योगी सरकार में जल संरक्षण बना जन आंदोलन, यूपी ने हासिल किया संयुक्त राष्ट्र का छठवां सतत विकास लक्ष्य

Yogi government water conservation: कभी जल संकट और गिरते भूजल स्तर की चुनौती से जूझने वाला उत्तर प्रदेश आज जल संरक्षण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया गया। इसी क्रम में यूपी, संयुक्त राष्ट्र के छठवें सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-6) को हासिल कर चुका है। यूपी में जल दोहन की दर 2017 के 71.26 प्रतिशत से घटकर 70 प्रतिशत हो गई है, जो कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य का मानक है। यह उपलब्धि जल संरक्षण के लिए सम्मलित प्रयासों से मिली है।

 

भूजल गर्भ विभाग निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि भूजल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, आधुनिक तकनीक के सम्मलित प्रयासों ने प्रदेश को जल सरंक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धियां दिलाई हैं। प्रदेश सरकार और विभाग के प्रयासों का सबसे बड़ा परिणाम भूजल पुनर्भरण में वृद्धि के रूप में सामने आया है। वर्ष 2017 में प्रदेश का वार्षिक भूजल रिचार्ज 69.91 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) था, जो वर्ष 2025 तक बढ़कर 73.39 बीसीएम हो गया। वहीं भूजल दोहन की दर 71.26 प्रतिशत से घटकर 70 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिससे संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-6) को प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश सफल रहा।

प्रदेश में अतिदोहित विकासखंड़ों की संख्या हुई कम

उन्होंने बताया कि प्रदेश में जल संरक्षण अभियानों का असर अतिदोहित क्षेत्रों में भी दिखाई पड़ा। वर्ष 2017 में प्रदेश में 82 अतिदोहित विकासखंड थे, जिनकी संख्या घटकर 44 रह गई। वहीं सुरक्षित श्रेणी के विकासखंडों की संख्या 540 से बढ़कर 563 हो गई। यह परिवर्तन वैज्ञानिक भूजल प्रबंधन व योजनाबद्ध कार्यों की वजह से संभव हो पाया।

अभियान बना भूजल रिचार्ज की ताकत

'कैच द रेन' अभियान के तहत वर्ष 2021 से 2025 के बीच 3.39 लाख वर्षा जल संचयन एवं जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गईं, 1.34 लाख पारंपरिक जल निकायों का पुनर्जीवन किया गया, 14.38 लाख जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्य हुए। साथ ही 1.33 लाख भूजल पुनर्भरण एवं पुनः उपयोग से जुड़ी संरचनाएं विकसित की गईं। इन प्रयासों ने वर्षा जल संचयन व भूजल रिचार्ज को नई गति दी।

2 मीटर तक बढ़ा भूजल स्तर

डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अटल भूजल योजना ने भी सकारात्मक बदलाव में अहम भूमिका निभाई। 26 विकासखंडों में ग्राम पंचायत आधारित वाटर सिक्योरिटी प्लान लागू किए गए, जिसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्र अतिदोहित या सेमी-क्रिटिकल श्रेणी से सुरक्षित श्रेणी की ओर बढ़े। एक स्वतंत्र अध्ययन में 550 ग्राम पंचायतों में से 303 पंचायतों में भूजल स्तर में 0.5 से 2 मीटर तक सुधार दर्ज किया गया।

 

रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग से लाभ

योगी सरकार ने रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग को सरकारी एवं अर्धसरकारी भवनों पर भी व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया। प्रदेश में 1,05,593 उपयुक्त भवनों की पहचान की गई, जिनमें से 35,206 भवनों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। भूगर्भ जल विभाग द्वारा 227 भवनों पर प्रणाली स्थापना से प्रतिवर्ष लगभग 4252.80 लाख लीटर संभावित भूजल पुनर्भरण क्षमता भी विकसित की गई है।

करोड़ों लीटर भूजल रिचार्ज क्षमता बढ़ी

योगी सरकार में लगभग सभी विभागों ने जल संरक्षण अभियान को प्राथमिकता में शामिल किया। इसके तहत पिछले कुछ वर्षों में लघु सिंचाई विभाग ने 6,627 चेकडैम का निर्माण किया, जिनकी भंडारण क्षमता 14 हजार करोड़ लीटर व भूजल रिचार्ज क्षमता 10 हजार करोड़ लीटर प्रतिवर्ष है। इसके साथ ही 1,417 तालाबों का जीर्णोद्धार किया, जिसकी भूजल रिचार्ज क्षमता 1,400 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष है। वहीं 6,800 से अधिक भवनों पर रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित की।

 

ग्राम्य विकास विभाग ने लगभग 19,974 अमृत सरोवर विकसित किए। कृषि विभाग ने 37,273 खेत तालाबों का निर्माण कराया। इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता और कृषि उत्पादकता दोनों में सुधार हुआ। यह सभी प्रयास यूपी में भूजल रिचार्ज और जल संरक्षण के लिए काफी अहम साबित हो रहे हैं।

यूपी में जीरो पॉवर्टी अभियान के पात्र परिवारों का बने अंत्योदय कार्ड : CM योगी

Yogi Government Zero Poverty Campaign: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की छठी बैठक में प्रदेश में संचालित प्रमुख आधारभूत संरचना, औद्योगिक विकास, निवेश, जनकल्याण और सेवा वितरण से जुड़ी परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने जीरो पॉवर्टी अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिए कि ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की विशेष टीम गठित कर पात्र परिवारों का अंत्योदय कार्ड बनवाया जाए और उन्हें आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास सहित सभी पात्र योजनाओं से चरणबद्ध रूप से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का समग्र लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचना चाहिए।

 

बैठक में बताया गया कि जीरो पॉवर्टी अभियान के तहत 12.50 लाख परिवारों का सर्वेक्षण किया गया है। इनमें लगभग 9 लाख परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र पाए गए हैं, जबकि लगभग 5 लाख परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाभान्वित किया जाना है। इसके अतिरिक्त 6.67 लाख परिवारों के पास अभी आयुष्मान कार्ड उपलब्ध नहीं हैं। इनमें से लगभग 5 लाख लोगों का भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकरण हो चुका है, जबकि शेष पात्र परिवारों का पंजीकरण कराया जा रहा है। साथ ही 10.60 लाख परिवारों के एक सदस्य को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 

बैठक में बताया गया कि प्रदेश की प्रमुख एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 88.45 प्रतिशत, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 72.71 प्रतिशत, आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 63 प्रतिशत तथा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 59.35 प्रतिशत भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने मेरठ-हरिद्वार, विंध्य, विंध्य-पूर्वांचल तथा नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे सहित सभी प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित जिलाधिकारियों को 31 जुलाई तक भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

उन्होंने कहा कि भूमि संबंधी विषयों में संवाद सीधे भूमिस्वामियों से स्थापित किया जाए। बैठक में लखनऊ नाइट सफारी परियोजना की समीक्षा करते हुए बताया गया कि 15 जुलाई को उच्चतम न्यायालय से इसके क्रियान्वयन की अनुमति मिल चुकी है। मुख्यमंत्री ने सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर परियोजना को समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

 

ग्रेटर नोएडा में विकसित हो रहे मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब एवं मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब की समीक्षा के दौरान बैठक में बताया गया कि 323 हेक्टेयर में से 301 हेक्टेयर भूमि प्राप्त हो चुकी है। लॉजिस्टिक पार्क के लिए पांच कंपनियों ने पंजीकरण कराया है और आवंटन प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने परियोजना की सभी औपचारिकताएं समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए। औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधनों को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए।

 

लखनऊ में विकसित किए जा रहे टेक्सटाइल पार्क की प्रगति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि परियोजना की आधारभूत संरचना तेजी से विकसित हो रही है। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों में तेजी बनाए रखते हुए इसे प्रदेश के वस्त्र एवं परिधान उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। बैठक में उन्नाव की एक्वा ब्रिज परियोजना तथा कानपुर के बिनगवां स्थित 40 एमएलडी तृतीयक उपचार संयंत्र से पनकी ताप विद्युत संयंत्र को जलापूर्ति उपलब्ध कराने वाली परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने लंबित तकनीकी एवं प्रशासनिक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर दोनों परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधारभूत संरचना के विकास के साथ जनसुरक्षा से जुड़े मानकों का कठोर अनुपालन भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी शासकीय एवं निजी मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों, जिला चिकित्सालयों तथा होटलों में वैध फायर एनओसी की समीक्षा करते हुए जहां आवश्यकता हो वहां तत्काल कार्रवाई कर अग्नि सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

बैठक में लखनऊ नगर निगम क्षेत्र में सीवर लाइन एवं मैनहोल के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइनों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से ऐसे सभी स्थलों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

प्रदेश की विद्युत वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी विद्युत फीडरों का विस्तृत विश्लेषण कर बिजली आपूर्ति, राजस्व वसूली, हानि-लाभ तथा ओवरलोड की स्थिति के आधार पर सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने तकनीकी दक्षता, वित्तीय अनुशासन और उपभोक्ता सुविधा को समान प्राथमिकता देने पर जोर दिया। बैठक में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) में भूमि अधिग्रहण की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड में औद्योगिक विकास की गति बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रशासनिक निर्णयों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।

 

डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड के उपयोग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस निधि का उपयोग स्थानीय आवश्यकताओं और जनहित के कार्यों में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता के साथ किया जाए। सांसद निधि एवं विधायक निधि से स्वीकृत विकास परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तावित कार्य स्थानीय आवश्यकताओं से सीधे जुड़े होते हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों को इन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए।

 

'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण एवं सूक्ष्म सिंचाई को कृषि विकास की रणनीति का अभिन्न हिस्सा बनाने पर बल दिया तथा किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ने के लिए समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए। ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और डिजिटल संसाधनों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने इस कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

YEIDA Master Plan: जेवर एयरपोर्ट से सीधे जुड़ेगा हाथरस का नया 10000 एकड़ का इंडस्ट्रियल हब, हींग से EV तक सबको बूस्ट, देखें पूरी डिटेल

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाथरस को बड़ा औद्योगिक और रोजगार केंद्र बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। योगी सरकार, हाथरस को इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के साथ हजारों रोजगार पैदा करने वाला डेस्टिनेशन बनाने की योजना पर काम कर रही है। यमुना एक्सप्रेसवे के फेज-2 विकास के तहत ‘महायोजना/मास्टर प्लान 2041’ के अंतर्गत ‘हाथरस अर्बन सेंटर’ को एक हाईटेक औद्योगिक और आवासीय सैटेलाइट टाउन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

बता दें कि, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की मास्टर प्लान 2041 योजना के तहत हाथरस में करीब 10 हजार एकड़ में एक आधुनिक ग्रीनफील्ड अर्बन सेंटर विकसित किया जाएगा। बता दें कि, यह परियोजना जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ी होगी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उद्योगों व रोजगार को नई रफ्तार देगी।

50 से ज्यादा गांवों में विकसित होगी नई सिटी

बता दें कि, यह हाईटेक सिटी हाथरस और सासनी तहसील के 50 से अधिक गांवों में लगभग 4,000 हेक्टेयर (करीब 10 हजार एकड़) क्षेत्र में विकसित की जाएगी। यह अलीगढ़, मथुरा और आगरा के साथ विकसित किए जा रहे चार प्रमुख शहरी केंद्रों में से एक होगी। योजना का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए जीआईएस तकनीक की मदद ली जा रही है। इसके लिए आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूरे क्षेत्र का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हरियाली और खुले स्थानों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे।

उद्योग और रहने की सभी सुविधाएं होंगी

यह परियोजना एक आधुनिक औद्योगिक और आवासीय शहर के रूप में विकसित होगी। इसमें उद्योग, आवास, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और ग्रीन जोन के लिए अलग-अलग क्षेत्र बनाए जाएंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे और कई प्रमुख राजमार्गों से अच्छी कनेक्टिविटी होने के कारण यह इलाका उद्योग लगाने के लिए आकर्षक केंद्र बनेगा। इसे आगरा के सैटेलाइट टाउन के रूप में भी विकसित किया जाएगा, जिससे आगरा पर बढ़ता औद्योगिक दबाव कम हो सके।

हींग, गुलाल और EV उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

बता दें कि, हाथरस पहले से ही 10 हजार से अधिक MSE इकाइयों का केंद्र है। नई परियोजना से यहां के स्थानीय उद्योगों को और मजबूती मिलेगी। ‘एक जिला-एक उत्पाद (ODOP)’ योजना के तहत हाथरस की प्रसिद्ध हींग और गुलाल बनाने वाले कारोबारियों को आधुनिक पैकेजिंग और निर्यात की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, होजरी, कांच के मोती, पीतल के आभूषण, मशीन टूल्स और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के पुर्जों के लिए विशेष औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। आगे चलकर मेडिकल उपकरण, सर्जिकल डिवाइस और पावर ग्रिड मशीनरी जैसे आधुनिक उद्योगों को भी यहां लाने की योजना है।

डीपीआर और जमीन अधिग्रहण का काम शुरू

प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। परियोजना पूरी होने के बाद बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे और हाथरस पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल हो जाएगा। इसी दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस दौरे में 548 करोड़ रुपये से अधिक की 143 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। साथ ही मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों को घरों की चाबियां भी सौंपीं।