लखनऊ अग्निकांड के बाद परिवहन विभाग अलर्ट, बसों में फायर सेफ्टी की होगी सघन जांच

Yogi adityanath

major move by the Yogi government: लखनऊ अलीगंज अग्निकांड के बाद योगी सरकार लोगों को सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हो गई है। विभिन्न विभागों ने ऐसे हादसों को रोकने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने यात्री सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश के निर्देश पर प्रदेशभर में अगले 30 दिनों तक विशेष अभियान चलाकर स्लीपर बसों, स्कूल बसों, स्टेज कैरिज बसों और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों में अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और उनकी कार्यशीलता की सघन जांच की जाएगी।

 

परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि लखनऊ अग्निकांड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उनकी प्रभावशीलता जनजीवन की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी संभागीय और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

 

अभियान के तहत फिटनेस जांच के समय वाहनों में लगे अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता, क्षमता, वैधता, कार्यशीलता तथा उनके उचित स्थान पर स्थापित होने की विशेष रूप से जांच की जाएगी। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि अग्निशमन यंत्र निर्धारित अवधि के भीतर रिफिल अथवा सर्विस किए गए हों और उनकी वैधता समाप्त न हुई हो।

 

फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने को लेकर शर्तें

निर्देशों के अनुसार जिन वाहनों में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं पाए जाएंगे, अथवा उपकरण कार्यशील स्थिति में नहीं होंगे या उनकी वैधता समाप्त हो चुकी होगी, ऐसे वाहनों को कमियां दूर होने तक फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा। साथ ही आवश्यक प्रवर्तन कार्रवाई भी की जाएगी।

 

विशेष अभियान के दौरान प्रवर्तन अधिकारी बस अड्डों, प्रमुख मार्गों, टोल प्लाजा, जनपद सीमाओं और अन्य उपयुक्त स्थानों पर वाहनों की सघन जांच करेंगे। स्लीपर बसों की जांच में आपातकालीन निकास, हैमर, विद्युत वायरिंग और अन्य सुरक्षा उपकरणों की भी पड़ताल की जाएगी। वहीं स्कूल बसों में अग्निशमन यंत्रों के साथ अन्य निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुपालन का सत्यापन भी किया जाएगा।

जांच अभियान की मुख्यालय को देनी होगी रिपोर्ट

परिवहन विभाग ने वाहन स्वामियों, बस संचालकों, परिवहन कंपनियों और विद्यालय प्रबंधन को अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक करने, अग्निशमन यंत्रों के नियमित अनुरक्षण और समयबद्ध परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह 30 दिवसीय विशेष अभियान 23 जुलाई 2026 तक संचालित किया जाएगा। सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को अभियान के दौरान की गई जांच और प्रवर्तन कार्रवाई का विस्तृत विवरण परिवहन मुख्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

कैफे में रची गई साजिश, CCTV से खुली पोल, एक बॉलीवुड फिल्म की तर्ज हुआ केतन का मर्डर

Pune Ketan Agarwal murder case

Pune Ketan Agarwal murder case: पुणे के युवा करोड़पति बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि एक बेहद खौफनाक और सोची-समझी साजिश थी। पुलिस की तफ्तीश में अब एक ऐसा सीसीटीवी (CCTV) फुटेज हाथ लगा है, जिसने इस मर्डर मिस्ट्री की पूरी पोल खोलकर रख दी है। फिल्म 'हसीन दिलरुबा' की तर्ज पर रची गई इस खूनी स्क्रिप्ट में केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने मौत से ठीक एक दिन पहले एक कैफे में बैठकर मर्डर का फाइनल प्लान तैयार किया था।

 

दरअसल, रियल एस्टेट कारोबारी केतन विशाल अग्रवाल हत्याकांड में हर दिन ऐसे खुलासे हो रहे हैं जो किसी बॉलीवुड सस्पेंस थ्रिलर फिल्म को भी पीछे छोड़ दें। पुलिस की जांच अब उस सीसीटीवी फुटेज तक पहुंच गई है, जो केतन की हत्या से ठीक एक दिन पहले का है। इस फुटेज ने आरोपियों के उस झूठ को बेनकाब कर दिया है जिसमें वे इसे एक 'हादसा' बताने की कोशिश कर रहे थे। ALSO READ: हत्या के पहले किसने गायब किया केतन का पासपोर्ट, 17 करोड़ में बुक किया था महल, पिता बोले सिया से क्यों मारा बेटे को?

थर्ड वेव कैफे का वो 'सीक्रेट प्लान'

सामने आया सीसीटीवी फुटेज पुणे के 'थर्ड वेव' कैफे का है। हत्या से ठीक एक दिन पहले सिया गोयल (जींस-टॉप में) और उसका प्रेमी चेतन चौधरी (टी-शर्ट और जींस में) इस कैफे में दाखिल होते हैं। दोनों ने कैफे के अंदर भीड़भाड़ वाले हिस्से को छोड़कर एक कोने वाली खुली जगह चुनी। वीडियो में साफ दिख रहा है कि दोनों ने अपनी कुर्सियां बेहद करीब खींच रखी थीं ताकि उनकी फुसफुसाहट कोई और न सुन सके।

 

करीब एक घंटे तक चली इस सीक्रेट मीटिंग के दौरान दोनों के हावभाव बेहद गंभीर और संदिग्ध थे। इसी बीच सिया के पास एक फोन कॉल भी आता है, जिसके बाद वह और तेजी से चेतन के साथ चर्चा में मशगूल हो जाती है। पुलिस का दावा है कि इसी मेज पर बैठकर दोनों ने केतन को रास्ते से हटाने और अगले दिन लोहागढ़ किले से धक्का देने का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया था। ALSO READ: सिया गोयल का वो खौफनाक कबूलनामा और बेकरी-ड्राई फ्रूट्स वाले इश्क की इनसाइड स्टोरी!

नेटफ्लिक्स की 'हसीन दिलरुबा' जैसा मर्डर प्लॉट

केतन अग्रवाल की हत्या का यह खौफनाक तरीका साल 2021 में आई बॉलीवुड फिल्म 'हसीन दिलरुबा' की याद दिलाता है। उस फिल्म में भी प्यार और धोखे के बीच एक पार्टनर को रास्ते से हटाने के लिए ऐसी ही उलझी हुई मर्डर मिस्ट्री बुनी गई थी। ठीक उसी तर्ज पर, 18 जून को लोहागढ़ किले में ट्रेकिंग के बहाने केतन को ले जाया गया और वहां 400 फीट गहरी खाई में धक्का देकर उसकी जान ले ली गई।

करोड़ों की दौलत पर भारी पड़ा 'दिवाली का प्यार'

26 वर्षीय केतन अग्रवाल करोड़ों की संपत्ति के मालिक थे। इसी साल नवंबर में उनकी शादी 20 वर्षीय सिया गोयल से होने वाली थी, जिनकी सगाई फरवरी में धूमधाम से हुई थी। लेकिन सिया इस शादी के लिए तैयार नहीं थी। परिवार के दबाव में उसने हां तो कह दिया था, लेकिन उसका दिल अपने प्रेमी चेतन चौधरी के लिए धड़क रहा था, जिससे उसकी मुलाकात पिछले साल दिवाली पर हुई थी। सिया केतन की दौलत छोड़ चेतन के साथ जाना चाहती थी। ALSO READ: कौन है सिया का प्रेमी चेतन चौधरी, 6 महीनों में 2004 कॉल, 238 घंटे बातचीत और मर्डर के 3 प्लान

 

पुलिस पूछताछ में जब आरोपी चेतन से पूछा गया कि वह सिया को लेकर भाग क्यों नहीं गया? तो उसने बेहद हैरान करने वाला जवाब दिया। चेतन ने कहा कि अगर हम भाग जाते, तो सिया के परिवार की समाज में बदनामी होती और उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती। यानी परिवार की 'इज्जत' बचाने के लिए उन्होंने केतन की जान लेना बेहतर समझा।

क्या कहा चेतन के पिता ने?

इस बीच मामले में ट्विस्ट तब आया जब आरोपी चेतन चौधरी के पिता बाबूलाल चौधरी अपने बेटे के बचाव में उतर आए। बाबूलाल ने दावा किया कि उनका बेटा बेगुनाह है और उसे फंसाया जा रहा है। उनके मुताबिक, चेतन 18 जून को घर से सिर्फ यह कहकर निकला था कि वह एक 'मीटिंग' में जा रहा है। चेतन के पिता ने कहा कि हम सिया को नहीं जानते, उसका नाम भी एक दिन पहले सुना है। घटना के वक्त मेरा बेटा दूर खड़ा था, जबकि जब केतन गिरा तो सिया उसके बिल्कुल पास खड़ी थी।

 

पिता के दावों के उलट, पुलिस के पास मौजूद सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स दोनों आरोपियों की संलिप्तता की गवाही दे रहे हैं। पुलिस ने मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है और कोर्ट से रिमांड लेकर आगे की कड़ी पूछताछ कर रही है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

तामेश्वरनाथ धाम बनेगा भव्य कॉरिडोर, सीएम योगी ने 475 करोड़ की 139 परियोजनाओं की दी सौगात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाबा तामेश्वरनाथ धाम, बाबा बैजूनाथ धाम सहित क्षेत्र के धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण केवल आस्था का सम्मान नहीं, बल्कि उन पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता है जिन्होंने इन धरोहरों की स्थापना की थी। सरकार बाबा तामेश्वरनाथ धाम को नई पहचान देने के लिए भव्य कॉरिडोर निर्माण की योजना पर कार्य कर रही है। कॉरिडोर बनने से क्षेत्र का विकास तीव्र गति से होगा और इसे काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या धाम तथा मां विंध्यवासिनी धाम की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। 

 

मुख्यमंत्री गुरुवार को कुआनो नदी तट स्थित श्री बैजूनाथ धाम में संत कबीर नगर व गोरखपुर की 475 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 139 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण/स्वीकृति पत्र भी वितरित किए। इन परियोजनाओं में धनघटा विधानसभा क्षेत्र के लिए लगभग 225 करोड़ रुपये तथा खजनी विधानसभा क्षेत्र के लिए लगभग 251 करोड़ रुपये के विकास कार्य शामिल हैं। 

 

6.18 लाख नए ग्रामीण परिवारों को आवास स्वीकृत

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में आने से पहले उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान उत्तर प्रदेश के 6 लाख 18 हजार नए पात्र परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास स्वीकृत किए गए। डबल इंजन सरकार का यह निर्णय गरीबों को पक्की छत उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम है।

 

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे ने बदली तस्वीर

सीएम ने कहा कि कभी सबसे पिछड़े क्षेत्रों में गिने जाने वाले धनघटा और खजनी आज पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से राजधानी लखनऊ से सीधे जुड़ रहे हैं। पहले जहां इन क्षेत्रों को उपेक्षित माना जाता था, अब ये विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन चुके हैं। बेलघाट, खजनी और धनघटा के लोगों को अब लखनऊ पहुंचने के लिए लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ता, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के जरिए दो घंटे में राजधानी तक पहुंचना संभव है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय एवं ग्रामीण सड़कों का विस्तार, नए पुलों और संपर्क मार्गों का निर्माण क्षेत्र की तस्वीर बदल रहा है। धुरियापार क्षेत्र में ग्रेटर गीडा की स्थापना से नए उद्योग लग रहे हैं और धनघटा क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। मगहर में संत कबीर एकेडमी, ऑडिटोरियम और महापरिनिर्वाण स्थली के विकास के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार से हजारों युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

 

बखिरा झील बनेगी इको-टूरिज्म केंद्र

मुख्यमंत्री ने मेहन्दावल विधानसभा क्षेत्र की बखिरा झील का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अब रामसर साइट और इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। सरकार शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े कार्य कर रही है। जहां उच्च शिक्षण संस्थान नहीं थे, वहां डिग्री कॉलेज, पॉलिटेक्निक व आईटीआई खोले जा रहे हैं। ऑपरेशन कायाकल्प, प्रोजेक्ट अलंकार, अटल आवासीय विद्यालय और मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय जैसी योजनाओं के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

 

गरीबों, किसानों और युवाओं को अधिकार दिलाने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार का लक्ष्य आने वाली पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाना है। डबल इंजन सरकार गरीब, किसान, नौजवान व महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। आज गरीबों को मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल रहा है।

 

आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय

मुख्यमंत्री ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटा, नागरिक अधिकारों को निलंबित किया और विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। कांग्रेस व समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो दल लोकतंत्र व संविधान की बात करते हैं, वही संविधान के सबसे बड़े अपमान के लिए जिम्मेदार रहे हैं।

 

उत्तर प्रदेश बना देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश पहचान का मोहताज नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुका है। गांव, गरीब, किसान, नौजवान और महिलाओं को उनका अधिकार देने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने किया है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से विकास व सुशासन की इस यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के साथ मिलकर क्षेत्र व प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

 

2024 के चुनाव में विपक्ष ने किया गुमराह

विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस व समाजवादी पार्टी जनता की आंख में धूल झोंकने का काम करती हैं। जब देश लोकतंत्र की हत्या के 50वें वर्ष में प्रवेश कर रहा था, तब ये दोनों दल देश की जनता के साथ झूठे वायदे कर रहे थे। इन लोगों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जनता जनार्दन को गुमराह किया था। ये लोग संविधान की प्रति लेकर घूम रहे थे। राहुल गांधी व अखिलेश यादव किस मुंह से जनता के बीच जाकर लोकतंत्र की दुहाई देते हैं, किस मुंह से संविधान की प्रति लेकर घूमते हैं?  संविधान का जितना बड़ा अपमान कांग्रेस व सपा ने किया, किसी ने भी नहीं किया। डबल इंजन सरकार ने बाबा साहेब का सपना साकार करने, संविधान, विरासत व समाज के हर तबके को सम्मान देने का काम किया है।

 

इन लाभार्थियों को सीएम योगी ने दिए स्वीकृति पत्र 

 

राधिका (मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना)

 

शबनम कुमारी (मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना)

रीता उपाध्याय (स्वंय सहायता समूह, 5,71,50,000 रुपये का चेक)

अभिज्ञान राय (मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास, 5 लाख का चेक) 

राम शरण विश्वकर्मा (श्रम सम्मान योजना से लाभान्वित) 

यशुवर्धन पांडेय (अनुदान पत्र) 

 

इस अवसर पर मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, डुमरियागंज के सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक गणेश चंद्र चौहान, विधायक श्रीराम चौहान, विधायक अंकुर राज तिवारी, विधायक अनिल त्रिपाठी, विधान परिषद सदस्य संतोष सिंह, सुभाष यदुवंशी, जिला पंचायत अध्यक्ष बलराम यादव, पूर्व सांसद अष्टभुजा प्रसाद शुक्ल, पूर्व सांसद इंद्रजीत मिश्र, भाजपा जिलाध्यक्ष नीतू सिंह, भाजपा गोरखपुर जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, पूर्व विधायक राकेश सिंह बघेल, दिग्विजय नारायण चतुर्वेदी, संत प्रसाद, जिला प्रभारी अजय सिंह गौतम, जिला महामंत्री गणेश पाण्डेय आदि मौजूद रहे।

बुनियादी शिक्षा को नई गति, योगी सरकार ने एआरपी व्यवस्था का किया पुनर्गठन

Nipun Bharat UP

Restructuring of the ARP System: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बुनियादी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार को नई गति देने के लिए अकादमिक नेतृत्व व्यवस्था को और मजबूत बना रही है। इसी क्रम में समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित ब्लॉक संसाधन केंद्रों (बीआरसी) की अकादमिक व्यवस्था को नई संरचना देते हुए अकादमिक रिसोर्स पर्सन्स (एआरपी) प्रणाली का व्यापक पुनर्गठन किया गया है। अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन पार्थ सारथी सेन शर्मा के हस्ताक्षर से जारी शासनादेश में एआरपी के चयन, कार्य दायित्व, प्रशिक्षण, मूल्यांकन और जवाबदेही संबंधी विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।

 

शासनादेश के अनुपालन में स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को जुलाई तक रिक्त एआरपी पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि नए शैक्षणिक सत्र में ब्लॉक स्तर का अकादमिक सहयोग तंत्र पूरी क्षमता के साथ कार्य कर सके।

विद्यालयों तक पहुंचेगा मजबूत अकादमिक सहयोग तंत्र

नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक में पांच चयनित एआरपी और एक नामित डायट मेंटर मिलकर शैक्षणिक सहायता टीम का गठन करेंगे। यह अकादमिक टीम विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने, शिक्षकों को सतत शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने, कक्षा-कक्ष की चुनौतियों के समाधान तथा विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सुधार की दिशा में कार्य करेगी।

पारदर्शी और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया

एआरपी का चयन पूरी तरह मेरिट आधारित होगा। नई व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक योग्य और अनुभवी शिक्षकों को इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक दायित्व से जोड़ा जा सके। अब सेवानिवृत्ति में केवल पांच वर्ष शेष रहने वाले शिक्षक भी एआरपी पद के लिए पात्र होंगे, जबकि पहले यह सीमा 10 वर्ष थी। अब किसी भी विषय के परिषदीय शिक्षक आवेदन कर सकेंगे, जबकि पहले केवल चयनित विषयों के शिक्षकों को ही पात्रता प्राप्त थी। चयन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए माइक्रो टीचिंग का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। अब चयन केवल लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होगा। जिला स्तर पर गठित चयन समिति पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगी।

निपुण भारत मिशन को मिलेगा जमीनी आधार

निपुण भारत मिशन को बालवाटिका से कक्षा 5 तक विस्तारित करने की दिशा में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगी। एआरपी विद्यालयों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), गतिविधि आधारित शिक्षण, टीएलएम के प्रभावी उपयोग, प्रिंट-रिच वातावरण तथा बेहतर कक्षा प्रबंधन को बढ़ावा देंगे। साथ ही वे शिक्षकों को नवीन शिक्षण पद्धतियों और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग में भी सहयोग करेंगे, जिससे ब्लॉक स्तर पर सतत शैक्षणिक सहयोग की मजबूत व्यवस्था विकसित होगी।

प्रदर्शन आधारित जवाबदेही से बढ़ेगी गुणवत्ता

नई व्यवस्था में एआरपी का कार्यकाल प्रदर्शन आधारित होगा। नियमित मूल्यांकन के आधार पर ही कार्यकाल का विस्तार किया जाएगा। इससे शैक्षणिक नेतृत्व में जवाबदेही, प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा। शासनादेश में एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स के लिए नियमित प्रशिक्षण तथा क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों का भी प्रावधान किया गया है।

शिक्षा सुधारों को मिलेगा नया बल

प्रदेश में निपुण भारत मिशन, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, बालवाटिका, विद्यालय कायाकल्प और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। नई एआरपी व्यवस्था इन सभी प्रयासों को विद्यालय स्तर तक सशक्त रूप से पहुंचाने का माध्यम बनेगी। ब्लॉक स्तर पर मजबूत अकादमिक सहयोग तंत्र विकसित होने से शिक्षकों को निरंतर मार्गदर्शन मिलेगा, अधिगम परिणामों में सुधार आएगा और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

Raja Bhaiya : बंदर की बरसी और मुहर्रम, कुंडा विधायक राजा भैया और उनके पिता क्यों हुए हाउस अरेस्ट? किले के बाहर पुलिस फोर्स तैनात, पढ़िए क्या है पूरा मामला

raja bhiyya

कुंडा विधायक राजा भैया और उनके पिता समेत 13 लोगों को पुलिस-प्रशासन ने हाउसअरेस्ट किया गया है। राजा भैया के किले के बाहर भारी संख्या में पुलिस फोर्स को भी तैनात कर दिया गया है। गुरुवार सुबह 5 बजे से हाउस अरेस्ट किए गए विधायक राजा भैया और पिता उदय प्रताप शुक्रवार रात नौ बजे तक कुंडा कोतवाली के भदरी महल में रहेंगे। बंदर की बरसी पर मोहर्रम के दिन हनुमान मंदिर पर तजिए के रास्ते में राजा उदय प्रताप सिंह पूजा पाठ सुंदरकांड और भंडारा करते है। 

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पिछले कई वर्षों से राजा भैया के पिता को हाउस अरेस्ट कर लिया जाता है मंदिर के रास्ते सड़क से ताजिया गुजरता है। पुलिस प्रशासन ने भदरी महल में हाउस अरेस्ट का नोटिस चस्पा कर दिया है। मीडिया खबरों के मुताबिक मोहर्रम जुलूस के दिन ताजिए के रास्ते में हनुमान मंदिर पर भंडारे का पुलिस प्रशासन इजाजत नहीं देता है।  

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क्या है पूरा मामला

2012 में एक बंदर की मौत के बाद ग्रामीणों ने सड़क किनारे एक हनुमान मंदिर का निर्माण किया था। राजा उदय प्रताप सिंह इसी मंदिर में हर साल मोर्हरम के दिन हनुमान पाठ और भंडारे का आयोजन करते हैं।

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ऐसे में कई बार तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हो चुकी है। 2013-2014 में जुलूस और भंडारा साथ आयोजित होने पर स्थित बिगड़ गई थी। इसी को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। 

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2015 में भी मोहर्रम के दिन भंडारे का कार्यक्रम का आयोजन कराया गया था, जिसको लेकर मोहर्रम जुलूस के दौरान बवाल हो गया था। इसी को देखते हुए राजा भैया के पिता और और विधायक राजा भैया को हर साल मोहर्रम पर नजरबंद कर दिया जाता है। इस दौरान पूरे गांव में ही भारी पुलिस फोर्स तैनात रहती है। Edited by : Sudhir Sharma

बागवानी क्षेत्र को मिलेगी नई उड़ान, लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित करेगी भारत सरकार

Government of India will set up Clean Plant Center in Lucknow

– केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अगले चरण के लिए 6.18 लाख पात्र लाभार्थियों की सूची मुख्यमंत्री को सौंपी

– केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की घोषणा

– कृषि क्षेत्र में नवाचार, विविधीकरण और तकनीक आधारित विकास को देंगे नई गति : मुख्यमंत्री योगी

– समृद्ध उत्तर प्रदेश से ही विकसित भारत का संकल्प होगा साकार : शिवराज सिंह चौहान

– चना, मसूर एवं सरसों खरीद अवधि बढ़ाने की मंजूरी : शिवराज सिंह चौहान

Uttar Pradesh News : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से किसानों को गुणवत्तायुक्त एवं रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उद्यानिकी क्षेत्र का विस्तार होगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित होगी।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को लखनऊ स्थित योजना भवन के वैचारिकी सभागार में उत्तर प्रदेश के कृषि रोडमैप, कृषि क्षेत्र की विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं तथा ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की संयुक्त समीक्षा की। बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

 

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए समृद्ध उत्तर प्रदेश सबसे अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश जितनी तेजी से कृषि, ग्रामीण विकास और किसानों की समृद्धि के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा, विकसित भारत का लक्ष्य उतनी ही शीघ्रता से साकार होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार आपसी समन्वय तथा साझा प्रयासों से इस राष्ट्रीय संकल्प को अवश्य पूरा करेंगी।

 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। कृषि, ग्रामीण विकास, आधारभूत संरचना तथा जनकल्याण के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है, लेकिन बदलते समय की चुनौतियों के बीच विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कृषि क्षेत्र में गंभीर मंथन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से यह समीक्षा बैठक आयोजित की गई है, ताकि कृषि को अधिक उत्पादक, लाभकारी, जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ बनाने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके।

 

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चना, मसूर एवं सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने की मंजूरी भी प्रदान की। उन्होंने इस संबंध में स्वीकृति का आशय पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा। मुख्यमंत्री ने इसके लिए केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के अधिकाधिक किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिलेगा और उनके हितों का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित होगा। 

 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के आगामी चरण के लिए पात्र 6,18,482 लाभार्थियों की सूची मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपते हुए प्रदेश सरकार को बधाई दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में गरीब कल्याण की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है।

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पात्रता के आधार पर प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने निर्देश दिए कि योजना के अगले चरण में भी सभी पात्र लाभार्थियों को पूर्ण पारदर्शिता एवं समयबद्ध तरीके से लाभान्वित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लखनऊ आगमन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत नए आवासों की स्वीकृति, चना, मसूर एवं सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने तथा उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाने की स्वीकृति के लिए भी केंद्रीय मंत्री के प्रति आभार प्रकट किया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में देश का कृषि क्षेत्र नई दिशा प्राप्त कर रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान जी का लंबा एवं सफल अनुभव रहा है। उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की और आज उनके अनुभव, दूरदर्शिता तथा मार्गदर्शन का लाभ पूरे देश को प्राप्त हो रहा है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से विकसित कृषि एवं विकसित भारत के लक्ष्य को समयबद्ध रूप से प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में आईसीएआर द्वारा तैयार ‘विकसित कृषि रोडमैप’ उत्तर प्रदेश के लिए अत्यंत उपयोगी एवं मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, लाभकारी एवं तकनीक आधारित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार, मूल्य संवर्धन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा किसानों की आय वृद्धि के लिए केंद्र और राज्य सरकार समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा केंद्र सरकार के सतत सहयोग से उत्तर प्रदेश विकसित कृषि के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक ने 'विकसित कृषि @2047:उत्तर प्रदेश कार्ययोजना' पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें जलवायु समावेशी विकास, कृषि विविधीकरण, संसाधन आधारित नियोजन, विज्ञान आधारित कृषि, मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण तथा संपूर्ण शासन तंत्र के समन्वित दृष्टिकोण को विकसित कृषि का आधार बताया गया।

बताया गया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश की कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था लगभग 7.41 ट्रिलियन रुपए की है, जिसे वर्ष 2047 तक कृषि विविधीकरण एवं उच्च उत्पादकता आधारित रणनीति के माध्यम से बढ़ाकर 96.96 ट्रिलियन रुपए तक पहुंचाया जाना चाहिए। इसके लिए वास्तविक कृषि वृद्धि दर को 3.19 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.41 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

 

कार्ययोजना के अनुसार वर्ष 2047 तक कृषि विकास का आधार केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि उत्पादकता, किसानों की आय, मूल्य संवर्धन तथा निर्यात क्षमता में समग्र वृद्धि होना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक जनपद की कृषि-जलवायु परिस्थितियों एवं बाजार की मांग के अनुरूप कृषि विविधीकरण को व्यापक स्तर पर अपनाया जाना चाहिए।

धान एवं गेहूं पर अत्यधिक निर्भरता को कम करते हुए दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, मक्का, बागवानी तथा अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों का विस्तार किया जाना चाहिए। साथ ही उत्पादन से विपणन तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला विकसित कर किसानों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

 

रोडमैप में स्पष्ट किया गया कि राज्य में उत्पादन वृद्धि का सबसे बड़ा आधार उत्पादकता वृद्धि होगी। धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन, गन्ना, फल एवं सब्जियों में उच्च गुणवत्ता वाले बीज, जलवायु सहनशील किस्मों, उन्नत कृषि तकनीकों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, सटीक कृषि, आधुनिक यंत्रीकरण तथा डिजिटल कृषि तकनीकों के माध्यम से प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जानी चाहिए। विभिन्न फसलों के वर्तमान उत्पादकता अंतर को कम करना विकसित कृषि की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।

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आईसीएआर के महानिदेशक ने मक्का, दलहन, तिलहन, धान, गेहूं, गन्ना, फल एवं सब्जियों के लिए पृथक दीर्घकालिक विकास रणनीति प्रस्तुत की। इसमें मक्का में जलवायु अनुकूल संकर किस्मों, ड्रिप सिंचाई, प्रसंस्करण एवं मूल्य श्रृंखला विकसित करने, दलहन उत्पादन में धान परती क्षेत्रों, गन्ना आधारित अंतरवर्ती खेती तथा वर्षा आधारित क्षेत्रों की संभावनाओं का उपयोग करने, तिलहन उत्पादन में उन्नत बीज, बीज प्रतिस्थापन, वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन एवं सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने तथा धान एवं गेहूं उत्पादन में जल संरक्षण, प्रत्यक्ष बुवाई, जीरो टिलेज तथा मौसम आधारित कृषि सलाह प्रणाली को प्रोत्साहित करने की अनुशंसा की गई।

 

कार्ययोजना में कृषि को अधिक लाभकारी एवं जलवायु अनुकूल बनाने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली को व्यापक स्तर पर अपनाने का सुझाव दिया गया। विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में फसल उत्पादन के साथ डेयरी, बागवानी, मत्स्य पालन, मशरूम, वर्मी कम्पोस्ट तथा कृषि वानिकी को समाहित करने से किसानों की शुद्ध आय में 109 प्रतिशत से 162 प्रतिशत तक वृद्धि तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय विस्तार की संभावना व्यक्त की गई।

 

कार्ययोजना में कृषि यंत्रीकरण को वर्ष 2047 तक 75 प्रतिशत तक बढ़ाने, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रिमोट सेंसिंग तथा डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करने की अनुशंसा की गई। प्रत्येक जनपद में डिजिटल कृषि एवं एआई प्लेटफॉर्म, प्रिसिजन एग्रीकल्चर प्रयोगशालाएं, मृदा-जल-कार्बन वेधशालाएं, जैव संसाधन एवं जैव आदान केंद्र तथा कृषि उद्यमिता एवं बिजनेस इन्क्यूबेशन केंद्र स्थापित किए जाने का सुझाव भी दिया गया।

 

फल, सब्जी, पुष्पोत्पादन, मधुमक्खी पालन, कृषि वानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन को कृषि विकास के नए इंजन के रूप में विकसित करने पर भी बल दिया गया। साथ ही किसान उत्पादक संगठनों, कृषि प्रसंस्करण इकाइयों, शीत शृंखला, पैक हाउस, खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं तथा निर्यात अवसंरचना का व्यापक विस्तार कर कृषि को उत्पादन आधारित व्यवस्था से आगे बढ़ाकर मूल्य संवर्धन एवं निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित किए जाने की आवश्यकता बताई गई।

कहा गया कि विकसित कृषि 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्र एवं राज्य सरकार, किसान उत्पादक संगठनों तथा निजी क्षेत्र के समन्वित प्रयासों के माध्यम से उत्पादन, उत्पादकता, कृषि विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, निर्यात तथा जलवायु अनुकूल कृषि विकास को समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

 

बैठक में प्रमुख सचिव, कृषि, उत्तर प्रदेश ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं की प्रगति का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। समीक्षा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विविधीकरण एवं उत्पादकता वृद्धि पर विशेष बल देते हुए कहा कि सॉयल हेल्थ कार्ड केवल बनाना ही पर्याप्त नहीं है। किसानों को अपने खेत की मृदा की वास्तविक स्थिति, पोषक तत्वों की उपलब्धता तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के संबंध में भी जागरूक किया जाए, ताकि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड का प्रभावी उपयोग कर सकें।

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उन्होंने अधिकाधिक किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जाने तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने के लिए बैंकों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। क्रिटिकल ब्लॉकों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं जल संचयन के कार्य मिशन मोड में संचालित किए जाएं। केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश को आश्वस्त किया कि उर्वरकों की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

 

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने एफडीआर तकनीक के उपयोग से लगभग 1,000 करोड़ रुपए की बचत की है। यह तकनीक न केवल लागत में कमी लाने में सहायक सिद्ध हुई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी एक प्रभावी एवं अनुकरणीय पहल है। उन्होंने इस नवाचार के लिए प्रदेश को प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने का आग्रह किया, जिस पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।

 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगामी जुलाई माह से प्रारंभ होने वाले विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अर्थात् वीबी-जी राम के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन, जल संरक्षण तथा टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी।

उन्होंने राज्य सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्ववर्ती मनरेगा के लंबित देयों के भुगतान हेतु भारत सरकार को तत्काल प्रस्ताव प्रेषित किया जाए, ताकि भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार का विलंब न हो और नई योजना का क्रियान्वयन निर्बाध रूप से प्रारंभ किया जा सके।

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बैठक में अलनीनो की संभावित परिस्थितियों के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश में कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान जल संरक्षण, फसल प्रबंधन, जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों तथा आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी को और सुदृढ़ बनाने पर बल दिया गया। साथ ही किसानों के हितों की रक्षा के लिए समयबद्ध एवं समन्वित कार्ययोजना अपनाने की आवश्यकता पर भी सहमति व्यक्त की गई।

 

बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, राजस्व राज्य मंत्री सुरेन्द्र दिलेर तथा भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही।
Edited By : Chetan Gour

यूपी में GCC सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट, इन्वेस्ट यूपी-टीमलीज समझौते से तैयार होगा नया टैलेंट नेटवर्क

cm yogi

उत्तर प्रदेश में स्थापित किए जा रहे नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) को कुशल वर्कफोर्स उपलब्ध कराने के लिए 'इन्वेस्ट यूपी' ने टीमलीज ग्रुप के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। बेंगलुरु में गत दिवस “उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026” आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद तथा टीमलीज सर्विसेज की एमडी एवं ग्रुप सीईओ सुपर्णा मित्रा व टीमलीज डिजिटल की सीईओ नीति शर्मा ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

 

यह साझेदारी उत्तर प्रदेश को जीसीसी सेक्टर में निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी और भरपूर टैलेंट की उपलब्धता वाला हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब ग्लोबल कंपनियां पारंपरिक मेट्रो शहरों से आगे बढ़कर नए शहरों में जीसीसी स्थापित कर रही हैं। उभरते जीसीसी शहरों में नौकरियों की वृद्धि 40-45% है, जबकि मेट्रो हब में यह 19% ही है। ऐसे में इन्वेस्ट यूपी व टीमलीज का यह समझौता नए जीसीसी के लिए नियुक्तियों में लगने वाला समय कम करेगा और शुरुआती चरण की टैलेंट भर्ती को आसान बनाएगा।

 

यूपी का जीसीसी विजन 2031  

जीसीसी पॉलिसी-2024 के तहत यूपी ने वर्ष 2031 तक 500 ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर्स स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अब नोएडा-ग्रेटर नोएडा से आगे बढ़कर लखनऊ, कानपुर जैसे टियर-2 व टियर-3 शहरों पर फोकस किया जा रहा है। इस साझेदारी के तहत टीमलीज ग्रुप नए जीसीसी के लिए 'स्टार्टर पैकेज' देगा। इसमें किसी भी जीसीसी को सेटअप के लिए 90 दिनों तक वर्कफोर्स और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) परामर्श निःशुल्क मिलेगा। गौरतलब है कि हर चरण की भर्तियों, इंडक्शन/ऑनबोर्डिंग, एआई/मशीन लर्निंग जैसी विशिष्ट जरूरतों वाली नियुक्तियों, एआई रणनीति व उसके क्रियान्वयन में टीमलीज को विशेषज्ञता हासिल है।

 

इस असर पर इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद ने कहा कि हम यूपी को भारत के अग्रणी जीसीसी डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की नींव रख रहे हैं। जब कंपनियां पारंपरिक स्थानों से आगे बढ़ रही हैं, तो यह जरूरी है कि टैलेंट के अवसर भी राज्य के उभरते केंद्रों तक पहुंचें। टीमलीज के साथ यह साझेदारी वर्कफोर्स की तैयारी मजबूत करेगी तथा उद्योग व कौशल विकास के संबंधों को नई गति देगी। नए उभरते क्षेत्रों में स्किल्ड मैनपावर से राज्य की विकास यात्रा तेजी से आगे बढ़ेगी।

 

टीमलीज की एमडी एवं ग्रुप सीईओ सुपर्णा मित्रा ने कहा कि किसी नए जीसीसी का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करता है कि उसे कुशल मैनपावर कितनी जल्दी और कितनी बड़ी संख्या में उपलब्ध होता है। देशभर में 110 से अधिक जीसीसी पार्टनरशिप और यूपी में 1,470 से अधिक सक्रिय जीसीसी कर्मियों के साथ हम योजना स्तर पर ही कंपनियों को स्किल्ड वर्कफोर्स समेत तमाम तकनीकी आवश्यकताओं में मदद देने की स्थिति में हैं। इन्वेस्ट यूपी के साथ यह साझेदारी से यूपी में टैलेंट व स्किलिंग इकोसिस्टम और मजबूत होगा। टीमलीज ग्रुप 4,000 से अधिक नियोक्ताओं को हायरिंग, उत्पादकता और एंड-टू-एंड वर्कफोर्स समाधान उपलब्ध कराती है। कंपनी ने 25 साल में 24 लाख से अधिक पेशेवरों की प्लेसमेंट की है और दुबई व सिंगापुर तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। Edited by : Sudhir Sharma

Share Bazaar में लगातार दूसरे दिन तेजी, Sensex 109 अंक चढ़ा, Nifty फिर 24000 के पार

Indian stock market saw gains for second consecutive day today

Share Market Update News : भारतीय शेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन तेजी रही। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 109 अंक (+0.14 फीसदी) की बढ़त के साथ 7100.47 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 34 अंक (+0.14 फीसदी) चढ़कर 24056.00 के स्तर पर आ गया। आज मदरसन, ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज और इंटरग्लोब एविएशन ने क्रमशः 4.93 फीसदी, 4.83 फीसदी और 4.66 फीसदी की बढ़त के साथ अच्छा प्रदर्शन किया। निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, M&M, मैक्स हेल्थकेयर, मारुति सुजुकी और टाटा कंज्यूमर शामिल रहे।

 

भारतीय शेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन तेजी रही। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 109 अंक (+0.14 फीसदी) की बढ़त के साथ 7100.47 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 34 अंक (+0.14 फीसदी) चढ़कर 24056.00 के स्तर पर आ गया। आज मदरसन, ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज और इंटरग्लोब एविएशन ने क्रमशः 4.93 फीसदी, 4.83 फीसदी और 4.66 फीसदी की बढ़त के साथ अच्छा प्रदर्शन किया।

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निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, M&M, मैक्स हेल्थकेयर, मारुति सुजुकी और टाटा कंज्यूमर शामिल रहे। भारतीय रुपया 94.65 के पिछले बंद भाव के मुकाबले 25 पैसे बढ़कर 94.40 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इस बीच भारतीय सर्राफा बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।

कल शुक्रवार को मुहर्रम के अवसर पर देश के दोनों प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) बंद रहेंगे यानी बाजार लगातार 3 दिन बंद रहेगा। अब बाजार में नियमित ट्रेडिंग सोमवार 29 जून को दोबारा शुरू होगी। 

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इससे पहले यानी बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन सुस्ती के साथ शुरुआत हुई, लेकिन घंटेभर के कारोबार के बाद ही अचानक बाजी पलट गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स तूफानी तेजी के साथ भागते हुए नजर आने लगे। कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्‍स 791 अंक उछल गया, वहीं एनएसई का निफ्टी 24000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्‍तर को पार कर गया।
Edited By : Chetan Gour

Passport : क्या पासपोर्ट भी नागरिकता का सबूत नहीं? जानिए भारत में कौन-से दस्तावेज साबित करते हैं आपकी पहचान

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पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट एक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है, लेकिन इसे भारतीय नागरिकता का 'अंतिम और निर्णायक प्रमाण'   (Conclusive Proof) नहीं माना जा सकता। हालांकि पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस सत्यापन और कई सरकारी रिकॉर्ड्स की जांच की जाती है, फिर भी कानूनी रूप से इसे नागरिकता का एक मजबूत प्रमाण माना जाता है, न कि अंतिम प्रमाण।

आखिर सरकार ने क्या कहा?

पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट एक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है, लेकिन इसे भारतीय नागरिकता का 'अंतिम और निर्णायक प्रमाण'   (Conclusive Proof) नहीं माना जा सकता। हालांकि पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस सत्यापन और कई सरकारी रिकॉर्ड्स की जांच की जाती है, फिर भी कानूनी रूप से इसे नागरिकता का एक मजबूत प्रमाण माना जाता है, न कि अंतिम प्रमाण।

 

पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट एक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है, लेकिन इसे भारतीय नागरिकता का 'अंतिम और निर्णायक प्रमाण' (Conclusive Proof) नहीं माना जा सकता। हालांकि पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस सत्यापन और कई सरकारी रिकॉर्ड्स की जांच की जाती है, फिर भी कानूनी रूप से इसे नागरिकता का एक मजबूत प्रमाण माना जाता है, न कि अंतिम प्रमाण।

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क्या पासपोर्ट सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही मिलता है?

हां। भारतीय कानून के अनुसार पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है। पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है तो उसका पासपोर्ट आवेदन अस्वीकार किया जा सकता है। यही कारण है कि पासपोर्ट को नागरिकता का मजबूत सबूत माना जाता है।

 

फिर नागरिकता साबित कैसे होती है?

भारत में ऐसा कोई एकल दस्तावेज नहीं है जो हर नागरिक को जन्म से दिया जाता हो और जिसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाए। नागरिकता साबित करने के लिए अलग-अलग परिस्थितियों में विभिन्न दस्तावेजों का उपयोग किया जा सकता है, जैसे-

 

  • जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
  • पासपोर्ट
  • मतदाता पहचान पत्र (Voter ID)
  • स्कूल रिकॉर्ड
  • माता-पिता के दस्तावेज
  • नागरिकता प्रमाणपत्र (यदि नागरिकता पंजीकरण या प्राकृतिककरण से मिली हो)
  • निवास और पारिवारिक रिकॉर्ड
     

क्या आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण है?

नहीं।

 

आधार कार्ड केवल पहचान और निवास का दस्तावेज है। भारतीय कानून के अनुसार आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता।

 

क्या वोटर आईडी नागरिकता साबित करती है?

वोटर आईडी यह दिखाती है कि आपका नाम मतदाता सूची में दर्ज है। लेकिन कानूनी रूप से यह भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं मानी जाती।

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PAN कार्ड और राशन कार्ड का क्या महत्व है?

PAN कार्ड आयकर से जुड़ा पहचान दस्तावेज है।

राशन कार्ड सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए होता है। इनमें से कोई भी दस्तावेज अकेले नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।

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आम नागरिकों को क्या करना चाहिए?

 

एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखना चाहिए, जैसे- 

  • जन्म प्रमाण पत्र
  • पासपोर्ट
  • आधार कार्ड
  • वोटर आईडी
  • शैक्षणिक प्रमाण पत्र
  • परिवार और निवास से जुड़े रिकॉर्ड

 

यदि भविष्य में किसी कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया में नागरिकता से संबंधित जानकारी मांगी जाती है तो कई दस्तावेजों का संयुक्त रूप से उपयोग किया जा सकता है।

क्या है भारतीय कानून में 

भारतीय कानून (नागरिकता अधिनियम, 1955) में ऐसा कोई एक इकलौता डिजिटल कार्ड या सरकारी कागज नहीं है, जिसे दिखाते ही हर व्यक्ति की नागरिकता तुरंत सिद्ध हो जाए। भारत में नागरिकता किसी एक पहचान पत्र से नहीं, बल्कि आपके जन्म के समय, स्थान और माता-पिता के कानूनी दस्तावेजों की पूरी कड़ी को मिलाकर साबित होती है।

अदालतों और सरकार के अनुसार जहां आधार कार्ड सिर्फ आपकी पहचान और पते का जरिया है, वहीं वोटर आईडी और पासपोर्ट बहुत मजबूत सहयोगी दस्तावेज तो हैं, लेकिन कानूनी तौर पर इन्हें भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता। इसके अलावा आपका जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल के पुराने रिकॉर्ड्स ही इस कानूनी पहेली की सबसे मजबूत बुनियाद बनते हैं। Edited by : Sudhir Sharma

50000 से कम में मिल रहा है यह शानदार इलेक्ट्रिक स्कूटर, सिंगल चार्ज में पूरे दिन का सफर

Yakuza Karishma

आज के समय में जब पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। हर कोई एक ऐसा विकल्प तलाश रहा है जो बजट में भी हो और माइलेज (रेंज) भी दमदार दे। अगर आप भी रोज़मर्रा के काम, ऑफिस या कॉलेज आने-जाने के लिए एक सस्ता और टिकाऊ इलेक्ट्रिक स्कूटर ढूंढ रहे हैं, तो भारतीय बाजार में एक बेहतरीन विकल्प मौजूद है जो आपके पूरे दिन के सफर को मात्र एक चार्ज में समेट देगा।

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अगर आपका बजट ₹50,000 से कम है और आप भारी-भरकम आरटीओ के खर्चों और पेट्रोल की मार से बचना चाहते हैं, तो यह इलेक्ट्रिक स्कूटर आपके लिए एक बेहतरीन और पैसा-वसूली डील साबित हो सकता है। आप अपने नजदीकी ईवी डीलरशिप पर जाकर इसकी टेस्ट राइड ले सकते हैं!

 

आइए जानते हैं इस बजट-फ्रेंडली इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत, रेंज और इसके बेहतरीन फीचर्स के बारे में।

 

₹50,000 से कम में सबसे बेस्ट ऑप्शन : Yakuza Karishma

भारतीय ईवी मार्केट में कम बजट वाले ग्राहकों के लिए Yakuza Karishma (याकुजा करिश्मा) एक बेहद लोकप्रिय नाम बनकर उभरा है। यह स्कूटर खास तौर पर उन लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो कम दूरी के दैनिक सफर (Daily Commute) के लिए एक किफायती गाड़ी चाहते हैं।

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कीमत और बचत

एक्स-शोरूम कीमत: इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत भारतीय बाजार में लगभग ₹45,000 से ₹48,000 (ऑन-रोड कीमतें राज्यों की सब्सिडी के आधार पर बदल सकती हैं) के बीच है।

 

नो-लाइसेंस, नो-रजिस्ट्रेशन: यह एक लो-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर की कैटेगरी में आता है, जिसका मतलब है कि इसे चलाने के लिए आपको ड्राइविंग लाइसेंस (DL) या आरटीओ रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं पड़ती।

 

सिंगल चार्ज में पूरे दिन का सफर (रेंज और बैटरी)

इस स्कूटर की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी बैटरी और रेंज है, जो आपके रोज़ के खर्च को लगभग ना के बराबर कर देती है।

 

दमदार रेंज : यह स्कूटर सिंगल चार्ज में 60 से 75 किलोमीटर तक की दूरी आसानी से तय कर सकता है। एक आम व्यक्ति का दैनिक सफर 20 से 30 किलोमीटर होता है, इस लिहाज से यह एक बार चार्ज करने पर आपके पूरे दिन (या दो दिन) के सफर के लिए काफी है।

 

बैटरी और चार्जिंग : इसमें आपको डिटैचेबल (हटाने योग्य) लिथियम-आयन या लीड-एसिड बैटरी का विकल्प मिलता है। इसे नॉर्मल होम सॉकेट से 4 से 6 घंटे में पूरा चार्ज किया जा सकता है।

 

टॉप स्पीड : शहर की ट्रैफिक को देखते हुए इसकी टॉप स्पीड 25 किमी/घंटा तक सीमित रखी गई है, जो सुरक्षा के लिहाज से भी काफी सुरक्षित है।

 

आधुनिक फीचर्स से है लैस

कम कीमत होने के बावजूद कंपनी ने इसके फीचर्स से कोई समझौता नहीं किया है। इसमें आपको कई प्रीमियम फीचर्स मिलते हैं:

 

डिजिटल कंसोल : स्पीड, बैटरी लेवल और ट्रिप मीटर देखने के लिए स्टाइलिश डिजिटल डिस्प्ले।

 

LED लाइटिंग : रात में बेहतर विजिबिलिटी के लिए फ्रंट में LED हेडलाइट और रियर में आकर्षक टेललाइट।

 

एंटी-थिफ्ट अलार्म : चोरी से सुरक्षा के लिए रिमोट लॉकिंग और अलार्म सिस्टम।

 

रिवर्स मोड : तंग गलियों या पार्किंग से स्कूटर को आसानी से निकालने के लिए रिवर्स गियर का फीचर।

 

स्टोरेज स्पेस : सीट के नीचे अच्छा-खासा बूट स्पेस और फ्रंट में सामान रखने के लिए ग्लव बॉक्स।

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आपके लिए यह कितना सही है?

किनके लिए है बेस्ट?

यह स्कूटर स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों, घर की महिलाओं, बुजुर्गों और लोकल डिलीवरी करने वाले भाइयों के लिए सबसे बेस्ट वैल्यू-फॉर-मनी ऑप्शन है। Edited by : Sudhir Sharma