कब मनाया जाएगा आचार्य विद्यासागर का जन्‍मोत्‍सव, जानिए उनके जीवन से जुड़ी खास बातें…

कब मनाया जाएगा आचार्य विद्यासागर का जन्‍मोत्‍सव, जानिए उनके जीवन से जुड़ी खास बातें...

When will Acharya Vidyasagar’s birth anniversary be celebrated, Learn some significant facts about his life

Jain muni Acharya Vidyasagar ji Maharaj: संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का जन्मोत्सव जैन समाज और उनके करोड़ों अनुयायियों द्वारा अत्यंत भक्ति, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। उनके पावन जन्मदिवस को धार्मिक और आध्यात्मिक जगत में ‘विद्यासागर जयंती’ या ‘संयम दिवस’ के रूप में जाना जाता है। आचार्य श्री का जन्म आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन हुआ था। इस साल यह जन्‍मोत्‍सव 26 अक्‍टूबर सोमवार 2026 को मनाया जाएगा। जानिए उनके जीवन से जुड़ी खास बातों के बारे में विस्‍तार से…

 

जैन जिनालयों (मंदिरों) में प्रातःकाल भगवान महावीर स्वामी और चौबीसों तीर्थंकरों का अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन-विधान आयोजित किया जाता है। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र/ चरण पादुकाओं के समक्ष विशेष ‘विद्यासागर पूजन’ और अष्टद्रव्य से अर्घ्य समर्पित किए जाते हैं।

 

विभिन्न शहरों और कस्बों में प्रभात फेरियां और भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, जिनमें श्रद्धालु हाथों में अहिंसा, जीवदया, ‘इंडिया छोड़ो-भारत बोलो’ और हथकरघा प्रोत्साहन के संदेशों वाली पट्टिकाएं लेकर चलते हैं। अस्पतालों में मरीजों को फल वितरण, तथा निर्धन व ज़रूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और अध्ययन सामग्री का दान किया जाता है। 

 

आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के जीवन से जुड़ी खास बातें

  • जैन धर्म के प्रमुख गुरु, संत एवं मुनि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज एक ऐसे महान संत, जिन्होंने हर मौसम में बिना उन सभी सुख-सुविधाओं के अपना जीवन जिया जो हम सभी के लिए अति आवश्‍यक होती है। वे बचपन से ही अत्यंत शांत, गंभीर और धार्मिक स्वभाव के थे।  
  • विद्यासागर जी की अद्वितीय साधना, ज्ञान और समर्पण को देखते हुए आचार्य ज्ञानसागर जी ने मध्य प्रदेश के सागर जिले में अपना आचार्य पद उन्हें सौंप दिया था।
  • आचार्यश्री विद्यासागर दिन में केवल एक बार बिना नमक और मसालों का सात्विक आहार अपनी अंजुलि (हथेली) में ग्रहण करते थे। उन्होंने जीवनभर के लिए दूध, दही, नमक, चीनी, हरी सब्जियां, मेवे और तेल का त्याग कर रखा था।
  • उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में कभी किसी गाड़ी या वाहन का प्रयोग नहीं किया। वे हमेशा नंगे पैर पदयात्रा करते थे। वे कभी पलंग या गद्दे का उपयोग नहीं करते थे, बल्कि लकड़ी के तख्ते या भूमि पर ही विश्राम करते थे।
  • वे गोवंश की रक्षा के सबसे बड़े समर्थक थे। उनकी प्रेरणा से देशभर में सैकड़ों ‘दयोदय गौशालाएं’ स्थापित की गईं।
  • बालिकाओं को आधुनिक ज्ञान के साथ नैतिक संस्कार देने के लिए उन्होंने ‘प्रतिभास्थली ज्ञानोदय पीठ’ जैसी आवासीय शिक्षण संस्थाओं की नींव रखी।
  • संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज दिगंबर जैन परंपरा के सबसे महान, श्रद्धेय और प्रभावशाली आचार्यों में से एक थे। उन्हें उनके कठोर तप, गहन ज्ञान, करुणा और अद्वितीय समाज-सुधारक विचारों के लिए न केवल जैन समाज में, बल्कि संपूर्ण विश्व में अत्यंत आदर और श्रद्धा के साथ याद किया जाता है।
  • यह दिन हर श्रद्धालु को याद दिलाता है कि सच्चा जीवन वही है जो संयम, सेवा और अहिंसा के मार्ग पर चलकर जिया जाए।