
Dhirendra Shastri Statement on Ram Krishna: बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान राम और भगवान कृष्ण के स्वरूप व हाव-भाव को लेकर की गई टिप्पणियों ने उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। आगामी चुनावी से पहले उभरे इस मुद्दे ने समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को एक तीखा राजनीतिक हथियार दे दिया है, जिससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने उत्तर प्रदेश के सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों को बचाए रखने का दोहरा संकट पैदा हो गया है।
विवाद की जड़ : क्या कहा था धीरेंद्र शास्त्री ने?
इस पूरे विवाद की शुरुआत मध्य प्रदेश के शिवपुरी में आयोजित एक राम कथा से हुई:
- राम-कृष्ण के हाव-भाव की तुलना: वायरल वीडियो में शास्त्री ने दोनों देवों के स्वरूप की तुलना करते हुए कहा कि जहाँ भगवान राम सीधे खड़े रहते थे, वहीं भगवान कृष्ण तीन स्थानों से ‘टेढ़े’ थे और गर्दन झुकाकर बाँसुरी बजाते थे। इसके बाद राम से जुड़ी टिप्पणियों का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें शास्त्री ने कहा कि राम के 5 बाप थे। ALSO READ: रामजी के 5 बाप! धीरेन्द्र शास्त्री की टिप्पणी से फिर बवाल, अखिलेश ने भी साधा निशाना
- शास्त्री की सफाई : विवाद बढ़ता देख धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां केवल एक पारंपरिक ‘भक्ति पद’ की साहित्यिक व्याख्या थीं और उन्हें संदर्भ से बाहर निकालकर दिखाया गया।
विपक्ष का तीखा हमला : “ईशनिंदा और सनातनी-विरोधी कृत्य”
विपक्षी दलों ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान को तुरंत आड़े हाथों लिया और इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया:
- अखिलश यादव (सपा अध्यक्ष) : अखिलेश ने देश भर में धीरेंद्र शास्त्री के कथा कार्यक्रमों पर तत्काल बैन लगाने और उनके सामाजिक बहिष्कार की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि “सनातनी-विरोधी तत्व अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। भगवान पर ऐसी ईशनिंदा अक्षम्य पाप है।” ALSO READ: भगवान राम और बांके बिहारी पर दिए बयान से घिरे धीरेंद्र शास्त्री, मिर्ची बाबा का तीखा हमला; जानें पूरा मामला
- तेजस्वी यादव (राजद नेता) : तेजस्वी ने हमला बोलते हुए कहा, “ये नफरत फैलाने वाले लोग पहले इंसानों को जाति के नाम पर बांटते थे, और अब भगवानों को भी आपस में बांटने में लगे हैं।”
- दिग्विजय सिंह (कांग्रेस) : मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने भी शास्त्री की बयानबाजी पर कड़ा ऐतराज जताया।
भाजपा की रक्षात्मक स्थिति और यादव वोटबैंक का गणित
विपक्ष के हमलों पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता नवीन श्रीवास्तव ने सवाल उठाया कि चुनाव आते ही अखिलेश और तेजस्वी को भगवान कृष्ण की याद क्यों आ गई? उन्होंने सपा से पूछा कि क्या वे मथुरा में ‘कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन’ का समर्थन करते हैं या नहीं? हालांकि, इस तीखी प्रतिक्रिया के पीछे भाजपा का गहरा राजनीतिक तनाव छिपा हुआ है।

भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग पर असर:
- सपा का ‘M-Y’ समीकरण: उत्तर प्रदेश में यादव समुदाय अपनी वंशावली सीधे यदुवंश से जोड़ता है। मुलायम सिंह यादव के समय से ही यह समुदाय सपा का सबसे अटूट वोट बैंक रहा है।
- भाजपा की सेंधमारी की कोशिश: भाजपा लंबे समय से गैर-यादव ओबीसी को गोलबंद करने के साथ-साथ यादवों में अपनी पैठ बनाने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को यूपी में प्रमुखता से पेश कर रही थी और मथुरा कृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा उठा रही थी।
- चुनावी आंकड़े: 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव (सपा का 32.76% वोट शेयर) और 2024 के लोकसभा चुनावों में ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रदर्शन ने दिखाया कि यादव वोट बैंक पर सपा की पकड़ अब भी मजबूत है। ऐसे में कृष्ण पर विवादित टिप्पणी से यादव वोटर भाजपा से छिटक सकते हैं।
धीरेंद्र शास्त्री का बढ़ता प्रभाव और राजनीतिक ध्रुवीकरण
मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में रोजाना लाखों श्रद्धालु आते हैं।
- वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ‘बागेश्वर धाम मेडिकल एंड साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ की आधारशिला रखी थी और शास्त्री को “छोटा भाई” कहकर संबोधित किया था।
- शुरुआत में हनुमान भक्ति और ‘दिव्य दरबार’ तक सीमित रहने वाले शास्त्री पिछले दो वर्षों में खुद को “हिंदू राष्ट्र योद्धा” के रूप में पेश कर चुके हैं।
- बुंदेलखंड, यूपी, बिहार और झारखंड में उनके विशाल जनसमर्थन को देखते हुए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही उन्हें साधने की कोशिश करते रहे हैं।
चुनाव की दहलीज पर खड़े उत्तर प्रदेश में धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणियों ने भाजपा को रक्षात्मक स्थिति में धकेल दिया है। जहां अखिलेश यादव इसे ‘यादव अस्मिता’ और ‘सनातनी पहचान’ पर हमले के रूप में भुनाने में जुटे हैं, वहीं भाजपा के लिए अपने हिंदू एकीकरण और यादव वोट बैंक साधने की रणनीति को संतुलित बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।


