‘बारिश में गल गया सोना, बंदर उठा ले गए’, पुलिस की दलील पर कोर्ट सख्त; 18 साल पुराने मामले ने चौंकाया

monkey runs away with gold

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 135 किलोमीटर दूर स्थित लखीमपुर खीरी से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया। सुनने में यह किसी हास्य फिल्म का दृश्य लग सकता है, लेकिन यह दावा स्वयं पुलिस ने अदालत के समक्ष किया था कि मालखाने में सुरक्षित रखी गई लाखों रुपये मूल्य की सोने की पोटली बारिश में गल गई। इसके बाद आभूषणों को धूप में सुखाने के लिए रखा गया, जहां से बंदरों का एक झुंड उन्हें उठा ले गया। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और शिकायतकर्ता को हुए नुकसान की भरपाई करने का आदेश दिया।

 

वर्ष 2007 से जुड़ा है मामला

मामला वर्ष 2007 का है। दीपावली की रात आभा रानी उर्फ जूली अग्रवाल की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों की टीम ने उनके शरीर से सोने की चेन, लॉकेट, अंगूठी, नाक की कील और 10 चूड़ियां उतारीं, जिन्हें एक पोटली में रखकर सदर कोतवाली के मालखाने में जमा करा दिया गया था।  इसके बाद दहेज हत्या के मुकदमे की लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। अंततः सबूतों के अभाव में सभी आरोपी बरी हो गए। ALSO READ: 1.25 लाख का इनामी लल्लन सिंह एनकाउंटर में ढेर, 7 हत्याओं का आरोपी था बिहार का कुख्यात बदमाश

 

दहेज हत्या मामले से बरी होने के बाद उठी मांग

वर्ष 2024 में मृतका के पति मुदित कुमार अग्रवाल ने जिला एवं सत्र न्यायालय में आवेदन देकर मालखाने में जमा उनकी पत्नी के आभूषण वापस दिलाने की मांग की। जब अदालत ने पुलिस से जवाब तलब किया, तो जो कहानी सामने आई उसने सभी को चौंका दिया।

 

बारिश में भीगे, फिर बंदर उठा ले गए!

कोतवाली पुलिस ने अदालत में वर्ष 2013 की एक जनरल डायरी (जीडी) प्रविष्टि का हवाला देते हुए बताया कि मालखाने में रखी आभूषणों की पोटली बारिश में भीगकर गल गई थी। उसे सुखाने के लिए खुले में रखा गया, जहां बंदरों का एक झुंड आया और पोटली सहित आभूषण उठा ले गया।

 

अदालत ने इस दलील को अविश्वसनीय और अतार्किक बताते हुए अस्वीकार कर दिया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इसे मालखाने में रखी संपत्ति की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही माना।

 

अदालत के सख्त निर्देश

26 जुलाई 2024 को अदालत ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की पहचान की जाए, उनके विरुद्ध विभागीय तथा आपराधिक कार्रवाई की जाए और शिकायतकर्ता को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए। इसके बाद 28 मई 2025 को तत्कालीन हेड मुहर्रिर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया।

 

जांच में सामने आया नया तथ्य

लखीमपुर खीरी की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग के अनुसार जांच में यह स्थापित हुआ कि आभूषण वर्ष 2007 के पोस्टमार्टम से संबंधित पोटली के थे और वे पूर्व हेड मुहर्रिर चंद्रिका प्रसाद तथा रामबख्श पाल के कार्यकाल के दौरान गायब हुए।

 

 हालांकि, जांच पूरी होने से पहले दोनों संबंधित हेड मुहर्रिरों का निधन हो चुका था। ऐसे में उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई संभव नहीं रही। पुलिस ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर मामला बंद कर दिया।

 

अब उच्च न्यायालय का रुख

करीब दो दशक पुराने इस मामले में आज भी शिकायतकर्ता मुदित कुमार अग्रवाल को उनकी पत्नी के आभूषण नहीं मिले हैं। उनके अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौर का कहना है कि अदालत के आदेश के बावजूद न तो संपत्ति वापस मिली और न ही पर्याप्त राहत मिली। इसलिए अब न्याय की उम्मीद में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

 

चर्चा का विषय बना मामला

मालखाने से लाखों रुपये मूल्य के आभूषण गायब होने और उसके लिए बंदरों को जिम्मेदार ठहराने की कहानी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। इससे पहले भी जब्त सामग्री के गायब होने पर पुलिस की ओर से विवादास्पद दलीलें सामने आ चुकी हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा तथा झारखंड के कुछ मामलों में जब्त गांजा अदालत में प्रस्तुत नहीं किया जा सका था और यह तर्क दिया गया था कि उसे चूहे गाजा गटक गए, यानी चूहे भी नशेड़ी होकर लाखों रूपये का नशा कर गये।

 

ऐसे मामलों ने कानून-व्यवस्था और जब्त संपत्ति की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि पुलिस के मालखाने में रखी गई संपत्ति ही सुरक्षित नहीं है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? अदालत की सख्ती के बावजूद वर्षों बाद भी पीड़ित को न्याय और मुआवजा न मिल पाना व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

edited by : Nrapendra Gupta

संत समाज की भूमिका सदैव प्रेरणादायी : CM धामी

CM Pushkar Singh Dhami: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रायवाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ एवं विशाल संत सम्मेलन में कहा कि सनातन परंपरा के संरक्षण और समाज को सही दिशा देने में संत समाज की भूमिका सदैव प्रेरणादायी रही है। उनके मार्गदर्शन में हमारी सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता निरंतर सुदृढ़ हो रही है।

 

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि रायवाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ एवं विशाल संत सम्मेलन में पूज्य संत-महात्माओं का सान्निध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के संरक्षण और समाज को सही दिशा देने में संत समाज की भूमिका सदैव प्रेरणादायी रही है। उनके मार्गदर्शन में हमारी सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता निरंतर सुदृढ़ हो रही है।

उन्होंने कहा कि संत समाज के मार्गदर्शन एवं सहयोग से वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले दिव्य और भव्य कुंभ के सफल आयोजन हेतु व्यापक तैयारियां की जा रही हैं, जिससे विश्वभर से आने वाले श्रद्धालुओं को एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके। इस अवसर पर साधु-संतों के साथ ही 

 

इस अवसर पर पूज्य साधु-संतों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती रितु खंडूरी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय आदि मौजूद थे। 

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

इंदौर में MCA स्‍टूडेंट ने लगाई फांसी, सहेलियों ने बताया क्‍यों थी परेशान, एक साल से कर रही थी परीक्षा की तैयारी

इंदौर से लगातार आत्‍महत्‍याओं की खबरें सामने आ रही हैं। रविवार को एक MCA की छात्रा ने फांसी लगा ली। मृतक छात्रा परदेशीपुरा थाना क्षेत्र की रहने वाली थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि छात्रा परीक्षा को लेकर तनाव में थी। पुलिस ने मामला जांच में लिया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है।

परदेशीपुरा थाना पुलिस के मुताबिक मृतका का नाम रेखा (22) पिता उत्तम गाढे मूल निवासी बुरहानपुर थी। वह पिछले एक साल से इंदौर में रहकर चमेली देवी कॉलेज से MCA की पढ़ाई कर रही थी।

सहेलियां लौटीं तो लटका मिला शव : जानकारी के मुताबिक  रविवार रात करीब 11 बजे रेखा की सहेलियों ने उसे कमरे में फंदे पर लटका हुआ देखा। बताया जा रहा है कि रविवार शाम सहेलियों ने उसे राजबाड़ा घूमने चलने के लिए कहा था, लेकिन उसने जाने से मना कर दिया था। बाद में जब सहेलियां वापस लौटीं तो वह कमरे में फांसी के फंदे पर लटकी मिली।

पुलिस ने मौके पर मौजूद सहेलियों से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि रेखा MCA सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा दे रही थी। उसके कुछ पेपर खराब हो गए थे, जिसके कारण वह काफी स्‍ट्रेस में थी। पिछले कुछ दिनों से वह पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पा रही थी और परेशान रहने लगी थी।

पुलिस को मौके से किसी प्रकार का सुसाइड नोट नहीं मिला है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। सोमवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा। वहीं, छात्रा के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है।
Edited By: Naveen R Rangiyal

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा, क्या इसमें हैं ट्रंप कनेक्शन?

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लेबर पार्टी में बगावत और राजनीतिक दबाव के चलते ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केर स्टार्मर ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वे जुलाई 2024 से ब्रिटेन की कमान संभाल रहे थे। स्टार्मर 10 साल में प्रधानमंत्री पद छोड़ने वाले छठे नेता है। र्स्टामर के इस्तीफे के पीछे अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड का कनेक्शन भी सामने आया है।

 

स्टार्मर ने क्यों दिया इस्तीफा?

देश के नाम अपने संबोधन के आखिर में कीर स्टार्मर की आवाज भावुक होकर भर्रा गई। स्टारमर ने कहा कि अब मेरी पार्टी यह सवाल पूछ रही है कि क्या मैं अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सबसे सही व्यक्ति हूं। मैंने इस सवाल पर अपनी संसदीय पार्टी का जवाब सुन लिया है और मैं उस जवाब को सम्मान के साथ स्वीकार करता हूं। ALSO READ: ट्रंप ने कहा- मेलोनी ने फोटो के लिए की थी मिन्नत, इटली की पीएम ने दिया ऐसा जवाब कि छिड़ गई नई बहस

 

कई दिनों से था इस्तीफे का दबाव?

निकाय चुनाव में लेबर पार्टी की करारी हार के बाद से ही स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव था। कैबिनेट साथियों के साथ ही लेबर पार्टी से जुड़े नेताओं के साथ ही पार्टी के डोनर्स और ट्रेड यूनियन के नेता पिछले 2 दिनों से स्टार्मर के इस्तीफे के संकेत दे रहे थे।

 

क्या है स्टार्मर के इस्तीफे का ट्रंप कनेक्शन?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी स्टार्मर के पद छोड़ने की आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था कि आव्रजन और ऊर्जा को लेकर स्टार्मर की नीतियां उनके असफल होने का कारण रही। बहरहाल ट्रंप की घोषणा के अगले ही दिन र्स्टामर ने पद छोड़ दिया। इससे पहले भी भारत-पाकिस्तान सीजफायर से लेकर ईरान डील तक ट्रंप की कई बातें सच हुई है। ALSO READ: ब्रेक्जिट के 10 साल: ब्रिटेन को भारी पड़ा अलग होने का फैसला

 

बर्नहम पीएम पद की दौड़ में सबसे आगे

स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन में नए प्रधानमंत्री को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। एंडी बर्नहम प्रधानमंत्री के पद पर बैठने और लेबर पार्टी के लीडर के तौर पर स्टार्मर की जगह लेने की दौड़ में सबसे आगे हैं। उन्होंने मेकरफील्ड सीट पर हुए उपचुनाव में जीत हासिल की थी। खुद स्टार्मर ने संकेतों में उनके नाम की सिफारिश कर दी है। 

edited by : Nrapendra Gupta

 

मध्यप्रदेश में मोहन कैबिनेट के विस्तार का काउंटडाउन, परफॉर्मेंस पर छंटेंगे पुराने नाम, इन नए चेहरों को मिल सकती है जगह

भोपाल। मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के ढाई साल पूरा होने के बाद अ्ब मंत्रिमंडल के नए सिरे से गठन की कवायद शुरु हो गई है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में मोहन कैबिनेट का विस्तार कभी भी हो सकता है। कैबिनेट विस्तार में कई पुराने चेहरों को बाहर का रास्ता दिखा कर नए चेहरों की एंट्री कराई जा सकती है। 20 जुलाई से विधानसभा के  मानसून सत्र से पहले ही नई मोहन टीम के गठन की पूरी संभावना है। 

 

आधा दर्जन नए चेहरों को मिलेगी एंट्री!- वर्तमान में मोहन कैबिनेट में मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों सहित कुल 31 सदस्य हैं। चूंकि विधानसभा की सदस्य संख्या के मुताबिक राज्य में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं, इसलिए इस समय चार पद पूरी तरह खाली हैं। ऐसे में मोहन सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार में इन खाली पदों को भरने के साथ नॉन परफॉर्मर मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। कैबिनेट विस्तार में  4 से 6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और 7 से 8 नए चेहरों को मौका मिल सकता है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार का मुख्य आधार मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा और उनका रिपोर्ट कार्ड होने वाला है। गौरतलब है कि कैबिनेट विस्तार से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद विभागों की समीक्षा कर मंत्रियों के कामकाज की पूरी रिपोर्ट ली है। वहीं कैबिनेट विस्तार को लेकर केंद्रीय हाईकमान से हरी झंडी मिलने के बाद अब मंत्रिमंडंल विस्तार की उल्टी गिनती शुरु हो गई है।

 

क्षेत्रीय और जातिगण समीकरण साधने की कवायद-मोहन सरकार का यह कैबिनेट विस्तार ऐसे समय होने जा रहा है, जब सरकार के ढाई साल पूरे हो चुकी है और अब सरकार और पार्टी 2027 में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत और 2028 के  विधानसभा चुनाव की तैयारियों में  जुट गई है। कैबिनेट विस्तार में पूरा फोकस क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने, महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने और आगामी नगरीय निकाय व 2028 के चुनावों के लिए जातिगत समीकरण साधने पर है।  

 

कैबिनेट विस्तार में कई सीनियर मंत्रियों के साथ विवादों में रहने वाले मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। पहली बाहर विधायक के साथ मंत्री बने चेहरों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है। वहीं कैबिनेट महिला प्रतिनिधित्व को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। महिला वोट बैंक और क्षेत्रीय समीकरण को साधने के लिए सांसद से विधायक बनी रीति पाठक , अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता  है। वहीं कैबिनेट में मौजूदा महिला चेहरे राज्यसभा मंत्री राधा सिंह और प्रतिमा बागरी की छुटटी हो सकती है।

 

इसके साथ  सागर और बुंदेलखंड क्षेत्र की नाराजगी दूर करने के लिए सागर, दमोह या पन्ना क्षेत्र के वरिष्ठ विधायकों को जगह मिल सकती है। इसमें सागर के आने  वााले पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के साथ पन्ना से आने वाले पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह की दोबारा सरकार में एंट्री हो सकती है। इसके साथ जातिगत समीकरण साधने के लिए सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी की दोबारा सरकार में एंट्री हो सकती है।

 

मोहन कैबिनेट के होने वाले विस्तार में सबकी निगाहें मौजूद सरकार के दिग्गज मंत्रियों पर भी टिकी है। दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और राकेश सिंह जैसे सीनियर मंत्रियों की कैबिनेट विस्तार के बाद नई भूमिका क्या होगी, इसको  लेकर भी सियासी चर्चा तेज है। पिछले दिनों जिस तरह से  कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल को लेकर सियासी गलियाओं में चर्चाएं तेज है, ऐसे में  इस बात  की संभावना बुहत अधिक है कि कैबिनेट विस्तार में इनकी नई भूमिका तया हो।   

लोकल से ग्लोबल: एमएसएमई, ओडीओपी और जीआई टैग से वैश्विक पटल पर चमक रहा MP

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल 12 वर्ष पूर्ण कर 13वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। ये 12 वर्ष देश के किसी भी नेता के कार्यकाल से ज्यादा सफल रहे हैं, या यूं कहें कि ये 12 वर्ष सफलतम रहे हैं। क्योंकि इन 12 वर्षों में भारत ने एक राष्ट्र पुरुष के रूप में वो काम होते हुए देखें हैं, जिनकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। इसके लिए प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है। मिशन GYAN यानी गरीब-युवा-अन्नदाता-नारी शक्ति, इस पर ध्यान केंद्रित करने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगर किसी शब्द पर जोर दिया है तो वो है आत्मनिर्भर भारत।

प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि हमारा देश आत्मनिर्भर होगा, तो हमें सबसे आगे खड़े होने से कोई नहीं रोक सकता। प्रधानमंत्री मोदी की इसी लाइन पर चल रहे हैं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव।  सीएम डॉ. यादव ने प्रदेश का आर्थिक स्थिति न केवल बेहतर किया है, बल्कि उसे और सुदृढ़ करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने राज्य को आर्थिक दिशा देने के लिए ग्लोबल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव जैसे नवाचार किए हैं।   

तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा मध्यप्रदेश-मोदी सरकार के आत्मनिर्भर भारत  मिशन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम  क्षेत्र को आर्थिक विकास का बड़ा इंजन माना जाता रहा है। बीते 12 वर्षों में इस दिशा में एमएसएमई सेक्टर , एक जिला एक उत्पाद योजना और  जीआई टैग ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। नमो सरकार के विजन और मोहन सरकार के मिशन से मध्यप्रदेश आज अपने  सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, एक जिला-एक उत्पाद और जीआई टैग्स के दम पर देश के सबसे तेजी से आत्मनिर्भर होते राज्यों में गिना जा रहा है। मोहन सरकार के प्रयासों से एक तरफ जहां प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, वहीं  कारीगरों और उद्यमियों को रोजगार मिलने के साथ ही ग्लोबल मार्केट में एमपी की  धमक तेजी से बढ़ रही है।

 

ओडीओपी से उत्पादों को मिला बड़ा मंच-एक जिला एक उत्पाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस दूरदर्शी सोच का हिस्सा है, जो किसी भी प्रदेश के हर जिले की अनोखी क्षमता को बढ़ावा देता है। एमपी की मोहन सरकार ने पीएम मोदी के पदचिन्हों पर चलते हुए इसे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किया है। राज्य में प्रत्येक जिले से एक प्रमुख उत्पाद चुना गया है। धार का बाग प्रिंट,छतरपुर के हस्तशिल्प, रीवा का सुंदरजा आम, मुरैना की गजक, शिवपुरीकी  जैकेट, चंदेरी साड़ी सरीखे 26 उत्पादों का जीआई टैग प्राप्त हो चुका है। मोहन सरकार द्वारा उज्जैन में ओडीओपी प्रोडक्ट के लिए 284 करोड़ रुपए की लागत से यूनिटी मॉल बनाने की भी घोषणा हुई है। इन दिनों आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के पीएम मोदी के मिशन पर आगे बढ़ते हुए मध्यप्रदेश के सभी जिलों की विशिष्ट पहचान को ओडीओपी के जरिए प्रमोट किया जा रहा है। इससे हर जिले का एक मुख्य उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चमक रहा है।

भोपाल की जरी-जरदोजी और जूट उत्पाद हो या धार के बाग प्रिंट, बुरहानपुर का केला  हो या बड़वानी का अदरक,बालाघाट का चिन्नौर चावल हो या मंदसौर का लहसुन आज ओडीओपी के जरिए  पूरे देश और दुनिया में जीआई  टैग के जरिए यह अपनी विशेष पहचान बनाने में कामयाब हुआ है।  सरकार द्वारा ओडीओपी के तहत इन उत्पादों के उत्पादन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्ध करने की दिशा में मजबूती के साथ कार्य किया जा रहा है। मृगनयनी एम्पोरियम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन उत्पादों की बिक्री बढ़ रही है और इसी का परिणाम है कि राष्ट्रीय स्तर पर ओडीओपी में मध्यप्रदेश ने रजत पदक हासिल किया है। एमपी सरकार वन डिस्ट्रिक-वन प्रोडक्ट को सशक्त बनाकर स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने और अंतरराज्यीय सहयोग को गति देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार  के साथ भी विशेष सहयोग कर रही है। 

 

जीआई टैग: स्थानीय उत्पादों को मिली वैश्विक पहचान-जीआई टैग से उत्पादों की बाजार कीमत बढ़ती है, नकली उत्पादों से बचाव होता है और निर्यात संभावनाएं खुलती हैं। यह स्थानीय कारीगरों के ज्ञान और परंपरा को संरक्षित रखते हुए आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान करता है। हाल के वर्षों में मध्यप्रदेश की पारंपरिक कलाओं, हथकरघा और कृषि उत्पादों को जीआई टैग मिलने से उनकी प्रामाणिकता और डिमांड  दोनों तेजी मार्केट में से बढ़ी है। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगी है और किसानों व कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है। 

 

एमएसएमई से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम-आज एमपी में 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जो सवा करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रही हैं। राज्य सरकार की  बेहतर एमएसएमई  प्रोमोशन स्कीम और एमएसएमई  डेवलपमेंट पॉलिसी 2025 के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करने, तकनीकी अपग्रेडेशन के साथ स्किल डेवलपमेंट और कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स बढ़ाने की दिशा में ठोस काम किया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने  की दिशा में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समुदायों को जोड़ा जा रहा है जिससे  पारंपरिक शिल्प और कृषि उत्पादों  को भी नई  पहचान मिल रही है। मोहन सरकार के प्रयासों से मध्यप्रदेश में एमएसएमई सेक्टर आज  राज्य की अर्थव्यवस्था की बड़ी रीढ़ बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार की एमएसएमई विकास नीति, मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति एवं कार्यान्वयन योजना का प्रभाव धरातल पर दिखने लगा है। नई औद्योगिक नीतियों और वित्तीय सहायता, निवेश की बेहतरीन नीतियों  के माध्यम से स्थानीय स्तर पर भारी निवेश आया है। 31 मार्च 2026 को 600 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को सरकार द्वारा  375 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का अंतरण किया गया है। 

 

विकसित भारत के विजन को मिल रही गति-आज एमपी  में रेडीमेड गारमेंट्स, फर्नीचर और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में आधुनिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे  हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को भारी मात्रा में रोजगार मिलेगा। युवा जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनेंगे। एमएसएमई, ओडीओपी और जीआई टैग का संगम आज के मध्यप्रदेश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की तस्वीर बदल रहा है। मोहन सरकार द्वारा 'मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना' जैसी पहलों के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार के लिए आसान शर्तों में  ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार के प्रयासों से ओडीओपी उत्पादों की जबरदस्त  ब्रांडिंग हो रही है। इन उत्पादों को ई-कॉमर्स और एक्सपोर्ट हब्स से भी जोड़ा जा रहा है जिससे पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन को गति मिल रही है। “वोकल फॉर लोकल” से आगे बढ़कर “ग्लोबल फॉर लोकल” बनने की दिशा में मोहन सरकार मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बोले, मुस्लिम हमें काफिर कहते हैं, हम काफिर हैं तो हमारी बनाई सड़क पर क्‍यों चलते हो

मध्‍यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिसके बाद राजनीति में एक नई बहस चल पड़ी है। दरअसल, इंदौर में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मंच से कहा कि यहां सड़क बन रही है।

यहां हिंदू भाई भी रहते हैं और मुस्लिम भाई भी रहते हैं। कई मुस्लिम भाई हमको काफिर कहते हैं। अगर हम काफिर हैं, तो हमने जो सड़क बनाई है, उस पर मत चलो। यदि हम काफिर हैं और आपके घर में लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजना का पैसा आ रहा है, तो मत लो। विजयवर्गीय के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर बहस चल पडी है। बता दें कि अब उनका यह बयान सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।   

सबका साथ, सबका विकास : कैलाश विजयवर्गीय ने आगे कहा, हमने और हमारी सरकार ने कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। हमने कहा है- सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास। यही हमारी नीति रही है। आप हमें वोट दो या न दो, हमारा काम जनता की सेवा करना है। आप वोट देंगे तो ज्यादा दिल लगाकर काम करेंगे, नहीं देंगे तो भी करेंगे, लेकिन काम जरूर करेंगे।

2 करोड़ 39 लाख की सौगात : बता दें कि रविवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विभिन्न वार्डों में विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। वार्ड क्रमांक-1 में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बयान दिया। मंत्री विजयवर्गीय ने विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 में आयोजित दो दिवसीय विकास कार्यक्रम के दूसरे दिन रविवार को क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-1 और 5 के रहवासियों को 2 करोड़ 39 लाख 80 हजार रुपए के 10 विकास कार्यों की सौगात दी। अब उनका यह बयान सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
Edited By: Naveen R Rangiyal

मानसून पर ‘विलेन’ अल नीनो का ग्रहण : 5 राज्यों में सूखे का खतरा, IMD की चिंताजनक चेतावनी

Indian Monsoon Update 2026

प्रशांत महासागर में बन रही एक वैश्विक मौसमी घटना भारत के मानसून के लिए बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआती प्रगति के बाद कई क्षेत्रों में इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है, जिसके चलते देश के अनेक हिस्सों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है।
 

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि अल नीनो का प्रभाव अगले कुछ महीनों तक बना रहता है, तो न केवल मानसून कमजोर पड़ सकता है, बल्कि कृषि उत्पादन, जल संसाधनों और खाद्य कीमतों पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। ALSO READ: Monsoon : मौसम के महादानव अल-नीनो को परास्त करेगा Indian Ocean Dipole, जानिए कैसे होगी झमाझम बारिश

क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ जाती है चिंता?

'अल नीनो' (El Niño) प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि की एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। इसके कारण वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है और भारत में मानसून कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार अल नीनो का प्रभाव जून से ही दिखाई देने लगा है। यदि इसकी तीव्रता बढ़ती है, तो मानसून सीजन के मध्य और अंतिम चरण में वर्षा की कमी और अधिक गंभीर हो सकती है।

किन राज्यों पर सबसे ज्यादा खतरा?

मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अल नीनो लंबे समय तक सक्रिय रहा, तो देश के पांच प्रमुख कृषि राज्यों पर सबसे अधिक असर पड़ सकता है:

  • महाराष्ट्र
  • मध्य प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • उत्तरी कर्नाटक

Indian Monsoon Update 2026

इन राज्यों में खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ने की आशंका है।

 

शहरों में भी बढ़ रहा जल संकट

सूखे का खतरा केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। देश के कई बड़े शहर पहले से ही जल संकट का सामना कर रहे हैं।
 

विशेषज्ञों का कहना है कि जल संचयन और वर्षा जल संरक्षण की दिशा में पर्याप्त प्रगति न होने के कारण कई महानगर मानसून पर अत्यधिक निर्भर हैं। यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो मुंबई, पुणे समेत कई शहरों में जलापूर्ति प्रभावित हो सकती है।
 

जल विशेषज्ञों का मानना है कि अब जल संरक्षण, रीसाइक्लिंग और वर्षा जल संग्रहण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना समय की मांग है। ALSO READ: 5 चक्रव्यूह में फंसा मानसून, बारिश को तरसते 7 राज्यों में पारा 40°C के पार, जानें आपके शहर का हाल

 

क्या 2026-27 की गर्मियां रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं?

मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के प्रभाव के चलते आगामी वर्षों में वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है।
 

कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत के कई हिस्सों में गर्मी की तीव्रता बढ़ सकती है और हीटवेव की घटनाएं अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे हालात में कई क्षेत्रों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।

किसानों पर दोहरी मार

कम बारिश का सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता है।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार, यदि वर्षा में उल्लेखनीय कमी बनी रहती है, तो खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें प्रभावित हो सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • धान
  • तुअर और मूंग जैसी दालें
  • सोयाबीन और मूंगफली जैसे तिलहन
  • कपास
  • बाजरा
  • फल और सब्जियां

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान अचानक फसल पैटर्न नहीं बदल सकते, क्योंकि खेती केवल तकनीकी नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था से भी जुड़ी होती है।

Indian Monsoon Update 2026

महंगाई पर भी पड़ सकता है असर

कृषि उत्पादन घटने का सीधा असर बाजार पर पड़ता है।

यदि उत्पादन कम हुआ और त्योहारी सीजन में मांग बढ़ी, तो खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। दाल, तेल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुएं महंगी हो सकती हैं, जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।

राहत की खबर भी है

हालांकि स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। भारत के पास वर्तमान में पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है, जो किसी भी संभावित आपूर्ति संकट से निपटने में मदद कर सकता है। इसके अलावा :

  • देश का सिंचित क्षेत्र पिछले दशक में बढ़ा है।
  • मौसम पूर्वानुमान तकनीक पहले से अधिक सटीक हुई है।
  • AI आधारित कृषि सलाह किसानों को समय रहते निर्णय लेने में मदद कर रही है।
  • केंद्र और राज्य सरकारें लगातार निगरानी कर रही हैं।

विशेषज्ञों की सलाह: किसान क्या करें?

विशेषज्ञों ने किसानों को निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

✔ एक ही फसल पर पूरी निर्भरता से बचें।

✔ मिश्रित खेती अपनाएं।

✔ कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें।

✔ मौसम पूर्वानुमान के आधार पर बुआई की योजना बनाएं।

✔ सूखा प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा बुआई का जोखिम सोच-समझकर लें।

उम्मीद की किरण: IOD बन सकता है गेमचेंजर

मौसम वैज्ञानिकों की नजर अब 'पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल' (IOD) पर है। यदि मानसून के उत्तरार्ध में पॉजिटिव IOD सक्रिय होता है, तो यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है और देश के कई हिस्सों में अतिरिक्त वर्षा का कारण बन सकता है।
 

फिलहाल देश की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। आने वाले कुछ सप्ताह तय करेंगे कि अल नीनो भारत के लिए केवल एक मौसमी चुनौती साबित होगा या फिर यह खेती, पानी और महंगाई से जुड़ा बड़ा राष्ट्रीय संकट बन जाएगा।

 

इंदौर में री-नीट का नकली पेपर 200 छात्रों को बेचा, एआई से बनाया था पर्चा, पुलिस ने एक आरोपी को किया गिरफ्तार

NEET

पूरे देश में नीट पेपर लीक को लेकर बहस है और इसे लेकर सतर्कता बरती जा रही है। 21 जून को इंदौर में री नीट की परीक्षा संचालित की गई। इस दौरान नीट का नकली पेपर छात्रों को बेचने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस बेहद गंभीर मामले में एक शख्‍स को गिरफ्तार किया है।

पुलिस जांच कर रही है कि और कौन और कितने लोग इस मामले में संलिप्‍त हैं। बता दें कि गिरफ्तार शख्‍स परीक्षार्थियों को नकली प्रश्नपत्र बेच रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपी ने चैटजीपीटी की मदद से एक फर्जी पेपर तैयार किया था और उसे 200 से अधिक छात्रों को बेचकर लाखों रुपए वसूले लिए थे।

जाल बिछाकर किया गिरफ्तार : इंदौर पुलिस ने जाल बिछाकर एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी युवक ने चैटजीपीटी की मदद से एक नकली पेपर तैयार किया फिर उसे 200 से अधिक अभ्यर्थियों को बेचकर कमाई की। उसने पेपर बेचकर कितने रुपए कमाए, इसकी जांच पुलिस कर रही है। पिछली बार पेपर लीक का मामला सामने आने पर देशभर में मचे हंगामे के कारण इंदौर पुलिस नीट परीक्षा से पहले ही सक्रिय हो गई थी। सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि अक्षय मालवीय नाम का युवक नीट का पेपर अभ्यर्थियों को बेच रहा है। उसे लसूड़िया क्षेत्र के शक्करखेड़ी इलाके से गिरफ्तार कर लिया।

सायबर सेल कर रही जांच : इस पूरे मामले की जांच सायबर सेल को सौंपी गई है। सेल आरोपी का मोबाइल जब्‍त कर जांच कर रही है। मोबाइल में एक प्रश्नपत्र मिला, जिस पर नीट 2026 लिखा था। पूछताछ में उसने बताया कि उसने यह पेपर चैटजीपीटी की मदद से तैयार किया था।
Edited By: Naveen R Rangiyal

NEET Re-Exam 2026: कितना कठिन था पेपर, कट-ऑफ पर क्या होगा असर? एक्सपर्ट्स एनालिसिस

NEET Re-Exam 2026

NEET Re-Exam 2026 Analysis: नीट री-एग्जाम 2026 संपन्न हो चुकी है और परीक्षा देकर निकले छात्रों के बीच इसे लेकर मिले-जुले रिएक्शंस देखने को मिल रहे हैं। जहां एक तरफ बायोलॉजी के सवालों ने छात्रों को राहत दी, वहीं फिजिक्स के लंबे और कठिन प्रश्नों ने उनकी असली परीक्षा ली। शिक्षा विशेषज्ञों के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक, इस बार का पेपर पिछले मुख्य पेपर के मुकाबले थोड़ा कठिन और लंबा था, जिसका सीधा असर इस साल के कट-ऑफ और सेफ स्कोर पर पड़ सकता है। 

क्या कहते हैं ‍शिक्षा विशेषज्ञ? 

आमतौर पर नीट परीक्षा का स्तर मध्यम माना जाता है, लेकिन इस बार देश के विभिन्न केंद्रों से निकले छात्रों ने मिक्स्ड रिएक्शंस दिए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों (Education Experts) के विश्लेषण के अनुसार इस बार फिजिक्स का सेक्शन उम्मीद से कहीं अधिक लंबा और कठिन रहा। कैलकुलेशन आधारित और घुमावदार प्रश्नों के कारण छात्रों का काफी समय इसी सेक्शन में चला गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यही वो विषय है जो इस साल मेरिट लिस्ट तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। ALSO READ: NEET Re-Exam 2026 खत्म, पर जंतर-मंतर पर क्यों अड़े हैं छात्र? जानें NTA का 'नो लीक' दावा और आगे क्या?

 

हालांकि हमेशा की तरह बायोलॉजी सेक्शन ने छात्रों को बड़ी राहत दी। प्रश्न सीधे और समझने में आसान थे, जिससे छात्रों को अपना स्कोर सुधारने का मौका मिलेगा। केमिस्ट्री का स्तर सामान्य और संतुलित रहा। पेपर का कुल स्तर Moderate रहा। हालांकि जिन छात्रों ने NCERT आधारित तैयारी की है, उन्हें इस बार फायदा मिल सकता है। हालांकि टॉप रैंक के लिए Accuracy और Time Management निर्णायक होगा। 

NEET

 

कट-ऑफ पर क्या होगा असर?

चूंकि छात्रों के अनुसार यह पेपर 3 मई के मुकाबले थोड़ा कठिन और लंबा था, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सामान्य श्रेणी का सेफ स्कोर 650 से 700 के बीच रह सकता है, जबकि क्वालिफाइंग परसेंटाइल पिछले वर्षों के रुझान के अनुरूप ही रहने की उम्मीद है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala