5 साल तक जीरो सेल्स, अब Ather Energy बनी ₹50000 करोड़ की कंपनी, Tesla से इस सीख ने बदल दी इंडस्ट्री की तस्वीर

करीब 13 साल पहले भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को इलेक्ट्रिकल वेईकल्स में कोई भविष्य नहीं दिख रहा था। हर वेंडर से सस्ते से सस्ता पार्ट लेकर असेंबलिंग के बाद एक इलेक्ट्रिक स्कूटर की लागत करीब ₹5 लाख पड़ती। ऑटो इंडस्ट्री के मुताबिक यह मॉडल व्यावहारिक नहीं था। इन सबके बीच तरुण मेहता और स्वप्निल जैन ने इसे अलग नजरिए से देखा और वह भी तब, जब वे अभी भी आईआईटी मद्रास से इंजीनयरिंग करके निकले थे। खास बात ये भी है कि वह टेस्ला (Tesla) की स्टडी तो कर रहे थे लेकिन कारों की नहीं बल्कि इसके फाइनेंशियल्स की। इस स्टडी की नींव पर उन्होंने एथर एनर्जी (Aether Energy) जैसी ऐसी कंपनी खड़ी कर दी जिसने पांच साल तक कोई सेल्स नहीं की और अब यह यह ₹50 हजार करोड़ की कंपनी बन चुकी है।

क्या मिला Tesla के फाइनेंशियल्स से?

तरुण टेस्ला के निवेशकों की रिसर्च रिपोर्ट की स्टडी करते थे। इसमें उन्होंने एक खास बात नोटिस की कि लिथियम-आयन सेल, मोटर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स की वास्तविक लागत काफी कम थी। तरुण ने पाया कि ये महंगे इसलिए दिखाई देते थे क्योंकि इन्हें बड़े पैमाने पर बनाने और इंटीग्रेशन की प्रक्रिया अभी तैयार नहीं हुई थी।

कैसे पड़ी Aether Energy की नींव

तरुण और स्वप्निल की मुलाकात आईआईटी मद्रास में इंजीनियरिंग डिजाइन की पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोनों ने साथ मिलकर कुछ रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया था। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने नौकरियां की लेकिन फिर इस्तीफा देकर बैट्री पैक पर काम करने लगे। उनके मुताबिक बैट्री पैक भारतीय इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सबसे बड़ी कमजोरी थी। 2012 के आखिरी दिनों में उन्होंने प्रोजेक्ट एसोसिएट के रूप में फिर आईआईटी मद्रास में वापसी की। वे हॉस्टल में रहते और लैब में काम करते थे। मात्र छह से सात महीनों में उन्होंने एक स्कूटर और बैट्री पैक का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया। वर्ष 2013 में एथर एनर्जी को औपचारिक रूप से IIT-M रिसर्च पार्क में इनक्यूबेट किया गया। अगले साल 2014 में उन्हें टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड और आईआईटी के एक पूर्व छात्र से ₹45 लाख की फंडिंग मिली।

दो फैसलों ने तय कर दी दिशा

एथर की नींव अक्टूबर 2013 में पड़ी थी। उसी साल दो फैसलों ने कंपनी की पूरी दिशा तय कर दी। पहला फैसला था कि कंपनी आम लोगों के लिए स्कूटर बनाएगी। उस समय भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियां धीमे और कम पावर वाले होते थे जिसे मुख्य रूप से बुजुर्गों या बिना लाइसेंस के युवाओं के लिए बनाया जाता था। दूसरा फैसला था, स्कूटर के हैंडलबार पर सात इंच की टचस्क्रीन, सिम कार्ड और एक फुल सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम देना जोकि उस समय दुनिया में किसी भी दोपहिया गाड़ी पर नहीं था। देश की सड़कों, धूल, बारिश और प्रदूषण के बीच टचस्क्रीन को भरोसेमंद बनाना काफी महंगा और रिस्क वाला था। हालांकि यही दो फैसले एथर की नींव बने।

पांच साल तक जीरो सेल्स से ₹50 हजार करोड़ की कंपनी

एथर का पहला प्रोडक्ट 2018 के मध्य में आया यानी कि पहले पांच साल तक इसकी सेल्स जीरो रही। पहले पांच साल कंपनी की टीम में अधिकतर ऐसे नए ग्रेजुएट्स थे जिन्होंने कॉलेज में रेस कारें बनाई थीं। उनके लिए ग्रेजुएशन के बाद ही सैलरी के साथ गाड़ियों को बनाने का काम करना एक सपने के पूरा होने जैसा था। इससे उन्हें लंबे समय तक कंपनी से जोड़े रखना आसान रहा। हालांकि ऐसा नहीं है कि मुश्किलें नहीं आई। एक निवेशक ने तो सलाह दी थी कि कंपनी सिर्फ होंडा एक्टिवा में इलेक्ट्रिक मोटर लगाकर बेचना शुरू करे। कई ने तो अपना प्रोडक्ट या तकनीक नहीं बनाने की सलाह दी क्योंकि उनके मुताबिक भारत में ऐसे प्रोडक्ट को मार्केट नहीं है। हालांकि एथर अपने विजन पर कायम रही।

सेल्स के आंकड़े

कंपनी के बिक्री की बात करें तो साल 2022 में कंपनी ने 54,769 यूनिट्स बेचीं। 2023 में यह बढ़कर 1,11,812 और साल 2024 में 1,36,513 यूनिट्स तक पहुंच गई। अगले ही साल कंपनी की सेल्स 57% बढ़कर 2,14,985 यूनिट्स पर पहुंच गई। इस साल 2026 की पहली छमाही में ही एथर ने 1,69,020 यूनिट्स का रजिस्ट्रेशन किया, जो पिछले साल 2025 की समान अवधि की तुलना में 91% अधिक थी। ओवरऑल बात करें तो जून 2026 तक कंपनी ग्राहकों को 7 लाख से अधिक गाड़ियों की डिलीवरी कर चुकी है, जिसमें से आखिरी 2 लाख यूनिट्स केवल 8 महीनों में बेची गईं। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने कुल 2,62,942 यूनिट्स बेचीं, जो सालाना आधार पर 69% अधिक थी।

बाजार में दबदबे की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 में दोपहिया ईवी सेगमेंट में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 18.6% हो गई। कंपनी के लिए सबसे शानदार महीना अक्टूबर 2025 रहा, जब इसने 26,713 यूनिट्स बेची और 19.6% मार्केट हिस्सेदारी रही। इस दौरान इसने ओला इलेक्ट्रिक को भी पीछे छोड़ दिया था।

कंपनी के लिए सबसे दमदार गाड़ी एथर रिज्टा साबित हुई जो अप्रैल 2024 में लॉन्च हुई थी। सिर्फ 11 महाने में इसने 1 लाख सेल्स का आंकड़ा पार कर लिया। दिसंबर 2025 तक 2 लाख और अप्रैल 2026 तक लॉन्च के सिर्फ 25 महीने में 3 लाख सेल्स का रिकॉर्ड बना लिया। आज एथर की कुल मासिक बिक्री में इसकी हिस्सेदारी 76% है।

₹200 करोड़ का दांव, Ather Energy में इस कारण सरकारी फंड कर रही निवेश

₹1200 करोड़ जुटाने का प्लान, इस कारण Ather Energy में सरकार भी करेगी निवेश

दिग्गज ईवी कंपनी एथर एनर्जी (Ather Energy) ने नई पूंजी जुटाने का ऐलान किया है। इसमें एक निवेशक इंडिया-जापान फंड (IJF) का भी नाम सामने आया। यह भारत सरकार और JBIC (जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन) का एक इंवेस्टमेंट वेईकल है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि एक लिस्टेड दोपहिया बनाने वाली कंपनी में सरकार क्यों पैसे लगा रही है। इसका जवाब कंपनी को बचाने की कोशिश या मार्केट के बड़े खिलाड़ी को चुनना नहीं है बल्कि सरकार की व्यापक इंडस्ट्रियल स्ट्रैटेजी है। सरकार का लक्ष्य वैश्विक कंपनियों के टक्कर की ईवी बनाने वाली कंपनी तैयार करना, तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और देश को क्लीन मोबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर स्थापित करना है।

सरकार का सीधे निवेश नहीं

एथर एनर्जी में निवेश को लेकर एक और अहम बात ये है कि इसमें सरकार प्रत्यक्ष रूप से पैसे नहीं लगा रही है। यह निवेश इंडिया-जापान फंड के जरिए हो रहा है। $60 करोड़ का यह फंड साल 2023 में NIIF (नेशनल इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रा फंड) और जेबीआईसी ने शुरू किया था। NIIF के जरिए भारत सरकार की इसमें 49% हिस्सेदारी है और बाकी 51% जेबीआईसी की। यह फंड क्लीन एनर्जी, सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और कम-कार्बन वाली टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने वाले बिजनेस में निवेश करने के लिए बनाया गया है। आईजेएफ आम सरकारी निवेश इकाई की बजाय एक लॉन-टर्म इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर के तौर पर काम करता है।

Ather Energy कैसे सरकार के क्राइटेरिया में फिट

आईजेएफ के निवेश के लिए एथर एनर्जी इसलिए फिट है क्योंकि विदेशों से तकनीक मंगाकर यहां असेंबलिंग करने वाली कई दूसरी कंपनियों की बजाय एथर एनर्जी ने अपनी अधिकतर तकनीक को यहीं डेवलप किया है। इसने बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, कनेक्टेड वेईकल इकोसिस्टम, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वाहन इलेक्ट्रॉनिक्स को खुद तैयार किया है। सरकार के लिए स्वदेशी तकनीकी क्षमता वाली कंपनियों को सपोर्ट करना ईवी को बढ़ावा जितना ही अहम होता जा रहा है। ईवी, बैट्री और उनसे जुड़ी टेक्नोलॉजी की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने से सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम को सपोर्ट मिलता है और अधिक वैल्यू वाली मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां भी तैयार होती हैं।

सिर्फ एक ही कंपनी में ही नहीं लग रहा पैसा

एथर एनर्जी में आईजेएफ के जरिए सरकार निवेश काफी अहम है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है क्योंकि इससे पता चलता है कि कंपनी ऐसे सेक्टर में काम कर रही है जिसे लंबे समय तक पॉलिसी सपोर्ट मिलता रहेगा। ऐसा नहीं है कि फंड सिर्फ एथर एनर्जी में ही पैसे लगा रही है बल्कि महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी और इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ी बनाने वाली कंपनी EKA मोबिलिटी में भी इसका निवेश है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के अलग-अलग सेगमेंट- जैसे तिपहिया और कमर्शियल गाड़ियों से लेकर प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर तक की कंपनियों को सपोर्ट करके यह फंड किसी एक कंपनी पर दांव लगाने की बजाय एक बड़ा ईवी इकोसिस्टम बनाने में मदद कर रही है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।