लखनऊ अग्निकांड : मरने वालों की संख्या 15 पहुंची, 4 अधिकारी सस्पेंड, CM योगी ने 5-5 लाख रुपए मुआवजे और SIT जांच का किया ऐलान

lakhnow fire

लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित उषा मेहता मार्ग पर सोमवार को एक तीन मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। खबरों के मुताबिक इस अग्निकांड में 9 लोग घायल हुए हैं। हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल का दौरा किया और मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए तथा घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
 

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मुख्यमंत्री ने इस दर्दनाक घटना की जांच के लिए 2 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का भी गठन किया है। इस मामले में 4  अफसर भी सस्पेंड कर दिए गए हैं।  इस हादसे के बाद CM योगी ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और इसकी सख्त जांच के आदेश दिए हैं' उन्होंने सोमवार देर शाम हादसे को लेकर हाईलेवल मीटिंग की थी। 

 

कैसे लगी आज, जांच में क्या सामने 

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आग इमारत के एसी डक्ट से शुरू हुई हो सकती है। उत्तरप्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के अनुसार, भवन में सुरक्षित निकास मार्ग नहीं होने के कारण धुएं से दम घुटने की स्थिति बनी, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।  भवन निर्माण मानकों में संभावित लापरवाही की भी जांच की जाएगी।

 

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता देने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री ने घटना पर गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

आग पर काबू पाने के बाद बचाव दल ने पास की इमारत के जरिए स्ट्रेचर अंदर पहुंचाए।  रेस्क्यू टीम ने प्रभावित भवन की दीवार में छेद कर लोगों को बाहर निकालने का रास्ता बनाया। अधिकारियों के अनुसार, कुछ लोगों के अभी भी अंदर फंसे होने की आशंका को देखते हुए तलाशी अभियान चलाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना अलीगढ़ दौरा बीच में ही छोड़ दिया और तुरंत लखनऊ पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद करने और घायलों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

 

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने क्या कहा 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद है। मैंने खुद घटनास्थल का दौरा करके स्थिति का जायजा लिया और अस्पताल जाकर वहां भर्ती घायल मरीजों से मुलाकात की। उन्हें सही इलाज मिल रहा है। शुरुआती इलाज के बाद कई लोगों को डिस्चार्ज दे दी गई। 2-3 मरीज अभी भी यहां हैं और उनका बिना किसी परेशानी के सही इलाज चल रहा है। मुख्यमंत्री ने खुद कहा है कि इस मामले की गहन जांच की जाएगी और जहां जरूरी होगा, वहां जिम्मेदारी तय की जाएगी, हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही कोई नतीजा निकाला जा सकता है।

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किस-किस हुई गिरफ्तारी 

पुलिस ने जांच के बाद बिल्डिंग मालिक समेत 3  लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले में 3 लोगों पर FIR दर्ज की गई है। जिनकी गिरफ्तारी हुई है उनमें बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला और एनिमेशन ट्रेनिंग स्टूडियो का मालिक तुषांत जैसवाल शामिल हैं। इसके अलावा एक और आरोपी रामकृष्ण उपाध्याय की भी गिरफ्तारी हुई है।

 

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि बचाव अभियान को तेजी से पूरा किया गया और अधिकांश लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उन्होंने कहा कि दमकल कर्मियों ने पड़ोसी मकान की दूसरी मंजिल की दीवार तोड़कर भवन में प्रवेश किया। घने धुएं को बाहर निकालने के लिए एग्जॉस्ट फैन लगाए गए और कमरे-दर-कमरे तलाशी अभियान चलाया गया। हर कमरे और शौचालय की जांच की गई ताकि कोई भी व्यक्ति अंदर न छूटे। Edited by : Sudhir Sharma

CM मोहन यादव की समीक्षा बैठक, स्वतंत्रता दिवस पर उपलब्धियां बताएंगे प्रभारी मंत्री

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 22 जून को योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को जिला मुख्यालयों पर होने वाले कार्यक्रमों में जिलों के प्रभारी मंत्री, जिलों में हुए विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करेंगे। समारोह स्थल पर विकास कार्यों और योजनाओं को जन-सामान्य के सामने रखने के लिए प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। यह प्रस्तुतिकरण एक तरह से विकास कार्यों के सोशल ऑडिट जैसा होगा। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला विकास समितियों का राजधानी भोपाल में सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिला विकास समितियां विकास गतिविधियों के लिए शासकीय नियोजन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करने के लिए जिला विकास समितियां प्रयास करें। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने और किफायती आवासों के निर्माण में ईको फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य के विभागवार, संभागवार और जिलावार समस्त सांख्यिकी आंकड़े एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। 

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विश्राम घाट पर ही मृत्यु पंजीयन की व्यवस्था हो

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र में सभी विभागों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। इस योजना के अंतर्गत कराए गए कार्यों के संधारण की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि इस योजना में श्रेष्ठ कार्य तथा नवाचार करने वालों को प्रोत्साहित करने की भी व्यवस्था हो। उन्होंने मध्यप्रदेश जन्म और मृत्यु पंजीकरण की व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मृत्यु पंजीयन के लिए विश्राम घाट पर ही पंजीयन की प्रक्रिया शुरू करने की व्यवस्था के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्र के लोगों को मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में आसानी होगी।

 

जिलों के विकास सूचकांक स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित हों

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों के विकास सूचकांक स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अलग-अलग निर्धारित किया जाए। औद्योगिक पृष्ठ भूमि, कृषि आधारित व्यवस्था, वन क्षेत्र संपन्न जिलों के लिए विकास के सूचकांक अलग-अलग हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण क्षेत्र में स्वयं का मकान बनाने वालों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने और उपयुक्त भवन निर्माण सामग्री के संबंध में जागरूक करने के लिए भी जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रस्फुटन और नवाकुंर समितियों की रही सक्रिय सहभागिता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि  मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक एक लाख 37 हजार से अधिक छात्र लाभान्वित हो चुके हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रस्फुटन और नवाकुंर समितियों ने कुएं, बावड़ी, तालाब, नदी घाट सफाई, जल संगोष्ठी और बावड़ी उत्सव जैसे आयोजनों में सक्रिय सहभागिता की। बैठक में बताया गया कि विमुक्त, घुमंतु और अर्द्धघुमंतु परिवारों के चिन्हाकंन और पंजीकरण के लिए जारी अभियान में अब तक पच्चीस हजार से अधिक परिवारों की जानकारी पोर्टल पर प्रविष्ट की जा चुकी है। प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी जारी है। Edited by : Sudhir Sharma

UCC पर आगे बढ़ी मोहन यादव सरकार, कमेटी ने आम नागरिकों, धर्मगुरुओं और राजनीतिक दलों से मांगी राय

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। इसी सिलसिले में समान नागरिक संहिता के अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों ने 22 जून को प्रशासन अकादमी में राज्य स्तरीय बैठक ली। इस बैठक में सदस्यों ने व्यक्तियों, संस्थाओं, शासकीय विभागों, राजनैतिक दलों, धर्म गुरुओं सहित विभिन्न आयोगों के प्रतिनिधियों की राय जानी।

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उच्च स्तरीय समिति में सदस्य और उत्तराखंड के सेवानिवृत मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और डॉ शोभा वेथनकर, वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप नायर, समाजसेवी बुद्ध पाल सिंह ने सुझाव सुने। शासन की ओर से सभी मौखिक और लिखित सुझावों को दर्ज किया गया। सुझावों में प्रमुख रूप से विवाह, विवाह विच्छेद, संतान, दत्तक नियम जैसे विभिन्न विषयों पर राय दी गई।

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विभागों ने दिया प्रजेंटेशन

गौरतलब है कि, उच्च स्तरीय समिति के समक्ष मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग, मानव अधिकार आयोग, राज्य महिला आयोग, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग, जनजाति आयोग और वनवासी विकास संघ ने अपने सुझाव दिए। समिति के समक्ष जनजाति कार्य विभाग, गृह, महिला एवं बाल विकास, राजस्व, शिक्षा, लोक स्वास्थ्य,जेल विभाग ने प्रेजेंटेशन दिया गया। उन्होंने अपनी विभागीय योजनाओं के प्रावधानों के साथ समान नागरिक संहिता को जोड़ा।

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इन्होंने भी दिए सुझाव

बैठक में भारतीय जनता पार्टी, सीपीआईएम, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी आदि के पदाधिकारियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। बाद में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख और बौद्ध धर्म गुरुओं ने भी समिति के समक्ष अपने सुझाव दिए। इसके बाद समिति ने भोपाल जिले के जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की राय जानी। सुझाव देने वालों में विधायक और अन्य धर्मगुरु भी शामिल थे। Edited by : Sudhir Sharma

निपुण भारत मिशन को रफ्तार देने में जुटी योगी सरकार, मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का दूसरा चरण शुरू

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए शिक्षकों के क्षमता संवर्धन की मजबूत शृंखला तैयार कर रही है। इसी क्रम में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जनपद स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के लिए पांच दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा चरण सोमवार से प्रारंभ हो गया। 

 

राज्य स्तर पर आयोजित इस प्रशिक्षण में सहभागी जनपदों से चयनित राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) सदस्यों और डायट मेंटर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण का नेतृत्व करते हुए लाखों शिक्षकों तक निपुण भारत मिशन की अवधारणाओं, नवीन शिक्षण पद्धतियों और अधिगम सुधार की रणनीतियों को पहुंचाएंगे।

 

यह प्रशिक्षण निपुण भारत मिशन के अंतर्गत संचालित राज्यव्यापी शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की दूसरी कड़ी है। प्रशिक्षण का पहला चरण 16 से 20 मई के बीच सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। इसके बाद जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के लिए दो और चरण आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश भर में एक सुदृढ़ शैक्षणिक प्रशिक्षण तंत्र विकसित किया जा सके।

 

वर्तमान बैच में प्रदेश के 20 जनपदों के प्रतिनिधि शामिल हैं। प्रत्येक सहभागी जनपद से दो राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) सदस्य और दो डायट मेंटर्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की जिम्मेदारी आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना होगी, ताकि निपुण भारत मिशन की रणनीतियां और शिक्षण पद्धतियां प्रभावी ढंग से विद्यालय स्तर तक पहुंच सकें।

 

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आधारभूत भाषा एवं गणितीय दक्षताओं के विकास के लिए प्रभावी कक्षा-कक्ष क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत दक्षता आधारित शिक्षण पद्धति, गतिविधि आधारित शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, प्रिंट-समृद्ध शैक्षणिक सामग्री और टीएलएम के उपयोग, कक्षा मूल्यांकन की प्रभावी रणनीतियों तथा दीक्षा, कैच-अप शिक्षण एवं रीडिंग कैंपेन जैसे कार्यक्रम पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डिजिटल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष बल है।

 

प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरी तरह सहभागितापूर्ण और व्यावहारिक स्वरूप में तैयार किया गया है। इसमें प्रदर्शन, चिंतन, सहकर्मी अधिगम, समूह चर्चा और कक्षा में प्रत्यक्ष उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि प्रशिक्षण के दौरान विकसित शैक्षणिक समझ और कौशल सीधे शिक्षण व्यवहार में परिलक्षित हों तथा विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित किया जा सके।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। विद्यालय कायाकल्प, बाल वाटिका, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विस्तार, शिक्षक क्षमता संवर्धन और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे प्रयासों के साथ सरकार बुनियादी शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने में जुटी है। Edited by : Sudhir Sharma

पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच योगी सरकार का बड़ा फैसला, बदली होम स्टे नीति

उत्तरप्रदेश में लगातार बढ़ रही पर्यटन गतिविधियों और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए योगी सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) एवं होम स्टे नीति-2025 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत होम स्टे और बीएंडबी इकाइयों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को पहले से और आसान बनाया गया है। साथ ही पंजीकृत इकाइयों को ऑनलाइन स्वतः नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की सुविधा भी प्रदान की गई है।

 

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि योगी सरकार का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण आवास सुविधाओं का विस्तार करना है, ताकि प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और स्थानीय लोगों को भी पर्यटन से जुड़ने के अधिक अवसर मिल सकें।

 

6 की जगह अब 8 कमरों के लिए मिली मंजूरी

उन्होंने बताया कि संशोधित नीति के अनुसार शहरी क्षेत्रों में संचालित होम स्टे इकाइयों में अब न्यूनतम एक और अधिकतम आठ कमरे (16 बेड) पंजीकृत कराए जा सकेंगे। पूर्व में अधिकतम 6 कमरों को ही किराये पर दिए जाने की व्यवस्था थी। यह भी साफ किया गया है कि शहरी इलाकों में होम स्टे ऐसी रिहायशी प्रॉपर्टी में चलने चाहिए जो या तो आवेदक की अपनी हो या फिर विकास प्राधिकरण से लीज पर ली गई जमीन पर बनी हो। प्रॉपर्टी के मालिक या उनके परिवार के सदस्यों का वहीं रहना जरूरी है।

 

पर्यटकों को आवास के साथ भोजन की सुविधा

बीएंडबी श्रेणी के अंतर्गत आवासीय अथवा लीज पर लिए गए भवनों में अधिकतम 8 कमरे पंजीकृत किए जा सकेंगे। ऐसी इकाइयों में घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों को आवास के साथ नाश्ता और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इकाई में केयरटेकर का निवास अनिवार्य होगा और लीज पर लिए गए भवन की लीज अवधि न्यूनतम तीन वर्ष होनी चाहिए। 16 बेड वाली डॉरमेट्री भी इस श्रेणी में पात्र मानी जाएगी।

उन्होंने बताया कि आठ कमरों से अधिक क्षमता वाले आवासीय भवनों, होटल, मोटल और गेस्ट हाउस जैसी इकाइयों को इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत नहीं किया जाएगा।

 

तीन महीने पहले होगा स्वतः नवीनीकरण

संशोधन के तहत पंजीकृत इकाइयों को बड़ी राहत देते हुए पोर्टल आधारित स्वतः नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की व्यवस्था भी लागू की गई है। अब इकाई संचालक अपने पंजीकरण की अवधि समाप्त होने से पूर्व विभागीय पोर्टल पर स्वयं नवीनीकरण करा सकेंगे। यह सुविधा पंजीकरण समाप्ति की तिथि से तीन माह पूर्व उपलब्ध रहेगी।

 

पर्यटन आधारित रोजगार बढ़ेंगे

अपर मुख्य सचिव पर्यटन विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि यह संशोधन प्रदेश में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन देने और पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण आवास क्षमता बढ़ाने के लिए यह कदम विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगा। Edited by : Sudhir Sharma

शिक्षा में नवाचार करने वाले अधिकारियों को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान, योगी सरकार ने शुरू की चयन प्रक्रिया

Jevar Airport Farmers meet cm yogi

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश शिक्षा सुधारों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी सक्रिय कदम उठा रहा है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से संबद्ध प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार ‘अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन’ के लिए प्रदेश में चयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 

 

शिक्षा प्रशासन में नवाचार, सुशासन, अधिगम सुधार, प्रभावी प्रबंधन और जनभागीदारी आधारित उल्लेखनीय कार्य करने वाले अधिकारियों का चयन कर उनके नाम राष्ट्रीय स्तर पर भेजे जाएंगे। यह पहल उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे शिक्षा सुधारों और नवाचारी प्रशासनिक मॉडलों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

चयनित होंगे चार बीएसए और छ: बीईओ

अपर राज्य परियोजना निदेशक प्रेम रंजन सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार पुरस्कार के लिए उत्तर प्रदेश से 4 जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) तथा 6 खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) का चयन किया जाएगा। इसके लिए सभी जनपदों को निर्देशित किया गया है कि वे शिक्षा प्रशासन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों का विवरण निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराएं। चयन के दौरान नवाचार, बेहतर प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता, अधिगम स्तर में सुधार, विद्यालयी व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण तथा विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश से चयनित अधिकारी राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे और अपने कार्यों के माध्यम से प्रदेश में लागू शिक्षा सुधारों की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करेंगे।

 

क्या है ‘अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन’

उल्लेखनीय है कि ‘अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन’ भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से संबद्ध राष्ट्रीय स्तर की पहल है। इसका उद्देश्य शिक्षा प्रशासन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित करना तथा देशभर में सफल प्रशासनिक नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणालियों को पहचान दिलाना है। 

 

यह हैं निर्देश

निर्देशों में कहा गया है कि जनपद ऐसे अधिकारियों के नाम प्रस्तावित करें, जिन्होंने शिक्षा प्रशासन में नवाचार आधारित कार्यप्रणाली अपनाकर उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए हों। विशेष रूप से वे अधिकारी प्राथमिकता में रहेंगे जिनके प्रयासों से विद्यार्थियों के अधिगम स्तर, विद्यालय प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता या शैक्षणिक वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला हो।
 

प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणाम आधारित प्रशासनिक संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए होने वाला यह चयन न केवल उत्कृष्ट अधिकारियों को पहचान दिलाएगा, बल्कि शिक्षा प्रशासन में नवाचार, प्रतिस्पर्धा और बेहतर प्रदर्शन की संस्कृति को भी प्रोत्साहित करेगा।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते वर्षों में बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में अनेक व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं। निपुण भारत मिशन, बाल वाटिका, विद्यालय कायाकल्प, स्मार्ट कक्षाएं, डिजिटल शिक्षण संसाधन, मिशन प्रेरणा, शिक्षक प्रशिक्षण और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे कार्यक्रमों ने विद्यालयी शिक्षा को नई दिशा प्रदान की है। इन पहलों को सफलतापूर्वक धरातल तक पहुंचाने में जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही कारण है कि अब ऐसे अधिकारियों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। Edited by : Sudhir Sharma

Lucknow Coaching Center Fire : लखनऊ में लपटों का तांडव, 15 छात्रों की मौत, CM योगी ने फायर विभाग के अफसरों को फटकारा, कैसी लगी आग, सामने आया कारण

CM Yogi Adityanath

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ में उस जगह पहुंचे जहां आग लगने की घटना हुई थी, घटना में 14 लोगों की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ से कार्यक्रम रद्द कर लखनऊ पहुंच गए हैं। मुख्यमंत्री घटनास्थल पर जाकर हालत का जायजा लेंगे और KGMU भी जाएंगे। 

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सीएम ने फोन पर फायर विभाग के अफसरों को फटकार लगाई है। हादसे के जिम्मेदारों को किसी भी हाल में न बख्शने के सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए। KGMU MS प्रेम राज सिंह ने बताया कि हमारे पास करीब 22-23 लोग आए थे जिसमें से 15 मृत लाए गए थे। 8 घायल थे जिसमें से 6 की हालत स्थिर है 2 लोगों को ज्यादा चोट आई है। 15 लोगों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। Edited by : Sudhir Sharma

 

 

इंदौर में किसान का अपहरण, वाट्सऐप पर मांगी फिरोती, 20 लाख लेकर छुडाने पहुंचा आधा गांव

Farmer kidnapped

इंदौर जिले के ग्रामीण इलाके में एक किसान के अपहरण का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। अपहरणकर्ताओं ने पहले शराब पिलाकर किसान का अपहरण किया। इसके बाद वाट्सऐप कॉल कर फिरौती मांगी। फिरौती की राशी देने के लिए आधे गांव के लोग उनकी बताए लोकेशन पर जा पहुंचे।

अपहर्ताओं ने उनके हाथ में हथियार देखे तो वे फिरौती की रकम नहीं लेने आए और उस वक्त तो किसान को लेकर भाग गए, लेकिन सुबह हाथ पैर बांधकर उसे एक गांव के पास पटक गए। बताया जाता है कि किसान की जमीन हाईवे में गई थी, जिसके चलते उसके शासन ने मुआवजा दिया था। इस कारण किसान का अपहरण किया गया।

बता दें कि पंथ बड़ोदिया गांव का रहने वाला 38 साल का हुकुमसिंह पिता पोपसिंह सोलंकी कल रात करीब 9 बजे खेत पर जाने का बोलकर घर से निकला। कुछ देर बात वाट्सऐप कॉल पर उसके परिजन और अन्य ग्रामीणों के पास कुछ लोगों ने उसे अगवा कर फिरौती की रकम 20 लाख रुपए मांगी। आनन-फानन में हुकुम के परिजन ने पुलिस को सूचना दी। बाद में परिजन और गांव वालों ने फिरौती की रकम की व्यवस्था की।

शराब पिलाई और होश में ही नहीं आने दिया : इस बीच अपहरणकर्ता पल-पल पर हुकुम के गांव वालों सहित परिजन के वाट्सऐप कॉल से संपर्क में थे। वे हुकुम की तस्वीरे भी भेज रहे थे। अपहरणकर्ता के बताए स्थान नौगांवा गांव के पास सभी फिरौती की रकम देने पहुंचे। कुछ पुलिसवाले भी उनके साथ थे। कुछ ग्रामीणों के हाथ में हथियार थे। यह देख अपहरणकर्ताओं ने फिर कॉल किया और धमकाया कि यह तुमने गलत किया, हथियारों और पुलिस को लेकर क्यों आए हो। अपहरणकर्ता हुकुम को कार में लेकर भाग गए। रातभर अपहरणकर्ताओं के फोन का हुकम के परिजन इंतजार करते रहे, लेकिन फोन नहीं आया और आज सुबह पलासिया गांव के पास हुकुम को हाथ-पैर बांधकर पटक गए। बाद में उसे गांव वाले घर लेकर पहुंचे। हुकुम काफी नशे में था। अपहरणकर्ताओं ने उसे खूब शराब पिलाई और होश में ही नहीं आने दिया। अब वह थोड़ा होश में आया है, उसका कहना है कि अपहरणकर्ताओं की संख्या 8 से अधिक थी।

हाईवे में गई 9 एकड़ जमीन : हुकुम पंथ बड़ोदिया का बड़ा कास्तकार है। उसके पास 40 एकड़ जमीन है। बीते दिनों हाईवे निकलने से 9 एकड़ जमीन रोड में गई है। जिसकी मुआवजा राशि उसे मिली है। किसी ने अपहरणकर्ताओं को रकम को लेकर मुखबिरी की होगी। यह भी शंका है कि अपहरणकर्ताओं में कुछ परिचित हो सकते है।
Edited By: Naveen R Rangiyal

CCSU के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, प्याज-लहसुन परिवार की इन 2 प्रजातियों में मिले कैंसर और डायबिटीज से बचाव के गुण

CCSU Meerut Research

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू), मेरठ के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे शोध का खुलासा किया है, जो आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है। विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में किए गए अध्ययन में एलियम (Allium) परिवार की दो विशेष प्रजातियों—एलियम हूकेरी (Allium hookeri) और एलियम एम्पेलोप्रासम (Allium ampeloprasum)—में कई औषधीय गुण पाए गए हैं। एलियम वही पौधों का परिवार है, जिसमें लहसुन और प्याज जैसी फसलें शामिल हैं, जिनका हर घर में इस्तेमाल होता है।

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शोध में सामने आया है कि इन दोनों नई प्रजातियों में ऐसे प्राकृतिक तत्व मौजूद हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कई स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं और आने वाले समय में स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में नई पहचान बना सकती हैं।

वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर विजय मलिक के निर्देशन में शोधार्थी दीप्ति तेवतिया द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि इन पौधों में ऐसे प्राकृतिक तत्व मौजूद हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद कर सकते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट, जीवाणुरोधी, मधुमेह नियंत्रण और कैंसर से बचाव के गुण पाए गए हैं।

यही कारण है कि भविष्य में इनका उपयोग हर्बल दवाओं और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के निर्माण में किया जा सकता है। किसानों के लिए खुल सकते हैं नए अवसर शोध का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन दोनों प्रजातियों की खेती पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जलवायु और मिट्टी में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। वर्तमान में इनकी खेती मुख्य रूप से उत्तराखंड, मणिपुर और कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में की जाती है।

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यदि किसानों को इनके उत्पादन और बाजार की उचित जानकारी उपलब्ध कराई जाए, तो ये फसलें पारंपरिक खेती का लाभदायक विकल्प बन सकती हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने के नए रास्ते खुलेंगे। स्वास्थ्य के लिए भी हैं लाभकारी एलियम हूकेरी (Allium hookeri) का उपयोग पूर्वोत्तर भारत में लंबे समय से सर्दी-जुकाम, खांसी, पाचन संबंधी समस्याओं और सूजन के उपचार में किया जाता रहा है। वहीं एलियम एम्पेलोप्रासम (Allium ampeloprasum) जिसे जायंट लीक या वाइल्ड लीक भी कहा जाता है, हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, रक्तचाप नियंत्रित रखने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगी माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन पौधों में मौजूद प्राकृतिक यौगिक भविष्य में कई स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों और प्राकृतिक औषधियों का आधार बन सकते हैं।

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कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नई दिशा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में जहां लहसुन और प्याज का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, वहीं एलियम परिवार की इन नई प्रजातियों का विस्तार किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकता है। साथ ही औषधीय पौधों के उत्पादन को नई दिशा और प्राकृतिक उपचार पद्धतियों को भी मजबूती मिलेगी। सीसीएसयू में किया गया यह शोध न केवल वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि यह संकेत भी है कि खेती और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभी अनेक नई संभावनाएं मौजूद हैं। आने वाले समय में एलियम हूकेरी और एलियम एम्पेलोप्रासम किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकती हैं। Edited by : Sudhir Sharma

योगी सरकार की पहल बनी बच्चों के जीवन का आधार

Yogi adityanath

Mukhyamantri Bal Seva Yojana 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए लगातार संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है, जिन्होंने अपने माता-पिता अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है। इसके साथ ही बालश्रम, भिक्षावृत्ति एवं वैश्यावृत्ति जैसी परिस्थितियों से मुक्त कराकर पुनर्वासित बच्चों को भी इस योजना के माध्यम से पारिवारिक वातावरण में बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जा रहा है।

आर्थिक सहायता से बच्चों को मिल रहा बेहतर भविष्य

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 2,500 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। वहीं, ऐसे युवक-युवतियां जिन्होंने माता-पिता दोनों अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है, उन्हें 18 से 23 वर्ष की आयु तक स्नातक डिग्री या डिप्लोमा पूरा करने के लिए प्रतिमाह 2,500 रुपए की सहायता दी जा रही है। योगी सरकार की इस पहल से बच्चों की शिक्षा और भविष्य सुरक्षित हो रहा है। वर्तमान समय में प्रदेशभर में कुल 1,03,611 बच्चे इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सहायता किसी संबल से कम नहीं है। योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करना भी है।

बाल संरक्षण को मिल रही नई मजबूती, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर

योगी सरकार बाल संरक्षण और पुनर्वास को लेकर विशेष रूप से गंभीर नजर आ रही है। बालश्रम और भिक्षावृत्ति जैसी समस्याओं से मुक्त कराए गए बच्चों को परिवार आधारित वातावरण में पुनर्वासित कर मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनका सामाजिक विकास भी सुनिश्चित हो रहा है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है। कई छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की मंशा है कि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है। वहीं बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

 

महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति के अनुसार प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत आने वाले समस्त पात्र बच्चों की प्राथमिकता के आधार पर पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिया जाए। इसके लिए जिले स्तर पर व्यापक सर्वेक्षण, सत्यापन एवं जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएं। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि पात्रता रखने वाला कोई भी बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala