
सोशल मीडिया के गलियारों में इन दिनों एक ही सवाल गूंज रहा है—“क्या दुनिया पर कोई बड़ा और भयानक संकट आने वाला है जिसके बारे में सरकारें आम जनता से कुछ छिपा रही हैं?”
अचानक से प्लेटफॉर्म्स पर कॉन्सपिरेसी थ्योरीज़ (Conspiracy Theories) की बाढ़ आ गई है। कोई दावा कर रहा है कि दुनिया की ताकतवर सरकारें गुप्त रूप से तीसरे विश्व युद्ध (Third World War) की तैयारी कर रही हैं, तो कोई अंदेशा जता रहा है कि एक बड़े ग्लोबल साइबर अटैक के ज़रिए पूरी दुनिया का इंटरनेट और बैंकिंग सिस्टम ठप होने वाला है।
अफवाहों का यह बाज़ार यूँ ही नहीं गर्म हुआ, बल्कि इसके पीछे दो प्रमुख देशों की सरकारों द्वारा जारी की गई आपातकालीन चेतावनियां (Emergency Warnings) हैं।
ब्रिटेन का ‘Be Ready’ कैंपेन और 1000 दिनों का अल्टीमेटम
विवाद और चर्चा की शुरुआत ब्रिटेन से हुई। ब्रिटेन के रक्षा सचिव (Defense Secretary) वेस्ट स्ट्रीटिंग ने हाल ही में नागरिकों को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की गंभीर चेतावनी दी।
- 3 दिन का स्टॉक रखने की सलाह : यूके सरकार ने ‘बी रेडी’ (Be Ready) नामक एक विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अपने घरों में कम से कम 3 दिनों के लिए भोजन, पानी, टॉर्च, कैश और अन्य आवश्यक दवाओं का स्टॉक रखें।
- पावर और इंटरनेट ब्लैकआउट का डर : नागरिकों को मानसिक रूप से तैयार रहने को कहा गया है कि वे बिना बिजली, पानी, इंटरनेट या बैंकिंग सेवाओं के 3 दिन कैसे बिताएंगे।
- 1000 दिनों की मोहलत : रक्षा सचिव ने चेतावनी दी कि दुश्मन देश 2030 तक ब्रिटेन पर हमला करने की योजना बना सकते हैं, इसलिए युद्ध की तैयारियों के लिए हमारे पास अब लगभग 1000 दिन ही बचे हैं।
- साइबर अटैक और PHP लैंग्वेज की गड़बड़ी : सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं (खराब मौसम, वाइल्डफायर) के अलावा पावर ग्रिड पर साइबर हमलों और हाल ही में PHP प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में पाई गई तकनीकी गड़बड़ियों का हवाला दिया, जिससे डिजिटल सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
हालांकि, जनता में फैलते पैनिक को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने साफ किया कि पैनिक करने की जरूरत नहीं है, यह कदम सिर्फ एहतियातन और सुरक्षात्मक है।
जापान में नई डिजास्टर प्रिवेंशन एजेंसी की घोषणा
ब्रिटेन के बाद जापान की घोषणा ने इन कॉन्सपिरेसी थ्योरीज़ को और हवा दे दी। जापान के आपदा प्रबंधन मंत्री (Disaster Management Minister) गोशी होसोनो ने घोषणा की कि सरकार आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एक नया अभियान चला रही है।

सऊदी अरब की गुप्त डिप्लोमेसी : हूतियों को हमले रोकने के लिए अरबों डॉलर की पेशकश!
इसी बीच मध्य पूर्व (Middle East) से एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इज़राइली समाचार पत्र ‘हायोम‘ (Hayom) ने खाड़ी देशों के राजनयिक सूत्रों के हवाले से एक बड़ा दावा किया है।
- तेहरान में हाई-प्रोफाइल बैठक : 26 अक्टूबर को मक्का रक्षा समझौते के तीन प्रमुख देशों—सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान—ने ईरान की राजधानी तेहरान में एक उच्च स्तरीय बैठक की।
- मजबूत प्रतिनिधिमंडल : इस बैठक में सऊदी अरब की तरफ से रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर, तुर्की के इब्राहिम कालिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियान शामिल हुए।
- पैसों से भरा बैग और शांति प्रस्ताव : दावा किया जा रहा है कि 25 अक्टूबर को जब खालिद बिन सलमान ईरान पहुंचे, तो वे हूतियों (Houthis) के साथ जारी जंग को खत्म करने और सऊदी पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए एक बड़ा शांति प्रस्ताव लेकर गए थे।
- हूतियों को वित्तीय पेशकश : रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने हूतियों को हमले रोकने और लाल सागर (Red Sea) में शांति बनाए रखने के बदले अरबों डॉलर (Billions of Dollars) देने की पेशकश की है, जिसमें ईरान मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है।
हालांकि, न तो सऊदी अरब और न ही ईरान ने इस वित्तीय लेन-देन की आधिकारिक पुष्टि की है। लेकिन ईरान के दरवाजे पर जाकर बातचीत करना यह साबित करता है कि हूतियों के लगातार हमलों से सऊदी अरब किस कदर परेशान हो चुका है और वह मध्य पूर्व में जल्द से जल्द स्थिरता चाहता है।


