क्या है गोल्ड पावडर स्कैम? कसौटी और एसिड टेस्ट में भी फेल! जानिए कैसे आपके गहनों पर मिलाया जा रहा है चीन वाला गोल्ड पावडर

क्या है गोल्ड पावडर स्कैम? कसौटी और एसिड टेस्ट में भी फेल! जानिए कैसे आपके गहनों पर मिलाया जा रहा है चीन वाला गोल्ड पावडर

Gold adulteration chemical powder

सोने की चमक के पीछे मिलावट का एक ऐसा काला खेल चल रहा है, जिसे अत्याधुनिक मशीनें और हॉलमार्किंग भी नहीं पकड़ पा रही हैं। सराफा बाजारों में चीन से आयातित एक रहस्यमयी ‘केमिकल पाउडर’ धड़ल्ले से बिक रहा है, जिसका इस्तेमाल ज्वैलरी बनाने में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। सोने से आधे दाम में मिलने वाला यह पावडर शुद्ध सोने में इस तरह घुल जाता है कि ग्राहक जब खरीदने जाता है तो ठगा जाता है, और जब बेचने पहुंचता है तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ता है। सोना खरीदने वाले व्यापारी भी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। धनतेरस पर बड़ी मात्रा में सोने की खरीदी बिक्री होती है। ऐसे में सोना खरीदते समय लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

 

मशीनों और कसौटी को भी दे रहा चकमा

सराफा कारोबार से जुड़े जानकारों के मुताबिक, बाजार में चीनी पावडर बेचने वाले दलाल सक्रिय रूप से घूम रहे हैं। यह पावडर अलग-अलग क्वालिटी में आता है और इसे सामान्य एसिड टेस्ट, कसौटी या कैरेट मापने वाली मशीनों से पकड़ना असंभव है। हैरानी की बात यह है कि इस मिलावटी सोने की आसानी से हॉलमार्किंग भी हो जाती है, जिससे ग्राहकों को असली और नकली का फर्क पता ही नहीं चल पाता।

 

ज्वेलरी में होता है ज्यादा इस्तेमाल

सोने की गलाई करने वाले एक कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सोने में पावडर का खेल लंबे समय से चल रहा है। हालांकि 2026 में इसका उपयोग बढ़ गया है। बेसिकली पावडर एक प्रकार का केमिकल है जो सोने से आधे दाम में मिल जाता है। बड़ी संख्‍या में व्यापारी ज्वेलरी में मिलावट के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

 

ग्राहक और व्यापारी दोनों का नुकसान

सोना गलाने वाले एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस पावडर मिक्स्ड सोने (92 प्रतिशत की रकम) को जब दोबारा गलाया जाता है, तो उसमें से शुद्ध सोना केवल 85 से 88 फीसदी ही निकलता है। इसका सीधा मतलब यह है कि ग्राहक खरीदारी के समय भी ज्यादा कीमत चुका रहा है और रीसेल (बेचने) के समय उसे उसकी सही कीमत नहीं मिल रही है। हालांकि, फाइन गोल्ड (शुद्ध सोने) में इस मिलावट को फिर भी पकड़ा जा सकता है। इसमें हॉलमार्किंंग वाला सोना खरीदने वाले व्यापारियों को भी भारी नुकसान हो रहा है। 

 

क्यों बढ़ रहा है मिलावट का खेल?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह पावडर सोने में पूरी तरह मिक्स नहीं होता, इसलिए इसकी मिलावट को पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई लोग इस बढ़ते फर्जीवाड़े को ‘मेकिंग चार्ज’ की जंग से भी जोड़कर देख रहे हैं। कई ज्वैलर्स ग्राहकों से मात्र 3 फीसदी मेकिंग चार्ज लेते हैं, जबकि गहने ढालने वाले कारीगर 4 फीसदी चार्ज वसूलते हैं, जिसके चक्कर में मुनाफे के लिए इस शॉर्टकट का सहारा लिया जा रहा है।

 

एसोसिएशन सख्त, कार्रवाई की तैयारी

कारीगरों और जागरूक व्यापारियों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अब इंदौर सराफा व्यापारी एसोसिएशन ने इस अवैध धंधे के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। एसोसिएशन ने मिलावटखोर व्यापारियों और दलालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया है।