सिंगर नील यंग ने ट्रम्प की टीम पर किया केस:बिना अनुमति गाना बजाने पर मांगे ₹95 करोड़; 2020 में भी किया था मुकदमा

अमेरिकी-कनाडाई सिंगर नील यंग ने सोमवार को डोनाल्ड ट्रम्प की पॉलिटिकल एक्शन कमेटी ट्रम्प 47 कमेटी इंक. पर 10 मिलियन डॉलर यानी भारतीय रुपए में लगभग 95.10 करोड़ रुपए का मुकदमा किया है। अमेरिका के वर्जीनिया राज्य में दायर मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि 12 अक्टूबर को ओहायो के यंग्सटाउन में कमेटी ने मिडटर्म चुनावी रैली में ट्रम्प के मंच पर आने के समय उनका गाना ‘रॉकिन इन द फ्री वर्ल्ड’ बजाया। यंग का कहना है कि इस गाने का इस्तेमाल करने के लिए लाइसेंस जरूरी था। उन्होंने कमेटी को ऐसा लाइसेंस नहीं दिया और न ही देने की इच्छा जताई। यह यंग की ट्रम्प के खिलाफ इसी गाने के बिना इजाजत इस्तेमाल को लेकर दूसरी कानूनी चुनौती है। यंग ने इससे पहले 2020 में ट्रम्प पर केस किया था, जिसे बाद में सेटलमेंट से सुलझा लिया गया था। नए मुकदमे में आरोप लगाया गया कि ट्रम्प ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन करते हुए फिर से यह गाना बजाना शुरू कर दिया। गाने को लेकर नील यंग का पक्ष मुकदमे में कहा गया कि 1989 का यह गाना अमेरिकी राजनीतिक बयानों के खोखले वादों और गरीब, बेघर व भुला दिए गए लोगों की मुश्किल जिंदगी के बीच का फर्क दिखाता है। मुकदमे के मुताबिक, गाने के बोल सड़क पर दिखने वाली परेशानियों की तस्वीर पेश करते हैं। इनमें एक मां का अपने बच्चे को छोड़ना, निराशा में खोए नशे के आदी लोग और समृद्धि की छाया में जमा होता कचरा शामिल है। मुकदमे में कहा गया है कि बार-बार आने वाला कोरस ऐसी आजादी का जश्न मनाने की कड़वी विडंबना पेश करता है, जो साफ तौर पर सभी लोगों को नहीं मिली है। मुकदमे में कहा गया, “संक्षेप में, यह गाना डोनाल्ड ट्रम्प जिस चीज का प्रतिनिधित्व करते हैं, उसके बिल्कुल उलट है।” यहा कहा गया कि ट्रम्प जानते थे कि यंग ने ऐसा लाइसेंस नहीं दिया है और न ही वह इसे देने वाले हैं। यंग ने 1960 के दशक में करियर शुरू किया था यंग का जन्म 12 नवंबर, 1945 को टोरंटो में हुआ था। उन्होंने अपने करियर में लोक संगीत, रॉक और कंट्री म्यूजिक को एक अलग पहचान दी। उनके गानों में निजी जिंदगी के अनुभव और समाज से जुड़े मुद्दे नजर आते हैं। नील यंग ने 1960 के दशक में विन्निपेग से अपने संगीत करियर की शुरुआत की। शुरुआत में उन्होंने कई छोटे बैंड के साथ काम किया। बाद में वह 1966 में लॉस एंजिल्स पहुंचे। यहां उन्होंने स्टीफन स्टिल्स के साथ रॉक बैंड ‘बफेलो स्प्रिंगफील्ड’ बनाया। 1968 में बैंड से अलग होने के बाद नील यंग ने सोलो करियर शुरू किया। 1969 में उन्होंने ‘क्रेजी हॉर्स’ बैंड के साथ काम किया। इसी दौरान उनका एल्बम ‘एवरीबडी नोज दिस इज नोवेयर’ रिलीज हुआ। इसके बाद ‘आफ्टर द गोल्ड रश’ (1970) और ‘हार्वेस्ट’ (1972) जैसे एल्बम ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई। ‘हार्वेस्ट’ उनका सबसे सफल एल्बम माना जाता है। यंग ने ‘क्रॉस्बी, स्टिल्स, नैश एंड यंग’ सुपरग्रुप के साथ भी काम किया। इस ग्रुप का एल्बम ‘डेजा वू’ 1970 में रिलीज हुआ और काफी सफल रहा। उनका गीत ‘ओहायो’ 1970 में केंट स्टेट यूनिवर्सिटी में हुई गोलीबारी की घटना के बाद लिखा गया था। यंग ने संगीत के अलावा फिल्मों में भी काम किया। उन्होंने ‘बर्नार्ड शेकी’ नाम से कई फिल्मों का निर्देशन किया। उन्हें कई ग्रैमी और जूनो अवॉर्ड मिले। 1995 में उन्हें सोलो कलाकार के तौर पर रॉक एंड रोल हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। 1997 में बफेलो स्प्रिंगफील्ड के सदस्य के रूप में भी उन्हें यह सम्मान मिला।