
Ahmedabad Serial Blasts : साल 2008 के दहला देने वाले अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश पारित किया है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को प्रतिबंधित संगठन इंडियन मुजाहिदीन (IM) के एक दोषी की मौत की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और निचली अदालत का पूरा रिकॉर्ड भी तलब किया है। ALSO READ: SIR प्रक्रिया पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से पूछा- बिना सुनवाई के मतदाता सूची से कैसे हटा दिया नाम?
किसकी याचिका पर हुई सुनवाई?
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दोषी अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरलेवी की याचिका पर यह निर्देश जारी किया है। बावा ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें निचली अदालत द्वारा उसे सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा गया था।
हाईकोर्ट ने बरकरार रखी थी 38 दोषियों की फांसी
इससे पहले 7 जुलाई को गुजरात हाईकोर्ट ने इस बहुचर्चित आतंकी मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के फरवरी 2022 के फैसले पर मुहर लगाई थी। हाईकोर्ट ने बड़े पैमाने पर हुई मौतों, खौफनाक साजिश रचने और आतंक फैलाने का दोषी मानते हुए 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। कोर्ट ने कहा था कि आतंकवादियों के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट और ट्रेनिंग कैंप जैसी गतिविधियों में इन सभी की सक्रिय भूमिका साबित हो चुकी है। ALSO READ: चुनाव आयोग का यू-टर्न: विरोध के बाद फॉर्म 6 से हटाई गई SIR की अनिवार्य घोषणा
क्या था 2008 का वह खौफनाक मामला?
26 जुलाई, 2008 को अहमदाबाद के अलग-अलग इलाकों में महज 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन भीषण धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। आतंकवादियों ने उन अस्पतालों को भी अपने हमलों की चपेट में लिया था जहाँ घायलों को इलाज के लिए लाया जा रहा था। भारत के इतिहास में चिकित्सा केंद्रों को निशाना बनाए जाने की यह पहली बड़ी घटनाओं में से एक थी।
मुआवजे और मुकदमों का ब्योरा
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए कुल 35 अलग-अलग पुलिस मामलों (अहमदाबाद धमाकों की 20 एफआईआर और सूरत में बरामद अनफटे बमों की 15 एफआईआर) को आपस में जोड़ा गया था, जिसमें कुल 78 लोगों पर मुकदमा चला था। विशेष अदालत ने इनमें से 49 लोगों को दोषी करार दिया था। इसके अलावा, अदालत ने मुआवजे का निर्देश देते हुए कहा था कि सरकार मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 5-5 लाख रुपये का मुआवजा दे।


