जहरीली शराब से मौतों के मामले देवास से सागर तक उठे सवाल, सस्ती जहरीली शराब बन रहीं मौत की वजह, जीतू ने शाह को लिख पत्र

जहरीली शराब से मौतों के मामले देवास से सागर तक उठे सवाल, सस्ती जहरीली शराब बन रहीं मौत की वजह, जीतू ने शाह को लिख पत्र

मध्यप्रदेश इन दिनों जहरीली शराब से मौत मामले में लगातार सुर्खियों में है। पहले सागर और अब देवास में जहरीली शराब से हुई मौत की घटनाओं ने अवैध शराब की बिक्री, उसकी आपूर्ति और आबकारी विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सितंबर में सागर जिले के बंडा क्षेत्र में कई लोगों की मौत के बाद अब देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में अवैध रूप से बिक रही जहरीली शराब ने कई घरों के चिराग बुझाने के साथ मातम ला दिया है।

देवास में जहरीली शराब मौत मामले को लेकर मंगलवार को कांग्रेस ने जिला कलेक्ट्रेट का घेराव कर प्रशासन और सरकार को जमकर घेरा। वहीं घटना के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित शराब दुकान के मैनेजर सहित 10 को गिरफ्तार किया है। वही्ं प्रदेश में अवैध शराब से हो रही मौतों को लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने केंद्रीय गृहमंत्रत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। 

 

देवास में अवैध जहरीली शराब से कितनी मौतें?- देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में अवैध शराब से  27 सितंबर से 16 अक्टूबर 2026 के बीच 13 लोगों की मौत का मामला सामने आया। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 20 से अधिक लोगों की मौत का दावा किया है। परिजनों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की शराब पीने के बाद तबीयत बिगड़ी। उल्टी, चक्कर और आंखों की रोशनी प्रभावित होने जैसी शिकायतें भी सामने आईं। ग्रामीणों के मुताबिक बिंजाना और चंदाना में शराब पीने के बाद पहले लोगों की तबियत बिगड़ी फिर एक-एक कर उनकी मौत हो गई। जब चंदाना में एक साथ 4 लोगों ने शराब  पी और अगले दिन चारों की मौत हो गई। 

 

वहीं देवास जिला प्रशासन ने जहरीली शराब से सामूहिक मौतों के दावों को भ्रामक बताया। अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम और शराब के नमूनों की शुरुआती जांच में जहर की पुष्टि नहीं हुई। बाद में दो मृतकों के विसरा नमूने एफएसएल भेजे गए है। उज्जैन संभाग के आयुक्त ने मामले की विस्तृत जांच के लिए पांच सदस्यीय दल गठित किया, जिसे 15 दिनों में रिपोर्ट देने को कहा गया।

 

सागर में जहरीली शराब से मौतों का गंभीर मामला- देवास से पहले सागर जिले की बंडा तहसील में सितंबर के पहले सप्ताह में जहरीली शराब पीने के बाद बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई। मौत के आंकड़ों को लेकर विपक्ष और प्रशासन के आंकड़ों में काफी विरोधभास है। पूरे मामले में पुलिस और आबकारी विभाग ने कार्रवाई की। शराब की दुकानों से नमूने लिए गए और कई दुकानों को सील किया गया। अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया, एक अन्य अधिकारी को पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध किया गया तथा दो पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई। 

 

गुजरात मे शराब मौत का MPकनेक्शन- इस साल अगस्त में गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब से 13 मौतों का मामला सामने आया था। इसकी जांच में मध्यप्रदेश के उज्जैन और राजगढ़ से जुड़े आरोपियों तथा मुरैना के कुछ तस्करों के शामिल होने का मामला सामने आया था। 

 

सस्ती अवैध जहरीली शराब के चक्कर में जान गंवा रहे लोग?- सागर और देवास दोनों ही जिलों में जहरीली शराब से मौत के मामले की जांच में सामने आया है कि गांवों में अवैध तरीके से बिक रही सस्ती शराब लोगों के जान पर भारी पड़ रही है। देवास शराब मौत मामले में गिरफ्तार आरोपियों का उत्तर प्रदेश कनेक्शन सामने आया है। बतााया जा रहा है कि मुख्य आरोपी विनोद जायसवाल जिस पर क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री का आरोप है कि वह लंबे समय से इलाके में सक्रिय था औऱ सस्ती दर पर शराब बिक्री करता था।

इससे पहले सागर शराब कांड उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से जुड़े कथित अवैध शराब नेटवर्क की आशंका भी सामने आई, हालांकि ललितपुर पुलिस ने किसी भी तरह के शराब नेटवर्क के कनेक्शन से इंकार कर दिया। सागर शराबकांड की जांच में सामने आय़ा था कि आरोपी नकली ब्रांडेड शराब बनाकर गांवों में सस्ती दरों पर बेचते थे। 

 

दरअसल मध्यप्रदेश में देश और विदेश शराब के रेट उत्तरप्रदेश सहित अन्य सीमावर्ती राज्यों से अधिक है, इसलिए देवास और सागर शराब कांड में शराब माफियाओं के अंतरराज्यीय नेटवर्क का कनेक्शन सामने आ रहा है। मध्यप्रदेश के तुलना में उत्तर प्रदेश में शराब की कम कीमत भी प्रदेश में अवैध शराब के परिवहन और उसकी बिक्री का बड़ा कारण है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में शराब से हो रही मौतों को लेकर गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। पत्र में जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि प्रदेश मे शराफ माफियाओं का एक मजबूत नेटवर्क काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सागर मामले में जांच के दौरान अंतरराज्यीय आपूर्ति नेटवर्क की भूमिका सामने आई थी जो बताता है कि नकली शराब का कारोबार किसी गांव या दुकान तक समिति न होकर एक बड़ा नेटवर्क है और इसको धवस्त करने के लि्ए पुलिस, आबकारी और अन्य संबंधित राज्यों की एजेंसियों के बीच समन्वय की जरूरत है। जीतू पटवारी ने प्रदेश में जहरीली शराब से मौत मामले की जांच की मांग की है। 
 

सरकार के निगरानी सिस्टम पर सवाल- प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अवैध जहरीली शराब से मौत मामले में सरकारी सिस्टम पर भी कई सवाल उठ रहे है। पहला ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री और उसकी सप्लाई की निगरानी में पुलिस और आबकारी विभाग पूरी तरह फेल या अनदेखा किया जा रहा है। दूसरा शराब की लाइसेंसी दुकानों से मिले नमूनों की जांच के साथ-साथ अवैध आपूर्ति श्रृंखला की पहचान कितनी तेजी से की जा रही है? तीसरा,जब किसी क्षेत्र में एक के बाद एक मौतें होती हैं, तो चिकित्सा जांच, पोस्टमार्टम, विसरा परीक्षण और सार्वजनिक जानकारी जारी करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहती है? यह ऐसे सवाल जिनके जवाब मिलने पर ही प्रदेश में अवैध शराब की बिक्री को रोका जा सकेगा।