Gold Rate Today: औंधे मुंह गिरने के बाद अचानक रॉकेट बना सोना, जानें 22 जून को आपके शहर में 22K और 24K का भाव

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Gold Rate Today: सोने चांदी की कीमतों में पिछले हफ्ते आई भारी गिरावट के बाद सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से एक बार दोनों धातुओं की कीमतों में तेजी आई। अंतरराष्‍ट्रीय बाजार, कमोडिटी मार्केट और सर्राफा तीनों ही स्थानों पर इसकी कीमतों में इजाफा हुआ।

 

वैश्विक अनिश्चितताओं और एमसीएक्स (MCX) पर वैल्यू बाइंग के कारण आज सोने और चांदी की कीमतों में अचानक बड़ी रिकवरी देखी जा रही है। एमसीएक्स पर दोपहर 12:19 बजे सोना 1491 रुपए बढ़कर 1,48,694 रुपए प्रति 10 ग्राम था। चांदी भी 5125 रुपए तेजी के साथ 238312 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई।

 

स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर में भी आज बढ़त दिखाई दी। यहां सोने की कीमत 4204.668 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वहीं स्पॉट सिल्वर की कीमत 66.786 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। 

 

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गुडरिटर्न्स डॉट कॉम के अनुसार, देश में 24 कैरेट गोल्ड के दाम 1,46,510 रुपए प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट गोल्ड 1,34,300 रुपए प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट गोल्ड 1,09,880 रुपए प्रति 10 ग्राम है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.46 लाख से 1.49 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास है।

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दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, इंदौर, कोलकाता बेंगलुरु समेत अधिकांश शहरों में इसके दाम 2,50,000 रुपए प्रति किलो है जबकि चेन्नई, विशाखापट्टनम समेत दक्षिण भारत के कुछ शहरों में इसकी कीमत 2,55,000 रुपए प्रति किलो है।

बना रहेगा सोने चांदी में उतार चढ़ाव 

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी सोने चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी रहती है, तो सोना सुरक्षित निवेश के तौर पर और महंगा हो सकता है। वहीं बाजार में स्थिरता की स्थिति में चांदी में औद्योगिक मांग बढ़ेगी।

अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। जीएसटी और अन्य कारणों से सोने चांदी के दाम यहां दिए गए दाम से अलग भी हो सकते हैं। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

edited by : Nrapendra Gupta

गूगल मैप्स से रास्ता ढूंढ रही महिला इंटर्न को भीड़ ने किया निर्वस्त्र, ‘बच्चा चोरी’ की अफवाह पर बर्बरता

Google Maps

रायगड़ा (ओडिशा): ओडिशा के रायगड़ा जिले से भीड़ तंत्र की बर्बरता और संवेदनहीनता का एक बेहद विचलित करने वाला मामला सामने आया है। यहां 'बच्चा चोरी' की झूठी अफवाह के चलते उग्र भीड़ ने एक प्रमुख एनजीओ (NGO) के साथ काम कर रहे दो सामाजिक कार्यकर्ताओं (फेलो) पर जानलेवा हमला कर दिया। इस दौरान भीड़ ने मर्यादा की सारी हदें पार करते हुए 22 वर्षीय युवती के कपड़े फाड़कर उसे निर्वस्त्र कर दिया, उसके बाल खींचे और गंभीर छेड़छाड़ की। वहीं उसके पुरुष साथी को भी बेरहमी से पीटा गया।

रास्ता भटकने पर 'गूगल मैप्स' का ले रहे थे सहारा
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवक-युवती (दोनों की उम्र 22 वर्ष) एक प्रतिष्ठित फेलोशिप के तहत पिछले साल सितंबर से इस आदिवासी क्षेत्र में कल्याणकारी कार्यों के लिए काम कर रहे हैं। इनमें से युवती दिल्ली की और उसका साथी सूरत का रहने वाला है।

यह खौफनाक घटना 16 जून की रात करीब 8:30 बजे की है, जब दोनों स्कूटर से यात्रा कर रहे थे। रास्ता भटक जाने के कारण वे 'गूगल मैप्स' (Google Maps) की मदद से रास्ता ढूंढ रहे थे। इसी दौरान क्षेत्र में फैली 'बच्चा चोर' की अफवाह के कारण स्थानीय ग्रामीणों को उन पर शक हो गया।

पीड़िता के अनुसार: “एक स्थानीय व्यक्ति ने हमें रोककर पहचान पत्र (ID Card) मांगा। हमने आईडी दिखाई, लेकिन उसने विश्वास नहीं किया। डर के मारे जब हमने वहां से भागने की कोशिश की, तो मोटरसाइकिलों पर सवार हिंसक भीड़ ने हमारा पीछा करना शुरू कर दिया। एक खेत के पास हमारा स्कूटर फिसल गया और भीड़ ने हमें दबोच लिया।

ड्राइवर ने टी-शर्ट देकर बचाई पीड़िता की लाज
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और एक स्थानीय ड्राइवर बलराम बाग मौके पर पहुंचे। भीड़ इस कदर हिंसक और बेकाबू हो चुकी थी कि उसने पुलिस वाहन का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तक पीछा किया और अस्पताल परिसर में भी तोड़फोड़ करने की कोशिश की। इस भयावह स्थिति के बीच, ड्राइवर बलराम बाग ने अदम्य साहस और इंसानियत का परिचय दिया। उन्होंने अपनी टी-शर्ट उतारकर पीड़िता को दी और पुलिस की मदद से दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला।

पुलिस की कार्रवाई: 20 लोग गिरफ्तार
रायगड़ा के एसपी (SP) राज प्रसाद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त कार्रवाई की बात कही है। पुलिस के मुताबिक इस पूरे मामले में अब तक तीन अलग-अलग केस दर्ज किए गए हैं। उग्र भीड़ में शामिल कई नाबालिगों सहित कम से कम 20 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

गहरे सदमे में पीड़ित, NGO ने जताई चिंता
संबंधित एनजीओ ‘ग्राम विकास’ के अधिकारियों ने बताया कि इस वीभत्स घटना के बाद से दोनों फेलो गहरे सदमे (Severe Trauma) में हैं और फिलहाल किसी से भी बात करने की स्थिति में नहीं हैं। प्राथमिक उपचार और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों को उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। यह घटना एक बार फिर सोशल मीडिया और समाज में फैलने वाली 'अंधविश्वास और अफवाहों' के घातक परिणामों को उजागर करती है, जिसने दो युवा समाजसेवियों की जिंदगी को खौफ से भर दिया।
Edited By: Naveen R Rangiyal

NEET Re-Exam 2026 खत्म, पर जंतर-मंतर पर क्यों अड़े हैं छात्र? जानें NTA का ‘नो लीक’ दावा और आगे क्या?

NEET Jantar Mantar protest

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 का री-टेस्ट रविवार (21 जून) को कड़े पहरे के बीच संपन्न हो गया। 3 मई को लीक के आरोपों के बाद रद्द हुई परीक्षा को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने दोबारा आयोजित तो कर दिया, लेकिन छात्रों और अभिभावकों के मन में उपजा अविश्वास और गुस्सा अब भी शांत नहीं हुआ है। परीक्षा केंद्रों पर जहां पुलिस और हाई-टेक गैजेट्स का पहरा था, वहीं दूसरी ओर दिल्ली का जंतर-मंतर छात्रों के विरोध प्रदर्शन और नारों से गूंज रहा है। ALSO READ: शिक्षा मंत्री के इस्‍तीफे पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी, जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी, दीपके ने लोगों से की यह अपील

 

परीक्षा खत्म, तो जंतर-मंतर पर क्यों अड़े हैं छात्र?

री-एग्जाम खत्म होने के बाद भी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और कई छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलन कर रहे छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगें और चिंताएं इस प्रकार हैं:

 

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े: प्रदर्शनकारी “Leak in India” के नारे लगाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक ने देश की साख को ठेस पहुंचाई है।

 

मानसिक प्रताड़ना का हिसाब: जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों का कहना है कि पहले मई की परीक्षा, फिर उसका रद्द होना और अब जून के अंत में दोबारा पेपर देना—इस 7 हफ्ते के मानसिक तनाव ने उनकी क्षमता को निचोड़ दिया है।

 

टेलीग्राम और नए लीक के दावों का डर: हालांकि एनटीए ने 'नो लीक' का दावा किया है, लेकिन सोशल मीडिया और टेलीग्राम पर परीक्षा से ठीक पहले कथित 'गेस पेपर्स' बेचने वाले गिरोहों की सक्रियता ने छात्रों में फिर से डर पैदा कर दिया है।

CM भूपेंद्र पटेल का युवाओं से आह्वान: विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करेगी युवा शक्ति

bhupendra patel

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास, विश्वास और जनकल्याण के 12 वर्षों ने देश के युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। शिक्षा, रोजगार, स्टार्टअप और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के परिणामस्वरूप देश की युवा शक्ति आज नई ऊंचाइयों को छूने के लिए उत्सुक है।

 

मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने युवा प्रतिभाओं का राजनीति में आकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया है, जिसे देशभर के युवाओं से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है।

 

उन्होंने बताया कि गांधीनगर में आयोजित “विकसित भारत युवा संवाद” के तहत नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित “विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग-2026” में राज्य के प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने वाले युवाओं के साथ संवाद करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस दौरान युवाओं के विचारों, अनुभवों और विकसित भारत के निर्माण के प्रति उनके संकल्प पर चर्चा की गई।

 

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लागू की गई युवा सशक्तिकरण की नीतियों के कारण आज का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बन रहा है। देश के युवा स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।

 

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गुजरात के युवा “विकसित गुजरात” से “विकसित भारत @ 2047” के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आजादी के अमृतकाल में भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए युवा शक्ति की ऊर्जा और प्रतिबद्धता निर्णायक साबित होगी।

edited by : Nrapendra Gupta

कूनो नेशनल पार्क में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चीता कमांड-कंट्रोल सेंटर का किया अवलोकन

भोपाल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु कूनो नेशनल पार्क में चीता कमांड और कंट्रोल सेंटर का अवलोकन किया। चीता कमांड और कंट्रोल सेंटर के अवलोकन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु को चीतों कि निगरानी और ट्रैकिंग की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। श्योपुर आने से पहले जबलपुर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रपति मुर्मू से भेंट की और उनके साथ प्रतीक चिन्हों का आदान-प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश प्रवास के लिए राष्ट्रपति का पूरे प्रदेशवासियों की ओर से सहृदय आभार भी व्यक्त किया।

 

राष्ट्रपति ने चीता कमांड एवं कंट्रोल सेंटर परिसर में चीता प्रोजेक्ट की अभी तक की प्रगति पर लगाई गई प्रदर्शिनी का अवलोकन किया। राष्ट्रपति मुर्मु को अवगत कराया गया कि वर्तमान में भारत में चीतों की संख्या 52 है, जिनमें से 49 चीते कूनो में मौजूद हैं, तीन चीते गांधी सागर अभयारण्य मंदसौर भेजे गए हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस दौरान चीतों के लिए की गई आवश्यक सुविधाओं के विषय में जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि हर 2 किलोमीटर पर जंगल में वॉटर पिट बनाए गए हैं। उनमें अवश्यकता अनुसार पानी भरवाया जाता है। इस दौरान उन्हें बोत्सवाना से लाए गए चीतों की गतिविधियों की भी जानकारी दी गयी। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति मुर्मु द्वारा उनकी बोत्सवाना यात्रा के दौरान 8 चीते रिसीव किए गए थे, जिन्हें कुनो लाया गया है। 

 

सीएम-राष्ट्रपति ने एक-दूसरे को दिए प्रतीक चिन्ह-श्योपुर से पहले सीएम डॉ. मोहन यादव ने राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से जबलपुर सर्किट हाउस में सौजन्य भेंट की। इस गरिमामयी मुलाकात के दौरान दोनों के बीच आत्मीय संवाद हुआ और संस्कृति व श्रद्धा के प्रतीक स्वरूप स्मृति चिन्हों का आदान-प्रदान किया गया। राष्ट्रपति मुर्मु को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश आगमन पर स्वागत करते हुए जीवनदायिनी मां नर्मदा की बेहद सुंदर प्रतिमा भेंट की। वहीं, राष्‍ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने भी अपनी ओर से मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव को पुरी स्थित सुप्रसिद्ध भगवान जगन्‍नाथ, भाई बलराम तथा बहन सुभद्रा की अलौकिक तस्‍वीर सप्रेम भेंट की। ओडिशा की ऐतिहासिक धरोहर कोणार्क सूर्य मंदिर के विश्व प्रसिद्ध चक्र की भव्य प्रतिकृति भी उपहार स्वरूप प्रदान की।

1.25 लाख का इनामी लल्लन सिंह एनकाउंटर में ढेर, 7 हत्याओं का आरोपी था बिहार का कुख्यात बदमाश

saharanpur encounter

उत्तर प्रदेश पुलिस का अपराधियों के सफायें को लेकर ठोंको अभियान चल रहा है। जिसके चलते सोमवार की सुबह भोर की किरण निकलने से पहले ही बिहार का कुख्यात अपराधी और 1.25 लाख रुपये का इनामी बदमाश लल्लन सिंह पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।

 

सरसावा-नकुड़ मार्ग पर हुई पुलिस मुठभेड़ में पुलिस की गोली लगने से गंभीर रूप से घायल लल्लन सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जबकि उसका एक साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस की विशेष टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

 

कौन था लल्लन सिंह?

पुलिस के मुताबिक लल्लन सिंह बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर थाना क्षेत्र स्थित आनंदगोलवा गांव का निवासी था। वह लंबे समय से उत्तर प्रदेश और बिहार में हत्या, डकैती, लूट और पुलिसकर्मियों पर हमले जैसे कई गंभीर मामलों में वांछित चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी पर वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने एक लाख रुपये तथा चंदौली पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।

 

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार लल्लन सिंह बेहद शातिर और संगठित अपराध गिरोह का सक्रिय सदस्य था। उसके खिलाफ हत्या, बैंक डकैती, कैश वैन लूट, हथियार लूट और पुलिस पर हमले सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज थे। वह सात हत्याओं के मामलों में वह वांछित चल रहा था। मृतकों में दो पुलिस उपनिरीक्षक, एक बैंक कैशियर और एक सुरक्षा गार्ड भी शामिल थे।

 

वर्ष 2022 में वाराणसी में एक उपनिरीक्षक की गोली मारकर हत्या करने और उनकी सरकारी पिस्टल लूटने की सनसनीखेज घटना में भी उसका नाम सामने आया था। इसके अलावा चंदौली में हुई कई लूट और फायरिंग की घटनाओं में भी उसकी संलिप्तता पाई गई थी। पुलिस के मुताबिक वह अपने भाइयों और गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर विभिन्न राज्यों में आपराधिक वारदातों को अंजाम देता था।

 

कैसे हुई मुठभेड़?

सहारनपुर एएसपी लाल प्रताप सिंह के नेतृत्व में बीती देर रात्रि में सरसावा-नकुड़ रोड पर पुलिस वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान दो संदिग्ध बाइक पर पुलिस को आते दिखाई दिये, उन्हें रुकने का इशारा किया, लेकिन बदमाशों के हौंसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने रूकने की जगह पुलिस पर फायर खोल दिया, पुलिस की आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग में लल्लन सिंह गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया।

 

घायल अपराधी लल्ले को तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसावा ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल सहारनपुर रेफर किया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

 

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि लल्लन सिंह के मारे जाने से संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। वहीं फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लल्लन के ठिकानों पर कई टीमें लगातार दबिश दे रही है। पुलिस का कहना है कि वह जल्दी ही फरार अपराधी को गिरफ्तार कर लेंगे।

edited by : Nrapendra Gupta

BMW Accident: 251 Kmph की रफ्तार से दौड़ी कार एक्सप्रेसवे पर पलटी, दो युवाओं की दर्दनाक मौत

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BMW Accident : मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर 251 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही एक BMW कार डिवाइडर से टकराकर कई बार पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में जन्मदिन मना रहे दो युवाओं की मौत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार पूरी तरह पिचक गई और उसका इंजन दुर्घटना वाली जगह से लगभग 30 मीटर दूर जा गिरा।

 

मृतकों की पहचान फुटबॉल प्लेयर योगेश नेगी (26) और रेबेका जैकब (24) के तौर पर हुई है। योगेश नेगी बदलापुर (पश्चिम) का रहने वाला था और अपना जन्मदिन मना रहा था। वहीं रेबेका जैकब बांद्रा में रहती थी। BMW के मालिक अंगद भी इस घटना में गंभीर रूप से घायल हैं। उसे फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

 

पुलिस के मुताबिक तीनों ने बदलापुर (पश्चिम) में योगेश नेगी का जन्मदिन मनाया और फिर एक्सप्रेसवे की ओर निकल गए। पुलिस को 9,000 रुपए का एक बिल मिला है।

 

एक मृतक ने घटना से कुछ ही देर पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की थी जिसमें BMW को 251 किमी/घंटा तक की रफ्तार से चलाते हुए दिखाया गया है। जांचकर्ताओं को शक है कि लापरवाही से गाड़ी चलाने और शायद स्टंट करने की वजह से यह हादसा हुआ होगा। पुलिस इस पोस्ट की भी जांच कर रही है।

 

ऐसे हुआ भीषण हादसा

एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों को जाने से रोकने के लिए कई जगहों पर सीमेंट के बैरिकेड लगाए गए हैं। पुलिस को शक है कि तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते समय ड्राइवर ने शायद ऐसे ही किसी अवरोध से बचने की कोशिश की और गाड़ी पर से नियंत्रण खो दिया। इसके बाद कार सेंट्रल डिवाइडर से टकरा गई। बताया जा रहा है कि टक्कर के कारण कार उछल गई और दो डिवाइडर सेक्शन के बीच जाकर रुकी। गाड़ी के पुर्ज़ों के दूर-दूर तक बिखर गए। 

edited by : Nrapendra Gupta

“पानी पर जंग?” सिंधु जल संधि बहाल करने से भारत का इनकार, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने दी युद्ध की धमकी

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि को बहाल करने पर उसका रुख नहीं बदला है। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कदम नहीं उठाता, तब तक संधि निलंबित ही रहेगी। भारत के इस रुख के बाद पाकिस्तान में नाराजगी बढ़ गई है। पहले पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो ने भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी की और अब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुली चेतावनी दे डाली। ALSO READ: 80 मिनट की अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद फिर बढ़ा तनाव, ट्रंप की धमकी पर ईरान का कड़ा जवाब; संयुक्त फोटो सेशन भी रद्द

 

क्या बोले ख्वाजा आसिफ?

एआरवाई न्यूज को दिए इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगेगा कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में है, तो वह भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पानी पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है और यदि भारत जल आपूर्ति को प्रभावित करने की दिशा में तेजी से कदम उठाता दिखा, तो सैन्य कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

 

पाकिस्तान में गंभीर जल संकट

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। सिंध और बलूचिस्तान समेत कई इलाकों में पानी की भारी कमी की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक देश की लगभग एक तिहाई आबादी किसी न किसी रूप में जल संकट से प्रभावित है।

 

भारत पर गंभीर आरोप

ख्वाजा आसिफ ने इस संकट के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है और चिनाब नदी के प्रवाह में बदलाव कर रहा है। हालांकि इंटरव्यू के दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके पास पिछले एक साल की घटनाओं की पूरी जानकारी नहीं है।

 

पहलगाम हमले के बाद भारत ने किया था फैसला?

भारत ने सिंधु जल संधि को उस समय निलंबित किया था जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। भारत का आरोप है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद लंबे समय से क्षेत्र की शांति को नुकसान पहुंचा रहा है।

 

इसके बाद पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत से संधि बहाल करने की मांग की, लेकिन नई दिल्ली अपने रुख पर कायम है।

 

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पानी का मुद्दा भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में नया फ्लैशपॉइंट बन सकता है? क्या पाकिस्तान की यह युद्ध वाली चेतावनी सिर्फ घरेलू राजनीति के लिए है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है?

edited by : Nrapendra Gupta

LIVE: उद्धव को बड़ा झटका, 6 बागी सांसद शिवसेना शिंदे में होंगे शामिल

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Latest News Today Live Updates in Hindi : महाराष्‍ट्र में सियासी संग्राम के बीच शिवसेना यूबीटी के 6 बागी सांसद आज दोपहर 3 बजे शिवसेना शिंदे में शामिल हो सकते हैं। पल पल की जानकारी…शिवसेना उद्धव गुट के सभी 6 बागी सांसद आज दिल्ली पहुंच रहे हैं। वे दोपहर 3 बजे शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।

-SIT आज सीएम योगी आदित्यनाथ को जांच रिपोर्ट सौंप सकती है।

-एसआईटी ने मंदिर ट्रस्ट और मंदिर के अधिकारियों को अयोध्या नहीं छोड़ने का निर्देश भी दिया है। 

-राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में गणना में लगे करीब 40 कर्मचारियों को आखिरकार हटा दिया गया है। अब बैंक की ओर से नए गणनाकर्मियों को लगाया गया है। 

कतर के गैस संयंत्र पर धमाका, 54 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कतर सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि बारजान संयंत्र में सुविधाओं को फिर से शुरू करने के प्रयास के दौरान यह धमाका हुआ।

ब्रेक्जिट के 10 साल: ब्रिटेन को भारी पड़ा अलग होने का फैसला

Brexit Impact on UK

-आयुष यादव

 

23 जून 2016 को हुए इस ऐतिहासिक फैसले को 'ब्रेक्जिट' नाम दिया गया। तब 52 प्रतिशत यानी करीब 1।7 करोड़ से ज्यादा लोगों ने यूरोपीय संघ से अलग होने के पक्ष में वोट किया था। भले ही जीत का अंतर मामूली था, लेकिन इस फैसले ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज को सबसे बड़ा झटका दिया। हालांकि, इस अलगाव की कागजी कार्रवाई को पूरा होने में भी करीब पांच साल का लंबा वक्त लग गया।

 

ब्रेक्जिट की मुख्य वजह यूरोपीय संघ से नाराजगी और 2008 का वैश्विक आर्थिक संकट था। अलग होने के समर्थकों का दावा था कि अकेले रहने पर ब्रिटेन फिर से मजबूत होगा और अपने घरेलू मुद्दों पर ध्यान दे सकेगा। वहीं, विरोधियों ने चेतावनी दी थी कि इससे देश को भारी आर्थिक नुकसान होगा और दुनिया में उसकी साख कमजोर होगी। आज 10 साल बाद, ब्रिटेन वहीं खड़ा है जो विरोधियों ने आशंका जताई थी।

 

अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ा अलगाव

ब्रेक्जिट समर्थकों ने सपना दिखाया था कि यूरोपीय संघ से बाहर निकलकर ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था नए आयाम छुएगी। लेकिन कोरोना महामारी, यूक्रेन युद्ध और हाल ही में अमेरिका-इस्राएल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

 

ब्रिटेन के कारोबारियों को अब यूरोपीय देशों के साथ व्यापार करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि 27 देशों का यह समूह आज भी ब्रिटेन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। हालांकि, ब्रिटिश सामानों पर कोई टैक्स (टैरिफ) नहीं लगाया गया है, लेकिन कस्टम के कागजी काम, बॉर्डर सर्टिफिकेट और वीजा पाबंदियों जैसी गैर-टैरिफ अड़चनों ने व्यापार को बेहद मुश्किल बना दिया है। अमेरिका के साथ जिस बड़े व्यापार समझौते का वादा ब्रेक्जिट समर्थकों ने किया था, वह भी अब तक नहीं हो पाया है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ब्रिटेन यूरोपीय संघ में रहता तो आज उसकी अर्थव्यवस्था 4 से 8 प्रतिशत बड़ी होती। इसका मतलब होता कि लोगों का जीवनस्तर बेहतर होता और पब्लिक सर्विसेज, खासकर नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) को अरबों पाउंड मिलते। ब्रेक्सिट के प्रचार के दौरान लाल रंग की बस पर यह वादा चमकाया गया था कि अलग होने से एनएचएस को हर हफ्ते 35 करोड़ पाउंड (करीब 46।8 करोड़ डॉलर) अतिरिक्त मिलेंगे।

 

किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर जोनाथन पोर्ट्स कहते हैं, “ब्रेक्जिट ने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पहले के मुकाबले छोटा कर दिया है। इसका असर किसी अचानक आए संकट की तरह नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश और उत्पादकता पर धीरे-धीरे और लगातार पड़ने वाले बोझ के रूप में दिख रहा है।”

 

इसके उलट, ब्रेक्जिट समर्थकों का कहना है कि इतने बड़े फैसले का नतीजा शॉर्ट-टर्म में नहीं देखा जा सकता और प्रवासियों पर नियंत्रण जैसे बड़े अधिकारों के बदले शुरुआती आर्थिक नुकसान के लिए देश तैयार था।

 

प्रवासियों के मुद्दे पर बढ़ता गुस्सा

ब्रेक्जिट के जरिए ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच 'फ्री मूवमेंट' (बिना वीजा आवाजाही) तो खत्म हो गई, लेकिन सीमाओं को सुरक्षित करने के मोर्चे पर मिले जुले नतीजे रहे हैं। यूरोपीय देशों से आने वाले प्रवासियों की संख्या में तो भारी कमी आई है, लेकिन गैर-यूरोपीय देशों से आने वाले लोगों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इसकी वजह पिछली कंजर्वेटिव सरकार द्वारा वीजा नियमों में किए गए बदलाव थे, ताकि बुजुर्गों की देखभाल जैसे क्षेत्रों के लिए जरूरी कामगारों की कमी को पूरा किया जा सके।

 

हालांकि, अब सरकार इस पर नियंत्रण पाती दिख रही है। नेट माइग्रेशन (आने और जाने वाले लोगों का अंतर) साल 2023 के 9 लाख से घटकर पिछले साल 1,71,000 पर आ गया है। इस गिरावट के बावजूद, देश में अवैध रूप से आने वाले प्रवासियों को लेकर गुस्सा चरम पर है। अफगानिस्तान और सूडान जैसे युद्धग्रस्त इलाकों से लोग इंग्लिश चैनल पार करके छोटी नावों के जरिए ब्रिटिश तटों पर पहुंच रहे हैं।

 

साल 2022 में इन नावों से 46,000 और पिछले साल 41,000 लोग ब्रिटेन आए। सरकारी खर्च पर इन्हें होटलों में ठहराए जाने को लेकर जनता में इतना गुस्सा है कि कुछ जगहों पर भीड़ ने हिंसक प्रदर्शन किए और होटलों में आग लगाने की कोशिश भी की।

 

जनता को हो रहा है पछतावा

ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। 14 साल तक सत्ता में रहने के बाद कंजर्वेटिव पार्टी को 2024 में हार का सामना करना पड़ा। मौजूदा लेबर पार्टी की सरकार भी जनता को प्रभावित नहीं कर पाई है और प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के जल्द ही इस्तीफे की खबरें आ रही हैं। इस बीच, धुर दक्षिणपंथी नाइजेल फारेज की अगुवाई वाली 'रिफॉर्म यूके' पार्टी को लगातार जनसमर्थन मिल रहा है, जो पिछले एक साल से ओपिनियन पोल्स में सबसे आगे चल रही है।

 

इसके साथ ही, देश में यह भावना मजबूत हो रही है कि ब्रेक्जिट पूरी तरह फेल रहा है। इप्सोस के दो हालिया सर्वेक्षणों में शामिल 52 प्रतिशत लोग फिर से यूरोपीय संघ में शामिल होना चाहते हैं, जबकि सिर्फ 33 प्रतिशत इसके खिलाफ हैं। वहीं, 48 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ब्रेक्जिट के नतीजे उम्मीद से बदतर रहे हैं और सिर्फ 9 प्रतिशत इसे उम्मीद से बेहतर मानते हैं। 48 प्रतिशत लोग आज ही यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिए एक और जनमत संग्रह का समर्थन करते हैं।

 

दोबारा जुड़ने की राह नहीं आसान

इस माहौल के बीच, 2024 में चुनी गई लेबर सरकार फूंक फूंक कर कदम रख रही है। उसने साफ कर दिया है कि वह ब्रेक्जिट के फैसले को पलटने या यूरोपीय संघ के सिंगल मार्केट में वापस जाने का कोई इरादा नहीं रखती। प्रधानमंत्री स्टार्मर का पूरा ध्यान सिर्फ व्यापार को आसान बनाने और रिश्तों को सुधारने पर है, जिसके लिए वह अगले महीने यूरोपीय संघ के साथ एक समिट भी करने वाले हैं।

 

वहीं, प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे एंडी बर्नहैम ने गुरुवार को एक विशेष चुनाव में जीत हासिल की है। उन्होंने उस सीट पर रिफॉर्म पार्टी को हराया है जिसने ब्रेक्जिट का भारी समर्थन किया था। चुनाव प्रचार के दौरान यूरोपीय संघ में दोबारा शामिल होने के मुद्दे पर एंडी बर्नहैम ने कहा, “मैं यूके के दोबारा यूरोपीय संघ में शामिल होने का प्रस्ताव नहीं दे रहा हूं। मैं जनमत संग्रह में किए गए फैसले का सम्मान करता हूं। अगर हम उस वोट का सम्मान नहीं करते हैं, तो लोकतंत्र को मजबूत करने के बारे में मेरी कही हर बात का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।”