60 सेकेंड में 2 भीषण भूकंप: वेनेजुएला के कई शहर मलबे में तब्दील, हजारों के दबे होने की आशंका!

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लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला (Venezuela) से इस वक्त की सबसे दर्दनाक और दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। बुधवार, 24 जून 2026 की शाम (स्थानीय समयानुसार) वेनेजुएला में प्रकृति ने ऐसा तांडव मचाया जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। महज 60 सेकंड (एक मिनट) के भीतर देश के उत्तर-मध्य हिस्से को दो बैक-टू-बैक शक्तिशाली और विनाशकारी भूकंपों ने हिलाकर रख दिया।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, इन दोनों भूकंपों की तीव्रता 7.2 और 7.5 मापी गई है। इस 'डबल भूकंप' ने देश की राजधानी काराकास (Caracas) समेत कई प्रमुख शहरों को खंडहर में तब्दील कर दिया है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने देश में 'इमरजेंसी' (आपातकाल) की घोषणा कर दी है और 'ला गुएरा' (La Guaira) प्रांत को पूरी तरह से 'डिजास्टर जोन' घोषित कर दिया गया है।

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तबाही की टाइमलाइन: 60 सेकेंड में क्या-क्या हुआ?
यूएसजीएस (USGS) के अनुसार, दोनों भूकंपों के बीच का अंतर सिर्फ 38 से 40 सेकेंड का था, जिसके कारण लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला:

  • पहला झटका (शाम 6:04 बजे – स्थानीय समय): याराकुई (Yaracuy) प्रांत के वेरोस क्षेत्र को केंद्र बनाकर 7.2 तीव्रता का पहला भूकंप आया। यह जमीन से 20 किमी नीचे था। इसने इमारतों को कमजोर कर दिया।
  • दूसरा झटका (शाम 6:05 बजे): पहले झटके के ठीक 38 सेकंड बाद, उसी क्षेत्र में 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक विनाशकारी मुख्य भूकंप (Mainshock) आया। इसका केंद्र जमीन से महज 10 किमी नीचे था, जिसने कमजोर हो चुकीं गगनचुंबी इमारतों को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया।

वेनेजुएला भूकंप 2026: एक नज़र में मुख्य आंकड़े

विवरण (Details) आधिकारिक और संभावित आंकड़े (Live Updates)
पहला भूकंप तीव्रता: 7.2 M_w
दूसरा भूकंप तीव्रता: 7.5 M_w
आधिकारिक मौतें 32+ की पुष्टि (शुरुआती रिपोर्ट, तेजी से बढ़ने की आशंका)
घायलों की संख्या 700 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती
सबसे प्रभावित इलाके ला गुएरा (La Guaira), काराकास (अल्तामिरा जिला), अरुआ, ट्रूजिलो
अंतरराष्ट्रीय अलर्ट कैरेबियन द्वीपों (अरूबा, कुराकाओ) के लिए सुनामी की चेतावनी जारी

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मलबे के ढेर में तब्दील हुए शहर, थम गई जिंदगी
भूकंप का सबसे खौफनाक मंजर राजधानी काराकास के दक्षिण-पूर्वी हिस्से और अल्तामिरा (Altamira) जिले में देखने को मिला, जहां कई बहुमंजिला रिहायशी और कमर्शियल इमारतें जमींदोज हो गईं। धूल के विशाल गुबारों के बीच चारों तरफ चीख-पुकार मच गई।

वेनेजुएला के गृह मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने बताया कि भूकंप के तुरंत बाद पूरे काराकास और वालेंसिया शहरों में बिजली गुल हो गई और इंटरनेट/टेलीकॉम सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं। इसके अलावा, देश के मुख्य एयरपोर्ट को भी भारी नुकसान पहुंचने के कारण बंद कर दिया गया है। चश्मदीदों के मुताबिक, यह आपदा साल 1967 में आए ऐतिहासिक भूकंप से भी कहीं ज्यादा भयानक थी।

संकट की घड़ी में भारत का 'ऑपरेशन दोस्त'—मदद के लिए रवाना होगी NDRF
वेनेजुएला में आई इस भीषण त्रासदी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। भारत सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए वैश्विक मानवीय सहयोग के तहत वेनेजुएला की मदद के लिए NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की एक विशेष टीम को भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। यह टीम एडवांस सर्च एंड रेस्क्यू टूल्स, मलबे में जीवन तलाशने वाले खोजी कुत्तों (K9 Squad) और लाइफ-सपोर्ट मेडिकल स्टाफ के साथ राहत कार्यों में सहयोग करेगी।

⚠️ सुरक्षा चेतावनी: मौसम विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि अगले 48 घंटों में कई खतरनाक आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) आ सकते हैं, जिससे पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों के गिरने का खतरा और बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों को खुले मैदानों में शरण लेने की सलाह दी है।

राम मंदिर पर स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से बवाल, महामंडलेश्वर ने 5 लाख इनाम का किया ऐलान

swami prasad maurya on ayodhya ram mandir

उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने भगवान राम को लेकर विवादित बयान देते हुए कहा कि अगर भगवान राम में ताकत होती, तो जिस समय लुटेरे ने चोरी की, तभी वो भस्म हो जाता। लेकिन, उस चोर का बाल भी बांका नहीं हुआ। बयान पर बवाल मच गया और महामंडलेश्वार विष्णु दास ने उनकी जीभ काटने वाले को 5 लाख के इनाम देने का एलान कर दिया। ALSO READ: अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खुलती जा रहीं परतें, SIT ने सौंपी रिपोर्ट, चंपत की भूमिका संदिग्ध

 

स्वामी प्रसाद मौर्य ने 23 जून को गाजीपुर में कहा कि राम मंदिर से करोड़ों रुपये लुटेरे लूट ले गए। चांदी-सोना भी उड़ा ले गए। लेकिन, भगवान राम उन लुटेरों को सजा नहीं दे पाए, तो आपका भला क्या करेंगे? जो अपने मंदिर की रक्षा नहीं कर सकता, वह आपकी क्या रक्षा करेगा? सवाल उठता है।

 

उन्होंने हनुमान को लेकर भी विवादित दिया। उन्होंने कहा कि हनुमानजी पृथ्वी पर पैदा हुए। भगवान राम भी अयोध्या में पैदा हुए। जमीन पर रहने वाले राजा का कोई सेवक है, तो वह भी जमीन पर ही रहेगा। पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा सूर्य है। इस पृथ्वी पर पैदा होने वाला छोटा-सा बंदर सूर्य भगवान को निगल गया। यही अज्ञानता है। ALSO READ: हे राम! चढ़ावा चोरी के बाद अब 40% कमीशन के आरोप से गरमाई अयोध्या

 

क्या बोले महामंडलेश्वर विष्‍णु दास?

भगवान राम पर दिए इस बयान को लेकर बवाल मच गया। महामंडलेश्वर विष्णु दास ने स्वामी प्रसाद मौर्य की जीभ काटकर लाने वाले को पांच लाख रुपये का इनाम देने का एलान किया। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य को संस्कृति और सनातन धर्म के विषय में कुछ भी ज्ञान नहीं है। स्वामी प्रसाद मौर्य सनातन धर्म के खिलाफ बोलते हैं।

 

उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम भक्तों का मंदिर है और स्वामी प्रसाद मौर्य राम के भक्त नहीं हैं। वे संस्कृति, सनातन और राम मंदिर के दुश्मन हैं। उनकी जीभ कट जाएगी तो वे राम मंदिर और सनातन धर्म के खिलाफ नहीं बोल सकेंगे। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी कांड, अब सर्विलांस स्टाफ रडार पर! RMO की भी खुलेगी कुंडली

 

क्या है राम मंदिर चढ़ावा विवाद?

अयोध्या में राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने जांच के बाद प्राथमिक रिपोर्ट सौंप दी है जिसमें कई गड़बड़ियों का जिक्र किया गया है। SIT ने चढ़ावा प्राप्त होने के जरिए का भी जिक्र किया है, जिसमें चढ़ावा हुंडी, ऑनलाइन के अलावा कैश काउंटर पर रसीद की बात कही गई है। SIT को राम मंदिर ट्रस्ट के बैंक खाते और पूछताछ से पता चला है कि औसतन हर महीने 25 लाख श्रद्धालु राम मंदिर दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन कुंभ के दौरान एक महीने में करीब एक करोड़ श्रद्धालु आए।

 

जांच में पता चला कि औसतन प्रति श्रद्धालु 15-18 रुपये चढ़ावा आता है लेकिन इस चढ़ावे में अनाज, तेल और घी के साथ सोने चांदी के आभूषण का चढ़ावा नहीं जोड़ा गया क्योंकि इनके दान का कोई ठोस सबूत और साक्ष्य नहीं मिला। रिपोर्ट में जिक्र है कि बैक स्टेटमेंट और श्रद्धालुओं के नंबर को देखकर चढ़ावे में बड़ा उतार चढ़ाव देखने को मिला।

edited by : Nrapendra Gupta

मौसम में बदलाव ने इंदौर में बढाए डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया समेत वायरल के मरीज, हेल्‍थ विभाग ने किया अलर्ट

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मौसम में बदलाव के चलते इंदौर में तमाम तरह की बीमारियों के मरीजों की संख्‍या में इजाफा हुआ है। इस बीच स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने आम लोगों के लिए गाइडलाइन जारी कर लोगों को बचाव के लिए अलर्ट किया है। पिछले कुछ दिनों से इंदौर में मौसम की मार की वजह से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल फीवर और पानी से होने वाली बीमारियों के मरीज बढ़े हैं। इसके बाद अस्पतालों में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक, जांच किट की उपलब्धता, अतिरिक्त बेड की व्यवस्था और बीमारी की निगरानी के लिए विशेष सिस्टम तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

इंदौर में डेंगू के 14 मरीज : स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक साल 2025 में अप्रैल महीने में इंदौर में डेंगू का एक भी मरीज नहीं मिला था, जबकि इस साल 2026 में अप्रैल तक 14 मरीज सामने आ चुके हैं। जबकि इस साल अब तक इंदौर में डेंगू के 25 मरीज और मलेरिया के 8 मरीज मिल चुके हैं। जहां मरीज सामने आ रहे हैं, वहां स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे शुरू कर दिया है।

कौन कौनसे क्षेत्र हैं संवेदनशील : स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले वर्ष भंवरकुआं, चंदन नगर, खजराना, मुसाखेड़ी और देपालपुर क्षेत्रों में अधिक मरीज मिले थे। इस बार इन इलाकों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही नीचली बस्‍तियों में और जिन बस्‍तियों और इलाकों के आसपास गंदे नाले बह रहे हैं वहां भी निगरानी करने की योजना बनाई जा रही है।

46 हजार घरों में सर्वे, 381 जगह मिला लार्वा: मलेरिया विभाग ने डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए अब तक 46 हजार 231 घरों का सर्वे किया है। सर्वे के दौरान 381 घरों में मच्छरों का लार्वा पाया गया। वहीं 2 लाख 18 हजार 912 कंटेनरों की जांच की गई, जिनमें से 372 में लार्वा मिला। विभाग ने लार्वा नष्ट करने के साथ लोगों को घरों में पानी जमा नहीं होने देने की समझाइश दी है। जिला मलेरिया विभाग के अधिकारियों के मुताबिक विभाग लगातार सर्वे कर रहा है। ड्रोन की मदद से भी जांच की जाएगी। लोगों को बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज में प्रशिक्षण भी दिया गया है।
Edited By: Naveen R Rangiyal

पासपोर्ट पर सरकार का बड़ा बयान: यह नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं, जानिए क्या कहा विदेश मंत्रालय ने

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Passport : विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं बल्कि एक यात्रा दस्तावेज है। सरकार के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विदेश में पहचान स्थापित करना है। 2025 में 1.5 करोड़ लोगों को पासपोर्ट सेवाएं प्रदान की गईं। ALSO READ: 1 जुलाई से ट्रेन में बेटिकट सफर पड़ेगा भारी, 500 रुपये जुर्माना; दूसरे के टिकट पर यात्रा करने वालों पर भी सख्ती

 

सरकार ने पासपोर्ट और मोबिलिटी इकोसिस्टम पर विस्तृत ब्रीफिंग के दौरान कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाना और विदेश में पहचान स्थापित करना है।

गौरतलब है कि देशभर में अब 545 से अधिक पासपोर्ट केंद्र कार्यरत हैं। 2025 में 1.5 करोड़ लोगों को पासपोर्ट तथा संबंधित सेवाएं प्रदान की गई हैं। इनमें से केवल पासपोर्टों की संख्या 1.39 करोड़ रही। उल्लेखनीय है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा का दस्तावेज है, न कि नागरिकता का प्रमाण। ALSO READ: E20 पेट्रोल से इंजन खराब हुआ तो क्या इंश्योरेंस क्लेम मिलेगा? सरकार ने बताई सचाई, क्या बोलीं बीमा कंपनियां

 

पुलिस सत्यापन को छोड़कर पासपोर्ट जारी करने में औसतन छह कार्य दिवस लगते हैं। पासपोर्ट सेवा केंद्रों और पोस्ट आफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों में आवेदकों द्वारा बिताया जाने वाला समय 45 मिनट से भी कम है।

इससे पहले भी आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र सहित अन्य दस्तावेजों को नागरिकता के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करने पर सवाल उठाए जा चुके हैं।

edited by : Nrapendra Gupta

Earthquakes:भूकंप क्यों आते हैं? जानिए कब, कैसे और किन जगहों पर होता है सबसे ज्यादा खतरा

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Earthquakes: भूकंप प्रकृति की सबसे शक्तिशाली और डराने वाली घटनाओं में से एक है। सरल शब्दों में कहें, तो धरती की सतह के अचानक हिलने या कांपने को भूकंप (Earthquake) कहते हैं। आइए आपके चारों सवालों- क्यों, कब, कैसे और कहां के जवाब आसान भाषा में समझते हैं। 

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1. भूकंप क्यों और कैसे आते हैं? (Why and How)

हमारी पृथ्वी की ऊपरी सतह (क्रस्ट) एक सिंगल पीस में नहीं है। यह अंडे के छिलके की तरह कई टुकड़ों में बंटी हुई है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) कहा जाता है।

 

तनाव का बनना: ये प्लेट्स पृथ्वी के अंदर मौजूद पिघले हुए लावे (मैग्मा) पर बहुत धीरे-धीरे तैरती रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे से दूर जाती हैं, या एक-दूसरे के ऊपर-नीचे रगड़ खाती हैं, तो इनके किनारों पर भारी तनाव (Stress) पैदा होता है।

 

ऊर्जा का निकलना: जब यह तनाव सहन करने की क्षमता से बाहर हो जाता है, तो चट्टानें अचानक टूट जाती हैं या खिसक जाती हैं। इससे भारी मात्रा में ऊर्जा (Energy) निकलती है।

 

तरंगों का फैलना: यह ऊर्जा सिस्मिक वेव्स (Seismic Waves – भूकंपीय तरंगों) के रूप में चारों तरफ फैलती है। जब ये तरंगें पृथ्वी की सतह पर पहुंचती हैं, तो हमें झटका महसूस होता है और धरती हिलने लगती है।

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मुख्य बिंदु: जिस जगह से भूकंप की शुरुआत धरती के अंदर होती है, उसे हाइपोसेंटर (Hypocenter/Focus) कहते हैं। और उसके ठीक ऊपर धरती की सतह पर स्थित बिंदु को एपिसेंटर (Epicenter/अधिकेंद्र) कहा जाता है, जहां सबसे तेज झटके महसूस होते हैं।

 

2. भूकंप कब आते हैं? (When)

इसका सीधा और सच्चा जवाब है: भूकंप कभी भी आ सकते हैं। विज्ञान ने आज बहुत तरक्की कर ली है, लेकिन आज भी हमारे पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जो यह बता सके कि भूकंप किस दिन, किस समय या कितने बजे आएगा।

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कोई मौसम नहीं होता: भूकंप का मौसम या जलवायु से कोई लेना-देना नहीं होता। यह गर्मी, सर्दी, बरसात, दिन या रात कभी भी आ सकता है।

 

वैज्ञानिक अनुमान: वैज्ञानिक केवल यह बता सकते हैं कि किस इलाके (फॉल्ट लाइन) में लंबे समय से तनाव बढ़ रहा है और वहां भूकंप आने की आशंका है, लेकिन सटीक समय बताना फिलहाल असंभव है।

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3. भूकंप कहां आते हैं? (Where)

भूकंप आने के लिए कुछ खास इलाके सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इन्हें भूकंपीय क्षेत्र (Seismic Zones) कहा जाता है। दुनिया में सबसे ज्यादा भूकंप इन जगहों पर आते हैं:

 

प्लेटों के किनारों पर (Plate Boundaries): जहां दो टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में मिलती हैं।

 

रिंग ऑफ फायर (Ring of Fire): प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के चारों ओर का एक ऐसा इलाका है जहां दुनिया के लगभग 80% से 90% भूकंप आते हैं। इसमें जापान, वेनेजुएला, फिलीपींस, और अमेरिका का पश्चिमी तट शामिल हैं।

 

हिमालय क्षेत्र (भारत): भारत की प्लेट (Indian Plate) लगातार एशिया की प्लेट (Eurasian Plate) को उत्तर की तरफ धकेल रही है। इसी वजह से हिमालय क्षेत्र (जैसे नेपाल, उत्तर भारत, पूर्वोत्तर भारत) भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील है।

 

संक्षिप्त सारांश (Quick Table)

क्यों? पृथ्वी के अंदर टेक्टोनिक प्लेट्स के हिलने और तनाव बढ़ने के कारण।

कैसे? चट्टानें टूटने से सिस्मिक तरंगें उठती हैं, जो धरती को हिला देती हैं।

कब? कभी भी। इसकी सटीक भविष्यवाणी करना फिलहाल असंभव है।

कहां? ज्यादातर टेक्टोनिक प्लेट्स की सीमाओं पर (जैसे रिंग ऑफ फायर और हिमालय क्षेत्र)।

कच्चे तेल में गिरावट का क्या हुआ सोने चांदी पर असर, जानिए आपके शहर के ताजा भाव

gold silver price on 25 June

Gold Silver Rates 25 June : अमेरिका ईरान युद्ध थमने और अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी गिरावट से सोने चांदी में नरमी का दौर जारी है। वैश्विक बुलियन बाजारों से मिले कमजोर संकेतों से आज भी सोने चांदी की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं दर्ज की गई। 

 

अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका ईरान युद्ध के बाद से पहले बाद क्रूड की कीमतें 72 डॉलर से नीचे पहुंची। ब्रेंट क्रूड 72.58 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 69.45 डॉलर प्रति बैरल हुआ। इंडियन बास्केट पर भी कच्चे तेल के दाम 3.96 फीसदी गिरकर 75.28 डॉलर प्रति बैरल हो गए।

 

25 जून को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दोनों कीमती धातुएं खुलते ही धड़ाम हो गईं और चांदी की वायदा कीमत तो गिरते हुए 2.10 लाख रुपए प्रति किलो पर आ गई। सोने की वायदा कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कुछ ही देर बाद बाजार ने रिकवरी की और सुबह 10:03 बजे MCX पर सोना 435 रुपए बढ़कर 1,41,705 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। इस समय चांदी 1807 रुपए की बढ़त के साथ 2,14,882 पर थी। 

 

स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर में भी आज बढ़त दिखाई दी। यहां सोने की कीमत 3988.513 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वहीं स्पॉट सिल्वर की कीमत 57.258 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। 
 

गुडरिटर्न्स डॉट कॉम के अनुसार, देश में 24 कैरेट गोल्ड के दाम 1,40,130 रुपए प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट गोल्ड 1,28,450 रुपए प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट गोल्ड 1,05,100 रुपए प्रति 10 ग्राम है। देश में चांदी की कीमत 235,000 रुपए प्रति किलो थी।

 

बुलियन मार्केट में आपके शहर में क्या है सोने के दाम?

gold rates 25 june

 

आपके शहर में क्या है चांदी के दाम?

silver rates 25 june

अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। जीएसटी और अन्य कारणों से सोने चांदी के दाम यहां दिए गए दाम से अलग भी हो सकते हैं। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

झारखंड को मिलेगी बिजली की बड़ी सौगात, CM हेमंत सोरेन करेंगे 3 नए ग्रिड सबस्टेशनों का उद्घाटन

Jharkhand Chief Minister Hemant Soren will inaugurate three new grid substations

Chief Minister Hemant Soren : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 3 जुलाई को दुमका-गोविंदपुर 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन और पाकुड़, जामताड़ा व पूर्वी सिंहभूम के 3 नए ग्रिड सबस्टेशनों का उद्घाटन करने जा रहे हैं, जिससे संताल परगना और कोयलांचल क्षेत्र की बिजली व्यवस्था सुदृढ़ होगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बिजली लाइन के साथ-साथ तीन जिलों में नए बने बड़े पावर सबस्टेशनों को भी जनता के लिए शुरू करेंगे। इनमें पाकुड़ जिले के जियापानी स्थित 132/33 केवी ग्रिड सबस्टेशन अमड़ापाड़ा, पूर्वी सिंहभूम के 132/33 केवी ग्रिड सबस्टेशन सुरदा और जामताड़ा के 132/33 केवी ग्रिड सबस्टेशन नारायणपुर शामिल हैं।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 3 जुलाई को दुमका-गोविंदपुर 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन और पाकुड़, जामताड़ा व पूर्वी सिंहभूम के 3 नए ग्रिड सबस्टेशनों का उद्घाटन करने जा रहे हैं, जिससे संताल परगना और कोयलांचल क्षेत्र की बिजली व्यवस्था सुदृढ़ होगी।

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बिजली लाइन के साथ-साथ तीन जिलों में नए बने बड़े पावर सबस्टेशनों को भी जनता के लिए शुरू करेंगे। इनमें पाकुड़ जिले के जियापानी स्थित 132/33 केवी ग्रिड सबस्टेशन अमड़ापाड़ा, पूर्वी सिंहभूम के 132/33 केवी ग्रिड सबस्टेशन सुरदा और जामताड़ा के 132/33 केवी ग्रिड सबस्टेशन नारायणपुर शामिल हैं।

 

220 केवी दुमका-गोविंदपुर संचरण लाइन के चालू होने का सीधा और बड़ा फायदा आधा दर्जन जिलों को मिलेगा। इसमें दुमका, देवघर, गोड्डा, पाकुड़, धनबाद तथा इनके आसपास के तमाम ग्रामीण और शहरी इलाके शामिल हैं। इससे उपभोक्ताओं को बार-बार होने वाली ट्रिपिंग, लोड शेडिंग और लो-वोल्टेज की गंभीर समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।

झारखंड सरकार का मानना है कि इन सभी पावर प्रोजेक्ट्स के पूरी तरह चालू हो जाने से झारखंड की बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती मिलेगी। कोयले से पूरे देश को रोशन करने वाला झारखंड राज्य गठन के 25 साल बाद बिजली के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुका है। पतरातू (PVUNL) की नई यूनिट के कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने से राज्य के पास 700 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध हो गई है।
Edited By : Chetan Gour

सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने की जरूरत, हर नागरिक बने डिजिटली जागरूक : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सायबर खतरा एक ऐसा अदृश्य दुश्मन है, जो बिना दस्तक दिए हमारे घरों तक पहुंच रहा है। सायबर खतरों को समझना ही उनसे बचने का सबसे बड़ा रास्ता है। सावधानी ही सुरक्षा है और जानकारी ही बचाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, डीप-फेक, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी धोखाधड़ी, ऑनलाइन शॉपिंग ठगी, रैनसमवेयर हमले और फर्जी निवेश लिंक जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की जनता को सायबर सुरक्षा के तीन महत्वपूर्ण सूत्र 'जागरूकता, सावधानी और सहभागिता' के बारे में बताकर कहा कि जो लोग सायबर सुरक्षा की जानकारी रखते हैं, वे दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘राज्य व्यापी सायबर जागरूकता अभियान’ के तहत “सेफ क्लिक 2.0'' का शुभारंभ किया। यह अभियान 24 जून से शुरू होकर 8 जुलाई तक प्रदेश के 10 संभाग, 55 जिलों और 50 हजार से अधिक गांव में एक साथ चलेगा। इस अभियान के तहत सायबर ठगी और अन्य अपराधों से बचने के लिए जागरूक किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सायबर जागरूकता अभियान के पोस्टर, स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई सायबर जागरूकता बुकलेट्स तथा अभियान के ऑफिशियल वीडियो का विमोचन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर जागरूकता रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के संचालन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि संकट के समय मध्यप्रदेश पुलिस हमेशा संकटमोचक हनुमान की भूमिका में रहती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में प्रदेश में विभिन्न सायबर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 33 लाख से अधिक नागरिकों को जागरूक किया गया। अब अभियान का विस्तार पंचायतों, स्कूलों, बैंकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और सरकारी कार्यालयों तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के 56 विभागों की लगभग 1700 सेवाएं एकीकृत पोर्टल पर उपलब्ध हैं और इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में सायबर खतरे अदृश्य रूप में हमारे जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और कंप्यूटर के माध्यम से होने वाले सायबर अपराधों से बचाव के लिए सावधानी और जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अपराधों के प्रति प्रदेशवासियों को जागरुक करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस का “सेफ क्लिक 2.0'' सायबर जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अभियान से प्रदेश के सभी नागरिक जागरूक होंगे। उन्होंने कहा कि सायबर अपराधी एक प्रकार से डिजिटल दौर के राक्षस हैं, जो दबे पाँव लैपटॉप, कम्प्यूटर और मोबाइल के जरिए हमारे साथ सेंधमारी और डकैती करते हैं। आजकल डिजिटल अरेस्ट, डीप फेक, डेटा ब्रीजिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, रेनसमवेयर अटैक जैसे अनेक प्रकार के सायबर अपराध संचालित हैं। लेकिन सायबर अपराधों के मामले में सावधानी ही बचाव है। मध्यप्रदेश पुलिस ने देश में पहली बार सायबर डकैती का लाइव पर्दाफाश किया था। इसके लिए मध्यप्रदेश पुलिस बधाई की पात्र है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष अपने सायबर जागरुकता अभियान के माध्यम से लगभग 33 लाख से अधिक नागरिकों को सतर्क किया था। इस वर्ष 15 दिन तक चलने वाले “सेफ क्लिक 2.0'' अभियान में हर दिन अलग थीम रखी गई है। इस दौरान लोगों को बैंकिंग, महिला सुरक्षा, ग्रामीण इलाकों में जागरुकता के बारे में बताया। यह अभियान बैंकों, बाजारों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर संचालित किया जाएगा। इसके लिए लोकरंजन के रुचिकर कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। सायबर सुरक्षा को जागरूकता, सावधानी और सहभागिता के माध्यम से प्रभावी बनाया जाएगा। सायबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के बारे में लोगों को बताया जा रहा है। यह नंबर सायबर अपराध के मामले में सबसे पहले पीड़ितों की ढ़ाल बनता है।

 

लालच और जल्दबाजी कर सकती है आर्थिक नुकसान- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नागरिकों को सचेत करते हुए कहा कि अगर आपको कोई अनजान लिंक मिले या डराने धमकाने की कॉल आए तो “रुको, सोचो और फिर एक्शन लो''। लालच और जल्दबाजी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। पुलिस के अभियान को जन जागरुकता अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में हम सभी सहभागी बनें। राज्य सरकार ने सायबर अपराध के विरुद्ध मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया है। नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा एक्ट को भारत सरकार ने लागू किया है। प्रदेश में कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का गठन किया गया है। राज्य शासन के 56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाओं को एक पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। यह एक प्रशंसनीय पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “सेफ क्लिक 2.0'' अभियान में बैकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों सबको जोड़ा गया है। अभियान को शुरू करने का यही सही समय है, क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालयों में प्रवेश ले रही है।

 

वेनेजुएला में 38 सेकंड में दो बड़े भूकंप, बेसबॉल मैच में भगदड़, मैदान छोड़ भागे खिलाड़ी और दर्शक

venezuela earthquake : players run away from ground

Venezuela Earthquake: वेनेजुएला में गुरुवार सुबह 38 सेकंड्स के अंतराल में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंपों की वजह से तबाही मच गई है। हादसे में 10,000 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका है। बड़ी संख्या में लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। भूकंप के समय एक बेसबॉल मैच में हड़कंप मच गया। खिलाड़ी और दर्शक मैदान छोड़ भाग गए। ALSO READ: भूकंप के भयानक झटकों से थर्राया वेनेजुएला, भारी तबाही, 10000 से ज्यादा की मौत!

 

बेसबॉल मैच के दौरान ही भूकंपों से कांपी धरती

बताया जा रहा है कि भूकंप के समय वेनेजुएला की राजधानी काराकस (Caracas) में एक बेसबॉल मैच चल रहा था। अचानक आए भूकंपों की वजह से पूरा स्टेडियम हिल गया और सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि दर्शक भी घबरा गए। भूकंपों के झटके से डरकर खिलाड़ी और दर्शक स्टेडियम छोड़कर भाग निकले। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल यह हो गया।

 

वेनेजुएला में इमरजेंसी

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश को संबोधित करते हुए बताया कि 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंपों के बाद करीब 20 आफ्टरशॉक्स भी आए। देश में हालात काफी गंभीर बने हुए हैं, इसे देखते हुए रोड्रिगेज ने आपातकाल की घोषणा कर दी है। वेनेजुएला में स्कूल-कॉलेज फिलहाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। रेलवे सेवाओं को रोक दिया गया है।

 

रोड्रिगेज ने लोगों से घरों के बाहर रहने और एम्बुलेंस के लिए रास्ता देने की अपील की है। नुकसान की वजह से काराकस एयरपोर्ट बंद कर दिया गया है। देश में कई जगह इंटरनेट कनेक्टिविटी भी प्रभावित हुई है।

edited by : Nrapendra Gupta 

गुजरात में धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, सरकार के सुनियोजित नियोजन से बदलेगा तीर्थस्थलों का स्वरूप

Religious tourism in Gujarat will get boost

Gujarat News : गुजरात को वैश्विक स्तर पर पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार लगातार सक्रिय और प्रतिबद्ध नजर आ रही है। राज्य में स्थित सुप्रसिद्ध और स्थानीय आस्था के केंद्रों के रूप में पूजनीय तीर्थस्थलों का सुनियोजित विकास करने और वहां आने वाले लाखों भक्तों की सुख-सुविधाओं में वृद्धि करने के उद्देश्य से सरकार ने एक और बड़ा तथा जनहितैषी निर्णय लिया है। राज्य के गृह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और यात्राधाम विकास मंत्री हर्ष संघवी द्वारा पवित्र तीर्थस्थलों के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स और नए कार्यों को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस ठोस कदम से आने वाले दिनों में धार्मिक पर्यटन को बहुत गति मिलेगी।

 

दक्षिण गुजरात से लेकर सौराष्ट्र तक के 6 जिलों का समावेश

इस सैद्धांतिक मंजूरी के तहत गुजरात के भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण ६ प्रमुख जिलों के तीर्थस्थलों को शामिल किया गया है। इसमें दक्षिण गुजरात के वलसाड, सूरत और प्रकृति की गोद में बसे डांग जिले के पवित्र स्थानों को शामिल किया गया है।

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इसके अलावा सौराष्ट्र के राजकोट और उसके आसपास के धार्मिक केंद्रों के साथ-साथ मध्य गुजरात के हेरिटेज सिटी अहमदाबाद और संस्कारी नगरी वडोदरा जिले में स्थित प्रख्यात तीर्थस्थलों को भी इस योजना से जोड़ा गया है। इन सभी निर्धारित जिलों में श्रद्धालुओं की संख्या और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे का व्यापक विकास किया जाएगा।

 

3.28 करोड़ रुपए के बजट से होगा तीर्थस्थलों का कायाकल्प

राज्य सरकार के पर्यटन और यात्राधाम विकास बोर्ड के समन्वय से इस पूरी योजना के लिए कुल 3.28 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। इस स्वीकृत राशि का उपयोग तीर्थस्थल परिसरों में पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था, पब्लिक यूटिलिटी, आधुनिक शौचालय, परिसर का सौंदर्यीकरण, एप्रोच रोड और भक्तों के लिए विश्राम गृह जैसी बुनियादी सुविधाएं तैयार करने के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही तीर्थस्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी कैमरे जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणाली भी विकसित की जाएगी।

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निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के आदेश

संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ये सभी विकास कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर और पूरी गुणवत्ता के साथ पूरे होने अत्यंत अनिवार्य हैं। सरकार के इस योजनाबद्ध कदम के कारण आने वाले समय में तीर्थस्थलों का स्वरूप बदलेगा और वहां आने वाले दर्शनार्थियों की यात्रा अधिक सुखद और यादगार बनेगी। इन सुधारों और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण स्थानीय स्तर पर व्यापार-रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
Edited By : Chetan Gour