युवा मतदाताओं को प्रताडित करने के बदलाव?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों की जो शिकायत दोनों चुनाव आयुक्तों एसएस संधु और विवेक जोशी ने की है उसमें एक बड़ी शिकायत पहली बार के यानी युवा मतदाताओं को लेकर है। दोनों चुनाव आयुक्तों ने पहली बार नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म छह के प्रारूप में किए गए बदलाव पर सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि फॉर्म छह के प्रारूप में जो बदलाव किया गया है वह मनमाना है और गैरकानूनी भी है। दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपनी शिकायत में लिखा है कि यह बदलाव युवाओं को परेशान और प्रताड़ित करने वाला है। उनका कहना है कि उनको इस बदलाव के बारे में पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी। दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव को गैरकानूनी करार दिया है और यह भी कहा है कि केंद्र सरकार की अनुमति के बगैर चुनाव आयोग को यह काम करने का अधिकार नहीं है।

अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म छह में लोगों के सामने तीन स्टेटमेंट रखे जा रहे हैं। पहला, क्या आपका नाम पहले यानी 2000 या उसके आसपास हुई एसआईआर के बाद बनी मतदाता सूची में शामिल था? दूसरा, क्या आपके पिता या दादा में से किसी का नाम पिछली एसआईआर के बाद बनी मतदाता सूची में था? और तीसरा, क्या आपका या आपके माता, पिता में से किसी का या आपके दादा, दादी में से किसी का नाम मतदाता सूची में था? उनका कहना है कि प्रपत्र में इसका जवाब देना आनिवार्य नहीं किया गया है लेकिन इसका जवाब दिए बिना फॉर्म भरने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। दोनों चुनाव आयुक्तों का कहना है कि मतदाता रजिस्ट्रेशन के 1960 के कानून में बदलाव किए बगैर प्रपत्र में इस तरह की फेरबदल नहीं हो सकती है और यह काम केंद्र सरकार की अनुमति से होना चाहिए।