
Varanasi Air Show 2026: गंगा के पावन तट पर अद्भुत रोमांच और भारतीय वायुसेना की अदम्य शक्ति का प्रदर्शन। भारतीय वायुसेना दिवस की 94वीं वर्षगांठ का समापन समारोह वाराणसी के प्रसिद्ध नमो घाट और पवित्र गंगा नदी के गगन में एक यादगार उत्सव बन गया। करीब 100 विमानों की हुंकार गंगा के ऊपर नीले आसमान में भारतीय वायुसेना की अग्रिम पंक्ति के लगभग 100 छोटे-बड़े लड़ाकू, परिवहन और बहुउद्देशीय विमानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 3 दिनों तक चले इस बहुप्रतीक्षित एयर शो ‘विंग्स ओवर गंगा’ ने न केवल काशीवासियों का दिल जीता, बल्कि भारतीय वायुसेना के शौर्य और पराक्रम की एक नई कहानी लिखी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वाराणसी में एयर शो में वायुसेना के विमानों का शौर्य देखा, जिसमें सुखोई, राफेल जैसे विमानों की गर्जना काशी के आसमान में गूंजी। इस दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य मंत्री भी मौजूद रहे। भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में वाराणसी के नमो घाट और गंगा नदी के ऊपर तीन दिवसीय ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो का आयोजन किया गया था, जिसका समापन आज हुआ।
इस शो में राफेल, सुखोई-30, तेजस, जगुआर, मिराज-2000 और मिग-29 समेत कुल करीब 100 विमानों ने हिस्सा लिया। इसमें 52 लड़ाकू विमान, 12 परिवहन/कार्गो विमान और 32 हेलीकॉप्टर शामिल थे। सारंग हेलीकॉप्टरटीम ने गंगा के ऊपर आसमान में तिरंगा बनाया। कमांडोज ने नमो घाट के पास हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे क्रूज पर उतरकर और वापस चढ़कर कौशल दिखाया। सुखोई और राफेल ने हवा में रोमांचक कलाबाजियां दिखाईं।
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गगनदूतों का महासंगम
करीब 100 विमानों की हुंकार गंगा के ऊपर नीले आसमान में भारतीय वायुसेना की अग्रिम पंक्ति के लगभग 100 छोटे-बड़े लड़ाकू, परिवहन और बहुउद्देशीय विमानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। राफेल, सुखोई-30MKI, स्वदेशी तेजस, जगुआर, मिराज-2000 और मिग-29 जैसे अग्रिम पंक्ति के घातक जेट्स ने अपनी बेजोड़ गति से हर किसी को हैरान किया।
आकाश में उकेरा राष्ट्रगौरव
सारंग टीम का तिरंगा इस एयर शो का सबसे भावुक और गौरवपूर्ण क्षण वह था जब वायुसेना की मशहूर ‘सारंग’ हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम ने गंगा नदी के ठीक ऊपर आसमान में धुएं से विशाल तिरंगा बनाया। जब गगन में केसरिया, सफेद और हरे रंग की छटा बिखरी, तो नमो घाट पर मौजूद हजारों दर्शकों की तालियों और ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।
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जल और नभ का अद्भुत तालमेल
गरुड़ कमांडोज का हैरतअंगेज करतब वायुसेना के विशेष बल यानी ‘गरुड़ कमांडोज’ ने सामरिक कौशल और सटीकता की एक मिसाल पेश की। नमो घाट के पास, उड़ते हुए हेलीकॉप्टर से लटकती रस्सियों के सहारे कमांडोज तेज गति से नीचे गंगा में तैर रहे क्रूज पर उतरे और कुछ ही क्षणों में पुनः रस्सी के सहारे वापस ऊपर हेलीकॉप्टर में चढ़ गए। इस ‘फास्ट-रोपिंग’ तकनीक ने यह साबित कर दिया कि भारतीय वायुसेना किसी भी जल-थल-नभ चुनौती से निपटने के लिए हर पल मुस्तैद है।
अद्भुत रोमांच और अदम्य शक्ति का प्रदर्शन
राफेल और सुखोई की गर्जना समारोह के अंतिम चरण में राफेल और सुखोई-30 जैसे अति-आधुनिक लड़ाकू विमानों ने अपनी गति और चपलता से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गंगा के ऊपर हवा में तेजी से गोते लगाना, 360-डिग्री वर्टिकल रोल करना और ध्वनि की गति को चुनौती देते हुए कलाबाजियां दिखाना- इन गर्जते सुपरसोनिक जेट्स के हर एक मूव ने अद्भुत रोमांच और अदम्य शक्ति का प्रदर्शन किया।
भारी-भरकम और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मालवाहक विमानों ने वायुसेना की लॉजिस्टिक ताकत का परिचय दिया। विभिन्न श्रेणी के बहुउपयोगी हेलीकॉप्टरों ने कम ऊंचाई पर उड़ते हुए अपनी परिचालन क्षमता दिखाई। काशी की पावन आध्यात्मिक पृष्ठभूमि और गंगा की लहरों के बीच ‘विंग्स ओवर गंगा’ का यह समापन केवल एक शो नहीं, बल्कि भारत की वायु शक्ति, स्वदेशी तकनीक और हमारे जांबाज पायलटों के अदम्य साहस का एक शानदार विजयघोष बन गया।


