राजस्थान में मेवाड़ और मारवाड़ क्षेत्र के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर करने की दिशा में मावली-मारवाड़ रेल लिंक परियोजना अहम साबित हो सकती है। इस परियोजना के पूरा होने से उदयपुर, राजसमंद और मारवाड़ क्षेत्र के बीच रेल संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है। इससे पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक परिवहन को भी फायदा मिल सकता है। परियोजना के तहत मौजूदा मीटरगेज रेल ट्रैक को ब्रॉडगेज में बदलने के साथ मारवाड़ जंक्शन तक नई रेल लाइन विकसित करने की योजना है।
हमारी सहयोगी वेबसाइट सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट के मुताबिक इस रेल कॉरिडोर को दो चरणों में विकसित किया जाना है। पहले चरण में मावली से नाथद्वारा होते हुए देवगढ़ मदारिया तक 82.54 किलोमीटर लंबे रेल सेक्शन का गेज परिवर्तन किया जाएगा। इसके लिए 969 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी जा चुकी है। वहीं दूसरे चरण में देवगढ़ मदारिया से टोडगढ़ होते हुए मारवाड़ जंक्शन तक 72 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन प्रस्तावित है। इस हिस्से के लिए रेलवे मंत्रालय ने फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) को मंजूरी दी है, लेकिन निर्माण की अंतिम स्वीकृति अभी मिलनी बाकी है।
दो चरणों में विकसित होगा मावली-मारवाड़ रेल कॉरिडोर
मावली-मारवाड़ रेल लिंक परियोजना का पहला चरण मावली-नाथद्वारा-देवगढ़ मदारिया रेल सेक्शन से जुड़ा है। इसकी कुल लंबाई 82.54 किलोमीटर है। इस हिस्से में पहले से मौजूद मीटरगेज रेल लाइन को ब्रॉडगेज में बदला जाएगा। इस काम के लिए 969 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी गई है।
गेज परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य राजसमंद क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। ब्रॉडगेज लाइन विकसित होने से इस रेल मार्ग को आधुनिक बनाने और मेवाड़ क्षेत्र में रेल संपर्क मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
परियोजना का दूसरा चरण देवगढ़ मदारिया से मारवाड़ जंक्शन के बीच प्रस्तावित है। इसके तहत टॉडगढ़ के रास्ते 72 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन विकसित करने की योजना है। रेलवे मंत्रालय ने इस सेक्शन के लिए करीब 11.75 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दी है।
हालांकि सर्वे की मंजूरी को रेल लाइन के निर्माण की अंतिम मंजूरी नहीं माना जा सकता। इस हिस्से में निर्माण कार्य शुरू करने के लिए अभी रेलवे की अंतिम स्वीकृति का इंतजार है। यानी परियोजना का पहला चरण स्वीकृत है जबकि मारवाड़ जंक्शन तक विस्तार अभी प्रस्तावित स्तर पर है।
उदयपुर से जोधपुर का सफर 7 की जगह 4 घंटे में पूरा होने का दावा
मावली-मारवाड़ रेल लिंक का एक बड़ा संभावित फायदा उदयपुर और जोधपुर के बीच कनेक्टिविटी में सुधार के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना समर्थकों का दावा है कि इस नए रेल मार्ग से दोनों शहरों के बीच रेल दूरी करीब 250 किलोमीटर तक कम हो सकती है।
इससे उदयपुर और जोधपुर के बीच रेल यात्रा का समय मौजूदा करीब सात घंटे से घटकर लगभग चार घंटे रह सकता है। हालांकि, दूरी और यात्रा समय में इतनी कमी के अनुमानों की रेलवे की ओर से स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इसे परियोजना से जुड़ा संभावित लाभ और परियोजना समर्थकों का दावा ही माना जाना चाहिए।
अगर प्रस्तावित रेल लिंक विकसित होता है तो मेवाड़ और मारवाड़ के बीच आवाजाही पहले से अधिक सुविधाजनक हो सकती है। इससे दोनों क्षेत्रों के बीच यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और माल परिवहन को भी बेहतर रेल संपर्क मिलने की संभावना है।
कुंभलगढ़, देवगढ़ और टॉडगढ़ के पर्यटन को मिल सकता है फायदा
प्रस्तावित रेल कॉरिडोर अरावली की पहाड़ियों से होकर गुजरने की योजना के तहत विकसित किया जाना है। इसके रास्ते में आने वाले पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है। इस परियोजना से कुंभलगढ़ किला, देवगढ़ और टॉडगढ़-रावली वन्यजीव अभयारण्य जैसे पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी को फायदा मिल सकता है। बेहतर रेल संपर्क होने से इन क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही आसान हो सकती है। इससे मेवाड़ और मारवाड़ के पर्यटन कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। फिलहाल इन पर्यटन स्थलों तक पहुंच में सुधार परियोजना के संभावित लाभों में शामिल है। इसका वास्तविक असर रेल लाइन के विकास और उसके संचालन के बाद ही सामने आएगा।
मार्बल और ग्रेनाइट उद्योग को भी मिल सकता है लाभ
मावली-मारवाड़ रेल लिंक केवल यात्री परिवहन के लिहाज से ही नहीं बल्कि औद्योगिक और माल ढुलाई के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। उदयपुर और राजसमंद के मार्बल तथा ग्रेनाइट उद्योग को इस रेल कॉरिडोर से बेहतर माल परिवहन के विकल्प मिल सकते हैं। रेल संपर्क मजबूत होने से इन उद्योगों की औद्योगिक केंद्रों और बाजारों तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है। इससे माल की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है। परियोजना का उद्देश्य मेवाड़ और मारवाड़ क्षेत्रों के बीच व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक परिवहन को भी बढ़ावा देना है।
आजादी से पहले का है मावली-मारवाड़ रेल संपर्क
मावली-मारवाड़ के बीच मौजूदा मीटरगेज रेल संपर्क आजादी से पहले के दौर का है। इस पुराने रेल मार्ग को ब्रॉडगेज में बदलने की योजना को राजस्थान के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में रेल कनेक्टिविटी को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मावली-मारवाड़ रेल लिंक के विस्तार की मांग लंबे समय से उठती रही है। मेवाड़ रेल विकास परिषद इस प्रस्तावित विस्तार के लिए कई वर्षों से अभियान चला रही है। परिषद की मांगों में भीम, जवाजा, बाली, टॉडगढ़ और सिरियारी जैसे क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क से जोड़ना शामिल है। इस मांग का उद्देश्य मेवाड़ और मारवाड़ के बीच रेल नेटवर्क को अधिक मजबूत बनाना है, ताकि इन क्षेत्रों के यात्रियों और कारोबारियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
अभी कहां तक पहुंचा प्रोजेक्ट?
मावली-मारवाड़ रेल लिंक परियोजना की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए इसके दोनों चरणों में अंतर करना जरूरी है। मावली-नाथद्वारा-देवगढ़ मदारिया के बीच 82.54 किलोमीटर के मौजूदा मीटरगेज सेक्शन को ब्रॉडगेज में बदलने का काम 969 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्वीकृत है। दूसरी ओर देवगढ़ मदारिया से टॉडगढ़ होते हुए मारवाड़ जंक्शन तक 72 किलोमीटर की नई रेल लाइन के लिए रेलवे मंत्रालय ने फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दी है। इस सर्वे की अनुमानित लागत करीब 11.75 करोड़ रुपये है। लेकिन इस हिस्से के निर्माण को लेकर अंतिम रेलवे मंजूरी अभी बाकी है। ऐसे में मावली से देवगढ़ मदारिया तक गेज परिवर्तन और मारवाड़ जंक्शन तक प्रस्तावित नई रेल लाइन को एक ही स्तर पर स्वीकृत परियोजना बताना सही नहीं होगा। दूसरे चरण की तकनीकी जांच और अंतिम मंजूरी के बाद ही इसके निर्माण की स्थिति स्पष्ट होगी।

