Dalmia Bharat Share Price: नतीजों के बाद शेयर 6% टूटा, ब्रोकरेज ने घटाया टारगेट प्राइस, अब क्या करें निवेशक

Dalmia Bharat Share Price: सीमेंट बनाने वाली कंपनी डालमिया भारत (Dalmia Bharat) के शेयर में 27 अक्टूबर को भारी दबाव देखने को मिला। स्टॉक आज इंट्राडे में 6 फीसदी टूटा। स्टॉक में गिरावट कंपनी के वित्त वर्ष 2027 की सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद आई। सितंबर तिमाही में ज्यादा लागत और कम मांग के कारण कंपनी के मुनाफे पर असर पड़ा है। कंपनी को नेट लॉस (शुद्ध घाटा) भी हुआ है, जिसका एक कारण एसेट इम्पेयरमेंट (संपत्ति के मूल्य में कमी) और कर्मचारियों के लिए ‘सेपरेशन स्कीम’ (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति जैसी योजना) से जुड़े विशेष खर्च हैं।

इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹3,563 करोड़ रहा, जो विश्लेषकों के ₹3,646 करोड़ के अनुमान से कम है। बिक्री की मात्रा (सेल्स वॉल्यूम) 7.1 मिलियन टन रही, जबकि 7.3 मिलियन टन की उम्मीद थी।

ज्यादा लागत के कारण EBITDA (ईबीआईटीडीए) गिरकर ₹493 करोड़ रह गया, जबकि विश्लेषकों ने इसके ₹552 करोड़ रहने का अनुमान लगाया था। EBITDA मार्जिन 13.84% रहा, जो 15.14% की उम्मीद से कम है। वहीं, प्रति टन EBITDA ₹698 रहा, जबकि अनुमान ₹752 का था।

कंपनी को ₹208 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जबकि विश्लेषकों को ₹75 करोड़ के नेट प्रॉफिट की उम्मीद थी।

Q2 नतीजों पर किन चीजों का असर पड़ा

डालमिया भारत के कामकाज पर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी बाजारों में कम मांग का असर पड़ा, जिससे वॉल्यूम ग्रोथ प्रभावित हुई। नेट सेल्स रियलाइजेशन (NSR) में सालाना आधार पर 1% की बढ़ोतरी हुई, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 1% की गिरावट आई।

ईंधन की कीमतें बढ़ने से पावर और फ्यूल की लागत में इजाफा हुआ, जिससे मुनाफे पर दबाव बढ़ा। इसके अलावा, सेंट्रल एसेट्स के एकीकरण (integration) का भी तिमाही के प्रदर्शन पर असर पड़ा।

कंपनी ने अपनी कुछ संपत्तियों (जिनमें तीन कैप्टिव पावर प्लांट और एक ब्रांड शामिल हैं) के मूल्य का आकलन करने के बाद, ₹282 करोड़ का ‘इम्पेयरमेंट लॉस’ (संपत्ति के मूल्य में कमी) दर्ज किया। साथ ही, कुछ इकाइयों में पात्र कर्मचारियों के लिए ‘सेपरेशन स्कीम’ से जुड़ा ₹57 करोड़ का एकमुश्त खर्च भी कंपनी के खातों में दर्ज हुआ।

ब्रोकरेज फर्मों की क्या है राय

HSBC ने डालमिया भारत की रेटिंग को घटाकर Hold कर दिया है और इसका प्राइस टारगेट घटाकर ₹1,820 कर दिया है। ब्रोकरेज ने तिमाही शुद्ध घाटे के मुख्य कारणों के रूप में वॉल्यूम ग्रोथ में सुस्ती, लागत में भारी बढ़ोतरी और एसेट इम्पेयरमेंट (संपत्ति के मूल्य में कमी) के खर्चों को जिम्मेदार बताया है।

HSBC का यह भी मानना ​​है कि दिसंबर तिमाही में भी अधिग्रहित संपत्तियों (acquired assets) का प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ेगा। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 (FY27) के अंत तक ‘ब्रेक-ईवन’ (न लाभ-न हानि की स्थिति) तक पहुंचना है।

Morgan Stanley

मॉर्गन स्टेनली ने डालमिया भारत पर अपनी ‘अंडरवेट’ रेटिंग बरकरार रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹1,640 तय किया है। कंपनी के तिमाही प्रदर्शन को उन्होंने ‘कमजोर’ बताया है।

ब्रोकरेज ने वॉल्यूम में सुस्ती (जिसका एक कारण मौसमी असर भी है) और बढ़ती लागतों की ओर इशारा किया है। हालांकि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ‘ऑपरेटिंग लेवरेज’ से मुनाफे को कुछ सहारा मिल सकता है, लेकिन वेरिएबल कॉस्ट (परिवर्तनशील लागत) के ऊंचे बने रहने की उम्मीद है। इससे हाल ही में कीमतों में की गई बढ़ोतरी से मिलने वाला फायदा कुछ हद तक कम हो जाएगा।

मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि कंपनी की कमजोर लाभप्रदता को देखते हुए, वे अभी भी सतर्क रुख अपनाना ही बेहतर समझते हैं।

citi

सिटी (Citi) ने डालमिया भारत पर अपनी Buy रेटिंग तो बरकरार रखी है, लेकिन इसका प्राइस टारगेट घटाकर ₹1,900 कर दिया है। ब्रोकरेज के अनुसार, EBITDA में साल-दर-साल 29% की गिरावट आई है। इसका कारण यह है कि लागत में 9% की बढ़ोतरी ने वॉल्यूम ग्रोथ और रियलाइजेशन (प्राप्ति मूल्य) में 1% के सुधार से मिलने वाले फायदों को खत्म कर दिया।

प्रति टन एडजस्टेड EBITDA ₹694 रहा, जबकि जून तिमाही में यह ₹1,055 था और एक साल पहले ₹1,010 था। केंद्रीय संपत्तियों (central assets) को हटा दें, तो प्रति टन EBITDA ₹746 बैठता है। सिटी के अनुसार, प्रति टन EBITDA में आई इस गिरावट के पीछे कम रियलाइजेशन, बढ़ती लागत, कमजोर वॉल्यूम और JPA से जुड़े नुकसान मुख्य कारण हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नेट डेट-टू-EBITDA (शुद्ध कर्ज और EBITDA का अनुपात) पिछली तिमाही के 1.5 गुना से बढ़कर 2 गुना हो गया है।

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि निकट भविष्य में लागत में सुधार की संभावना कम है, लेकिन मध्यम अवधि में ‘प्रीमियमाइजेशन’ (बेहतर उत्पादों पर जोर) और लागत दक्षता (cost efficiencies) से रिटर्न में सुधार हो सकता है। बेहतर ऑपरेटिंग लेवरेज, उत्पादों का सही मिश्रण और ऊंची कीमतें समय के साथ प्रति टन EBITDA को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।

CLSA

CLSA ने डालमिया भारत पर अपनी ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन इसका प्राइस टारगेट घटाकर ₹2,000 कर दिया है। ब्रोकरेज ने कहा कि नतीजे उम्मीद से काफी खराब रहे और अन्य कंपनियों के मुकाबले कमजोर रहे। इसके पीछे प्रतिकूल क्षेत्रीय मिश्रण (regional mix), बाजार हिस्सेदारी में कमी, अधिग्रहित संपत्तियों (acquired assets) से नुकसान और लागत का अधिक दबाव जैसे कारण बताए गए।

CLSA को उम्मीद है कि सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी, फिक्स्ड-कॉस्ट के बेहतर प्रबंधन और अधिग्रहित संपत्तियों के कामकाज में तेजी आने से निकट भविष्य में मुनाफे में सुधार होगा। हालांकि, ईंधन की बढ़ती लागत इन फायदों को कुछ हद तक कम कर सकती है।

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि मध्यम अवधि में, कंपनी की संपत्तियों के बेहतर उपयोग और लागत बचाने की क्षमता बहुत महत्वपूर्ण होगी। हालांकि वैल्यूएशन उचित लग रहे हैं, लेकिन ब्रोकरेज ने चेतावनी दी कि स्टॉक में कोई बड़ा सकारात्मक बदलाव (ट्रिगर) आने में समय लग सकता है।

Jefferies

सितंबर तिमाही के कमजोर नतीजों (जिसमें EBITDA सालाना आधार पर 29% गिर गया) के बाद, जेफरीज (Jefferies) ने डालमिया भारत पर अपनी ‘बाय’ (खरीदने की) रेटिंग तो बरकरार रखी, लेकिन इसका प्राइस टारगेट घटाकर ₹2,125 कर दिया।

ब्रोकरेज के अनुसार, खराब प्रदर्शन का कारण पूर्वी क्षेत्र में कमजोरी रही, जहां सीमेंट की बिक्री और कीमतें कम रहीं, साथ ही लागत भी अधिक रही। उन्हें उम्मीद है कि पूरे उद्योग में सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी से दूसरी छमाही में सुधार देखने को मिलेगा। हालांकि, दिसंबर तिमाही में JPA से जुड़े नुकसान कम होने से पहले और बढ़ सकते हैं। जेफरीज ने अपने EBITDA अनुमानों को भी 7–11% तक घटा दिया है।

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