Share Bazaar में बड़ी गिरावट, Sensex 893 अंक लुढ़का, Nifty भी 24000 के नीचे, आखिर क्यों ढहा बाजार?

Indian stock market witnessed sharp decline due to selling pressure

Share Market Update News : भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को चौतरफा बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला। बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से आईटी शेयरों में आई तेज बिकवाली के कारण हुई। टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक के शेयरों में सबसे ज्‍यादा गिरावट आई। कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्स 893.39 अंक यानी 1.16 प्रतिशत लुढ़ककर 76200.68 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 278.80 अंक यानी 1.16 प्रतिशत टूटकर 23824.10 के स्तर पर आ गया। सबसे ज़्यादा नुकसान इंफोसिस को हुआ जिसमें 3.39 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

 

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को चौतरफा बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला। बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से आईटी शेयरों में आई तेज बिकवाली के कारण हुई। टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक के शेयरों में सबसे ज्‍यादा गिरावट आई।

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कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्स 893.39 अंक यानी 1.16 प्रतिशत लुढ़ककर 76200.68 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 278.80 अंक यानी 1.16 प्रतिशत टूटकर 23824.10 के स्तर पर आ गया। सबसे ज़्यादा नुकसान इंफोसिस को हुआ जिसमें 3.39 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

इसके बाद टीसीएस में 3.21 प्रतिशत की गिरावट, अडाणी एंटरप्राइजेज में 3.17 प्रतिशत की गिरावट, विप्रो में 3.16 प्रतिशत की गिरावट और जेएसडब्ल्यू स्टील में 3.14 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। भारतीय बाजार में यह कमजोरी अकेले नहीं थी, बल्कि पूरे एशियाई बाजारों में मंदी का माहौल देखा गया।

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मिडल ईस्ट (पश्चिम एशिया) के संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर महंगाई (महंगाई दर) की चिंता बढ़ा दी है। एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.16 फीसदी कमजोर होकर 94.8275 के स्तर पर आ गया।

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इससे पहले यानी सोमवार को भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 291.17 अंक या 0.38 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,094.07 और निफ्टी 89.80 अंक या 0.37 प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,102.90 बंद हुआ।
Edited By : Chetan Gour

मुख्यमंत्री योगी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दी श्रद्धांजलि, बोले- राष्ट्रवाद की लौ प्रज्ज्वलित करता रहेगा उनका बलिदान

Chief Minister Yogi paid tribute to Dr Shyama Prasad Mukherjee

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रखर राष्ट्रवादी व जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल परिसर में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत की एकता व अखंडता के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान प्रत्येक देशवासी के हृदय में सदैव राष्ट्रवाद की लौ प्रज्ज्वलित करता रहेगा।   

 

इस दौरान उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के मंत्री सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्र देव सिंह, बलदेव सिंह औलख, विधायक नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, लालजी प्रसाद निर्मल, अवनीश सिंह, भाजपा के महानगर अध्यक्ष आनन्द द्विवेदी, भाजपा नेता नीरज सिंह आदि ने भी राष्ट्रनायक डॉ. मुखर्जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट कर भी डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा- 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान, नहीं चलेंगे’ के उद्घोषक, प्रखर राष्ट्रवादी और जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। भारत की एकता व अखंडता के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान प्रत्येक देशवासी के हृदय में सदैव राष्ट्रवाद की लौ प्रज्ज्वलित करता रहेगा।
Edited By : Chetan Gour 

Uttarakhand: अर्द्धकुंभ 2027 के लिए सीएम धामी का बड़ा मास्टरप्लान, 156 करोड़ से बदलेगी ऋषिकेश त्रिवेणी घाट की सूरत

Uttarakhand Ardh Kumbh 2027: उत्तराखंड में साल 2027 में आयोजित होने वाले अर्द्धकुंभ को ऐतिहासिक, भव्य और दिव्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। इस महाआयोजन के मद्देनजर देवभूमि आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की सुगमता और अध्यात्म को बढ़ावा देने के लिए ऋषिकेश के विश्व प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट का कायाकल्प किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने त्रिवेणी घाट को एक आधुनिक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 156 करोड़ का विशेष बजट स्वीकृत किया है।

बनेगा नया 'गंगा कॉरिडोर'

इस विशेष योजना के तहत ऋषिकेश में एक भव्य गंगा कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। यह कॉरिडोर न केवल त्रिवेणी घाट की सुंदरता में चार चांद लगाएगा, बल्कि यहां आने वाले तीर्थयात्रियों को आध्यात्मिकता का एक बिल्कुल नया, सुगम और सुरक्षित अनुभव प्रदान करेगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होने के बावजूद इस पूरे क्षेत्र के पौराणिक और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखा जाएगा।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं

  • आधुनिक धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र : त्रिवेणी घाट को वैश्विक स्तर के सांस्कृतिक हब के रूप में री-डेवलप किया जाएगा, जहां भव्य गंगा आरती के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
  • श्रद्धालुओं के लिए सुगम मार्ग : अर्द्धकुंभ के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने और उनके आवागमन को आसान बनाने के लिए कॉरिडोर के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
  • 156 करोड़ का विशेष प्रावधान: इस भारी-भरकम बजट से घाटों का विस्तार, सौंदर्यीकरण, रोशनी की आधुनिक व्यवस्था और स्वच्छता प्रबंधन के कार्य किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, राज्य सरकार अर्द्धकुंभ 2027 को भव्यता के नए शिखर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह नया इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल कुंभ के दौरान काम आएगा, बल्कि भविष्य में ऋषिकेश में पर्यटन और तीर्थाटन को एक नई ऊंचाई देगा।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

India-US Trade Talks 2026: अमेरिका के साथ बड़ी डील की तैयारी में भारत, शेयर बाजार के निवेशकों के लिए क्या है इसके मायने?

US Trade Deal

India-US Trade Deal Talks 2026: अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ की वजह से भारत का अमेरिका के साथ व्यापार मुनाफा (Trade Surplus) 40% तक गिर चुका है। इस बीच वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अगले हफ्ते अमेरिकी सरकार के प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात करेंगे। कहा जा रहा है कि इस दौरान भारत अमेरिका के बीच व्यापार समझौता जल्द ही अंतिम दौर में पहुंच सकता है। इस इमरजेंसी मीटिंग के बाद कौन से सेक्टर्स के शेयर रॉकेट बनने वाले हैं और कहां आपको सतर्क रहना चाहिए? ALSO READ: तेल निर्यात में राहत के बीच ट्रंप की चेतावनी, क्या मुश्किल में पड़ जाएगी US-Iran डील?

 

जून 2026 में G7 समिट से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। भारतीय शेयर बाजार से जुड़े निवेशक भी इस पॉजिटिव न्यूज का ब्रेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

 

व्यापार डील से भारत को क्या फायदा? 

एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा, बाजारों तक पहुंच आसान होगी और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। यदि भारत अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करते हुए संतुलित समझौता करता है, तो ट्रेड डील से सबसे बड़ा फायदा निर्यात, निवेश, रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिल सकता है। यही वजह है कि बाजार और उद्योग जगत भारत-अमेरिका ट्रेड डील को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मान रहे हैं।

 

ट्रेड डील से भारत को उन्नत तकनीक, रक्षा उपकरण, सेमीकंडक्टर और एयरोस्पेस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलेगा। टेक्सटाइल और गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो कंपोनेंट्स, आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में भी भारत को फायदा मिलेगा। अगर भारत और अमेरिका के बीच व्यापक ट्रेड डील होती है, तो भारत को कई क्षेत्रों में सीधा फायदा मिल सकता है। हालांकि अंतिम लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि समझौते की शर्तें क्या होती हैं। ALSO READ: PM मोदी-ट्रंप बैठक का असर, अंतिम चरण में पहुंचा भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

बाजार विशेषज्ञ योगेश बागौरा ने कहा कि अमेरिका भारत का एक्सपोर्ट में बड़ा पार्टनर है। अगर ट्रेड डील होती है और टैरिफ घटकर 10 फीसदी तक हो जाता है तो भारत के लिए ठीक रहेगा। 

 

अगर इससे ज्यादा टैरिफ लगेगा तो भारतीय सामान महंगा हो जाएगा और उसे चीन और अन्य देशों के सामान से कॉम्पिटिशन का सामना पड़ेगा। शेयर बाजार पर डील का सकारात्मक असर होगा और एक्सपोर्ट सेक्टर को फायदा होगा। आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों को शेयर बाजार “ट्रेड डील बेनिफिशियरी” के रूप में देख सकता है। हालांकि इस डील मात्र से ही एफआईआई भारतीय बाजार की ओर आकर्षित नहीं होंगे। 

गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने फरवरी में लगभग एक वर्ष तक चली बातचीत के बाद व्यापार को लेकर अंतरिम सहमति बनाई थी। इसके बाद से दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं भारत अमेरिका से टैरिफ को और कम करने की मांग रख सकता है, जबकि अमेरिका भारत से एग्री के कुछ प्रोडक्‍ट्स को परमिशन देने की मांग कर रहा है।

edited by : Nrapendra Gupta

कलेक्‍टर की चौखट पर बेबस बुजुर्ग, न्‍याय मांगने बिजनौर से एंबुलेंस में इंदौर आई 80 साल की फातिमा, दबंगों ने कर रखा है प्रापर्टी कब्‍जा

Anis Fatima

अपराध इस देश के सिस्‍टम पर कितना हावी हो चुका है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है जब कोई 80 से 85 साल की बीमार बुजुर्ग न्‍याय के लिए उत्‍तर प्रदेश से करीब 850 किमी से ज्‍यादा का सफर तय कर के मध्‍यप्रदेश के इंदौर तक आए। वो भी तब जब वो कई बीमारियों से जूझ रही हों, अपनी आखिरी सांसें गिर रही हों और उन्‍हें यहां तक आने के लिए एंबुलेंस का सहारा लेना पड़े।

मंगलवार को इंदौर कलेक्‍ट्रेट कार्यालय की चौखट पर एंबुलेंस में इस ‘बेबस बुजुर्ग’ की यह तस्‍वीर देखकर हर किसी का दिल और आंखें भर आईं। मंगलवार को वे अपने बेटे और बहू के साथ कलेक्‍टर शिवम वर्मा से मिलीं और न्‍याय की गुहार लगाई।

अनीस फातिमा ने अपना सुनाया दर्द : इस बुजुर्ग का नाम अनीस फातिमा पति मेहबूब हैं। अनीस फातिमा इंदौर की हैं। वे इंदौर के गांधीनगर में बक्षीबाग स्‍कूल में शिक्षिका थीं। पति के निधन के बाद अपने मायके उत्‍तर प्रदेश के बिजनौर में रहती हैं। इस बीच फातिमा ने इंदौर में स्‍थित अपना एक मकान और एक प्‍लॉट अपने पति के भतीजे अनीस पिता मोहम्‍मद अय्युब को यह कहकर उसकी देखभाल करने के लिए कहा था कि मकान और प्‍लॉट का संरक्षण हो सके। अपने मकान में उन्‍होंने कुछ सामान और कीमती दस्‍तावेज आदि भी रखे थे। इस दौरान पीड़ित अनीस फातिमा वहां से इंदौर के सदर बाजार की इकबाल कॉलोनी में इस लिहाज से अस्‍थाई तौर पर रहने के लिए आ गई थी कि वहां से उन्‍हें अपने स्‍कूल जाने में कोई दिक्‍कत और असुविधा न हो। स्‍कूल के रिटायर्ड होने के बाद अनीस फातिमा अपने परिवार में खजराना में रहने चली गईं। इसी का फायदा उठाकर उनके पति के भतीजे आरोपी अनीस पिता मोहम्‍मद अय्युब ने ताला लगाकर उस पर कब्‍जा कर लिया।

बेटे फरहान के साथ गाली गलौच और मारने की धमकी : अनीस फातिमा के साथ आए उनके बेटे फरहान ने बताया कि आरोपी अनीस पिता मोहम्‍मद अय्युब, मोहम्‍मद जुबैर और किश्‍वरजहां ने मिलकर हमारे मकान और प्‍लॉट के फर्जी दस्‍तावेज बनवा लिए और कब्‍जा कर लिया। जब वे इस बारे में बात करने पहुंचे तो उसे गालियां दी और जान से मारने की धमकी दे डाली।

Anis Fatima

गांधीनगर थाना में शिकायत दर्ज : फरहान और उनके वकील ने आवेदन के माध्‍यम से बताया कि प्रापर्टी पर कब्‍जे को लेकर 13 दिसंबर 2023 को इंदौर के गांधी नगर थाना में आरोपी मोहम्‍मद जुबेर और किश्‍वर जहां के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई थी। उनके खिलाफ थाने में मामला दर्ज होने के बाद जांच कर्ता मीना चौहान ने मामले की जांच की थी। पीड़ित परिवार का आरोप है कि मीना चौहान ने भी ठीक से मामले की जांच नहीं की।

प्रापर्टी के मूल दस्‍तावेज पीड़ित के पास हैं : पीड़ित परिवार के सदस्‍यों ने बताया कि उनकी यह पूरी प्रापर्टी अनीस फातिमा और उनके बेटे फरहान और बहू फरजाना अंजुम के स्‍वामित्‍व और आधिपत्‍य की है। वे ही उसके हकदार हैं। इसके मूल दस्‍तावेज भी अनीस फातिमा के पास मौजूद हैं। बावजूद इसके आरोपी उनके मकान और प्‍लॉट पर कब्‍जा किए हुए हैं। उन्‍होंने कलेक्‍टर शिवम वर्मा को जनसुनवाई में आवेदन देकर न्‍याय की गुहार लगाई। कलेक्‍टर वर्मा ने पीड़ित अनीस फातिमा से मुलाकात कर जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्‍वासन दिया है।

850 किमी सफर तय कर इंदौर पहुंची फातिमा : फातिमा के बेटे फरहान ने बताया कि उनकी मां को कई तरह की बीमारियां है, वे करीब 80 साल की हैं। इस बीच उन्‍हें ब्रेनहेमरेज भी हुआ था। उनके पास ले-देकर यही एक प्रापर्टी है जिस पर दबंगों ने कब्‍जा कर लिया है। ऐसे में 80 साल की बुजुर्ग और बीमार मां को एंबुलेंस से यूपी के बिजनौर से इंदौर लाना पड़ा। उनकी हालत बेहद नाजुक है। उन्‍हें इंदौर प्रशासन और पुलिस से न्‍याय की उम्‍मीद है।

यूपी में पुलिस डॉग मैरी ने सुलझाया ब्लाइंड रेप केस, एसपी ने दिया 10000 का इनाम

Sambhal blind rape case

Sambhal blind rape case: यूपी के संभल जिले में 5 दिनों से पुलिस के लिए सिर दर्द बने एक 'ब्लाइंड रेप केस' की गुत्थी को पुलिस डॉग मैरी ने चंद मिनटों में सुलझा दिया। घटनास्थल पर मिले एक अदद 'गमछे' की गंध के सहारे मैरी खेतों और जंगलों को चीरती हुई सीधे रेपिस्ट के घर जा पहुंची। इस हैरतअंगेज कामयाबी से खुश होकर संभल के एसपी ने इस 'गोल्ड मेडलिस्ट' डॉग को 10 हजार रुपए के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया है।

जंगल में बेहोश मिली थी 6 साल की मासूम

दिल को दहला देने वाली यह वारदात बबराला थाना क्षेत्र की है। बीती 18 जून को एक 6 साल की मासूम बच्ची घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक लापता हो गई थी। काफी खोजबीन के बाद बच्ची घर से करीब 300 मीटर दूर जंगल में लहूलुहान और बेहोशी की हालत में मिली। दरिंदे ने मासूम के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने उसी रात क्राइम सीन को सील कर दिया। अगले दिन फॉरेंसिक टीम को जांच के दौरान झाड़ियों से एक संदिग्ध 'गमछा' मिला। पुलिस के पास आरोपी का न तो कोई हुलिया था और न ही कोई नाम। केस पूरी तरह 'ब्लाइंड' था, तभी एंट्री हुई पुलिस की स्पेशल डॉग 'मैरी' की।
 

गंध मिलते ही मैरी का एक्शन

एसपी के निर्देश पर डॉग स्क्वॉड की जर्मन शेफर्ड 'मैरी' को घटनास्थल पर लाया गया। मैरी को जैसे ही वह बरामद हुआ गमछा सूंघने को दिया गया, उसकी आंखों में चमक आ गई। गंध पकड़ते ही मैरी तेजी से खेतों और पगडंडियों से होते हुए एक खास दिशा में दौड़ पड़ी। पुलिस की टीम मैरी के पीछे-पीछे भाग रही थी। करीब कुछ दूरी तय करने के बाद मैरी सीधे बबराला के ही रहने वाले संदीप नाम के युवक के घर के भीतर घुस गई और वहां जाकर रुक गई। जब मैरी संदीप के घर पहुंची, तो पुलिस को देखकर उसके घरवाले घबरा गए और संदीप के घर पर न होने का बहाना बनाने लगे। लेकिन मैरी की सटीक क्रेडिबिलिटी को देखते हुए पुलिस का शक यकीन में बदल गया।

फिर पुलिस ने दबोच लिया आरोपी

पुलिस की भनक लगते ही संदीप पिछले दरवाजे से खेतों की तरफ भाग निकला था। संदीप के भागने के बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। आखिरकार बबराला-रजपुरा मार्ग पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी संदीप को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक अवैध तमंचा और कारतूस भी बरामद हुआ, जिससे साफ है कि वह पुलिस पर हमला करने या खुद को नुकसान पहुंचाने की फिराक में था।

 

पुलिस ने आरोपी संदीप पर न सिर्फ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और दुष्कर्म की संगीन धाराएं लगाई हैं, बल्कि तमंचा मिलने के बाद उस पर आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है। फॉरेंसिक टीम ने संदीप के डीएनए सैंपल और गमछे के रेशों को मैचिंग के लिए लैब भेज दिया है, ताकि कोर्ट में उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। फिलहाल, मासूम का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर है।

'मैरी' ने पहले भी सुलझाए हैं केस

मैरी कोई आम डॉग नहीं है, बल्कि वह अपने ट्रेनिंग बैच की 'गोल्ड मेडलिस्ट' रही है। अपराधियों को पकड़ने में उसका लोहा हर कोई मानता है। इससे पहले बिलासपुर के घने जंगलों में हुए एक अंधे कत्ल (Blind Murder Case) की गुत्थी को भी मैरी ने ही सुलझाया था। संभल के ही एक अन्य अज्ञात हत्याकांड में मैरी ने हत्यारे के फेंकें हुए हथियार को ढूंढ निकाला था।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala

 

यूपी में पुलिस डॉग मैरी ने सुलझाया ब्लाइंड रेप केस, एसपी ने दिया 10000 का इनाम

Sambhal blind rape case

Sambhal blind rape case: यूपी के संभल जिले में 5 दिनों से पुलिस के लिए सिर दर्द बने एक 'ब्लाइंड रेप केस' की गुत्थी को पुलिस डॉग मैरी ने चंद मिनटों में सुलझा दिया। घटनास्थल पर मिले एक अदद 'गमछे' की गंध के सहारे मैरी खेतों और जंगलों को चीरती हुई सीधे रेपिस्ट के घर जा पहुंची। इस हैरतअंगेज कामयाबी से खुश होकर संभल के एसपी ने इस 'गोल्ड मेडलिस्ट' डॉग को 10 हजार रुपए के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया है।

जंगल में बेहोश मिली थी 6 साल की मासूम

दिल को दहला देने वाली यह वारदात बबराला थाना क्षेत्र की है। बीती 18 जून को एक 6 साल की मासूम बच्ची घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक लापता हो गई थी। काफी खोजबीन के बाद बच्ची घर से करीब 300 मीटर दूर जंगल में लहूलुहान और बेहोशी की हालत में मिली। दरिंदे ने मासूम के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने उसी रात क्राइम सीन को सील कर दिया। अगले दिन फॉरेंसिक टीम को जांच के दौरान झाड़ियों से एक संदिग्ध 'गमछा' मिला। पुलिस के पास आरोपी का न तो कोई हुलिया था और न ही कोई नाम। केस पूरी तरह 'ब्लाइंड' था, तभी एंट्री हुई पुलिस की स्पेशल डॉग 'मैरी' की।
 

गंध मिलते ही मैरी का एक्शन

एसपी के निर्देश पर डॉग स्क्वॉड की जर्मन शेफर्ड 'मैरी' को घटनास्थल पर लाया गया। मैरी को जैसे ही वह बरामद हुआ गमछा सूंघने को दिया गया, उसकी आंखों में चमक आ गई। गंध पकड़ते ही मैरी तेजी से खेतों और पगडंडियों से होते हुए एक खास दिशा में दौड़ पड़ी। पुलिस की टीम मैरी के पीछे-पीछे भाग रही थी। करीब कुछ दूरी तय करने के बाद मैरी सीधे बबराला के ही रहने वाले संदीप नाम के युवक के घर के भीतर घुस गई और वहां जाकर रुक गई। जब मैरी संदीप के घर पहुंची, तो पुलिस को देखकर उसके घरवाले घबरा गए और संदीप के घर पर न होने का बहाना बनाने लगे। लेकिन मैरी की सटीक क्रेडिबिलिटी को देखते हुए पुलिस का शक यकीन में बदल गया।

फिर पुलिस ने दबोच लिया आरोपी

पुलिस की भनक लगते ही संदीप पिछले दरवाजे से खेतों की तरफ भाग निकला था। संदीप के भागने के बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। आखिरकार बबराला-रजपुरा मार्ग पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी संदीप को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक अवैध तमंचा और कारतूस भी बरामद हुआ, जिससे साफ है कि वह पुलिस पर हमला करने या खुद को नुकसान पहुंचाने की फिराक में था।

 

पुलिस ने आरोपी संदीप पर न सिर्फ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और दुष्कर्म की संगीन धाराएं लगाई हैं, बल्कि तमंचा मिलने के बाद उस पर आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है। फॉरेंसिक टीम ने संदीप के डीएनए सैंपल और गमछे के रेशों को मैचिंग के लिए लैब भेज दिया है, ताकि कोर्ट में उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। फिलहाल, मासूम का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर है।

'मैरी' ने पहले भी सुलझाए हैं केस

मैरी कोई आम डॉग नहीं है, बल्कि वह अपने ट्रेनिंग बैच की 'गोल्ड मेडलिस्ट' रही है। अपराधियों को पकड़ने में उसका लोहा हर कोई मानता है। इससे पहले बिलासपुर के घने जंगलों में हुए एक अंधे कत्ल (Blind Murder Case) की गुत्थी को भी मैरी ने ही सुलझाया था। संभल के ही एक अन्य अज्ञात हत्याकांड में मैरी ने हत्यारे के फेंकें हुए हथियार को ढूंढ निकाला था।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala

 

Uttarakhand: रुद्रप्रयाग गुरुद्वारे में 40 घंटे से तनाव, छत पर डटे निहंग, सेना तैनात, जानिए क्या है पूरा विवाद?

Rudraprayag Gurudwara controversy

Rudraprayag Gurudwara controversy: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में नगरासू (दमदमा साहिब) गुरुद्वारे में पिछले कुछ दिनों से एक गंभीर और तनावपूर्ण गतिरोध चल रहा है। श्री हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर स्थित इस गुरुद्वारे की छत पर पारंपरिक हथियारों (तलवार, भाले, कुल्हाड़ी) से लैस कुछ निहंग सिख लगभग 40 से 50 घंटे से अधिक समय से डटे हुए हैं।  इस संवेदनशील माहौल को देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। यहां पुलिस के साथ-साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सेना के जवानों को तैनात किया गया है।

क्या है पूरा मामला? 

इस विवाद की जड़ें 16 जून 2026 को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई एक घटना से जुड़ी हैं।  हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौट रहे निहंग सिखों के एक गुट का स्थानीय बाजार में पार्किंग को लेकर विवाद हो गया था।  यह विवाद इतना बढ़ा कि तलवारें चल गईं, जिसमें कुछ स्थानीय लोग घायल हो गए।  स्थानीय लोगों के हंगामे के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और 4 निहंग सिखों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। कर्णप्रयाग की घटना के बाद, लगभग 7 से 8 निहंग सिखों का एक दूसरा दल रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे पहुंचा। 

 

20 जून को लंगर के दौरान गुरुद्वारा प्रबंधन समिति और इन निहंगों के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई।  निहंगों का आरोप था कि उनके साथियों पर एकतरफा कार्रवाई हुई है, इसलिए वे गुरुद्वारा प्रबंधन से विरोध प्रदर्शन में समर्थन मांग रहे थे। विवाद बढ़ने पर प्रबंधन ने पुलिस (112) को फोन कर दिया। 

 

पुलिस को आते देख निहंग सिख घबरा गए और हथियारों के साथ गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल (छत) पर चढ़ गए और ऊपर जाने वाले रास्ते को ब्लॉक कर दिया। रिपोर्ट्‍स के मुताबिक भाले और तलवारों से लैस लगभग छह निहंग शनिवार शाम करीब 4 बजे गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और तब से वहीं डटे हुए हैं। वे गिरफ्तार किए गए 4 निहंगों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। 

क्या कहना है गुरुद्वारे के मुख्‍य ग्रंथी का?

गुरुद्वारे के मुख्य सेवादार (ग्रंथी) बाबा बेंत सिंह के मुताबिक, शुरुआत में निहंगों ने कुछ सेवादारों/श्रद्धालुओं को बंधक बनाने की कोशिश की थी, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अब कोई भी बंधक नहीं है। 

 

आरोप है कि छत पर मौजूद निहंगों ने गुरुद्वारे की संपत्तियों, जैसे सोलर पैनल आदि को नुकसान पहुंचाया और नीचे की तरफ पत्थर भी फेंके। हालांकि गुरुद्वारे के भीतर आम श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षा कारणों से फिलहाल रोका गया है, लेकिन जिला प्रशासन का कहना है कि मुख्य हेमकुंड साहिब और चारधाम यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है।

‍निहंगों से बातचीत जारी

इससे पहले, रुद्रप्रयाग की पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने कहा था कि इनसे बातचीत की जा रही है और बातचीत के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। निहंगों में से एक प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से बात करने के लिए छत से नीचे आया है और बाकी निहंगों के साथ बातचीत चल रही है। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि हेमकुंड साहिब यात्रा शांतिपूर्वक चल रही है और गुरुद्वारे में ‘अरदास’ और ‘लंगर’ सहित नियमित गतिविधियां बिना किसी बाधा के जारी हैं। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की भी अपील की।

क्या कहना है गढ़वाल आईजी का?

इस गतिरोध को कर्णप्रयाग झड़प से जोड़ने वाली रिपोर्टों को खारिज करते हुए, गढ़वाल के पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप ने कहा कि यह घटना शुरुआत में निहंग श्रद्धालुओं और गुरुद्वारा प्रबंधन के बीच एक विवाद के रूप में शुरू हुई थी, जहां वे लंगर छक रहे थे। बहस के बाद, प्रबंधन ने 112 नंबर पर कॉल किया था, जिस पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। यह मुख्य रूप से गुरुद्वारा प्रबंधन और यहां आए निहंग श्रद्धालुओं के बीच का आंतरिक विवाद है और विशेष रूप से, प्रबंधन के सदस्य भी निहंग समुदाय से ही ताल्लुक रखते हैं।  

Edited by: Vrijendra Singh Jhala

 

बेबस मां की पुकार पर CM सोरेन का बड़ा एक्शन, ट्वीट के चंद घंटों में कलेक्टर ने पहुंचाई मदद

CM Hemant Soren takes action

Hemant Soren takes action: झारखंड की राजधानी रांची के पिस्का नगड़ी से एक बेहद मार्मिक और दिल को झकझोर देने वाला मामला मामला सामने आया है। यहां दो मासूम बच्चों की भूख मिटाने और उनका भविष्य बचाने के लिए एक मजबूर मां अपने बच्चों को अनाथालय भेजने की गुहार लगा रही थी। सोशल मीडिया पर इस बेबसी की कहानी सामने आते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तुरंत संज्ञान लिया, जिसके बाद प्रशासन ने चंद घंटों के भीतर पीड़िता तक मदद पहुंचाई। 

क्या है पूरा मामला? 

रांची के पिस्का नगड़ी की रहने वाली सीमा लोहरा के सिर पर पिछले साल दिसंबर में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब मुफलिसी (गरीबी) के बीच उनके पति की मौत हो गई। सीमा के दो मासूम बच्चे हैं—एक तीन साल का बेटा और दूसरा महज चार महीने का दूधमुंहा बच्चा। पति की मौत के बाद घर में कोई कमाने वाला नहीं बचा।

 

सीमा रोज अपनी गोद में चार महीने के बच्चे को लेकर काम की तलाश में निकलती थीं, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। स्थिति इतनी बदतर हो गई कि घर में चूल्हा जलना बंद हो गया। भूख और लाचारी से टूट चुकी सीमा लोहरा ने रोते हुए यहां तक कह दिया कि मेरे बच्चों को किसी अनाथालय में रख दीजिए, कम से कम उनका भविष्य तो बच जाएगा और उन्हें दो वक्त की रोटी मिल सकेगी। सोशल मीडिया पर जब यह मार्मिक अपील वायरल हुई, तो लोगों ने 'इंसानियत अभी जिंदा है' का संदेश देते हुए सरकार से मदद की गुहार लगाई।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिया त्वरित संज्ञान

जैसे ही यह मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में आया, उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत जिला प्रशासन को निर्देश जारी किए। सीएम ने अधिकारियों को आदेश देते हुए कहा उक्त मामले की जांच कर सीमा लोहरा बहन को हर जरूरी सरकारी योजना से तथा बच्चों को शिक्षा और आंगनवाड़ी से जोड़ने हेतु कार्रवाई कर सूचित करें।

चंद घंटों में मिली पेंशन और राशन

मुख्यमंत्री का निर्देश मिलते ही रांची के जिला कलेक्टर (डीएम) और उनकी टीम तुरंत एक्शन में आ गई। प्रशासन की टीम ने बिना वक्त गंवाए सीमा लोहरा के घर का रुख किया और उन्हें तत्काल राहत पहुंचाई। कलेक्टर ने मुख्यमंत्री को की गई कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए श्रीमती सीमा देवी को तत्काल राशन उपलब्ध करा दिया गया है। साथ ही उनका राशन कार्ड हेतु अप्लाई करा दिया गया है और राज्य विधवा सम्मान पेंशन योजना की स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई है।

बच्चों की पढ़ाई का भी जिम्मा उठाएगी सरकार

प्रशासन ने न सिर्फ सीमा के राशन और पेंशन की व्यवस्था की, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी कदम उठाए हैं। कलेक्टर के मुताबिक, बच्चों की शिक्षा और देखरेख के लिए जिला समाज कल्याण पदाधिकारी एवं जिला शिक्षा अधीक्षक को कड़े निर्देश दे दिए गए हैं ताकि बच्चों को आंगनवाड़ी और स्कूल से जोड़कर बेहतर शिक्षा दी जा सके। प्रशासन के इस त्वरित और मानवीय कदम के बाद अब सीमा लोहरा को अपने बच्चों को खुद से दूर अनाथालय नहीं भेजना पड़ेगा। मुख्यमंत्री के इस फैसले और जिला प्रशासन की मुस्तैदी की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

अब जवान लाशें ढोते-ढोते थक गया है देश, किस काम का ऐसा सिस्टम, जो हमारे बच्चों को बचा न सके?

Lakhnow fire news

पापा… प्लीज मुझे बचा लो…” यह सिर्फ एक बेटे की आखिरी पुकार नहीं थी। यह उस भारत की चीख थी, जो हर कुछ महीनों में अपने युवाओं को किसी न किसी लापरवाही, भ्रष्टाचार और सिस्टम की नाकामी की आग में खो देता है।

लखनऊ के अग्निकांड में जब 23 वर्षीय गेम डिजाइनर सुखमनी सिंह ने अपने पिता को फोन किया—”पापा, मुझे बचा लो” तब वह सिर्फ अपने लिए मदद नहीं मांग रहा था। वह उस व्यवस्था से सवाल कर रहा था, जो इमारतों को मंजूरी तो देती है, लेकिन निकास द्वारों की जांच नहीं करती; जो फायर एनओसी जारी तो करती है, लेकिन यह नहीं देखती कि आपातकाल में लोग बाहर निकल भी पाएंगे या नहीं।

उसके कुछ मिनट बाद फोन कट गया।
और फिर हमेशा की तरह शुरू हुआ वही राष्ट्रीय अनुष्ठान—मुआवजे की घोषणा, जांच समिति, अधिकारियों का निलंबन, टीवी डिबेट और सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि।

लेकिन सवाल वही रह गयाक्या हमारे बच्चों की जिंदगी की कीमत सिर्फ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस, जांच समिति और पांच लाख रुपये है?

हर हादसे के बाद हम भूल क्यों जाते हैं?
लखनऊ कोई पहली त्रासदी नहीं है। 2019 में सूरत के कोचिंग सेंटर में लगी आग में 22 छात्रों की मौत हुई थी। कुछ बच्चों ने जान बचाने के लिए चौथी मंजिल से छलांग लगा दी थी। पूरे देश ने वह भयावह दृश्य देखा था।
2024 में राजकोट के गेमिंग जोन में आग लगी। 27 लोग जिंदा जल गए, जिनमें कई बच्चे शामिल थे। दिल्ली के उपहार सिनेमा कांड से लेकर मुंबई के कमला मिल्स अग्निकांड तक, अस्पतालों से लेकर कोचिंग सेंटरों तक, हम एक ही कहानी बार-बार पढ़ते हैं।
•     अवैध निर्माण।
•     बंद आपातकालीन निकास।
•     फर्जी या कागजी फायर एनओसी।
•     और हादसे के बाद जिम्मेदारी का पिंग-पोंग।
•     हर बार सरकारें कहती हैं—”दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
 
लेकिन सच्चाई यह है कि दोषी अक्सर बच जाते हैं और मरने वाले हमेशा आम नागरिक होते हैं।
भारत में मौतें प्राकृतिक नहीं, प्रशासनिक होती जा रही हैं
यह कहना कठोर लग सकता है, लेकिन आज भारत में होने वाली कई सामूहिक मौतें दुर्घटनाएं नहीं, बल्कि “प्रशासनिक हत्याएं” हैं।
जब किसी इमारत में लोगों के निकलने का रास्ता नहीं होता, तो आग नहीं मारती—लापरवाही मारती है। जब फायर ऑडिट सिर्फ फाइलों में होता है, तो धुआं नहीं मारता—भ्रष्टाचार मारता है।
जब राहत और बचाव में हर मिनट कीमती होता है और फैसले लेने में घंटों लग जाते हैं, तो ऑक्सीजन की कमी नहीं, बल्कि अक्षमता जान लेती है। लखनऊ के पीड़ितों के परिजनों का आरोप है कि यदि दीवार पहले तोड़ी जाती, तो कई जानें बच सकती थीं।

कल्पना कीजिए उस क्षण की।
एक तरफ परिजन फोन पर मौत से जूझ रहे अपने बच्चों से बात कर रहे थे। दूसरी तरफ प्रशासन निर्णय लेने में व्यस्त था। और बीच में समय खत्म हो रहा था।

युवाओं का देश या युवाओं का कब्रिस्तान?
•     हम दुनिया को बताते हैं कि भारत सबसे युवा देशों में से एक है।
•     हम “डेमोग्राफिक डिविडेंड” की बात करते हैं।
•     हम स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया, एआई और पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के सपने दिखाते हैं।
•     लेकिन क्या हम यह सुनिश्चित कर पाए हैं कि हमारे युवा सुबह घर से निकलें और शाम को सुरक्षित लौट आएं?
•     अगर एक ग्राफिक्स ट्रेनिंग सेंटर, एक कोचिंग क्लास, एक गेमिंग जोन या एक अस्पताल तक सुरक्षित नहीं है, तो फिर विकास के इन दावों का अर्थ क्या है?
किसी भी राष्ट्र की असली प्रगति उसके जीडीपी से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि वह अपने नागरिकों की जान की कितनी रक्षा कर पाता है।

जांच नहीं, जवाबदेही चाहिए
समस्या यह नहीं है कि हादसे क्यों हो रहे हैं। समस्या यह है कि हादसों के बाद भी कुछ नहीं बदलता। हर त्रासदी के बाद एक जांच समिति बनती है। रिपोर्ट आती है। फाइल बंद हो जाती है। फिर अगला हादसा हो जाता है। देश को अब जांच समितियों की नहीं, जवाबदेही की जरूरत है।
ऐसी जवाबदेही जिसमें:
•     फर्जी एनओसी देने वाले अधिकारी जेल जाएं।
•     अवैध निर्माण करने वाले मालिकों की संपत्ति जब्त हो।
•     सुरक्षा नियमों की अनदेखी को गैर-इरादतन हत्या नहीं, गंभीर आपराधिक अपराध माना जाए।
•     हर सार्वजनिक भवन का वार्षिक सुरक्षा ऑडिट सार्वजनिक किया जाए।
जब तक लापरवाही की कीमत मौत नहीं, बल्कि जेल और आर्थिक विनाश नहीं बनेगी, तब तक कुछ नहीं बदलेगा।
मुआवजा न्याय नहीं होता
हर हादसे के बाद सरकारें मुआवजे की घोषणा करती हैं। लेकिन क्या किसी पिता के लिए उसके बेटे की कीमत पांच लाख, दस लाख या पच्चीस लाख रुपये हो सकती है?
क्या किसी मां को यह सांत्वना मिल सकती है कि उसका बच्चा तो चला गया, लेकिन सरकार ने सहायता राशि दे दी?
मुआवजा राहत हो सकता है। न्याय नहीं।
•      न्याय तब होगा जब जिम्मेदार लोग व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह होंगे।
•      न्याय तब होगा जब किसी अधिकारी को यह डर होगा कि उसकी एक लापरवाही उसे जेल पहुंचा सकती है।
•      न्याय तब होगा जब सुरक्षा नियमों की अनदेखी आर्थिक अपराध नहीं, सामाजिक अपराध मानी जाएगी।
युवा भारत की सबसे बड़ी पूंजी हैं, फिर भी सबसे असुरक्षित क्यों?

देश का हर राजनीतिक दल युवाओं की बात करता है। हर बजट में युवाओं का जिक्र होता है। हर चुनाव में युवाओं के सपने बेचे जाते हैं।
लेकिन जब कोई युवा नौकरी सीखने, पढ़ने, ट्रेनिंग लेने या काम करने जाता है, तो क्या हम उसकी सुरक्षा की गारंटी दे सकते हैं?
नहीं।
यही सबसे बड़ा विरोधाभास है। हम दुनिया को बताते हैं कि भारत का भविष्य उसके युवा हैं। लेकिन व्यवहार में हम उन्हें ऐसी इमारतों, संस्थानों और व्यवस्थाओं के हवाले कर देते हैं जो कभी भी उनकी कब्र बन सकती हैं।
हमें जांच आयोग नहीं, राष्ट्रीय शर्म की जरूरत है
भारत में हर त्रासदी के बाद एक परिचित पटकथा चलती है—
जांच समिति।
निलंबन।
मुआवजा।
राजनीतिक बयान।
और फिर विस्मृति।
हम भूल जाते हैं।
सिस्टम बच जाता है।

और अगली त्रासदी का इंतजार शुरू हो जाता है। शायद समस्या यह नहीं कि हादसे हो रहे हैं। समस्या यह है कि हमने हादसों को सामान्य मान लिया है।
हमारे भीतर का आक्रोश कम हो गया है। हम अब मौतों की संख्या गिनते हैं, कारण नहीं। हम शोक मनाते हैं, परिवर्तन की मांग नहीं करते।
आखिरी सवाल
कल्पना कीजिए उस पिता की, जिसने अपने बेटे की आखिरी आवाज सुनी—
“पापा, मुझे बचा लो…”
उस क्षण उस पिता को सरकार याद नहीं आई होगी।
न कानून।
न राजनीति।
न विकास।

उसे सिर्फ यह उम्मीद रही होगी कि कोई व्यवस्था होगी जो उसके बच्चे को बचा लेगी।
लेकिन वह व्यवस्था नहीं आई।
और यही इस पूरे प्रकरण का सबसे भयावह सच है। किसी भी सभ्य राष्ट्र की पहचान उसके स्मारकों, एक्सप्रेसवे, जीडीपी या चुनावों से नहीं होती।
उसकी पहचान इस बात से होती है कि संकट की घड़ी में वह अपने सबसे कमजोर नागरिक को बचा पाता है या नहीं। अगर हम अपने युवाओं को सुरक्षित नहीं रख सकते, तो हमें यह स्वीकार करने का साहस भी रखना चाहिए कि हम विकासशील अर्थव्यवस्था तो बन रहे हैं, लेकिन अभी तक एक जिम्मेदार समाज नहीं बन पाए हैं।
और तब तक, हर अग्निकांड, हर भगदड़, हर ढही हुई इमारत और हर दम घुटती हुई मौत हमसे एक ही सवाल पूछती रहेगी— क्या भारत दुनिया की महाशक्ति बनने से पहले अपने बच्चों को बचाने वाला राष्ट्र बन पाएगा?