वेनेजुएला में भूकंप से 235 मौतें; भारत ने भेजी मदद, Starlink ने फ्री इंटरनेट का किया ऐलान

Venezuela Earthquake

Venezuela Earthquake : दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 235 हो गई। इस दर्दनाक हादसे में 1500 से ज्यादा लोग घायल हैं जबकि सैकड़ों लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। राहत और बचाव कार्य जोरों से जारी है। ALSO READ: 60 सेकेंड में 2 भीषण भूकंप: वेनेजुएला के कई शहर मलबे में तब्दील, हजारों के दबे होने की आशंका!

 

सरकारी टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में वेनेज़ुएला के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि देश भर के मेडिकल सेंटरों में भूकंप से जुड़ी 235 मौतें दर्ज की गई हैं। भूकंप से अस्पतालों और शॉपिंग सेंटरों समेत सैकड़ों इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनियाभर के नेताओं ने रोड्रिग्ज से बात कर मदद की पेशकश की है।  भारत और चिली ने भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए अपनी रेस्क्यू टीम भेजी है। ALSO READ: वेनेजुएला में 38 सेकंड में दो बड़े भूकंप, बेसबॉल मैच में भगदड़, मैदान छोड़ भागे खिलाड़ी और दर्शक

 

इस आपदा से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को 9.5 लाख करोड़ रुपए के नुकसान हो सकता है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने आपातकाल लगा दिया है। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक भूकंप से 10 हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने की 44% आशंका है। वहीं, एक लाख लोगों के जान गंवाने की 30% आशंका है।

 

यूजर्स को फ्री इंटरनेट देगी स्टारलिंक

एलन मस्क की Starlink ने गुरुवार को कहा कि दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में दो भूकंप आने के बाद वह वहां अपने यूजर्स को एक महीने तक फ्री सर्विस देगी। कंपनी तेजी से टर्मिनल लगाने और सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में कनेक्टिविटी बहाल करने पर भी काम कर रही है।

edited by : Nrapendra Gupta

Asteroid 1997 NC1 : पृथ्वी के करीब से गुजरेगा विशाल एस्टेरॉयड, क्या होगी रफ्तार, जानें कितना सुरक्षित?

asteroid

Asteroid 1997 NC1 : 750 से 1,650 मीटर चौड़ा एक एस्टेरॉयड शनिवार को पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरने वाला है। बताया जा रहा है कि इस एस्टेरॉयड के पृथ्वी से टकराने की कोई संभावना नहीं है। इससे पृथ्वी को कोई खतरा नहीं होगा। इस पर भारत की ISRO, चीन की CNSA, अमेरिका की NASA समेत कई अंतरिक्ष एजेंसियों की नजर हैं।

 

इस एस्टेरॉयड का नाम (152637) 1997 NC1 है। यह एस्टेरॉयड शनिवार को भारतीय समयानुसार शाम 4:44 बजे पृथ्वी के सबसे नजदीक आएगा। इस दौरान एस्टेरॉयड और पृथ्वी के बीच की दूरी लगभग 2,560,000 किलोमीटर होगी। यह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से छह गुना से भी ज्यादा है। पृथ्वी के करीब से गुजरते समय एस्टेरॉयड की गति लगभग 9 किलोमीटर प्रति सेकंड की होगी।

 

एस्टेरॉयड (152637) 1997 NC1 की खोज 1997 में की गई थी। अगर मौसम साफ रहा तो अंतरिक्ष विज्ञान में रूची रखने वाले लोग दुनिया में कही से भी इसे दूरबीन की मदद से आसानी से देख सकेंगे।

 

क्या होता है एस्टेरॉयड

एस्टेरॉयड को किसी ग्रह या तारे का टूटा हुआ टुकड़ा माना जाता है। ये पत्थर या धातु के टूकड़े होते हैं जो एक छोटे पत्थर से लेकर एक मील बड़ी चट्टान तक और कभी-कभी तो एवरेस्ट के बराबर तक हो सकते हैं। आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का और साधारण बोलचाल में 'टूटते हुए तारे' अथवा 'लूका' कहते हैं।  कहते हैं कि हमारे सौर मंडल में करीब 20 लाख एस्ट्रेरॉयड घूम रहे हैं। हिंदी में इसे उल्कापिंड या क्षुद्रग्रह कहते हैं।

 

हर साल एस्टेरॉयड पृथ्वी की ओर आते हैं। इनमें से कुछ के पृथ्वी से टकराने का खतरा बना रहता है। इन्हें खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है। 1994 में पृथ्वी के बराबर के 10-12 उल्का पिंड बृहस्पति ग्रह से टकरा गए थे जहां का नजारा महाप्रलय से कम नहीं था। आज तक उस ग्रह पर उनकी आग और तबाही शांत नहीं हुई है। 

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अब दवा असली है या नकली, एक स्कैन में चलेगा पता; वैक्सीन, एंटीबायोटिक और कैंसर की दवाओं पर QR Code अनिवार्य

QR code on medicines

केंद्र सरकार ने नकली और घटिया दवाओं पर अंकुश लगाने के लिए क्यूआर कोड आधारित प्रणाली का दायरा बढ़ा दिया है। इसमें सभी तरह के टीके, एंटीबायोटिक दवाएं, कैंसर रोधी दवाएं और नशा उन्मूलन से जुड़ी शेड्यूल H2 की दवाएं शामिल की गई हैं। दवाओं की पैकेजिंग पर क्यूआर कोड होने से उसकी प्रामाणिकता की जांच और सत्यापन आसान होगा। इससे लोग यह जान सकेंगे कि जिस दवा का सेवन कर रहे हैं, वह घटिया या नकली तो नहीं है। ALSO READ: Passport : 1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा! केंद्र सरकार ने बढ़ाई फीस, जानिए नई दरें

 

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वैक्सीन, एंटीबायोटिक दवा और कैंसर की दवाओं पर QR कोड अनिवार्य कर दिया है। दवा कहां बनी, कैसे बनी सब कुछ एक क्लिक में पता चल सकेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके लिए औषधि नियम 1945 में संशोधन को अधिसूचित किया है। इससे क्यूआर कोड स्कैन करते ही देश में बनीं दवाइयों की पूरी जानकारी सामने आ जाएगी।

 

कहां लगेगा क्यूआर कोड

शेड्यूल H2 के तहत निर्धारित दवाओं की पैकेजिंग पर बारकोड या क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य होगा, ताकि पूरी आपूर्ति श्रृंखला में उनकी प्रामाणिकता की जांच और ट्रैकिंग की जा सके।

 

संशोधन के बाद इन दवाओं के निर्माताओं को उत्पाद की प्राथमिक पैकेजिंग पर बारकोड या क्यूआर कोड प्रिंट या चिपकाना होगा। यदि प्राथमिक पैकेजिंग पर पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है, तो इसे सेकंडरी पैकेजिंग पर लगाया जाएगा। क्यूआर कोड में ऐसी जानकारी होगी, जिसे किसी भी अधिकृत सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन के जरिए स्कैन कर दवा की असलियत और पूरी आपूर्ति श्रृंखला में उसकी स्थिति की पुष्टि की जा सकेगी। ALSO READ: LPG को लेकर आई बड़ी खुशखबरी, सरकार ने दी बड़ी राहत

 

मिलेगी दवा से जुड़ी 9 महत्वपूर्ण जानकारी

हर क्यूआर कोड में दवा से जुड़ी नौ महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होंगी। इनमें उत्पाद की विशिष्ट पहचान संख्या (Unique Product Identification Code), दवा का सामान्य और जेनेरिक नाम, ब्रांड नाम, निर्माता का नाम और पता, बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि (Expiry Date), मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नंबर तथा दवा में प्रयुक्त सहायक पदार्थों (Excipients) का विवरण शामिल होगा। इससे डिजिटल माध्यम से दवाओं की जांच, सत्यापन और ट्रैकिंग पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी।

 

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

अब तक यह व्यवस्था केवल देश के शीर्ष 300 दवा ब्रांडों पर लागू थी। नए संशोधन के बाद इसका दायरा बढ़ाकर सभी टीकों, एंटीमाइक्रोबियल दवाओं, कैंसर रोधी दवाओं तथा नारकोटिक एवं साइकोट्रॉपिक दवाओं तक कर दिया गया है। इससे नकली और घटिया दवाओं के बाजार में पहुंचने पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। 

 

नई ट्रेसबिलिटी प्रणाली के माध्यम से आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न चरणों पर दवाओं की प्रामाणिकता की पुष्टि की जा सकेगी तथा उनकी बेहतर निगरानी और सत्यापन संभव होगा। इससे नियामकीय निगरानी मजबूत होगी और नकली एवं घटिया दवाओं के वितरण पर अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी। साथ ही, यह एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) से लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि नकली और निम्न गुणवत्ता वाली एंटीमाइक्रोबियल दवाओं की पहचान और निगरानी आसान हो जाएगी। ALSO READ: Passport : क्या पासपोर्ट भी नागरिकता का सबूत नहीं? जानिए भारत में कौन-से दस्तावेज साबित करते हैं आपकी पहचान

 

कबसे लागू होना यह फैसला?

उद्योग और अन्य संबंधित पक्षों को पर्याप्त समय देने के लिए मंत्रालय ने इन नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है। टीकों, नारकोटिक एवं साइकोट्रॉपिक दवाओं तथा कैंसर रोधी दवाओं के लिए यह नियम 1 जुलाई 2027 से लागू होंगे। वहीं एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के लिए यह व्यवस्था 1 जुलाई 2028 से प्रभावी होगी। मंत्रालय ने दवा निर्माताओं को निर्धारित समयसीमा से पहले ही स्वैच्छिक रूप से इस व्यवस्था को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है, ताकि दवाओं की प्रामाणिकता, ट्रेसबिलिटी और आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता के लाभ जल्द मिल सकें।

 

यह पहल दवाओं और चिकित्सा उत्पादों के नियामकीय ढांचे को मजबूत करने, फार्मास्यूटिकल आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ाने और वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। साथ ही, यह अभियान “नशा मुक्त भारत” के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में भी सहायक साबित होगा।

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नाटो प्रमुख से खुश लेकिन यूरोपीय साझेदारों से चिढ़े ट्रंप

US President Donald Trump

ओंकार सिंह जनौटी

नीदरलैंड्स के पूर्व प्रधानमंत्री और नाटो के महासचिव मार्क रुटे को डोनाल्ड ट्रंप ने अपना दोस्त बताया है। लेकिन उनके देश समेत नाटो के यूरोपीय साझेदारों को अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिर से तीखे ताने सुनाए हैं। ALSO READ: क्षेत्रीय तनाव के बीच पकिस्तान बढ़ा सकता है रक्षा खर्च

 

वॉशिंगटन पहुंचे नाटो महासचिव मार्क रुटे से मुलाकात के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “वह मेरे मित्र हैं, वह शानदार व्यक्ति है, महान नेता, महान महाचिव हैं, हर कोई उनका सम्मान करता है।” अपने ओवल ऑफिस में रुटे के बगल में बैठे ट्रंप ने इसके बाद नाटो के यूरोपीय साझेदारों पर तंज कसा, “ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगता है कि उनकी जगह इस पद पर अगर कोई और होता तो आज हम मिल भी नहीं रहे होते, क्योंकि हमें शर्मिंदा किया गया।”

 

ट्रंप के मुताबिक, ईरान के साथ युद्ध के दौरान यूरोपीय साझेदारों के रुख ने अमेरिका को “शर्मिंदा किया।” 32 देशों वाले सैन्य साझेदारी संगठन नाटो में तुर्की समेत 30 यूरोपीय देश हैं। ये सभी देश 7-8 जुलाई 2026 को तुर्की की राजधानी अंकारा में होने वाले नाटो सम्मेलन में शिरकत करने जा रहे हैं। 'अंकारा समिट' में नाटो देश सैन्य खर्च, हथियार उत्पादन और यूक्रेन की मदद जैसे कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे। लेकिन इस सम्मलेन से पहले अमेरिका और यूरोपीय साझेदारों के बीच उभरे गहरे मतभेदों को सुलझाने के लिए नाटो महासचिव रुटे, वॉशिंगटन गए थे। ALSO READ: UN महासचिव ने AI कंपनियों से मांगा बिजली, पानी और जमीन का हिसाब

 

रुटे के सामने ही ट्रंप ने कहा, “मैं इटली से निराश हुआ। मैं ब्रिटेन से निराश हुआ… हम जर्मनी और फ्रांस भी निराश हुए।” इस दौरान स्पेन की उन्होंने अलग से आलोचना की। ईरान युद्ध के दौरान स्पेन ने अमेरिकी सेना को अपने सैन्य अड्डे देने से इनकार कर दिया था। ऐसा ही इनकार कुछ अन्य यूरोपीय देशों ने भी किया।

 

क्या है नाटो

1949 में स्थापित किए गए नाटो का मुख्य उद्देश्य अपने सदस्य देशों की स्वतंत्रता व सुरक्षा की रक्षा करना है। 14 अनुच्छेदों वाले नाटो के संविधान में, धारा 5 खासी अहम है। यह सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर टिकी है। इसके तहत यदि किसी एक या एक से अधिक सदस्य देशों पर कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे पूरे गठबंधन (सभी सदस्य देशों) पर हमला माना जाएगा। इसके जवाब में, सभी सदस्य देश सामूहिक रूप से सैन्य बल का उपयोग कर सकते हैं।

 

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से अमेरिका नाटो में सबसे बड़ी सैन्य ताकत है। वॉशिंगटन, नाटो पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च भी करता है। ट्रंप ने राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले कार्यकाल (जनवरी 2017- जनवरी 2021) के दौरान भी नाटो के अन्य देशों को सेना पर कम खर्च करने के लिए खरी खोटी सुनाई थी। वर्तमान में उनके दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान नाटो के यूरोपीय साझेदारों ने अपने बजट का पांच फीसदी हिस्सा सैन्य तैयारियों पर खर्च करने पर सहमति जताई है। ALSO READ: ब्रेक्जिट के 10 साल: ब्रिटेन को भारी पड़ा अलग होने का फैसला

 

यूरोपीय साझेदारों से नाराज क्यों हैं ट्रंप

अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर फरवरी 2026 में ईरान पर हमले किए। यूरोपीय साझेदारों का कहना है कि इन हमलों से पहले ना तो उनके साथ कोई मशविरा किया गया और ना ही उनकी आपत्तियों पर ध्यान दिया गया। खाड़ी के देशों ने भी अमेरिका से ईरान पर हमले ना करने की अपीलें की थीं, लेकिन इन अपीलों को बावजूद अमेरिका और इजराइल ने ईरान से युद्ध छेड़ा। ईरान युद्ध का मकसद क्या था? युद्ध की व्यापक रणनीति क्या थी? ईरान पर हमले कर अमेरिका क्या हासिल करना चाहता था? ये सवाल अब भी अनसुलझे हैं।

 

हालांकि जून 2025 में भी अमेरिका और इस्राएल ने ईरान पर 12 दिन तक हवाई हमले किए थे। लेकिन इस बार शुरू किए गए हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातोल्लाह अली खमेनेई की मौत हो गई। खमेनेई की मौत के बाद ईरान ने भी पूरी ताकत से पलटवार किया और मध्य पूर्व में भीषण जंग छिड़ गई। ईरान ने इजराइल के साथ साथ, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन, कतर, ओमान और कुवैत के कई सैन्य व पेट्रोलियम प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। तेहरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के ठिकानों को खासा नुकसान पहुंचाया।

 

ईरान युद्ध का असर खाड़ी ही बल्कि पूरी दुनिया ने महसूस किया। तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से पूरे विश्व में पेट्रोलियम और खाद की सप्लाई चरमरा गई। तेल सप्लाई को सुचारू व सस्ता बनाए रखने के लिए खुद अमेरिका को अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को 1980 के दशक के बाद सबसे नीचे ले जाना पड़ा। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़े दबाव की वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति को तेहरान के साथ संघर्ष विराम करना पड़ा। हालांकि संघर्ष विराम की शर्तों को लेकर अब भी स्थिति साफ नहीं है।
 

नाटो के सामने कैसी चुनौतियां हैं?

करीब 35 साल पहले सोवियत संघ के पतन के साथ ही अमेरिका दुनिया की एक मात्र महाशक्ति बन गया। लेकिन बीते 10 साल में चीन ने अब उसे चुनौती देना शुरू कर दिया है। हाल ही में बीजिंग पहुंचे ट्रंप से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग कह चुके हैं कि ताकत का केंद्र बदल रहा है और इसे विनम्रता के साथ स्वीकार किया जाना चाहिए।

 

वॉशिंगटन को रूस और चीन की गहराती दोस्ती की भी चिंता है। लेकिन अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के क्वाड ग्रुप को ट्रंप करीबन मूर्छित कर चुके हैं। मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति बीच बीच में ब्रिक्स देशों को लेकर भी अपनी खीझ जाहिर करते हैं।

 

ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका अब रणनीतिक रूप से चीन पर ध्यान लगाए। वहीं यूरोपीय साझेदार यूक्रेन पर कब्जा कर रहे रूस को अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चिंता मानते हैं। नाटो के इतिहास में यह पहला मौका है जब साझेदार देशों के सामने अलग अलग किस्म के लक्ष्य हैं। मुश्किल यह है कि ट्रंप अपने हितों को पूरा करने के लिए साझेदारों को दंडित करने भी नहीं चूकते हैं। टैरिफ वॉर, कारोबारी समझौते के लिए दबाव और आए दिन विदेशी नेताओं को असहज करने वाले उनके बयान इसी का उदाहरण पेश करते हैं।

Top News : वेनेजुएला भूकंप में 235 मौतें, राम मंदिर चढ़ावा विवाद में FIR, कैंसर की नकली दवाओं पर केंद्र का बड़ा एक्शन

top news 26 june

Top News 26 June : वेनेजुएला में भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 235 हुई। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में 8 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज। केंद्र सरकार ने कैंसर की नकली दवाओं पर शिकंजा कसा। भारत ने महिला विश्व कप में बांग्लादेश को हराया। जर्मनी को हराकर इक्वाडोर फीफा विश्व कप के नॉकआउट दौर में पहुंचा। 26 जून की बड़ी खबरें :

 

वेनेजुएला में भूकंप से 235 लोगों की मौत

वेनेजुएला में गुरुवार को आए 2 भयानक भूकंपों से भारी तबाही हुई। मृतक संख्या बढ़कर 235 हुई। 200 से ज्यादा लोग अब भी मलबे में फंसे हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। दुनियाभर से मदद के लिए बढ़े हाथ। राहत और बचाव का काम जारी।

 

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में FIR दर्ज

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे के गबन एवं अनियमितताओं के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी है। पुलिस ने इस मामले में टिन्नू यादव और अनुकल्प मिश्रा समेत 8 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। एफआईआर में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के नाम शामिल नहीं। ALSO READ: Ram mandir donation row : राम मंदिर चढ़ावा विवाद में FIR दर्ज, 8 नामजद आरोपी, SIT रिपोर्ट के बाद बड़ा एक्शन, चंपत राय का नाम नहीं

 

नहीं बिक सकेंगी कैंसर की नकली दवाएं

केंद्र सरकार ने नकली और घटिया दवाओं पर अंकुश लगाने के लिए क्यूआर कोड आधारित प्रणाली का दायरा बढ़ा दिया है। कैंसर की दवाओं की पैकेजिंग पर क्यूआर कोड होने से प्रामाणिकता की जांच और सत्यापन आसान होगा। इससे लोग यह जान सकेंगे कि जिस दवा का सेवन कर रहे हैं, वह घटिया या नकली तो नहीं है।

 

भारत ने बांग्लादेश को हराया

शेफाली वर्मा की आतिशी अर्धशतकीय पारी की बदौलत भारत ने महिला टी-20 विश्व कप में बांग्लादेश को 5 विकेट से हराया। बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने 137 रनों का लक्ष्य रखा। टीम इंडिया ने 16.5 ओवर में आसानी से इसे हासिल कर लिया। अंतिम चार में जगह बनाने के लिए भारत को 28 जून को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाला मुकाबला जीतना होगा।  ALSO READ: शेफाली वर्मा की आतिशी पारी ने भारत को दिलाई बांग्लादेश पर 5 विकेट से जीत

 

इक्वाडोर और आइवरी कोस्ट नॉकआउट दौर में

इक्वाडोर ने जर्मनी को 2-1 से हराकर फीफा विश्व कप में अंतिम-32 में जगह बनाई। आइवरी कोस्ट भी पहली बार नॉकआउट चरण में पहुंचा। नीदरलैंड्स ने ट्यूनिशिया को 3-1 से हराया तो जापान और स्वीडन का मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ।

edited by : Nrapendra Gupta

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में FIR दर्ज, 8 नामजद आरोपी, SIT रिपोर्ट के बाद बड़ा एक्शन, चंपत राय का नाम नहीं

Ayodhya Ram Mandir

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे के कथित गबन एवं अनियमितताओं के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी है। पुलिस ने इस मामले में 8 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि कई अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में टिन्नू यादव और अनुकल्प मिश्रा समेत कुल आठ आरोपियों के नाम शामिल हैं। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। 

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उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर, BNS की धारा 306, 316 (5), 317 (4), 317 (5), 61 और 3 (5) के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई।

 

आरोपियों पर आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।  बताया जा रहा है कि विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने यह कार्रवाई की है। 

 

फिलहाल एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार, जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। अब सभी की नजरें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। राज्य सरकार ने 13 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया था। ट्रस्ट ने राम मंदिर में प्राप्त दान राशि के कथित दुरुपयोग और गबन के आरोपों की जांच की मांग की थी।

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इस मामले ने राजनीतिक रंग तब ले लिया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को दावा किया था कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपए के दान का हिसाब स्पष्ट नहीं है। उन्होंने मामले का न्यायिक संज्ञान लेने की मांग भी की थी।

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इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। Edited by : Sudhir Sharma

लोकतंत्र सेनानियों को प्रतिवर्ष मिलेगी 5 लाख की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा : योगी आदित्यनाथ

Loktantra Senani to receive cashless health benefits worth Rs 5 lakh annually

– लोकतंत्र सेनानियों का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराने की बनेगी व्यवस्था

– लोकतंत्र सेनानियों ने मंच से सुनाई आपबीती, जेल में नाखून उखाड़े, जबरन नसबंदी की गई

– मुख्यमंत्री योगी ने कहा- लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान कर गौरव की अनुभूति

Chief Minister Yogi Adityanath : आपातकाल की 51वीं बरसी 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र को बचाने वाले लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश सरकार लोकतंत्र सेनानियों के लिए जल्द ही 5 लाख रुपए प्रतिवर्ष कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के स्वस्थ व दीर्घायु होने की कामना करते हुए कहा कि उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की व्यवस्था बनाई जा रही है।

 

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करते हुए गौरव की अनुभूति हुई। उनकी अपनी पीड़ा है। उन्होंने लोकतंत्र को बचाने के लिए जेल की यातनाएं सहीं। इसलिए प्रदेश में जब लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित सरकार आई तो लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान के लिए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। प्रदेश में 3,780 लोकतंत्र सेनानी तथा 1,461 उनके आश्रित हैं।

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सरकार वर्ष 2018 से लोकतंत्र सेनानियों व मरणोपरांत उनके आश्रितों को प्रत्येक माह 20 हजार रूपये की सम्मान राशि दे रही है। साथ ही लोकतंत्र सेनानी या उनके उत्तराधिकारी (पति अथवा पत्नी) को एक सहायक के साथ पूरे प्रदेश में परिवहन निगम की सभी श्रेणी की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की गई है। लोकतंत्र सेनानियों को राजकीय चिकित्सालयों में निशुल्क चिकित्सा भी उपलब्ध कराई जा रही है। 

 

पांच लाख की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा जल्द

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब सरकार लोकतंत्र सेनानियों को कैशलेस 5 लाख रुपए प्रतिवर्ष स्वास्थ्य सुविधा भी उलब्ध कराने जा रही है। इसके साथ ही लोकतंत्र सेनानी के दिवंगत होने पर उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की व्यवस्था सरकार द्वारा बनाई जा रही है। आने वाली पीढ़ी हमेशा इस बात को ध्यान में रखेगी कि जो भी देश व लोकतंत्र के हित में काम करेगा, सरकारें उन्हें सम्मानित करेंगी। 

 

मुख्यमंत्री योगी ने किया लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। इसमें 6 महीने तक जेल में यातनाएं झेलने वाले लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित, गया प्रसाद सोनकर, राम सिंह कुशवाहा (हरदोई), विद्या राम वर्मा (हरदोई), अजय सिंह (बाराबंकी) व ओम प्रकाश गुप्ता (सीतापुर) शामिल रहे। 

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लोकतंत्र सेनानियों ने सुनाई आपबीती

इस दौरान लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित ने बताया कि आपातकाल लगाने का कोई कारण नहीं था। कांग्रेस बस किसी भी तरह सत्ता में रहना चाहती थी। आपातकाल के दौरान हमारी गिरफ्तारी के समय कपड़े फाड़ दिए गए। हम लोगों ने इसके बाद भी सत्याग्रह में भाग लिया, तब बहुत ज्यादा अत्याचार किए गए।

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लोकतंत्र सेनानी विद्या राम वर्मा ने बताया कि इतने साल बीत जाने के बाद भी आपातकाल के बारे में सोचता हूं तो मन भावुक हो जाता है। सीपीआई को छोड़कर बाकी सभी दलों के साथ अत्याचार किया गया। मेरा घर रात में घेरा गया, जैसे किसी डकैत को पकड़ने आए हों। जेल में कैदियों के नाखून उखाड़े गए और जबरन नसबंदी की गई। उस समय की सरकार ने कैसे अत्याचार किए गए, आज कोई अहसास भी नहीं कर सकता।
Edited By : Chetan Gour

योगी सरकार की छात्रवृत्ति योजना से लाखों छात्रों को मिला संबल, प्रयागराज सबसे आगे

Yogi Adityanath

Yogi Government Scholarship Scheme: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार प्रभावी कार्य कर रही है। खासतौर पर पिछड़े वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में योगी सरकार की छात्रवृत्ति योजनाएं बेहद कारगर साबित हुई हैं। सरकार की पिछड़ा वर्ग दशमोत्तर छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति योजना लाखों छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। लाभार्थियों की संख्या के मामले में प्रयागराज जिला पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है। 

 

प्रयागराज में सबसे ज्यादा 1.69 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मजबूत आधार दे रही है। योगी सरकार की इस पहल से लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिला है और छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का मार्ग आसान हुआ है।

गाजीपुर में 1.34 लाख से ज्यादा छात्रों को मिली छात्रवृत्ति

वर्ष 2025-26 में पिछड़ा वर्ग दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत करीब 27 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई है। प्रयागराज में 169489 छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। प्रयागराज के बाद गाजीपुर जिला दूसरे स्थान पर रहा है, जहां 1.34 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई है। वहीं आजमगढ़ में 1.19 लाख से ज्यादा छात्रों को लाभ मिला है। इसी तरह जौनपुर में 1.15 लाख से अधिक छात्रों को योजना का लाभ मिला है, जबकि वाराणसी में 88,859 छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में छात्रवृत्ति योजना व्यापक स्तर पर प्रभाव छोड़ रही है।

छात्र-छात्राओं के साथ ट्रांसजेंडरों को भी मिली सहायता

छात्रवृत्ति वितरण के आंकड़ों पर नजर डालें तो कक्षा 11-12 में 4,72,764 छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। जबकि 3,80,667 छात्रों और 2 ट्रांसजेंडरों को भी छात्रवृत्ति दी गई है। वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 10,01,084 छात्राओं, 9,31,906 छात्रों और 8 ट्रांसजेंडरों को छात्रवृत्ति का लाभ दिया गया है। दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना केवल इंटरमीडिएट स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा और प्रोफेशनल कोर्स तक को कवर करती है। कक्षा 11 और 12 के छात्रों के साथ-साथ बीटेक, एमबीबीएस, एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स तथा बीए, बीएससी, बीकॉम, आईटीआई और पॉलिटेक्निक जैसे पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों को भी इसका लाभ दिया जा रहा है।

छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया

इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देना है। जिन छात्रों के अभिभावकों की वार्षिक आय 2 लाख रुपये या उससे कम है, उन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में योगी सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सरल बनाया है। छात्र छात्रवृत्ति प्रबंधन प्रणाली की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करते हैं, जिससे प्रक्रिया तेज और आसान हुई है। स्वीकृति के बाद छात्रवृत्ति की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है।

छात्रवृत्ति योजना का लाभ बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंच रहा

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी छात्र आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और अन्य पात्र वर्गों तक पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मजबूत आर्थिक संबल प्रदान करना है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

LPG को लेकर आई बड़ी खुशखबरी, सरकार ने दी बड़ी राहत

पश्चिम एशिया में हालिया तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच वाणिज्यिक (कमर्शियल) एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति पर लगाई गई सभी अस्थायी पाबंदियां केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से हटा दी हैं।   प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हालात की समीक्षा करने के बाद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सूचित किया है कि अब कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री और आपूर्ति पर लगाए गए प्रतिबंध समाप्त किए जा रहे हैं।

संकट के समय घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम यानी Essential Commodities Act के तहत आदेश जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि C3-C4 स्ट्रीम्स का इस्तेमाल सिर्फ एलपीजी बनाने में होगा। इन्हें पेट्रोकेमिकल और दूसरे काम से हटाकर एलपीजी में लगा दिया गया था। सरकार की ओर से पाबंदियां हटाने के बाद अब बल्क एलपीजी की सप्लाई भी फिर से शुरू कर दी गई है, जिसे संकट की शुरुआत में रोक दिया गया था। इसे संकट से पहले की खपत के 50 फीसदी तक खोल दिया गया है। सरकार के इस फैसले से कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कंज्यूमर्स को बड़ी राहत मिलेगी।

 

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति को संकट से पहले के स्तर पर बहाल करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही बल्क एलपीजी की आपूर्ति भी पूर्व-संकट खपत स्तर के 50 प्रतिशत तक बहाल की जा सकती है।

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पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे पत्र में कहा है कि हालिया पश्चिम एशिया संकट के दौरान लागू की गई अस्थायी एलपीजी आपूर्ति पाबंदियों की समीक्षा के बाद सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सप्लाई को सामान्य स्तर पर बहाल करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि जिन उपभोक्ताओं के पास पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, उन्हें दीर्घकालिक समाधान के रूप में PNG का उपयोग जारी रखना चाहिए या उस पर स्थानांतरित होना चाहिए।

 

इसके अलावा तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिए गए हैं कि सभी वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं का डेटा उनके डेटाबेस में दर्ज किया जाए। साथ ही तीनों तेल विपणन कंपनियों के बीच सेक्टरवार एकीकृत डेटाबेस बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो कमर्शियल या बल्क उपभोक्ता पहले ही PNG पर शिफ्ट हो चुके हैं, वे आगे भी PNG का ही उपयोग जारी रखेंगे। Edited by : Sudhir Sharma

Passport : 1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा! केंद्र सरकार ने बढ़ाई फीस, जानिए नई दरें

केंद्र सरकार ने पासपोर्ट और अन्य यात्रा दस्तावेजों से जुड़ी सेवाओं की फीस में बढ़ोतरी कर दी है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 जारी करते हुए नई शुल्क दरों की अधिसूचना जारी की। नई फीस 1 जुलाई 2026 से लागू होगी।

 

नई व्यवस्था के तहत 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के आवेदकों के लिए 36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट के नए आवेदन या री-इश्यू की फीस बढ़ाकर 2,500 रुपए कर दी गई है। वहीं, इसी श्रेणी में तत्काल (Tatkal) सेवा के लिए कुल शुल्क 5,000 रुपए निर्धारित किया गया है। इसी तरह 60 पेज वाले पासपोर्ट के लिए सामान्य शुल्क 3,500 रुपए और तत्काल शुल्क 6,000 रुपए होगा।

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पहले कितनी थी फीस?

 

अब तक 36 पेज वाले पासपोर्ट के लिए 1,500 रुपए और 60 पेज वाले पासपोर्ट के लिए 2,000 रुपए शुल्क लिया जाता था। नई दरों के लागू होने के बाद आवेदकों को अधिक शुल्क चुकाना होगा।

 

बच्चों के पासपोर्ट की फीस भी बढ़ी

 

18 वर्ष से कम आयु के आवेदकों के लिए नए पासपोर्ट की फीस 1,000 रुपए से बढ़ाकर 1,750 रुपए कर दी गई है। इस श्रेणी में तत्काल सेवा के लिए शुल्क 4,250 रुपए तय किया गया है।

 

खोए या क्षतिग्रस्त पासपोर्ट पर ज्यादा खर्च

 

यदि 36 पेज का पासपोर्ट खो जाता है या क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो उसके बदले नया पासपोर्ट बनवाने के लिए सामान्य श्रेणी में 5,000 रुपए और तत्काल श्रेणी में 7,500 रुपए देने होंगे। वहीं, 60 पेज वाले पासपोर्ट के प्रतिस्थापन के लिए सामान्य शुल्क 6,000 रुपए और तत्काल शुल्क 8,500 रुपए निर्धारित किया गया है।

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अन्य सेवाओं की फीस भी बदली

 

नई अधिसूचना के अनुसार:

 

  • पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC) के लिए 750 रुपए शुल्क।
  • सरेंडर सर्टिफिकेट के लिए 750 रुपए शुल्क।
  • ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम वेरिफिकेशन के लिए 750 रुपए शुल्क।
  • पासपोर्ट आधारित अन्य प्रमाणपत्रों के लिए भी 750 रुपए शुल्क।
  • सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी के लिए 1,000 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है।
  • भारत में जारी होने वाला इमरजेंसी सर्टिफिकेट पहले की तरह निःशुल्क रहेगा।
  • पासपोर्ट की वैधता में कोई बदलाव नहीं

 

सरकार ने पासपोर्ट की वैधता अवधि में कोई बदलाव नहीं किया है। वयस्कों के लिए पासपोर्ट की वैधता 10 वर्ष रहेगी। वहीं, नाबालिगों के लिए पासपोर्ट पांच वर्ष या 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, मान्य रहेगा।

 

वरिष्ठ नागरिकों और छोटे बच्चों को राहत

 

सरकार ने 8 वर्ष तक के बच्चों और 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए पासपोर्ट शुल्क पर मिलने वाली 10 प्रतिशत छूट को बरकरार रखा है। नई फीस लागू होने के बाद भी पात्र आवेदकों को यह रियायत मिलती रहेगी। Edited by : Sudhir Sharma