तो कैबिनेट सचिव किसके अधीन?

मुख्य चुनाव आय़ुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों को लेकर 14 बार सवाल उठाने और आपत्ति जताने के अलावा दोनों चुनाव आय़ुक्तों एसएस संधु और विवेक जोशी ने अपनी शिकायत देश के सबसे बड़े नौकरशाह यानी कैबिनेट सचिव तक भी पहुंचाई। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम एक मौके पर दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को चिट्ठी लिख कर गड़डबड़ियों की सूचना दी। वह गड़बड़ी खासतौर से करीब एक अरब मतदाताओं के आंकड़ों की सुरक्षा और राज्यों व जिले से चुनाव अधिकारियों के अधिकार छीने जाने से जुड़ा था। इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ साथ डीजी आईटी के कामकाज पर भी सवाल उठा है। यह शिकायत ईसीआईनेट से जुड़ी थी। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग की डीजी आईटी सीमा खन्ना ने कहा था कि ईसीआईनेट का प्लेटफॉर्म पूरी तरह से भरोसेमंद और कानूनी है। लेकिन इस दावे के तुरंत बाद कई गड़बड़ियां सामने आ गईं। हालांकि उनकी शिकायत पर भी कोई कार्रवाई होने की सूचना नहीं है।

दोनों चुनाव आयुक्तों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि इस प्लेटफॉर्म से राज्यों और जिलों के चुनाव अधिकारियों को कट ऑफ कर दिया गया। ऐसी कई घटनाएं सामने आईं, जिनसे ऐसा लगा कि सारी शक्तियां दिल्ली में केंद्रित की जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने या उन पर विचार करने का पूरा अधिकारी ईआरओ यानी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के ऊपर होती है। जिलों में आमतौर पर एसडीएम या उसका समकक्ष अधिकारी ईआरओ होता है। उसे कानूनी तौर पर यह अधिकार होता है कि वह मतदाता सूची में नाम जोड़े, हटाए या उन पर पुनर्विचार करे। लेकिन कई मामलों में ऐसा हुआ कि ईआरओ की एक्सेस रोक दी गई। डीजी आईटी सीमा खन्ना की टीम ने जिले के अधिकारियों को काम करने से रोक दिया। इसी बात की शिकायत दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव से की। उनका कहना है कि इससे मतदाता सूची की शुचिता और सुरक्षा दोनों प्रभावित होते हैं।