Vivo V70 Series 5G भारत में लॉन्च: Zeiss कैमरा, पावरफुल प्रोसेसर और स्लिम डिजाइन के साथ दो मॉडल पेश

स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Vivo ने आज भारत में अपनी नई Vivo V70 Series 5G लॉन्च कर दी है। इस सीरीज के तहत कंपनी ने दो मॉडल Vivo V70 और Vivo V70 Elite  पेश किए हैं। दोनों स्मार्टफोन्स में अपग्रेडेड प्रोसेसर, Zeiss सपोर्टेड कैमरा और बेहद स्लिम बेज़ल डिजाइन दिया गया है। कंपनी ने इन्हें मिड-रेंज सेगमेंट में उतारा है और आधिकारिक घोषणा के तुरंत बाद इनकी बिक्री शुरू की जाएगी। लॉन्च इवेंट का लाइव स्ट्रीमिंग यूट्यूब पर किया गया।

लाइव हुआ लॉन्च इवेंट

Vivo V70 Series 5G का लॉन्च इवेंट यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीम किया गया, जहां दर्शकों ने रियल टाइम में इस नए स्मार्टफोन लाइनअप की झलक देखी।

मिड-प्रीमियम 5G सेगमेंट पर फोकस

यह नई सीरीज़ इससे पहले लॉन्च हुए V60 और V60e मॉडल के बाद पेश की गई है। कंपनी का लक्ष्य भारत के मिड-प्रीमियम 5G स्मार्टफोन सेगमेंट में अपनी पकड़ को और मजबूत करना है। नए प्रोसेसर, बेहतर कैमरा सेटअप और प्रीमियम डिजाइन के साथ Vivo V70 Series 5G को युवाओं और टेक प्रेमियों को ध्यान में रखकर लॉन्च किया गया है। 

Vivo V70 और V70 Elite: कीमत और सेल डिटेल्स

Vivo V70 Elite को तीन कलर ऑप्शन में लॉन्च किया गया है। इसकी शुरुआती कीमत 51,999 रुपए रखी गई है।

Vivo V70 Elite (8GB + 256GB): ₹51,999

Vivo V70 Elite (12GB + 256GB): ₹56,999

Vivo V70 Elite (12GB + 512GB): ₹61,999

 

वहीं, Vivo V70 को Passion Red और Lemon Yellow कलर में पेश किया गया है।

Vivo V70 (8GB + 256GB): ₹45,999

Vivo V70 (12GB + 256GB): ₹49,999 Edited by : Sudhir Sharma

मुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान, डेटा की तरह सस्ती होगी AI, Jio जोड़ेगा भारत को ‘इंटेलिजेंस एरा’ से

Mukesh Ambani's big announcement regarding Jio AI

– 7 साल में करेंगे 10 लाख करोड़ रुपए निवेश, जामनगर में गीगावॉट-स्केल AI इंफ्रा

– अंबानी ने कहा- AI, प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विज़न को नई गति देगा

– शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के लिए AI प्लेटफॉर्म लॉन्च

Mukesh Ambani's big announcement : उद्योगपति मुकेश अंबानी ने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में ऐलान किया कि जिस तरह जियो ने देश में डेटा सस्ता किया, उसी तरह अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी आम भारतीय तक किफायती दरों पर पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 'भारत इंटेलिजेंस किराए पर नहीं ले सकता' और जियो देश को इंटरनेट युग के बाद अब 'इंटेलिजेंस एरा' से जोड़ेगा।

 

इस दिशा में जियो और रिलायंस इंड्स्ट्रीज अगले सात वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेंगे। अंबानी ने कहा कि यह निवेश भारत में मजबूत AI ढांचा खड़ा करने और आने वाले दशकों के लिए आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जाएगा।

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कंपनी जामनगर में चरणबद्ध तरीके से मल्टी-गीगावॉट AI-रेडी डेटा सेंटर पार्क विकसित कर रही है। 2026 के अंत तक 120 मेगावॉट क्षमता शुरू करने का लक्ष्य है, जिसे आगे गीगावॉट स्तर तक बढ़ाया जाएगा। यह पूरा ढांचा ग्रीन एनर्जी पर आधारित होगा। साथ ही जियो अपने नेटवर्क के जरिए देशभर में ऐसी कंप्यूट क्षमता उपलब्ध कराएगा, जिससे AI सेवाएं कम लागत और तेज़ गति से लोगों, दुकानों, स्कूलों, अस्पतालों और खेतों तक पहुंच सकें।

 

अंबानी ने जोर देकर कहा कि जियो AI भारतीय भाषाओं में काम करेगा, ताकि किसान, युवा, छात्र और छोटे व्यवसायी अपनी भाषा में इसका लाभ उठा सकें। इसी क्रम में शिक्षा के लिए जियो शिक्षा AI, स्वास्थ्य के लिए जियो आरोग्य AI, कृषि के लिए जियो कृषि और आम उपयोग के लिए जियो भारत IQ जैसे प्लेटफॉर्म पेश किए गए, जो स्थानीय भाषाओं में AI आधारित सहायता उपलब्ध कराएंगे।

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मुकेश अंबानी ने विश्वास जताया कि भारत 21वीं सदी में अग्रणी AI शक्ति बन सकता है, बशर्ते तकनीक सुलभ, किफायती और देश की जरूरतों के अनुरूप विकसित की जाए। जियो की इन घोषणाओं से संकेत मिलता है कि कनेक्टिविटी के बाद अब कंपनी AI को अगला राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

 

AI से पैदा होने वाली चिंताओं पर अंबानी ने कहा कि एआई वह मंत्र है जो हर यंत्र को तेज, बेहतर और स्मार्ट तरीके से काम करने की शक्ति देता है। मैं एआई को आधुनिक अक्षय पात्र के रूप में देखता हूं, जो अंतहीन पोषण प्रदान कर सकता है। AI नौकरियां नहीं छीनेगा, बल्कि यह उच्च-कौशल वाले कार्यों में नए अवसर पैदा करेगा।

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अपने संबोधन की शुरुआत में अंबानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न की सराहना करते हुए कहा कि AI आधारित विकास की यह पहल भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को नई गति देगी। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल भारत, बल्कि ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बन सकती है।
Edited By : Chetan Gour

ऑस्ट्रेलिया में पाक हॉकी टीम की फजीहत? कप्तान बोले- होटल नहीं मिला, खिलाड़ियों ने मांजे बर्तन

pakistan hockey team in australia

ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान पाकिस्तानी हॉकी टीम के साथ कथित बदइंतजामी का मामला सामने आया है। कप्तान शकील इमाद बट ने आरोप लगाया कि होटल बुकिंग नहीं होने से खिलाड़ियों को सड़कों पर भटकना पड़ा और खुद खाना बनाकर बर्तन धोने पड़े। वहीं टीम प्रबंधन ने आरोपों को खारिज किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

क्या है पाकिस्तानी कप्तान का दावा

पाकिस्तान हॉकी टीम के कप्तान शकील इमाद बट ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में होटल में बुकिंग नहीं होने के कारण सड़कों पर भटकी पाकिस्तानी हॉकी टीम। मैच खेलने जाने से पहले बर्तन भी धोने पड़े। दूसरी ओर हॉकी टीम के कोच ने प्रबंधन पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए जांच की मांग की है। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने दिए मामले की जांच के आदेश।

 

टीम के कप्तान इमाद बट ने ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद लाहौर हवाई अड्डे पर मीडिया से बात करते हुए पाकिस्तान हॉकी महासंघ के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए और कहा कि वह मौजूदा टीम प्रबंधन के साथ आगे नहीं बढ़ सकते।

 

खेल बोर्ड और हॉकी महासंघ में कौन सही?

उन्होंने कहा कि जब मैंने इस बारे में पाकिस्तान खेल बोर्ड से बात की, तो उन्होंने कहा कि टीम के ऑस्ट्रेलिया रवाना होने से पहले हमने पाकिस्तान हॉकी महासंघ को जरूरी धनराशि उपलब्ध करा दी थी। जब मैंने टीम प्रबंधन से बात की, तो उन्होंने कहा कि खेल बोर्ड ने पर्याप्त और पूरे पैसे उपलब्ध नहीं कराए हैं।

 

कप्तान ने क्यों खड़े किए हाथ?

बट ने कहा कि 5 दिनों में विश्व कप क्वॉलीफाइंग राउंड शुरू होने वाला है। पाकिस्तान हॉकी महासंघ और राष्ट्रीय टीम दोनों के लिए यह एक महत्वपूर्ण आयोजन है। अब हमारे पास बहुत कम समय है, इसलिए हम मौजूदा टीम प्रबंधन के साथ आगे नहीं बढ़ सकते।

 

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से ऑस्ट्रेलिया में खेल रही पाकिस्तानी हॉकी टीम के खिलाड़ियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इनमें खिलाड़ी अपना खाना पकाते और बर्तन साफ करते दिखाई दे रहे हैं। कई तस्वीरों में वे बैग के साथ सड़क किनारे बैठे हुए भी नजर आ रहे हैं।

edited by : Nrapendra Gupta 

Who is Neha Singh : नेहा सिंह कौन हैं, AI इम्पैक्ट समिट में ‘रोबोडॉग’ से चर्चाओं में, Galgotias University ने झाड़ा पल्ला

galgoti uni

देश की राजधानी में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट के दौरान प्रदर्शित एक रोबोटिक डॉग को लेकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) हाल ही में विवादों में आ गई। मीडिया रिपोर्ट्‍स के मुताबिक समिट में यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर दिखाए गए ‘रोबोडॉग’ को चीनी निर्मित बताया गया। इसके बाद यूनिवर्सिटी से एक्सपो स्पेस खाली करने के लिए कहा गया।

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इवेंट से जुड़ा एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें प्रोफेसर नेहा सिंह रोबोट को 'ओरायन' नाम से पेश करती नजर आईं। इसके बाद ऑनलाइन अटकलें लगने लगीं कि क्या इस मशीन को यूनिवर्सिटी की इन-हाउस इनोवेशन के तौर पर प्रस्तुत किया गया था। इस वीडियो के बाद नेहा सिंह भी चर्चाओं में आ गई। 

कौन हैं नेहा सिंह, यूनिवर्सिटी ने झाला पल्ला 

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बिजनेस में कम्युनिकेशंस विभाग की प्रमुख (हेड ऑफ डिपार्टमेंट) हैं। वह कोर टेक्निकल फैकल्टी का हिस्सा नहीं हैं। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने इस बात को स्पष्ट किया।  विवाद के बाद मीडिया बातचीत में नेहा सिंह ने कहा कि उन्हें रोबोट के विकास से जुड़ी तकनीकी जानकारियों की पूरी जानकारी नहीं थी।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यूनिवर्सिटी ने यह दावा नहीं किया था कि रोबोट का निर्माण उसी ने किया है। मीडिया के सामने उन्होंने स्वीकार किया कि समिट में प्रस्तुति के तरीके के कारण स्थिति बिगड़ सकती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने रोबोट का परिचय उत्साह और तेज़ रफ्तार माहौल में दिया, जिससे गलतफहमी पैदा हो सकती है। उनके मुताबिक, रोबोटिक डॉग को यूनिवर्सिटी द्वारा निर्मित बताने का कोई इरादा नहीं था। बल्कि इसे छात्रों को प्रेरित करने और उन्हें इससे भी उन्नत तकनीक विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदर्शन के तौर पर लाया गया था।

 

यूनिवर्सिटी ने कहा- बयान देने का अधिकार नहीं था 

मीडिया खबरों के मुताबिक चाइनीज रोबोडॉग विवाद पर गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने माफीनामा जारी किया है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि AI समिट में उनके स्टॉल पर मौजूद प्रतिनिधि जानकारी के अभाव में कैमरे के सामने गलत बयान दे बैठीं जबकि उन्हें मीडिया से बात करने का अधिकार नहीं था। Edited by : Sudhir Sharma

AI Impact Summit में रोबोटिक डॉग विवाद : Galgotiyas University ने मांगी माफी, सरकार की कड़ी चेतावनी

robot dog galgotias controversy

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' (India AI Impact Summit) के दौरान चीन में निर्मित ‘रोबोटिक डॉग’ के प्रदर्शन को लेकर ‘असमंजस’ की स्थिति पैदा होने के लिए बुधवार को माफी मांगी। ने कहा कि उसके पवेलियन में मौजूद उसके एक प्रतिनिधि को इस रोबोटिक उत्पाद के बारे में ‘सही जानकारी’ नहीं थी और उसने चीन में बने रोबोटिक डॉग को विश्वविद्यालय का नवोन्मेष बताया, जो सही नहीं था।

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इस बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़े 'रोबो-डॉग' विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को सख्त चेतावनी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनी में शामिल होने वाले संस्थान ऐसी किसी भी वस्तु का प्रदर्शन न करें जो उनकी अपनी नहीं है।

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 आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि प्रदर्शनी लगाने वालों को ऐसी चीजें प्रदर्शित नहीं करनी चाहिए जो उनकी अपनी (मौलिक) नहीं हैं। मीडिया खबरों के मुताबिक गलगोटिया यूनिवर्सिटी का पैवेलियन बंद कर दिया गया है और बिजली भी काट दी गई है। 

यह था पूरा मामला 

यह विवाद तब शुरू हुआ जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर आरोप लगा कि उन्होंने 'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में चीन की 'यूनिट्री' (Unitree) कंपनी द्वारा निर्मित एक रोबो-डॉग को अपना खुद का आविष्कार बताकर पेश किया। सोशल मीडिया पर समिट के वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स और विशेषज्ञों ने इस विसंगति को पकड़ लिया।  Edited by : Sudhir Sharma

AI Impact Summit 2026 : चीनी रोबोडॉग के बाद अब कोरियन ड्रोन सॉकर, गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर फिर उठे सवाल

AI Impact Summit 2026  : इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में चीनी ‘रोबोडॉग’ विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। समिट से बाहर किए जाने के बाद अब विश्वविद्यालय एक नए विवाद में घिर गया है। इस बार मामला ‘ड्रोन सॉकर’ से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर दक्षिण कोरिया में निर्मित बताया जा रहा है, लेकिन इसे यूनिवर्सिटी का खुद का उत्पाद बताकर पेश किया गया।

 

जानकारी के मुताबिक, नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर आरोप है कि उसने कोरियाई सॉकर ड्रोन को अपना इन-हाउस प्रोजेक्ट बताकर प्रदर्शित किया। यूथ कांग्रेस ने इसके वीडियो को अपने एक्स पर शेयर किया है। यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने दावा किया कि यह ड्रोन पूरी तरह कैंपस में ही तैयार किया गया है।  इस पूरे विवाद के बीच कम्युनिकेशन प्रोफेसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इससे पहले भी वह रोबोडॉग विवाद में चर्चा में रही थीं और अब एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

वीडियो में वे एक रिपोर्टर को ‘इन-हाउस सॉकर ड्रोन’ के बारे में जानकारी देती नजर आ रही हैं। उन्होंने दावा किया, 'यह एक दिलचस्प डिवाइस है। इसकी एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से लेकर एप्लिकेशन तक सब कुछ यूनिवर्सिटी में ही विकसित किया गया है।' 

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उन्होंने यह भी कहा कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपने कैंपस में भारत का पहला ‘ड्रोन सॉकर एरीना’ तैयार किया है। उन्होंने कहा कि यहां सिमुलेशन लैब और एप्लिकेशन एरीना मौजूद है… यह भारत का पहला सॉकर एरीना ऑन कैंपस है। यहां इस प्रोडक्ट को और उन्नत फीचर्स के साथ विकसित किया जा रहा है। 

हालांकि, अब इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या यह तकनीक वास्तव में यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है या नहीं। लगातार सामने आ रहे विवादों के चलते गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर जांच और आलोचना के घेरे में है। Edited by : Sudhir Sharma

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में Jio ने रखा ‘नेशन-फर्स्ट AI स्टैक’ का खाका

Jio AI Stack

– 'जियो AI स्टैक' को 'सॉवरेन' AI इकोसिस्टम के रूप में किया प्रस्तुत

– ग्रीन डेटा सेंटर से भारतीय भाषाओं तक पूरी AI वैल्यू चेन पर फोकस

– स्वदेशी और सॉवरेन AI इकोसिस्टम पर जोर

Jio AI Stack : इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियो ने अपने 'नेशन-फर्स्ट AI स्टैक' की रूपरेखा पेश की। कंपनी तकनीकी रूप से इसे 'जियो AI स्टैक' नाम देती है और दावा करती है कि इसे भारत की जरूरतों और बड़े पैमाने की मांग को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। जियो इंटेलिजेंस के तहत विकसित किया जा रहा यह स्टैक केवल डेटा सेंटर तक सीमित नहीं है, बल्कि एक फुल-स्टैक AI इकोसिस्टम के रूप में तैयार किया जा रहा है। 

 

'जियो AI स्टैक' में गीगावॉट स्तर के ग्रीन डेटा सेंटर, उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग व्यवस्था, प्लेटफॉर्म और फ्रेमवर्क, भारतीय भाषाओं पर आधारित डेटा फाउंडेशन, बहुभाषी इंटेलिजेंस लेयर और विभिन्न क्षेत्रों के लिए एप्लिकेशन शामिल हैं। देश में मल्टी-गीगावॉट AI डेटा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं, जो 100 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी से संचालित होंगे, ताकि राष्ट्रीय स्तर की टिकाऊ AI क्षमता तैयार की जा सके।

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'जियो AI स्टैक'  को एक 'सॉवरेन' AI इकोसिस्टम के रूप में प्रस्तुत किया गया है यानी ऐसा ढांचा जो देश में विकसित हो और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित हो। कंपनी का कहना है कि इसके जरिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, छोटे व्यवसायों और रोजमर्रा की सेवाओं में AI आधारित समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

 

कंपनी के मुताबिक जियो AI स्टैक का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को हर भारतीय, साथ ही एंटरप्राइज और सरकारी संगठनों के लिए सुलभ और किफायती बनाना है। इसके तहत भारतीय भाषाओं को समझने और स्थानीय चुनौतियों का समाधान करने वाली AI क्षमताओं पर विशेष जोर दिया गया है।

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स्थानीय संदर्भ में विकसित इंटेलिजेंस के लिए व्यापक भारतीय भाषाओं के डेटा सेट तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही सुरक्षित, बहुभाषी वॉयस AI और एजेंटिक प्लेटफॉर्म पर काम किया जा रहा है, जिससे उपयोगकर्ता अपनी भाषा में सहज AI इंटरैक्शन कर सकें।

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विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में AI की दौड़ अब केवल तकनीकी क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा संप्रभुता, ऊर्जा दक्षता, भाषाई विविधता और बड़े पैमाने पर पहुंच जैसे पहलुओं से भी जुड़ गई है। ऐसे में जियो AI स्टैक जैसे मॉडल देश के दीर्घकालिक डिजिटल और आर्थिक विकास में किस हद तक योगदान देते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
Edited By : Chetan Gour

Google Pixel 10a का धमाका, आज होगा लॉन्च, जानें भारत में संभावित कीमत और ‘सबसे दमदार’ फीचर्स

google pixel 10 a

टेक दिग्गज गूगल आज (18 फरवरी, बुधवार) अपनी फ्लैगशिप Pixel 10 सीरीज का सबसे किफायती स्मार्टफोन Google Pixel 10a लॉन्च करने जा रहा है। कंपनी इस फोन को अब तक के सबसे टिकाऊ (Durable) ए-सीरीज फोन के रूप में प्रमोट कर रही है। मजबूत बॉडी के साथ-साथ इस बार फोन में एडवांस AI फीचर्स और बेहतरीन कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है।

 

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने हाल ही में कंपनी की चौथी तिमाही (Q4) की अर्निंग कॉल के दौरान पुष्टि की थी कि पिक्सल 10 सीरीज की सफलता के बाद अब इसमें Pixel 10a को भी जोड़ा जा रहा है।

 

आज रात 9 बजे से प्री-ऑर्डर शुरू, इतनी हो सकती है कीमत

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart के अनुसार, भारत में Pixel 10a की प्री-बुकिंग आज रात 9 बजे से शुरू हो जाएगी। ग्राहक इसे फ्लिपकार्ट और गूगल स्टोर से बुक कर सकेंगे। कीमत का अनुमान: पिछले साल Pixel 9a को ₹49,999 (8GB/256GB) की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था। माना जा रहा है कि Pixel 10a की कीमत भी इसी के आसपास होगी। प्री-ऑर्डर करने वालों को एक्सचेंज बोनस, 24 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI और गूगल स्टोर क्रेडिट जैसे आकर्षक ऑफर्स मिल सकते हैं।

 

AI फीचर्स: 'जेमिनी' से होगा लैस

इस साल गूगल अपने किफायती फोन में भी प्रीमियम AI फीचर्स दे रहा है। कंपनी ने कन्फर्म किया है कि Pixel 10a में Gemini इन-बिल्ट AI असिस्टेंट के रूप में मौजूद रहेगा।

 

प्रमुख AI फीचर्स- 

Gemini Nano और Gemini Live
Pixel Screenshots और Magic Cue

Circle to Search और Live Translate

कॉल असिस्ट और बेहतर नॉइज कैंसलेशन

 

iPhone यूजर्स के लिए भी खास

Pixel 10a में आईफोन यूजर्स के साथ बेहतर कनेक्टिविटी के लिए RCS मैसेजिंग की सुविधा मिलेगी। साथ ही, यह फोन Apple AirPods, Apple TV और FaceTime के साथ भी आसानी से कंपैटिबल होगा, जिससे डेटा ट्रांसफर और वीडियो चैटिंग आसान हो जाएगी। Edited by : Sudhir Sharma

इंदौर की 5 वर्षीय जियाना कटारिया ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, 28 सेकंड में हल कीं 5 सुडोकू पहेलियाँ

jaina katariya

शहर की नन्ही प्रतिभा जियाना कटारिया ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंदौर और मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है। महज 5 वर्ष, 3 महीने और 11 दिन की आयु में जियाना ने “Fastest to complete  5 Easy Level 4×4 सुडोकू puzzle (Kid)” श्रेणी में विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने 5 आसान स्तर की 4×4 सुडोकू पहेलियों को मात्र 28 सेकंड और 4 मिलीसेकंड में हल कर यह उपलब्धि हासिल की। इस रिकॉर्ड को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई है।

इतनी कम उम्र में इस तरह की तार्किक क्षमता और मानसिक एकाग्रता असाधारण मानी जाती है। सुडोकू जैसे ब्रेन गेम्स बच्चों में गणितीय सोच, स्मरण शक्ति और समस्या समाधान कौशल को विकसित करते हैं। जियाना ने बेहद कम समय में सटीकता के साथ सभी पहेलियों को पूरा कर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। उनकी उपलब्धि न केवल परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे शहर और प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है।

जियाना के अभिभावकों ने बताया कि उन्हें बचपन से ही नंबर गेम्स और पजल्स में विशेष रुचि रही है। परिवार के अनुसार नियमित अभ्यास, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण ने उनकी क्षमता को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जियाना के पिता श्री विनय कटारिया ने कहा, “हमें हमेशा से विश्वास था कि जियाना में कुछ अलग करने की क्षमता है। हमने उसे कभी दबाव में नहीं रखा, बल्कि खेल-खेल में सीखने का मौका दिया। आज उसकी इस उपलब्धि पर हमें बेहद गर्व है।”

वहीं उनकी माता श्रीमती एकता कटारिया ने भावुक होते हुए कहा, “इतनी छोटी उम्र में उसे इस तरह एकाग्र होकर लक्ष्य पूरा करते देखना हमारे लिए अविस्मरणीय क्षण था। यह उसकी मेहनत और ईश्वर की कृपा का परिणाम है।”

रिकॉर्ड बनाने के दौरान जियाना ने पूरे आत्मविश्वास और शांति के साथ चुनौती को पूरा किया। इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी कर “रिकॉर्ड होल्डर” घोषित किया है। शहर के शिक्षाविदों का मानना है कि जियाना की यह सफलता अन्य बच्चों को भी बौद्धिक गतिविधियों की ओर प्रेरित करेगी। कम उम्र में इस तरह की उपलब्धि यह दर्शाती है कि यदि सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले तो बच्चे असंभव लगने वाले लक्ष्य भी हासिल कर सकते हैं।

Fact Check: इंडिया AI समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी का ‘चीनी रोबोट’ विवाद; क्या है पूरी सच्चाई?

AI Summit Controversy : Chinese Robot Dog

भारत मंडपम में आयोजित हो रहे 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में तकनीकी उपलब्धियों से ज्यादा विवादों की चर्चा हो रही है। इस समय सबसे बड़ा विवाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित एक 'रोबोट डॉग' को लेकर खड़ा हुआ है, जिसके बाद यूनिवर्सिटी को प्रदर्शनी से बाहर जाने का निर्देश दिया गया है। समिट में सबसे बड़ी फजीहत गलगोटिया यूनिवर्सिटी के कारण हुई। यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक 'रोबोट डॉग' प्रदर्शित किया गया था, जिसे प्रतिनिधियों ने खुद का बनाया हुआ (In-house development) बताया।

 

फैक्ट-चेक: सोशल मीडिया पर विशेषज्ञों ने तुरंत पकड़ लिया कि यह रोबोट वास्तव में चीनी कंपनी Unitree Robotics का Go2 मॉडल है।

 

कार्रवाई: भारत सरकार के अधिकारियों ने इस “धोखाधड़ी” और “चीनी उत्पाद को भारतीय बताने” को गंभीरता से लेते हुए गलगोटिया यूनिवर्सिटी को तुरंत अपना स्टॉल हटाने और एक्सपो एरिया खाली करने का आदेश दिया।

 

यूनिवर्सिटी ने बाद में सफाई दी कि यह “गलतफहमी” थी और वे केवल छात्रों को इस पर प्रोग्रामिंग सिखा रहे थे, लेकिन तब तक यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका था।

राहुल गांधी का 'X' पर हमला: “डेटा बिक्री के लिए है”

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सरकार की आलोचना करते हुए लिखा कि भारत की प्रतिभा और डेटा का लाभ उठाने के बजाय, सरकार ने इस इवेंट को केवल दिखावे का जरिया बना दिया है।

 

राहुल गांधी का बयान: “भारत की प्रतिभा और डेटा का उपयोग करने के बजाय, एआई शिखर सम्मेलन एक अव्यवस्थित पीआर तमाशा बन गया है – भारतीय डेटा बिक्री के लिए उपलब्ध है और चीनी उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।”

 

उन्होंने आरोप लगाया कि समिट में भारतीय नवाचार के नाम पर विदेशी और विशेषकर चीनी तकनीक को बढ़ावा देकर देश की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाया गया है।

क्या है गलगोटिया यूनिवर्सिटी का 'रोबोट डॉग' विवाद?

समिट के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक चार पैरों वाला रोबोट (Quadruped Robot) प्रदर्शित किया गया था।

 

दावा: यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने मीडिया कैमरों के सामने दावा किया कि 'Orion' नाम का यह रोबोट यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' द्वारा विकसित किया गया है। उन्होंने इसे निगरानी और कैंपस सुरक्षा के लिए स्वदेशी नवाचार के रूप में पेश किया।

 

हकीकत: सोशल मीडिया पर तकनीकी विशेषज्ञों और 'X' (ट्विटर) के कम्युनिटी नोट्स ने तुरंत पहचान की कि यह रोबोट दरअसल चीनी कंपनी Unitree Robotics का मॉडल 'Unitree Go2' है, जिसे कोई भी ऑनलाइन खरीद सकता है।

सरकार की कार्रवाई: स्टॉल खाली करने के आदेश

सूत्रों के अनुसार, चीनी उत्पाद को भारतीय नवाचार के रूप में पेश करने से “राष्ट्रीय शर्मिंदगी” की स्थिति पैदा हुई। इसके बाद अधिकारियों ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी को समिट एक्सपो से अपना स्टॉल तुरंत हटाने और परिसर खाली करने का आदेश दिया।

यूनिवर्सिटी की सफाई: 'हमने निर्माण का दावा नहीं किया'

विवाद बढ़ने पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्टीकरण दिया: “हमने कभी यह नहीं कहा कि हमने इस रोबोट का निर्माण किया है। यह यूनिट्री (Unitree) से खरीदा गया है और हमारे छात्र इस पर एआई प्रोग्रामिंग सीखने के लिए प्रयोग कर रहे हैं। यह हमारे लिए एक 'चलता-फिरता क्लासरूम' है।”

 

हालांकि, इंटरनेट पर वायरल वीडियो में यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि इसे स्पष्ट रूप से “डेवलप” (विकसित) किया हुआ बता रहे हैं, जिससे उनकी सफाई पर सवाल उठ रहे हैं।