TMC में बगावत को लेकर ममता का कड़ा एक्‍शन, 8 नेताओं को पार्टी से निकाला, बागियों ने किसे बनाया अध्‍यक्ष?

Mamata Banerjee takes stern action against rebellion in West Bengal politics

Mamata Banerjee takes tough action against rebels : पश्चिम बंगाल की राजनीति में बगावत के बाद ममता बनर्जी बड़े संकट में फंस गई हैं। तृणमूल कांग्रेस का संकट अब खुली जंग में बदल चुका है। टीएमसी 3 गुटों में बंट गई है। एक धड़ा बागी विधायकों का तो दूसरा बागी लोकसभा सांसदों का और तीसरा गुट ममता बनर्जी के साथ है। अब टीएमसी पर नियंत्रण की लड़ाई तेज हो गई है। इसी बीच पूर्व मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने आज 8 बागियों के खिलाफ कड़ा एक्‍शन लेते हुए अपने सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल फिरहाद हाकिम समेत 8 वरिष्ठ नेताओं जावेद अहमद खान, अरूप रॉय, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा, सबीना यास्मीन, अरूप बिस्वास और स्नेहाशीष चक्रवर्ती को पार्टी से निष्कासित कर दिया। 

 

3 गुटों में बंट गई टीएमसी 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बगावत के बाद ममता बनर्जी बड़े संकट में फंस गई हैं। तृणमूल कांग्रेस का संकट अब खुली जंग में बदल चुका है। टीएमसी 3 गुटों में बंट गई है। एक धड़ा बागी विधायकों का तो दूसरा बागी लोकसभा सांसदों का और तीसरा गुट ममता बनर्जी के साथ है। अब टीएमसी पर नियंत्रण की लड़ाई तेज हो गई है।

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इसी बीच पूर्व मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने आज 8 बागियों के खिलाफ कड़ा एक्‍शन लेते हुए अपने सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल फिरहाद हाकिम समेत 8 वरिष्ठ नेताओं जावेद अहमद खान, अरूप रॉय, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा, सबीना यास्मीन, अरूप बिस्वास और स्नेहाशीष चक्रवर्ती को पार्टी से निष्कासित कर दिया।

 

ममता बनर्जी के अधिकार को चुनौती

ममता गुट ने पहले इन नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में उनसे पार्टी विरोधी गतिविधियों पर जवाब मांगा गया था। सोमवार को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने खुद को 'असली तृणमूल कांग्रेस' बताते हुए ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने का दावा किया था। इसी बैठक में अरूप रॉय को नया पार्टी अध्‍यक्ष घोषित किया गया। इस फैसले को सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के अधिकार को चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

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ममता बनर्जी ने इन दावों को किया खारिज

हालांकि ममता खेमे ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने कहा कि तृणमूल और ममता बनर्जी एक-दूसरे के पर्याय हैं। पार्टी के संविधान के अनुसार बागी गुट को समिति बनाने या नेतृत्व बदलने का कोई अधिकार नहीं है। इससे साफ है कि पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। ऐसे में उनका पार्टी से निष्कासन यह संकेत देता है कि टीएमसी के भीतर दरार अब बेहद गहरी हो चुकी है।

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बगावत को लेकर क्‍या बोले अरूप रॉय?

अरूप रॉय ने कहा कि पूरे बंगाल में जो हालात बने हुए हैं, उनसे निपटने के लिए हमें फिर से कार्यकर्ताओं के पास जाना होगा और उनके साथ खड़ा होना होगा। हमें सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट करना होगा और मिलकर काम करना होगा। कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी की उस चुनावी याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से सुवेंदु अधिकारी की जीत को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने निर्वाचन क्षेत्र से CCTV फुटेज, EVM और VVPAT मशीनों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।

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बागियों को लेकर तेलंगाना भाजपा के प्रवक्ता ने दिया यह बयान

टीएमसी में हो रही बगावत को लेकर तेलंगाना भाजपा के प्रवक्ता एनवी सुभाष का कहना है कि यह टीएमसी के अंदर की बगावत है। पश्चिम बंगाल के लोग विकास चाहते थे। भाजपा उन टीएमसी नेताओं की निंदा करती है जो ममता बनर्जी के पक्ष में हैं और दावा करते हैं कि इस बगावत के लिए भाजपा जिम्मेदार है।
Edited By : Chetan Gour 

अखिलेश यादव ने किया CM मोहन यादव का बचाव, कहा- भाजपा के निशाने पर तीन मुख्‍यमंत्री

Akhilesh Yadav statement on Mohan Yadav: यूपी प्रदेश और मध्य प्रदेश की सियासत में उस वक्त एक हैरान करने वाला मोड़ आ गया, जब समाजवादी पार्टी के मुखिया और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुलकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बचाव में उतर आए। उन्होंने दावा किया कि मोहन यादव के खिलाफ उनकी खुद की पार्टी यानी भाजपा के भीतर एक बड़ी साजिश रची जा रही है। इतना ही नहीं, सपा नेता ने कहा कि भाजपा तीन मुख्यमंत्रियों को उनकी कुर्सी से हटाना चाहती है। हालांकि अखिलेश के इस बयान के सियासी मायने भी खोजे जा रहे हैं। 

 

यूपी लखनऊ के सरोजनीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव ने न सिर्फ मोहन यादव का पक्ष लिया, बल्कि देश की राजनीति में एक नया शिगूफा छोड़ते हुए कहा कि भाजपा इस वक्त अपने तीन मुख्यमंत्रियों को बदलने का बहाना ढूंढ रही है। दरअसल, मुख्यमंत्री मोहन यादव की संपत्ति को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और जयराम के आरोपों पर बोलते हुए अखिलेश ने कहा कि मोहन यादव तो बहाना हैं, असली निशाना तो योगी आदित्यनाथ हैं। ALSO READ: इंडिया गठबंधन को अखिलेश यादव की नसीहत, कांग्रेस को सुनाई खरी-खरी

मोहन यादव को बदनाम करने की साजिश

उन्होंने कहा कि मोहन यादव को बदनाम करने के लिए भाजपा ने खुद ही यह साजिश रची है। अगर मोहन यादव पर (जमीन के) ये आरोप हैं, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) ने तो 300 से 600 एकड़ जमीन ली है, यह कोई नई बात नहीं है। मोहन यादव पहले रियल एस्टेट का कारोबार करते थे, क्या भाजपा को यह बात पता नहीं है? उन्होंने कहा कि भाजपा मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्‍यमंत्रियों को हटाना चाहती है। इसलिए यादव पर इस तरह का आरोप जान-बूझकर लगवाए जा रहे हैं। ALSO READ: अखिलेश यादव का नया 'अवतार', सफेद टी-शर्ट और पेंट में नजर आए, फैंस भी हुए दीवाने! (वीडियो)

2027 चुनाव को लेकर भी दागे सियासी तीर

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का जिक्र करते हुए अखिलेश ने कहा कि यूपी की जनता भाजपा की इस आंतरिक राजनीति को अच्छे से समझती है। पूरे चुनावी मूड में नजर आ रहे अखिलेश ने कहा कि सरोजनीनगर के लोगों ने बहुत दिनों से साइकिल नहीं चलाई है। इस बार मुझे पता है कि लोग हैंडल छोड़ करके साइकिल चलाने वाले हैं। इस बार का राजनीतिक चक्र इतनी तेजी से घूमेगा कि मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) अपने आप ही हट जाएंगे।

कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना

दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव भी यादव समाज से आते हैं। उनके बचाव में आकर अखिलेश यादव देश भर के यादव वोट बैंक को यह संदेश देना चाहते हैं कि भाजपा अपने ही पिछड़े वर्ग के नेताओं को किनारे लगाने की साजिश रचती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली शीर्ष नेतृत्व के बीच कथित मतभेदों की अफवाहों को हवा देकर अखिलेश यादव यूपी भाजपा में मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना चाहते हैं।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

इंदौर में ‘ऑपरेशन कोचिंग’, 10 कोचिंग सेंटर सील, भवन भी शामिल, लखनऊ आग कांड के बाद जागा प्रशासन

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड के बाद अब इंदौर में कोचिंग सेंटर्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। मंगलवार को शहर की करीब 10 कोचिंग सेंटर और भवन सील किए गए। बता दें कि लखनऊ हादसे में 15 लोगों की मौत हुई थी। इनमें मध्य प्रदेश के अनूपपुर निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर जयनील चक्रवर्ती (26) भी शामिल थे।

इंदौर प्रशासन, नगर निगम और फायर डिपार्टमेंट की टीम ने कई कोचिंग सेंटर्स पर छापेमारी की। जांच में गीता भवन स्थित केटेलाइजर कोचिंग सेंटर में गंभीर सुरक्षा खामियां मिलीं। बिल्डिंग का इमरजेंसी एग्जिट बंद था।

इसके साथ ही केटेलाइजर कोचिंग संस्थान, नुकलियम कोचिंग संस्थान, रामानुजन कोचिंग संस्थान, आयाम कोचिंग संस्थान, मक्खन वाला होटल और इकरथ कोचिंग संस्थान को सील कर दिया गया है। इमरजेंसी एग्जिट बंद होने से बड़ी संख्या में छात्रों के फंसने की आशंका थी।

संयुक्त टीम ने कोचिंग सेंटर्स के साथ शहर के प्रमुख व्यावसायिक परिसरों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान वेदा बिजनेस पार्क, अपोलो एवेन्यू, अपोलो आर्केड और भंवरकुआं क्षेत्र के कई व्यावसायिक भवनों की फायर सेफ्टी व्यवस्था जांची गई।

जांच में पाया गया कि कई भवनों में फायर सिस्टम खराब थे। रूल्स मुताबिक उपलब्ध नहीं थे। कुछ जगहों पर फायर सेफ्टी सिस्टम का नियमित रखरखाव भी नहीं किया जा रहा था। प्रशासन ने भवन संचालकों को नोटिस जारी किए हैं।

निरीक्षण के दौरान कई बहुमंजिला इमारतों में इमरजेंसी एग्जिट बंद पाए गए। आग या अन्य आपदा की स्थिति में ऐसे रास्तों का खुला और सुरक्षित होना अनिवार्य है। इमरजेंसी गेट बंद होने से लोगों की सुरक्षित निकासी प्रभावित हो सकती है, जिससे बड़ा खतरा है।

एसडीएम घनश्याम धनगर के नेतृत्व में भंवरकुआं और गीता भवन क्षेत्र में ऑपरेशन कोचिंग सेंटर चलाया गया। धनगर के अनुसार, अब तक 10 भवन अस्थायी रूप से सील किए जा चुके हैं। जांच जारी रहेगी।

एसडीएम घनश्याम धनगर ने बताया कि जिन भवनों में कोचिंग संस्थानों के साथ अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं और वहां अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, उन पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कुछ रेस्टोरेंट, म्यूजियम और अन्य कार्यालय भी सील किए गए हैं।

प्रशासन ने बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से शहर में ‘ऑपरेशन कोचिंग’ अभियान चलाया जा रहा है।
Edited By: Naveen R Rangiyal

चारधाम एवं हेमकुंड साहिब यात्रा में श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता, अफवाहों से बचें : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

Chief Minister Pushkar Singh Dhami issued directives regarding Char Dham and Hemkund Sahib Yatra

– प्रदेशभर में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का देवभूमि उत्तराखंड में स्वागत, यात्रा का आनंद लेने की अपील

– भ्रामक सूचना फैलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का आह्वान

– कर्णप्रयाग और नगरासू प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई जारी, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

Chief Minister Pushkar Singh Dhami : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम एवं हेमकुंड साहिब यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का देवभूमि उत्तराखंड में हार्दिक स्वागत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आस्था, संस्कृति और प्रकृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से अपील की कि वे देवभूमि उत्तराखंड के शांत वातावरण में अपनी यात्रा का पूर्ण आनंद लें तथा किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्णप्रयाग और नगरासू में सामने आई घटनाओं के संबंध में सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार, प्रशासन एवं पुलिस आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं। जांच में जो भी दोषी पाया गया है, उसके विरुद्ध कार्रवाई की गई है तथा सभी तथ्यों के आधार पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चारधाम यात्रा के साथ-साथ हेमकुंड साहिब यात्रा भी सुचारु रूप से संचालित हो रही है। चारधाम यात्रा में अब तक 40 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं हेमकुंड साहिब यात्रा के शुरुआती दिनों में ही श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 25 हजार अधिक दर्ज की गई है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में सिख गुरुओं द्वारा स्थापित तीन प्रमुख पवित्र स्थल (हेमकुंड साहिब, रीठा साहिब और नानकमत्ता साहिब) स्थित हैं, जहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि सभी का सम्मान करना देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना के अनुरूप यहां आने वाले सभी लोगों का स्वागत एवं सत्कार किया जाता है।

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मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों से अपील की कि वे समाज और समुदायों को बांटने का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों ने मिलजुलकर देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रामक और भड़काऊ खबरें फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सभी धार्मिक स्थल आस्था, श्रद्धा और प्रेरणा के केंद्र हैं, जहां से समाज को सकारात्मक मार्गदर्शन प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट रुख है कि देवभूमि उत्तराखंड में ऐसा कोई कृत्य स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचे या किसी धर्म एवं आस्था को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि संवाद, सद्भाव और सौहार्दपूर्ण वातावरण के माध्यम से ही सभी समस्याओं का समाधान संभव है।

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इस अवसर पर बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेन्द्रजीत सिंह बिन्द्रा, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, अपर मुख्य सचिव आरके सुधांशु, सचिव गृह शैलेश बगौली, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव विनय शंकर पांडेय, डीजी अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार, आईजी श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव बंशीधर तिवारी तथा अपर सचिव श्रीमती तृप्ति भट्ट उपस्थित थे।
Edited By : Chetan Gour

बेजुबानों पर काल बनकर टूटी लखनऊ हादसे की आग, इंसानों ने बचाईं बिल्‍लियां, कई डॉग्‍स का नहीं चल रहा पता

Lucknow tragedy

लखनऊ की एक इमारत में आग लगी थी। चारों तरफ़ अफ़रा-तफ़री मची थी। लेकिन धुएं के बीच, लोगों का एक समूह बस एक ही सवाल पूछ रहा था… ‘अंदर फंसे जानवरों का क्या होगा?’ लखनऊ के अलीगंज में लगी भीषण आग में 15 लोगों की जान चली गई, लेकिन इसी त्रासदी के बीच एक और बचाव अभियान भी चल रहा था।

स्थानीय लोग, जानवरों की भलाई के लिए काम करने वाले वॉलंटियर, पशु चिकित्सक, फ़ायरफ़ाइटर और पुलिस अधिकारी एक मकसद के साथ एकजुट हो गए। वो मकसद था एक पेट फ़ैसिलिटी (पालतू जानवरों की जगह) में फंसे बेज़ुबान जानवरों की जान बचाना।

जब फ़ायरफ़ाइटर आग बुझाने में जुटे थे, तो वॉलंटियर बैरिकेड के पीछे बेचैनी से इंतज़ार कर रहे थे, ताकि जैसे ही कोई जानवर बाहर आए, वे मदद कर सकें।

कुछ लोगों ने ग्राउंड फ़्लोर से कुत्तों और पिल्लों को सुरक्षित बाहर निकाला। इलाज के लिए तुरंत पशु चिकित्सा टीमों को तैनात किया गया। जानवरों को बचाने वालों ने उनके ट्रांसपोर्ट और रहने की जगह का इंतज़ाम किया। कुछ घंटों बाद, बचाव दल को बेसमेंट में कई बिल्लियां ज़िंदा मिलीं और उन्हें सावधानी से मेडिकल केयर के लिए बाहर निकाला गया। सबकी मिली-जुली कोशिशों से जलती हुई इमारत से 30 से ज़्यादा जानवरों की जान बचाई जा सकी।

एक ऐसी त्रासदी में जिसने इतना कुछ छीन लिया, अलग-अलग तरह के लोगों ने उन बेज़ुबान जीवों के लिए एक साथ खड़े होने का फ़ैसला किया जो खुद मदद नहीं मांग सकते थे। कभी-कभी, इंसानियत को इस बात से नहीं मापा जाता कि हम सबसे पहले किसे बचाते हैं, बल्कि इस बात से मापा जाता है कि हम किसे पीछे छोड़ने से इनकार करते हैं।

अलीगंज इलाके में सोमवार को उस समय दिल दहला देने वाला मंजर देखने को मिला, जब एक पेट्स शॉप और क्लिनिक में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर से उठती आग की लपटों और काले धुएं ने वहां भर्ती कई बेजुबानों की जिंदगी को संकट में डाल दिया।

यह सिर्फ एक इमारत में लगी आग नहीं थी, बल्कि उन दर्जनों पेटस पैरंट्स की सांसें अटक जाने का मंजर भी था, जिन्होंने अपने बीमार पालतू जानवरों को इलाज के लिए यहां भर्ती करवाया हुआ था। हादसे की खबर मिलते ही दमकल विभाग, SDRF और स्थानीय पेट वॉलेंटियर्स मुस्तैदी से रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गए।

10 बिल्लियां सुरक्षित, डॉग्स का पता नहीं : टीम ने सूझबूझ से करीब 10 बिल्लियों को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन अपने डॉग्स की सही सलामत वापसी की आस में बाहर खड़े मालिकों का रो-रोकर बुरा हाल था। सोशल मीडिया पर खबर देख पहुंचे ओनर्स जैसे ही आग की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, पेट्स ओनर्स का कलेजा मुंह को आ गया और लोग क्लिनिक की तरफ दौड़ पड़े। शिल्पा ने बताया कि दो दिन पहले ही मैंने अपने डॉग को एडमिट करवाया था। दोपहर करीब 3 बजे सोशल मीडिया से मुझे आग लगने की जानकारी मिली। रेस्क्यू टीम सेकंड फ्लोर से जानवरों को निकाल तो रही थी, लेकिन मेरे डॉग के बारे में कोई कुछ नहीं बता पा रहा है। पता नहीं वो जिंदा है भी या नहीं। शिल्पा की तरह ही कई अन्य लोग भी हाथों में अपने पालतू जानवरों की तस्वीरें लिए रेस्क्यू टीम के सामने मिन्नतें करते दिखे।

आसरा हेल्पिंग हैंड एनजीओ की वॉलंटियर चारू ने बताया कि इस क्लिनिक में पालतू जानवरों के अलावा स्ट्रे डॉग्स और कैट्स का भी मुफ्त या बहुत ही किफायती दरों पर इलाज किया जाता था, जिसके कारण यहां हमेशा काफी संख्या में जानवर भर्ती रहते थे। फिलहाल, रेस्क्यू की गई बिल्लियों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर उनका इलाज शुरू कर दिया गया है। वहीं, दमकल और SDRF की टीमें मलबे और धुएं के बीच अन्य बेजुबानों की तलाश में जुटी रहीं।
Edited By: Naveen R Rangiyal

विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार सख्त, अवैध कोचिंग संस्थानों के खिलाफ यूपी में जारी रहेगा विशेष अभियान

government coaching safety audit

government coaching safety audit: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक वातावरण देने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेशभर में संचालित कोचिंग संस्थानों के विनियमन को प्रभावी बनाने तथा अवैध रूप से चल रहे कोचिंग सेंटरों के विरुद्ध विशेष अभियान तेजी के साथ चलाया जा रहा है।  

 

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि सभी जिलाधिकारियों को निर्देश है कि वे अपने जनपदों में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वेक्षण कर सूची तैयार करें। जो संस्थान उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 के अंतर्गत पंजीकृत नहीं हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। पंजीकृत संस्थानों का भी सुरक्षा मानकों के अनुरूप निरीक्षण कराया जा रहा है। इसमें भवन व्यवस्था, अग्निशमन, विद्युत सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जांच शामिल है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  

 

उच्च शिक्षा मंत्री उपाध्याय ने कहा कि योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। विद्यार्थियों और अभिभावकों के हित सर्वोपरि हैं। सभी संबंधित विभागों के समन्वय से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रदेश में संचालित प्रत्येक कोचिंग संस्थान निर्धारित मानकों का पालन करे।  

 

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सुरक्षित, व्यवस्थित और विश्वसनीय शैक्षिक वातावरण तैयार किया जा रहा है। शासन की प्राथमिकता है कि प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित शिक्षण वातावरण मिले और कोचिंग संस्थानों में निर्धारित मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित हो।  

 

इस संबंध में विशेष सचिव उच्च शिक्षा निधि श्रीवास्तव द्वारा पत्र भी जारी किया गया। अब जिलाधिकारियों द्वारा अपने जनपदों में अभियान चलाकर बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों की पहचान और अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के साथ ही पंजीकृत संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण भी कराया जा रहा है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

मध्यप्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति घोषित, 106 सदस्यों के नामों का एलान, 15 जुलाई को ओरछा में बैठक

भोपाल। आखिरकार लंबे इंतजार के बाद मध्यप्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में गठित नई टीम में वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और नए चेहरों की भागीदारी का संतुलन साधने का प्रयास किया गया है। कार्यसमिति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शीर्ष स्थान दिया गया है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को दूसरे क्रम पर रखा गया है। 

 

पार्टी के संविधान के अनुसार 106 सदस्यों की कार्यसमिति का गठन किया गया है, जिसमें  33 प्रतिशत महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया गया।कार्यसमिति में सभी वर्गों, समाजों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन के लिए विशेष आमंत्रित सदस्यों की अलग सूची भी बनाई गई है। कार्यसमिति में अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। विशेष आमंत्रित सदस्यों में संभाग प्रभारी, जिला प्रभारी, मोर्चा अध्यक्ष और प्रकोष्ठों के प्रदेश संयोजकों को भी शामिल किया गया है। 

 

वहीं नई कार्यसमिति की पहली बैठक 15 जुलाई के आसपास ओरछा में होगी, कार्यसमिति के सदस्यों के जरिए क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने की कोशिश की गई है। नई कार्यसमिति को आगामी नगरीय निकाय, पंचायत और संगठनात्मक गतिविधियों के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों, सामाजिक वर्गों और संगठनात्मक इकाइयों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कार्यसमिति की घोषणा केवल संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि भाजपा के आगामी चुनावी रोडमैप का भी संकेत है। प्रदेश में संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि नई टीम बूथ स्तर तक संगठन को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। 

डिलीवरी बॉय और ‘MBA ड्रॉपआउट’ से WhatsApp की कमान संभालने तक: CRED के Kunal Shah की ये कहानी आपको रोने और फिर सैल्यूट करने पर मजबूर कर देगी

Kunal Shah

“दर्शनशास्त्र (Philosophy) की पढ़ाई इसलिए चुनी, क्योंकि उसकी क्लास सुबह 8 से 10 बजे खत्म हो जाती थी… ताकि बाकी का पूरा दिन मजदूरी और डेटा एंट्री के काम में लगाया जा सके।”

यह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट की लाइन नहीं, बल्कि भारत के सबसे प्रभावशाली फिनटेक (Fintech) लीडर्स में से एक, कुणाल शाह के जीवन का वो कड़वा सच है जिससे बहुत कम लोग वाकिफ हैं। हाल ही में मेटा (Meta) द्वारा CRED में 900 मिलियन डॉलर (लगभग ₹7,500 करोड़) के भारी-भरकम निवेश और कुणाल शाह को WhatsApp के वैश्विक विकास (Global Growth) की जिम्मेदारी सौंपने की खबरों के बीच, दुनिया आज उनकी सफलता को देख रही है। लेकिन इस अरबों डॉलर के साम्राज्य की नींव कामयाबी की चमक से नहीं, बल्कि मजबूरी के पसीने से रखी गई थी।

15 साल की उम्र: जब खिलौनों की जगह कंधों पर आया 'कर्ज का बोझ'

कहानी की शुरुआत होती है मुंबई के एक आम गुजराती परिवार से। जब कुणाल महज 15 साल के थे, तब उनके पिता का फार्मास्युटिकल बिजनेस पूरी तरह ठप हो गया। परिवार रातों-रात दिवालियापन (Bankruptcy) की कगार पर आ खड़ा हुआ।

जिस उम्र में बच्चे बोर्ड परीक्षा की तैयारी करते हैं या करियर के सपने बुनते हैं, उस उम्र में कुणाल मुंबई की लोकल ट्रेनों और तंग गलियों में पैकेट डिलीवर कर रहे थे। परिवार को जिंदा रखने के लिए उन्होंने हर वो काम किया जो सामने आया—चाहे वो डेटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी हो, साइबर कैफे चलाना हो या डिजाइनिंग के छोटे-मोटे फ्रीलांस प्रोजेक्ट्स।

मानवीय दृष्टिकोण (Human Angle): कुणाल शाह अक्सर इंटरव्यूज में बताते हैं कि गरीबी आपको दो चीजें देती है—या तो आप विक्टिम कार्ड (शिकायत करना) खेलने लगते हैं, या फिर आपमें 'सर्वाइवल इंस्टिंक्ट' (हर हाल में जीतने की चाह) जाग जाती है। कुणाल ने दूसरा रास्ता चुना।

फिलॉसफी की डिग्री और 'MBA ड्रॉपआउट' का टैग
मुंबई के विल्सन कॉलेज से बैचलर ऑफ फिलॉसफी (BA) करने के पीछे कुणाल का कोई शौक नहीं था। उन्होंने यह विषय सिर्फ इसलिए चुना क्योंकि इसकी क्लासेस सुबह 8 से 10 बजे के स्लॉट में होती थीं। सुबह 10 बजे कॉलेज का गेट छोड़ते ही उनका असली दिन शुरू होता था, जहाँ वह रात तक पैसे कमाने के लिए अलग-अलग काम करते थे।

इसके बाद उन्होंने नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) से MBA में दाखिला तो लिया, लेकिन कुछ ही समय में उन्हें समझ आ गया कि किताबों में लिखी थ्योरी असल जिंदगी के बिजनेस से बहुत अलग है। उन्होंने कोर्स बीच में ही छोड़ दिया। वह 'डिग्री' के पीछे भागने वाले छात्र नहीं, बल्कि 'सीखने' और 'बनाने' (Building) वाले इंसान बन चुके थे।

FreeCharge से CRED तक: असफलताओं से सीखा 'क्रेडिट' का गणित
कुणाल की पहली बड़ी सफलता 2010 में आई, जब उन्होंने संदीप टंडन के साथ मिलकर FreeCharge की शुरुआत की। यह वह दौर था जब ऑनलाइन रिचार्ज का चलन भारत में नया-नया था। 2015 में उन्होंने इसे Snapdeal को 400 मिलियन डॉलर में बेच दिया, जो उस समय का सबसे बड़ा इंटरनेट कूपन सौदा था।

लेकिन कुणाल यहीं नहीं रुके। भारतीय समाज में 'भरोसे' और 'वित्तीय अनुशासन' की कमी को देखते हुए उन्होंने 2018 में CRED की स्थापना की। एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो समय पर क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने वाले 'प्रीमियम' ग्राहकों को रिवॉर्ड देता है। आज CRED भारत के सबसे यूनीक और प्रीमियम स्टार्टअप्स में से एक है।

मेटा का भरोसा और WhatsApp का नया दौर
आज कहानी एक पूरा चक्र (Full Circle) काट चुकी है। मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा (Meta) ने न सिर्फ CRED में 900 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, बल्कि कुणाल शाह की रणनीतिक सोच को देखते हुए उन्हें WhatsApp के भविष्य को आकार देने की बड़ी जिम्मेदारी दी है।

जिस लड़के ने कभी दूसरों के घर पैकेट डिलीवर किए थे, वह आज दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग और पेमेंट इकोसिस्टम (WhatsApp Pay) की ग्लोबल ग्रोथ का नेतृत्व करने जा रहा है।

क्या सीख सकते हैं हम कुणाल शाह से?
कठिनाई ही सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी है:
कुणाल शाह का मानना है कि जो लोग सीधे एसी कमरों से निकलकर बिजनेस स्कूल जाते हैं, वे जमीन की सच्चाई नहीं समझ पाते। उनके डिलीवरी के काम ने उन्हें इंसानी व्यवहार (Consumer Behavior) को गहराई से समझना सिखाया।

सिस्टम को क्वेश्चन करें: दर्शनशास्त्र (Philosophy) की पढ़ाई ने उन्हें हर चीज के पीछे 'क्यों' (Why) पूछना सिखाया, जिसने आगे चलकर उन्हें बड़े बिजनेस मॉडल बनाने में मदद की।

ड्रॉपआउट होना बहाना नहीं है: कुणाल शाह कॉलेज ड्रॉपआउट जरूर हैं, लेकिन वह 'लर्निंग ड्रॉपआउट' नहीं हैं। वह आज भी भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में सबसे ज्यादा पढ़ने और सीखने वाले आंत्रप्रेन्योर माने जाते हैं।

कुणाल की कहानी साबित करती है कि आपकी शुरुआत कैसी थी, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर आपमें लगातार 'हसल' (संघर्ष) करने का जज्बा है, तो एक दिन दुनिया आपके बनाए रास्ते पर चलने को मजबूर हो जाती है।

स्कूल होंगे अपग्रेड, किसान कल्याण पर फोकस, जानें सीएम डॉ.मोहन ने कैबिनेट में क्या-क्या लिए फैसले?

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 जून को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई। कैबिनेट ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना और कल्याणी विवाह सहायता योजना को 1 अप्रैल 2026 से 5 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रुपयेकी स्वीकृति दी। मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना प्रदेश में 1 अप्रैल 2006 से प्रभावशील है। योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। 

 

मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना अंतर्गत गरीब जरूरतमंद, निराश्रित और निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या-विधवा-परित्यक्ता के सामूहिक विवाह में आर्थिक सहायता के रूप में राशि 55 हजार रुपये प्रति कन्या के मान से दी जाती है। योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 1 लाख 72 हजार 905 हितग्राहियों को 989 करोड़ 80 लाख 62 हजार रुपये से अधिक सहायता राशि प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह, योजना महिला सशक्तिकरण की एक अहम योजना है, जिसके अंतर्गत गरीब और जरूरतमंद अभिभावकों की कन्याओं का सामूहिक विवाह सम्पन्न होता है। इस योजना से विवाह की वैधानिक आयु सुनिश्चित हो जाती है। यह योजना महिलाओं के सामाजिक उत्थान के लिए महत्वपूर्ण है।

 

कैबिनेट ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुंच एवं गुणवत्ता में वृद्धि के लिए शासकीय माध्यमिक शाला का हाई स्कूल एवं हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी में उन्नयन की योजना पर सैद्धांतिक स्वीकृति दी। स्वीकृति अनुसार वर्ष 2026-27 में 75 माध्यमिक शालाओं का हाई स्कूल तथा 100 हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी स्कूल में उन्नयन किया जाएगा। आगामी 2 वर्षों 2027-28 एवं 2028-29 में भी इसी प्रकार प्रतिवर्ष 75 माध्यमिक एवं 100 हाईस्कूलों के उन्नयन पर सैद्धांतिक सहमति दी गई। साथ ही विद्यालयों के उन्नयन के लिए अनुमानित व्यय राशि 635 करोड़ 24 लाख रुपये के प्रस्ताव पर सहमति दी गई। विकसित मध्यप्रदेश@2047 के तहत वर्ष 2029 तक 100 प्रतिशत सकल नामांकन दर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। मापदण्डों के आधार पर जिला स्तर से मेपिंग अनुसार 315 हाई स्कूल एवं 214 हायर सेकेण्डरी स्कूल खोले जाने की आवश्यकता है। सांदीपनि विद्यालयों के कैचमेंट एरिया में विद्यालयों का उन्नयन नहीं किया जाएगा।

सांदीपनि विद्यालय के कैचमेंट एरिया में आने वाले विद्यालयों के समस्त विद्यार्थियों का प्रवेश सांदीपनि विद्यालय में होने पर विद्यालय को अन्य आवश्यकता वाले स्थानों पर युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। उन्नत विद्यालय अपने वर्तमान भवन या अन्य शासकीय भवन में संचालित होंगे। आवश्यकता एवं बजट उपलब्धता के अनुसार अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत किए जाएंगे। वास्तविक रूप से आवश्यक विद्यालयों की संख्या का आंकलन गति शक्ति पोर्टल, जनसंख्या एवं यू-डाइस के आंकड़ों के आधार पर की जायेगी। राज्य में हाई स्कूल का सकल नामांकन दर (जीईआर) 75 प्रतिशत तथा हायर सेकेण्डरी स्तर पर 55 प्रतिशत है। कक्षा 8 से 9 में कक्षांतरण दर 77 प्रतिशत और कक्षा 10 से 11 में 68 प्रतिशत है। विद्यालयों की दूरी अधिक होने होने के कारण विद्यार्थियों का प्रवेश कम होता है या वे नियमित रूप से उपस्थित नहीं रह पाते जिससे ड्रॉप आउट दर बढ़ती है इसलिए विद्यार्थियों की पहुँच में विद्यालय उपलब्ध कराकर उच्च नामांकन एवं निरंतरता सुनिश्चित करना इस निर्णय का मूल लक्ष्य है।

 

किसानों के हित में अहम फैसला-कैबिनेट ने वर्ष 2026-27 के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण दिए जाने की योजना अंतर्गत किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार खरीफ एवं रबी सीजन के लिए पृथक-पृथक देय तिथि (ड्यू डेट) नहीं रखते हुए उसके स्थान पर वार्षिक एकल ऋण सीमा रखी जाएगी। इसमें नगद एवं वस्तु ऋण की उप-सीमा निर्धारित रहे। योजनान्तर्गत देय तिथि (डयू डेट) कृषकों को स्वीकृत वार्षिक एकल लिमिट से प्रथम ऋण आहरण से 12 माह निर्धारित की जाएगी और अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले किसानों को 1.25 प्रतिशत (सामान्य) ब्याज अनुदान तथा निर्धारित ड्यू डेट तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों को 4 प्रतिशत प्रोत्साहन स्वरूप (अतिरिक्त ब्याज अनुदान) राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों से संबद्ध बहुउददेशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण दिए जाने की योजना वर्ष 2012-13 से निरन्तर लागू है। योजनान्तर्गत खरीफ एवं रबी सीजन की निर्धारित तिथि (ड्यू डेट) तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों से 3 लाख रुपये तक के अल्पावधि फसल ऋण पर कोई ब्याज नहीं लिया जाता है। योजना में राज्य शासन द्वारा प्रत्येक वर्ष बेस रेट के साथ-साथ डयू डेट आदि का निर्धारण किया जाता है और निर्धारित बेसरेट में से भारत सरकार से प्राप्त होने वाली ब्याज सहायता को कम करते हुए शेष राशि राज्य शासन द्वारा ब्याज अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाती है जिससे कृषकों को प्रदेश में शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि ऋण उपलब्ध होता है।

 

शुजालपुर में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किए जाने की स्वीकृति

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुपालन में सत्र 2026-27 में शुजालपुर (शाजापुर) में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किए जाने की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार शैक्षणिक वर्ग के 9 पद और अशैक्षणिक वर्ग के 8 पद, इस प्रकार कुल 17 पदों के सृजन और व्यय राशि 2 करोड़ 39 लाख 92 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। साथ ही आवश्यक कार्यवाही करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को अधिकृत किया गया है। जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शुजालपुर में विधि पाठ्यक्रम (एल एल बी तीन वर्षीय) एक संकाय के रूप में संचालित है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 2008 के 'लीगल एजुकेशन रूल्स' के अनुसार मान्यता के लिए विधि पाठ्यक्रमों को संकाय के स्थान पर पृथक शासकीय विधि महाविद्यालय में संचालित किया जाना आवश्यक है। इसी आधार पर शुजालपुर में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किया जा रहा है।

 

सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत 3 हजार 580 करोड़ 7 लाख रुपये की स्वीकृति 

कैबिनेट ने खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन की प्रक्रिया अन्तर्गत 500 करोड़ रुपये से अधिक की संबंधित योजना लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत परिवहन, कमीशन व्यय की प्रतिपूर्ति का 16 वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 3 हजार 580 करोड़ 7 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) एवं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत विद्युतीकरण कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा दिए गए केन्द्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंश पूंजी के रूप में उपलब्ध करवाये जाने का निर्णय लिया है।

मध्यप्रदेश में अगले 48 से 72 घंटे में मानसून देगा दस्तक, जानें कैसे रहेगी इस बार बारिश?

भोपाल। मध्यप्रदेश में अगले 48-72 घंटों में मानसून अपनी दस्तक दे सकता है। मध्यप्रदेश में मानसून की एंट्री पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्से से होगी और बालाघाट, सिवनी, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर और शहडोल जैसे जिले सबसे पहले मानसूनी बारिश होगी।
 
25 जून को मानसून की एंट्री-भोपाल मौसम केंद्र के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी एके सिंह कहते हैं कि इस बार मध्यप्रदेश में मानसून काफी लेट है, सामान्य तौर पर प्रदेश में मानसून 15-16 जून तक दस्तक दे देता है। अब उम्मीद है कि मानसून अगले 2 से 3 दिनों में प्रदेश में एंट्री कर लेगा। अभी मानसून ने छत्तीसगढ़ के बडे़ एरिया को कवर कर लिया है, ऐसे में संभावना है कि मानसून अगले 2 से 3 दिनों में प्रदेश में दस्तक दे देगा।
 
अल-नीनो ने मानसून पर लगाया ब्रेक- वहीं मानसून पर अलनीनो को प्रभाव पर को लेकर एके सिंह कहते है कि जब भी अलनीनो ईयर होता है तो मानसून कमजोर होता है। अलनीनों के प्रभाव के चलते इस वर्ष मानसून कमजोर रहेगा। मानसून बारिश इस बार 92 फीसदी के आसपास रहेगी।
 
कितना कमजोर रहेगा मानसून?-मौसम विज्ञानी एके सिंह कहते हैं कि अलनीनो के प्रभाव से मानसून लेट होता है और यहीं कारण है कि एक जून को केरल पहुंचने वाला मानसून इस बार 4 जून  को प्रदेश में एंट्री किया है और मध्यप्रदेश में सामान्य तौर पर 15-16 जून को  पहुंचने वाला मानसून 23 जून तक नहीं पहुंचा है। वहीं अलनीनो के चलते  मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में इस बार मानसून कमजोर रहेगा।
 
मानसून में देरी से किसान परेशान?-वहीं मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मानसून के लेट और कमजोर होने से कई जिलों में बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। मानसून लेट होने का सीधा असर सोयबीन की फसल और खरीब की बुआई पर पड़ रहा है। प्रदेश की राजधानी भोपल को छोड़कर बाकी प्रदेश में अभी जून का कोटा पूरा नहीं हुआ है, जिसके कारण बुआई लेट हो रही है। सामान्य तौर पर 4 इंच की  बारिश के बाद किसान बुआई शुरु करते है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता बढ़ने से खरीफ सीजन की बुवाई में तेजी आएगी। किसान लंबे समय से अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं और मानसून की दस्तक कृषि अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

वहीं मानसून की एंट्री से प्रदेश के ऊपर चार मौसम प्रणालियां सक्रिय हो गई हैं, जिनके प्रभाव से अगले 24 से 48 घंटों में गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। भोपाल, जबलपुर, नर्मदापुरम और आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।  मौसम विभाग ने कई जिलों में तेज हवाओं, आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।