सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार, हाल ही में बीजेपी (BJP) कार्यालय में कुछ टीएमसी (TMC) कार्यकर्ता पार्टी में शामिल होने पहुंचे थे लेकिन उन्हें हरा गुलाल लगाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) के प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम शुक्रवार को वैश्विक स्तर पर तकनीकी खराबी का शिकार हो गए। दुनियाभर के कई यूजर्स ने इन प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस करने में दिक्कत आने की शिकायत की। हालांकि थोड़ी देर में यह परेशानी हल हो गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेसबुक यूजर्स को लॉगिन या प्लेटफॉर्म खोलने पर एक एरर मैसेज दिखाई दे रहा था, जिसमें लिखा था, “Something went wrong. This may be because of a technical error that we're working to fix” यानी “कुछ गलत हो गया है। यह किसी तकनीकी समस्या के कारण हो सकता है, जिसे ठीक करने पर काम किया जा रहा है।”
वहीं, इंस्टाग्राम यूजर्स को भी इसी तरह का एरर मैसेज दिखाई दिया। मेटा के वैश्विक आउटेज के कारण लाखों यूजर्स कुछ समय तक अपने अकाउंट्स और सेवाओं का उपयोग नहीं कर सके।
तकनीकी समस्या सामने आते ही सोशल मीडिया पर #FacebookDown और #InstagramDown जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। यूजर्स ने विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर स्क्रीनशॉट साझा कर अपनी परेशानी जाहिर की। हालांकि, मेटा की ओर से शुरुआती चरण में आउटेज के सटीक कारणों को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। कंपनी ने केवल इतना कहा कि तकनीकी समस्या को दूर करने के लिए काम किया जा रहा है।
यह आउटेज ऐसे समय में आया है जब फेसबुक और इंस्टाग्राम दुनियाभर में अरबों लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में शामिल हैं। Edited by : Sudhir Sharma
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ईरान ने मीडिया को जो शर्तें लीक की हैं, उनका लिखित समझौते की असली शर्तों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने ईरान के ‘समझौता हो गया’ वाले कमजोर और बेमानी बयान को पूरी तरह सच्चाई से अलग बताया।राष्ट्रपति ट
सोशल मीडिया पर इन दिनों काफी वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें एक महिला अपने सिर पर कैमरा लगाकर घर के सारे काम कर रही है। ऐसा करने के लिए उसे हर घंटे 250 रुपये मिल रहे हैं।

Berlin – New Hindu Tempel: बर्लिन और पूरे जर्मनी में हिंदू समुदाय के लिए रविवार 7 जून का दिन, एक बहुत ही विशेष दिन था। उस दिन, जर्मनी की राजधानी बर्लिन, एक नए अपूर्व आकर्षण की धनी बन गई।
20 वर्षों से भी ज़्यादा समय की योजना और निर्माणकार्य पूरा होने के बाद, 7 जून 2026 के दिन, बर्लिन के “नोएकौएल्न” (नवकोलोन) नाम के उपनगर में, गणेश जी को समर्पित एक नए भव्य हिंदू मंदिर का— उनकी मूर्ति की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा और मंदिर की इमारत के अभिषेक के साथ— भव्य उद्घाटन हुआ।
अभिषेक समारोह के दौरान, तीन पुजारियों में से एक ने, एक ऊँचे क्रेन की सहायता से मंदिर के शिखर पर बर्लिन की स्प्रे नदी और भारत की गंगा नदी के मिश्रित पानी का जलार्पण किया। बर्लिन, जर्मनी की राजधानी होने के साथ-साथ जर्मनी का एक राज्य भी है। इसीलिए, मंदिर के उद्घाटन समारोह में बर्लिन राज्य के दो मंत्री और जर्मनी में भारत के राजदूत अजीत गुप्ते भी उपस्थित थे।
निर्माण पूरी तरह दान के पैसे से
17 मीटर से भी अधिक ऊँचाई वाला यह मंदिर अब जर्मनी में सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। उसका का निर्माण पूरी तरह दान के पैसे और लोगों द्वारा स्वैच्छिक सेवा के बल पर किया गया है। उसे बनाने वाली पंजीकृत संस्था “श्री-गणेश-हिंदू-मंदिर .V.” के प्रमुख विल्वानाथन कृष्णमूर्ति ने मीडिया को बताया कि यह “श्री गणेश हिंदू मंदिर” शनिवार से ही लोगों के लिए खुल गया: मंदिर में सभी का गर्मजोशी से स्वागत है। इस मंदिर के निर्माण की योजना 20 साल से भी पहले बनी थी और निर्माणकार्य 2010 में शुरू हुआ था। निर्माण का ख़र्च, जो लगभग 11 लाख यूरो के बराबर है (1 यूरो=111रूपये), केवल दान के ज़रिए जुटाया गया।
निर्माण कार्य में विलंब
2005 की शुरुआती योजनाओं के अनुसार, निर्माण कार्य 2007 के अंत में शुरू होना और मंदिर 2010 तक बन कर पूरा होना था। 4 नवंबर 2007 के दिन मंदिर की नींव रखने का पहला समारोह हुआ, लेकिन उसके बाद निर्माण कार्य वास्तव में शुरू नहीं हो पाया। 2010 में निर्माण की सरकारी स्वीकृति जब मिल गई, तो उसी साल सितंबर में मंदिर की नींव रखने का दूसरा समारोह हुआ।
इसके बाद, सितंबर 2011 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया, लेकिन चंदा कम मिलने के कारण ऐसा हो नहीं सका। एक वर्ष बाद, 2012 में ही “राजा गोपुरम” कहलाने वाले प्रवेश द्वार के लिए नींव और खंभे आदि खड़े किए जा सके। 2013 में निर्माण अनुमति की समय-सीमा ख़त्म होने के बाद, नई अनुमति के लिए एक नया आवेदन करना पड़ा। हालांकि, 2024 में काम पूरा होने की तारीख तय की गई थी, लेकिन उस समय तक काम पूरा नहीं हो पाया था, इसलिए अगली समय-सीमा अक्टूबर 2025 तय की गई।
यूरोप में अपनी तरह का सबसे बड़ा मंदिर
बर्लिन में बना यह भव्य मंदिर पूरे, यूरोप में अपनी तरह के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। मंदिर की 17 मीटर ऊँची सुनहरी छत, दक्षिण भारतीय कारीगरों द्वारा बनाई गई शानदार नक्काशी-भरी कलाकृति है। मंदिर की दीवारों वाले नीले रंग के बाहरी हिस्से पर सजावटी पैटर्न और देवी-देवताओं की आकृतियाँ बनी हुई हैं। पूजा-स्थल का अंदरूनी हिस्सा भी बहुत शानदार ढंग से डिज़ाइन किया गया है। प्रवेश द्वार को हाथ से पेंट की गई 250 आकृतियों से सजाया गया है। पूजा स्थल के अंदरूनी हिस्से को भी शानदार ढंग से डिज़ाइन किया गया है। इसमें गणेश जी को समर्पित मुख्य वेदी के साथ-साथ कई अन्य वेदियाँ भी हैं—जो शिव, विष्णु और दुर्गा जैसे देवी-देवताओं को समर्पित हैं—और जिनकी रक्षा रक्षकों की भव्य आकृतियाँ करती हैं। बर्लिन में यह दूसरा और पूरे यूरोप में गणेश जी को समर्पित संभवतः एकमात्र मंदिर है।
2080 तक के लिए मिली है ज़मीन
गणेश जी ऊर्जा और बुद्धिमत्ता के प्रतीक माने जाते हैं। मंदिर की प्रायोजक संस्था के प्रमुख विल्वानाथन कृष्णमूर्ति के अनुसार, श्री गणेश मंदिर लगभग 850 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला है, जबकि वर्ष 2080 तक मंदिर के लिए मिली पूरी ज़मीन लगभग 5,000 वर्ग मीटर के बराबर है। इससे पहले बर्लिन में जो एकमात्र हिंदू मंदिर था और अब भी है, वह 2013 में बना था और “श्री मयूरपति मुरुगन मंदिर” कहलाता है। वह मुख्य रूप से श्रीलंका में 1983 से 2009 तक चले “तमिल टाइगर्स” वाले गृहयुद्ध के समय, वहां से यूरोप और जर्मनी में आए तमिल शरणार्थियों का बनाया मंदिर है।

श्रीलंकाई तमिलों ने ही जर्मनी के नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया राज्य के “हाम” (Hamm) शहर में, जर्मनी में पहला हिंदू मंदिर बनाया था। दक्षिणी भारत के कांचीपुरम में स्थित कामाक्षी देवी के मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित “श्री कामाक्षी अम्पाल” नाम के इस मंदिर का उद्घाटन 7, जुलाई 2002 के दिन हुआ था। अर्किटेक्ट (वस्तुकार) थे, जर्मनी के हाइंस-राइनर आइशहोर्स्ट। हाम के तमिल-हिंदू मंदिर को पूरे यूरोप में सबसे बड़ा द्रविड़ मंदिर माना जाता है।
बर्लिन में हिदुओं की अनुमानित संख्या 45,000
किसी को भी ठीक-ठीक नहीं पता कि लगभग 40 लाख की जनसंख्या वाले बर्लिन में कितने हिंदू रहते हैं। श्री गणेश मंदिर की निर्माता संस्थ केप्रमुख विल्वानाथन कृष्णमूर्ति का अनुमान है कि बर्लिन में हिदुओं की संख्या 45,000 तक हो सकती है। हाल ही में इस संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है, जिसका मुख्य कारण भारत से आए छात्र और आईटी (IT) पेशेवर माने जाते हैं। 8 करोड़ 41 लाख की जनसंख्या वाले पूरे जर्मनी में भी अनुमानतः क़रीब केवल 2 लाख ही भारतीय रहते हैं, जिनमें से अनुमानतः1 लाख हिंदू हैं।
मंदिर के उद्घाटन समारोह के समय बताया गया कि उस के दरवाज़े रोज़ शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक सबके लिए खुले रहेंगे। सुबह और शाम की आरती में शामिल होने के लिए किसी पंजीकरण या प्रवेश फ़ीस की ज़रूरत नहीं होगी। यह मंदिर हर हिंदू परंपरा—वैष्णव, शैव, शाक्त, स्मार्त—और यहाँ आने वाले हर व्यक्ति का स्वागत करेगा: बर्लिन के परिवारों, छात्रों, अलग-अलग धर्मों के लोगों, आस-पास के कार्यालयों के कर्मचारियों तथा “ओपन डे” पर आने वाले स्कूली बच्चों की टोलियों का भी स्वागत है।
संस्कारी अनुष्ठान संस्कृत, तमिल या हिंदी में
मंदिर के पुजारी नामकरण संस्कार, स्कूल जाने की शुरुआत, शादी और गृह-प्रवेश की पूजा जैसे अवसरों के लिए उलब्ध रहेंगे। वे संस्कारी अनुष्ठान संस्कृत, तमिल या हिंदी में करवाते हैं— साथ में जर्मन या अंग्रेज़ी अनुवाद भी होता है। संस्कृत भाषा सीखने की हर हफ़्ते क्लास लगेगी। संस्कृत की पहले से कोई जानकारी होना ज़रूरी नहीं है। बच्चे और बड़े, सब साथ-साथ सीख सकते हैं। हार्मोनियम और तबले के साथ गाना- बजाना सीखने की भी सुविधा होगी। त्योहारों के दिन “अन्नदान” होगा— सभी मौजूद लोगों के लिए गर्म भोजन होगा— चाहे वे भक्त हों या अचानक आए आगंतुक।
बर्लिन का बहुचर्चित और उतना ही प्रतीक्षित मंदिर तो अंततः बन गया; उसके निर्मातओं को अब एक ऐसा “अंतर-सांस्कृतिक मिलन-केंद्र” बनाने का विचार ललचा रहा है, जिसका उद्देश्य बर्लिन की अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों के लोगों के बीच पारस्परिक संवाद को बढ़ावा देना होगा। यह एक ऐसा विचार है, जो अन्यथा अन्य धर्मों वाले लोगों और उनके धर्माधिकारियों के मन में नहीं आता। अन्य धर्मी यही मानते हैं कि केवल उनका धर्म ही सर्वश्रेष्ठ है। अतः जो उनके सहधर्मी नहीं हैं, वे उनके धर्म को अपनाएं।

AFGvsIND हिमाचल के धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम में मौसम साफ नहीं है जिससे भारत बनाम अफगानिस्तान मैच में खलल पड़ सकता है। उत्तरी भारत के कई हिस्सों में बारिश शुरु हो चुकी है और मौसम का बदलाव धर्मशाला में भी देखने को मिल सकता है क्योंकि आमतौर पर 42 फीसदी वर्षा धर्मशाला में जून के महीने में ही होती है।
यही कारण है कि कल जब कप्तान शुभमनगिल और हशमतुल्लाह शाहिदी टॉस के लिए उतरेंगे तो दोनों कप्तानों के जहन में गेंदबाजी चुनना होगा।
मौसम विभाग के अनुसार 22 सेलसियस तापमान के साथ 51 फीसदी संभावना बारिश की बनी रहेगी। हालांकि यह पूरे मैच को धोने के लिए काफी नहीं रहेगी लेकिन खिलाड़ियों को कई बार अंदर बाहर होना पड़ सकता है। अच्छी बात यह है कि 90 फीसदी बारिश दोपहर 2 से 4 के बीच होने की है तो उसके बाद फैंस मैच का लुत्फ उठा सकते हैं।
भारतीय टीम की बात करें तो टीम में कई नए चेहरे हैं। यशस्वी जायसवाल को विराट कोहली की जगह मौका मिला है। वहीं नीतिशकुमार रेड्डी और प्रिंस यादव की गेंदबाजी पर प्रबंधन की निगाहें रहेंगी। बल्लेबाजी में टीम के पास कई बड़े नाम है लेकिन रोहित शर्मा के प्रदर्शन पर सबकी निगाहें होंगी जिनका पिछला न्यूजीलैंड दौरा खास नहीं गया था। गेंदबाजी में अर्शदीप सिंह अगुआ होंगे और उनका साथ प्रसिद्ध कृष्णा को निभाना होगा।
शुभमन गिल की कप्तानी में भारत ने तीन वनडे श्रृंखला खेली हैं जिनमें से दो में उसे हार का सामना करना पड़ा था। मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ मिलकर वह इस रिकॉर्ड में सुधार करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेंगे।
गिल और रोहित के पारी की शुरुआत करने की उम्मीद है, जबकि कोहली की अनुपस्थिति में तीसरे नंबर पर ईशान किशन और यशस्वी जायसवाल में से किसी एक को उतारा जा सकता है।
वहीं अफगानिस्तान टीम की बात करें तो यह टीम समेद गेंद में उतनी कमजोर नहीं है जितनी लाल गेंद में। टीम के पास इब्राहिम जादरान और रहमतुल्लाह गुरबाज जैसे बल्लेबाज और अजमतुल्लाह उमरजाई और राशिद खान जैसे ऑरलाउंडर है। हालांकि टीम का तेज गेंदबाजी आक्रमण कमजोर दिख रहा है जो टीम को धर्मशाला के मैदान पर चुभ सकता है।चंडीगढ़ में खेले गए टेस्ट मैच में छह विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज मोहम्मद सलीम को वनडे टीम में शामिल कर लिया गया है।

टीम इस प्रकार हैं:
भारत: शुभमन गिल (कप्तान), यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, कुलदीप यादव, नितीश कुमार रेड्डी, प्रसिद्ध कृष्णा, श्रेयस अय्यर, रोहित शर्मा, हार्दिक पंड्या, वॉशिंगटन सुंदर, हर्ष दुबे, इशान किशन, अर्शदीप सिंह, गुरनूर बराड़, प्रिंस यादव।
अफगानिस्तान: हशमतुल्लाह शाहिदी (कप्तान), सेदिकुल्लाह अटल, रहमानुल्लाह गुरबाज़ (विकेटकीपर), इकराम अलिखिल (विकेटकीपर), अजमतुल्लाह उमरजई, बिलाल सामी, नांगेयालिया खरोती, फरीद अहमद मलिक, एएम ग़ज़नफ़र, मोहम्मद नबी, राशिद खान, दरविश रसूली, इब्राहिम जादरान, जिया उर रहमान शरीफी।
समय:- दोपहर 1.30 बजे
Kanpur Crime News: कानपुर के रावतपुर थाना क्षेत्र में जुआ खेलने से इन्कार करना एक युवक और उसके परिवार को भारी पड़ गया। आरोप है कि इलाके के कुछ युवकों ने पहले युवक पर जुआ खेलने का दबाव बनाया और मना करने पर उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। इतना ही नहीं, बाद में उसके पिता को भी घेरकर मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। मामले में पुलिस ने नौ नामजद समेत 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Father and Family Relationship: इस बार रविवार, 21 जून 2026 को पितृ दिवस मनाया जा रहा है। फादर्स डे एक ऐसा मौका है जब हम उस इंसान को शुक्रिया कहते हैं जो खामोशी से हमारे पूरे जीवन की नींव रखता है। अक्सर मां के प्यार और ममता पर बहुत कुछ लिखा जाता है, जो कि बिल्कुल सही भी है, लेकिन पिता का प्यार थोड़ा अलग होता है। वह अमूमन अपनी भावनाएं जताते नहीं हैं, लेकिन उनका साया जीवन का सबसे बड़ा सहारा होता है।
आखिर पिता का साया सबसे बड़ा सहारा क्यों माना जाता है? आइए इसे कुछ गहरे पहलुओं से समझते हैं:
1. सुरक्षा का मजबूत कवच
बचपन में जब पिता का हाथ थामकर हम मेले या भीड़-भाड़ वाली जगह पर चलते थे, तो एक अजीब सा सुकून रहता था कि 'अब कुछ गलत नहीं हो सकता।' पिता का होना घर में एक ऐसी सुरक्षा की भावना देता है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। दुनिया की कोई भी मुसीबत हो, पिता एक ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं ताकि आंच बच्चों तक न पहुंचे।
2. बिन कहे सब कुछ सहने की ताकत
एक पिता की सबसे बड़ी खासियत होती है उनका मौन समर्पण। अपनी खुशियों, नए कपड़ों या जरूरतों को टाल देना ताकि बच्चों की स्कूल फीस और ख्वाहिशें पूरी हो सकें। ऑफिस या काम के तनाव को घर के दरवाजे के बाहर ही छोड़ देना और अंदर आते ही मुस्कुराना। कभी यह अहसास न होने देना कि वह आर्थिक या मानसिक रूप से किसी दबाव में हैं।
3. उड़ने के लिए पंख और गिरने पर हौसला
मां जहां हमें संवारती है और संभलकर चलना सिखाती है, वहीं पिता हमें दुनिया की कड़वी सच्चाइयों का सामना करना सिखाते हैं। जब आप लाइफ में पहली बार असफल होते हैं, तो पिता वो इंसान होते हैं जो आपकी पीठ थपथपाकर कहते हैं- 'कोई बात नहीं, उठो और दोबारा कोशिश करो, मैं तुम्हारे साथ खड़ा हूं।' वह आपको रिस्क लेना सिखाते हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि गिरकर ही बच्चा मजबूत बनेगा।
4. जीवन के सबसे पहले 'रोल मॉडल'
हर बच्चे के लिए उसके पिता दुनिया के सबसे मजबूत और बुद्धिमान इंसान होते हैं। हम अनजाने में ही सही, उनके चलने, बात करने, और मुश्किल हालातों से निपटने के तरीके को कॉपी करने लगते हैं। एक पिता का अनुशासित और ईमानदार जीवन ही बच्चों के भविष्य के नैतिक मूल्यों (Values) की नींव रखता है।
5. इस फादर्स डे पर क्या करें?
पिता कभी आपसे महंगे तोहफों की उम्मीद नहीं करते। उन्हें सिर्फ आपका थोड़ा सा वक्त और सम्मान चाहिए होता है।
उनसे बात करें: आज के दिन उनके पास बैठें, उनके पुराने दिनों के किस्से सुनें।
शुक्रिया कहें: जो बातें आप रोज नहीं कह पाते, आज कह दें—'पापा, आप जो मेरे लिए करते हैं, उसके लिए थैंक यू।'
उनके चेहरे पर मुस्कान लाएं: उनकी पसंद की कोई छोटी सी चीज या उनके साथ उनकी पसंदीदा चाय/कॉफी शेयर करें।
आपके जीवन में आपके पापा का साया हमेशा एक मजबूत बरगद के पेड़ की तरह बना रहे।
फादर्स डे की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं!
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पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा सत्ता संभालने के अल्पकाल में ही स्पष्ट बदलाव दिख रहा है। ऐसा लगता है कि केवल ममता सरकार की विचारधारा और दिशा के बिल्कुल उलट शुभेंदु सरकार ने यू टर्न ही नहीं किया बल्कि सारे कील कांटों को उखाड़ते, ध्वस्त करते तीव्र गति से शासन की गाड़ी वहां पहुंच रही है जहां से बंगाल शांत और स्थिर हो सामान्य राज्य के रूप में गतिविधियों का निर्धारण करे।
शुभेंदु सरकार ने कुछ फैसले किए तथा कुछ प्रभाव में ही परिवर्तन आ गया। इनमें केवल केंद्रीय योजनाओं को लागू करना ही नहीं है। आप चाहे भाजपा के जितने आलोचक हों क्या किसी ने कल्पना की थी कि सरकार आने के हफ्ते भर के अंदर ही राज्य से टीएमसी द्वारा लगाए अवैध टोल बूथ हट जाएंगे, बैरिकेड समाप्त हो जाएंगे, हफ्ते वसूली का धंधा खत्म हो जाएगा…? यह हो गया।
ममता ने स्वयं महिलाओं की सुरक्षा के प्रति चिंता प्रकट करते हुए रात में न निकलने का आग्रह किया था। सरकार बदलते ही बंगाल अपने स्वभाव, संस्कृति और चहल-पहल में वापस दिख रहा है। महिलाएं देर रात आती-जाती दिखाई दे सकती है। सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
कोलकाता समेत कई जिलों में रात की पुलिस पेट्रोलिंग काफी बढ़ा दी गई है। आम प्रतिक्रिया देख लीजिए सोशल मीडिया से लेकर मुख्य मीडिया में लोग लिख रहे हैं कि अब सरकार बदली है ऐसा महसूस हो रहा है। बकरीद के दिन वर्षों बाद सड़कों की बजाय मैदानों और मस्जिदों में नमाज पढ़े गए।
किसी सरकार की दिशा का संकेत होता है और अगर वैचारिक और प्रशासनिक दिशा स्पष्ट हो, उनके प्रति प्रतिबद्धता और व्यवहार में प्रखरता हो तो उसका इकबाल कायम होता है। चुनाव परिणाम के तुरंत बाद ऐसा लग रहा था मानो बंगाल को संभालना कठिन होगा। कुछ ही दिनों में ऐसा लगने लगा मानो यह वो बंगाल है ही नहीं जिसे हम 4 मई के चुनाव परिणाम के पूर्व या उसके दो चार दिनों बाद तक देख रहे थे।
कोलकाता से आसनसोल तक अवैध निर्माण के विरुद्ध बुलडोजर कार्रवाई का आक्रामक हिंसक विरोध पूर्व सरकार की तस्वीर पेश कर रहा था। पत्थरबाजी भी हुई। उसके बाद क्या हुआ यह महत्वपूर्ण है। फुटेज से पत्थरबाजों और दंगाइयों के चेहरे पहचान कर कार्रवाई हो रही है तथा पुलिस ने लाउडस्पीकर में ऐलान कर दिया कि जिन लोगों ने हिंसा और तोड़फोड़ की है उनकी संपत्ति से इसकी वसूली की जाएगी।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने हिंसक प्रदर्शनकारियों और दंगाइयों के विरुद्ध यही नियम अपनाया और उसके परिणाम काफी हद तक आए। बंगाल में इसकी कल्पना ही नहीं थी जो सामने है।
भाजपा ने चुनाव अभियान में कानून और व्यवस्था कायम करने, महिला सुरक्षा, अवैध घुसपैठ रोकने, घुसपैठियों को बाहर निकालने, सीमा सुरक्षा एवं अंतरिक्ष सुरक्षा दोनों सुनिश्चित करने, तुष्टिकरण की समाप्ति एवं हिंदुओं के साथ हुए अन्याय का परिमार्जन, भ्रष्टाचार का अंत, प्रदेश को विकास एवं सांस्कृतिक गरिमा की पटरी पर वापस लाने आदि वायदे किए थे।
मुख्यमंत्री का पदभार संभालते ही शुभेन्दु ने बांग्लादेश की सीमा पर घेराबंदी के लिए सीमा सुरक्षा बल को भूमि सौंपने का आदेश दिया जिसे 45 दिनों में पूरा हो जाना है। 450 किलोमीटर ऐसे क्षेत्र हैं जहां घेरा लगाना बाकी है उसकी जमीन मिली नहीं। मिनट में यह काम हो गया। इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला नेशनल हाईवे 10 और नेशनल हाईवे 110 के सात हिस्से केंद्र सरकार को सौंपना है। इनमें से पांच चिकन नेक या सिलीगुड़ी गलियारा से गुजरते हैं।
चिकन नेक का 120 किलोमीटर इलाका पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को भारत के साथ जमीन से जोड़ता है। यह बांग्लादेश, नेपाल, भूटान तीन देशों से लगता है और चीन भी यहां से निकट है। चिकन नेक कट जाए तो पूर्वोत्तर से भारत का सीधा जमीनी संपर्क खत्म हो जाएगा।
दिल्ली दंगों के आरोपी सरजिल इमाम को उच्चतम न्यायालय ने आज तक जमानत इसीलिए नहीं दी कि उसने मुसलमानों के द्वारा चिकन नेट काट कर भारत को खंडित करने की बात की थी। संयोग से उस पूरे क्षेत्र में भारत के अंदर बंगाल और बिहार दोनों और मुसलमानों की आबादी राष्ट्रीय औसत से अधिक है तथा दूसरी और बांग्लादेश है।
मुस्लिम आबादी को भड़का कर चिकन नेक काट कर शेष पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने का विचार बांग्लादेश के पूर्व शासक मोहम्मद यूनुस से लेकर वहां जेन जी आंदोलन तथा जमात ए इस्लामी के नेताओं के सामने आए । ममता सरकार ने केंद्र के आग्रह को स्वीकार नहीं किया और इस कारण वहां रक्षा और नागरिक दोनों प्रकार के आधारभूत संरचनाओं की कमी रही।
अवैध घुसपैठ के साथ अनेक भारत विरोधी गतिविधियां, अवैध पशुओं एवं सामग्रियों की तस्करी आदि को पूरी तरह रोक पाना कठिन था। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया तथा नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड मिलकर इसका विकास करेगा। यानी आंतरिक और सीमा सुरक्षा और दूसरे रूप में कहें तो घुसपैठियों को रोकने के लिए सरकार ने पूर्ण प्रतिबद्धता दिखाई है।
कट मनी और भ्रष्टाचार तथा महिलाओं के विरुद्ध अपराध की व्यापक छानबीन और कार्रवाई के लिए दो उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त आयोगों का गठन किया जा चुका है। सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व सुपरिटेंडेंट संदीप घोष के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ईडी को मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है।
ऐसे ही आदेश अन्य मामलों में दिए जा रहे हैं जिन्हें पूर्व सरकार ने रोक कर रखा था। आप जानते हैं कि संदेशखाली से लेकर आईजी कर और यहां तक कि मुर्शिदाबाद के दंगों में महिलाओं के साथ व्यवहार बंगाल में प्रमुख मुद्दा रहा है। कट मानी और भ्रष्टाचार का अनुभव ऐसा था मानो यह सरकारी प्रक्रिया का ही अंग हो। आप देख लीजिए वही पुलिस प्रशासन और माहौल कितना बदला है।
अवैध कब्जों से मुक्ति बंगाल की ऐसी चुनौती है जिससे निपटना यानी इतिहास की धारा बदल देना होगा। एक पार्टी के लोगों का ही पूरे प्रदेश में कब्जा है। तृणमूल ने सत्ता में आते ही कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के दफ्तरों व अन्य स्थान कब्जाये, इसके साथ नेताओं ने प्रशासन की मिली भगत से सरकारी व निजी जमीन, मकान सब पर भयानक रूप से कब्जे किए।
माफिया तंत्र भूमि का उत्पन्न हुआ जिसने न जाने कितने लोगों को स्थान छोड़ने को विवश कर दिया। इसी तरह धर्म स्थलों पर कब्जे हुए या उन्हें जबरन बंद रखने को भी विवश किया गया। लगातार उन अवैध कब्जों के विरुद्ध कार्रवाई हो रही है। कांग्रेस और वामपंथी दलों तक के दफ्तर मुक्त कर भाजपा के लोगों ने कई जगह सौंप दिया। कुछ डर से ही छोड़ कर भाग गए। कई धर्मस्थल तो जनता ने हीं मुक्त करा लिए।
वास्तव में शुभेंदु सरकार ने भाजपा की विचारधारा को सत्ता नीति में अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है। सड़कों पर नमाज पढ़ने का अंत करने के लिए लगातार कार्रवाई हो रही है। वंदे मातरम गायन अनिवार्य कर दिया गया। राज्य के इमामों, मुअज्जिनों और पुजारियों को दिया जाने वाला सरकारी भत्ता (मानदेय) 1 जून से समाप्त करने का आदेश जारी किया गया है।
सरकार का एक बड़ा फैसला अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण को 17% से घटाकर 7% करना तथा इसे केवल 66 हिंदू जातियों तक ही सीमित रखना है। पिछड़ी जाति की सूची में से मुसलमान की जातियों को पूरी तरह हटा दिया। ममता बनर्जी ने 2024 में 71 जातियों को पिछड़ी जाति में शामिल किया था जिनमें 65 मुस्लिम समुदाय के थे। ममता बनर्जी ने मुसलमानों को ज्यादा से ज्यादा पिछड़ी जाति का आरक्षण देने के लिए ही श्रेणी ए बनाकर 10% आरक्षण घोषित किया था। इसके पहले पिछड़े वर्ग के लिए 7% आरक्षण था।
साफ था कि केवल वोट बैंक की दृष्टि से मुसलमानों को पिछड़ी जाति में शामिल कर अतिरिक्त आरक्षण का अनुपात लाया गया। इस तरह शुभेंदु सरकार ने कम समय में ही त्वरित गति से अपने कदमों द्वारा यह स्थापित कर दिया कि राज्य किसी मजहब या पंथ विशेष या पार्टी नेताओं या समर्थकों लिए नहीं बल्कि सबके हित में काम करेगा।
खजाने का धन किसी पंथ के तुष्टिकरण के लिए नहीं बल्कि उपयुक्त पात्रों के कल्याण पर खर्च होगा, शासन कानून और विधान के अनुसार चलेगा, प्राथमिकता आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा तथा विकास होगा एवं पहले जो निहित स्वार्थी तत्व इसके रास्ते में आए, सत्ता का दुरुपयोग किया उन सबके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)

टेस्ट के फैब फोर बल्लेबाजों में से एक केन विलियमसन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। इस समय वह कीवी टेस्ट टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर है। पहले टेस्ट में उनका बल्ला नहीं चल पाया था और न्यूजीलैंड को बड़ी हार का सामाना करना पड़ा था।तत्काल प्रभाव से लिए गए इस निर्णय का मतलब यह है कि वह दूसरे टेस्ट में शामिल नहीं होंगे।विराट कोहली की तरह ही केन विलियमसन भी दस हजार टेस्ट रनों के मुहाने पर खड़े थे लेकिन उन्होंने इससे पहले ही कोहली की तरह ही बल्ला टांग दिया।
विलियमसन ने न्यूजीलैंड क्रिकेट द्वारा जारी बयान में कहा ,‘‘ मैने इस पर काफी सोचा और पिछले कुछ दिन से लग रहा था कि यह सही समय है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिये मेरे भीतर हमेशा मजबूत इच्छाशक्ति और ललक रही है और मुझे इस बात में गर्व है कि न्यूजीलैंड के लिये हर मैच में मैने अपना सब कुछ दिया है।’’ न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा ,‘‘ हमारे महानतम खिलाड़ियों में से एक विदा हो रहा है। केन विलियमसन ने त्वरित प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का फैसला किया है।’’
केन विलियमसन ने न्यूजीलैंड के लिए बतौर कप्तान विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल जीता जो इस सदी की न्यूजीलैंड का दूसरा आईसीसी खिताब है।साल 2019 में केन विलियमसन अपनी टीम को एकदिवसीय विश्वकप जिताने के भी बेहद नजदीक आ गए थे लेकिन उस दिन फाइनल मैच और सुपर ओवर दोनों टाई हो गया और विश्वकप पर इंग्लैंड का कब्जा हो गया।
“It's a team I love and it's so dear to my heart”
Thank you for the memories, Kane pic.twitter.com/u1qBOMEfzy
— BLACKCAPS (@BLACKCAPS) June 12, 2026
करियर की बात करें तो उनके 9515 टेस्ट रन हैं, 7526 एकदिवसीय रन हैं और 2572 टी-20 अंतरराष्ट्रीय रन हैं। उन्होंने 2016 से 2024 के बीच एक सुनहरे दौर में तीनों प्रारूपों में न्यूज़ीलैंड का नेतृत्व किया। उनकी कप्तानी में टीम ने दो ICC विश्व कप फ़ाइनल और तीन सेमीफ़ाइनल खेले, जबकि 2021 में पहला आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का ख़िताब जीता। विलियमसन ने साल 2010 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था और पिछले साल नवंबर में उन्होंने टी20 क्रिकेट को अलविदा कहा था। उन्होंने न्यूज़ीलैंड के लिए 378 मैचों में रिकॉर्ड 19,346 रन बनाए, जिसमें 48 शतक और छह दोहरे शतक शामिल हैं। इस संन्यास के बाद विलियमसन अब इंग्लैंड के ख़िलाफ़ जारी मौजूदा टेस्ट सीरीज़ के बाक़ी मैचों में हिस्सा नहीं लेंगे।

