
महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी और उसकी सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिव सेना के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। शिंदे के बार बार दिल्ली आने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने से वैसे ही महाराष्ट्र भाजपा के कई नेता चिंतित रहते हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को भी यह चिंता घेरे रहती है कि जब इतने वर्षों तक शिव सेना में रहने के बाद बाल ठाकरे के परिवार से अलग होने और उनकी पार्टी तोड़ने में एकनाथ शिंदे को समय नहीं लगा तो वे फड़नवीस और भाजपा के साथ क्या कर सकते हैं! वैसे भी महाराष्ट्र की मराठा राजनीति में फड़नवीस फिट नहीं बैठते हैं। इसलिए भी वे अत्यधिक सावधान रहते हैं। इस बीच मराठा आरक्षण आंदोलन करने वाले मनोज जरांगे पाटिल के नए खुलासे से उनको मौका मिल गया है। जरांगे पाटिल ने एक ऑडियो क्लिप जारी किया है, जिसमें पैसे के लेन देने का आरोप है और आरोपों के केंद्र में एकनाथ शिंदे और उनकी पार्टी है।
असल में कुछ दिन पहले मनोज जरांगे पाटिल ने आरोप लगाया था कि 2024 में जब वे मराठा आरक्षण आंदोलन कर रहे थे तब उनको आरक्षण रोकने के लिए पांच सौ करोड़ रुपए का ऑफर दिया गया था। उनके हिसाब से यह प्रस्ताव एकनाथ शिंदे की ओर से आय़ा था। हालांकि मनोज जरांगे पाटिल ने कहा कि उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया था। इस खुलासे के बाद एकनाथ शिंदे की पार्टी की ओर से उनको चुनौती दी गई कि वे अपने आरोपों को प्रमाणित करें। सो, पिछले दिनों उन्होंने एक ऑडियो क्लिप जारी किया, जिसमें दो नेता आपस में बात कर रहे हैं कि आरक्षण आंदोलन को समाप्त करने या कमजोर करने के लिए पांच सौ करोड़ रुपए दिए गए। जब मनोज जरांगे पाटिल कह रहे हैं कि प्रस्ताव दिया गया था और उन्होंने पैसा नहीं लिया लेकिन ऑडियो में कहा जा रहा है कि पैसे दिए गए और श्रीकांत शिंदे ने पैसा दिया। तो सवाल है कि पैसे किसने लिए? मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। मनोज पाटिल खुल कर एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे का नाम ले रहे हैं, जो कल्याण से सांसद हैं और अभी केंद्र में मंत्री बनने के बड़े दावेदार हैं।
इसके बाद भाजपा और शिव सेना के बीच घमासान तेज हो गया है। शिव सेना के नेता रामदास कदम ने भाजपा नेताओं के ऊपर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एकनाथ शिंदे को बदनाम करने के लिए इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। पता नहीं पीछे की कहानी क्या है लेकिन इतना तय है कि अगर यह बात व्यापक रूप से मराठा समाज के लोगों तक पहुंचती है तो उसका बड़ा नुकसान शिंदे को होगा। ध्यान रहे शरद पवार अपनी लंबी राजनीतिक पारी के अंत तक पहुंच गए हैं और उनके भतीजे अजित पवार का निधन हो चुका है। ऐसे में मराठा राजनीति पर एकछत्र कब्जा बनाने का यह बिल्कुल परफेक्ट समय है। शरद पवार गुट से रोहित पवार और दूसरी ओर अजित पवार के बेटे पार्थ पवार प्रयास कर रहे हैं लेकिन दोनों अभी बिल्कुल नए हैं। ऐसे में एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे अपनी पकड़ और मजबूत कर भी सकते हैं। लेकिन अगर यह बात लोगों के बीच जाती है कि वे मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने की साजिश कर रहे थे और उसके लिए सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च कर रहे थे तो उनके लिए रास्ता मुश्किल हो जाएगा। इस एक तीर के लाभार्थी फड़नवीस हैं तो पवार परिवार भी दिख रहा है। अब देखना होगा कि जांच से कुछ पता चलता है या लीपापोती हो जाती है।

