FIFA WC में पहले ही दिन खुला एशिया का खाता, द.कोरिया ने चेकिया को 2-1 से हराया (Video Highlights)

ह्वांग इन-बिओम और ओह हियोन-ग्यू के शानदार गोलों की बदौलत दक्षिण कोरिया ने शुक्रवार को फीफा विश्वकप 2026 ग्रुप ए मुकाबले में चेकिया को 2-1 से हराया।मैच के पहले हाफ में दक्षिण कोरिया और चेकिया संघर्षपूर्ण मुकाबले के बावजूद गोल करने में विफल रहे।

पहले हाफ की तरह ही, दूसरे हाफ के बीच में भी दोनों टीमों को हाइड्रेशन ब्रेक दिया गया। हालांकि गर्मी में यह ब्रेक अच्छा रहेगा, लेकिन दक्षिण कोरिया के लिए शायद यह सही समय पर न हो, क्योंकि वे अपने मोमेंटम का फायदा उठाने के लिए लगातार खेलना चाह रहे होंगे।

दूसरे हाफ का खेल शुरू होते ही चेकिया ने आक्रमण शुरू किया और उसे 59वें मिनट में सफलता मिली। चेकिया के लिए लाडिसलाव क्रेजसी ने पहला गोल दागा। कौफल ने छह-यार्ड बॉक्स के किनारे तक एक लंबा थ्रो फेंका, जहाँ बिना किसी रुकावट के क्रेजसी ने सही समय पर छलांग लगाई और बेबस किम सेउंग-ग्यू को छकाते हुए गोल कर दिया। कप्तान के इस गोल से चेकिया ने 1-0 से बढ़त बना ली।

लेकिन यह बढ़त आठ मिनट तक ही कायम रही और दक्षिण कोरिया के हांग इन बियोम ने 67वें मिनट में गोलकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इसके दो मिनट बाद ही दक्षिण कोरिया के ओह हियोन ग्यू ने 80वें मिनट में गोल कर टीम को 2-1 से बढ़त दिला दी।30 अधिक विश्वकप मैच खेलने वाली टीमों में दक्षिण कोरिया का जीत का रेट सबसे कम है।

उन्होंने अपने 38 मैचों में से सात जीते हैं – यानी 18.4 प्रतशित का रेट। हालांकि, उन्होंने यूरोपीय टीमों के खिलाफ़ अपने पिछले दोनों मैच जीते हैं। 2018 में जर्मनी के खिलाफ़ 2-0 से और 2022 में पुर्तगाल के खिलाफ 2-1 से।

2 गोल और 3 रेड कार्ड, जबरदस्त हंगामें से शुरु हुआ FIFA WC का आगाज (Video)

FIFA World Cup

मेक्सिको ने एस्टाडियो एज़्टेका स्टेडियम में खेले गये फीफा विश्वकप 2026 के उद्घाटन मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका पर 2-0 से शानदार जीत दर्ज। मैच का अंत तीन रेड कार्ड और काफी हंगामे के साथ हुआ, जिसमें मेक्सिको ने दूसरे हाफ में कुछ बिखरे हुए खेल के बावजूद अपनी श्रेष्ठता साबित की।हाफ-टाइम तक मेक्सिको 1-0 से आगे था। जूलियन क्विनोन्स ने नौवें मिनट में गोल किया।

उन्होंने याया सिथोले की एक बड़ी गलती का फायदा उठाते हुए रोनवेन विलियम्स के पैरों के बीच से गेंद को गोल में पहुंचा दिया। मेक्सिको ने शुरुआती दौर में दबदबा बनाए रखा और राउल जिमेनेज और क्विनोन्स के जरिए कई मौके बनाए, जबकि दक्षिण अफ्रीका की ओर से हमले के नाम पर केवल फोस्टर का एक कमजोर हेडर देखने को मिला।

दूसरा हाफ भी इसी तरह शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही खेल में अफरातफरी मच गई। सिथोले के लिए रात और खराब हो गई जब उन्हें 49वें मिनट में गोल करने का एक साफ मौका रोकने के कारण रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर भेज दिया गया, जिससे दक्षिण अफ्रीका के पास केवल दस खिलाड़ी रह गए। हालांकि, मेक्सिको शुरू में इसका पूरा फायदा नहीं उठा सका; लगातार दबाव के बावजूद कुछ समय तक विलियम्स को कोई खास बचाव नहीं करना पड़ा।

आखिरकार 67वें मिनट में दूसरा गोल हुआ। क्विनोन्स, रेयेस और जिमेनेज के बीच बने एक शानदार मूव के बाद, ‘वॉल्व्स’ के स्ट्राइकर ने विलियम्स को छकाते हुए गोल किया। यह उनका पहला विश्व कप गोल था, जिससे मेक्सिको की बढ़त दोगुनी हो गई और मैच का नतीजा लगभग तय हो गया।

लेकिन मैच अनुशासनहीनता देखी गई। 83वें मिनट में दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ियों की संख्या घटकर नौ रह गई, जब जवाने को रेड कार्ड दिखाया गया। वीएआर की जांच में पाया गया कि उन्होंने अल्वारो के चेहरे पर हाथ मारा था, जिसे खतरनाक खेल माना गया। मेहमान टीम के लिए स्थिति और खराब हो गई जब 94वें मिनट में मुदाऊ को भी मोंटेस के खिलाफ फाउल करने के कारण बाहर भेज दिया गया, जिससे उनकी टीम का अनुशासन पूरी तरह बिखर गया।

रुकावटों के कारण स्टॉपेज टाइम सात मिनट से भी लंबा खिंच गया और आखिरकार 97वें मिनट में मैच खत्म होने की सीटी बजी। मेक्सिको ने न केवल तीन अंक हासिल किए, बल्कि यह जीत ऐसे मैच में मिली जिसमें दो गोल हुए, तीन रेड कार्ड दिखाए गए और सह-मेजबान टीम के नियंत्रण और दक्षिण अफ्रीका के बिखरते हुए अनुशासन के बीच साफ़ फ़र्क देखने को मिला।

49 साल की उम्र में हुआ पूर्व निशानेबाज जसपाल राणा का निधन, एक हफ्ते पहले डला था स्टेंट

ओलंपियन और भारत के पूर्व निशानेबाज जसपाल राणा का गुरुवार को यहां के अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। भारतीय राष्ट्रीय रायफल संघ (NRAI) ने जसपाल राणा के निधन की पुष्टि करते हुए दुख व्यक्त किया है। भारत के सबसे कामयाब निशानेबाजों में से एक, राणा को हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में मई के आखिर में हुए आईएसएसएफ विश्व कप के दौरान सीने में तकलीफ हुई थी, जिसके बाद उनकी स्टेंट प्रक्रिया हुई थी। भारत लौटने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन इलाज के बावजूद उनका निधन हो गया।

अस्पताल में भर्ती होने के बाद जसपाल राणा के भाई सुभाष राणा ने मीडिया को बताया था, “शुरुआत में उन्हें लगा कि यह तकलीफ एसिडिटी की वजह से है और उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी। हालांकि, भारत लौटते समय उन्हें फिर से तकलीफ हुई, जिसके बाद दिल्ली पहुंचने पर उन्हें तुरंत मेडिकल मदद लेनी पड़ी।”

म्युनिख से लौटते समय उड़ान में बीमार पड़ने के बाद राणा को डला स्टेंट

मशहूर निशानेबाजी कोच जसपाल राणा जर्मनी के म्युनिख में हुए आईएसएसएफ विश्व कप से भारतीय दल के साथ लौटते हुए उड़ान में बीमार हो गए थे जिसके बाद उन्हें चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था।भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीते थे।भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ के एक सूत्र ने बताया था ,‘‘ जसपाल को विमान में अच्छा महसूस नहीं हो रहा था और दिल्ली पहुंचने के बाद वह सीधे अस्पताल गए जहां टेस्ट के बाद उन्हें एक स्टेंट डाला गया।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने जसपाल राणा के निधन पर दुख व्यक्त किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज जसपाल राणा के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि यह भारतीय खेल जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है।

राणा का बृहस्पतिवार की रात को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया था। वह 49 वर्ष के थे।मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘‘जसपाल राणा जी के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। उनका निधन भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति है।’’प्रधानमंत्री ने कहा कि राणा ने निशानेबाजी में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश को अपार गौरव बढ़ाया तथा एक कोच के रूप में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।उन्होंने कहा, ‘‘उत्कृष्टता, अनुशासन और खेल जगत के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें अपार सराहना दिलाई। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, मित्रों और संपूर्ण खेल जगत के साथ हैं। ओम शांति।’’

विश्वकप के लिए लियोनेल मेस्सी पूरी तरह फिट, अभ्यास मैच में दागा गोल (Video)

Lionel Messi

चोट से वापसी करते हुए लियोनेल मेसी ने गोल किया और अर्जेंटीना ने मंगलवार को अपने आखिरी विश्व कप अभ्यास मैच में आइसलैंड को 3-0 से आसानी से हरा दिया।मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन टीम को वैलेंटीन बारको ने बढ़त दिलाई। उन्होंने जल्दबाजी में किए गए क्लीयरेंस का फायदा उठाया और 20 गज की दूरी से पहली बार में ही जोरदार शॉट मारकर गेंद को निचले बाएं कोने में पहुंचा दिया।

मेसी, जो हैमस्ट्रिंग में हल्की खिंचाव के कारण शनिवार को होंडुरास के खिलाफ अर्जेंटीना की 2-0 की फ्रेंडली जीत में नहीं खेल पाए थे, 72वें मिनट में जूलियानो सिमोन की जगह मैदान पर उतरे और आते ही असर दिखाया।

उनका पहला टच लौटारो मार्टिनेज के लिए एक बेहतरीन ‘थ्रू बॉल’ था। मार्टिनेज जब गोल करने की कोशिश कर रहे थे, तो गोलकीपर एलियास ओलाफसन ने उन्हें गिरा दिया। रेफरी ने तुरंत पेनल्टी का इशारा किया और मेसी ने पेनल्टी किक मारकर गेंद को ओलाफसन की पहुंच से दूर गोल में पहुंचा दिया।

दूसरे हाफ में सब्स्टीट्यूट के तौर पर आए थियागो अल्माडा ने जीत पक्की कर दी। उन्होंने रोड्रिगो डी पॉल के क्रॉस पर छह-यार्ड बॉक्स के किनारे से गेंद को गोल में पहुंचा दिया।अर्जेंटीना अगले मंगलवार को कैनसस सिटी में अल्जीरिया के खिलाफ अपने वर्ल्ड कप खिताब के बचाव की शुरुआत करेगा। इसके बाद ग्रुप जे में उसका सामना ऑस्ट्रिया और जॉर्डन से होगा। आइसलैंड अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में होने वाले इस गर्मी के टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया था।

उमर अब्दुल कादिर- सर्वश्रेष्ठ अफ्रीकी फुटबॉल रेफरी को नहीं मिली अमेरिका में एंट्री (Video)

उमर अब्दुल क़ादिर आर्तन फुटबॉल विश्व कप में रेफरी बनने के बेहद करीब थे, यह सोमालिया के इतिहास में पहला ऐसा मौका होता कि उनके देश का कोई रेफरी फीफा विश्वकप में शामिल होता। वह अफ्रीका महाद्वीप के सर्वश्रेष्ठ रेफरी में से एक हैं।

हालांकि उनको अमेरिका की सख्त आप्रवासन नीति के तहत मियामी एयरपोर्ट से ही वापस ही स्वदेश भेज दिया गया। गौरतलब है कि अमेरिका की नीतियों पर इस्लाम विरोधी और रंगभेद होने के आरोप लगते रहते हैं और इस घटना को देखें तो दोनों आरोप अमेरिका पर एक साथ लगाए जा सकते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि  उमर एक राजनैयकि के तौर पर अमेरिका आए थे लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें इस्तानबुल जाने वाली उड़ान में बैठा दिया गया। सोमाली दूतावास ने उन्हें वीजा दिलाने में मदद की थी लेकिन अमेरिकी सुरक्षा बल ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।

इस पूरी घटना पर उमर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मैं फिलहाल सकारात्मक बना हुआ हूं और अगली चुनौती का इंतजार कर रहा हूं। उन्होंने फीफा और सीएएफ को धन्यवाद करते हुए कहा कि वह अपने काम को उच्च स्तर तक ले जाने के लिए सतत प्रयास करते रहेंगें।

वहीं सोमालिया के प्रधानमंत्री ने एक्स पर इस घटना की निंदा करते हुए लिखा-''मुझे यह ख़बर सुनकर गहरी निराशा हुई है कि अफ़्रीका के श्रेष्ठ रेफरी और दुनिया के बेहतरीन रेफरियों में से एक उमर आर्तन विश्व कप में मैचों का संचालन नहीं कर पाएंगे. उमर ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत, पेशेवर प्रतिबद्धता और ईमानदारी के बल पर यह मुकाम हासिल किया है. मुझे अब भी उम्मीद है कि इसका कोई समाधान निकलेगा. उमर, अफ्रीका और पूरी दुनिया आपके साथ खड़ी है.''

FIFA World Cup 2026: टूर्नामेंट शुरु होने से पहले पढ़े यह 15 दिलचस्प आंकड़े

अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में 11 जून से शुरू होने वाला FIFA World Cup 2026 अब तक का सबसे बड़ा विश्व कप होगा जिसमें पहली बार 48 टीम भाग लेंगी और इसमें 104 मैच खेले जाएंगे। यह टूर्नामेंट 39 दिन तक चलेगा और इसे 16 स्टेडियम में खेला जाएगा।

इससे पहले विश्व कप में 32 टीम भाग लेती थी और यह पहला अवसर है जबकि इस टूर्नामेंट में 48 टीम शामिल हैं। इससे पहले विश्व कप में टीमों की संख्या 1998 में बढ़ाई गई थी। इससे पहले 2002 में जापान और दक्षिण कोरिया ने संयुक्त रूप से विश्व कप की मेजबानी की थी।

विश्व कप अमेरिका के 11, मेक्सिको के तीन और कनाडा के दो स्थलों पर खेला जाएगा। मेक्सिको 13 मैचों की मेजबानी करेगा, जिनमें 11 जून को मेक्सिको सिटी में मेजबान टीम और दक्षिण अफ्रीका के बीच होने वाला उद्घाटन मैच और नॉकआउट दौर के तीन मैच शामिल हैं।

कनाडा में भी कुल 13 मैच होंगे, जिनमें से पहला मैच मेजबान टीम और बोस्निया-हर्जेगोविना के बीच 12 जून को टोरंटो में होगा। कनाडा में तीन नॉकआउट मैच भी खेले जाएंगे।

बाकी 78 मैच अमेरिका में खेले जाएंगे। अमेरिका में पहला मैच 12 जून को लॉस एंजिलिस में अमेरिका और पराग्वे के बीच खेला जाएगा। अमेरिका में क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल खेले जाएंगे।

FIFA World Cup 2026 से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े :

1) यह पहला अवसर है जबकि तीन देश मिलकर विश्व कप का आयोजन कर रहे हैं।

2) 48 टीम में रिकॉर्ड 1,248 खिलाड़ी शामिल हैं, जो 71 देशों के 449 घरेलू क्लबों से आए हैं। इनमें 357 खिलाड़ी विश्व कप में पहले खेल चुके हैं, जबकि 891 खिलाड़ी पहली बार इस टूर्नामेंट में भाग लेंगे।

3) इंग्लैंड के क्लबों में खेलने वाले सर्वाधिक 200 खिलाड़ी विश्व कप में अपना जलवा दिखाएंगे। इसके बाद जर्मनी (109)), फ्रांस (86), स्पेन (86), इटली (71) और सऊदी अरब (49) का स्थान आता है।

4) प्रीमियर लीग की टीम मैनचेस्टर सिटी के सर्वाधिक 19 खिलाड़ी विश्व कप में भाग लेंगे। उसके बाद बायर्न म्यूनिख (18), चैंपियंस लीग के फाइनलिस्ट पेरिस सेंट-जर्मेन और आर्सेनल (16) और बार्सिलोना ((15) का नंबर आता है।

5) पुर्तगाल के स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो टूर्नामेंट में भाग लेने वाले सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं। उन्होंने अब तक 226 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। वह अर्जेंटीना के लियोनेल मेस्सी के साथ छह विश्व कप में भाग लेने वाले पहले खिलाड़ी बनने के लिए तैयार हैं।

6) लियोनेल मेस्सी ने अपने करियर में विश्व कप के सबसे अधिक 26 मैच खेले हैं और वह 200 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले तीसरे खिलाड़ी बनने से केवल दो मैच दूर हैं।

7) जर्मनी के लिए मिरोस्लाव क्लोज़ का विश्व कप में 16 गोल करने का रिकॉर्ड इस बार टूट सकता है। मेस्सी ने विश्व कप में 13 गोल किए हैं और वह क्लोज़, ब्राज़ील के स्टार रोनाल्डो (15) और गेर्ड मुलर (14) से ही पीछे हैं। फ्रांस के किलियन एमबाप्पे भी इस रिकॉर्ड की दौड़ में हैं, जिन्होंने पिछले दो टूर्नामेंट में कुल मिलाकर 12 गोल किए हैं।

8) केवल आठ देशों ने विश्व कप जीता है, जिनमें से छह टीमों ने एक से अधिक खिताब जीते हैं। ब्राजील पांच खिताब के साथ सबसे आगे है।

9) केवल दो देशों ने ही लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है। पेले के नेतृत्व में ब्राजील ने 1958 और 1962 में खिताब जीता था, जबकि इटली ने 1934 और 1938 में खिताब अपने नाम किया था।

10) फ्रांस लगातार तीन फाइनल में पहुंचने वाला तीसरा देश बनने की कोशिश करेगा। इससे पहले उसने 2018 में खिताब जीता था लेकिन 2022 में वह हार गया था। पश्चिम जर्मनी 1982 और 1986 में फाइनल हार गया था, जिसके बाद उसने 1990 में अर्जेंटीना को हराया था। ब्राजील ने 1994 और 2002 में जीत हासिल की थी, जबकि 1998 में उसे फ्रांस से खिताबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था।

11) ब्राज़ील एकमात्र ऐसा देश है जिसने 1930 में उरुग्वे में शुरू हुए विश्व कप से लेकर अब तक सभी विश्व कप में भाग लिया है। ब्राज़ील 76 जीत, 237 गोल और 129-0 के गोल अंतर के साथ सभी देशों में सबसे आगे है।

12)  इस बार केप वर्डे, कुराकाओ, जॉर्डन और उज्बेकिस्तान सहित चार देश विश्व कप में पहली बार भाग ले रहे हैं। इससे विश्व कप में प्रतिस्पर्धा करने वाले देशों की कुल संख्या बढ़कर 84 हो जाएगी।

13) मिस्र ने विश्व कप में सात मैच खेले हैं और एक भी जीत हासिल नहीं की है।

14 )पहले 22 विश्व कप में 964 मैचों में 2,720 गोल किए गए हैं।

15) सबसे उम्रदराज खिलाड़ी और सबसे कम उम्र के खिलाड़ी के बीच 25 साल से अधिक का अंतर है। स्कॉटलैंड के गोलकीपर क्रेग गॉर्डन टूर्नामेंट के पहले दिन 43 साल और 162 दिन, जबकि मैक्सिको के गिल्बर्ट मोरा 17 साल और 240 दिन के होंगे।

लियोनेल मेस्सी के बिना भी 2 गोल से अभ्यास मैच जीती अर्जेंटीना

कप्तान लियोनेल मेसी बेंच पर बैठे रहे और अर्जेंटीना ने अभ्यास मैच में होंडुरास पर 2-0 से जीत के साथ अपनी विश्वकप की तैयारी जारी रखी।मेसी, जो अपनी बाईं हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों की थकान से उबर रहे हैं, ने काइल मैदान में अभ्यास में हिस्सा लिया, लेकिन लौटारो मार्टिनेज और गिउलिआनो सिमोन के गोल से मिली आसान जीत को बाहर से देखा।

उम्मीद है कि मेसी 16 जून को कैनसस सिटी में अल्जीरिया के खिलाफ अर्जेंटीना के शुरुआती विश्व कप ग्रुप मैच के लिए फिट हो जाएंगे। आठ बार के बैलन डी’ओर विजेता ही गत विश्व विजेता के लिए चोट की एकमात्र चिंता नहीं हैं।

इससे पहले डिफेंडर लियोनार्डो बालेर्डी को पैर के निचले हिस्से में चोट के कारण अल्बिसेलेस्टे टीम से बाहर कर दिया गया था। गोंजालो मोंटिएल (क्वाड्रिसेप्स), नहुएल मोलिना (हैमस्ट्रिंग) और लिएंड्रो परेडेस (हैमस्ट्रिंग) की फिटनेस पर भी संदेह है, जबकि फॉरवर्ड जूलियन अल्वारेज़ (टखने) और गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज (हाथ) के टूर्नामेंट शुरू होने पर उपलब्ध होने की उम्मीद है। कोच लियोनेल स्कालोनी ने कहा कि चोटों की लंबी सूची का मतलब है कि उन्होंने अभी तक बालेर्डी के रिप्लेसमेंट के बारे में कोई फैसला नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि वह कोई भी आखिरी बदलाव करने से पहले मंगलवार को आइसलैंड के खिलाफ अर्जेंटीना के आखिरी अभ्यास मैच का इंतजार करेंगे।उन्होंने कहा, “कई खिलाड़ी शत-प्रतिशत फिट नहीं हैं। हमारे पास अभी भी नतीजे निकालने के लिए एक और मैच है। मंगलवार को हमारा एक और गेम है और हम टीम में शामिल होने वाले खिलाड़ी को चुनने में जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं। लियो के साथ जो हुआ उसका मतलब है कि हमें कई अन्य साथियों का भी आकलन करना होगा, और जब तक हम यह नहीं देख लेते कि बाकी सब कैसे हैं, तब तक हम मंगलवार तक कोई फैसला नहीं करेंगे।”

अर्जेंटीना ग्रुप जे में ऑस्ट्रिया और जॉर्डन का भी सामना करेगा क्योंकि वह चार साल पहले जीते अपने विश्व कप खिताब को बरकरार रखने की कोशिश कर रहा है।

कुरान ए पाक को चूमकर ईरान की टीम विश्वकप खेलने मैक्सिको हुई रवाना (Video)

कुरान ए पाक को चूमकर ईरान के फुटबॉल खिलाड़ी फीफा विश्वकप खेलने के लिए मेक्सिको रवाना हुए।  इस वाक्ये की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खासी वायरल हुई जब एयरपोर्ट पर खिलाड़ियों ने विदेशी उड़ान शुरु करने से पहले ऐसा किया।

गौरतलब है कि उत्तरी अमेरिका में होने वाले विश्वकप में ईरान ने ठीक वैसे ही अपने लिए एक अगल मेजबान स्थल की मांग की जैसे पाकिस्तान ने भारत में हुए टी-20 विश्वकप के लिए की थी। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी युद्ध पूरी तरह नहीं थमा है। हालांकि टीम मेक्सिको से अमेरिका जाएगी, जहां उसे ग्रुप चरण के तीन मैच खेलने हैं।

टीम की इस विश्व कप में भागीदारी पहले से ही ईरान और अमेरिका के बीच राजनीतिक तनाव तथा इजराइल के साथ युद्ध जैसी स्थिति के कारण जटिल बनी हुई है। अमेरिका और इस्राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया जिसमें उसके शीर्ष नेता और कई आला अधिकारी मारे गए । ईरान ने जवाब में इस्राइल, अमेरिकी सेना और खाड़ी के अरब देशों को निशाना बनाया। इसने फारस की खाड़ी के संकरे मुहाने होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी कब्जा कर रखा है जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है।मामूली युद्धविराम के बावजूद ईरान और अमेरिका ने अभी तक स्थायी तौर पर युद्ध बंद नहीं किया है और हमले जारी हैं।

ईरान अपना पहला मैच 15 जून को न्यूजीलैंड के खिलाफ लॉस एंजिलिस में खेलेगा, इसके बाद छह दिन बाद बेल्जियम से भिड़ेगा। इसके बाद टीम 26 जून को सिएटल में मिस्र के खिलाफ खेलेगी।ईरान और अमेरिका की टीमें यदि अपने-अपने ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहती हैं, तो दोनों के बीच राउंड ऑफ 32 में मुकाबला भी संभव है।

फुटबॉल में ईरान जापान के बाद एशिया की दूसरी ताकतवर टीम है। यही कारण है विश्वकप से पहले टीम तुर्किए में अपने अभ्यास शिविर में करीब 15 दिनों तक पसीना बहा रही थी। टीम चाहेगी कि वह दुश्मन मुल्क में अपना लोहा मनवा के आए।

FIFA World Cup में भारत का कौन सा राज्य कर रहा है किस देश का समर्थन

भारत भले ही फीफा विश्व कप में नहीं खेल रहा हो लेकिन देश में फुटबॉल के प्रति जुनूनी इलाकों ने इस खूबसूरत खेल से लंबी दूरी का रिश्ता कायम रखते हुए खुद को उत्तरी अमेरिका 2026 के रंग में रंग लिया है।

 

लंबी दूरी का रिश्ता इसलिए, क्योंकि भारत इस समय विश्व कप के करीब कहीं भी नहीं है, लेकिन फुटबॉलप्रेमियों की उत्सुकता में यह बाधा नहीं बनने वाला। क्रिकेट के दीवाने देश में फुटबॉलप्रेमियों के ये छोटे इलाके अपनी पसंदीदा टीमों का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।

 

क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल टीम को गोवा का एकजुट समर्थन है लेकिन नेमार की ब्राजील और लियोनेल मैसी की अर्जेंटीना के लिए पूर्व और दक्षिण में प्रशंसक बंटे हुए हैं। पुर्तगालियों की पूर्व कॉलोनी गोवा में ब्राजील को लेकर भी काफी उत्साह है। प्रशंसकों ने ग्रामीण स्तर के खेल क्लबों में बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगा दी हैं, जो रूस में होने वाले मुकाबलों को देखने के लिए अपनी रातें यहां बिताएंगे।

 

गोवा फुटबॉल संघ के अध्यक्ष कैटिनो फर्नाडिस ने कहा कि तटीय राज्य में विश्व कप फुटबॉल मैच देखने के लिए बड़ी स्क्रीन लगाई गई है। 1 महीने के लिए फुटबॉल का बुखार काफी तेज रहेगा। इस तटीय क्षेत्र में जहां पुर्तगाल के झंडे लहराना आम दृश्य होगा, तो वहीं गोम्स की पसंदीदा टीम नाइजीरिया है, जो अर्जेंटीना, क्रोएशिया और आइसलैंड के साथ है।

 

उन्होंने कहा कि मैं छुपी रुस्तम दक्षिण अफ्रीका का समर्थन कर रहा हूं। मैं चाहता हूं कि विश्व कप एक बार के लिए अफ्रीका आना चाहिए। पूर्व भारतीय कप्तान ब्रुनो कौतिन्हो ने कहा कि गोवा में माहौल विश्व कप फुटबॉल के लिए काफी गर्म है। हर प्रशंसक अपने पसंदीदा स्थल पर मैच देख रहा होगा। क्लब हाउस ने बारिश के कारण इंडोर स्क्रीन लगाई है, वे इसे खुली जगह पर नहीं लगा सकते थे।

 

केरल के प्रशंसकों ने उत्तरी क्षेत्र में मलाबार में फुटबॉल प्रेम को अपने पसंदीदा खिलाड़ी के कटआउट सड़कों पर लगाकर दिखा रहे हैं। मैसी सभी प्रशंसकों के पसंदीदा हैं और उनके कटआउट मल्लपुरम, कोझीकोड और कासारागोड में देखे जा सकते हैं। 

FIFA WC में लगती है एशियाई टीमों को कोटा की बैसाखी, सिर्फ उलटफेर तक सीमित

दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी एशिया में रहती है, लेकिन इसके बावजूद वहां से एक ऐसी फुटबॉल टीम नहीं आ पाती जो फुटबॉल में धाक जमा सके। एशियाई स्तर पर बात होती है, तो उत्तर दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, सऊदी अरब, ईरान, जॉर्डन.. पता नहीं कितने ही नाम सामने आते हैं। ऐसे देशों में फुटबॉल का जुनून भी है और रिवाज भी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी हवा गोल हो जाती है।

पिछले विश्वकप में जापान ने जरुर जर्मनी और स्पेन को 2-1 से हराकर उलटफेर किया था लेकिन एशियाई टीम ज्यादातर मौकों पर उलटफेर करने पर ही सुर्खियों में आती है और फिर गुम हो जीता है। अगर कोटा ना होता शायद फीफा विश्वकप में एशिया से कोई भी टीम चयनित ना होती।

अगर 2002 में दक्षिण कोरिया के सेमीफाइनल में पहुंचने को अलग कर दिया जाए, तो एशियाई देशों ने आज तक वर्ल्ड कप में कोई कमाल नहीं किया हैआम तौर पर एशिया में फुटबॉल की नाकामी की तीन वजहें दी जाती हैं, दम खम की कमी, कुपोषण और ट्रेनिंग तथा रिवाज की कमी। लेकिन बारीकी से देखने पर इन तीनों दावों पर सवाल उठ सकते हैं। समूचा दक्षिण एशिया मजदूरी और कृषि पर आधारित इलाका है, जहां के लोग न सिर्फ अपने देशों में बल्कि विदेशों में भी कड़ी मेहनत के लिए जाने जाते हैं। अगर गौर से देखा जाए, तो क्रिकेट भी कोई कम दम खम वाला खेल नहीं, जहां कई बार बल्लेबाजों को घंटों क्रीज पर रहना पड़ता है और इस दौरान मेहनत भरे शॉट भी खेलने पड़ते हैं।

क्रिकेट में भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका का बोलबाला है। एशियाई फुटबॉल में बार बार कुपोषण को उभारा जाता है। वन गोल नाम की संस्था ने तो बाकायदा एशियाई फुटबॉल संगठनों के साथ मिलकर रिसर्च भी किए हैं और नतीजे निकाले हैं कि किस तरह वहां के बच्चों को विटामिन और दूसरी पोषक चीजें नहीं मिलतीं “और इस वजह से बच्चे अपने प्रतिद्वंद्वियों के साथ मुकाबला नहीं कर सकते”. इस दलील को सिर्फ चीन की मिसाल से काटा जा सकता है।

पिछली सदी तक चीन खेल की दुनिया का एक मामूली देश था, लेकिन पिछले एक दो दशक में यह इतनी तेजी से उभरा है कि ओलिंपिक में सीधे पहले दूसरे नंबर पर जा पहुंचा है। ओलिंपिक खेलों पर ध्यान देने के बाद से चीन में खेल का कायापलट हो चुका है। छोटे छोटे बच्चे तैराकी और दौड़ में नाम कमा रहे हैं।

ऐसे में ले देकर ट्रेनिंग और रिवाज पर ही ध्यान दिए जाने की जरूरत है। चीन ने हाल के दिनों में फुटबॉल पर पैसे लगाने की शुरुआत की है। ड्रोग्बा जैसे कुछ नामी खिलाड़ी चीनी प्रीमियर लीग में खेल चुके हैं, जबकि बुनियादी ढांचा भी तैयार किया जा रहा है। भारत में फुटबॉल लीग की शुरुआत हुई है, जिसमें काफी पैसा लगाया जा रहा है।

युद्ध से जर्जर मध्यपूर्व में इसकी कमी दिखती है। हालांकि कतर और दुबई जैसे देशों में फुटबॉल को लेकर क्रेज उभर रहा है लेकिन क्रेज से ग्राउंड पर जीत तक के सफर में लंबा फासला होता है।वर्ल्ड कप में एशियाई देशों को शामिल करना मजबूरी है क्योंकि हर महाद्वीप के नाम पर कोटा बंधा है. वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा यूरोप से 13, दोनों अमेरिकी महाद्वीप और कैरिबियाई देशों को आठ, अफ्रीका को पांच और एशिया तथा ओसियाना को मिला कर पांच देश होते हैं. मेजबान को टूर्नामेंट में अपने आप जगह मिल जाती है।

जरूरत है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालमेल बिठाने की। आखिर जब लातिन अमेरिका और अफ्रीका के फुटबॉल खिलाड़ी यूरोप में खेल सकते हैं, तो फिर एशियाई खिलाड़ी क्यों नहीं। इसका मतलब यह कतई नहीं कि यूरोप में फुटबॉल खेलने वाला ही बड़ा स्टार होता है, बल्कि फुटबॉल को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की जरूरत है।

सरकारों को भी लगातार फुटबॉल पर ध्यान देने की जरूरत है, सिर्फ विश्व कप के दौरान नहीं। कतर को आठ साल में वर्ल्ड कप का आयोजन करना है और मेजबान होने के नाते वह अपने आप वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई कर जाएगा, लेकिन तब तक एशियाई फुटबॉल का कितना भला होता है, इसे लेकर बहुत ज्यादा शक नहीं होना चाहिए।

मौजूदा हालात ऐसी है कि फीफा रैंकिंग में सबसे ऊपर जो एशियाई देश है, वह है जापान, जो 18वें नंबर पर है और भारत की तो बात ही छोड़िए, जो 136वें नंबर पर है।