेलने का सपना उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

 

40 साल की उम्र में उन्होंने आखिरकार वर्ल्ड कप में डेब्यू किया और इतिहास रच दिया। वह टूर्नामेंट में डेब्यू करने वाले सबसे उम्रदराज गोलकीपरों में शामिल हो गए।

 

 कुछ घंटों में 50 हजार से पहुंच गए 50 लाख followers

 

स्पेन के खिलाफ मैच से पहले वोजिन्हा के Instagram पर करीब 50 हजार फॉलोअर्स थे। लेकिन जैसे-जैसे दुनिया ने उनकी शानदार गोलकीपिंग देखी, सोशल मीडिया पर उन्हें फॉलो करने वालों की बाढ़ आ गई। कुछ ही घंटों में उनकी फॉलोअर संख्या लाखों में पहुंच गई और बाद में 50 लाख के करीब जा पहुंची।

 

फुटबॉल स्टार्स, Experts और फैंस ने उनकी जमकर तारीफ की। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें “केप वर्डे की चट्टान” और “वर्ल्ड कप का नया हीरो” कहने लगे।

 

 सपने पूरे होने में देर हो सकती है, लेकिन नामुमकिन नहीं

 

वोजिन्हा की कहानी सिर्फ फुटबॉल की नहीं, बल्कि धैर्य, संघर्ष और सपनों की भी कहानी है। जिस खिलाड़ी ने 40 साल की उम्र में पहली बार वर्ल्ड कप खेला, उसने दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक को रोककर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। शायद यही वजह है कि स्पेन के खिलाफ मिला यह ड्रॉ केप वर्डे के लिए किसी जीत से कम नहीं माना जा रहा।

छोटी टीमों ने बड़ी टीमों को जीतने से रोका, 1 दिन में 4 मुकाबले हुए ड्रॉ

FIFA World Cup

ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि फीफा विश्वकप 2026  में एक ही दिन में 4 ड्रॉ मुकाबले खेले जाएं। लेकिन सोमवार को ऐसा हुआ गोलरहित ड्रॉ से लेकर 2-2 की बराबरी वाले मैच भी देखने को मिले। इन मुकाबले में खास बात यह रही कि बड़ी टीमें छोटी टीमों के खिलाफ निर्णायक जीत अर्जित करने में विफल रही।

विश्वकप डेब्यू पर केप वर्डे ने विश्वविजेता स्पेन को गोलरहित ड्रॉ पर रोका

खिलाड़ियों के शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन की बदौलत अफ्रीकी देश केप वर्डे ने मौजूदा यूरोपीय चैंपियन और 2026 विश्व कप के प्रबल दावेदार स्पेन के खिलाफ मुकाबला गोल रहित ड्रॉ खेला।

मुकाबले की शुरुआत से ही की मजबूत रणनीति अपनाते हुए अफ्रीकी देश केप वर्डे ने लामिन-यामल के बिना खेल रही स्पेन को इस हद तक बेअसर कर दिया कि स्पेन के सेंटर फॉरवर्ड मिकेल ओयार्ज़ाबल को शुरुआती आधे घंटे तक गेंद को छूने का भी मौका नहीं मिला। यह एक रिकार्ड है (1966 विश्व कप के बाद से जब से ये रिकॉर्ड रखे जा रहे हैं, तब से किसी भी खिलाड़ी के बिना गेंद को छुए रहने का यह सबसे लंबा समय है)।

दूसरे हाफ में जब यामल मैदान में आए, तो स्पेन थोड़ा अधिक दृढ़ और आक्रामक नजर आया, लेकिन 40 वर्षीय गोलकीपर वोजिन्हा और उनकी रक्षात्मक पंक्ति को भेदना नामुमकिन था। स्पेन के पास 74 प्रतिशत गेंद का कब्ज़ा था, उसने उल्लेखनीय रूप से 27 शॉट लगाए लेकिन केप वर्डे के किले को नहीं भेद पाये। अंतत: मुकाबला गोल राहित ड्रा पर समाप्त हुआ।

मिस्र बनाम बेल्जियम मुकाबला 1-1 से रहा ड्रॉ

फीफा विश्वकप 2026 के ग्रुप जी में मिस्र और बेल्जियम के बीच खेला गया रोमांचक मुकाबला 1-1 से ड्रॉ पर समाप्त हुआ और दोनों टीमों ने अंक बांटे।सिएटल स्टेडियम में खेले गये मुकाबले में मिस्र ने मैच की शुरुआत में ही बेहतर प्रदर्शन किया और मोहम्मद सलाह के पास पर इमाम अशूर ने बॉक्स के बाहर से जोरदार शॉट लगाकर थिबाउट कर्टोइस को पछाड़ते हुए बढ़त बना ली। यह एक शानदार गोल था। अशूर की लगातार आक्रामक दौड़ और सलाह की चतुराई, जिन्होंने सेंटर में नंबर 10 की भूमिका निभाते हुए बेल्जियम के डिफेंस के खिलाफ लगातार खाली जगह का फायदा उठाया, जो उन्हें रोकने के लिए संघर्ष कर रहा था।

बेल्जियम को भी मौके मिले, जिनमें केविन डी ब्रुइन का शानदार फ्रीकिक भी शामिल था, जो पोस्ट से टकराया। लेकिन रिकॉर्ड गोल करने वाले रोमेलु लुकाकू के मैदान में आने से ही मैच का रुख बदला। मैदान में आते ही 22 सेकंड के भीतर ही यह दमदार स्ट्राइकर बॉक्स में घुस गया और उसकी मौजूदगी से मोहम्मद हानी को इतनी उलझन हुई कि थॉमस म्यूनीर के निचले क्रॉस को उन्होंने अपने ही गोल में डाल दिया। हानी के लिए यह एक दुर्भाग्यपूर्ण क्षण था।

बेल्जियम ने जीत के लिए पूरी ताकत झोक दी, लेकिन मजबूत रक्षा पंक्ति और मुस्तफा शोबेर के शानदार बचाव के दम पर मिस्र ने एक अंक हासिल कर लिया। अफ्रीकी दिग्गज टीम को अभी तक विश्व कप में एक भी जीत नहीं मिली है।

सऊदी अरब बनाम उरुग्वे मुकाबला 1-1 से रहा ड्रा

सऊदी अरब और उरुग्वे के बीच खेला गया फीफा विश्वकप 2026 ग्रुप एच का मुकाबला दोनों ओर से आक्रामक प्रदर्शन के बावजूद 1-1 से ड्रॉ पर समाप्त हुआ। इसी के साथ ग्रुप एच में सभी टीमें एक-एक अंक पर बराबरी पर आ गईं। यहां खेले गये मुकाबले अब्दुलेलह अल अमरी ने अपनी टीम के लिए पहला गोल किया जब फर्नांडो मुस्लेरा द्वारा छोड़ी गई लंबी दूरी की शॉट को रिबाउंड पर सबसे पहले पहुंचकर उन्होंने गोल दागा।

पहले हाफ में उरुग्वे 1-0 से पीछे था, लेकिन दूसरे हाफ में उसने जोरदार शुरुआत की। डार्विन नुनेज को बाहर करने के बाद, मार्सेलो बिएल्सा ने मध्यांतर में एक बड़ा संदेश दिया और उनकी टीम ने वैसा ही प्रदर्शन किया जैसा कि वह अपनी टीम के लिए प्रसिद्ध हैं।

उन्होंने अंत तक गोल पर 27 शॉट लगाए (जिनमें से 20 दूसरे हाफ में आए) और मोहम्मद अल ओवैस के शानदार बचाव की बदौलत ही वे सिर्फ एक गोल तक सीमित रह सके। वह गोल तब हुआ जब मैक्सी अरौजो ने बॉक्स के अंदर एक ढीली गेंद पर कब्जा जमाया और मुश्किल कोण से ओवैस को चकमा देते हुए गोल दाग दिया।

ईरान बनाम न्यूजीलैंड मैच 2-2 से ड्रा रहा

ईरान ने अपने 2026 फीफा विश्व कप अभियान की शुरुआत न्यूजीलैंड के खिलाफ एक रोमांचक और कांटे की टक्कर वाले मुकाबले में 2-2 ड्रॉ के साथ की, इस दौरान न्यूजीलैंड की टीम ने भी शानदार प्रदर्शन किया। लॉस एंजिल्स के सोफी स्टेडियम में खेले गये मुकाबले में एलिजा जस्ट ने दो बार न्यूजीलैंड को बढ़त दिलाई, लेकिन ईरान के खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए हर बार शानदार वापसी की।

रामिन रेजाइयन ने गोल किया और मोहम्मद मोहेबी को असिस्ट किया, जिससे ईरान ने लॉस एंजिल्स में जोरदार समर्थन के बीच आक्रामक खेल दिखाया। मैच के चारों गोल बेहतरीन तालमेल से बने मूव्स के दम पर आए और इस दौरान दोनों टीमों आक्रामक फुटबॉल का शानदार प्रदर्शन किया।ईरान के लिए रेजाईयन 33वें, मोहेबी ने 64वें मिनट में गोल किये। वहीं न्यूजीलैड की ओर से एलिजा जस्ट सातवें और 54 वें मिनट में गोल दागे।

अमेरिका से वापस भेजे गए अफ्रीकी रेफरी अब्दुलकादिर को मिलेगी पूरी पगार

अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (FIFA) ने कहा है कि वीजा संबंधी समस्याओं के कारण अमेरिका में प्रवेश नहीं कर सके सोमालिया के मैच रेफरी उमर अब्दुलकादिर आर्टन को उनकी भूमिका के लिए भुगतान किया जायेगा।
अफ्रीका के अग्रणी रेफरी के रूप में पहचाने जाने वाले आर्टन को पिछले सप्ताह मियामी पहुंचने पर वीजा संबंधी समस्याओं के कारण अमेरिका से वापस भेज दिया गया था, जिसके बाद वे सोमालिया लौट गए थे।

अमेरिकी सीमा एवं सीमा शुल्क सुरक्षा के एक बयान में 34 वर्षीय खिलाड़ी को देश से निष्कासित करने के लिए “जांच संबंधी चिंताओं” का हवाला दिया गया। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने आर्टन की ओर से सफलतापूर्वक हस्तक्षेप करने में फीफा की विफलता के बारे में पूछे जाने पर आलोचकों से “शांत रहने” को कहा। सूत्रों का कहना है कि आर्टन को विश्व कप में अपनी भूमिकाओं के लिए पूरा पारिश्रमिक दिया जाएगा। हालांकि, आर्टन को सौंपे गए मैचों की संख्या के कारण सटीक राशि अभी तय नहीं की गई है।

आर्टन को विश्व कप से बाहर किए जाने के बाद, यूईएफए ने उस अधिकारी को यूईएफए सुपर कप का प्रभारी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की, जो अगस्त में ऑस्ट्रिया के साल्ज़बर्ग में चैंपियंस लीग विजेता पेरिस सेंट-जर्मेन और यूरोपा लीग विजेता एस्टन विला के बीच होने वाला एक प्री-सीज़न मुकाबला है।

सोमालिया पहुंचने पर हुआ था जोरदार स्वागत

अमेरिका में प्रवेश नहीं मिलने के बाद सोमालिया के फुटबॉल विश्व कप रैफरी उमर अर्टन का पिछले बुधावार को राजधानी मोगादिशू पहुंचने पर समर्थकों और अधिकारियों ने स्वागत किया था।अर्टन टूर्नामेंट के लिए फीफा की अंतिम सूची में जगह बनाने के बाद विश्व कप में रैफरी की भूमिका निभाने वाले सोमालिया के पहले रैफरी बनने वाले थे।

अमेरिका के सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा विभाग ने हालांकि एक बयान में कहा कि मियामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जांच-पड़ताल से जुड़ी चिंताओं के कारण उन्हें देश में प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद फीफा ने उन्हें टूर्नामेंट की रैफरी की सूची से हटा दिया।

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FIFA World Cup में Japan Fans अपने साथ लाए कचरे का बैग, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान [VIDEO]

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FIFA World Cup 2026 : फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जापान की टीम ने नीदरलैंड्स के खिलाफ शानदार वापसी करते हुए 2-2 की बराबरी हासिल की, लेकिन मैच खत्म होने के बाद जो नजारा देखने को मिला, उसने खिलाड़ियों से ज्यादा उनके फैंस की चर्चा छेड़ दी।

 

अमेरिका के डलास स्टेडियम में मुकाबला समाप्त होते ही जापानी समर्थक अपनी सीटों से उठे और हाथों में नीले बैग लेकर स्टैंड्स में फैला कचरा समेटने लगे। यही बैग मैच के दौरान टीम का उत्साह बढ़ाने के लिए लहराए जा रहे थे, लेकिन अंतिम सीटी बजते ही उनका इस्तेमाल सफाई के लिए किया गया।

 

 वीडियो वायरल, दुनिया कर रही तारीफ

 

फीफा द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में जापानी फैंस बड़े ही व्यवस्थित तरीके से अपने आसपास का कचरा इकट्ठा करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एक समर्थक ने बताया कि यह केवल सफाई नहीं बल्कि सम्मान की भावना है।

उसने कहा, “हम खिलाड़ियों, अन्य दर्शकों और स्टेडियम का सम्मान करते हैं। हमें यहां आने का मौका मिला है, इसलिए हम अपने पीछे गंदगी छोड़कर नहीं जाना चाहते।”

 

 1998 से निभा रहे हैं यह परंपरा

 

जापानी फैंस पहली बार 1998 के वर्ल्ड कप के दौरान दुनिया की नजरों में आए थे, जब फ्रांस में मैच के बाद उन्हें स्टेडियम साफ करते देखा गया था। तब से लेकर हर वर्ल्ड कप और बड़े खेल आयोजन में यह परंपरा जारी है।

 

कतर वर्ल्ड कप 2022 में भी जर्मनी पर यादगार जीत के बाद जापानी समर्थकों ने जश्न से पहले स्टेडियम की सफाई कर दुनिया को प्रभावित किया था।

 

एक कहावत जो बताती है जापान की सोच

 

जापानी संस्कृति में एक प्रसिद्ध कहावत है:

 

“Tatsu Tori Ato wo Nigosazu”

 

इसका शाब्दिक अंग्रेजी अर्थ है:

 

“A bird leaves nothing behind.”

 

यानी, “एक पक्षी उड़ते समय अपने पीछे कोई निशान या गंदगी नहीं छोड़ता।”

 

एक और कहावत जिसे वे फॉलो करते हैं “किसी जगह को वैसा ही छोड़कर जाएं जैसा आपने उसे पाया था।”

 

यही विचार जापानी समाज में गहराई से समाया हुआ है और लोगों के व्यवहार में साफ दिखाई देता है।

बचपन से सिखाई जाती है जिम्मेदारी

 

जापान में बच्चों को स्कूल के दिनों से ही अपनी कक्षा, गलियारों और आसपास के क्षेत्रों की सफाई करने की आदत डाली जाती है। वहां सफाई केवल कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं मानी जाती, बल्कि इसे अनुशासन, जिम्मेदारी और दूसरों के प्रति सम्मान का हिस्सा समझा जाता है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण है कि बड़े होने के बाद भी जापानी नागरिक सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने को अपना कर्तव्य समझते हैं।

 

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- दुनिया को सीखना चाहिए

 

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर जापानी फैंस की जमकर तारीफ हो रही है। कई यूजर्स ने इसे अनुशासन, संस्कार और नागरिक जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण बताया।

 

एक यूजर ने लिखा, “यह हर देश के लिए सीख है।”

 

दूसरे ने कहा, “मैच में अच्छा खेलना बड़ी बात है, लेकिन मैच के बाद ऐसा व्यवहार दिखाना उससे भी बड़ी बात है।”

 

मैदान पर जुझारू प्रदर्शन और मैदान के बाहर शानदार संस्का जापान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि असली जीत सिर्फ स्कोरलाइन से नहीं, बल्कि संस्कृति और व्यवहार से भी हासिल की जाती है।

 

जर्मनी से 1-7 से हारने वाले क्युरासाओ ने कभी भारत को 3-1 से हराया था

आज जर्मनी ने क्युरासाओ को फीफा विश्वकप 2026 में 7-1 से करारी मात दी। लेकिन इस ही क्युरासाओ ने एक दफा भारतीय फुटबॉल टीम को 3-1 से हराया था। यह मैच थाईलैंड के किंग कप टूर्नामेंट के दौरान खेला गया था। इसमें भारत का एकमात्र गोल पूर्व कप्तान सुनील छेत्री ने बनाया था।

इस मैच का स्कोरकार्ड जर्मनी बनाम क्युरासाओ के मैच के बाद वायरल हो रहा है।क्युरासाओ ने भले ही विश्वकप का पहला मैच खेला हो लेकिन उसके इस प्रदर्शन से भारतीय फुटबॉल प्रेमियों को अपने देश के फुटबॉल का हाल शीशे में दिख गया।

जर्मनी ने पहली बार खेल रही क्युरासाओ टीम को 7-1 से रौंदा

रविवार को वर्ल्ड कप के अपने पहले मैच में जर्मनी ने क्युरासाओ को 7-1 से करारी शिकस्त दी। फेलिक्स नमेचा ने टूर्नामेंट का अब तक का सबसे तेज़ गोल किया और फिर पहले हाफ के स्टॉपेज टाइम में पेनल्टी हासिल की, जिसे काई हावर्ट्ज़ ने गोल में बदलकर बढ़त को और बढ़ा दिया।

चार बार की चैंपियन टीम ने ग्रुप ई के इस मैच में शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा। यह मैच वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करने वाले सबसे छोटे देश के खिलाफ था। छठे मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज़ के साथ शानदार ‘वन-टू’ पासिंग के बाद नमेचा ने एक बेहतरीन शॉट लगाकर गेंद को कोने में पहुँचाया और टीम को बढ़त दिलाई।

क्युरासाओ के लिए लिवानो कोमेनेंसिया ने 21वें मिनट में बराबरी का गोल किया; यह उनका वर्ल्ड कप में पहला गोल भी था। इसके बाद 38वें मिनट में जर्मनी को कॉर्नर मिला, जिस पर निको श्लोटरबेक ने शानदार हेडर लगाकर स्कोर 2-1 कर दिया। हाफ-टाइम से ठीक पहले विपक्षी टीम के एरिया में नमेचा को फाउल किया गया और काई हावर्ट्ज़ ने पेनल्टी को गोल में बदलकर स्कोर 3-1 कर दिया।

फिर, हाफ-टाइम के ठीक बाद किमिच के पास पर जमाल मुसियाला ने बॉक्स के अंदर से गोलकीपर को छकाते हुए जर्मनी के लिए चौथा गोल किया। मुसियाला की जगह आए उंडाव ने 68वें मिनट में नथानिएल ब्राउन को गोल करने में मदद की, जिससे जर्मनी 5-1 से आगे हो गया। 78वें मिनट में उंडाव ने जर्मनी के लिए छठा गोल किया। 88वें मिनट में हावर्ट्ज़ ने अपना दूसरा गोल पूरा किया।

ऑस्ट्रेलिया की टर्की पर 2 गोलों की जीत के जश्न का वीडियो हुआ वायरल

क्रिकेट की सबसे सफलतम टीमों में से एक जाने वाली ऑस्ट्रेलिया ने तुर्की को 2 गोलों से हरा दिया। हालांकि ऑस्ट्रेलिया और तुर्की की फीफा रैंकिंग में बहुत फासला नहीं है। लेकिन 27वीं रैंक की ऑस्ट्रेलिया ने 22वीं रैंक की तुर्की को आक्रमण और रक्षण दोनों पहलू पर मात दी। ऑस्ट्रेलिया की इस जीत का जश्न मेलबर्न शहर में काफी वायरल हुआ।  

नेस्टोरी इरंकुंडा और कॉनर मेटकाफ के गोल की मदद से ऑस्ट्रेलिया ने 2-0 से जीत दर्ज करके तुर्किए को बेबस साबित कर दिया।इरंकुंडा ने तीन डिफेंडरों से घिरे होने के बावजूद 27वें मिनट में निचले शॉट से गोल करके ऑस्ट्रेलिया को बढ़त दिला दी।इरंकुंडा ने ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल के दिग्गज टिम कहिल के इस खेल में योगदान को याद करने के लिए कॉर्नर फ्लैग पर मुक्का मारकर जश्न मनाया। वाटफोर्ड के लिए खेलने वाले 20 वर्षीय इरंकुंडा ऑस्ट्रेलिया की तरफ से विश्व कप में सबसे कम उम्र के गोल स्कोरर बन गए हैं।

इसके कुछ मिनट बाद बीच ने अब्दुलकरीम बरदाकसी के जोरदार शॉट को रोककर शानदार बचाव किया। ऑस्ट्रेलिया के कोच टोनी पोपोविच ने अनुभवी गोलकीपर मैथ्यू रयान की जगह बीच को शुरुआती एकादश में रखने का चौंकाने वाला फैसला किया जो सही साबित हुआ।

तुर्किए को 57वें मिनट में फ्री किक मिली, लेकिन बीच ने बड़ी खूबसूरती से अर्दा गुलेर के शॉट को बचा दिया। रियाल मैड्रिड के लिए खेलने वाले 21 वर्षीय मिडफील्डर गुलेर का जन्म उस समय नहीं हुआ था जब तुर्किए इससे पहले आखिरी बार विश्व कप में खेला था।कॉनर मेटकाफ ने 75वें मिनट में इस्माइल युकसेक की गलती का फायदा उठाते हुए ऑस्ट्रेलिया की बढ़त को दोगुना कर दिया।

ड्रॉ मैच के कारण कनाडा को मिला FIFA विश्वकप इतिहास का पहला अंक

FIFA World Cup 2026 के ग्रुप बी में कनाडा बनाम बोस्निया और हर्जेगोविना के बीच खेला गया मुकाबला 1-1 से ड्रा पर समाप्त हुआ। इसी के साथ दोनों टीमों को एक-एक अंक मिल गया।कनाडा की फुटबॉल टीम ने शुक्रवार रात खेले गये मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए बोस्निया-हर्जेगोविना को 1-1 से ड्रॉ पर रोक दिया। साथ ही, उन्होंने विश्वकप इतिहास का पहला अंक भी हासिल किया।

मैच में काफी देर तक बोस्निया ने कनाडा पर लगातार हमले किये और मेहमान टीम ने शुरुआती बढ़त हासिल कर ली और 79वें मिनट तक इसे बरकरार रखा। इसके बाद कनाडा के साइल लारिन ने आखिरी समय से कुछ पहले बराबरी का गोल कर टोरंटो स्टेडियम के अंदर एक अविश्वसनीय माहौल बना दिया। इसी के साथ कनाडा ने 1986 से चले आ रहे पिछले छह विश्व कप मैचों में हार के सिलसिले का अंत कर दिया।

कनाडा की कोच जेसी मार्श ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि दर्शकों ने हमारे अंदर जोश भर दिया क्योंकि खिलाड़ी दूसरे हाफ में अधिक जोश के साथ खेल रहे थे।’’लारिन के लिए यह और भी बेहतर अनुभव था, जो आमतौर पर शुरुआती लाइनअप में होते हैं, लेकिन उन्हें दूसरे हाफ के आखिर क्षणों तक बेंच पर बैठकर मैच देखना पड़ा।

लारिन ने कहा, ‘‘अपने गृहनगर में गोल करना और प्रशंसकों के साथ जश्न मनाना अद्भुत अहसास है। माहौल शानदार था।’’लारिन का यह गोल विश्व कप में कनाडा का केवल दूसरा गोल था। इससे पहले उसकी टीम 1986 में मैक्सिको में और चार साल पहले कतर में हुए विश्व कप में अपने सभी मैच हार गई थी।

बोस्निया-हर्जेगोविना के लिए गोल करने वाले लुकिच को भी शुरुआती एकादश में जगह नहीं मिलती लेकिन एडिन डेज़ेको (कंधे में चोट) और हारिस तबाकोविच (चोट का कारण अज्ञात) के चोटिल होने के कारण उन्हें शुरू में ही मैदान पर उतारा गया और वह अपेक्षाओं पर खरे उतरे।बोस्निया-हर्जेगोविना दूसरी बार विश्व कप में हिस्सा ले रहा है। इससे पहले उसने 2014 में ब्राजील में खेले गए विश्व कप में भाग लिया था लेकिन तब उसकी टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाई थी।

बोस्निया के कोच सर्गेई बारबारेज़ के लिए यह राहत की बात थी कि उनकी टीम ने इतने मुश्किल माहौल में भी डटकर मुकाबला किया।बारबारेज़ ने कहा, ‘‘बहुत बड़ा दबाव था। मैं अपनी टीम की तारीफ करता हूं कि उसने दबाव के आगे घुटने नहीं टेके। मैं अपनी टीम के प्रदर्शन से बहुत संतुष्ट हूं।’’अब बोस्नियाई टीम का मुकाबला 18 जून को लॉस एंजिलिस में स्विट्जरलैंड और 24 जून को सिएटल में कतर से होगा। कनाडा वैंकूवर में 18 जून को कतर और 24 जून को स्विट्जरलैंड से खेलेगा।

खिलाड़ी से लेकर कोच तक राणा जी का जवाब नहीं, पिता हैं सैनिक

अमूमन देखा जाता है कि कोई खिलाड़ी अगर मैदान पर अव्वल होता है तो कोचिंग में वह कमाल नहीं दिखा पाता। वहीं बेहतरीन कोच शायद एक औसत खिलाड़ी रहा हो। लेकिन जसपाल राणा एक बेहतरीन खिलाड़ी होने के साथ साथ बेहतरीन कोच भी रहे।उनके पिता नारायण सिंह राणा एक पूर्व सैनिक थे और यह कारण था कि उन्होंने निशानेबाजी का खेल तब चुना जब इसको लेकर भारतीय जनमानस अन्विज्ञ था।

28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा भारत के बेहतरीन पिस्टल शूटर्स में से एक बनकर उभरे और शूटिंग में उनका करियर लगभग दो दशक तक शानदार रहा। उन्होंने पहली बार 1994 में मिलान में 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल इवेंट में जूनियर वर्ल्ड टाइटल जीतकर दुनिया के सामने अपनी पहचान बनाई।

12 वर्ष की उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाले राणा भारत के सबसे कामयाब शूटर्स में से एक बने; उन्होंने 1994 से 2006 के बीच चार कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक जीते, जिनमें नौ स्वर्ण पदक शामिल थे। उनकी सफलता एशियन गेम्स में भी जारी रही, जहां उन्होंने 1994 से 2006 के बीच आठ पदक जीते, जिनमें से चार स्वर्ण थे।

एशियन गेम्स में उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन 2006 के दोहा गेम्स में रहा, जहां उन्होंने तीन स्वर्ण मेडल जीते और अपने पसंदीदा 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल स्पर्धा में उस समय के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की। राणा को 1994 में अर्जुन अवॉर्ड मिला और उन्होंने 1996 के अटलांटा ओलंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें 1997 में भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उन्हें वर्ष 2020 में खेल जगत के सर्वोच्च कोचिंग सम्मान ‘द्रोणाचार्य पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था।

प्रतियोगी निशानेबाजी से संन्यास लेने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग शुरू की और मनु भाकर का करियर संवारने में अहम भूमिका निभाई। 2018 से 2021 के बीच उनके साथ काम करने के बाद, वे पेरिस 2024 ओलंपिक्स से पहले इस स्टार शूटर के साथ फिर से जुड़े। राणा की देखरेख में, भाकर आज़ादी के बाद के दौर में ओलंपिक के एक ही संस्करण में दो मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।

उन्होंने पेरिस में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल और मिक्स्ड टीम 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में कांस्य पदक जीते। पिछले साल फरवरी में, राणा को 25 मीटर पिस्टल इवेंट के लिए भारत का हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया गया था और वे अपने आखिरी दिनों तक शूटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करने के लिए समर्पित रहे।

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राणा ने जूनियर राष्ट्रीय टीम कोच और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनर के रूप में भारतीय निशानेबाजी टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कोच के रूप में उनके योगदान में मनु भाकर को प्रशिक्षण देना शामिल है। उनकी देखरेख में मनु भाकर ने 2024 पेरिस ओलंपिक में दो जीते थे।