अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई है। ट्रम्प ने दावा किया कि G7 समिट के दौरान मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बेताब थीं। इस पर मेलोनी ने पलटवार करते हुए कहा कि ट्रम्प की यह कहानी पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत है। ट्रम्प ने इतालवी टीवी चैनल La7 से बातचीत में कहा, “वह मेरे साथ फोटो चाहती थीं। मैं ऐसा नहीं करना चाहता था, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया।” इस पर मेलोनी ने कहा, विवाद बढ़ने के बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तायानी ने अगले हफ्ते का अपना अमेरिकी दौरा रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के गंभीर और अपमानजनक शब्द सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि पूरे इटली का अपमान हैं। G7 में साथ दिखे थे ट्रम्प और मेलोनी फ्रांस में हुए G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रम्प और मेलोनी को एक सोफे पर बैठकर लंबी बातचीत करते देखा गया था। हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच रिश्ते सुधरने के संकेत भी मिले थे, लेकिन ट्रम्प के ताजा बयान के बाद दोनों देशों के बीच फिर तनाव बढ़ गया है। मेलोनी ट्रम्प की पुरानी समर्थक रही हैं और 2025 में उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली इकलौती यूरोपीय नेता थीं। हालांकि, इस साल ईरान युद्ध और पोप लियो को लेकर ट्रम्प की टिप्पणियों के बाद दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आने लगे थे। ट्रम्प पर यूरोप-अमेरिका रिश्ते बिगाड़ने का आरोप मेलोनी के करीबी सहयोगी और प्रधानमंत्री कार्यालय के अंडरसेक्रेटरी जियोवानबातिस्ता फज्जोलारी ने कहा कि ट्रम्प जानबूझकर या अनजाने में अमेरिका और यूरोप के ऐतिहासिक रिश्तों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के ऐसे बयानों ने पूरे यूरोप में अमेरिका की छवि को नुकसान पहुंचाया है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान खुद अमेरिका को होगा। मोदी और मेलोनी की दोस्ती भी चर्चा में इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के करीबी संबंध भी चर्चा में हैं। दोनों नेता हाल के G7 सम्मेलन समेत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ नजर आए हैं। सोशल मीडिया पर उनकी दोस्ती को #Melodi नाम से भी लोकप्रियता मिली है। फ्रांस के एवियां में आयोजित 2026 G7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने मजाक में नरेंद्र मोदी से कहा था कि दोनों इंस्टाग्राम के सबसे चर्चित जोड़े हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी की रोम यात्रा के दौरान उन्होंने मेलोनी को भारत की मशहूर मेलोडी टॉफियां भी गिफ्ट की थीं। इस बातचीत से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था और इसे 10 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। मेलोनी ने सार्वजनिक तौर पर नरेंद्र मोदी को दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता बताया है। दोनों नेताओं की अनौपचारिक तस्वीरें और सेल्फी सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा में रहती हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया के उन नेताओं में शामिल बताया है, जिनकी वह सबसे ज्यादा सराहना करते हैं। नेतृत्व क्षमता और वैश्विक प्रभाव पर बात करते हुए ट्रंप ने मोदी का नाम चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ लिया। फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के बाद समाचार वेबसाइट Axios को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने दुनिया के प्रमुख नेताओं के साथ अपने संबंधों और वैश्विक राजनीति को लेकर अपने विचार साझा किए। इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि वे किन विश्व नेताओं की सबसे अधिक प्रशंसा करते हैं, तो ट्रंप ने भारत और चीन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम लिया।
शी जिनपिंग और पीएम मोदी का लिया नाम
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन विश्व नेताओं में शामिल बताया, जिनकी वह सबसे अधिक प्रशंसा करते हैं। ट्रंप ने शी जिनपिंग को पूरी तरह काम पर केंद्रित नेता बताया, जबकि नरेंद्र मोदी को बेहद मजबूत और सख्त नेतृत्व वाला नेता कहा। हाल के दिनों में ट्रंप की ओर से पीएम मोदी के बारे में की गई सकारात्मक टिप्पणियों में यह एक और महत्वपूर्ण बयान माना जा रहा है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप और मोदी की 16 महीने से अधिक समय बाद पहली आमने-सामने मुलाकात हुई थी।
भारत और अमेरिका के मजबूत संबंधों पर जोर
बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और अमेरिका के मजबूत संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के समय में व्यापार, प्रतिबंधों और ओमान के तट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे मुद्दों पर कुछ मतभेद जरूर रहे हैं, लेकिन इससे दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ा है। मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा, “हमारे संबंध बेहद अच्छे हैं। इससे ज्यादा करीबी रिश्ते शायद ही हो सकते हैं। हमारे देशों के बीच मजबूत साझेदारी है और इसकी शुरुआत हम दोनों नेताओं से होती है।” ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक सख्त और कुशल वार्ताकार भी बताया। उन्होंने अपनी पहले की टिप्पणी दोहराते हुए कहा कि मोदी बातचीत के दौरान मजबूती से अपनी बात रखते हैं। साथ ही ट्रंप ने संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
ट्रेड डील पर कही ये बात
G7 शिखर सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील होने के काफी करीब है। उन्होंने इस मौके पर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातचीत और नेतृत्व क्षमता की सराहना की। ट्रंप ने कहा कि मोदी का व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली है और वह देखने में बहुत शांत और सौम्य लगते हैं। हालांकि, बातचीत और फैसलों के मामले में वह काफी मजबूत और सख्त नेता हैं। ट्रंप के अनुसार, मोदी अपनी बात मजबूती से रखते हैं और सामने वाले को अपने नेतृत्व शैली से प्रभावित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी का शांत स्वभाव और दृढ़ नेतृत्व उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है।
इस सवाल से किया इनकार
Axios का यह इंटरव्यू मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान शांति प्रयासों के बाद डोनाल्ड ट्रंप की नेतृत्व क्षमता और वैश्विक प्रभाव पर केंद्रित था। बातचीत के दौरान ट्रंप ने दुनिया के कई नेताओं के साथ अपने संबंधों और अनुभवों पर भी चर्चा की। हालांकि, जब उनसे उन नेताओं के बारे में पूछा गया जिन्हें वह कमजोर मानते हैं, तो उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने इस बात पर भी खेद जताया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन G7 समूह का हिस्सा नहीं थे। इसके अलावा उन्होंने फ्रांस में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से वर्साय पैलेस में दिए गए स्पेशल स्टेट डिनर का भी जिक्र किया।
ईरान-अमेरिका समझौते के बाद इस हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया है। हालांकि दुनिया अभी भी तेल संकट से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है। एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के करीब चार महीनों में वैश्विक बाजार से 115 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई गायब हो चुकी है। इसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई लगभग बंद रही। इस वजह से दुनिया के स्ट्रेटजिक और कॉमर्शियल ऑयल रिजर्व तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकल चुका है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के निचले स्तर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर जंग खत्म नहीं करते तो हमारे रिजर्व करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते। सीजफायर के बाद तेल सस्ता हुआ अमेरिका-ईरान समझौते की खबर से तेल बाजार ने राहत की सांस ली। युद्ध के दौरान 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब 80 डॉलर से नीचे आ गया है। लेकिन कीमतों में यह गिरावट पूरी कहानी नहीं बताती। रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी तेल की सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं होगी। पहले समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी। इसके बाद खाली टैंकरों की वापसी, तेल उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को पटरी पर लाने में वक्त लगेगा। तेल उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी व्यवस्था को सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। तब तक दुनिया को मौजूदा तेल भंडार के सहारे ही काम चलाना होगा। RBC कैपिटल मार्केट्स की हेलिमा क्रॉफ्ट ने कहा कि बाजार जरूरत से ज्यादा उत्साहित है। उनके मुताबिक, संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल की सप्लाई को सामान्य स्तर पर लाने में अभी बड़ी चुनौतियां बाकी हैं। कई एक्सपर्ट्स को अभी भी राहत की उम्मीद इंफ्रास्ट्रक्चर केपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि नकदी संकट से जूझ रहे OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी ने कहा कि जंग शुरू होने से पहले दुनिया के पास तेल का अच्छा-खासा स्टॉक था। इसी वजह से इतनी बड़ी सप्लाई रुकने के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं हिला। उन्होंने कहा कि अमेरिका में डीजल और पेट्रोल का भंडार जरूर कम हुआ है, लेकिन हालात अभी काबू में हैं। संकट के दौरान रिफाइनरियों को तेल खरीदने के लिए कई जगह फोन करने पड़ रहे थे, लेकिन आने वाले हफ्तों में तस्वीर बदल सकती है। तब तेल बेचने वाले खुद खरीदारों के पास पहुंचेंगे। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। अगर दुनिया रोजाना मांग से 50 लाख बैरल ज्यादा तेल भी पैदा करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में करीब एक साल लग जाएगा।
अभी कुछ ही दिन पहले फ्रांस के एवियान (Evian) में हुए G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) (15 से 17 जून) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं। लेकिन अब इस दोस्ती में बहुत बड़ा धमाका हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा कर दिया कि जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बकायदा “भीख मांगी थी” (Begged)। इस दावे के बाद मेलोनी काफी ज्यादा भड़क गई हैं और उन्होंने ट्रंप को करारा जवाब दिया है।
ट्रंप का विवादित दावा: “तरस खाकर खिंचवाई फोटो”
इटली के एक न्यूज चैनल ‘La7 TV’ को दिए फोन इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ही धुन में मेलोनी का मजाक उड़ाते हुए कहा, “वह शायद खुश होंगी कि मैंने उनसे बात की, जबकि मुझे उनसे बात करने की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने मेरे साथ एक तस्वीर खिंचवाने के लिए मुझसे भीख मांगी थी। वह मेरे साथ फोटो खिंचवाने के लिए इतनी बेताब थीं कि पूछिए मत। मैं तो फोटो नहीं खिंचवाता, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया, इसलिए मैं मान गया।”
मेलोनी का पलटवार: “ईश्वर गवाह है, इटली कभी भीख नहीं मांगता!”
ट्रंप के इस बयान के बाद जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर ट्रंप के दावों की धज्जियां उड़ा दीं।
मेलोनी ने वीडियो में साफ-साफ कहा, “डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठा है। मैं सच में उनके इस व्यवहार से हैरान हूं। मुझे नहीं पता कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपने ही सहयोगियों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों करते हैं; वैसे यह कोई पहली बार नहीं है।”
Io e l’Italia non imploriamo mai. pic.twitter.com/sTpKlqWB67
— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) June 19, 2026
मेलोनी यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने ट्रंप की दुखती रग पर हाथ रखते हुए आगे कहा, “बड़े दुख की बात है कि ट्रंप अपनी यह आक्रामकता और तेवर पश्चिमी देशों या अमेरिका के असली दुश्मनों के खिलाफ नहीं दिखाते, बल्कि उनके सामने तो वह बेहद नरम पड़ जाते हैं। खैर, उन्हें एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए: मैं और मेरा देश इटली, कभी किसी के आगे भीख नहीं मांगते।”
इटली में भारी गुस्सा: डिप्टी पीएम ने रद्द किया अमेरिका दौरा
ट्रंप की इस टिप्पणी से पूरे इटली के नेताओं में गुस्सा उबल पड़ा है। इसे पूरे देश का अपमान माना जा रहा है।
इटली के डिप्टी पीएम एंटोनियो तायानी ने गुस्से में अपना 21 और 22 जून का अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा, “ट्रंप के ये शब्द पूरे इटली का अपमान हैं, इसलिए मैं अमेरिका नहीं जा रहा।”
इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने कहा, “मैं तो बंदूक की नोक पर भी मेलोनी को किसी से फोटो के लिए भीख मांगते नहीं देख सकता। मेलोनी ने इटली और यूरोप के भले के लिए ट्रंप की पुरानी कड़वी बातों को भुलाकर उनसे मुलाकात की थी, लेकिन ट्रंप ने फिर से अपनी खराब तहज़ीब (Lapse in style) दिखा दी।”
कभी पक्के दोस्त थे, अब क्यों आई इतनी कड़वाहट?
आपको बता दें कि जॉर्जिया मेलोनी कभी डोनाल्ड ट्रंप की बहुत बड़ी समर्थक हुआ करती थीं। यहां तक कि साल 2025 में जब ट्रंप ने दोबारा राष्ट्रपति पद की शपथ ली, तो मेलोनी उस समारोह में शामिल होने वाली अकेली यूरोपीय नेता थीं।
लेकिन फिर रिश्ते क्यों बिगड़े?
दरअसल ट्रंप ने ईसाई धर्मगुरु पोप लियो (Pope Leo) पर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं, जिससे मेलोनी नाराज हो गईं। इस साल शुरू हुए ईरान युद्ध को लेकर दोनों के विचार बिल्कुल अलग हो गए और मेलोनी ने ट्रंप से दूरी बना ली।
हालांकि, इस G7 समिट में दोनों ने पैच-अप (रिश्ते सुधारने) की कोशिश की थी, लेकिन ट्रंप के इस एक बयान ने दोनों देशों के बीच एक नया ‘विवाद’ खड़ा कर दिया है।
मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए
Mojtaba Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने एक खास पोस्ट के जरिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह समझौता ईरान की इच्छा से नहीं, बल्कि अमेरिका की मजबूरी की वजह से हुआ है। खामेनेई ने अपने पोस्ट में लिखा, “जैसा कि आपको बताया गया है, ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।”
उन्होंने कहा कि हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस समझौते तक पहुंचने के लिए ईमानदारी से काम किया था, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने ही इसके लिए सबसे ज्यादा जोर डाला था। खामेनेई के मुताबिक, “अमेरिकी राष्ट्रपति ने ही मजबूरी में आकर इसे अंजाम देने के लिए हर तरह के दबाव और साधनों का इस्तेमाल किया।”
बता दें कि समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा वर्साय पैलेस में आयोजित डिनर के दौरान किए गए। यह कार्यक्रम G7 शिखर सम्मेलन के समापन के बाद हुआ था। मैक्रों ने X पर इस घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि यह समझौता “स्थायी शांति का रास्ता बनाता है और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की अनुमति देता है।”
औपचारिक हस्ताक्षर समारोह पहले शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित होने वाला था। हालांकि, तेहरान ने पुष्टि की है कि जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार होगी।
अमेरिका-ईरान समझौते में क्या कहा गया है?
इस दस्तावेज का औपचारिक नाम “संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के इस्लामी गणराज्य के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन” है। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने की बात कही गई है।
इसकी शर्तों के तहत, अमेरिका ने 30 दिनों के भीतर ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का वादा किया है। उम्मीद है कि इस दौरान जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आएगी। अमेरिका अंतिम समझौता होने के 30 दिनों के भीतर ईरान के आस-पास से अपनी सेना हटाने पर भी सहमत हो गया है।
वहीं, ईरान ने भी कमर्शियल जहाजों को 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने पर सहमति जताई है।
बता दें कि संधि पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद, दोनों पक्षों के पास व्यापक अंतिम समझौते की शर्तों पर बातचीत करने के लिए 60 दिन का समय है।
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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Interim Bilateral Trade Agreement) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को यह जानकारी दी। यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के एक दिन बाद आया है।
विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और अब दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के करीब हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा, बाजारों तक पहुंच आसान होगी और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगे, जहां इस समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।
मिस्री के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बैठक में व्यापार समझौता प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। दोनों नेताओं ने अधिकारियों को इस प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा था कि भारत और अमेरिका लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया के सबसे सख्त और कुशल वार्ताकारों में से एक बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को लेकर लगातार सकारात्मक बातचीत हो रही है।
ट्रंप ने भारत द्वारा अमेरिका में किए जा रहे निवेश की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत हो रहे हैं। गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने फरवरी में लगभग एक वर्ष तक चली बातचीत के बाद व्यापार को लेकर अंतरिम सहमति बनाई थी। इसके बाद से दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
विक्रम मिस्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक होते हैं, लेकिन दोनों देशों के नेतृत्व ने हमेशा संवाद के माध्यम से चुनौतियों का समाधान निकाला है।
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15 जुलाई से लागू होगा भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता
इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के 15 जुलाई से लागू होने का स्वागत किया है। उन्होंने इसे दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। ब्रिटेन की भारत में उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने पुष्टि की है कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 15 जुलाई से प्रभावी हो जाएगा। करीब तीन वर्षों की बातचीत के बाद जुलाई 2025 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। Edited by : Sudhir Sharma
यूक्रेन ने गुरुवार को रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया। रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रातभर में करीब 1,000 ड्रोन और चार क्रूज मिसाइलों को मार गिराया गया। इनमें करीब 200 ड्रोन राजधानी मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक हमले में दक्षिणी रोस्तोव क्षेत्र के एक ऑयल डिपो धमाके से तबाह हो गया, यहां मौजूद एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं मॉस्को की कपोतन्या ऑयल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ। विस्फोट के बाद ऑयल डिपो टैंक का ढक्कन कई मीटर ऊपर उछल गया और आसमान में काले धुएं के गुबार छा गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पास के एक शॉपिंग सेंटर में भी आग लग गई। ड्रोन का मलबा गिरने से कुछ रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों को नुकसान पहुंचा। कई ऊंची इमारतों को खाली कराया गया। हमले के बाद मॉस्को के हवाई अड्डों पर कुछ समय के लिए उड़ानों पर रोक लगाई गई। जेलेंस्की बोले- यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मॉस्को पर हुए हमले को पिछले हफ्ते कीव पर रूस की कार्रवाई का जवाब बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी सेना ने उन ठिकानों को निशाना बनाया, जो रूस के युद्ध अभियान को सहारा दे रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि अब समय आ गया है कि रूस युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाए। उन्होंने यूक्रेन की विभिन्न सैन्य और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई की तारीफ भी की। जेलेंस्की ने कहा, “हम यह युद्ध नहीं चाहते थे, लेकिन अगर यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा।” हमले के समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन कजान में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के नेताओं के साथ शिखर बैठक में मौजूद थे। उन्होंने मॉस्को पर हुए इस बड़े हमले को लेकर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। 2023 से रूसी राजधानी पर ड्रोन हमले बढ़े 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन के ड्रोन हमले सीमित थे। 2023 में पहली बार उसके ड्रोन मॉस्को तक पहुंचे, लेकिन तब हमलों में कुछ ही ड्रोन इस्तेमाल किए जाते थे। अब यूक्रेन लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हो गया है, जबकि रूस ने भी राजधानी के चारों ओर मजबूत एयर डिफेंस तैनात कर रखा है। इस वजह से युद्ध अब सिर्फ फ्रंटलाइन तक सीमित नहीं रहा। दोनों देश तेल डिपो, रिफाइनरी और दूसरे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। G7 देशों ने यूक्रेन को मदद देने का ऐलान किया मॉस्को पर बड़े हमले के बीच G7 देशों ने यूक्रेन के लिए सैन्य मदद बढ़ाने का ऐलान किया है। संगठन ने कहा कि यूक्रेन को ज्यादा एयर डिफेंस सिस्टम, इंटरसेप्टर और लंबी दूरी के हथियार दिए जाएंगे। इसके अलावा रूस के तेल और गैस कारोबार पर प्रतिबंध और सख्त किए जाएंगे। G7 देशों ने सर्दियों से पहले यूक्रेन की बिजली और ऊर्जा जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त मदद देने का भरोसा दिया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्हें लगा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराना आसान होगा, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरी दुश्मनी ने बातचीत को मुश्किल बना दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी वोलोदिमिर जेलेंस्की और व्लादिमिर पुतिन दोनों से अच्छी बातचीत हुई है और वह इस युद्ध का अंत देखना चाहते हैं। ———————— रूस-यूक्रेन जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रूस ने यूक्रेन पर ओरेश्निक मिसाइल से हमला किया:यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम; जेलेंस्की बोले- रूसी पागल हो चुके हैं रूस ने पिछले महीने यूक्रेन पर कई मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। हमलों का निशाना यूक्रेन की राजधानी कीव के आसपास के इलाके थे। रूस ने कहा कि यह हमला यूक्रेनी हमलों के जवाब में किया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
यूक्रेन ने गुरुवार को रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया। रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रातभर में करीब 1,000 ड्रोन और चार क्रूज मिसाइलों को मार गिराया गया। इनमें करीब 200 ड्रोन राजधानी मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक हमले में दक्षिणी रोस्तोव क्षेत्र का एक ऑयल डिपो धमाके से तबाह हो गया, यहां मौजूद एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं मॉस्को की कपोतन्या ऑयल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ। विस्फोट के बाद ऑयल डिपो टैंक का ढक्कन कई मीटर ऊपर उछल गया और आसमान में काले धुएं के गुबार छा गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पास के एक शॉपिंग सेंटर में भी आग लग गई। ड्रोन का मलबा गिरने से कुछ रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों को नुकसान पहुंचा। कई ऊंची इमारतों को खाली कराया गया। हमले के बाद मॉस्को के हवाई अड्डों पर कुछ समय के लिए उड़ानों पर रोक लगाई गई। जेलेंस्की बोले- यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मॉस्को पर हुए हमले को पिछले हफ्ते कीव पर रूस की कार्रवाई का जवाब बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी सेना ने उन ठिकानों को निशाना बनाया, जो रूस के युद्ध अभियान को सहारा दे रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि अब समय आ गया है कि रूस युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाए। उन्होंने यूक्रेन की विभिन्न सैन्य और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई की तारीफ भी की। जेलेंस्की ने कहा, “हम यह युद्ध नहीं चाहते थे, लेकिन अगर यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा।” हमले के समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन कजान में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के नेताओं के साथ शिखर बैठक में मौजूद थे। उन्होंने मॉस्को पर हुए इस बड़े हमले को लेकर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। 2023 से रूसी राजधानी पर ड्रोन हमले बढ़े 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन के ड्रोन हमले सीमित थे। 2023 में पहली बार उसके ड्रोन मॉस्को तक पहुंचे, लेकिन तब हमलों में कुछ ही ड्रोन इस्तेमाल किए जाते थे। अब यूक्रेन लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हो गया है, जबकि रूस ने भी राजधानी के चारों ओर मजबूत एयर डिफेंस तैनात कर रखा है। इस वजह से युद्ध अब सिर्फ फ्रंटलाइन तक सीमित नहीं रहा। दोनों देश तेल डिपो, रिफाइनरी और दूसरे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। G7 देशों ने यूक्रेन को मदद देने का ऐलान किया मॉस्को पर बड़े हमले के बीच G7 देशों ने यूक्रेन के लिए सैन्य मदद बढ़ाने का ऐलान किया है। संगठन ने कहा कि यूक्रेन को ज्यादा एयर डिफेंस सिस्टम, इंटरसेप्टर और लंबी दूरी के हथियार दिए जाएंगे। इसके अलावा रूस के तेल और गैस कारोबार पर प्रतिबंध और सख्त किए जाएंगे। G7 देशों ने सर्दियों से पहले यूक्रेन की बिजली और ऊर्जा जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त मदद देने का भरोसा दिया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्हें लगा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराना आसान होगा, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरी दुश्मनी ने बातचीत को मुश्किल बना दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी वोलोदिमिर जेलेंस्की और व्लादिमिर पुतिन दोनों से अच्छी बातचीत हुई है और वह इस युद्ध का अंत देखना चाहते हैं। 17 मई- यूक्रेनी हमले में 1 भारतीय समेत 4 की मौत इससे पहले यूक्रेन ने 17 मई को भी रूस के कई इलाकों पर 1000 से ज्यादा ड्रोन से हमला किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें कम से कम 4 लोगों की मौत हुई थी। इसमें 1 भारतीय भी शामिल था। रूस में भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की थी। दूतावास के मुताबिक 3 भारतीय घायल भी हुए थे। रूस के अधिकारियों ने बताया था कि ड्रोन हमले में मॉस्को में तीन लोगों की मौत हुई, जबकि यूक्रेन सीमा से लगे बेलगोरोद इलाके में एक और व्यक्ति की जान गई। मॉस्को में कुल 12 लोग घायल हुए। इनमें तेल रिफाइनरी में काम करने वाले मजदूर भी शामिल हैं। यूक्रेन ने मॉस्को में सैन्य और ईंधन से जुड़े अहम ठिकानों को निशाना बनाया था। इनमें एंगस्ट्रेम प्लांट शामिल है, जो रूस की सेना के लिए सेमीकंडक्टर बनाता है। इसके अलावा मॉस्को ऑयल रिफाइनरी, सोलनेचनोगोर्स्क और वोलोडार्स्कोये ईंधन स्टेशन को भी निशाना बनाया गया। पूरी खबर पढ़ें… ———————— रूस-यूक्रेन जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रूस ने यूक्रेन पर ओरेश्निक मिसाइल से हमला किया:यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम; जेलेंस्की बोले- रूसी पागल हो चुके हैं रूस ने पिछले महीने यूक्रेन पर कई मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। हमलों का निशाना यूक्रेन की राजधानी कीव के आसपास के इलाके थे। रूस ने कहा कि यह हमला यूक्रेनी हमलों के जवाब में किया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए समझौते पर डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। अमेरिका-ईरान की पीस डील 19 जून को स्विट्जरलैंड में होनी थी। ऐसे में किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि 2 दिन पहले ट्रम्प यह ऐतिहासिक फैसला करेंगे। ट्रम्प ने समझौते के दिन की शुरुआत ईरान को धमकी देने से शुरू की। उन्होंने G7 समिट के दौरान कहा कि अगर अगले 60 दिनों में समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बम बरसाएगा। रात होते-होते ट्रम्प नरम पड़ गए और पीस डील पर साइन कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस समय वहां मौजूद लोगों को कुछ मिनट पहले तक इसकी जानकारी नहीं थी। ट्रम्प के ईरान को धमकी देने से लेकर पीस डील पर साइन करने से जुड़ी 12 तस्वीरें… G7 वर्किंग सेशन और प्रेस कॉन्फ्रेंस PM मोदी से मुलाकात, लुक की तारीफ की ट्रम्प वर्साय पैलेस की ओर रवाना हुए
अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए समझौते पर डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। अमेरिका-ईरान की पीस डील 19 जून को स्विट्जरलैंड में होनी थी। ऐसे में किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि 2 दिन पहले ट्रम्प यह ऐतिहासिक फैसला करेंगे। ट्रम्प ने समझौते के दिन की शुरुआत ईरान को धमकी देने से शुरू की। उन्होंने G7 समिट के दौरान कहा कि अगर अगले 60 दिनों में समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बम बरसाएगा। रात होते-होते ट्रम्प नरम पड़ गए और पीस डील पर साइन कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस समय वहां मौजूद लोगों को कुछ मिनट पहले तक इसकी जानकारी नहीं थी। ट्रम्प के ईरान को धमकी देने से लेकर पीस डील पर साइन करने से जुड़ी 12 तस्वीरें… G7 वर्किंग सेशन और प्रेस कॉन्फ्रेंस PM मोदी से मुलाकात, लुक की तारीफ की ट्रम्प वर्साय पैलेस की ओर रवाना हुए ————————- पीस डील से जुड़ी ये खबरे भी पढ़ें… अमेरिका-ईरान समझौते के 14 पॉइंट की पूरी डिटेल:होर्मुज सिर्फ 60 दिन फ्री, ईरान को ₹28 लाख करोड़ हर्जाना मिलेगा, बदले में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा अमेरिका और ईरान ने जंग खत्म करने के समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया। पूरी खबर पढ़ें अमेरिका-ईरान जंग खत्म, तय तारीख से एक दिन पहले समझौता:दोनों प्रेसिडेंट ने दस्तखत किए, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। पूरी खबर पढ़ें

