राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर CM योगी का खुला चैलेंज: सबूत है तो SIT को दो, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा

Yogi Adityanath in Acton

उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा कि किसी के पास कोई सबूत है तो SIT को सौंपे। दूध का दूध और पानी का पानी होगा। SIT जांच में सब सामने आ जाएगा। उन्होंने कहा कि अपराधी कोई भी हो नहीं बचेगा।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अयोध्या में 291 करोड़ रुपये की 245 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उन्होंने वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा का अनावरण भी किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कुछ लोग है जो नहीं चाहते कि अयोध्या का नाम हो। इन लोगों को नई अयोध्या अच्छी नहीं लगती। ये अयोध्या को बदनाम करना चाहते हैं। 

 

उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए 500 साल संघर्ष हुआ है, इसलिए कोई भी अयोध्या को बदनाम न करे। किसी के पास चंदा चोरी का कोई सबूत है तो वह एसआईटी को दे, इसकी पूरी जांच और सख्त एक्शन होगा।

 

सीएम योगी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आरोप लगाने वाले लोग केवल बदनाम करने का काम कर रहे हैं। इनका आचरण सबके सामने है। जिन्होंने कभी राम भक्तों पर गोलियां चलवाईं, श्री राम बोलने पर लाठियां चलवाईं और कोर्ट में प्रभु राम के खिलाफ केस लड़े। वे ही अयोध्या को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में ना आने की अपील की।

 

राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में SIT का बड़ा एक्शन 

यूपी की योगी सरकार ने राम मंदिर में चढ़ाव चोरी मामले में SIT जांच के आदेश दिए हैं। जांच एजेंसी पिछले 5 दिनों से मामले की जांच कर रही है। SIT ने मंदिर व्यवस्था और चढ़ावे की गिनती की निगरानी करने वाले मुख्य ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को SIT ने आधिकारिक सम्मन भेजकर तलब किया। बंद कमरे में उनसे करीब 4 घंटे तक मैराथन पूछताछ की गई।​ ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से जांच दल ने बेहद कड़े और तीखे सवाल पूछे। ​संदिग्ध भूमिका के चलते रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से भी घंटों पूछताछ हुई।

 

कब आएगी जांच रिपोर्ट

सरकार ने SIT को 7 दिनों में प्रारंभिक और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके आंतरिक ऑडिट में कोई गड़बड़ी नहीं मिली थी। ट्रस्ट ने निष्पक्षता साबित करने के लिए खुद इस SIT जांच की मांग की थी। 

edited by : Nrapendra Gupta

Weather Update : मानसून हुआ धीमा, कई राज्‍यों में गर्मी की मार, बढ़ा बारिश का इंतजार

After advancing rapidly across country pace of monsoon suddenly slowed down

Weather Update News : देशभर में तेजी से कदम बढ़ाने के बाद मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है। इस धीमी रफ्तार ने लोगों को परेशान कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक हवा का दबाव कम होने से मानसून की प्रगति रुक गई है। कुछ राज्यों में अभी भी भीषण गर्मी और लू का असर बना हुआ है। इससे लोगों में बारिश का इंतजार और बढ़ गया है। ओडिशा, तेलंगाना, मध्य महाराष्ट्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग दिनों में लू चलने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में मौसम का मिलाजुला असर देखने को मिलेगा, हालांकि कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

 

यहां लू चलने की संभावना

देशभर में तेजी से कदम बढ़ाने के बाद मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है। इस धीमी रफ्तार ने लोगों को परेशान कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक हवा का दबाव कम होने से मानसून की प्रगति रुक गई है। कुछ राज्यों में अभी भी भीषण गर्मी और लू का असर बना हुआ है। इससे लोगों में बारिश का इंतजार और बढ़ गया है। ओडिशा, तेलंगाना, मध्य महाराष्ट्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग दिनों में लू चलने की संभावना है।

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11 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट

उत्तर प्रदेश में मौसम का मिलाजुला असर देखने को मिलेगा, हालांकि कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 4 से 5 दिनों में मानसून तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कई नए इलाकों तक पहुंच सकता है। इस बीच मौसम विभाग ने दिल्ली समेत 11 राज्यों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।

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बिहार, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना है। बिहार में बारिश होने के आसार हैं। झारखंड के कई इलाकों में आंधी और तूफानी मौसम का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश के साथ गरज-चमक और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि होने की संभावना है।

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कैसा है मध्य प्रदेश का मौसम?

मध्य प्रदेश में आज बादल छाए रह सकते हैं। बारिश, तूफान और बिजली गिरने की संभावना बन रही है। आज प्रदेश के कुल 37 जिलों के लिए यलो अलर्ट है। 4 जून को केरल में दस्तक देने के बाद मानसून 15 दिनों में 19 राज्यों तक तो पहुंचा, लेकिन पिछले 5 दिनों से उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा के आसपास ही अटका हुआ है। इसका असर यह है कि कई राज्यों में बारिश का इंतजार लंबा होता जा रहा है, जबकि गर्मी और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।
Edited By : Chetan Gour

टेलीग्राम पर बैन जारी रहेगा, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराया

telegram ban for neet re exam 2026दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगा अस्थाई बैन हटाने से इनकार कर दिया। केंद्र सरकार ने 21 जून को होने वाली NEET परीक्षा को देखते हुए टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थाई बैन लगाया है। टेलीग्राम को भारत में 30 जून 2026 तक मैसेज एडिटिंग फीचर बंद करने का निर्देश दिया गया है।
 

 

जस्टिस तेजस कारिया ने कहा कि सरकार के पास आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत बैन लगाने का अधिकार है। इस मामले पर कोर्ट की रिव्यू कमेटी ने भी सरकार के फैसले की जांच की थी। सरकार ने पूरी समझदारी से काम लिया है, इसमें किसी तरह की जल्दबाजी या लापरवाही नहीं दिखती।

 

क्या है मामला?

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 16 जून को NEET री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी बैन लगा दिया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली थी। गुरुवार को सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

 

कोर्ट में सरकार की दलील थी कि री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस पर कोर्ट ने पूछा था कि कुछ परीक्षार्थियों की वजह से 15 करोड़ टेलीग्राम यूजर्स के अधिकारों पर रोक कैसे लगाई जा सकती है।

 

NEET-UG परीक्षा 3 मई 2026 को देश भर में आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में करीब 23 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। 7 मई को पेपर लीक की जानकारी मिलने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी।

 

सरकार ने क्यों कसा शिकंजा?

पेपर लीक से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए 22 जून तक टेलीग्राम की पहुंच सीमित की गई। सरकार का कहना है कि कुछ मामलों में टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर का इस्तेमाल परीक्षा होने के बाद पुराने संदेशों को बदलकर यह दिखाने के लिए किया जाता रहा है कि प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध था। इसी वजह से टेलीग्राम को भारत में 30 जून 2026 तक मैसेज एडिटिंग फीचर बंद करने का निर्देश दिया गया।

edited by : Nrapendra Gupta

उत्‍तराखंड मंत्रिमंडल की हुई बैठक, धामी सरकार ने लिए अहम फैसले

cabinet meeting was held under chairmanship of Chief Minister Pushkar Singh Dhami

Chief Minister Pushkar Singh Dhami : उत्‍तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक में सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और प्रसिद्ध निशानेबाज, पद्मश्री जसपाल राणा के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। बैठक में कुल 12 प्रस्ताव आए। मंत्रिमंडल ने बैठक में कई अहम फैसले लिए। धामी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए उत्तराखंड राज्य को पूर्ण साक्षर राज्य की मंजूरी दे दी है। धामी कैबिनेट ने राज्य की साक्षात्कार दर 98 प्रतिशत रिकॉर्ड होने के बाद ये फैसला लिया। इस दौरान उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली 2026 को भी मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता, पाठ्यक्रम निर्धारण और परीक्षा संचालन संबंधी व्यवस्थाओं में संशोधन किए जाएंगे।

 

उत्‍तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक में सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और प्रसिद्ध निशानेबाज, पद्मश्री जसपाल राणा के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। बैठक में कुल 12 प्रस्ताव आए। मंत्रिमंडल ने बैठक में कई अहम फैसले लिए। धामी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए उत्तराखंड राज्य को पूर्ण साक्षर राज्य की मंजूरी दे दी है।

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धामी कैबिनेट ने राज्य की साक्षात्कार दर 98 प्रतिशत रिकॉर्ड होने के बाद ये फैसला लिया। इस दौरान उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली 2026 को भी मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता, पाठ्यक्रम निर्धारण और परीक्षा संचालन संबंधी व्यवस्थाओं में संशोधन किए जाएंगे।

बैठक में उपनल कर्मचारियों को भी बड़ी राहत दी गई। समान कार्य-समान वेतन के लाभ के लिए निर्धारित कटऑफ तिथि को 12 नवंबर 2018 से बढ़ाकर 15 अगस्त 2024 कर दिया गया है। आबकारी विभाग के प्रस्ताव में होलोग्राम दोहराव की स्थिति में दोहरा कर नहीं लगाने का फैसला लिया गया। अब ऐसी परिस्थितियों में केवल एक बार ही कर वसूला जाएगा, जिससे संबंधित व्यापारियों और विभागीय प्रक्रियाओं को राहत मिलेगी।

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बैठक में पर्यटन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय हिमालयन कार रैली के आयोजन को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इस तरह के आयोजन राज्य में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की पहचान को और मजबूत करेंगे। चारधाम यात्रा से जुड़े प्रस्ताव में यात्रा के दौरान संचालित घोड़ा-खच्चरों के लिए बीमा सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सेलाकुई स्थित सगंध एवं हर्बल केंद्र में मिलावट जांच की सुविधा विकसित करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए पांच नए पदों को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। गृह विभाग से संबंधित दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली। इनमें उत्तराखंड कारागार नियमावली में संशोधन और कारागार अधीनस्थ सेवा नियमावली को स्वीकृति देना शामिल है।

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बैठक में लोक निर्माण विभाग से जुड़े प्रस्ताव में बिटुमेन की कीमतों पर चर्चा हुई। पशुपालन विभाग के प्रस्ताव के तहत एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले गौवंश के विकास और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पायलट परियोजना को मंजूरी दी गई।
Edited By : Chetan Gour

LIVE: टेलीग्राम को बड़ा झटका, नहीं हटा अस्थाई बैन

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Latest News Today Live Updates in Hindi : दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगा अस्थाई बैन हटाने से इनकार कर दिया। केंद्र सरकार ने NEET परीक्षा को देखते हुए टेलीग्राम पर अस्थाई बैन लगाया है। पल पल की जानकारी…

LIVE: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर बोले CM योगी, सबूत है तो SIT को दें

Yogi in Acton

Latest News Today Live Updates in Hindi : Latest News Today Live Updates in Hindi : सीएम योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर  कहा कि किसी के पास कोई सबूत है तो SIT को सौंपे। दूध का दूध और पानी का पानी होगा। SIT जांच में सब सामने आ जाएगा। पल पल की जानकारी…

-अमेरिका ने ईरान के साथ शांति समझौते के बाद आज स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से नाकेबंदी खत्म कर दी है।

-व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिकी उपराष्‍ट्रपति जेडी वेंस ईरान से वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड नहीं जा रहे हैं- जिनेवा जा रहे प्रतिनिधिमंडल को ईरान ने रोका। इस वजह से आज अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ता टल गई है।

प्रसिद्ध तीर्थस्थल पावागढ़ पहाड़ी पर शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गई। पहाड़ी पर स्थित पाटियापुल के पास अचानक भारी चट्टानें नीचे गिरने से कुछ तीर्थयात्रियों के मलबे के नीचे दबे गए। इस हादसे में अब तक 2 श्रद्धालुओं की मौत हो गई जबकि 15 लोग घायल है। ALSO READ: पावागढ़ में पहाड़ी से गिरीं विशाल चट्टानें, 2 श्रद्धालुओं की मौत; कई और दबे होने की आशंकाटेलीग्राम पर अस्थायी बैन का फैसला बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम पर से बैन हटाने से किया इनकार।अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर बोले सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी के पास कोई सबूत है तो SIT को सौंपे। दूध का दूध और पानी का पानी होगा। SIT जांच में सब सामने आ जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग है जो नहीं चाहते कि अयोध्या का नाम हो। अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में ना आएं।

पावागढ़ में पहाड़ी से गिरीं विशाल चट्टानें, 2 श्रद्धालुओं की मौत; कई और दबे होने की आशंका

pavagadh accident

प्रसिद्ध तीर्थस्थल पावागढ़ पहाड़ी पर शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गई। पहाड़ी पर स्थित पाटियापुल के पास अचानक भारी चट्टानें नीचे गिरने से कुछ तीर्थयात्रियों के मलबे के नीचे दबे गए। इस हादसे में अब तक 2 श्रद्धालुओं की मौत हो गई जबकि 15 लोग घायल है।

 

मूसलाधार बारिश के कारण खिसकी मिट्टी

बताया जा रहा है कि यह हादसा सुबह करीब 5:00 बजे हुआ। पिछले कुछ समय से हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी पर पानी का बहाव बहुत बढ़ गया था। पानी के तेज प्रवाह की वजह से पहाड़ी की मिट्टी खिसक गई और भारी चट्टानें नीचे आ गिरीं। सुबह-सुबह माताजी के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालु अचानक इन गिरते पत्थरों की चपेट में आ गए। अब तक 2 श्रद्धालुओं के शव बरामद किए जा चुके हैं।

 

युद्ध स्तर पर राहत कार्य

घटना की सूचना मिलते ही रोप-वे की स्थानीय टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पत्थरों के नीचे दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए बचाव कार्य शुरू कर दिया। इस गंभीर हादसे की जानकारी पावागढ़ पुलिस को भी दी गई, जिसके बाद पुलिस का काफिला तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गया। फिलहाल पुलिस और स्थानीय टीम मिलकर संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

 

अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका

यह हादसा इतना भीषण है कि अभी भी पत्थरों और मलबे के नीचे कुछ और तीर्थयात्रियों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन और बचाव दलों ने राहत कार्य को और तेज कर दिया है, ताकि समय रहते लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया जा सके।

 

 

edited by : Nrapendra Gupta

राहुल को कई नियुक्तियां करनी हैं

कांग्रेस संगठन में अनेक पद खाली हैं और राहुल गांधी को नियुक्तियां करनी हैं। वैसे तो उन्होंने पिछले साल को ही संगठन का साल कहा था लेकिन संगठन को लेकर कोई बड़ा फैसला उन्होंने नहीं किया। धीरे धीरे कई पद खाली होते चले गए और नई नियुक्ति नहीं हुई। तभी कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति होनी है तो प्रभारी और महासचिव भी बनाए जाने हैं। हाल में राज्यों में हुए बदलावों की वजह से भी पद खाली हुए हैं। जैसे कर्नाटक में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने से प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली हुआ है। वहां तत्काल बीके हरिप्रसाद की नियुक्ति हो गई। वे प्रदेश अध्यक्ष बन गए। लेकिन उससे पहले बीके हरिप्रसाद हरियाणा के प्रभारी थे। अब भी उनके पास ही यह पद है। ऐसे ही रमेश चेन्निथला को केरल सरकार में मंत्री बनाया गया। वे महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य के प्रभारी हैं। सो, अब कांग्रेस को जल्दी से जल्दी हरियाणा और महाराष्ट्र में प्रभारी की नियुक्ति करनी है। केरल में कांग्रेस की सरकार बनी तो सन्नी जोसेफ को राज्य का ऊर्जा मंत्री बनाया गया। वे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। उनकी भी दोहरी जिम्मेदारी नहीं रहेगी। सो, वहां जल्दी ही नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करना है। ऐसे ही तमिलनाडु में चुनाव के बाद वहां के प्रभारी गिरीश चोडनकर को गोवा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। सो, तमिलनाडु में नया प्रभारी नियुक्त होना है।

राज्यों में हुए बदलावों के अलावा भी कांग्रेस में कई पद खाली हुए हैं। जैसे असम में कांग्रेस के बुरी तरह से हारने के बाद प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह ने इस्तीफा दिया है तो गुजरात कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने भी इस्तीफा दे दिया है। दोनों राज्यों के लिए नए प्रभारी बनाने की चर्चा है। अगले साल जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं वहां भी बदलाव की चर्चा है। खास कर उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में। पंजाब में राहुल गांधी को जाट सिख, दलित और हिंदू का संतुलन बनाना है और ले देकर उसके पास चार ही चेहरे हैं। प्रदेश अध्यक्ष राजा अमरिंदर सिंह वारिंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और राजस्थान के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा। कांग्रेस तय नहीं कर पा रही है कि इन चेहरों का प्रभावी तरीके से कैसे इस्तेमाल किया जाए। नवजोत सिंह सिद्धू अब लगभग हाशिए में हैं और अलग ही हो चुके हैं।

चुनाव वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश का मामला थोड़ा उलझा हुआ है। कांग्रेस को वहां सोच समझ कर फैसला करना है। पिछले करीब तीन साल से अजय राय प्रदेश अध्यक्ष हैं। अविनाश पांडे प्रभारी हैं और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी अराधना मिश्रा विधायक दल की नेता हैं। राहुल गांधी के पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीति में ये फिट नहीं बैठ रहे हैं। अध्यक्ष या प्रभारी में से कोई एक बदलेगा, इसकी चर्चा है। उत्तराखंड में कांग्रेस को जल्दी ही फैसला करना है कि फिर हरीश रावत का चेहरा ही आगे रहेगा या किसी और को प्रमोट करना है। राहुल गांधी की पहले की कई नियुक्तियों को लेकर सवाल उठे हैं। यह चर्चा भी है कि वे उसमें कुछ बदलाव कर सकते हैं। जैसे बिहार में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को बदलने की चर्चा है। पिछले साल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह को हटा कर उनकी जगह राजेश राम को अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन वे खुद भी अपनी सीट हार गए और कांग्रेस ने ऐतिहासिक रूप से खराब प्रदर्शन किया। सो, कुल मिला कर कांग्रेस को कई प्रदेश अध्यक्ष और कई प्रभारी नियुक्ति करने हैं।

राजनीतिक लोगों को आगे करेंगे या..

कांग्रेस में अध्यक्ष और प्रभारी महासचिवों के खाली पदों पर नियुक्तियों की चर्चा के साथ ही कांग्रेस में इस बात की भी चर्चा है कि राहुल गांधी राजनीतिक लोगों को आगे करेंगे या गैर राजनीतिक लोगों पर ज्यादा भरोसा करेंगे? यह सवाल भी है कि अगर राजनीतिक लोगों को आगे करेंगे तो पुराने और अनुभवी लोगों को तरजीह देंगे या अपने प्रति निष्ठा रखने वाले ऐसे युवाओं को आगे करेंगे, जिनमें अनुभव की कमी है? गौरतलब है कि राहुल गांधी ने पिछले कुछ सालों में जो नियुक्तियां की हैं उनमें अराजनीतिक और कम अनुभव वाले लोगों को ज्यादा महत्व दिया है। राहुल के करीबियों का कहना है कि पार्टी में नई लीडरशिप पैदा करने के लिए ऐसा जरूरी है। लेकिन समस्या यह है कि ऐसे नेताओं के साथ प्रदेश कमेटी का तालमेल नहीं बैठता है या फिर सहयोगी दलों के साथ किसी न किसी तरह का विवाद हो जाता है। ऐसा न भी हो तो ये नेता अपने कामकाज से कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाते हैं।

जैसे बिहार में राहुल ने अपने करीबी कृष्णा अल्लावरू को राज्य का प्रभारी बनाया। लेकिन वे पिछले साल के चुनाव में बुरी तरह फेल हुए। वे प्रदेश के नेताओं को साथ लेकर नहीं चल सके, गुटबाजी नहीं रोक सके, राजद के साथ सीट बंटवारा नहीं करा सके उसके लिए अशोक गहलोत को जाना पड़ा और सीट बंटवारे में पैसे के लेन देन के आरोप लगे और अंततः पार्टी बुरी तरह से हारी। उसके बाद पिछले आठ महीने में वे सिर्फ एक बार बिहार गए हैं। ऐसे ही राहुल ने झारखंड में के राजू को प्रभारी बनाया। उनका प्रदेश की राजनीति में कोई मतलब नहीं बन पाया है। राहुल ने केशव महतो कमलेश को झारखंड का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। लेकिन वे कोई असर नहीं छोड़ पा रहे हैं। अपनी करीब मीनाक्षी नटराजन को राहुल गांधी ने तेलंगाना का प्रभारी बनाया है। हर्षवर्धन सपकाल को उन्होंने महाराष्ट्र का प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो सबको हैरानी हुई। तभी यह सवाल पूछा जा रहा है कि वे ऐसे लोगों को नियुक्त करेंगे या कुछ अनुभवी नेताओं को भी मौका देंगे?

भाजपा ने क्या टाल दिया बदलाव?

भारतीय जनता पार्टी में अचानक संगठन के बदलाव की चर्चा थम गई है। सिर्फ संगठन ही नहीं, बल्कि सरकार में होने वाली फेरबदल की भी बात नहीं हो रही है। ध्यान रहे नितिन नबीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बने पांच महीने हो गए हैं। लेकिन अभी तक उन्होंने अपनी टीम नहीं बनाई। जेपी नड्डा की टीम ही उनके साथ काम कर रही है। प्रदेशों में जहां कांग्रेस ने नए अध्यक्ष नियुक्त किए वहां तो फटाफट कमेटी का गठन हो गया। लेकिन केंद्रीय कमेटी का गठन नहीं हो पा रहा है। पार्टी के एक प्रभावी महासचिव तरुण चुघ को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया है। उसके बाद से उनके केंद्र में मंत्री बनने की चर्चा शुरू हो गई है, जबकि पंजाब में अगले साल चुनाव हैं, जहां के वे प्रभारी हैं।

भाजपा के एक और महासचिव विनोद तावड़े के बारे में भी केंद्र में मंत्री बनने की चर्चा है। जब नितिन नबीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे तब इस बात की चर्चा थी कि तरुण चुघ और तावड़े संगठन में ही रहेंगे। महासचिवों में से एक राधामोहन दास अग्रवाल को बदले जाने की चर्चा थी। साथ ही सुनील बंसल के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बनने की भी चर्चा थी। सरकार के कई लोगों को संगठन में लाने और नितिन नबीन की नई टीम बनाने की चर्चा थी। उत्तर प्रदेश से नया नेता राष्ट्रीय संगठन में लाना था। लेकिन सारी चर्चाएं अचानक थम गई हैं। 20 जून तक सरकार और संगठन दोनों में बदलाव हो जाने की खबर थी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंत्रिपरिषद की बैठक की थी और उसके बाद तीसरी सरकार के दो साल पूरे होने का जश्न भी हुआ। लेकिन अब बदलाव की चर्चा नहीं हो रही है। उसकी जगह अगले मानसून सत्र में होने वाले बड़े घटनाक्रम की चर्चा ज्यादा तेज हो गई है।