EV Scooter खरीदने से पहले जान लें, कौन-सी बैटरी है सबसे बेहतर? रेंज, चार्जिंग और लाइफ में कितना फर्क और कैसे करें चेक

electric scooter battery guide

भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। लेकिन जब लोग नया EV खरीदने जाते हैं तो अक्सर उनकी नजर सिर्फ रेंज और कीमत पर होती है, जबकि सबसे अहम हिस्सा उसकी बैटरी होती है। बैटरी ही तय करती है कि स्कूटर कितनी दूर चलेगा, कितनी जल्दी चार्ज होगा और लंबे समय में उसका रखरखाव कितना महंगा पड़ेगा।

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अगर आप नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो पहले यह जानना जरूरी है कि बाजार में कौन-कौन सी बैटरियां उपलब्ध हैं और उनके फायदे-नुकसान क्या हैं।

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अगर आप रोजाना शहर में सफर करते हैं और लंबी अवधि के लिए बेहतर रेंज, तेज चार्जिंग और कम रखरखाव चाहते हैं, तो लिथियम-आयन बैटरी वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। वहीं कम बजट वाले खरीदार लेड-एसिड या जेल सेल बैटरी वाले मॉडल चुन सकते हैं, लेकिन उन्हें वजन, रेंज और मेंटेनेंस से जुड़ी सीमाओं को ध्यान में रखना चाहिए। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक का मानना है कि आने वाले वर्षों में सॉलिड-स्टेट बैटरियां EV बाजार में बड़ा बदलाव ला सकती हैं, लेकिन फिलहाल भारतीय बाजार में लिथियम-आयन तकनीक ही सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय विकल्प बनी हुई है।

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बैटरी देखना क्यों है जरूरी 

दो इलेक्ट्रिक स्कूटर देखने में लगभग एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन चलाने पर उनका अनुभव बिल्कुल अलग होता है। एक स्कूटर बेहतरीन परफॉर्मेंस देता है, उसकी बैटरी लंबे समय तक चलती है और वह रोज़ाना इस्तेमाल के लिए भरोसेमंद लगता है, जबकि दूसरे को बार-बार चार्ज करना पड़ता है और वह जल्दी ही कमज़ोर पड़ने लगता है। यह अंतर पहली नज़र में शायद ही नज़र आए, लेकिन लंबे समय में मिलने वाली संतुष्टि पर इसका गहरा असर पड़ता है।

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बैटरी तकनीक चुपचाप तय करती है कि आप कितनी दूरी तय करेंगे, कितनी बार रिचार्ज करेंगे और समय के साथ हर राइड कितनी भरोसेमंद लगेगी। जब खरीदार विकल्पों की तुलना करते हैं, तो कई लोग पूछते हैं कि बिना किसी अतिरिक्त असुविधा के इलेक्ट्रिक स्कूटर के लिए कौन सी बैटरी सबसे अच्छी है । लिथियम-आयन तकनीक इसका सबसे स्पष्ट जवाब देती है, जो रेंज, दक्षता और टिकाऊपन का प्रभावी संतुलन प्रदान करती है।

1. लिथियम-आयन बैटरी 

आज अधिकांश आधुनिक इलेक्ट्रिक स्कूटर लिथियम-आयन बैटरी के साथ आते हैं। यह बैटरी हल्की होती है, तेजी से चार्ज होती है और एक बार चार्ज करने पर ज्यादा रेंज देती है।

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फायदे- 

  • ज्यादा रेंज
  • फास्ट चार्जिंग
  • कम वजन
  • कम रखरखाव
  • बेहतर परफॉर्मेंस

batteries

यही वजह है कि भारत में बिकने वाले ज्यादातर प्रीमियम EV स्कूटर इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।

 

2. लेड-एसिड बैटरी : सस्ती लेकिन भारी

लेड-एसिड बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे पुरानी तकनीकों में से एक है। इसकी कीमत कम होती है, लेकिन यह वजन में भारी होती है और इसकी लाइफ भी अपेक्षाकृत कम होती है।

 

फायदे

  • कम कीमत
  • आसानी से उपलब्ध

कमियां

  • ज्यादा वजन
  • कम रेंज
  • अधिक रखरखाव
  • धीमी चार्जिंग
  • 3. निकेल मेटल हाइड्राइड (NiMH) बैटरी

 

यह बैटरी लेड-एसिड की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है। हालांकि इलेक्ट्रिक स्कूटरों में इसका इस्तेमाल सीमित है।

 

फायदे

  • लंबी लाइफ
  • बेहतर सुरक्षा
  • पर्यावरण के लिए बेहतर

 

कमियां 

लिथियम-आयन जितनी दक्ष नहीं

कम लोकप्रिय
 

4. सॉलिड-स्टेट बैटरी: भविष्य की तकनीक

सॉलिड-स्टेट बैटरियों को EV इंडस्ट्री का भविष्य माना जा रहा है। इनमें पारंपरिक तरल इलेक्ट्रोलाइट की जगह ठोस सामग्री का उपयोग किया जाता है।

 

फायदे

  • ज्यादा सुरक्षा
  • लंबी रेंज
  • तेज चार्जिंग
  • बेहतर ऊर्जा क्षमता

कमियां

  • अभी बाजार में सीमित उपलब्धता
  • अपेक्षाकृत महंगी तकनीक
  • 5. जेल सेल बैटरी: कम रखरखाव वाला विकल्प

 

जेल सेल बैटरी लेड-एसिड तकनीक का उन्नत संस्करण है। इसमें इलेक्ट्रोलाइट जेल के रूप में होता है, जिससे रखरखाव की जरूरत कम हो जाती है।

फायदे

  • कम मेंटेनेंस
  • बेहतर स्थिरता

कमियां

  • वजन अधिक
  • रेंज सीमित
  • आखिर किस बैटरी वाला EV खरीदना चाहिए?

 EV स्कूटर/बाइक की बैटरी चेक कैसे करें?

  • वाहन के मोबाइल ऐप में Battery Health या Battery Status देखें।
  • फुल चार्ज पर मिलने वाली रेंज को नोट करें।
  • यदि पहले 100 किमी रेंज मिलती थी और अब 70-80 किमी ही मिल रही है, तो बैटरी डिग्रेड हो सकती है।
  • अधिकृत सर्विस सेंटर में Battery Diagnostic Test करवाएं।

घर में कैसे करें चेक 

  •  चार्ज जल्दी खत्म होना
  • चार्जिंग में असामान्य समय लगना
  • अचानक रेंज कम होना
  • बैटरी ओवरहीट होना
  • डैशबोर्ड पर बैटरी चेतावनी आना

सेकेंड-हैंड EV खरीदते समय क्या चेक करें?

  • Battery SOH 85% से अधिक हो तो अच्छा माना जाता है।
  • बैटरी वारंटी कितनी बची है, यह देखें।
  • DC Fast Charging का अत्यधिक उपयोग हुआ है या नहीं, पूछें।
  • अधिकृत सर्विस सेंटर से बैटरी हेल्थ रिपोर्ट लें।
  • टेस्ट ड्राइव में वास्तविक रेंज जांचें  Edited by : Sudhir Sharma

Electric scooter खरीदने से पहले जान लें कौन-सी बैटरी है सबसे बेहतर? रेंज, चार्जिंग और लाइफ में कितना फर्क और कैसे करें चेक

electric scooter battery guide

भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। लेकिन जब लोग नया EV खरीदने जाते हैं तो अक्सर उनकी नजर सिर्फ रेंज और कीमत पर होती है, जबकि सबसे अहम हिस्सा उसकी बैटरी होती है। बैटरी ही तय करती है कि स्कूटर कितनी दूर चलेगा, कितनी जल्दी चार्ज होगा और लंबे समय में उसका रखरखाव कितना महंगा पड़ेगा।

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अगर आप नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो पहले यह जानना जरूरी है कि बाजार में कौन-कौन सी बैटरियां उपलब्ध हैं और उनके फायदे-नुकसान क्या हैं।

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अगर आप रोजाना शहर में सफर करते हैं और लंबी अवधि के लिए बेहतर रेंज, तेज चार्जिंग और कम रखरखाव चाहते हैं, तो लिथियम-आयन बैटरी वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। वहीं कम बजट वाले खरीदार लेड-एसिड या जेल सेल बैटरी वाले मॉडल चुन सकते हैं, लेकिन उन्हें वजन, रेंज और मेंटेनेंस से जुड़ी सीमाओं को ध्यान में रखना चाहिए। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक का मानना है कि आने वाले वर्षों में सॉलिड-स्टेट बैटरियां EV बाजार में बड़ा बदलाव ला सकती हैं, लेकिन फिलहाल भारतीय बाजार में लिथियम-आयन तकनीक ही सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय विकल्प बनी हुई है।

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बैटरी देखना क्यों है जरूरी 

दो इलेक्ट्रिक स्कूटर देखने में लगभग एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन चलाने पर उनका अनुभव बिल्कुल अलग होता है। एक स्कूटर बेहतरीन परफॉर्मेंस देता है, उसकी बैटरी लंबे समय तक चलती है और वह रोज़ाना इस्तेमाल के लिए भरोसेमंद लगता है, जबकि दूसरे को बार-बार चार्ज करना पड़ता है और वह जल्दी ही कमज़ोर पड़ने लगता है। यह अंतर पहली नज़र में शायद ही नज़र आए, लेकिन लंबे समय में मिलने वाली संतुष्टि पर इसका गहरा असर पड़ता है।

ALSO READ: Boss Scam Alert: WhatsApp पर आए ऐसा मैसेज तो भूलकर भी न खोलें फाइल, खाली हो सकता है बैंक अकाउंट

बैटरी तकनीक चुपचाप तय करती है कि आप कितनी दूरी तय करेंगे, कितनी बार रिचार्ज करेंगे और समय के साथ हर राइड कितनी भरोसेमंद लगेगी। जब खरीदार विकल्पों की तुलना करते हैं, तो कई लोग पूछते हैं कि बिना किसी अतिरिक्त असुविधा के इलेक्ट्रिक स्कूटर के लिए कौन सी बैटरी सबसे अच्छी है । लिथियम-आयन तकनीक इसका सबसे स्पष्ट जवाब देती है, जो रेंज, दक्षता और टिकाऊपन का प्रभावी संतुलन प्रदान करती है।

1. लिथियम-आयन बैटरी 

आज अधिकांश आधुनिक इलेक्ट्रिक स्कूटर लिथियम-आयन बैटरी के साथ आते हैं। यह बैटरी हल्की होती है, तेजी से चार्ज होती है और एक बार चार्ज करने पर ज्यादा रेंज देती है।

ALSO READ: EV स्कूटर कैसे चुने, खरीदने से पहले इन बातों की करें जांच, वरना पड़ेगा पछताना

फायदे- 

  • ज्यादा रेंज
  • फास्ट चार्जिंग
  • कम वजन
  • कम रखरखाव
  • बेहतर परफॉर्मेंस

batteries

यही वजह है कि भारत में बिकने वाले ज्यादातर प्रीमियम EV स्कूटर इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।

 

2. लेड-एसिड बैटरी : सस्ती लेकिन भारी

लेड-एसिड बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे पुरानी तकनीकों में से एक है। इसकी कीमत कम होती है, लेकिन यह वजन में भारी होती है और इसकी लाइफ भी अपेक्षाकृत कम होती है।

 

फायदे

  • कम कीमत
  • आसानी से उपलब्ध

कमियां

  • ज्यादा वजन
  • कम रेंज
  • अधिक रखरखाव
  • धीमी चार्जिंग
  • 3. निकेल मेटल हाइड्राइड (NiMH) बैटरी

 

यह बैटरी लेड-एसिड की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है। हालांकि इलेक्ट्रिक स्कूटरों में इसका इस्तेमाल सीमित है।

 

फायदे

  • लंबी लाइफ
  • बेहतर सुरक्षा
  • पर्यावरण के लिए बेहतर

 

कमियां 

लिथियम-आयन जितनी दक्ष नहीं

कम लोकप्रिय
 

4. सॉलिड-स्टेट बैटरी: भविष्य की तकनीक

सॉलिड-स्टेट बैटरियों को EV इंडस्ट्री का भविष्य माना जा रहा है। इनमें पारंपरिक तरल इलेक्ट्रोलाइट की जगह ठोस सामग्री का उपयोग किया जाता है।

 

फायदे

  • ज्यादा सुरक्षा
  • लंबी रेंज
  • तेज चार्जिंग
  • बेहतर ऊर्जा क्षमता

कमियां

  • अभी बाजार में सीमित उपलब्धता
  • अपेक्षाकृत महंगी तकनीक
  • 5. जेल सेल बैटरी: कम रखरखाव वाला विकल्प

 

जेल सेल बैटरी लेड-एसिड तकनीक का उन्नत संस्करण है। इसमें इलेक्ट्रोलाइट जेल के रूप में होता है, जिससे रखरखाव की जरूरत कम हो जाती है।

फायदे

  • कम मेंटेनेंस
  • बेहतर स्थिरता

कमियां

  • वजन अधिक
  • रेंज सीमित
  • आखिर किस बैटरी वाला EV खरीदना चाहिए?

 EV स्कूटर/बाइक की बैटरी चेक कैसे करें?

  • वाहन के मोबाइल ऐप में Battery Health या Battery Status देखें।
  • फुल चार्ज पर मिलने वाली रेंज को नोट करें।
  • यदि पहले 100 किमी रेंज मिलती थी और अब 70-80 किमी ही मिल रही है, तो बैटरी डिग्रेड हो सकती है।
  • अधिकृत सर्विस सेंटर में Battery Diagnostic Test करवाएं।

घर में कैसे करें चेक 

  •  चार्ज जल्दी खत्म होना
  • चार्जिंग में असामान्य समय लगना
  • अचानक रेंज कम होना
  • बैटरी ओवरहीट होना
  • डैशबोर्ड पर बैटरी चेतावनी आना

सेकेंड-हैंड EV खरीदते समय क्या चेक करें?

  • Battery SOH 85% से अधिक हो तो अच्छा माना जाता है।
  • बैटरी वारंटी कितनी बची है, यह देखें।
  • DC Fast Charging का अत्यधिक उपयोग हुआ है या नहीं, पूछें।
  • अधिकृत सर्विस सेंटर से बैटरी हेल्थ रिपोर्ट लें।
  • टेस्ट ड्राइव में वास्तविक रेंज जांचें  Edited by : Sudhir Sharma

सिया गोयल का वो खौफनाक कबूलनामा और बेकरी-ड्राई फ्रूट्स वाले इश्क की इनसाइड स्टोरी!

Siya Goyal Confession

Siya Goyal Confession: एक रसूखदार बिजनेसमैन का बेगुनाह बेटा और प्यार के नाम पर रचा गया मौत का एक ऐसा चक्रव्यूह जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। केतन अग्रवाल की मौत को शुरुआत में महज एक हादसा समझने की भूल हर किसी ने की थी, लेकिन अब मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी के 'कन्फेशन' (कबूलनामे) ने इस केस में वो राज उगले हैं, जिन्हें सुनकर पुलिस के भी रोंगटे खड़े हो गए। सिया ने पुलिस को बताया कि अगर केतन से शादी हो जाती, तो हमारे रिश्ते खत्म हो जाते।

कैसे शुरू हुई चेतन-सिया की लव स्टोरी

सिया गोयल पुणे में अपनी एक बेकरी चलाती थी, जबकि चेतन चौधरी ड्राई फ्रूट्स (मेवे) का थोक कारोबार करता था। बिजनेस के सिलसिले में दोनों की बातचीत शुरू हो चुकी थी, लेकिन दोस्ती को मोहब्बत का नाम मिला पिछले साल की एक दिवाली पार्टी में। दिवाली पार्टी की मुलाकात के बाद दोनों इस कदर एक-दूसरे के प्यार में अंधे हो चुके थे कि दिन-रात फोन पर बातें होने लगीं। ALSO READ: हत्या के पहले किसने गायब किया केतन का पासपोर्ट, 17 करोड़ में बुक किया था महल, पिता बोले सिया से क्यों मारा बेटे को?

क्यों नहीं भागकर की शादी?

पुलिस की पूछताछ में चेतन चौधरी ने कबूला कि वे दोनों साथ रहना चाहते थे। लेकिन सिया समाज में अपने परिवार की 'इज्जत' खराब नहीं करना चाहती थी। वह भागकर शादी करने के खिलाफ थी। उसे परिवार को बदनाम भी नहीं करना था और प्रेमी चेतन को छोड़ना भी नहीं था— इसी बीमार मानसिकता ने केतन अग्रवाल की मौत का रास्ता तैयार किया।

केतन का 'वो' अनसुना 'डर'

फरवरी 2026 में 26 साल के करोड़पति बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की सगाई सिया गोयल से बहुत धूमधाम से हुई। केतन के चचेरे मामा नरेंद्र मित्तल ने दूर की रिश्तेदारी देखकर यह रिश्ता तय कराया था। केतन इस शादी से बेहद खुश था, सोशल मीडिया पर सगाई और प्री-वेडिंग के कई वीडियो इसकी गवाही देते हैं। ALSO READ: पुणे में इंदौर से भी ज्यादा खौफनाक हत्या, सिया ने ही बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर की थी मंगेतर केतन की हत्या

कहानी का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि केतन को कहीं न कहीं कुछ अजीब होने का अहसास था। वह अक्सर ट्रेकिंग के दौरान सिया के व्यवहार को लेकर थोड़ा चिंतित रहता था। उसने कई बार अपने पिता विशाल अग्रवाल से पूछा था कि पापा, क्या आपने सिया का बैकग्राउंड सही से चेक किया है? लेकिन दूर के रिश्तेदार और मामा का भरोसा होने के कारण परिवार ने इस शक को गंभीरता से नहीं लिया।

इंस्टाग्राम पर 'घड़ियाली आंसू'

18 जून को सिया गोयल का जन्मदिन था। केतन किसी बड़े आलीशान रिजॉर्ट में पार्टी करना चाहता था, लेकिन सिया ने जिद की कि वे लोहागढ़ किले में बर्थडे स्पेशल ट्रेकिंग पर जाएंगे। वहां पहले से ही हूडी पहनकर चेहरा छिपाए चेतन चौधरी उनका पीछा कर रहा था। जैसे ही वे 400 फीट ऊंची सुनसान पहाड़ी पर पहुंचे, सिया और चेतन ने मिलकर केतन को गहरी खाई में धकेल दिया।

कत्ल करने के तुरंत बाद सिया ने रोने-बिलखने का ऐसा नाटक किया कि पुलिस ने इसे पैर फिसलने का हादसा मान लिया। शातिर सिया ने इंस्टाग्राम पर केतन की फोटो के साथ स्टोरी लगाई और लिखा- “तुम मुझे अकेले छोड़कर क्यों चले गए? जबकि मैं तुमसे दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करती थी…” इस एक पोस्ट ने केतन के टूट चुके परिवार को भी कुछ समय के लिए गुमराह कर दिया।

इस तरह हुआ सिया के झूठ के खुलासा

केतन के अंतिम संस्कार के बाद जब सिया उनके घर पहुंची, तो केतन की बहन को उसकी बातों और हाव-भाव पर गहरा शक हुआ। बहन ने जब हादसे की जगह को लेकर कुछ तीखे सवाल किए, तो सिया सकपका गई और उलटे-सीधे जवाब देने लगी। बहन की सूझबूझ से परिवार तुरंत पुलिस के पास पहुंचा। जब पुलिस ने सिया के मोबाइल का डिलीटेड डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले, तो उसमें चेतन चौधरी का नाम और कत्ल की पूरी प्लानिंग का चिट्ठा सामने आ गया। कोर्ट सिया और चेतन को क्या सजा देगा यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल दोनों आशिक सलाखों के पीछे हैं। 

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Share Bazaar में आई बड़ी तेजी, Sensex 791 अंक उछला, Nifty भी 24000 के पार

Indian stock market witnessed big jump on third trading day of week

Share Market Update News : भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन यानी बुधवार को सुस्ती के साथ शुरुआत हुई, लेकिन घंटेभर के कारोबार के बाद ही अचानक बाजी पलट गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स तूफानी तेजी के साथ भागते हुए नजर आने लगे। एक दिन की गिरावट के बाद आज शेयर बाजार ने जबरदस्‍त रिकवरी की। कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्‍स 791 अंक उछल गया, वहीं एनएसई का निफ्टी 24000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्‍तर को पार कर गया।

बीएसई सेंसेक्स 790.54 अंक (+1.04 प्रतिशत) की मजबूत छलांग के साथ 76991.22 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 197.56 अंक (0.83 फीसदी) की बढ़त के साथ 24021.65 पर टिका रहा। इस दौरान निवेशकों को करीब 2 लाख करोड़ रुपए का फायदा मिला। इस बार कच्चे तेल की कम कीमतों और ब्लू-चिप शेयरों (खासकर IT और प्राइवेट बैंकों) में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला।

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सेंसेक्‍स के शेयरों में सबसे ज्‍यादा फायदे में इंडिगो, ट्रेंट, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस और आईसीआईसीआई बैंक रहे। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने मंगलवार को 17.86 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। इससे बाजार के सेंटीमेंट को सहारा मिला। बाजार की इस बुलिश रैली (तेजी) में फाइनेंशियल (वित्तीय) और आईटी सेक्टर के शेयरों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Oil prices) की कीमतें गिरकर 77 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी (Rate-hike) की चिंताओं को शांत कर दिया है, जिससे बाजार को बड़ी राहत मिली है।

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इससे पहले यानी मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला। बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से आईटी शेयरों में आई तेज बिकवाली के कारण हुई। टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक के शेयरों में सबसे ज्‍यादा गिरावट आई।

कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्स 893.39 अंक यानी 1.16 प्रतिशत लुढ़ककर 76200.68 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 278.80 अंक यानी 1.16 प्रतिशत टूटकर 23824.10 के स्तर पर आ गया। सबसे ज़्यादा नुकसान इंफोसिस को हुआ जिसमें 3.39 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
Edited By : Chetan Gour

साहस की मूर्ति को सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया नमन, कहा- अद्वितीय पराक्रम-साहस की मिसाल थीं वीरांगना रानी दुर्गावती

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 24 जून को वीरांगना रानी दुर्गावती के 463वें बलिदान दिवस पर जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम का आयोजन वीरांगना रानी दुर्गावती के समाधि स्थल नर्रई नाला पर आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम की शुरूआत में ग्राम नर्रई नाला स्थित वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती की समाधि स्थल पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने शहीद वीर नारायण की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही गौंड समाज के आराध्य देवता बड़ा देव का पूजन-अर्चन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

 

कार्यक्रम में सीएम डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती, अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और साहस की प्रतिमूर्ति थीं। नारी शक्ति का पराक्रम मां दुर्गावती के व्यक्तित्व में नजर आता है। मुगलों को युद्धों में धूल चटाने वाली ऐसी वीरांगना रानी दुर्गावती का आज 463वां बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती ने गौंडवाना साम्राज्य में 52 गढ़ों पर शासन किया। पति की असमय मृत्यु के बाद 5 साल के बेटे को सिंहासन पर बैठाया और 15 साल तक जनता की सेवा के लिए और क्षेत्र की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। 

 

प्रदेश के लिए सम्मान और आदर की बात-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर लगभग 500 वर्ष पूर्व रानी दुर्गावती का जन्म हुआ, लेकिन आज पूरा देश और प्रदेश उन्हें आदर के साथ स्मरण करता है। हमारा सौभाग्य है कि प्रदेश सरकार के गठन के बाद मंत्रि-परिषद की पहली बैठक जबलपुर में रानी दुर्गावती को समर्पित कर आयोजित की गई थी। इसके बाद दूसरी कैबिनेट बैठक रानी दुर्गावती के गौंडवाना साम्राज्य की राजधानी संग्रामपुर में आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि जबलपुर एयरपोर्ट का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखने के लिए केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। 

 

नए संस्थान का जल्द होगा लोकार्पण-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती को समर्पित नवीन संस्थान जबलपुर में 100 करोड़ रुपये की लागत से मदन महल के पास तैयार हो रहा है, जिसका लोकार्पण बहुत जल्द किया जाएगा। इस संस्थान से प्रदेश की भावी पीढ़ी रानी दुर्गावती के गौरवशाली अतीत और कार्यों से परिचित होंगी। जबलपुर में रानी दुर्गावती के नाम पर एक चिड़ियाघर (जू) और वन्य प्राणी रेस्क्यू सेंटर बन रहा है। इसके साथ ही 35वीं बटालियन मंडला का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नायकों की वीरता और समृद्ध विरासत को सही रूप में प्रस्तुत करने के लिए 'विरासत से विकास' अभियान शुरू किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती का शासन काल, गौंड साम्राज्य का स्वर्णिम युग था। रानी दुर्गावती ने किसान कल्याण के लिए उस दौर में बीज संग्रह, फसल चक्रण और जल संचय के महत्वपूर्ण कार्य कराए थे। उनके प्रबंधन के परिणाम स्वरूप अनाज के भंडार भरे हुए थे।

 

किसानों के कल्याण के लिए ठोस निर्णय ले रही है सरकार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए संकल्पित है और पूरा वर्ष किसानों को समर्पित करते हुए ठोस निर्णय ले रही है। अब किसान बंधुओं के लिए शून्य ब्याज दर पर 31 मार्च तक कर्ज चुकाने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। किसान जिस तारीख को लोन लेंगे, तब से एक वर्ष की समयावधि में कर्ज चुकाया जा सकेगा। राज्य सरकार 880 करोड़ रुपए का भुगतान वित्तीय संस्थाओं को करेगी। राज्य सरकार पर्यटन, उद्योगों और अधोसंरचना विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शासकीय परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने पर सरकार किसानों को अब चार गुना मुआवजा देगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में संचालित रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना से कोदो-कुटकी पैदा करने वाले किसानों को लाभ मिल रहा है। प्रदेश की लाड़ली बहनों को हर माह जारी हो रहे 1500 रुपए से उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है। किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि का भी लाभ मिल रहा है। रानी दुर्गावती द्वारा किसानों के कल्याण के लिये चलाए गए कार्यक्रमों से प्रेरित होकर प्रदेश सरकार भी निरंतर कृषक हित में कार्य कर रही है। हमारी सरकार के पास किसान कल्याण और कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मोदी लगातार कार्य कर रहे हैं। देश में पहली बार जनजातीय वर्ग द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति पद को सुशोभित कर रही हैं। राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास के भाव से काम कर रही है। हमारी सरकार जो कहती है, वो करके दिखाती है।

CM योगी का निवेशकों को संदेश, सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड का सबसे भरोसेमंद मॉडल बना उत्तरप्रदेश

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत के लिए सेफ्टी, स्टेबिलिटी व स्पीड का थ्री-एस मॉडल बन चुका है। उद्योग के लिए ये तीनों आयाम सबसे महत्वपूर्ण हैं। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, बेमिसाल कनेक्टिविटी, पारदर्शी प्रशासन और संस्थाओं का बेहतर नेटवर्क नए उत्तर प्रदेश की पहचान है। स्किल्ड टैलेंट, टेक्नोलॉजी और इन्वेस्टमेंट-फ्रेंडली पॉलिसी, कुल मिलाकर एक संपूर्ण इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम आज नए भारत के नए यूपी में मौजूद है।

 

मुख्यमंत्री बुधवार को बेंगलुरु में “उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026”  के तहत रोडशो में बिजनेस लीडर्स को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूरा दिन सभी इन्वेस्टर्स और अलग-अलग सेक्टर के इंडस्ट्री लीडर्स के साथ संवाद करने का अवसर मिला। हमने देखा कि कैसे बेंगलुरु एक गार्डन सिटी से विकसित होकर ग्लोबल टेक्नोलॉजी पावरहाउस बना। बेंगलुरु की ग्रोथ स्टोरी आपने देखी-सुनी है। नए भारत के नए उत्तर प्रदेश की जो कहानी आप यहां सुन रहे हैं, उसे आप उत्तर प्रदेश में जाकर स्वयं महसूस करेंगे, मैं आपको इसके लिए आमंत्रित करने आया हूं।

 

पीएम मोदी के नेतृत्व में बने विकास के नए प्रतिमान

सीएम ने कहा कि हमें गर्व है कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने विकास के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और निवेश के लिए सर्वश्रेष्ठ गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। और, पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश को इस ग्रोथ स्टोरी में सहभागी बनने का सौभाग्य मिला है। पहले यूपी की छवि बहुत अच्छी नहीं थी। बिगड़ी कानून व्यवस्था, पॉलिसी पैरालिसिस, गवर्नेंस का अभाव और 'बीमारू राज्य' की पहचान थी हमारी। पलायन नियति बन चुका था। कृषि व एमएसएमई से लोगों का नाता टूट चुका था।

 

यूपी में वह सब मिलेगा, जिसकी भारत को अपेक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में अब वह सब मिलेगा, जिसकी भारत को अपेक्षा है। बेहतर लॉ एंड ऑर्डर, वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, देश के 60% एक्सप्रेसवे, 16,000 किमी रेल नेटवर्क और 4 लाख किमी सड़क नेटवर्क यूपी के पास है। वाराणसी-हल्दिया राष्ट्रीय जलमार्ग, दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल,  सात शहरों में मेट्रो, ईस्टर्न व वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन, 5 अंतरराष्ट्रीय व 11 घरेलू एयरपोर्ट के रूप में बेमिसाल कनेक्टिविटी यूपी की पहचान है। 5 नए एयरपोर्ट पर सरकार काम कर रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गत 15 जून से कमर्शियल फ्लाइट शुरू हो चुकी हैं।

 

स्थिरता व सुरक्षा से बने टॉप-3 अर्थव्यवस्था

सीएम ने कहा कि स्थिरता व सुरक्षा का परिणाम है कि यूपी अब बीमारू राज्य से निकलकर देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्था बन चुका है। पिछले 6 साल से हम रेवेन्यू सरप्लस स्टेट हैं। 9 साल में अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हुई। हमारे पास 36 सेक्टरल पॉलिसीज के साथ 75,000 एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है। एक्सप्रेसवे के किनारे 27 स्थानों पर इंडस्ट्रियल व लॉजिस्टिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। बीडा के रूप में सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल सिटी विकसित हो रहा है।

 

निवेशकों को मिलेगा स्किल्ड मैनपावर

निवेशकों को स्किल्ड मैनपावर के प्रति आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी हर साल 2 लाख स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग एंड मैथ) ग्रेजुएट्स तैयार करता है। 2 आईआईटी, एक आईआईएम, तीन स्टेट टेक्निकल यूनिवर्सिटी और तकनीकी-व्यावसायिक शिक्षा का बड़ा नेटवर्क युवाओं को हर क्षेत्र में दक्ष बना रहा है। हम उद्योग की जरूरत के अनुसार इमर्जिंग टेक्नोलॉजी में स्किल्ड मैनपावर तैयार कर रहे हैं।

 

कृषि व उद्योग क्षेत्र में जबरदस्त सफलता

कृषि व एमएसएमई क्षेत्र की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 साल में हमारी कृषि ग्रोथ रेट 8% से बढ़कर 18% हुई। पांच कृषि विश्वविद्यालयों व 89  किसान विकास केंद्रों के माध्यम से किसानों को ट्रेनिंग व मार्केट से जोड़ा गया है। यूपी के पास देश में सर्वाधिक 86% सिंचित कृषि भूमि है। राज्य में 96 लाख एमएसएमई यूनिट संचालित हैं, जिन्हें ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) योजना से जबरदस्त प्रोत्साहन मिला है। इस योजना के माध्यम से हर जिले का एक विशिष्ट उत्पाद ब्रांड बना है। पिछले 9 साल में 18,000 से अधिक बड़े औद्योगिक संस्थान यूपी में स्थापित किए गए। 9 साल पहले राज्य में मात्र 14,000 बड़े कारखाने थे, जिनकी संख्या आज 33,000 से अधिक हो चुकी है।

 

निवेशकों को मिलेगी सुरक्षा, सुविधा व नीतिगत स्थिरता

मुख्यमंत्री ने बिजनेस लीडर्स को आश्वस्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार हर निवेशक को सुरक्षा, सिंगल विंडो सुविधा और नीतिगत स्थिरता देगी। यूपी के बारे में आपने जो संभावनाएं सुनी हैं, उन्हें आप अपने निवेश से स्वयं महसूस करेंगे। मुझे विश्वास है कि आप सब यूपी की ग्रोथ स्टोरी में सहभागी बनकर विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाएंगे। मुख्यमंत्री ने रोडशो में उपस्थित सभी इंडस्ट्री लीडर्स व सीईओज का आभार भी प्रकट किया।

 

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव (उद्योग) आलोक कुमार, प्रमुख सचिव (आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स) आलोक कुमार, यीडा के सीईओ आर.के. सिंह तथा उद्योग जगत के लीडर्स व सीईओज उपस्थित थे। Edited by : Sudhir Sharma

CM योगी के निर्देश पर कोचिंग संस्थानों की जांच का महाअभियान, 100 से अधिक संस्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई

Massive drive to inspect coaching institutes on CM Yogi's directive

– प्रशासन, प्राधिकरण व फायर सर्विस की संयुक्त टीमों ने किया निरीक्षण

– कानपुर के काकादेव में 30 से अधिक कोचिंग संस्थान हुए सील

– सुरक्षा मानकों व नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई

Uttar Pradesh news : लखनऊ में हुए दुखद हत्याकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर सभी जनपदों में कोचिंग संस्थानों के निरीक्षण का महाअभियान शुरू कर दिया गया। पुलिस, प्रशासन, अग्निशमन विभाग, प्राधिकरण और विद्युत सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने संयुक्त टीमें बनाकर कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों और नियमों की अनदेखी का निरीक्षण किया। लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, आगरा आदि महानगरों के साथ अन्य जनपदों में भी यह कार्रवाई की गई। इस दौरान अनियमितताएं मिलने पर 100 से अधिक कोचिंग संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई अभी जारी रहेगी।

 

अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास, भवन की संरचना तथा अन्य मानकों की जांच

लखनऊ में हुई दुःखद घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ सभी जिलों में जांच के सख्त निर्देश दे थे। कुछ जिलों में देर शाम में ही जांच कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। मंगलवार को यह अभियान और तेज रहा। उन कोचिंग संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई जो गैर पंजीकृत थे।

टीमों ने विशेष तौर पर अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास, भवन की संरचना तथा अन्य सुरक्षा मानकों की पड़ताल की। जांच का क्रम देर रात तक जारी था। प्रयागराज के मुख्य अग्नि शमन अधिकारी चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि नगर में 97 पंजीकृत संस्थानों में केवल 15 कोचिंग संस्थानों ने से एनओसी ली है। फायर विभाग ने दस टीमों का गठन किया है, जो लगातार जांच करेंगीं। इसी क्रम में प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने सिविल लाइंस स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग को सील कर दिया। 

 

कानपुर में पार्किंग को बना दिया बच्चों का क्लासरूम, फायर एनओसी भी वैध नहीं

कानपुर विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन दस्ते और अग्निशमन अधिकारियों ने कोचिंग संस्थानों में मानकों के अनुपालन की जांच का काम सोमवार शाम से ही शुरू कर दिया था। मंगलवार शाम तक यहां के सबसे बड़े शैक्षणिक हब काकादेव में 30 से अधिक संस्थानों को सील कर दिया गया।

इन सभी को सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। सबसे गंभीर उल्लंघन भवनों के बेसमेंट में पाया गया, जिनका आवंटन सिर्फ पार्किंग के लिए था, लेकिन वहां अवैध रूप से सैकड़ों बच्चों के बैठने के लिए क्लासरूम बना दिए गए थे। मिर्जापुर में भी लगभग एक दर्जन संस्थान सील किए गए। 

 

वाराणसी में भी मिली अग्नि सुरक्षा मानकों की कमी, जौनपुर और चंदौली में भी जांच

वाराणसी विकास प्राधिकरण और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ने बनारस में भी सोमवार से ही कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरियों की जांच शुरू कर दी। इस दौरान कई संस्थानों को सील किया गया है। कई संस्थानों में अग्नि सुरक्षा के मानकों का उल्लंघन पाया गया है।

जौनपुर और चंदौली में जांच की जा रही है। वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने बताया कि कई कोचिंग सेंटर बिना मानचित्र स्वीकृति एवं निर्धारित भवन मानकों के विपरीत संचालित किए जा रहे थे, उन्हें सील किया गया।
Edited By : Chetan Gour

जमीन के मामले पर बीजेपी का कांग्रेस पर काउंटर अटैक, खडगे परिवार पर लगाए जमीन घोटाला का आरोप

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पर जमीन खरीदी के कथित आरोपों के बीच भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उनके परिवार पर जमीन आवंटन को लेकर गंभीर आरोप लगाए। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दावा किया कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान खरगे परिवार से जुड़े सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को नियमों के विपरीत जमीनें आवंटित की गईं और सार्वजनिक भूमि को निजी ट्रस्ट के नियंत्रण में पहुंचाया गया।
 
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह कथित भूमि लूट का पहला मामला नहीं है, बल्कि ऐसे कई मामलों की श्रृंखला है, जिन्हें भाजपा आने वाले दिनों में सामने रखेगी। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर बेंगलुरु में 5 एकड़ जमीन मल्लिकार्जुन खड़गे के प्राइवेट लिमिटेड सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को आवंटित की है। प्रदीप भंडारी के अनुसार, इस जमीन की बाजार कीमत लगभग 100 करोड़ रुपए है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह एक प्राइवेट लिमिटेड ट्रस्ट है और कर्नाटक सरकार ने दो प्रमुख नियमों का उल्लंघन करते हुए यह आवंटन किया है। भाजपा ने यह भी पूछा कि इस ट्रस्ट ने अब तक लोकहित में ऐसा क्या काम किया है जिसके लिए उसे इतनी महंगी जमीन दी गई?
 
इसके साथ ही खड़गे परिवार के इसी प्राइवेट लिमिटेड सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को गुलबर्ग में 90 एकड़ जमीन पानी के रिसर्च के लिए दी गई है। भाजपा का दावा है कि मल्लिकार्जुन ख़डगे और  उनके बेटे प्रियंक खडगे ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर इन जमीनों पर कब्जा जमाया है। प्रदीप भंडारी ने खड़गे पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जो स्वयं को दलितों का मसीहा बताते हैं, वे असल में अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।
 
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि भूमि लूट का पहला मामला मैं आपके सामने सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट का रखना चाहता हूं। 2024 में कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट बोर्ड ने इस ट्रस्ट को पांच एकड़ जमीन आवंटित की थी. उस समय कर्नाटक में कांग्रेस सरकार थी. मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस अध्यक्ष थे और आज भी हैं, जबकि प्रियांक खरगे मंत्री थे।
 
भंडारी के अनुसार, इस जमीन का घोषित उद्देश्य एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में रिसर्च एंड डेवलपमेंट था. उन्होंने आरोप लगाया कि बाजार में इस पांच एकड़ जमीन की कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है, लेकिन जिस उद्देश्य से जमीन दी गई थी, उस दिशा में कोई गतिविधि नहीं हुई.
 
कांग्रेस का हमलावर बीजेपी- भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस पार्टी का दोहरा चरित्र एक बार फिर सामने आ गया है। एक तरफ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक में अपने मंत्री बेटे के साथ मिलकर जमीन घोटाला कर रहे हैं और दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भाजपा से सवाल पूछ रहे हैं।
 
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर के इन्वेस्टमेंट को, उनके चचेरे भाइयों के रियल एस्टेट बिजनेस से कनेक्ट करके हल्ला करने की कोशिश की जा रही है। जो जमीन उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले खरीद ली थी, कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद खरीदी है। जिस कंपनी को 2017 में छोड़ चुके हैं, आज भी उस कंपनी का डायरेक्टर बताया जा रहा है। एक व्यक्ति जो युवावस्था से जमीनों में इन्वेस्टमेंट कर रहा है, क्योंकि राजनीति के कारण बिजनेस नहीं कर सकता, उसके पुराने इन्वेस्टमेंट पर सवाल उठाए जा रहे हैं जबकि कांग्रेस की अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुलेआम जमीन घोटाला कर रहे हैं। सरकारी जमीन अपने प्राइवेट ट्रस्ट के नाम करवा रहे हैं। उनसे कोई सवाल नहीं कर रहा।
 
 
 

Boss Scam Alert: WhatsApp पर आए ऐसा मैसेज तो भूलकर भी न खोलें फाइल, खाली हो सकता है बैंक अकाउंट

अगर आपके पास किसी बड़े अधिकारी, बॉस, सरकारी विभाग या कंपनी के नाम से WhatsApp या ईमेल पर कोई जरूरी संदेश आता है, तो सतर्क हो जाइए। गृह मंत्रालय (MHA) ने देशभर के नागरिकों और संस्थानों को तेजी से बढ़ रहे एक नए साइबर फ्रॉड 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) को लेकर चेतावनी जारी की है।

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सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, साइबर अपराधी वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव्स, सीईओ और आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। ठग भरोसेमंद व्यक्ति या संस्थान बनकर WhatsApp और ईमेल के जरिए मैसेज भेजते हैं और फिर लोगों के डिवाइस में खतरनाक मालवेयर इंस्टॉल कर देते हैं।

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क्या है Boss Scam?

 

इस स्कैम में साइबर अपराधी किसी वरिष्ठ अधिकारी, बॉस, सरकारी एजेंसी या प्रतिष्ठित संस्था की पहचान का इस्तेमाल करते हैं। पीड़ित को ऐसा संदेश भेजा जाता है जो देखने में पूरी तरह असली लगता है। मैसेज में अक्सर कोई फाइल डाउनलोड करने या अटैचमेंट खोलने के लिए कहा जाता है। जैसे ही यूजर उस फाइल को खोलता है, उसके डिवाइस में मालवेयर इंस्टॉल हो जाता है।

साइबर एक्सपर्ट्‍स का कहना है कि ऐसे ठग लोगों की जल्दबाजी, भरोसे और घबराहट का फायदा उठाते हैं। इसलिए कोई भी फाइल खोलने, लिंक पर क्लिक करने या पैसा भेजने से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल करें। थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े वित्तीय नुकसान और डेटा चोरी से बचा सकती है।  

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इन फाइलों से रहें सावधान

अगर किसी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति से आपको ये फाइलें मिलती हैं, तो उन्हें बिल्कुल न खोलें-

 

.zip

.exe

.dll

 

ये फाइलें आपके कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल में वायरस या मालवेयर इंस्टॉल कर सकती हैं।

क्या-क्या नुकसान हो सकता है?

गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने बताया है कि मालवेयर इंस्टॉल होने के बाद साइबर अपराधी:

 

  • आपका WhatsApp अकाउंट अपने कब्जे में ले सकते हैं।
  • WhatsApp Web का एक्सेस हासिल कर सकते हैं।
  • बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम तक पहुंच बना सकते हैं।
  • आपकी निजी बातचीत पढ़ सकते हैं।
  • संवेदनशील दस्तावेज और कॉर्पोरेट डेटा चुरा सकते हैं।
  • बिना अनुमति के वित्तीय लेनदेन कर सकते हैं।
  • बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे सकते हैं।
  • कैसे बचें Boss Scam से?

I4C ने नागरिकों और संस्थानों के लिए कुछ जरूरी सुरक्षा उपाय बताए हैं:

  •  किसी भी संदिग्ध ईमेल या लिंक पर क्लिक न करें।
  • अटैचमेंट डाउनलोड करने से पहले भेजने वाले की पहचान जरूर सत्यापित करें।
  •  सरकारी विभाग या नियामक संस्था के नाम से आए संदेशों पर तुरंत भरोसा न करें।
  •  मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट में एंटीवायरस एवं सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर अपडेट रखें।
  • WhatsApp Web की Active Sessions नियमित रूप से जांचें।
  • किसी भी अनजान डिवाइस को तुरंत लॉगआउट करें।
  • पैसे ट्रांसफर करने या वित्तीय मंजूरी से जुड़े किसी भी जरूरी अनुरोध की फोन कॉल या व्यक्तिगत रूप से पुष्टि करें। Edited by : Sudhir Sharma

सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताईं एमपी की विशेषताएं, कहा- जो एक बार यहां आता है, यहीं का होकर रह जाता है

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 24 जून को निजी होटल में “विकसित मध्यप्रदेश” विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि समय तभी बदलता है, जब संकल्प बड़ा होता है। सभी भारतीयों के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का समय बदला है। विश्व के कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से प्रधानमंत्री मोदी को विभूषित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत @2047 और अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार का यह प्रयास होगा कि इसमें से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान मध्यप्रदेश का हो। मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के सेवा, सुशासन और जन कल्याण के संकल्पों को पूर्ण करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। 

 

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश की गिनती देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में हो रही है। हम विरासत भी और विकास भी के पथ पर लगातार अग्रसर हो रहे है। उन्होंने कहा कि आज वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस है। उन्होंने रानी दुर्गावती का स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेशवासी रानी दुर्गावती के बलिदान को सदैव याद रखेंगे। मध्यप्रदेश की विशेषता है कि एक बार जो मध्यप्रदेश आता है, यहीं का होकर रह जाता है। प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में नए उद्योग स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार करने लिए पारदर्शी और उद्योगमित्र नीतियां लागू की हैं। मध्यप्रदेश की इन्हीं विशेषताओं के कारण निवेशक उद्योग लगाने के लिए राज्य में आ रहे हैं। देश के मध्य में स्थित होने के कारण उन्हें कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का विशेष लाभ भी मिलेगा। प्रदेश सरकार ने चारों दिशाओं में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए अधोसंरचना विकास पर विशेष बल दिया है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 का आयोजन किया गया, जिसमें अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ और एमओयू साइन हुए। यह प्रसन्नता का विषय है कि 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को राज्य सरकार धरातल पर ला चुकी है। मध्यप्रदेश की छवि कृषि प्रधान राज्य के साथ उद्योग मित्र राज्य की भी बनी है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025 को उद्योग और रोजगार को समर्पित किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय युवा प्रतिभाओं ने दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियों में शीर्ष पदों पर पहुंचकर भारत का मान बढ़ाया है। स्पेस टेक्नोलॉजी में भारतीय वैज्ञानिकों ने नए कीर्तिमान गढ़े हैं। राज्य सरकार ने भी अपनी स्पेस-टेक पॉलिसी लॉन्च की है। मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं।