International Yoga Day 2026 : कोलकाता में PM मोदी ने किया योग, गुजरात में अमित शाह भी हुए शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर सामूहिक योग कार्यक्रम के दौरान योगाभ्यास किया। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 'स्वस्थ आयु के लिए योग' की थीम के साथ मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर सामूहिक योग कार्यक्रम के दौरान योगाभ्यास किया।

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 'स्वस्थ आयु के लिए योग' की थीम के साथ मनाया जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद और अन्य नेता अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 पर आयोजित एक सामूहिक कार्यक्रम में शामिल हुए।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि योग आज केवल हमारी निजी जीवन शैली के जरूरी हो, इतना ही नहीं है बल्कि योग दुनिया के बेहतर भविष्य के लिए एक आवश्यकता भी है।  

 

मोदी ने कहा कि योग दिवस के अवसर पर आज बंगाल में होना बहुत ही विशेष है । बंगाल की ये पवित्र भूमि जहां भगवान राम कृष्ण परमहंस जैसे सिद्ध संतों ने अवतार लिया। जहां से निकलकर स्वामी विवेकानन्द ने पूरे विश्व को योग से परिचय करवाया। जहां महर्षि अरविंद जैसे महान योगी ने जन्म लिया…आज उसी धरती पर सामूहिक योग का अनुभव एक अलग आध्यात्मिक अनुभूति दे रहा है।  Edited by : Sudhir Sharma

यूपी में स्थानीय भाषा में मिलेगी नौकरी की जानकारी, सभी मंडलों में योगी सरकार शुरू करेगी ‘ब्लू डॉट्सएआई’

Job information to be available in local language in Uttar Pradesh

– स्थानीय युवाओं और एमएसएमई को जोड़ने के लिए 'ब्लू डॉट्सएआई' की शुरुआत, मुजफ्फरनगर में खुला पहला जेएफसी

– अब मोबाइल मैप पर दिखेंगी आसपास की नौकरियां, गाजियाबाद के सफल मॉडल को पूरे प्रदेश में मिलेगा विस्तार

– 18 मंडलों में शुरू होगी डिजिटल रोजगार पहल, युवाओं, महिलाओं और कुशल श्रमिकों को स्थानीय रोजगार से जोड़ने की तैयारी

– स्थानीय उद्योगों को मिलेंगे आसपास के प्रशिक्षित अभ्यर्थी, रोजगार व्यवस्था होगी मजबूत

Uttar Pradesh News : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्थानीय रोजगार, कौशल विकास और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रदेश के सभी 18 मंडलों में 'ब्लू डॉट्सएआई' (Blue DotsAI) पहल का शुभारंभ मुजफ्फरनगर से किया। व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कपिल देव अग्रवाल ने शनिवार को मुजफ्फरनगर में प्रदेश के पहले संयुक्त सुविधा केंद्र (ज्वाइंट फैसिलिटेशन सेंटर- जेएफसी) का उद्घाटन किया। गाजियाबाद में सफल पायलट परियोजना के बाद अब इस डिजिटल पहल का विस्तार पूरे उत्तर प्रदेश में किया गया है।

 

इस अवसर पर मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य स्थानीय युवाओं, महिलाओं और कुशल श्रमिकों को उनके आसपास उपलब्ध रोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ना है। उन्होंने कहा कि अब युवा अपनी स्थानीय भाषा में वॉयस कॉल के माध्यम से भी इस प्लेटफॉर्म से जुड़ सकेंगे और अपने क्षेत्र में उपलब्ध नौकरियों की जानकारी मोबाइल मैप पर आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

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साथ ही स्थानीय एमएसएमई और उद्योगों को भी अपने आसपास के योग्य एवं प्रशिक्षित अभ्यर्थियों तक त्वरित पहुंच मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय हुनर और स्थानीय उद्योग एक-दूसरे से जुड़ेंगे, तब आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश का लक्ष्य और अधिक मजबूत होगा।

 

उन्होंने कहा कि तकनीक केवल माध्यम है, वास्तविक सफलता विभागीय टीमों, उद्योगों और सहयोगी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से ही संभव होगी। इस अभिनव पहल को सफल बनाने में गाजियाबाद की जिला टीम, विभागीय अधिकारियों तथा सहयोगी संस्थाओं के योगदान की भी उन्होंने सराहना की।

 

व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा संचालित इस पहल में ईवाई, एकस्टेप फाउंडेशन (EkStep Foundation) तथा हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

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इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं, महिलाओं, प्रशिक्षण संस्थानों, उद्योगों तथा नियोक्ताओं को एक साझा डिजिटल मंच पर जोड़ा जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

 

मंत्री अग्रवाल ने बताया कि गाजियाबाद में संचालित पायलट परियोजना ने बेहद उत्साहजनक परिणाम दिए। कुछ ही महीनों में 16 हजार से अधिक स्थानीय रोजगार अवसरों और 15 हजार से अधिक इच्छुक अभ्यर्थियों का सफल पंजीकरण किया गया। यह उपलब्धि उद्योगों के सीमित दायरे को जोड़ने के बावजूद प्राप्त हुई, जिससे स्पष्ट है कि पूरे प्रदेश में इस पहल के माध्यम से रोजगार सृजन की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

 

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बड़ी चुनौती यह है कि एक ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर और योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध होने के बावजूद जानकारी के अभाव में दोनों एक-दूसरे तक नहीं पहुंच पाते। परिणामस्वरूप उद्योगों को आवश्यक मानव संसाधन नहीं मिलता और युवाओं को रोजगार के लिए दूर-दराज भटकना पड़ता है। 'ब्लू डॉट्सएआई'* इसी को समाप्त करने का प्रभावी माध्यम बनेगा। स्थानीय भाषा आधारित वॉयस सुविधा और लोकेशन आधारित मैपिंग के जरिए यह प्लेटफॉर्म युवाओं एवं उद्योगों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करेगा।

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मुजफ्फरनगर में स्थापित पहला संयुक्त सुविधा केंद्र क्षेत्रीय समन्वय, निगरानी और सेवा वितरण का प्रमुख केंद्र होगा। आगामी चरणों में प्रदेश के सभी 18 मंडलों में ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां जिला उद्योग केंद्र, श्रम विभाग, रोजगार कार्यालय, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, उच्च शिक्षण संस्थान, उद्योग संघ, एमएसएमई, स्टार्टअप्स तथा अन्य स्थानीय साझेदार संस्थाएं एकीकृत रूप से कार्य करेंगी।
Edited By : Chetan Gour

महाराष्ट्र में भयावह हादसा, परभणी में मंदिर की गिरी छत, 7 श्रद्धालुओं की मौत, कई घायल

Roof of temple collapsed in Maharashtra's Parbhani district

Parbhani Temple Roof Collapsed : महाराष्ट्र के परभणी जिले में भयावह दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। खबरों के अनुसार, यशवाड़ी गांव स्थित मशहूर हनुमान मंदिर में शनिवार को श्रद्धालु पूजा और धार्मिक कार्यक्रम में व्यस्त थे, तभी अचानक निर्माणाधीन छत एक हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा और पूरा परिसर चीख-पुकार से गूंज उठा और अफरातफरी मच गई। इस दौरान मलबे में दबने से 7 श्रद्धालुओं की मौत की खबर है, जबकि 20 से ज्‍यादा घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिसमें करीब 6 श्रद्धालुओं की हालत गंभीर है। दिल दहलाने वाले इस हादसे का वीडियो भी सामने आया है। 

 

भरभराकर गिरा निर्माणाधीन छत का हिस्सा

महाराष्ट्र के परभणी जिले में भयावह दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। खबरों के अनुसार, यशवाड़ी गांव स्थित मशहूर हनुमान मंदिर में शनिवार को श्रद्धालु पूजा और धार्मिक कार्यक्रम में व्यस्त थे, तभी अचानक निर्माणाधीन छत एक हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा, जिससे चीख-पुकार और अफरातफरी मच गई। इस दौरान मलबे में दबने से 7 श्रद्धालुओं की मौत की खबर है, जबकि 20 से ज्‍यादा घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिसमें करीब 6 श्रद्धालुओं की हालत गंभीर है।

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हादसे का वीडियो भी आया सामने 

दिल दहलाने वाले इस हादसे का वीडियो भी सामने आया है। खबरों के मुताबिक, हादसा इतनी तेजी से हुआ कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। जो लोग मंडप के ठीक नीचे बैठे थे, वे सीधे मलबे की चपेट में आ गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीण और मंदिर में मौजूद अन्य श्रद्धालु राहत कार्य में जुट गए। कई लोगों ने अपने हाथों से मलबा हटाकर घायलों को बाहर निकाला।

प्रधानमंत्री मोदी ने हादसे पर जताया गहरा दुख

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत दल मौके पर पहुंच गए। बचाव टीमों ने विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।  

हादसे पर क्‍या बोले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस? 

हादसे को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मंदिर की निर्माणाधीन छत का हिस्सा गिरने से यह दुखद घटना हुई है और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। शनिवार का दिन होने, साथ ही वीकेंड की छुट्टी होने की वजह से भारी संख्या में श्रद्धालु मंदिर आए थे।
Edited By : Chetan Gour

बुंदेलखंड में दिख रहा विकास का नया मॉडल : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi said that new model of development is visible in Bundelkhand

– विकसित भारत संकल्प सम्मेलन में बोले मुख्यमंत्री- ‘राष्ट्र प्रथम’ भाजपा की पहचान, विकसित भारत के लिए पंच प्रण जरूरी

– पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने ऊंचाइयों को छुआ, समाज को जाति-धर्म के नाम पर बांटने में जुटीं सपा व कांग्रेस

– कांग्रेस के लिए गांधी परिवार, सपा के लिए सैफई परिवार ही महत्वपूर्ण

– योगी ने कहा- यूपी में माफिया की कमर टूट चुकी या मिट्टी में मिल गया

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बुंदेलखंड अब पिछड़ेपन का प्रतीक नहीं, बल्कि विकास का नया मॉडल बन रहा है। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, फार्मा पार्क और रोजगार के नए अवसरों ने क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। अब बुंदेलखंड का युवा पलायन नहीं कर रहा, बल्कि सरकारी नौकरियों और उद्योगों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है।

सरकार का लक्ष्य हर नौजवान को रोजगार, हर किसान के खेत तक पानी और हर गांव को आत्मनिर्भर बनाना है। विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब उत्तर प्रदेश का हर जिला, हर गांव और हर नगर आत्मनिर्भर और विकसित बनेगा।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित 'विकसित भारत संकल्प सम्मेलन' को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय व श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्रों पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कांग्रेस व समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश को ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मंत्र दिया, जिसके कारण भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि 140 करोड़ भारतवासियों का सामूहिक प्रयास ही विकसित भारत की नींव है। जब पूरा देश एक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ता है तो गुलामी के प्रतीकों को हटाने और भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण जैसे ऐतिहासिक कार्यों में देर नहीं लगती। राम मंदिर केवल प्रभु रामलला का मंदिर नहीं, बल्कि नए भारत के राष्ट्र मंदिर के निर्माण की शुरुआत है।

 

कांग्रेस-यूपीए ने खराब की देश की व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय देश की स्थिति बदहाल हो चुकी थी। भ्रष्टाचार चरम पर था, अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही थी और दुनिया में भारत का सम्मान कम हो गया था। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। आज भारत दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन चुका है।

इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, रेलवे, एयर कनेक्टिविटी और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव हुए हैं। बुंदेलखंड में डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज और बड़े निवेश इसकी मिसाल हैं। सपा सरकार के रहते उत्तर प्रदेश में आतंक व असुरक्षा का वातावरण बनाने वाले माफिया की कमर टूट चुकी है या मिट्टी में मिल गया है।

 

जाति-धर्म के नाम पर समाज को बांट रहा विपक्ष

मुख्यमंत्री ने सपा व कांग्रेस पर समाज को बांटने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब इन दलों के पास सत्ता थी तब ये केवल अपने परिवार के लिए काम करते थे। जनता ने जब इन्हें सत्ता से बाहर कर दिया तो अब ये जाति-धर्म के नाम पर समाज को बांटने में जुटे हैं।

विदेशी आक्रांताओं ने भी भारत को इसी तरह विभाजित कर कमजोर किया था। इसलिए सामाजिक एकता व राष्ट्रवाद ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। भाजपा कार्यकर्ता समाज को जोड़ने और राष्ट्र निर्माण के लिए काम करता है, जबकि विपक्ष विभाजनकारी राजनीति में लगा हुआ है।

 

कांग्रेस के लिए गांधी परिवार, सपा के लिए सैफई परिवार ही महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस से पूछिए कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है, तो वह गांधी परिवार का नाम लेगी। समाजवादी पार्टी से पूछिए तो वह सैफई परिवार को सबसे ऊपर बताएगी। भाजपा कार्यकर्ता सबसे पहले राष्ट्र को महत्व देता है। भाजपा की राजनीति ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना पर आधारित है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। भाजपा कार्यकर्ता देश की सुरक्षा, समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित भाव से काम करता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से विकसित भारत के संकल्प को गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया।

 

कोविड काल में पीएम मोदी ने दिया ‘विकसित भारत’ का विजन

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2022 में जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी और कई देश हिम्मत हार चुके थे, उस समय प्रधानमंत्री मोदी जी देशवासियों को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प से जोड़ रहे थे। मोदी जी ने विकसित भारत के लिए पंच प्रण का मंत्र दिया।

इसमें गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, विरासत का सम्मान, सेना व सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान, सामाजिक एकता और नागरिक कर्तव्य को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है। कोई भी देश तब तक आत्मनिर्भर नहीं बन सकता, जब तक वह गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकलता। भारत के पास ज्ञान, संस्कृति, परंपरा व आर्थिक समृद्धि सब कुछ था, लेकिन पहले मुगलों और बाद में अंग्रेजों ने भारतीय व्यवस्था को कमजोर कर दिया था।

 

भगवान राम राजा की परंपरा का किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने ओरछा में भगवान राम राजा की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यकाल में जब देश गुलामी के दौर से गुजर रहा था, तब संत तुलसीदास जी ने भारतीय संस्कृति और आस्था को मजबूत करने का आह्वान किया था। तुलसीदास जी को कई बार अकबर के दरबार में जाने और नवरत्नों में शामिल होने का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। उन्होंने रामलीलाओं की शुरुआत करवाई और ‘राजा रामचंद्र की जय’ का उद्घोष कराया। ओरछा में आज भी भगवान राम राजा के रूप में विराजमान हैं।

 

इस अवसर पर विधानपरिषद सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह, सांसद अनुराग शर्मा, महापौर बिहारी लाल आर्य, विधायक रवि शर्मा, राजीव सिंह, जवाहर लाल राजपूत, रश्मि आर्य, एमएलसी रमा निरंजन आदि मौजूद रहे।
Edited By : Chetan Gour

यूपी के 2.17 करोड़ से अधिक किसानों के खाते में आई 4352.40 करोड़ की ‘सम्मान निधि’

Samman Nidhi funds credited to accounts of over 2.17 crore farmers in Uttar Pradesh

– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल से जारी की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त

– अन्नदाता के परिश्रम, सम्मान और समृद्धि के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है सम्मान निधि

– झांसी में आयुक्त सभागार से कार्यक्रम में वर्चुअल जुड़े मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

Uttar Pradesh News : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल से पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त जारी की। इससे उत्तर प्रदेश के 2.17 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित हुए, उनके खाते में 4352.40 करोड़ रुपए की ‘सम्मान निधि’ आई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ झांसी स्थित आयुक्त सभागार में इस कार्यक्रम से जुड़े। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। 

 

झांसी में वर्चुअल जुड़े मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल से पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त भेजी। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ झांसी से ऑनलाइन जुड़े। यहां सांसद अनुराग शर्मा, राज्यमंत्री मनोहर लाल ‘मन्नू कोरी’, विधायक जवाहर लाल राजपूत, उप्र गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता समेत स्थानीय जनप्रतिनिधि भी जुड़े रहे। 

 

अन्नदाता की समृद्धि और खुशहाली डबल इंजन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताः मुख्यमंत्री

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट कर उत्तर प्रदेश के सभी किसान साथियों की ओर से इस ऐतिहासिक सौगात के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया। मुख्यमंत्री ने लिखा कि अन्नदाता किसानों की समृद्धि और खुशहाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसी संकल्प की सिद्धि हेतु आज प्रधानमंत्री जी द्वारा पश्चिम बंगाल से 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' की 23वीं किस्त के रूप में 18,880 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि देश के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों को हस्तांतरित की गई है।

इनमें उत्तर प्रदेश के 2.17 करोड़ से अधिक किसान भी लाभान्वित हुए हैं, जिनके खातों में 4,352.40 करोड़ रुपए की राशि सीधे पहुंची है। यह राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अन्नदाता के परिश्रम, सम्मान और समृद्धि के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। 

 

दो-दो हजार रुपए आए बैंक खाते में 

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि डीबीटी के माध्यम से दो-दो हजार रुपए सीधे लाभार्थी के खाते में हस्तांतरित हुए। इसमें पात्र किसान परिवार के एक सदस्य को प्रतिवर्ष छह हजार रुपए की आर्थिक सहायता वर्ष में दो-दो हजार रुपए प्रति किस्त के रूप में तीन बार में प्रदान किए जाने की व्यवस्था है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी 2019 को गोरखपुर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की थी। 

 

उत्तर प्रदेश के किसानों के खाते में अब तक आ चुके 103,391.24 करोड़ रुपए 

शनिवार को 4352.40 करोड़ जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश के किसानों के खाते में अब तक 103,391.24 करोड़ रुपए की सम्मान निधि आ चुकी है। 

 

वर्ष                धनराशि 

2018-19      2238.92 करोड़ 

2019-20      11006.87 करोड़ 

2020-21      14,432.14 करोड़ 

2021-22      15,775.52 करोड़ 

2022-23      12,454.32 करोड़ 

2023-24     13,808.48 करोड़ 

2024-25      15,594.74 करोड़ 

2025-26     13,727.85 करोड़

2026-27      (अप्रैल-जुलाई) 4352.40 करोड़ 

कुल-  1,03,391.24 करोड़ रुपए
 

Edited By : Chetan Gour

कांग्रेस व सपा सरकारों ने ललितपुर को कुल 1500 करोड़ रुपए भी नहीं दिए होंगे : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi Adityanath gifted projects to Lalitpur

– मुख्यमंत्री योगी ने किया राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित 1766 करोड़ रु. की 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास

– सपा-कांग्रेस ने उपेक्षित रखा, हम ललितपुर को एक दिन में दे रहे 1500 करोड़ रुपए से अधिक की सौगात

– अब बहन-बेटियों को सिर पर नहीं ढोना पड़ता पानी, बुंदेलखंड में हर घर जल योजना साकार

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ललितपुर को आज एक साथ 1500 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं की सौगात मिल रही है। कांग्रेस ने पांच दशक और सपा ने चार बार प्रदेश में शासन किया, लेकिन इन दलों ने कुल मिलाकर 1500 करोड़ रुपए भी ललितपुर को नहीं दिए होंगे, क्योंकि उनमें विकास की सोच नहीं थी। सपा के लिए सैफई ही परिवार था और कांग्रेस के लिए दिल्ली का परिवार ही देश था। दोनों इससे बाहर नहीं निकल सकते। लेकिन, हमारे लिए 25 करोड़ जनता ही परिवार है और उसे विकास, सुरक्षा, सम्मान देना हमारा दायित्व है। 

 

मुख्यमंत्री शनिवार को तुवन मंदिर मैदान में राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित 1766 करोड़ रुपए की 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर ललितपुर की विकास यात्रा पर लघु फिल्म भी दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात बुंदेलखंड के सुंदरतम जनपदों में से एक ललितपुर हमारे हृदय में बसता है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित जनता का अभिनंदन करते हुए आश्वासन दिया कि डबल इंजन सरकार यहां के विकास के लिए हरसंभव कदम उठाएगी।

 

अब ललितपुर के युवाओं व बेटियों को मिलती है सरकारी नौकरी 

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस व सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि संकुचित सोच वाली इनकी सरकारों ने हर जनपद में एक-एक माफिया दिया था, जो जनता की गाढ़ी कमाई पर डकैती डालने के साथ अवैध खनन, वनों की अवैध कटान, गोतस्करी करते थे। प्रदेश को बंजर बनाते थे। इन लोगों ने यूपी को बीमारू बनाकर बुंदेलखंड के नौजवानों को पलायन पर मजबूर किया। बहन-बेटियों को कष्ट दिया था, लेकिन आज ललितपुर की बेटियां व नौजवान यूपी पुलिस समेत सरकारी नौकरियों में भर्ती होते हैं। 

 

पिछली सरकारों की उपेक्षा का दंश झेलता था ललितपुर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों की उपेक्षा का दंश झेलने वाला ललितपुर विकास की योजनाओं से कोसों दूर था। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास परियोजनाएं नहीं थीं। पानी होने के बावजूद खेती के लिए सिंचाई, गरीब के लिए आवास की सुविधा नहीं थी। मिट्टी के घड़े में पानी ढोते-ढोते माता-बहनों की जिंदगी व्यतीत हो जाती थी। यहां के संसाधनों व वन संपदा में लूट होती थी और मुट्ठी भर लोग अवैध खनन कर अव्यवस्था पैदा करते थे। 

 

अब नवाचार के लिए जाना जा रहा है ललितपुर

मुख्यमंत्री ने कहा कि ललितपुर अब विकास की ऊंचाइयों को प्राप्त कर नवाचार के लिए जाना जा रहा है। प्रदेश की पहली गोशाला देकर ललितपुर ने बताया था कि सरकार भी गोशाला का संचालन कर सकती है। तुवन सरकार की कृपा से तत्कालीन जिला प्रशासन ने पहली गोशाला प्रारंभ की थी। अब वहां से कंपोस्ट का निर्यात अन्य देशों को होने जा रहा है। अब ललितपुर के पास मेडिकल कॉलेज, अटल आवासीय विद्यालय भी है। 1500 एकड़ में यूपी का पहला फार्मा पार्क ललितपुर में बनेगा, इसकी तैयारी हो चुकी है। इससे हजारों नौजवानों को नौकरी मिलेगी। 

 

बुंदेलखंड में बसने जा रहा यूपी का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बहन-बेटियां, माताएं सिर पर घड़ा लेकर नहीं जातीं, क्योंकि बुंदेलखंड में हर घर जल की योजना साकार हो रही है। हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की चर्चा करते हुए कहा कि हम लोग यूपी का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर बुंदेलखंड में बसाने जा रहे हैं। पहले यहां का युवा पलायन करता था। ठोकर से घड़ा फूट जाता था तो माताएं-बहनें किस्मत पर रोती थीं।

आपके पूर्वजों ने बुंदेलखंड को सजाया-संवारा था, लेकिन पिछली सरकारों के निकम्मेपन और माफियावृत्ति के कारण बुंदेलखंड पिछड़ा था। हर जनपद में माफिया नौजवानों की नौकरी पर डकैती डालता था। विकास योजनाओं पर गुंडों को बैठाकर जनता के हक को छीना जाता था, जिससे बुंदेलखंड ठगा महसूस करता था। 

 

नए भारत को ताकत दे रहे पीएम मोदी

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि सरकार ने बुंदेलखंड को भी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के हब के रूप में विकसित करने की बात कही थी। अभी इस कॉरिडोर में यूपी के अंदर ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। ऑपरेशन सिंदूर में जब यह मिसाइल दागी गई तो पाकिस्तान त्राहिमाम करते हुए जान की भीख मांग रहा था। पीएम मोदी नए भारत को ताकत दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश समेत बुंदेलखंड का कायाकल्प हो रहा है।

यहां की पहचान अब नौजवानों को नौकरी, बहन-बेटियों की सुरक्षा-समृद्धि से हो रही है। महिला स्वयंसेवी समूह की बहनें बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर के माध्यम से तेजी से कैसे आय बढ़ा सकती हैं, बुंदेलखंड, ललितपुर, झांसी इस मॉडल का प्रतीक बन रहा है।

 

पूरी हो गई दशकों से लंबित अर्जुन सहायक परियोजना 

मुख्यमंत्री ने कहा कि समग्र विकास का कोई विकल्प नहीं हो सकता। विकास ही जीवन में परिवर्तन लाएगा। नौजवान, किसान, कारीगर, हस्तशिल्पी, व्यापारी, बेटी-बहन समेत समाज के हर तबके को विकास का वाहक बनाना पड़ेगा, तब किस्मत बदलेगी और समृद्धि आएगी। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने यही कार्य किया।

लंबित सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से बढ़ाया गया है। दशकों से लंबित अर्जुन सहायक परियोजना अब पूरी हो गई। रतौली बांध, बावनी बांध, कचनौदा बांध, चिल्ली सिंचाई आदि परियोजनाओं ने बुंदेलखंड के किसानों की किस्मत बदली है। किसानों की आमदनी अब कई गुना हो रही है। 

 

गोरखपुर या उप मुख्यमंत्रियों के जनपदों को नहीं दिया मेडिकल कॉलेज

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने गोरखपुर या उप मुख्यमंत्रियों के जनपदों के लिए नहीं, बल्कि ललितपुर के लिए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किया। मुख्यमंत्री युवा के माध्यम से युवा उद्यमी बनाए जा रहे हैं। पूर्वजों ने कहा था कि ललितपुर न छोड़ियो, जब तक मिले उधार। किंतु अब आपको उधार लेने की जरूरत नहीं, क्योंकि सरकार ब्याज-गारंटी मुक्त पैसा दे रही है। अपना व्यवसाय चलाइए और कुछ समय बाद पैसा वापस कर दीजिए। आपका व्यवसाय भी बढ़ेगा और आप उद्यमी भी हो जाएंगे।

 

मुख्यमंत्री ने विधायकों व सांसद की जमकर तारीफ भी की

मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छा कार्य तब होता है, जब अच्छी सरकार आती है। अच्छी सरकार तब आती हैं, जब अच्छे विधायक-सांसद चुने जाते हैं। मुख्यमंत्री ने मन्नू कोरी व रामरतन कुशवाहा को ईमानदार, मेहनती तथा जनसेवा के प्रति पूरी तरह समर्पति बताते हुए कहा कि वे दिन-रात काम करते हैं। हमने उनसे कहा है कि मेहनत से जनता की सेवा करिए। परिवारवाद के खिलाफ खड़े रहिए, पार्टी आपके साथ खड़ी रहेगी। इन लोगों को सांसद अनुराग शर्मा का सान्निध्य भी प्राप्त होता है।

आयुर्वेद आरोग्यता के लिए ऋषि परंपरा का सबसे बड़ा उपकार है। सैकड़ों वर्षों से सांसद जी का परिवार उस विधा को पुनर्जीवित कर भारत की पारंपरिक उपचार व्यवस्था को बढ़ा रहा है। वैद्यनाथ के नाम पर उन्होंने तेजी के साथ आर्युवेद का विस्तार किया है। ललितपुर में फॉर्मा पार्क के बाद आयुष पार्क भी बनाएंगे, जिसमें सांसद जी के अनुभव का लाभ मिलेगा। 

 

33 से अधिक देशों ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अमेरिका-ईरान युद्ध में दुनिया में ईंधन की आपूर्ति बाधित हुई तो अमेरिका भी किंकर्तव्यविमूढ़ जैसी स्थिति में था। भारत में ऊर्जा संकट न पैदा हो, महंगाई न बढ़े, इसके लिए मोदी जी के नेतृत्व में कार्य किया गया। यह कार्य अन्य देशों में नहीं हो पाया। स्लोवाकिया समेत 33 से अधिक देशों ने पीएम मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है। इससे 140 करोड़ भारतीयों का भी सम्मान होता है और देश अपने यशस्वी प्रधानमंत्री पर गौरव की अनुभूति करता है।

 

समारोह में प्रभारी मंत्री दानिश आजाद अंसारी, राज्यमंत्री मनोहर लाल ‘मन्नू कोरी’, सांसद अनुराग शर्मा, विधान परिषद सदस्य रमा निरंजन, जिला पंचायत अध्य़क्ष कैलाश नारायण निरंजन, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष सोनाली जैन, तुवन सरकार मंदिर के महंत रामलखन दास जी, भाजपा जिलाध्यक्ष हरिशचंद्र रावत आदि मौजूद रहे। विधायक रामरतन कुशवाहा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
Edited By : Chetan Gour

नॉर्वे की युवराज्ञी अस्पताल में और बेटा जेल में

Norway Crown Princess Mette-Marit

Norway-Crown Princes: विधि का विधान भी कई बार कितना विचित्र होता है! नॉर्वे की 52 वर्षीय युवराज्ञी (क्राउन प्रिंसेस) मेत्ते-मारित, 2018 से ही फेफड़ों की एक असाध्य बीमारी से जूझ रही थीं। एक लंबी प्रतीक्षा के बाद, 17 जून को प्रतिरोपित एक नए फेफड़े के साथ अब वे अस्पताल में हैं। युवराज हाकोन मग्नुस के साथ उनके विवाह से पहले का 29 साल का उनका एक बेटा भी है— मारियुस बोर्ग ह्यिबी। बलात्कार के दो गंभीर मामलों के कारण, अदालत ने उसे 4 साल की सज़ा काटने के लिए इन्हीं दिनों जेल भेज दिया है! 

 

युवराज्ञी मेत्ते-मारित की मुश्किल घड़ी आधिकारिक तौर पर अक्टूबर 2018 में शुरू हुई थी। उस समय, नॉर्वे के राजमहल ने घोषणा की थी कि वे फेफड़ों के “क्रॉनिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस” रोग से पीड़ित हैं—यह फेफड़ों में होने वाली एक जानलेवा असाध्य बीमारी है। डॉक्टरों ने इस बीमारी का पता शुरुआती दौर में ही लगा लिया था। मेत्ते-मारित ने उस समय घोषणा की कि जब तक संभव होगा, वे अपने राजकीय दायित्व निभाती रहेंगी। ALSO READ: नॉर्वे का राजपरिवार चिंताग्रस्त क्यों है?

बीमारी बढ़ती ही गई

समय के साथ बीमारी का असर बढ़ता ही गया। मेत्ते-मारित को बार-बार अपने कार्यक्रम रद्द करने पड़े—चाहे वे अपने पति हाकोन के साथ रही हों या अकेले—सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना कम करना और लंबे समय तक आराम करना पड़ा। 

 

स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से इतर, 2019 में यौन शोषण के लिए बदनाम हो गए अमेरिकी बैंकर जेफरी एपस्टीन के साथ मेत्ते-मारित का ईमेल से वर्षों तक चला करीबी संपर्क भी था। मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि 2011 और 2013 के बीच वह कई बार इस अमेरिकी अरबपति से मिली भी थीं। हंगामा होने पर, एक सार्वजनिक बयान जारी कर उन्होंने एपस्टीन के साथ अपने व्यवहार में हुई ग़लतियों को स्वीकार किया। समय के साथ यह बहस भले ही धीमी पड़ती गई, मेत्ते-मारित का स्वास्थ्य भी बिगड़ता ही गया। दैनिक जीवन हर दिन के साथ दुष्कर होने लगा।

 

2023 की शरद ऋतु में, मेत्ते-मारित कुछ समय के लिए सार्वजनिक जीवन से दूर हो गईं; बीमारी के कारण उन्हें लंबे समय तक आराम करना पड़ा। अक्टूबर 2024 में उन्हें कहना पड़ा कि वे बीमारी के कारण छुट्टी पर हैं। राजमहल ने बताया कि फेफड़े वाली बीमारी के इलाज़ के लिए लेनी पड़ रही दवाओं के “साइड इफ़ेक्ट” से ऐसा हो रहा है। ALSO READ: नॉर्वे के राजघराने में भूचाल: शाही परिवार के सदस्य पर पहली बार मुकदमा

बेटे के शर्मनाक कारनामे

इसी दौरान, बेटे मारियुस बोर्ग ह्यिबी के कारनामों के कारण शाही परिवार पर सार्वजनिक दबाव काफी बढ़ गया। अगस्त 2024 में, मारियुस को राजधानी ओस्लो में एक युवा महिला के फ्लैट में हुई बहस और मार-पीट के बाद गिरफ़्तार कर लिया गया—उस के साथ मारियुस के अंतरंग संबंध थे।

 

मेत्ते-मारित के लिए केवल उनका बेटा ही चिंता का कारण नहीं था: मार्च 2025 में, राजमहल ने घोषणा की कि उनकी बीमारी बढ़ गई है— प्रतिदिन ऐसे लक्षण दिख रहे हैं, जिनके कारण अपने औपचारिक दायित्व निभाना उनके लिए कठिन होता जा रहा है। सितंबर 2025 में, उन्हें अमेरिका की अपनी तय यात्रा रद्द करनी पड़ी। यात्रा के बदले, फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार लाने का कई सप्ताहों तक चलने वाला इलाज करवाना पड़ा।

 

कुछ ही समय बाद, परेशान करने वाली एक और ख़बर आई— जाँच से पता चला कि मेत्ते-मारित का स्वास्थ्य वास्तव में काफ़ी बिगड़ गया है। अतः डॉक्टरों ने फेफड़े के प्रतिरोपण (ट्रांसप्लांटेशन) की तैयारी शुरू कर दी। 2025 के अंत में, मेत्ते-मारित ने पहली बार इस मामले पर खुलकर बात की। लंबे समय तक वे यही मानती और आशा करती रहीं कि दवा से ही बीमारी को काबू में रखा जा सकता है।

एपस्टीन से जुड़े मामलों से सुर्खियों में

2026 के आरंभ में मेत्ते-मारित, जेफरी एपस्टीन से जुड़े मामले को लेकर फिर से सुर्खियों में आ गईं। हाल ही में जारी दस्तावेज़ों से पता चला कि एपस्टीन से उनके संपर्क पहले की जानकारी की अपेक्षा कहीं ज़्यादा रहे होंगे। उन्होंने एक बार फिर माफ़ी मांगी। अपनी ग़लतियां स्वीकार कीं और कहा कि उस समय उन्होंने स्थिति का ग़लत आकलन किया था।

 

उन्हीं दिनों, उनके उद्दंड बेटे मारियुस बोर्ग ह्यिबी के आपराधिक कारनामों की मुख्य अदालती सुनवाई— राजधानी ओस्लो में कड़ी सुरक्षा के बीच—3 फरवरी से 19 मार्च 2026 तक चली। आरोपों और गवाहों के बयानों ने मीडिया का खूब ध्यान खींचा। राजपरिवार के लिए यह सब शर्म से डूब मरने जैसा था।

साँस के लिए नाक में लगी नली

2026 का वसंत आने तक मेत्ते-मारित की बीमारी की गंभीरता बहुत चिंताजनक बन गई थी। बहुत ही महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्यक्रमों के समय वे “पोर्टेबल ऑक्सीजन यूनिट” इस्तेमाल करने लगी थीं। नाक में लगी एक नली से उन्हें हवा मिलती थी। जून 2026 आते ही उनकी बेटी इंग्रिद अलेक्सांद्रा अपनी माँ का साथ देने के लिए ऑस्ट्रेलिया में अपनी पढ़ाई छोड़कर वापस आ गईं। पति युवराज हाकोन ने भी अपनी दिनचर्या में बदलाव किये और कई कार्यक्रमों को रद्द कर दिया।

 

5 जून को दो डॉक्टरों ने घोषणा की कि मेत्ते-मारित के बीमार फेफड़े हटाकर उनकी जगह किसी अंगदाता से मिले फेफड़े प्रतिरोपित करने के लिए लिए उन्हें एक प्रतीक्षा सूची में रखा गया है। 17 जून को यह प्रतिरोपण हो भी गया। एक नए फेफड़े के साथ अब वे अस्पताल में हैं।

29 वर्षीय बेटे को मिली 4 साल जेल की सज़ा

नए फेफड़े के प्रतिरोपण से दो ही दिन पहले, 15 जून 2026 को, ओस्लो के एक जज ने मेत्ते-मारित के बेटे मारियुस के ख़िलाफ़ चल रहे मुकदमे पर फ़ैसला सुनाया। 29 वर्षीय मारियुस को 40 में से 34 आरोपों में— जिनमें बलात्कार के दो मामले भी शामिल थे— दोषी पाया गया और चार साल की जेल की सज़ा सुनाई गई।

 

मरियुस बहुत तुनुकमिजाज़ी, झगड़ालू और हिंसक स्वभाव का युवक है। उस पर लगे आरोपों की लंबी सूची में हैः यौन-संबंध सहित चार मामलों में बलात्कार के अलावा घरेलू हिंसा, मार-पीट, चीखना-चिल्लाना, पराई संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, मादक पदार्थों से संबंधित अपराध और यातायात नियमों का उल्लंघन। कई महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने और उनकी जानकारी या सहमति के बिना उनका वीडियो बनाने के भी आरोप हैं। सुनवाई में मारियुस ने सबसे गंभीर आरोपों वाले अपराधों से इनकार किया।

बलात्कार, हिंसा और मार-पीट के लगे आरोप

अपने साथ बलात्कार का आरोप लगाने वाली 29 वर्षीया “इन्फ्लुएंसर” नोरा हाउकलांद ने मारियुस पर हिंसा और मार-पीट करने का भी आरोप लगाया है। दोनों कुछ समय तक बिना विवाह के एकसाथ रह चुके हैं। इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में नोरा का कहना है कि “ट्रॉमा (गहरा मानसिक सदमा) आसानी से नहीं जाता। आज भी, जब वह दरवाज़े के ज़ोर से बंद होने, किसी पुरुष के ज़ोर-ज़ोर से पैर पटकने या मोटरसाइकिल की ऊँची आवाज़ सुनती हैं, तो उसकी धड़कनें बढ़ जाती हैं।” अभियोग पत्र में कहा गया है कि मारियुस की हिंसा के भुक्तभोगी ऐसी स्थिति में थे, जिसमें वे “नींद और/या नशे की हालत” के कारण अपना बचाव करने में पूर्णतः असमर्थ थे।

 

उल्लेखनीय है कि युवराज्ञी मेत्ते-मारित का यह बिगड़ैल बेटा, उनके पति युवराज हाकोन माग्नुस के साथ उनके विवाह से पहले, 13 जनवरी 1997 को पैदा हुआ था। उसके असली पिता का नाम मोर्थन बोर्ग है। मेत्ते-मारित और युवराज हाकोन का अपसी परिचय 1999 में एक संगीत महोत्सव के समय हुआ था। विवाह हुआ 25, अगस्त 2001 को। यानी, मारियुस का जन्म दोनों के विवाह से चार साल पहले ही हो गया था। इसलिए, वह नॉर्वे के राजपरिवार का आधिकारिक सदस्य नहीं है। शायद इस कारण भी वह विद्रोही बन गया है— अपनी माँ सहित राजपरिवार की प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिलाने पर उतारू है।

यूपी में संपत्ति की पहचान, स्वामित्व और रिकॉर्ड की जानकारी मिलेगी एक क्लिक पर

Information regarding property identification ownership and records in UP will be available with single click

– फर्जी स्वामित्व, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी की घटनाओं पर लगेगी रोक

– संपत्ति पंजीकरण और नामांतरण व्यवस्था होगी पूरी तरह डिजिटल

– भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस

– यूनिक प्रॉपर्टी आईडी, भू-आधार और स्वतः नामांतरण व्यवस्था पर मंथन

Uttar Pradesh News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल आकार ले रही है। अचल संपत्तियों के पंजीकरण, स्वामित्व सत्यापन और नामांतरण प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित एवं तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने व्यापक सुधारों का खाका प्रस्तुत किया। 

 

 भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस

योगी सरकार लगातार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में संपत्ति पंजीकरण और नामांतरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए ऐसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जिनसे फर्जी स्वामित्व, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। प्रस्तुतीकरण में पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन कर नई धाराएं 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे संपत्ति के स्वामित्व और अधिकारों की पूर्व जांच अनिवार्य हो सकेगी। 
 

 हर संपत्ति को मिलेगी यूनिक पहचान

योगी सरकार का लक्ष्य प्रदेश की सभी ग्रामीण एवं शहरी संपत्तियों के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करना है। इस आईडी को जीआईएस मैपिंग और आधिकारिक स्वामित्व अभिलेखों से जोड़ा जाएगा, जिससे किसी भी संपत्ति की पहचान, स्वामित्व और रिकॉर्ड की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत घरौनी तैयार करने का कार्य पहले से चल रहा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। 

 

पंजीकरण के साथ ही स्वतः होगा नामांतरण

प्रदेश सरकार नागरिकों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीकरण पूरा होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। इसके लिए विभिन्न विभागों के अभिलेखों का एकीकरण, एपीआई आधारित डेटा साझाकरण और रियल-टाइम रिकॉर्ड अपडेट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इससे लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और समय तथा संसाधनों की बचत होगी। 

भू-आधार से जुड़ेगा हर भूमि पार्सल

योगी सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं के अनुरूप भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर भी तेजी से कार्य कर रही है। इसके तहत प्रत्येक भूमि पार्सल को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) यानी ‘भू-आधार’ प्रदान किया जाएगा। यह जियो-रेफरेंस्ड पहचान संख्या भूमि अभिलेखों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और जीआईएस प्रणालियों से जोड़ने में मदद करेगी, जिससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड अधिक सटीक और अद्यतन रहेंगे। 

 

बिजली, पानी और संपत्ति कर रिकॉर्ड होंगे एक जगह 

 इस प्रस्तावित सुधारों के तहत संपत्ति कर रजिस्टर को स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग, राजस्व विभाग, बिजली, पानी और सीवर विभागों के रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। कॉमन प्रॉपर्टी आईडी आधारित यह व्यवस्था विभिन्न विभागों के बीच डिजिटल डेटा साझा करने में सहायक होगी और कर संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएगी। 

 

ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों के लागू होने से संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आएगी, नागरिकों को तेज और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। योगी सरकार की यह पहल न केवल डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करेगी, बल्कि ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी नई गति प्रदान करेगी। उत्तर प्रदेश को तकनीक आधारित भूमि और संपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Edited By : Chetan Gour

हे राम! चढ़ावा चोरी के बाद अब 40% कमीशन के आरोप से गरमाई अयोध्या

Ram Mandir Trust: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है। इस बीच, एक नए खुलासे ने विवाद को और गहरा कर दिया है। आशंका जताई जा रही है कि चढ़ावा चोरी का यह सिंडिकेट बहुत बड़ा हो सकता है। इसी बीच, मंदिर परिसर के निर्माण कार्यों में 'कमीशनखोरी' का एक बेहद गंभीर और नया आरोप सामने आया है, जिसने हड़कंप मचा दिया है।

हालांकि, इन आरोपों की असली सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही साफ हो सकेगी। यहां यह भी जानकारी दे दें कि डॉ. अनिल मिश्रा के करीबी व उनकी सिफारिश पर राम मंदिर में नियुक्त किए गए लवकुश मिश्रा और एक अन्य व्यक्ति जो कि राम मंदिर में दान की रकम की गिनती और रखरखाव करते थे, उनसे दान की राशि को बैंक में जमा करने की प्रक्रिया के बार में SIT ने पूछताछ की। 

कॉल रिकॉर्डिंग सुनाई तो मुझे काम से हटा दिया

​राम मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी से जुड़े रहे सेवानिवृत्त इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने सोशल मीडिया पर दिए एक इंटरव्यू में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा पर सीधे उंगली उठाई है। इससे पहले टिन्नू यादव भी ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों पर सवाल उठा चुके हैं। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी कांड, अब सर्विलांस स्टाफ रडार पर! RMO की भी खुलेगी कुंडली

 

​दीनानाथ वर्मा ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि राम मंदिर परिसर से जुड़े कार्यालय निर्माण के दौरान एल्युमिनियम के काम के लिए एक ठेकेदार से कथित रूप से 40 फीसदी कमीशन की मांग की गई थी। इस कमीशन को एडजस्ट करने के लिए काम का बिल भी जानबूझकर 40% बढ़ाकर तैयार कराया गया। ​वर्मा का आरोप है कि उन्होंने इस फर्जीवाड़े पर आपत्ति जताई थी और इसकी शिकायत सबूत के तौर पर कॉल रिकॉर्डिंग के साथ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से की थी। लेकिन कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें (दीनानाथ वर्मा को) ही काम से अलग कर दिया गया। उन्होंने इस मामले में कर्मी रवि गुप्ता के नाम का भी जिक्र किया है।

कौन हैं डॉ. अनिल मिश्रा? : साइकिल से लिफ्ट वाले बंगले तक का सफर

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले धर्म सेना प्रमुख संतोष दूबे ने वेबदुनिया को अहम जानकारी देते हुए बताया ​कि विवादों के केंद्र में आए डॉ. अनिल मिश्रा का नाम तब सबसे ज्यादा चर्चा में आया, जब उन्हें 22 जनवरी को हुए राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान का 'मुख्य यजमान' (प्रधान यजमान) बनाया गया था। अपनी पत्नी उषा मिश्रा के साथ उन्होंने ही मुख्य पूजा संपन्न की थी।

साधारण बैकग्राउंड से 'खास' होने की कहानी

दूबे ने बताया कि डॉ. मिश्रा का जन्म 1958 में आंबेडकर नगर के पतौना गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। जौनपुर से पढ़ाई के बाद 1981 में फैजाबाद से होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS) की डिग्री ली। वे सरकारी सेवा में चिकित्साधिकारी रहे और सुल्तानपुर व गोंडा में तैनात रहे। इस दौरान वे RSS की शाखाओं से जुड़े रहे और अवध के प्रांत कार्यवाह बने। आपातकाल का विरोध भी किया। साल 2020 में उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार पद से रिटायर होने के बाद, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बने 'राम मंदिर ट्रस्ट' में उन्हें स्थायी सदस्य बनाया गया। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला, आस्था के केंद्र पर 'चंदा चोरी' का साया, SIT जांच से मचा हड़कंप

चर्चा का विषय बनी 'लाइफस्टाइल'

​कभी साइकिल और स्कूटर पर चलने वाले डॉ. अनिल मिश्रा की किस्मत ट्रस्ट का सदस्य बनते ही तेजी से बदली। स्थानीय लोगों और गलियारों में चर्चा है कि राम मंदिर निर्माण के साथ-साथ डॉ. मिश्रा की निजी तरक्की भी रॉकेट की रफ्तार से हुई।

 

​अयोध्या की सबसे महंगी कॉलोनी में उनका लिफ्ट युक्त बहुमंजिला आलीशान मकान बनकर तैयार हुआ है और उनकी लाइफस्टाइल में भी गुणात्मक बदलाव आया है। लोग हैरान हैं कि अचानक इतना बड़ा आर्थिक परिवर्तन कैसे हुआ? इसी बीच चढ़ावा चोरी और अब 40% कमीशन के आरोपों ने इस मामले को और हवा दे दी है। देखना दिलचस्प होगा कि इस 'कमीशन' के खेल में अभी और कितने धुरंधरों के नाम उजागर होते हैं।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

श्री श्री रविशंकर को मिला लक्ज़मबर्ग शांति पुरस्कार, 182 देशों में शांति प्रयासों का सम्मान, करोड़ों लोगों को किया प्रेरित

Gurudev Sri Sri Ravi Shankar was honored with the prestigious Luxembourg Peace Prize

– पिछले 45 वर्षों में गुरुदेव ने विश्व के अनेक संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापना के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

– विश्वभर में शांति के दूतों की एक विशाल मानव श्रृंखला तैयार करने के लिए मिला सम्मान

– गुरुदेव श्री श्री ने कहा- संघर्ष का मूल कारण व्यक्ति के भीतर शांति का अभाव है

Gurudev Sri Sri Ravi Shankar : विश्व शांति मंच (World Peace Forum) द्वारा वैश्विक मानवतावादी, आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर को प्रतिष्ठित लक्ज़मबर्ग शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें विश्व के 182 देशों में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के उनके अद्वितीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।

 

यह सम्मान गुरुदेव के 45 वर्षों के उस निरंतर प्रयास को मान्यता देता है, जिसमें उन्होंने आंतरिक शांति को बढ़ावा दिया, लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों के समाधान में सहयोग किया, हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में मानसिक आघात से उबरने के लिए सहायता प्रदान की और करोड़ों लोगों को शांति के वाहक बनने के लिए प्रेरित किया।

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पिछले चार दशकों में गुरुदेव ने विश्व के अनेक संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापना के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तनावमुक्त जीवन, मानसिक स्वास्थ्य और मानवीय मूल्यों पर आधारित उनके कार्यक्रमों ने विश्वभर में करोड़ों लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से स्पर्श किया है।

 

पुरस्कार ग्रहण करते हुए गुरुदेव ने संघर्षों की जड़ों को समझने और उन्हें दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा, संघर्ष का मूल कारण व्यक्ति के भीतर शांति का अभाव है। संघर्ष क्षेत्रों में हमारे अनुभव ने दिखाया है कि समाज को ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो पुल बना सकें, संवाद को पुनर्जीवित कर सकें और विश्वास को फिर से स्थापित कर सकें।

आज ऐसे मध्यस्थों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। मैं चाहता हूं कि हर युवा जहां भी समाज में विभाजन देखे, वहां एक सेतु बने। उन्होंने आगे कहा कि शांति को निष्क्रियता नहीं समझना चाहिए। शांति उदासीनता नहीं है और आक्रामकता साहस नहीं है। वास्तविक शांति तब जन्म लेती है जब व्यक्ति जागरूक भी हो और सक्रिय भी।

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मानवता के सामने उपस्थित सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक तनाव पर प्रकाश डालते हुए गुरुदेव ने कहा,
 तनाव मानवता के सबसे बड़े शत्रुओं में से एक है। तनावमुक्त मन और हिंसामुक्त समाज ही स्थाई शांति की नींव हैं।गुरुदेव ने यह भी कहा कि शांति को उतना ही महत्व मिलना चाहिए जितना सुरक्षा को दिया जाता है।

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उन्होंने कहा, हम अक्सर शांति और सुरक्षा की बात एक साथ करते हैं, लेकिन जहां सुरक्षा के लिए अपार संसाधन लगाए जाते हैं, वहीं शांति के संस्कार विकसित करने पर अभी भी बहुत कम ध्यान दिया जाता है।लक्ज़मबर्ग शांति पुरस्कार उन व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने विश्व स्तर पर शांति, मेलमिलाप और मानव गरिमा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।
Edited By : Chetan Gour