ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर लगी मुहर

ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच एक समझौता किया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने डिजिटल माध्यम से ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस में अपने समकक्ष इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। 

व्हाइट हाउस के उप प्रमुख स्टाफ डैन स्कैविनो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज शाम फ्रांस के वर्सेल्स में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित डिनर से ठीक पहले, विदेश मंत्री मार्को रुबियो को ईरान समझौता ज्ञापन प्राप्त हुआ, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर किए।

रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने बुधवार को फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करते हुए और कूटनीति के लिए रास्ता खोलते हुए वह हासिल किया है, जिसे कई लोग असंभव मानते थे।

श्मिट ने कहा कि ईरान ने पहली बार परमाणु हथियार विकसित नहीं करने का वादा किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता भरोसे के बजाय सत्यापन के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए।

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अमेरिकी मीडिया संस्थान न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के साथ ईरान की शुरुआती शांति व्यवस्था तेहरान के लिए लेबनान में हिज्बुल्लाह की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने का मार्ग खोल सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समझौते के बाद ईरान को अनफ्रीज किए गए फंड और तेल सौदों से धन प्राप्त होना शुरू हो सकता है।

अमेरिकी मीडिया न्यूयॉर्क पोस्ट ने न्यूज एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया कि इस एमओयू के तहत, ईरान को युद्ध के बाद के निवेश, प्रतिबंधों से राहत और अनफ्रीज्ड फंड से सैकड़ों अरबों का फायदा होगा। ऐसे में ईरान रिकंस्ट्रक्शन फंड का इस्तेमाल लेबनान में अपने बुरी तरह से तबाह हो चुके टेरर प्रॉक्सी को सहारा देने के लिए करेगा।

दो क्षेत्रीय राजनयिकों और दो वरिष्ठ लेबनानी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि तेहरान ने हिज्बुल्लाह को जल्द वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का वादा किया है, जिससे समूह को लेबनान में अपनी सैन्य और राजनीतिक गतिविधियों के पुनर्गठन में मदद मिल सकती है।

हिज्बुल्लाह के संचार कार्यालय ने पुष्टि की है कि ईरान संगठन को सार्वजनिक रूप से समर्थन देता है। अमेरिकी वित्त विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष लगभग एक ​​बिलियन डॉलर का ट्रांसफर भी इसमें शामिल था। कार्यालय ने कहा कि ईरान का समर्थन जारी रहेगा, चाहे फंड की वापसी से जुड़ी व्यवस्थाएं कुछ भी हों।

अमेरिका ने कहा है कि ईरान अपने अनफ्रीज किए गए फंड का उपयोग किसी भी आतंकवादी संगठन के वित्तपोषण के लिए नहीं कर सकता। साथ ही चेतावनी दी गई है कि समझौते का उल्लंघन होने पर धनराशि को फिर से फ्रीज किया जा सकता है।

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योग दिवस से पहले CM धामी ने किया योगाभ्यास, प्रदेशवासियों से की यह खास अपील

Chief Minister Pushkar Singh Dhami made this special appeal ahead of International Yoga Day

Chief Minister Pushkar Singh Dhami : 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में उत्‍तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आवास पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ योगाभ्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने नियमित योग को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए सभी से इसे दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। योग व्यक्ति को तनावमुक्त, ऊर्जावान एवं स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सभी प्रदेशवासियों से विनम्र आग्रह है कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग कार्यक्रमों में सहभागिता करें तथा योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर स्वस्थ एवं निरोग जीवन की दिशा में कदम बढ़ाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत की प्राचीन योग परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान एवं सम्मान प्राप्त हुआ है। आज योग विश्वभर में स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं समग्र कल्याण के प्रभावी माध्यम के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, आत्मानुशासन, सकारात्मक जीवनशैली तथा जीवन में संतुलन स्थापित करने का सशक्त माध्यम है। योग व्यक्ति को तनावमुक्त, ऊर्जावान एवं स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है।

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले आज आयुष मंत्रालय ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, स्वस्थ लोग ही एक स्वस्थ समाज का निर्माण करते हैं और योग इसे सुनिश्चित करता है। आयुष मंत्रालय ने 'एक्स' पर लिखा, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है। योग के अभ्यास को बढ़ावा देना एक सच्ची समाज सेवा है।
Edited By : Chetan Gour

ममता बनर्जी की सुरक्षा हटाने के आरोपों को कोलकाता पुलिस ने किया खारिज

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, कोलकाता पुलिस ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि राज्य सरकार ने जानबूझकर ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था वापस ले ली है। 

बुधवार रात टीएमसी के दो राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन और सागरिका घोष तथा लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास के सामने मौजूद पुलिस चौकी खाली दिखाई दे रही थी। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया था कि प्रशासन के निर्देश पर उनकी सुरक्षा व्यवस्था हटा दी गई है।

हालांकि, राज्य पुलिस के सूत्रों ने इन दावों को गलत बताया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ममता बनर्जी की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की गई है। केवल उनकी सुरक्षा में तैनात दो निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बदला गया है।

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पुलिस सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी चाहती थीं कि जब वह मुख्यमंत्री थीं, उस दौरान उनकी सुरक्षा संभालने वाले दो कोलकाता पुलिस अधिकारियों को ही उसी ड्यूटी पर बनाए रखा जाए। लेकिन सरकारी नियमों के तहत किसी अधिकारी की नियुक्ति या तैनाती व्यक्तिगत पसंद के आधार पर नहीं की जा सकती।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा सुरक्षा अधिकारियों का तबादला ड्यूटी रोस्टर और तय सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार होता है। इस मामले में भी सामान्य प्रशासनिक फेरबदल किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, जिन दो नए सुरक्षा अधिकारियों को बुधवार रात कालीघाट स्थित आवास पर भेजा गया था, उन्हें ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों ने ड्यूटी संभालने की अनुमति नहीं दी। बताया गया कि पूर्व मुख्यमंत्री उन अधिकारियों से परिचित नहीं थीं।

इस बीच, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी के आवास की सुरक्षा कम नहीं बल्कि और मजबूत की गई है। बुधवार से उनके घर के बाहर ऊंचे सुरक्षा बैरिकेड भी लगाए गए हैं।

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जिज्ञासा से नवाचार तक बेटियों को नई उड़ान, IIT गांधीनगर पहुंचेंगी UP की बालिकाएं

Female students in Uttar Pradesh will get opportunity to engage with science, innovation and creative learning

– देश के प्रतिष्ठित आईआईटी गांधीनगर में आयोजित ओरिएंटेशन सेशन में शामिल होंगी कस्तूरबा विद्यालयों की छात्राएं

– उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर प्रयागराज और गाजियाबाद के केजीबीवी का हुआ चयन

– विज्ञान, नवाचार और रचनात्मक अधिगम से जुड़ने का मिलेगा अवसर

– दो छात्राएं और एक शिक्षिका करेंगी उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व

Uttar Pradesh news : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बालिकाओं को केवल विद्यालयी शिक्षा तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उन्हें देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों, वैज्ञानिक नवाचारों और आधुनिक अधिगम के अवसरों से भी जोड़ रही है। इसी क्रम में आईआईटी गांधीनगर, गुजरात द्वारा संचालित क्यूरियोसिटी प्रोग्राम 2026-27 के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों के लिए आयोजित ओरिएंटेशन सेशन में उत्तर प्रदेश के दो कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का चयन किया गया है। यह उपलब्धि न केवल इन विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रमाण है, बल्कि योगी सरकार द्वारा बालिका शिक्षा को नए अवसरों और राष्ट्रीय मंचों से जोड़ने के प्रयासों की भी पुष्टि करती है। 

 

विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 13 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाले इस विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कौड़िहार-1, प्रयागराज तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय लोनी (नगर पालिका), गाजियाबाद की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम में चयनित प्रत्येक विद्यालय से दो छात्राएं और एक शिक्षिका भाग लेंगी। छात्राओं को देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में सीखने और समझने का अवसर प्राप्त होगा। 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को बालिका सशक्तीकरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रभावी केंद्रों के रूप में विकसित कर रही है। डिजिटल शिक्षण, नवाचार आधारित गतिविधियों, विज्ञान एवं गणित कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय संस्थानों से जुड़ाव जैसी पहलों का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश की बेटियां देश के प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंच रही हैं।

प्रयागराज और गाजियाबाद की छात्राओं का आईआईटी गांधीनगर में चयन इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की बालिकाएं अब अवसरों की मुख्यधारा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं और भविष्य के वैज्ञानिक, शोधकर्ता तथा नवप्रवर्तक बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। 

 

पूरे वर्ष क्यूरियोसिटी कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों का चयन

आईआईटी गांधीनगर के सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग (सीसीएल) द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार चयन उन विद्यालयों का किया गया है जिन्होंने पूरे वर्ष क्यूरियोसिटी कार्यक्रम में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कौड़िहार-1, प्रयागराज ने कार्यक्रम के 50 में से 46 सत्रों में भागीदारी करते हुए 92 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की तथा 48 में से 39 वर्कशीट जमा कराईं।

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वहीं केजीबीवी लोनी (नगर पालिका), गाजियाबाद ने 50 में से 49 सत्रों में भाग लेकर 98 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की तथा 48 में से 42 वर्कशीट जमा कराईं। उत्कृष्ट सहभागिता और बेहतर प्रदर्शन के आधार पर दोनों विद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर के इस विशेष कार्यक्रम के लिए चुना गया है। 

 

विज्ञान, गणित, नवाचार, रचनात्मक अधिगम और समस्या समाधान आधारित गतिविधियों से परिचित छात्राएं

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को विज्ञान, गणित, नवाचार, रचनात्मक अधिगम और समस्या समाधान आधारित गतिविधियों से परिचित कराया जाएगा। वे आईआईटी गांधीनगर के शैक्षणिक वातावरण, शोध संस्कृति और नवाचार आधारित शिक्षण मॉडल को निकट से समझ सकेंगी।

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इससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा, जिज्ञासा को नई दिशा मिलेगी और उच्च शिक्षा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ेगा। विशेष रूप से ग्रामीण एवं वंचित पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राओं के लिए यह अनुभव नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित होगा।
Edited By : Chetan Gour

बड़ी खबर, बिना SIM के नहीं चलेगा WhatsApp, सरकार ला रही नया नियम, जानिए कब से होगा लागू

Government's big announcement regarding WhatsApp

Government's big announcement regarding WhatsApp : इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप (WhatsApp) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। खबरों के अनुसार, अब फोन से सिम निकालने के बाद WhatsApp काम करना बंद कर देगा। सिम बाइडिंग को लेकर इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp ने काम करना शुरू कर दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि WhatsApp और दूसरे मैसेजिंग ऐप्स के लिए SIM से जुड़ा नया नियम 1 मार्च से लागू होगा। इसके बाद अब बिना एक्टिव SIM के ऐप चलाना मुश्किल हो सकता है। सरकार ने ये नियम भारतीयों की सुरक्षा और साइबर ठगों पर लगाम लगाने के इरादे से लागू करने का फैसला लिया है।   

SIM-Binding असल में एक ऐसी सर्विस है कि कोई भी मैसेजिंग या कम्युनिकेशन ऐप उसी SIM कार्ड के साथ काम करेगा, जिस नंबर से वह रजिस्टर है। वर्तमान में WhatsApp सिम बाइडिंग नियम का पालन करने के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

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क्‍यों लागू हो रहा नया नियम

इस नए नियम के तहत फोन में एक्टिव सिम कार्ड नहीं होने पर WhatsApp काम नहीं कर पाएगा। मौजूदा नियम काफी सरल हैं, जिनके चलते सरकार ने ये नियम भारतीयों की सुरक्षा और साइबर ठगों पर लगाम लगाने के इरादे से लागू करने का फैसला लिया है। 

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क्या है SIM-Binding

सिम-बाइंडिंग प्रक्रिया में फोन नंबर से जुड़ा फिजिकल सिम कार्ड फोन में मौजूद रहना चाहिए और हमेशा एक्टिव होना चाहिए। इसके बाद ही मैसेजिंग ऐप की सर्विस काम करेगी। अगर यूजर्स ने अपने फोन से सिम कार्ड बाहर निकाला या डिएक्टिवेट किया तो उस नंबर से जुड़े मैसेजिंग अकाउंट का उपयोग नहीं होगा।
Edited By : Chetan Gour

मुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान, डेटा की तरह सस्ती होगी AI, Jio जोड़ेगा भारत को ‘इंटेलिजेंस एरा’ से

Mukesh Ambani's big announcement regarding Jio AI

– 7 साल में करेंगे 10 लाख करोड़ रुपए निवेश, जामनगर में गीगावॉट-स्केल AI इंफ्रा

– अंबानी ने कहा- AI, प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विज़न को नई गति देगा

– शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के लिए AI प्लेटफॉर्म लॉन्च

Mukesh Ambani's big announcement : उद्योगपति मुकेश अंबानी ने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में ऐलान किया कि जिस तरह जियो ने देश में डेटा सस्ता किया, उसी तरह अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी आम भारतीय तक किफायती दरों पर पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 'भारत इंटेलिजेंस किराए पर नहीं ले सकता' और जियो देश को इंटरनेट युग के बाद अब 'इंटेलिजेंस एरा' से जोड़ेगा।

 

इस दिशा में जियो और रिलायंस इंड्स्ट्रीज अगले सात वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेंगे। अंबानी ने कहा कि यह निवेश भारत में मजबूत AI ढांचा खड़ा करने और आने वाले दशकों के लिए आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जाएगा।

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कंपनी जामनगर में चरणबद्ध तरीके से मल्टी-गीगावॉट AI-रेडी डेटा सेंटर पार्क विकसित कर रही है। 2026 के अंत तक 120 मेगावॉट क्षमता शुरू करने का लक्ष्य है, जिसे आगे गीगावॉट स्तर तक बढ़ाया जाएगा। यह पूरा ढांचा ग्रीन एनर्जी पर आधारित होगा। साथ ही जियो अपने नेटवर्क के जरिए देशभर में ऐसी कंप्यूट क्षमता उपलब्ध कराएगा, जिससे AI सेवाएं कम लागत और तेज़ गति से लोगों, दुकानों, स्कूलों, अस्पतालों और खेतों तक पहुंच सकें।

 

अंबानी ने जोर देकर कहा कि जियो AI भारतीय भाषाओं में काम करेगा, ताकि किसान, युवा, छात्र और छोटे व्यवसायी अपनी भाषा में इसका लाभ उठा सकें। इसी क्रम में शिक्षा के लिए जियो शिक्षा AI, स्वास्थ्य के लिए जियो आरोग्य AI, कृषि के लिए जियो कृषि और आम उपयोग के लिए जियो भारत IQ जैसे प्लेटफॉर्म पेश किए गए, जो स्थानीय भाषाओं में AI आधारित सहायता उपलब्ध कराएंगे।

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मुकेश अंबानी ने विश्वास जताया कि भारत 21वीं सदी में अग्रणी AI शक्ति बन सकता है, बशर्ते तकनीक सुलभ, किफायती और देश की जरूरतों के अनुरूप विकसित की जाए। जियो की इन घोषणाओं से संकेत मिलता है कि कनेक्टिविटी के बाद अब कंपनी AI को अगला राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

 

AI से पैदा होने वाली चिंताओं पर अंबानी ने कहा कि एआई वह मंत्र है जो हर यंत्र को तेज, बेहतर और स्मार्ट तरीके से काम करने की शक्ति देता है। मैं एआई को आधुनिक अक्षय पात्र के रूप में देखता हूं, जो अंतहीन पोषण प्रदान कर सकता है। AI नौकरियां नहीं छीनेगा, बल्कि यह उच्च-कौशल वाले कार्यों में नए अवसर पैदा करेगा।

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अपने संबोधन की शुरुआत में अंबानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न की सराहना करते हुए कहा कि AI आधारित विकास की यह पहल भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को नई गति देगी। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल भारत, बल्कि ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बन सकती है।
Edited By : Chetan Gour

Fact Check: इंडिया AI समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी का ‘चीनी रोबोट’ विवाद; क्या है पूरी सच्चाई?

AI Summit Controversy : Chinese Robot Dog

भारत मंडपम में आयोजित हो रहे 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में तकनीकी उपलब्धियों से ज्यादा विवादों की चर्चा हो रही है। इस समय सबसे बड़ा विवाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित एक 'रोबोट डॉग' को लेकर खड़ा हुआ है, जिसके बाद यूनिवर्सिटी को प्रदर्शनी से बाहर जाने का निर्देश दिया गया है। समिट में सबसे बड़ी फजीहत गलगोटिया यूनिवर्सिटी के कारण हुई। यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक 'रोबोट डॉग' प्रदर्शित किया गया था, जिसे प्रतिनिधियों ने खुद का बनाया हुआ (In-house development) बताया।

 

फैक्ट-चेक: सोशल मीडिया पर विशेषज्ञों ने तुरंत पकड़ लिया कि यह रोबोट वास्तव में चीनी कंपनी Unitree Robotics का Go2 मॉडल है।

 

कार्रवाई: भारत सरकार के अधिकारियों ने इस “धोखाधड़ी” और “चीनी उत्पाद को भारतीय बताने” को गंभीरता से लेते हुए गलगोटिया यूनिवर्सिटी को तुरंत अपना स्टॉल हटाने और एक्सपो एरिया खाली करने का आदेश दिया।

 

यूनिवर्सिटी ने बाद में सफाई दी कि यह “गलतफहमी” थी और वे केवल छात्रों को इस पर प्रोग्रामिंग सिखा रहे थे, लेकिन तब तक यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका था।

राहुल गांधी का 'X' पर हमला: “डेटा बिक्री के लिए है”

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सरकार की आलोचना करते हुए लिखा कि भारत की प्रतिभा और डेटा का लाभ उठाने के बजाय, सरकार ने इस इवेंट को केवल दिखावे का जरिया बना दिया है।

 

राहुल गांधी का बयान: “भारत की प्रतिभा और डेटा का उपयोग करने के बजाय, एआई शिखर सम्मेलन एक अव्यवस्थित पीआर तमाशा बन गया है – भारतीय डेटा बिक्री के लिए उपलब्ध है और चीनी उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।”

 

उन्होंने आरोप लगाया कि समिट में भारतीय नवाचार के नाम पर विदेशी और विशेषकर चीनी तकनीक को बढ़ावा देकर देश की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाया गया है।

क्या है गलगोटिया यूनिवर्सिटी का 'रोबोट डॉग' विवाद?

समिट के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक चार पैरों वाला रोबोट (Quadruped Robot) प्रदर्शित किया गया था।

 

दावा: यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने मीडिया कैमरों के सामने दावा किया कि 'Orion' नाम का यह रोबोट यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' द्वारा विकसित किया गया है। उन्होंने इसे निगरानी और कैंपस सुरक्षा के लिए स्वदेशी नवाचार के रूप में पेश किया।

 

हकीकत: सोशल मीडिया पर तकनीकी विशेषज्ञों और 'X' (ट्विटर) के कम्युनिटी नोट्स ने तुरंत पहचान की कि यह रोबोट दरअसल चीनी कंपनी Unitree Robotics का मॉडल 'Unitree Go2' है, जिसे कोई भी ऑनलाइन खरीद सकता है।

सरकार की कार्रवाई: स्टॉल खाली करने के आदेश

सूत्रों के अनुसार, चीनी उत्पाद को भारतीय नवाचार के रूप में पेश करने से “राष्ट्रीय शर्मिंदगी” की स्थिति पैदा हुई। इसके बाद अधिकारियों ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी को समिट एक्सपो से अपना स्टॉल तुरंत हटाने और परिसर खाली करने का आदेश दिया।

यूनिवर्सिटी की सफाई: 'हमने निर्माण का दावा नहीं किया'

विवाद बढ़ने पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्टीकरण दिया: “हमने कभी यह नहीं कहा कि हमने इस रोबोट का निर्माण किया है। यह यूनिट्री (Unitree) से खरीदा गया है और हमारे छात्र इस पर एआई प्रोग्रामिंग सीखने के लिए प्रयोग कर रहे हैं। यह हमारे लिए एक 'चलता-फिरता क्लासरूम' है।”

 

हालांकि, इंटरनेट पर वायरल वीडियो में यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि इसे स्पष्ट रूप से “डेवलप” (विकसित) किया हुआ बता रहे हैं, जिससे उनकी सफाई पर सवाल उठ रहे हैं।

जियो आरोग्य AI से मिनटों में हेल्थ स्क्रीनिंग, AI क्लिनिक मॉडल पेश

Jio Aarogya AI introduces clinic model for primary healthcare sector

– AI करेगा शुरुआती जांच, जरूरत पड़ने पर सीधे डॉक्टर से जोड़ेगा

– 'वॉयस AI डॉक्टर' करेगा प्रमुख भारतीय भाषाओं में संवाद 

– प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स को AI-इनेबल्ड बनाने का दावा

Jio Arogya AI Enabled : इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियो पैवेलियन पर प्रदर्शित 'जियो आरोग्य AI' ने प्राइमरी हेल्थकेयर के क्षेत्र में AI आधारित क्लिनिक मॉडल पेश किया है। यह AI पावर्ड सिस्टम कुछ ही मिनटों में मरीज के अहम हेल्थ पैरामीटर्स की स्क्रीनिंग कर उनका एनालिसिस करता है, संभावित रिस्क की पहचान करता है और जरूरत के मुताबिक स्पेशलिस्ट रेफरल की सलाह देता है। कंपनी का दावा है कि इसका मकसद देश के प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स को AI-इनेबल्ड क्लिनिक में बदलना है, ताकि दूरदराज़ इलाकों में भी फास्ट और अफोर्डेबल हेल्थकेयर उपलब्ध हो सके।

 

इस सिस्टम में मरीज एक AI-एनेबल्ड डायग्नोस्टिक डिवाइस यानी स्मार्ट मिरर के सामने खड़ा होता है, जो आंखों, त्वचा और अन्य विज़ुअल संकेतों के आधार पर जरूरी रीडिंग लेता है। AI इन आंकड़ों का विश्लेषण कर प्रारंभिक हेल्थ असेसमेंट तैयार करता है। मरीज अपनी समस्या बोलकर ‘वॉयस AI डॉक्टर’ को बता सकता है। जरूरत पड़ने पर वॉयस AI डॉक्टर मरीज से अतिरिक्त सवाल भी पूछता है। इसकी खासियत यह है कि यह कई प्रमुख भारतीय भाषाओं में संवाद कर सकता है।

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‘जियो आरोग्य AI’ मरीजों को अलग-अलग कैटेगरी में वर्गीकृत कर सकता है और जिन मामलों में तुरंत डॉक्टर की जरूरत हो, उन्हें प्राथमिकता से रेफर करता है। इससे डॉक्टरों का रूटीन वर्कलोड कम होने और गंभीर मामलों पर ज्यादा ध्यान देने में मदद मिल सकती है। कंपनी के अनुसार, AI सिस्टम केवल प्रारंभिक असेसमेंट तैयार करता है और दवा या अन्य मेडिकल सहायता डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं दी जाती।

 

कंपनी का कहना है कि यह मॉडल मौजूदा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जहां कनेक्टिविटी उपलब्ध है, वहां AI क्लिनिक स्थापित किए जा सकते हैं। पोर्टेबल एक्स-रे और पोर्टेबल ईसीजी जैसे डिवाइस भी इससे जोड़े जा सकते हैं। साथ ही मरीज जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन कंसल्टेशन और दवाओं की डिजिटल ऑर्डरिंग जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकता है।

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देश में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार का फायदा उठाते हुए यदि जियो आरोग्य AI जैसे मॉडल बड़े पैमाने पर लागू होते हैं, तो यह शुरुआती जांच और विशेषज्ञ सलाह के बीच की दूरी कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
Edited By : Chetan Gour